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  • सरकारी कर्मचारियों को 20% DA का लाभ, 15 अक्टूबर तक वेतन मिलने की घोषणा,

    सरकारी कर्मचारियों को 20% DA का लाभ, 15 अक्टूबर तक वेतन मिलने की घोषणा,

    सरकारी कर्मचारियों को 20% DA का लाभ, 15 अक्टूबर तक वेतन मिलने की घोषणा,

    दुर्गा पूजा और दिवाली के बीच कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अक्टूबर के वेतन और महंगाई भत्ते को लेकर दी जानकारी

    पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) और अक्टूबर महीने के वेतन को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कर्मचारियों को 15 अक्टूबर तक वेतन दिए जाने की घोषणा की है। इसके साथ ही निर्धारित 20 प्रतिशत महंगाई भत्ते का लाभ भी देने की बात कही गई है। त्योहारों के मौसम में इस घोषणा से कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

    15 अक्टूबर तक वेतन देने की घोषणा

    मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सरकारी कर्मचारियों के वेतन को लेकर जानकारी दी। यह कार्यक्रम पुलिसकर्मियों को नियुक्ति पत्र देने के लिए आयोजित किया गया था।

    रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने कहा कि अक्टूबर महीने का वेतन 15 अक्टूबर तक कर्मचारियों के खातों में पहुंच जाएगा। इसके साथ ही निर्धारित 20 प्रतिशत महंगाई भत्ता भी दिया जाएगा। हालांकि, वास्तविक भुगतान की स्थिति संबंधित विभाग के आदेश और वेतन जारी होने की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

    कर्मचारियों को मिलेगा 20 प्रतिशत महंगाई भत्ता

    महंगाई भत्ता कर्मचारियों को बढ़ती कीमतों के असर से राहत देने के लिए दिया जाता है। पश्चिम बंगाल में सरकारी कर्मचारियों के लिए 20 प्रतिशत DA को लेकर पहले घोषणा किए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

    अब अक्टूबर के वेतन के साथ इस भत्ते का लाभ दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे कर्मचारियों को मिलने वाली कुल राशि में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, प्रत्येक कर्मचारी की वास्तविक वेतन राशि उसके पद, मूल वेतन और लागू नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

    DA के अंतर को धीरे-धीरे कम करने की बात

    रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री ने महंगाई भत्ते के अंतर को धीरे-धीरे कम करने की बात भी कही। कर्मचारियों के लिए DA का मुद्दा लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है, क्योंकि इससे उनकी मासिक आय और बढ़ती महंगाई के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलती है।

    सरकार की ओर से घोषित व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को कितना लाभ मिलेगा और भुगतान किस प्रक्रिया से होगा, इसकी स्पष्ट जानकारी संबंधित आधिकारिक आदेश से ही मिलेगी।

    त्योहारों के बीच कर्मचारियों को राहत की उम्मीद

    दुर्गा पूजा और दिवाली के आसपास वेतन मिलने की तारीख कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण होती है। समय पर वेतन और महंगाई भत्ते का भुगतान होने से घरेलू खर्चों तथा त्योहारों की तैयारियों में मदद मिल सकती है।

    फिलहाल, उपलब्ध रिपोर्ट में 15 अक्टूबर तक वेतन भुगतान और 20 प्रतिशत DA दिए जाने की घोषणा का उल्लेख है। कर्मचारियों को अंतिम पुष्टि के लिए राज्य सरकार के आधिकारिक आदेश या अपने विभाग की सूचना पर ध्यान देना चाहिए।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। वेतन भुगतान और महंगाई भत्ते से संबंधित अंतिम जानकारी के लिए पश्चिम बंगाल सरकार के आधिकारिक आदेश की पुष्टि करें।

  • प्रेमिका के परिवार से शिकायत का बदला लेने का आरोप, घर में घुसकर चाचा-चाची को मारी गोली; महिला की मौत.

    प्रेमिका के परिवार से शिकायत का बदला लेने का आरोप, घर में घुसकर चाचा-चाची को मारी गोली; महिला की मौत.

    प्रेमिका के परिवार से शिकायत का बदला लेने का आरोप, घर में घुसकर चाचा-चाची को मारी गोली; महिला की मौत.

    चित्रकूट: प्रेम प्रसंग को लेकर शुरू हुआ विवाद एक परिवार के लिए दर्दनाक घटना में बदल गया। आरोप है कि युवती के परिजनों की ओर से पुलिस में शिकायत किए जाने से नाराज एक युवक तमंचा लेकर उसके घर पहुंचा और वहां मौजूद चाचा-चाची पर गोली चला दी। गोली लगने से चाची की मौत हो गई, जबकि चाचा गंभीर रूप से घायल हो गए। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में जुट गई।

    प्रेम प्रसंग को लेकर पहले भी हुआ था विवाद

    यह मामला उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के मऊ थाना क्षेत्र के जोरवारा गांव का बताया गया है। पुलिस के मुताबिक, गांव के निवासी श्यामधर मिश्रा उर्फ बबुआ का एक युवती के साथ प्रेम प्रसंग था। युवती के परिजनों ने पहले भी इस मामले को लेकर पुलिस से शिकायत की थी।

    पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह के अनुसार, एक दिन युवती घर की छत से कूदकर कहीं चली गई थी। परिजनों ने उसकी तलाश की तो वह घर से कुछ दूरी पर खड़े एक ट्रक में युवक के साथ मिली। इसके बाद परिवार ने डायल 112 पर सूचना देकर पुलिस को बुलाया और युवक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

    बताया गया कि मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया था। हालांकि, घटना के पीछे की पूरी वजह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    देर शाम घर पहुंचा युवक, फायरिंग से मची अफरातफरी

    रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार देर शाम करीब साढ़े आठ बजे आरोपी तमंचा लेकर युवती के घर पहुंचा। आरोप है कि वहां उसने युवती के चाचा और चाची पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। गोली लगने से दोनों गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े।

    अचानक हुई फायरिंग से घर में चीख-पुकार मच गई। गोली चलने की आवाज सुनकर परिजन और आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। इस बीच आरोपी वहां से फरार हो गया।

    परिजन आनन-फानन में दोनों घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामनगर लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने करीब 35 वर्षीय चाची को मृत घोषित कर दिया। वहीं, लगभग 40 वर्षीय चाचा की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें बेहतर इलाज के लिए प्रयागराज रेफर कर दिया गया।

    पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा

    घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। महिला के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए आरोपी की तलाश तेज कर दी।

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, युवती के परिवार की ओर से पहले की गई शिकायत और उसके बाद हुई इस वारदात समेत सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

    शिकायत से नाराजगी की बात, जांच में सामने आएगी पूरी सच्चाई

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पुलिस में शिकायत दर्ज होने से नाराजगी को वारदात की संभावित वजह बताया जा रहा है। हालांकि, घटना के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों और आरोपी की

  • घरेलू विवाद में पति की कुल्हाड़ी से हत्या का आरोप, तीन साल के बेटे को लेकर पत्नी ने पड़ोसियों से कही ये बात.

    घरेलू विवाद में पति की कुल्हाड़ी से हत्या का आरोप, तीन साल के बेटे को लेकर पत्नी ने पड़ोसियों से कही ये बात.

    घरेलू विवाद में पति की कुल्हाड़ी से हत्या का आरोप, तीन साल के बेटे को लेकर पत्नी ने पड़ोसियों से कही ये बात.

    जबलपुर: मध्य प्रदेश के जबलपुर में घरेलू विवाद से जुड़ी एक घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी। गोरखपुर थाना क्षेत्र के कैलाशपुरी गुप्तेश्वर में एक व्यक्ति की कुल्हाड़ी से हमला कर हत्या किए जाने का मामला सामने आया। हत्या का आरोप उसकी पत्नी पर लगा, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इस घटना का सबसे संवेदनशील पहलू दंपती का तीन साल का मासूम बेटा है, जिसकी देखभाल को लेकर परिवार और आसपास के लोगों की चिंता बढ़ गई।

    घरेलू विवाद के बाद पति पर हमले का आरोप

    मृतक की पहचान नितिन जायसवाल के रूप में बताई गई है। वह पुताई का काम करता था। पुलिस से मिली प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, पति-पत्नी के बीच लंबे समय से घरेलू विवाद चल रहा था। आरोप है कि पति के शराब पीने और नशे की हालत में मारपीट करने को लेकर दोनों के बीच अक्सर झगड़े होते थे।

    घटना वाले दिन भी दंपती के बीच विवाद होने की बात सामने आई है। बताया गया कि दोपहर में झगड़ा हुआ था, जो कुछ समय बाद शांत हो गया। हालांकि, शाम को दोनों के बीच दोबारा विवाद शुरू हो गया। इसी दौरान पत्नी पर कुल्हाड़ी से पति के सिर और चेहरे पर कई वार करने का आरोप है। गंभीर चोटों के कारण नितिन की मौत हो गई।

    फिलहाल विवाद के दौरान क्या-क्या हुआ और हमला किन परिस्थितियों में किया गया, इसकी जांच पुलिस कर रही है।

    शोर सुनकर पहुंचे पड़ोसी, घर के अंदर मिला शव

    घर से चीख-पुकार और शोर सुनाई देने पर पड़ोसी मौके पर पहुंचे। वहां नितिन खून से लथपथ हालत में पड़ा मिला। घटना की जानकारी पुलिस को दी गई, जिसके बाद गोरखपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।

    पुलिस ने आरोपी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया। घटनास्थल से वारदात में इस्तेमाल की गई बताई जा रही कुल्हाड़ी भी जब्त की गई है। पुलिस अब घटना से जुड़े साक्ष्यों और आसपास के लोगों से मिली जानकारी के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही है।

    सात साल पहले हुई थी शादी, तीन साल का है बेटा

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नितिन और उसकी पत्नी की शादी करीब सात साल पहले हुई थी। दोनों का एक तीन वर्षीय बेटा है। बताया जाता है कि पति-पत्नी के बीच पहले भी कई बार विवाद हुआ करता था और पड़ोसियों ने कुछ मौकों पर बीच-बचाव भी किया था।

