Category: India

  • पैसे चुराती थी नौकरानी, लेकिन लड़ाई होती थी जेलर और पत्नी के बीच… झांसी का मामला चर्चा में..

    पैसे चुराती थी नौकरानी, लेकिन लड़ाई होती थी जेलर और पत्नी के बीच… झांसी का मामला चर्चा में..

    पैसे चुराती थी नौकरानी, लेकिन लड़ाई होती थी जेलर और पत्नी के बीच… झांसी का मामला चर्चा में..

    कभी पर्स से कुछ हजार रुपये कम मिलते, कभी बैग से नोट गायब हो जाते. घर में किसी बाहरी शख्स का आना-जाना नहीं था, इसलिए चोरी का शक भी किसी पर नहीं गया. उल्टा, पैसों को लेकर पति-पत्नी के बीच ही बहस होने लगी. लेकिन जब अलमारी से एक साथ लाखों रुपये और जेवर गायब हुए, तब कहानी ने ऐसा मोड़ लिया कि शक सीधे उस महिला पर गया, जो पिछले छह महीने से उसी घर में खाना बना रही थी.

    यह मामला उत्तर प्रदेश के झांसी का है. यहां जिला कारागार के जेलर के सरकारी आवास में हुई लाखों की चोरी का पुलिस ने खुलासा कर दिया है. पुलिस का कहना है कि चोरी किसी बाहर से आए चोर ने नहीं, बल्कि घर की नौकरानी ने अपने बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर की थी.

    दरअसल, झांसी जिला कारागार में तैनात जेलर अंजनी कुमार गुप्ता अपनी पत्नी उमा गुप्ता के साथ सरकारी आवास में रहते हैं. पिछले करीब छह महीने से मिथलेश नाम की महिला उनके घर में खाना बनाने और साफ-सफाई का काम कर रही थी. उमा गुप्ता ने पुलिस को बताया कि करीब तीन महीनों से घर से नकदी धीरे-धीरे गायब हो रही थी.

    कभी उनके पति के पर्स से पैसे कम मिलते, तो कभी उनके बैग से. शुरुआत में किसी को चोरी का अंदेशा नहीं हुआ. दोनों को लगता था कि शायद दूसरे ने पैसे निकाल लिए होंगे. इसी बात पर कई बार आपस में कहासुनी भी हुई.

    मुंबई से लौटीं तो अलमारी खाली मिली

    26 जून को उमा गुप्ता अपनी बहन के गृह प्रवेश कार्यक्रम में शामिल होने मुंबई गई थीं. 1 जुलाई को जब वह वापस लौटीं और अलमारी खोली, तो उसमें रखे करीब 6 लाख रुपये कैश और सोने-चांदी के कीमती जेवर गायब थे.

    अब सवाल था कि घर में आया कौन था? परिवार के मुताबिक, उनकी गैरमौजूदगी में घर पर सिर्फ नौकरानी आती थी. यहीं से शक की सुई मिथलेश की ओर घूम गई. शिकायत मिलते ही नवाबाद थाना पुलिस जांच में जुट गई. पुलिस का दावा है कि पूछताछ और मिले साक्ष्यों के आधार पर नौकरानी मिथलेश और उसके बॉयफ्रेंड अमित को गिरफ्तार कर लिया गया. जांच में सामने आया कि दोनों ने मिलकर चोरी की प्लानिंग की थी और चोरी का माल ठिकाने लगाने की तैयारी कर रहे थे.

    पुलिस का कहना है कि मिथलेश ने पहले इस परिवार का भरोसा जीता. फिर वह धीरे-धीरे घर से थोड़ी-थोड़ी नकदी निकालती रही, ताकि किसी को शक न हो. जब कई महीनों तक चोरी पकड़ में नहीं आई, तो उसने अलमारी में रखी बड़ी रकम और जेवर भी निकाल लिए. जांच के मुताबिक, चोरी का सामान उसने अपने बॉयफ्रेंड अमित को दे दिया, ताकि उसे कहीं और छिपाया जा सके. फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चोरी की बाकी रकम और जेवर कहां हैं और क्या इस वारदात में कोई तीसरा व्यक्ति भी शामिल था.

  • बेड छोड़ खटिया या जमीन पर सोना चाहिए? जानिए कमर, रीढ़ और नींद पर क्या पड़ता है असर..

    बेड छोड़ खटिया या जमीन पर सोना चाहिए? जानिए कमर, रीढ़ और नींद पर क्या पड़ता है असर..

    बेड छोड़ खटिया या जमीन पर सोना चाहिए? जानिए कमर, रीढ़ और नींद पर क्या पड़ता है असर..

    भारतीय गांवों में वर्षों से खटिया (चारपाई) पर सोने की परंपरा रही है। आज भी कई लोग मानते हैं कि खटिया पर सोना आरामदायक होता है और इससे शरीर को कई लाभ मिलते हैं। वहीं कुछ लोग जमीन पर सोने को भी स्वास्थ्य के लिए बेहतर बताते हैं। लेकिन क्या ये सभी दावे वैज्ञानिक रूप से सही हैं? आइए जानते हैं।

    खटिया पर सोने के संभावित फायदे

    1. हवा का बेहतर संचार

    रस्सी वाली खटिया के नीचे और ऊपर दोनों तरफ से हवा का प्रवाह होता है, जिससे गर्म मौसम में अपेक्षाकृत ठंडक महसूस हो सकती है।

    2. सफाई में सुविधा

    खटिया हल्की होने पर उसे आसानी से हटाकर नीचे की सफाई की जा सकती है, जिससे धूल जमा होने की संभावना कम रहती है।

    3. ग्रामीण क्षेत्रों में किफायती विकल्प

    चारपाई कम लागत में तैयार हो जाती है और वर्षों तक उपयोग की जा सकती है।

    4. आराम का अनुभव

    अच्छी तरह बुनी हुई खटिया कई लोगों को आरामदायक लगती है। हालांकि यह व्यक्ति की पसंद और शरीर की जरूरतों पर निर्भर करता है।

    क्या खटिया कमर दर्द से बचाती है?

