हार्ट अटैक का खतरा कम: करने के लिए अपनाएं ये 10 आदतें, खराब खानपान से लेकर स्मोकिंग तक दिल की धमनियों को पहुंच सकता है नुकसान

हार्ट अटैक का खतरा कम: करने के लिए अपनाएं ये 10 आदतें, खराब खानपान से लेकर स्मोकिंग तक दिल की धमनियों को पहुंच सकता है नुकसान
हार्ट अटैक का खतरा कम: करने के लिए अपनाएं ये 10 आदतें, खराब खानपान से लेकर स्मोकिंग तक दिल की धमनियों को पहुंच सकता है नुकसान

आजकल कम उम्र में भी हार्ट अटैक के मामले चिंता बढ़ा रहे हैं। इसकी वजहों में खराब खानपान, शारीरिक गतिविधि की कमी, धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल शामिल हो सकते हैं। कई बार दिल की धमनियों में समस्या लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के बढ़ती रहती है और गंभीर स्थिति पैदा होने पर ही इसका पता चलता है।

कार्डियोलॉजिस्ट और साओल हार्ट सेंटर के संस्थापक एवं निदेशक डॉ. बिमल छाजer ने दिल की सेहत के लिए खानपान और जीवनशैली पर ध्यान देने की जरूरत बताई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और समय पर स्वास्थ्य जांच हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि हार्ट अटैक का कारण सिर्फ खराब डाइट नहीं है। इसके पीछे कई जोखिम कारक हो सकते हैं। आइए जानते हैं दिल को स्वस्थ रखने और हार्ट अटैक का खतरा कम करने के लिए किन 10 बातों का ध्यान रखना चाहिए।

1. कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर रखें नजर

खून में LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने पर धमनियों की दीवारों में प्लाक जमा हो सकता है। इससे धमनियां संकरी हो सकती हैं और दिल तक खून पहुंचने में परेशानी पैदा हो सकती है।

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के लिए संतुलित आहार लें, नियमित शारीरिक गतिविधि करें और डॉक्टर की सलाह पर लिपिड प्रोफाइल टेस्ट करवाएं। अगर कोलेस्ट्रॉल ज्यादा है, तो केवल खानपान पर निर्भर न रहें। कुछ लोगों को दवाओं की भी जरूरत पड़ सकती है।

2. ट्राइग्लिसराइड बढ़ाने वाली आदतों से बचें

ट्राइग्लिसराइड खून में पाया जाने वाला एक प्रकार का फैट है। इसका स्तर बढ़ना, खासकर कम HDL या ज्यादा LDL कोलेस्ट्रॉल के साथ, हृदय रोगों के जोखिम से जुड़ा हो सकता है।

अधिक मात्रा में मीठे पेय, मिठाइयां, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी से भरपूर प्रोसेस्ड फूड खाने से ट्राइग्लिसराइड बढ़ सकता है। इसे नियंत्रित रखने के लिए चीनी का सेवन सीमित करें, साबुत अनाज और फाइबर वाले खाद्य पदार्थ चुनें तथा जरूरत के अनुसार वजन नियंत्रित करें।

3. रोजाना टहलें और नियमित व्यायाम करें

शारीरिक गतिविधि दिल की सेहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। नियमित व्यायाम ब्लड प्रेशर, वजन और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है।

स्वस्थ वयस्कों के लिए सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाला व्यायाम, जैसे तेज चलना, एक सामान्य लक्ष्य है। आप इसे सप्ताह के अलग-अलग दिनों में बांट सकते हैं। शुरुआत धीरे-धीरे करें और अपनी क्षमता के अनुसार गतिविधि बढ़ाएं।

अगर आपको पहले से हृदय रोग है या व्यायाम के दौरान सीने में दर्द, सांस फूलने या चक्कर आने की समस्या होती है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर ही व्यायाम करें।

4. योग और प्राणायाम को दिनचर्या में शामिल करें

योग और सांस से जुड़े अभ्यास तनाव कम करने, मन को शांत रखने और कुछ लोगों में ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। इन्हें हल्की शारीरिक गतिविधि और संतुलित जीवनशैली के साथ अपनाया जा सकता है।

ध्यान रखें कि योग या प्राणायाम धमनियों में जमा प्लाक को हटाने या हार्ट अटैक को पूरी तरह रोकने का प्रमाणित विकल्प नहीं हैं। इन्हें डॉक्टर की सलाह, जरूरी दवाओं और अन्य स्वस्थ आदतों के साथ ही अपनाएं।

5. तनाव को संभालने के तरीके सीखें

लंबे समय तक तनाव रहने से नींद, खानपान, ब्लड प्रेशर और रोजमर्रा की आदतें प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी दिल की देखभाल का हिस्सा है।

तनाव कम करने के लिए नियमित नींद लें, टहलें, पसंदीदा गतिविधियों के लिए समय निकालें और भरोसेमंद लोगों से बातचीत करें। ध्यान या योग भी कुछ लोगों के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

अगर तनाव लगातार बना रहता है या दैनिक जीवन प्रभावित होने लगता है, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मदद लेने में संकोच न करें।