    हालांकि, पूर्व में घरेलू हिंसा को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज हुई थी या नहीं, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। पति के शराब पीने और कथित मारपीट से संबंधित आरोपों की भी जांच की जानी है।

    बेटे की देखभाल को लेकर कही गई यह बात

    घटना के बाद सामने आई जानकारी के मुताबिक, आरोपी महिला ने पड़ोसियों से अपने परिवार को सूचना देने की बात कही थी, ताकि वे उसके तीन साल के बेटे की देखभाल कर सकें।

    बताया गया कि उसने पति के साथ होने वाले विवादों और कथित मारपीट से परेशान होने की बात भी कही थी। हालांकि, महिला के कथित बयान का पूरा विवरण और उसकी परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

    इस घटना के बाद मासूम बच्चे की देखभाल का सवाल महत्वपूर्ण हो गया है। पिता की मौत और मां की गिरफ्तारी के बीच बच्चे की जिम्मेदारी किसे सौंपी गई है, इसकी आधिकारिक जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

    पुलिस जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई

    पुलिस ने हत्या के आरोप में महिला को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है। जब्त किए गए हथियार, घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है।

    फिलहाल पति की हत्या के पीछे घरेलू विवाद को संभावित पृष्ठभूमि बताया जा रहा है। हालांकि, घटना की पूरी परिस्थितियों और लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगी।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। घटना से जुड़े आरोपों और कथित बयानों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होंगे।

  • आपके बैंक खाते का: हो सकता है गलत इस्तेमाल, जानिए क्या है म्यूल अकाउंट और कैसे होता है साइबर फ्रॉड.

    आपके बैंक खाते का: हो सकता है गलत इस्तेमाल, जानिए क्या है म्यूल अकाउंट और कैसे होता है साइबर फ्रॉड.

    आपके बैंक खाते का: हो सकता है गलत इस्तेमाल, जानिए क्या है म्यूल अकाउंट और कैसे होता है साइबर फ्रॉड.

    साइबर ठगी के मामलों में अपराधी हमेशा अपने बैंक खाते का इस्तेमाल नहीं करते। कई बार ठगी से मिली रकम को आम लोगों के बैंक खातों में मंगवाया जाता है और फिर वहां से दूसरे खातों में भेज दिया जाता है। ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट (Mule Account) कहा जाता है। कुछ लोग कमीशन कमाने के लालच में खुद अपना खाता ठगों को दे देते हैं, जबकि कई लोगों के खाते धोखे से इस्तेमाल किए जाते हैं। परेशानी तब बढ़ती है, जब ठगी की रकम का लेनदेन सामने आने पर जांच एजेंसियां सबसे पहले खाते के असली मालिक तक पहुंचती हैं।

    बिहार के पटना और उत्तर प्रदेश के देवरिया समेत कई जगहों से म्यूल अकाउंट से जुड़े मामले सामने आने की रिपोर्टें आई हैं। कुछ मामलों में खातों से बड़ी रकम के लेनदेन का पता चला। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि म्यूल अकाउंट क्या होता है, साइबर ठग इसका इस्तेमाल कैसे करते हैं और आम लोग इस जाल से कैसे बच सकते हैं।

    क्या होता है म्यूल अकाउंट?

    अंग्रेजी में ‘म्यूल’ का अर्थ खच्चर होता है, जो बोझ ढोता है। साइबर अपराध की दुनिया में म्यूल अकाउंट उस बैंक खाते को कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल ठगी से हासिल पैसे को प्राप्त करने, एक जगह से दूसरी जगह भेजने या नकद निकालने के लिए किया जाता है।

    उदाहरण के लिए, मान लीजिए किसी व्यक्ति से ऑनलाइन ठगी करके 50 हजार रुपये ले लिए गए। ठग यह रकम अपने खाते में लेने के बजाय किसी दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में मंगवाते हैं। फिर उस खाते से पैसा कई अन्य खातों में भेजा जाता है या नकद निकाल लिया जाता है। इस तरह रकम का रास्ता जटिल हो जाता है और असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।

    म्यूल अकाउंट का मालिक हमेशा ठगी में शामिल व्यक्ति ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। कुछ लोगों को कमीशन का लालच देकर खाता इस्तेमाल करने की अनुमति ली जाती है। वहीं, कुछ मामलों में पहचान संबंधी दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल करके या धोखे से खाता खुलवाया जा सकता है।

    कमीशन के लालच में कैसे फंसते हैं लोग?