    ऐसा कोई मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि केवल खटिया पर सोने से कमर दर्द या जोड़ों का दर्द हमेशा ठीक हो जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, नींद के लिए सबसे महत्वपूर्ण है—

    • गद्दे या सतह का उचित सपोर्ट
    • सही सोने की मुद्रा
    • व्यक्ति की शारीरिक स्थिति

    यदि खटिया बहुत ज्यादा ढीली हो गई है, तो इससे कुछ लोगों में कमर दर्द बढ़ भी सकता है।

    क्या जमीन पर सोना फायदेमंद है?

    कुछ लोगों को सख्त सतह पर सोने से आराम महसूस हो सकता है, लेकिन यह सभी के लिए उपयुक्त नहीं होता।

    जमीन पर सोना—

    • कुछ लोगों में पीठ को बेहतर सपोर्ट दे सकता है।
    • लेकिन बुजुर्गों, गठिया के मरीजों, गर्भवती महिलाओं या हड्डियों की समस्या वाले लोगों के लिए असुविधाजनक हो सकता है।

    किन दावों के वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं?

    इन दावों के समर्थन में पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं—

    • खटिया पर सोने से सभी कमर दर्द खत्म हो जाते हैं।
    • इससे पाचन अपने आप बेहतर हो जाता है।
    • केवल जमीन पर सोने से नींद की हर समस्या ठीक हो जाती है।
    • खटिया पर सोने से अधिकांश बीमारियां दूर हो जाती हैं।

    अच्छी नींद के लिए क्या करें?

    • रोज एक ही समय पर सोएं और उठें।
    • साफ और आरामदायक बिस्तर का उपयोग करें।
    • कमरे का तापमान आरामदायक रखें।
    • सोने से पहले मोबाइल और स्क्रीन का उपयोग कम करें।
    • नियमित व्यायाम और संतुलित आहार अपनाएं।

    निष्कर्ष

    खटिया भारतीय जीवनशैली का एक पारंपरिक और उपयोगी हिस्सा रही है। यह गर्म मौसम में आरामदायक और किफायती विकल्प हो सकती है। वहीं जमीन पर सोना कुछ लोगों के लिए आरामदायक हो सकता है, लेकिन यह सभी के लिए उपयुक्त नहीं है। यदि आपको लगातार कमर दर्द, गर्दन दर्द या नींद से जुड़ी समस्या है, तो चिकित्सक या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेना सबसे बेहतर रहेगा।

  • शादी के बाद खुली असली पहचान, इंस्टाग्राम से शुरू हुई कहानी का रेलवे ट्रैक पर हुआ दर्दनाक अंत..

    शादी के बाद खुली असली पहचान, इंस्टाग्राम से शुरू हुई कहानी का रेलवे ट्रैक पर हुआ दर्दनाक अंत..

    शादी के बाद खुली असली पहचान, इंस्टाग्राम से शुरू हुई कहानी का रेलवे ट्रैक पर हुआ दर्दनाक अंत..

    इंस्टाग्राम पर लड़की बनकर युवक को जाल में फंसाया, शादी भी की; जब खुली सच्चाई तो रेलवे ट्रैक पर लिख दिया खौफनाक अंत!

    गुजरात के राजकोट में एक सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा हुआ है जहां इंस्टाग्राम पर लड़की बनकर युवक से दोस्ती की, प्यार के जाल में फंसाया और शादी करके महिला के कपड़ों में उसके साथ रहने लगा. जब युवक को पता चला कि असल में उसकी पत्नी एक समलैंगिक युवक है तो दोनों के बीच आपसी विवाद ने हिंसा का रूप ले लिया. गुस्साए पति ने पत्नी के भेस में छिपे बैठे युवक को रेलवे ट्रैक पर बुलाया और बेरहमी से हत्या कर दी. एक तरफ पुलिस ने राज्य के एक और बड़े हत्याकांड का खुलासा किया है तो वहीं युवक ने अपनी गिरफ्तारी के बाद कानून के समक्ष अपनी आपबीती के बड़े खुलासे किए हैं.

    सोशल मीडिया पर हुई थी दोनों की मुलाकात

    पुलिस की पूछताछ में हत्या के आरोपी 20 वर्षीय पीयूष ने खुलासा किया उसकी मुलाकात चंदन से इंस्टाग्राम पर निशा और फेसबुक पर पूनम नाम की आईडी के जरिए हुई थी. जहां दोनों की दोस्ती हुई. चंदन ने लड़की बनकर पीयूष का भरोसा जीता और जल्दी रिश्ता प्यार में बदल गया.  दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं लेकिन धार्मिक मान्यता का हवाला देकर चंदन ने पीयूष के साथ संबंध बनाने से मना कर दिया. पीयूष ने साफ दिल समझकर निशा के भेष में छिपे चंदन से शादी कर ली और दोनों एक साथ रहने लगे.