6. गुस्से और भावनात्मक तनाव को नजरअंदाज न करें

बार-बार तीव्र गुस्सा या भावनात्मक तनाव होने पर शरीर में अस्थायी शारीरिक बदलाव हो सकते हैं। कुछ परिस्थितियों में तीव्र भावनात्मक तनाव हृदय संबंधी घटनाओं का जोखिम भी बढ़ा सकता है, खासकर उन लोगों में जिन्हें पहले से हृदय रोग है।

गुस्सा आने पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ पल रुकें, धीरे-धीरे सांस लें और जरूरत पड़ने पर स्थिति से थोड़ी देर के लिए दूर हो जाएं। लगातार चिड़चिड़ापन या भावनात्मक परेशानी होने पर पेशेवर सहायता लेना भी फायदेमंद हो सकता है।

7. हार्ट अटैक के लक्षणों की जानकारी रखें

हार्ट अटैक के लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। सीने में दबाव, जकड़न या दर्द, सांस फूलना, ठंडा पसीना, मतली, चक्कर और हाथ, पीठ, गर्दन या जबड़े में दर्द इसके संभावित संकेत हो सकते हैं। कुछ लोगों में, खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और डायबिटीज से पीड़ित लोगों में, लक्षण कम स्पष्ट भी हो सकते हैं।

अगर हार्ट अटैक का संदेह हो, तो तुरंत स्थानीय आपातकालीन चिकित्सा सेवा से संपर्क करें। खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल जाने की कोशिश न करें और लक्षण अपने आप ठीक होने का इंतजार न करें।

8. नियमित हेल्थ चेकअप करवाएं

हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल कई बार बिना स्पष्ट लक्षणों के मौजूद रहते हैं। नियमित स्वास्थ्य जांच से इनका समय रहते पता लगाने में मदद मिल सकती है।

डॉक्टर से अपनी उम्र, पारिवारिक इतिहास, वजन और अन्य जोखिम कारकों के अनुसार ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और लिपिड प्रोफाइल की जांच के बारे में पूछें। हर व्यक्ति को एक ही तरह के टेस्ट या एक ही अंतराल पर जांच की जरूरत नहीं होती।

बिना डॉक्टर की सलाह के अनावश्यक जांच करवाने या केवल किसी एक टेस्ट के आधार पर अपने दिल की सेहत का निष्कर्ष निकालने से बचें।

9. धूम्रपान और तंबाकू से बनाएं दूरी

धूम्रपान रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और हृदय रोग का जोखिम बढ़ाता है। तंबाकू के अन्य उत्पाद भी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े हैं। इसलिए सिगरेट, बीड़ी, गुटखा और दूसरे तंबाकू उत्पादों से दूर रहना दिल की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है।

अगर आप धूम्रपान छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, तो डॉक्टर से सहायता लें। काउंसलिंग और कुछ प्रमाणित उपचार छोड़ने की प्रक्रिया को आसान बना सकते हैं। धूम्रपान छोड़ने से स्वास्थ्य को किसी भी उम्र में फायदा हो सकता है।

10. डॉक्टर की सलाह और दवाओं का पालन करें

अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल या पहले से हृदय रोग है, तो नियमित इलाज बेहद जरूरी है। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं समय पर लें और बिना सलाह के उन्हें बंद न करें या उनकी खुराक न बदलें।

एंजियोग्राफी जैसे टेस्ट हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं होते। डॉक्टर लक्षणों, जांच के नतीजों और व्यक्तिगत जोखिम के आधार पर तय करते हैं कि किस तरह की जांच या उपचार की जरूरत है।

दिल को स्वस्थ रखने के लिए डाइट में क्या बदलाव करें?

दिल की सेहत के लिए केवल कुछ चीजें छोड़ना ही नहीं, बल्कि सही खाद्य पदार्थों को नियमित रूप से शामिल करना भी जरूरी है।

  • फल और सब्जियां: रोजाना अलग-अलग तरह के फल और सब्जियां खाएं।
  • साबुत अनाज: ओट्स, दलिया, ब्राउन राइस और साबुत गेहूं जैसे विकल्प चुनें।
  • स्वस्थ फैट: मेवे, बीज और असंतृप्त वसा वाले तेल सीमित व संतुलित मात्रा में लें।
  • नमक और चीनी: अधिक नमक, मीठे पेय और ज्यादा चीनी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें।
  • तली-भुनी चीजें: बार-बार डीप फ्राई किए गए और ट्रांस फैट वाले खाद्य पदार्थों से बचें।
  • संतुलित भोजन: दालें, फलियां और उपयुक्त प्रोटीन स्रोतों को भोजन में शामिल करें।

दिल की धमनियों में प्लाक बनने की प्रक्रिया पर खानपान का असर पड़ता है, लेकिन इसमें उम्र, आनुवंशिकता, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और धूम्रपान जैसे अन्य कारक भी भूमिका निभाते हैं। इसलिए किसी एक खाद्य पदार्थ को हार्ट अटैक का अकेला कारण या बचाव का पक्का उपाय मानना सही नहीं है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार जांच, आहार, व्यायाम और उपचार के लिए योग्य डॉक्टर से परामर्श लें। हार्ट अटैक के संभावित लक्षण दिखाई देने पर तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता प्राप्त करें।

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