    साइबर अपराधी अक्सर ऐसे लोगों को निशाना बनाते हैं, जिन्हें जल्दी पैसे कमाने की जरूरत होती है या जो बैंकिंग से जुड़े जोखिमों से पूरी तरह परिचित नहीं होते। बेरोजगार युवाओं, ग्रामीणों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को अलग-अलग बहाने से फंसाने की कोशिश की जा सकती है।

    ठग इन तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं:

    • घर बैठे कमाई का ऑफर: कहा जाता है कि अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने दें और हर लेनदेन पर कमीशन पाएं।
    • नौकरी का झांसा: नौकरी दिलाने या दस्तावेजों के सत्यापन के बहाने बैंक खाते की जानकारी मांगी जाती है।
    • लोन या सरकारी योजना का लालच: खाते या कंपनी के नाम पर लेनदेन कराने का प्रस्ताव दिया जाता है।
    • ATM और बैंकिंग जानकारी लेना: खाते के साथ ATM कार्ड, PIN, चेकबुक, इंटरनेट बैंकिंग या खाते से जुड़े मोबाइल नंबर का नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की जाती है।

    ऐसे प्रस्तावों में व्यक्ति को लग सकता है कि वह केवल किसी का पैसा आगे भेज रहा है। लेकिन यदि उसके खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम घुमाने के लिए होता है, तो उसे बैंक और पुलिस की जांच का सामना करना पड़ सकता है।

    ठगी का पैसा कई खातों से क्यों घुमाया जाता है?

    साइबर ठगी करने वाले अपने असली बैंक खातों और पहचान को जांच से दूर रखने की कोशिश कर सकते हैं। इसके लिए रकम को कई खातों में बांटकर भेजा जाता है। कुछ मामलों में डिजिटल वॉलेट, अलग-अलग बैंक खाते और नकद निकासी जैसे तरीकों का भी इस्तेमाल किया जाता है।

    इस प्रक्रिया में म्यूल अकाउंट एक तरह की कड़ी बन जाता है। जब पीड़ित व्यक्ति बैंक या साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करता है, तो जांच के दौरान सबसे पहले उस खाते की जानकारी सामने आ सकती है, जिसमें पैसा पहुंचा था।

    यदि रकम तेजी से कई खातों में भेज दी गई हो, तो उसका पूरा रास्ता पता लगाने में समय लग सकता है। यही वजह है कि बैंकिंग लेनदेन का रिकॉर्ड और समय पर की गई शिकायत जांच के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।

    एक खाते में करोड़ों रुपये का लेनदेन कैसे हो सकता है?

    म्यूल अकाउंट से जुड़े मामलों में कभी-कभी बहुत बड़ी रकम के लेनदेन की जानकारी सामने आती है। उपलब्ध रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ के सूरजपुर से जुड़े एक मामले का उल्लेख है, जिसमें पुलिस के मुताबिक एक संस्था के खाते से 21 राज्यों के करीब 150 लोगों से कथित तौर पर ठगी गई 113 करोड़ रुपये से अधिक की रकम के लेनदेन का पता चला था।

    यह आंकड़ा उस मामले में बताए गए लेनदेन से जुड़ा है। इसे किसी एक व्यक्ति की कमाई या खाते में मौजूद शेष राशि नहीं समझना चाहिए। किसी खाते से गुजरने वाली कुल रकम और उसमें बची हुई रकम अलग-अलग होती हैं।

    इसी तरह बिहार के पटना में ग्रामीणों के नाम पर बड़ी संख्या में खाते खुलवाए जाने के मामले की रिपोर्ट सामने आई थी। ऐसे मामलों में जांच का उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि खाते किसने खुलवाए, उनका वास्तविक संचालन कौन कर रहा था और उनमें आने वाली रकम कहां से आई तथा आगे कहां भेजी गई।

    म्यूल अकाउंट में खाता देने वाला भी मुसीबत में पड़ सकता है

    कई लोगों को लगता है कि उन्होंने केवल अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने दिया है, इसलिए किसी अपराध की जिम्मेदारी उनकी नहीं होगी। लेकिन मामला इतना सीधा नहीं है।

    यदि किसी खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने या आगे भेजने में होता है, तो बैंक लेनदेन की जांच कर सकता है। संदिग्ध गतिविधि मिलने पर खाते पर रोक लग सकती है और संबंधित व्यक्ति से पूछताछ भी हो सकती है। यदि किसी व्यक्ति की भूमिका या जानकारी सामने आती है, तो उसके खिलाफ लागू कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है।

    हालांकि, किसी खाते में संदिग्ध रकम आने मात्र से यह अपने आप साबित नहीं होता कि खाताधारक अपराध में जानबूझकर शामिल था। जांच में यह देखा जाता है कि खाते का इस्तेमाल कैसे हुआ, व्यक्ति की भूमिका क्या थी और उसे लेनदेन की जानकारी थी या नहीं।

    इसलिए किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, ATM कार्ड, PIN, OTP या बैंकिंग ऐप का नियंत्रण देना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

    म्यूल अकाउंट से कैसे बचें? ये सावधानियां जरूर अपनाएं

    1. अपना बैंक खाता किसी दूसरे को इस्तेमाल न करने दें। कोई व्यक्ति कमीशन देने का वादा करे या कहे कि केवल पैसा आगे भेजना है, तब भी ऐसा प्रस्ताव स्वीकार न करें।

    2. ATM कार्ड, PIN और OTP साझा न करें। बैंक कर्मचारी होने का दावा करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP या गोपनीय PIN मांगने का अधिकारी नहीं है।