    शेविंग करने देखा तो उड़े होश

    पुलिस दिए बयान में पीयूष ने बताया कि दोनों ने काफी लंबा वक्त एक साथ गुजारा, लेकिन एक दिन चंदन को शेविंग करते देख लिया था जिसके बाद चंदन के समलैंगिक होने का पर्दाफाश हो गया. पीयूष को पता चला कि चंदन को पुरुषों में ज्यादा रुचि थी जिसके चलते उसने पूरा खेल खेला. बस, इसी वक्त से दोनों के बीच मतभेद रहने लगा. दोनों के बीच आए दिन झगड़ा और विवाद होता. पीयूष ने बताया कि हैदराबाद से यूपी, राजस्थान और गुजरात…जहां-जहां वो नौकरी करने जाता वहां-वहां चंदन पहुंच जाता था.

    रेलवे ट्रैक के पास बेरहमी से कर डाली हत्या

    आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, 21 जून को एक बार फिर फैक्ट्री में काम के दौरान चंदन पीयूष से मिलने आया और दोनों के बीच झगड़ा होने लगे. जिसके बाद पीयूष चंदन को बहला-फुसलाकर रेलवे ट्रैक पर ले गया और वहां पत्थर से कुचलकर चंदन की हत्या कर दी. चंदन के शरीर और सिर पर गहरी चोटों के निशान मिले. पीयूष अंजान बनकर घटनास्थल से सीधा फैक्ट्री पहुंचा और मामला ठंडे बस्ते में चला गया.

    लाश मिलने पर हुआ खुलासा

    हत्या ते 4 दिन बाद, 25 जून को जब रेलवे फाटक के पास महिला के कपड़ों में एक सड़ी-गली लाश मिलने की सूचना मिली तो मामला आकस्मिक मौत का लगा. लेकिन पोस्टमार्टम ने सारे राज़ खोल दिए. महिला के भेष में चंदन के शव, सिर और शरीर पर गहरी चोटों के निशान मिले. पुलिस को मामला संदिग्ध लगा और आसपास के सीसीटीवी खंगाले गए. स्थानीय पुलिस ने ह्यूमल इंटेलिजेंस और टेक्निकल सर्विलांस की मदद ली. उत्तर प्रदेश में छिपे बैठे 20 साल के पीयूष कुमार खरवार के घर पुलिस ने दस्तक दी. 

    पीयूष ने कबूला जुर्म

    पुलिस की पूछताछ के बाद पीयूष ने कथित तौर पर अपना जुर्म कबूला और सोशल मीडिया से शुरू हुई पूरी दांस्ता सुनाई. फिलहाल, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS)की धारा 103 (1) के तहत 20 वर्षीय पीयूष कुमार खरवार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया और मामले की जांच की जा रही है.

  • जोमैटो डिलीवरी पार्टनर की मजबूरी सुन भावुक हुआ ग्राहक, तुरंत बुक कर दी फ्लाइट टिकट..

    जोमैटो डिलीवरी पार्टनर की मजबूरी सुन भावुक हुआ ग्राहक, तुरंत बुक कर दी फ्लाइट टिकट..

    एक ग्राहक ने मां की गंभीर हालत से परेशान जोमैटो डिलीवरी पार्टनर के लिए 4 हजार रुपये का हवाई टिकट बुक कराया. यह मदद समय पर बेटे को मां तक पहुंचाने में काम आई और सोशल मीडिया पर खूब सराही गई.

    जोमैटो डिलीवरी पार्टनर की मजबूरी सुन भावुक हुआ ग्राहक, तुरंत बुक कर दी फ्लाइट टिकट..

     कभी-कभी इंसानियत का सबसे बड़ा परिचय किसी बड़ी दौलत से नहीं, बल्कि सही समय पर बढ़ाए गए एक छोटे से हाथ से मिलता है. ऐसा ही एक भावुक मामला सामने आया, जहां एक जोमैटो डिलीवरी पार्टनर अपनी मां की गंभीर हालत को लेकर परेशान था. उसी दौरान एक ग्राहक ने उसकी परेशानी समझी और बिना देर किए उसके लिए करीब 4 हजार रुपये का हवाई टिकट बुक कर दिया. यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हजारों लोगों का दिल जीत रही है.

    इस घटना को एक्स यूजर अंकित पांडे ने साझा किया. उन्होंने बताया कि डिलीवरी पार्टनर पहले भी कई बार उनके घर आ चुका था, इसलिए वह उसे पहचानते थे. खाना देने के बाद डिलीवरी पार्टनर ने झिझकते हुए एक गिलास पानी मांगा. अंकित ने उसे अंदर बुलाया. तभी उन्होंने देखा कि उसकी आंखें लाल थीं और वह काफी परेशान दिखाई दे रहा था.

    मां की हालत सुनकर लिया बड़ा फैसला

    बातचीत के दौरान डिलीवरी पार्टनर ने बताया कि सुबह उसकी मां सीढ़ियों से गिर गई थीं और आईसीयू में भर्ती हैं. उसके पास घर जाने के लिए सिर्फ रात की ट्रेन थी, जिससे पहुंचने में करीब 30 घंटे लगते. उसे डर था कि शायद वह समय पर मां से नहीं मिल पाएगा. यह सुनकर अंकित ने पहले उसे अपने साथ खाना खिलाया और फिर इंटरनेट पर फ्लाइट खोजनी शुरू कर दी.

