
जुलाई के शुरुआत में ही शनि देव नक्षत्र परिवर्तन करेंगे। 2 जुलाई 2026 को सुबह 8 बजकर 22 मिनट पर शनि देव रेवती नक्षत्र के दूसरे पद में गोचर करेंगे। ज्योतिषों के अनुसार, शनि गोचर अत्यंत ही प्रभावी और महत्वपूर्ण घटना होती है। शनि का नक्षत्र परिवर्तन इन राशियों के मुश्किलों भरा रहेगा। इन 4 राशि के जातकों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। तो चलिए जानते हैं कि किन राशियों को 2 जुलाई से सावधान रहने की जरूरत है।
1. मेष राशि
शनि का नक्षत्र परिवर्तन मेष राशि वालों के लिए कई चुनौतियां लेकर आएगा। आर्थिक स्थिति डगमगा सकती है। धन हानि की प्रबल संभावना है इसलिए इस समय निवेश करने से बचें। इसके अलावा बजट बनाकर खर्च करें वरना पानी की तरह पैसे बह सकते हैं। मानसिक तनाव भी हो सकता है। तो मेष राशि के जातक इस समय अधिक सावधानी बरतें।
2. सिंह राशि
शनि का नक्षत्र गोचर सिंह राशि वालों के लिए अच्छा नहीं रहेगा। नौकरी पेशा लोगों को कार्यस्थल पर साथी कर्मचारियों के साथ बहस हो सकती है। इसके अलावा काम का दबाव भी रहेगा। करियर में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इस समय आपको अपने गुस्से और वाणी पर कंट्रोल रखना होगा। कारोबार में घाटा देखने को मिलेगा, जिससे आर्थिक हानि हो सकती है।
3. वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि वालों पर शनि नक्षत्र परिवर्तन का नकारात्मक असर देखने को मिलेगा। आपका मानसिक तनाव बढ़ सकता है। पैसों के मामले में किसी पर भी भरोसा न करें वरना भारी धन हानि हो सकती है। इस समय उधार देने और निवेश करने से भी बचें। धन हानि की संभावना है इसलिए सर्तक रहें।
4. कुंभ राशि
कुंभ राशि के स्वामी शनि देव है लेकिन इन पर भी शनि नक्षत्र गोचर का प्रभाव देखने को मिलेगा। इनके खर्चों में बढ़ोतरी हो सकती है। इस राशि के कारोबारी कोई भी डील फाइनल करने से पहले अच्छे से सोच-विचार कर लें। किसी से वाद-विवाद हो सकता है इसलिए बहस करने से बचें।
शनि देव को प्रसन्न करने के उपाय
- शनिवार के दिन शनि मंदिर जाकर शनि देव को सरसों तेल और तिल अर्पित करें।
- प्रतिदिन या हर शनिवार ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें।
- शनि देव के प्रकोप से बचने के लिए हनुमान जी की आराधना करें। मंगलवार और शनिवार को बजरंगबली की पूजा के साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- शनिवार के दिन पीपल पेड़ में जल अर्पित करें और शाम के समय सरसों तेल का दीया जलाएं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