    3. खाते में अनजान रकम आए तो सतर्क रहें। रकम को खुद खर्च न करें और न ही किसी के कहने पर दूसरे खाते में भेजें। तुरंत अपने बैंक को सूचित करें और आधिकारिक निर्देश लें।

    4. नौकरी या लोन के नाम पर बैंकिंग नियंत्रण न सौंपें। किसी भर्ती, सरकारी योजना या कर्ज की प्रक्रिया में खाते का नियंत्रण देने की मांग हो, तो उसकी वैधता की पुष्टि करें।

    5. अपने नाम पर जारी सिम की जांच करें। भारत सरकार के संचार साथी पोर्टल पर अपने नाम से जारी मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी देखी जा सकती है। किसी अनजान कनेक्शन की जानकारी मिले, तो आधिकारिक प्रक्रिया से शिकायत करें।

    6. बैंक के अलर्ट पर ध्यान दें। खाते में अनजान लेनदेन या असामान्य गतिविधि का संदेश आए तो उसे नजरअंदाज न करें। बैंक से उसके आधिकारिक नंबर या शाखा के जरिए संपर्क करें।

    7. परिवार और आसपास के लोगों को जागरूक करें। खासकर बुजुर्गों, ग्रामीणों और नौकरी तलाश रहे युवाओं को समझाएं कि आसान कमाई के नाम पर बैंक खाता देना भारी पड़ सकता है।

    अगर म्यूल अकाउंट के जरिए ठगी हो जाए तो क्या करें?

    यदि आपके खाते से अनधिकृत लेनदेन हो गया है या आपको पता चलता है कि आपके खाते में ठगी की रकम आई है, तो देर न करें।

    • तुरंत अपने बैंक से संपर्क करके संदिग्ध लेनदेन की सूचना दें।
    • भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए 1930 पर कॉल करें।
    • आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
    • बैंक के संदेश, लेनदेन की रसीदें, कॉल विवरण और संबंधित चैट जैसे उपलब्ध सबूत सुरक्षित रखें।
    • यदि आपके खाते का इस्तेमाल आपकी जानकारी के बिना हुआ है, तो बैंक और पुलिस को यह बात स्पष्ट रूप से बताएं।

    जल्दी शिकायत करने से संबंधित खाते या रकम पर समय रहते कार्रवाई होने की संभावना बढ़ सकती है, हालांकि पैसे की वापसी की गारंटी नहीं होती।

    याद रखें, बैंक खाता आपकी जिम्मेदारी है

    म्यूल अकाउंट का जाल इसलिए खतरनाक है क्योंकि इसमें असली साइबर अपराधी पर्दे के पीछे रह सकते हैं, जबकि बैंक खाते का नाम सामने आ जाता है। कुछ हजार रुपये के कमीशन के लिए अपना खाता या बैंकिंग जानकारी सौंपना लंबे समय तक परेशानी का कारण बन सकता है।

    साफ नियम है: अपने खाते में किसी अनजान व्यक्ति का पैसा मंगवाने और उसे आगे भेजने का काम न करें। बैंक खाता केवल अपने वैध लेनदेन के लिए इस्तेमाल करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत बैंक तथा संबंधित अधिकारियों को दें।

    डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध रिपोर्टों और सामान्य साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी पर आधारित है। इसमें बताए गए मामलों के आंकड़े संबंधित रिपोर्टों में किए गए दावों के अनुसार हैं; किसी विशेष मामले की अंतिम स्थिति आधिकारिक जांच से ही स्पष्ट होगी।

  • 30वीं मंजिल से गिरा 29 साल का सॉफ्टवेयर इंजीनियर, नीचे खड़ी कार पर गिरते ही मची अफरा-तफरी; दो दिन पहले ही लिया था फ्लैट

    30वीं मंजिल से गिरा 29 साल का सॉफ्टवेयर इंजीनियर, नीचे खड़ी कार पर गिरते ही मची अफरा-तफरी; दो दिन पहले ही लिया था फ्लैट

    30वीं मंजिल से गिरा 29 साल का सॉफ्टवेयर इंजीनियर, नीचे खड़ी कार पर गिरते ही मची अफरा-तफरी; दो दिन पहले ही लिया था फ्लैट

    हैदराबाद: तेलंगाना के हैदराबाद में एक 29 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की ऊंची इमारत से गिरने के बाद मौत हो गई। घटना नानकरामगुड़ा स्थित गोल्फ एज अपार्टमेंट की है, जहां इंजीनियर महज दो दिन पहले ही किराए के फ्लैट में रहने आया था। अचानक हुई इस घटना से अपार्टमेंट परिसर में हड़कंप मच गया।

    मृतक की पहचान उप्पला भरत के रूप में हुई है। वह तेलंगाना के सूर्यापेट जिले का रहने वाला था और बेंगलुरु की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता था।