      4 हजार रुपये का टिकट कराया बुक

      अंकित को करीब 4 हजार रुपये का हवाई टिकट मिला और उन्होंने तुरंत उसे बुक कर दिया. जब डिलीवरी पार्टनर ने कहा कि वह पहले कभी हवाई अड्डे नहीं गया, तो अंकित ने भरोसा दिलाया कि उनका एक दोस्त वहां उसकी मदद करेगा. कुछ घंटों बाद वह सुरक्षित अपने घर पहुंच गया और अपनी मां से मिल सका.

      अगले दिन आई खुशखबरी

      अगली सुबह डिलीवरी पार्टनर का फोन आया. उसने बताया कि डॉक्टरों के अनुसार उसकी मां अब खतरे से बाहर हैं और कुछ दिनों में अस्पताल से घर लौट सकती हैं. उसने टिकट पर खर्च हुए पूरे 4 हजार रुपये वापस भी भेज दिए. हालांकि अंकित ने वह रकम फिर लौटा दी और कहा कि इसका इस्तेमाल मां के इलाज और अस्पताल के खर्च में किया जाए.

      सोशल मीडिया पर मिली जमकर सराहना

      अंकित ने अपनी पोस्ट में लिखा कि किसी की जिंदगी बदलने के लिए हमेशा बड़ी रकम की जरूरत नहीं होती. कई बार एक गिलास पानी, एक वक्त का खाना और घर पहुंचने का एक टिकट ही किसी के लिए सबसे बड़ी उम्मीद बन जाता है. यह कहानी वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने अंकित की जमकर तारीफ की और इसे इंसानियत की मिसाल बताया.

    • ड्राइविंग के दौरान ट्रैफिक पुलिस ने रोका? जानिए क्या वह आपकी कार की चाबी ले सकती

      ड्राइविंग के दौरान ट्रैफिक पुलिस ने रोका? जानिए क्या वह आपकी कार की चाबी ले सकती

      आपकी कार की चाबी जब्त कर सकती है‌ ट्रैफिक पुलिस? जानिए क्या है कानून

      ड्राइविंग के दौरान ट्रैफिक पुलिस ने रोका? जानिए क्या वह आपकी कार की चाबी ले सकती

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      Can Constable Take Your Car Keys : आपकी गाड़ी की चाबी क्या ट्रैफिक पुलिस चेकिंग के दौरान निकाल सकती है? इस आर्टिकल में जानिए मोटर व्हीकल एक्ट का असली कानून, कांस्टेबल के अधिकार और अपने लीगल राइट्स एकदम आसान भाषा में।

      Can Constable Take Your Car Keys : सड़कों पर गाड़ी चलाते समय हमारा सामना कभी-न-कभी ट्रैफिक पुलिस से हो ही जाता है। कई बार ऐसा देखा गया है कि चालान काटने के चक्कर में पुलिस वाले आपकी तरफ झपटा मारकर गाड़ी की चाबी निकाल लेते हैं। उसके बाद मामला थोड़ा गंभीर हो जाता है।

      लोगों के दिमाग में यह सवाल जरूर आता है क्या ऐसे ट्रैफिक पुलिस हमारे गाड़ी से चाबी निकाल सकता है। ऐसे में आज हम बेहद आसान शब्दों में जानतें हैं कि ऐसा कोई नियम है या पुलिस मनमानी करती है।

      ट्रैफिक पुलिस को गाड़ी की चाबी निकालने का अधिकार नहीं

      बता दें, भारतीय मोटर वाहन अधिनियम के किसी भी क्लॉज या धारा में ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी या कांस्टेबल को गाड़ी की चाबी निकालने या उसे जब्त करने का अधिकार नहीं है। पुलिस का काम नियमों का उल्लंघन होने पर गाड़ी का चालान काटना, दस्तावेज चेक करना या अधिक गंभीर मामला होने पर गाड़ी को जब्त करना है। मगर, सड़क पर जबरन चाबी छीनना गैर-कानूनी है। कोई अधिकारी ऐसा करता है तो उसके ऊपर कार्रवाई की जा सकती है।

      चाबी निकालने पर क्या करें?

      कोई ट्रैफिक पुलिस कर्मी आपके साथ ऐसा करता है तो सबसे पहले शांत रहें। उनसे बहस या हाथापाई नहीं करें। तुरंत अपने फोन से उस घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर लें। उसके तुरंत बाद उस पुलिस कर्मी का नाम और उसकी नेम प्लेट पर दिख रहा बैच नंबर नोट करें। आप इस वीडियो और सबूत के साथ पास के पुलिस स्टेशन या ट्रैफिक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत कर सकते हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई की जाती है।

    • ‘स्टूपिड बर्ड’ कहलाने वाला अफ्रीका का शिकारी पक्षी, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान..

      ‘स्टूपिड बर्ड’ कहलाने वाला अफ्रीका का शिकारी पक्षी, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान..

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      दुनिया में ऐसे कई जीव मौजूद हैं, जिन्हें देखकर लोग हैरान रह जाते हैं। कुछ अपनी सुंदरता से आकर्षित करते हैं, तो कुछ का डरावना रूप लोगों को उनसे दूर रहने पर मजबूर कर देता है। इन्हीं में एक बेहद अनोखा पक्षी है, जिसका नाम शूबिल हैं, इसका चेहरा और विशाल चोंच इसे किसी डरावनी फिल्म के जीव जैसा बना देते हैं, लेकिन इसकी असली कहानी इससे भी ज्यादा रोचक है। हैरानी की बात यह है कि इतना खतरनाक दिखने वाला पक्षी कई जगहों पर “स्टूपिड बर्ड” के नाम से भी जाना जाता है।

      जूते जैसी दिखने वाली विशाल चोंच

      शूबिल अफ्रीका के दलदली और नम इलाकों में पाया जाता है। खासतौर पर यह दक्षिण सूडान, युगांडा, इथियोपिया और जाम्बिया जैसे देशों के वेटलैंड क्षेत्रों में देखा जाता है। पहली नजर में लोग इसे सारस या बगुले की प्रजाति समझ लेते हैं, लेकिन वैज्ञानिक इसे पेलिकन परिवार के अधिक करीब मानते हैं। इस पक्षी की सबसे खास पहचान इसकी बड़ी और मजबूत चोंच है, जो आकार में जूते जैसी दिखाई देती है। इसी वजह से इसका नाम “शूबिल” पड़ा। इसकी चोंच लगभग एक फुट लंबी और काफी चौड़ी होती है, जिससे यह अपने शिकार को मजबूती से पकड़ लेता है।

      शांत दिखने वाला लेकिन खतरनाक शिकारी

      हालांकि शूबिल अक्सर शांत और स्थिर दिखाई देता है, लेकिन यह बेहद चालाक शिकारी माना जाता है। इसका भोजन मुख्य रूप से मछलियां, सांप, ईल और छोटे जलीय जीव होते हैं। कई बार यह छोटे मगरमच्छों और मॉनिटर लिजर्ड का भी शिकार कर लेता है। शिकार करने का इसका तरीका बेहद दिलचस्प होता है। यह घंटों तक पानी के किनारे बिना हिले खड़ा रह सकता है। जैसे ही कोई जीव इसकी पहुंच में आता है, यह अचानक तेज हमला कर उसे पकड़ लेता है। इसकी इसी तकनीक को वैज्ञानिक “कोलैप्सिंग अटैक” कहते हैं।

      आखिर क्यों कहा जाता है “स्टूपिड बर्ड”?

      इतनी ताकत और शानदार शिकार क्षमता होने के बावजूद शूबिल को “स्टूपिड बर्ड” कहा जाता है। माना जाता है कि कई बार यह बहुत धीमी प्रतिक्रिया देता है। कभी-कभी इसके सामने भोजन होने के बावजूद यह लंबे समय तक स्थिर खड़ा रहता है, मानो फैसला ही न कर पा रहा हो कि शिकार करना है या नहीं। इसके अलावा, इंसानों के करीब आने पर यह अपने पंखों को अजीब अंदाज में हिलाता है। कुछ विशेषज्ञ इसे इसके अभिवादन करने का तरीका मानते हैं। यही व्यवहार लोगों को इसे अलग और थोड़ा अजीब पक्षी मानने पर मजबूर करता है।

      तेजी से घट रही है संख्या

      प्राकृतिक आवास खत्म होने और अवैध तस्करी के कारण शूबिल की संख्या लगातार कम होती जा रही है। अंतरराष्ट्रीय संरक्षण संगठनों के अनुसार दुनिया में अब इनकी संख्या बेहद सीमित रह गई है। यही वजह है कि इसे संरक्षण सूची में शामिल किया गया है। कुछ देशों में लोग इसे शौक और प्रतिष्ठा के प्रतीक के रूप में पालते भी हैं। दुर्लभ होने के कारण काले बाजार में इसकी कीमत हजारों डॉलर तक पहुंच जाती है।

    • भारत के शहरों जैसे नाम, लेकिन देश है दूसरा! जानिए कहां बसे हैं आगरा-लखनऊ.?

      भारत के शहरों जैसे नाम, लेकिन देश है दूसरा! जानिए कहां बसे हैं आगरा-लखनऊ.?

      अगर आप दिल्ली-कोलकाता का नाम सुनेंगे, तो आपको लगेगा कि ये तो भारत के शहर हैं. आगरा, लखनऊ, मेरठ आदि भी भारत में मौजूद हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के अलावा एक ऐसा देश भी है, जहां ये सारे शहर आपको मिल जाएंगे. सोशल मीडिया पर मेलबर्न की सड़कों पर लगे बोर्ड्स देख हर भारतीय हैरान है.

      भारत के शहरों जैसे नाम, लेकिन देश है दूसरा! जानिए कहां बसे हैं आगरा-लखनऊ.?

      अगर आप दिल्ली-कोलकाता का नाम सुनेंगे, तो आपको लगेगा कि ये तो भारत के शहर हैं. आगरा, लखनऊ, मेरठ आदि भी भारत में मौजूद हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के अलावा एक ऐसा देश भी है, जहां ये सारे शहर आपको मिल जाएंगे. सोशल मीडिया पर मेलबर्न की सड़कों पर लगे बोर्ड्स देख हर भारतीय हैरान है.

      ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर में भारतीय शहरों के नाम वाली कई सड़कें, सबर्ब्स और जगहें मौजूद हैं. दिल्ली रोड, कोलकाता स्ट्रीट, आगरा एवेन्यू, लखनऊ लेन, मेरठ क्रिसेंट जैसी जगहों के नाम भारतीयों को चौंकाते हैं. सोशल मीडिया पर इन बोर्ड्स की तस्वीरें वायरल हो रही हैं. इन नामों को देखकर कई भारतियों को जो वहां बसे हैं, उन्हें घर जैसा महसूस होता है.