    30वीं मंजिल से गिरकर कार पर जा गिरा इंजीनियर

    जानकारी के मुताबिक, सोमवार को भरत अपार्टमेंट की 30वीं मंजिल से नीचे गिर गया। बताया गया है कि वह परिसर के पार्किंग क्षेत्र में खड़ी एक कार पर जा गिरा। इस दौरान उसे गंभीर चोटें आईं।

    घटना के बाद स्थानीय लोगों और अपार्टमेंट प्रबंधन की मदद से उसे तुरंत नजदीकी निजी अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि, डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

    दो दिन पहले ही किराए पर लिया था फ्लैट

    उप्पला भरत मूल रूप से सूर्यापेट जिले का निवासी था और बेंगलुरु की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में कार्यरत था। रिपोर्ट के अनुसार, वह हाल ही में हैदराबाद आया था और घटना से महज दो दिन पहले ही गोल्फ एज अपार्टमेंट में किराए पर रहने लगा था।

    नए फ्लैट में शिफ्ट होने के कुछ ही समय बाद हुई इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि वह 30वीं मंजिल से किन परिस्थितियों में नीचे गिरा।

    रिश्तेदार की शिकायत पर मामला दर्ज

    घटना के बाद भरत के रिश्तेदार उप्पला किशोर की शिकायत पर साइबराबाद के गाचीबौली पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए उस्मानिया जनरल अस्पताल भेज दिया है।

    फिलहाल पुलिस घटना की परिस्थितियों की जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि भरत के गिरने की वजह क्या थी और घटना के समय वहां क्या परिस्थितियां थीं। जांच पूरी होने के बाद ही मौत के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। घटना से जुड़े तथ्यों और मौत की परिस्थितियों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के बाद ही हो सकेगी।

  • लखनऊ: शिवा शर्मा हत्याकांड में फरार श्रद्धा दुबे की तलाश तेज, VIP ने किया अनफॉलो? हनीट्रैप से लेकर नेपाल कनेक्शन तक खंगाल रही पुलिस.

    लखनऊ: शिवा शर्मा हत्याकांड में फरार श्रद्धा दुबे की तलाश तेज, VIP ने किया अनफॉलो? हनीट्रैप से लेकर नेपाल कनेक्शन तक खंगाल रही पुलिस.

    लखनऊ: शिवा शर्मा हत्याकांड में फरार श्रद्धा दुबे की तलाश तेज, VIP ने किया अनफॉलो? हनीट्रैप से लेकर नेपाल कनेक्शन तक खंगाल रही पुलिस.

    लखनऊ में शिवा शर्मा हत्याकांड की जांच के बीच आरोपी श्रद्धा दुबे और उसकी बहन रश्मि दुबे की तलाश तेज हो गई है। पुलिस दोनों को पकड़ने के लिए लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। इस बीच कथित VIP संपर्कों, सोशल मीडिया गतिविधियों, आर्थिक लेनदेन और नेपाल सीमा तक पहुंचने की चर्चाओं ने मामले को और पेचीदा बना दिया है। हालांकि, हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग नेटवर्क से जुड़े आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग के आरोपों की जांच

    पुलिस जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस बात की पड़ताल की जा रही है कि क्या श्रद्धा दुबे का किसी कथित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क से संबंध था। यह भी जांच का विषय है कि कहीं प्रभावशाली लोगों से संपर्कों का इस्तेमाल दबाव बनाने या आर्थिक लाभ लेने के लिए तो नहीं किया गया।

    फिलहाल इन आरोपों को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। पुलिस विभिन्न दावों और संभावित कड़ियों की जांच कर रही है।

    हत्याकांड के बाद VIP संपर्कों पर चर्चा

    शिवा शर्मा हत्याकांड में श्रद्धा का नाम सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उसके कथित संपर्कों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ प्रभावशाली लोगों ने उसे सोशल मीडिया पर अनफॉलो कर दिया है। इनमें एक वरिष्ठ नौकरशाह का नाम भी चर्चा में बताया जा रहा है।

    इसके अलावा, कुछ राजनीतिक नेताओं से उसके संपर्क होने के दावे भी सामने आए हैं। हालांकि, इन संपर्कों का किसी कथित गैरकानूनी गतिविधि से संबंध होने की पुष्टि नहीं हुई है।

    चार पुलिस टीमें तलाश में जुटीं

    श्रद्धा दुबे और रश्मि दुबे की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने चार टीमें लगाई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, लखनऊ के अलावा सीतापुर और रायबरेली में भी संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई है।

    पुलिस नेपाल सीमा से जुड़े संभावित रास्तों की भी जांच कर रही है। हालांकि, दोनों बहनों के नेपाल में छिपे होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    रिजवान के बयान से सामने आया रूपईडीहा का नाम

    जांच के दौरान श्रद्धा के पुराने परिचित रिजवान ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि वह दोनों बहनों को नेपाल सीमा के पास रूपईडीहा तक छोड़कर आया था।

    उसके दावे के अनुसार, श्रद्धा ने अस्पताल से फोन कर उसे बुलाया था। इसके बाद वह अपनी कार से दोनों को रूपईडीहा तक ले गया और फिर वापस लौट आया। उसने यह भी दावा किया कि वहां से श्रद्धा किसी अन्य व्यक्ति के साथ आगे जाने वाली थी।

    पुलिस इस बयान की सत्यता की जांच कर रही है। यह स्पष्ट होना अभी बाकी है कि दोनों बहनें इसके बाद कहां गईं और क्या किसी अन्य व्यक्ति ने उनकी मदद की।

    कौन है श्रद्धा दुबे?

    उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, श्रद्धा दुबे मेकअप आर्टिस्ट, मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के रूप में जानी जाती है। बताया गया है कि वह कुछ साल पहले अपने पति से अलग होकर लखनऊ में रहने लगी थी। उसका एक बेटा भी है, जो अपने पिता के साथ रहता है।

    शिवा शर्मा के साथ उसके संबंधों और व्यक्तिगत संपर्कों को लेकर अब पुलिस जांच कर रही है। हालांकि, उसके पेशे या सोशल मीडिया पर पहचान को किसी कथित अपराध का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

    छह महीने पहले हुई थी शिवा से मुलाकात

    रिपोर्ट के मुताबिक, शिवा शर्मा और श्रद्धा दुबे की मुलाकात करीब छह महीने पहले एक क्लब में हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और वे पिछले चार महीनों से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे थे।

    परिजनों का दावा है कि शिवा इस रिश्ते को लेकर गंभीर था और श्रद्धा को अपने परिवार से भी मिलवा चुका था। परिवार के अनुसार, शादी की चर्चा के बाद दोनों के बीच तनाव बढ़ने लगा था। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि उनके रिश्ते में विवाद की वजह क्या थी और उसका हत्याकांड से कोई संबंध था या नहीं।

    पुराने विवाद और आर्थिक लेनदेन भी जांच के दायरे में

    मामले में शिवा के पुराने आपराधिक मामले का भी जिक्र सामने आया है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि पुराने मामले और कुछ निजी विवादों को लेकर दोनों के बीच तनाव था। चेन और ब्रेसलेट से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया गया है।

    पुलिस इन दावों की पड़ताल कर रही है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कथित आर्थिक विवादों और हत्या की घटना के बीच क्या संबंध था।

    गिरफ्तारी के बाद खुल सकते हैं कई राज

    शिवा शर्मा हत्याकांड में अब तक कई सवालों के जवाब मिलना बाकी है। श्रद्धा और रश्मि कहां हैं? रूपईडीहा तक पहुंचने में किसकी भूमिका थी? कथित VIP संपर्कों और आर्थिक लेनदेन की वास्तविकता क्या है? इन सवालों का जवाब पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों से ही सामने आएगा।

    फिलहाल पुलिस दोनों बहनों की तलाश कर रही है। मामले में लगाए गए आरोपों और कथित संपर्कों को जांच पूरी होने तक पुष्ट तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। इसमें शामिल आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही तय होंगे।

  • कानपुर: जली हुई महिला को भूत समझकर डरने लगे लोग, सच्चाई सामने आई तो उड़ गए सबके होश!

    कानपुर: जली हुई महिला को भूत समझकर डरने लगे लोग, सच्चाई सामने आई तो उड़ गए सबके होश!

    कानपुर: जली हुई महिला को भूत समझकर डरने लगे लोग, सच्चाई सामने आई तो उड़ गए सबके होश!

    कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक महिला को देर रात सुनसान सड़कों पर भटकते देखकर लोग घबरा गए। महिला का चेहरा और शरीर बुरी तरह झुलसा हुआ था। उसकी हालत देखकर कुछ लोग डरकर वहां से दूर भागने लगे। इसी बीच एक राहगीर ने हिम्मत दिखाते हुए पुलिस को सूचना दी। जब पुलिस मौके पर पहुंची और महिला से बातचीत की, तो उसकी आपबीती सुनकर अधिकारी भी हैरान रह गए।

    महिला की पहचान समीरुन्निशा के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, वह लंबे समय से कानपुर के उर्सला अस्पताल में भर्ती है, जहां बर्न वार्ड में उसका इलाज चल रहा है। अस्पताल में काफी समय से रहने के कारण जब वह परेशान हो जाती है, तो कभी-कभी बाहर टहलने निकल जाती है। कुछ समय सड़कों पर घूमने के बाद वह वापस अस्पताल लौट आती है।

    दूसरी शादी का विरोध करने पर जलाने का आरोप

    महिला ने पुलिस को बताया कि उसकी इस हालत के पीछे उसके पति चांद बाबू का हाथ है। उसका आरोप है कि पति दूसरी शादी करना चाहता था। जब उसने इसका विरोध किया, तो पति ने कथित तौर पर उसे आग के हवाले कर दिया और गंभीर हालत में छोड़कर चला गया।

    महिला के मुताबिक, इस घटना के बाद से उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। उसके चेहरे और शरीर पर गंभीर रूप से जलने के निशान हैं। वह कई महीनों से अस्पताल में उपचार करा रही है।