      क्यों पड़े भारतीय नाम?
      मेलबर्न और आसपास के इलाकों में 19वीं और 20वीं सदी में ब्रिटिश काल के दौरान कई जगहों का नामकरण भारतीय शहरों के नाम पर किया गया था. ऑस्ट्रेलिया में ब्रिटिश सेना के कई सैनिक भारत में तैनात रहे थे. उन्होंने अपनी यादों में इन नामों को रखा था. कुछ जगहों का नामकरण भारतीय मूल के प्रवासियों या व्यापारिक संबंधों के कारण भी हुआ. आज मेलबर्न में भारतीय समुदाय काफी बड़ा है. ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के लाखों लोग रहते हैं. वे इन नामों को देखकर सांस्कृतिक जुड़ाव महसूस करते हैं. मेलबर्न के विभिन्न इलाकों में घूमने वाले भारतीय पर्यटक और छात्र इन बोर्ड्स की तस्वीरें खींचकर पोस्ट करते हैं. एक यूजर ने लिखा, “आगरा तो भारत में है, यहां आगरा रोड देखकर लगा जैसे टाइम मशीन में आ गया.” दूसरे ने कहा, “लखनऊ का स्वाद याद आ गया.”

      दोनों देशों का गहरा संबंध
      भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक, आर्थिक और शैक्षिक संबंध मजबूत हैं. ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा है. मेलबर्न विश्वविद्यालय जैसे संस्थान भारतीय छात्रों से भरे रहते हैं. क्रिकेट, फूड और बॉलीवुड के जरिए भी कनेक्शन बढ़ा है. भारतीय रेस्टोरेंट, फेस्टिवल और दीवाली-होली के आयोजन मेलबर्न को भारत जैसा बना देते हैं.

    • बेड के पास रखी दवाई कहीं बढ़ा तो नहीं रही परेशानी? जानें वास्तु में क्यों सिरहाने मेडिसिन रखने की है मनाही..

      बेड के पास रखी दवाई कहीं बढ़ा तो नहीं रही परेशानी? जानें वास्तु में क्यों सिरहाने मेडिसिन रखने की है मनाही..

      बेड के पास रखी दवाई कहीं बढ़ा तो नहीं रही परेशानी? जानें वास्तु में क्यों सिरहाने मेडिसिन रखने की है मनाही..

      दवाइयां हमारी रोजमर्रा की जरूरतों का हिस्सा हैं। अक्सर लोग सुविधा के लिए इन्हें ऐसी जगह रख देते हैं, जहां जरूरत पड़ने पर तुरंत मिल जाएं। खासकर रात में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां लोग अपने बिस्तर या सिरहाने के पास रख लेते हैं। हालांकि, वास्तु शास्त्र में दवाइयों को रखने की जगह को लेकर कुछ मान्यताएं बताई गई हैं। वास्तु अनुसार, सही स्थान पर रखी गई चीजें घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करती हैं । जानिए कहां दवाइयां रखना चाहिए और कहां नहीं।

      सिरहाने रखने की क्यों है मनाही?

      कई लोग रात में जरूरत पड़ने की वजह से दवाइयों को अपने बिस्तर के पास या तकिए के नीचे रख लेते हैं। लेकिन वास्तु मान्यताओं के अनुसार ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता। कहा जाता है कि दवाइयां बीमारी से जुड़ी वस्तु होती हैं, इसलिए इन्हें सोने की जगह के आसपास रखने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है। इससे मानसिक तनाव, बेचैनी और चिंता जैसी परेशानियां बढ़ने की मान्यता है।

      रसोई में न रखें दवाइयां

      वास्तु शास्त्र में रसोई को घर का महत्वपूर्ण और पवित्र स्थान माना गया है, क्योंकि यहीं भोजन तैयार होता है। इसलिए यहां दवाइयां रखना उचित नहीं माना जाता। मान्यता है कि इससे घर के स्वास्थ्य और सुख-शांति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

      पूजा स्थल से रखें दूर

      पूजा घर को सकारात्मक ऊर्जा का स्थान माना जाता है। ऐसे में दवाइयों को पूजा घर या उसके आसपास रखने से बचने की सलाह दी जाती है। इन्हें किसी साफ और व्यवस्थित अलमारी में रखना बेहतर माना जाता है।

      धन रखने वाली जगह पर न रखें

      वास्तु मान्यताओं के अनुसार जिस स्थान पर पैसे, गहने या अन्य कीमती चीजें रखी जाती हैं, वहां दवाइयां रखना शुभ नहीं माना जाता। कहा जाता है कि इससे आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं और अनावश्यक खर्च की स्थिति बन सकती है।

      दवाई रखने की सही जगह

      दवाइयों को घर में ऐसी जगह रखना चाहिए, जहां साफ-सफाई बनी रहे और जरूरत के समय आसानी से मिल जाएं। व्यवस्थित तरीके से रखी गई दवाइयां न केवल घर में सुविधा बनाए रखती हैं, बल्कि सामान को सही तरीके से रखने की आदत भी विकसित करती हैं।

      (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

    • फिल्मों जैसा स्टंट पड़ा महंगा! कोबरा के जहर ने पति-पत्नी दोनों को पहुंचाया वेंटिलेटर पर..

      फिल्मों जैसा स्टंट पड़ा महंगा! कोबरा के जहर ने पति-पत्नी दोनों को पहुंचाया वेंटिलेटर पर..

      फिल्मों जैसा स्टंट पड़ा महंगा! कोबरा के जहर ने पति-पत्नी दोनों को पहुंचाया वेंटिलेटर पर..

      पति-पत्नी का रिश्ता अक्सर मुश्किल वक्त में सबसे बड़ी ताकत बन जाता है. जब किसी अपने की जान पर बन आए, तो इंसान बिना सोचे-समझे उसे बचाने की हर संभव कोशिश करता है. लेकिन कई बार भावनाओं में उठाया गया एक कदम खुद की जान को भी खतरे में डाल देता है.

      चीन के युन्नान प्रांत से सामने आई एक ऐसी ही घटना इन दिनों चर्चा में है. इसमें बताया जा रहा है कि खेत में काम कर रहे एक किसान को कोबरा ने काट लिया. पति की हालत बिगड़ती देख उसकी पत्नी घबरा गई और उसने वही तरीका अपनाया, जो उसने फिल्मों और टीवी सीरियल्स में देखा था. उसने जख्म पर मुंह लगाकर जहर चूसने की कोशिश शुरू कर दी. लेकिन कुछ घंटों बाद उसकी भी तबीयत बिगड़ने लगी और आखिरकार उसे भी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.

      खेत में काम करते समय हुआ हादसा

      साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, चीन का यह किसान अपने खेत में काम कर रहा था. इसी दौरान अचानक एक जहरीले कोबरा ने उसकी उंगली पर काट लिया. सांप के काटते ही उसकी उंगली तेजी से सूजने लगी. कुछ ही देर में उसे चक्कर आने लगे और पूरे शरीर में कमजोरी महसूस होने लगी. परिवार के लोगों ने जब उसकी हालत देखी, तो घबरा गए. इसी बीच उसकी पत्नी ने बिना समय गंवाए पति को बचाने की कोशिश शुरू कर दी.

      फिल्मों वाला तरीका पड़ा भारी

      पति की हालत देखकर महिला को फिल्मों में देखा गया एक सीन याद आ गया. उसने सोचा कि अगर जहर मुंह से निकाल दिया जाए, तो पति बच जाएगा. उसने अपने पति के जख्म पर मुंह लगाकर लगातार जहर चूसने की कोशिश शुरू कर दी. उस समय उसे लगा कि वह सही काम कर रही है, लेकिन असलियत इससे बिल्कुल अलग थी. परिवार वाले किसान को तुरंत अस्पताल ले गए, जबकि महिला खुद को पूरी तरह ठीक समझ रही थी.

      कुछ घंटों बाद पत्नी की भी बिगड़ गई हालत

      साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, शुरुआत में महिला को कोई परेशानी महसूस नहीं हुई, लेकिन कुछ घंटों बाद उसके मुंह, जीभ और चेहरे में सुन्नपन शुरू हो गया. धीरे-धीरे उसके हाथ-पैर भी सुन्न पड़ने लगे और अगले दिन उसकी कमजोरी इतनी बढ़ गई कि उसे भी अस्पताल ले जाना पड़ा. डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि महिला भी कोबरा के जहर की चपेट में आ चुकी थी. इसके बाद पति-पत्नी दोनों का एंटी-वेनम और दूसरी जरूरी दवाओं से इलाज शुरू किया गया. इलाज के कुछ दिनों बाद दोनों की हालत में सुधार आया और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.

      डॉक्टरों ने बताया क्यों खतरनाक है यह तरीका

      इलाज करने वाले डॉक्टरों ने कहा कि आज भी बहुत से लोग यह मानते हैं कि सांप का जहर मुंह से चूसकर बाहर निकाला जा सकता है, जबकि यह पूरी तरह गलत धारणा है. डॉक्टरों के अनुसार, मुंह के अंदर बहुत बारीक खून की वाहिकाएं होती हैं. अगर जहर इनके संपर्क में आ जाए, तो वह सीधे शरीर के अंदर पहुंच सकता है. यही वजह रही कि पति को बचाने की कोशिश कर रही महिला खुद भी जहरीले असर का शिकार हो गई. एक्सपर्ट्स का कहना है कि सांप का जहर शरीर में बहुत तेजी से फैलता है. ऐसे में उसे मुंह से निकाल पाना लगभग नामुमकिन होता है.

      जख्म काटना या बर्फ लगाना भी नहीं है सही

      डॉक्टरों ने यह भी साफ किया कि सांप काटने के बाद जख्म को ब्लेड या चाकू से काटना भी गलत तरीका है. ऐसा करने से ज्यादा खून बह सकता है और इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. इसी तरह जख्म पर आग लगाना, गर्म चीज रखना या बर्फ लगाना भी नुकसान पहुंचा सकता है. उन्होंने कहा कि ऐसे घरेलू उपाय मरीज की हालत और ज्यादा खराब कर सकते हैं.

      सांप काट ले तो क्या करें?

      डॉक्टरों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को सांप काट ले, तो सबसे पहले घबराने के बजाय तुरंत मेडिकल मदद बुलानी चाहिए. मरीज को जितना हो सके शांत रखें और कम से कम हिलने-डुलने दें, जिससे जहर शरीर में तेजी से न फैले. अगर सुरक्षित हो, तो सांप का रंग, शरीर पर बने निशान या उसकी फोटो डॉक्टरों के लिए मददगार साबित हो सकती है. इससे यह पहचानने में आसानी होती है कि किस प्रजाति के सांप ने काटा है और कौन-सी एंटी-वेनम दवा देनी होगी.

      पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

      चीन में जहरीले सांपों के काटने की कई घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं. इसी साल मई में गुआंगडोंग प्रांत में एक 14 वर्षीय छात्र को स्कूल परिसर में किसी जहरीले जीव ने काट लिया था. शुरुआत में उसने इसे मामूली समझकर नजरअंदाज कर दिया. लेकिन कुछ घंटों बाद उसके हाथ-पैर सुन्न होने लगे और उसे धुंधला दिखाई देने लगा. समय रहते अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने एंटी-वेनम देकर उसकी जान बचा ली. डॉक्टरों का कहना था कि अगर इलाज में थोड़ी और देर हो जाती, तो स्थिति जानलेवा हो सकती थी.

      सोशल मीडिया पर भी हुई चर्चा

      युन्नान की यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई. कई लोगों ने लिखा कि फिल्मों और टीवी में दिखाए जाने वाले हर तरीके को असल जिंदगी में अपनाना सही नहीं होता. वहीं, कुछ लोगों ने महिला के साहस की भी तारीफ की. उनका कहना था कि उसने अपने पति की जान बचाने के लिए अपनी जान की भी परवाह नहीं की. हालांकि, डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि ऐसी स्थिति में भावनाओं से नहीं, बल्कि सही मेडिकल सलाह के मुताबिक कदम उठाना चाहिए. क्योंकि सांप काटने के बाद कुछ मिनटों की सही कार्रवाई ही किसी की जान बचा सकती है.

    • क्या मां दुर्गा की प्रतिमा बनाने में वेश्यालय की मिट्टी का उपयोग होता है? जानिए इस अनोखी परंपरा का इतिहास..

      क्या मां दुर्गा की प्रतिमा बनाने में वेश्यालय की मिट्टी का उपयोग होता है? जानिए इस अनोखी परंपरा का इतिहास..

      क्या मां दुर्गा की प्रतिमा बनाने में वेश्यालय की मिट्टी का उपयोग होता है? जानिए इस अनोखी परंपरा का इतिहास..

      भारत में दुर्गा पूजा से जुड़ी कई प्राचीन परंपराएं हैं। इनमें से एक प्रसिद्ध मान्यता यह है कि कुछ क्षेत्रों, विशेषकर पश्चिम बंगाल की पारंपरिक दुर्गा प्रतिमा निर्माण कला में, प्रतिमा बनाने के लिए थोड़ी मात्रा में वेश्यालय (जिसे ‘निषिद्ध पल्ली’ भी कहा जाता है) के द्वार की मिट्टी मिलाई जाती है। इसे बंगाली परंपरा में “निषिद्धो पल्लीर माटी” कहा जाता है।

      हालांकि, यह परंपरा पूरे भारत में नहीं अपनाई जाती और सभी मूर्तिकार या पूजा समितियां इसका पालन भी नहीं करतीं।

      क्या वेश्याओं के पैसों से मूर्ति बनाई जाती है?

      सोशल मीडिया पर अक्सर यह दावा किया जाता है कि “मां दुर्गा की मूर्ति वेश्याओं के पैसों से बनाई जाती है।”

      यह दावा सही नहीं है। पारंपरिक मान्यता मिट्टी से जुड़ी है, पैसों से नहीं। कुछ स्थानों पर केवल प्रतीकात्मक रूप से वेश्यालय के प्रवेश द्वार की थोड़ी-सी मिट्टी प्रतिमा निर्माण में मिलाई जाती है।

      इस परंपरा के पीछे क्या मान्यता है?

      लोक मान्यताओं के अनुसार, जब कोई व्यक्ति वेश्यालय के द्वार पर प्रवेश करता है, तो वह अपने सामाजिक अहंकार और बाहरी पहचान को वहीं छोड़ देता है। इसी कारण उस स्थान की मिट्टी को प्रतीकात्मक रूप से पवित्र माना गया और उसे देवी की प्रतिमा में शामिल करने की परंपरा विकसित हुई।

      कुछ विद्वान इसे समाज के हाशिए पर रहने वाले लोगों को भी देवी की कृपा और सम्मान के दायरे में शामिल करने का प्रतीक मानते हैं।

      क्या यह धार्मिक नियम है?

      नहीं। इस परंपरा का उल्लेख सभी धार्मिक ग्रंथों में अनिवार्य नियम के रूप में नहीं मिलता। यह मुख्य रूप से कुछ क्षेत्रों की सांस्कृतिक और लोक परंपरा है, जिसे सभी स्थानों पर नहीं अपनाया जाता।

      निष्कर्ष

      मां दुर्गा की प्रतिमा में कुछ क्षेत्रों में वेश्यालय के द्वार की मिट्टी मिलाने की परंपरा जरूर प्रचलित रही है, लेकिन यह कहना कि मूर्ति “वेश्याओं के पैसों से बनाई जाती है”, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। यह परंपरा सामाजिक समावेश, करुणा और देवी की दृष्टि में सभी मनुष्यों की समानता का प्रतीक मानी जाती है, न कि किसी आर्थिक योगदान का।