    उन्नाव से कानपुर अस्पताल लाई गई थी महिला

    पुलिस के अनुसार, महिला को अप्रैल महीने में उन्नाव से कानपुर रेफर किया गया था। इसके बाद उसे उर्सला अस्पताल के बर्न वार्ड में भर्ती कराया गया। बताया गया कि घटना के बाद उसका पति अस्पताल से चला गया और फिर वापस नहीं लौटा।

    पटकापुर चौकी प्रभारी प्रशांत सिंह के मुताबिक, दो दिन पहले भी महिला के एक स्थान पर बैठे होने की सूचना मिली थी। पुलिस उसे उपचार के लिए बिरहाना रोड स्थित केपीएम अस्पताल ले गई थी। प्राथमिक उपचार के बाद जब उसे वापस उर्सला अस्पताल भेजा गया, तब पता चला कि वह वहां पहले से भर्ती मरीज है और उसका लंबे समय से इलाज चल रहा है।

    पुलिस कर रही मामले की जांच

    मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीसीपी शिवा सिंह भी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचीं। उन्होंने महिला से बातचीत कर उसके साथ हुई घटना की जानकारी ली। पुलिस अब महिला के बयान और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच कर रही है।

    पुलिस के मुताबिक, महिला के परिजनों का पता लगाने और घटना की परिस्थितियों की जानकारी जुटाने के लिए एक टीम बहराइच के नानपारा भेजने की तैयारी है। वहीं, महिला के पति की तलाश भी की जा रही है।

    फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि महिला के साथ कथित घटना कब और किन परिस्थितियों में हुई थी। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और पुलिस से संबंधित बयानों के आधार पर तैयार की गई है। मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने आने तक इन्हें आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

  • मेट्रो में सीट को लेकर हुआ विवाद बना जानलेवा, बेटे की मौत के बाद मां ने सुनाई आंखों देखी; परिवार ने मांगा न्याय’

    मेट्रो में सीट को लेकर हुआ विवाद बना जानलेवा, बेटे की मौत के बाद मां ने सुनाई आंखों देखी; परिवार ने मांगा न्याय’

    दिल्ली मेट्रो में बुजुर्गों के लिए आरक्षित सीट को लेकर शुरू हुआ विवाद एक परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गया। सफर के दौरान हुई कहासुनी के बाद कथित मारपीट में 47 वर्षीय पवन शर्मा की मौत हो गई। घटना के बाद उनकी मां दुर्गा गहरे सदमे में हैं। उन्होंने बताया कि उनकी आंखों के सामने बेटे के साथ मारपीट हुई और वह उसे बचाने की कोशिश करती रहीं, लेकिन उसे बचा नहीं सकीं।

    उत्तर-पूर्वी दिल्ली के यमुना विहार स्थित घर में परिवार और परिचित शोक जताने पहुंचे। इस दौरान मां ने उस घटना को याद किया, जिसने उनके परिवार की जिंदगी बदल दी। मामले में पुलिस ने पूर्व आईएएस अधिकारी संजय प्रताप सिंह और उनके बेटे को गिरफ्तार किया है। आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होनी है।

    मां ने बताया, सीट छोड़ने के बाद भी बढ़ता गया विवाद

    दुर्गा के मुताबिक, 8 अक्टूबर को वह अपने बेटे पवन के साथ दिल्ली मेट्रो से घर लौट रही थीं। इसी दौरान वरिष्ठ नागरिकों के लिए आरक्षित सीट को लेकर विवाद शुरू हुआ। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति ने पवन को उठने के लिए कहा। पवन ने जवाब दिया, जिसके बाद उनकी मां ने भी अपनी बात रखी।

    दुर्गा के अनुसार, पवन सीट से उठ गया और वह भी खड़ी हो गईं। इसके बावजूद विवाद बढ़ गया और कथित तौर पर उस व्यक्ति ने पवन पर हमला कर दिया। जब मां ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो उन्हें भी पीछे धकेल दिया गया।

    घटना को याद करते हुए दुर्गा भावुक हो गईं। उनके मुताबिक, कुछ ही देर में स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पवन को गंभीर चोटें आईं और वह जमीन पर गिर पड़ा। उन्होंने बताया कि वह लगातार मदद के लिए चिल्लाती रहीं, लेकिन उस समय उन्हें बेटे को बचाने में असहाय महसूस हुआ।

    बेटे को बचाने की कोशिश, लेकिन नहीं बच सकी जान

    दुर्गा ने बताया कि पवन के जमीन पर गिरने के बाद वहां मौजूद कुछ लोगों ने उसे संभालने और होश में लाने की कोशिश की। उसके ऊपर पानी डाला गया और छाती दबाकर मदद करने का प्रयास किया गया, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ।

    परिवार के लिए यह घटना अब भी विश्वास करना मुश्किल बना रही है। मां का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि रोजमर्रा के सफर में सीट को लेकर हुआ विवाद इतनी भयावह स्थिति में बदल जाएगा।

    पवन की मौत के बाद उनकी मां, पत्नी, बच्चों और दूसरे परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिवार का कहना है कि वे चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए।

    बीमार छोटे बेटे से मिलने गए थे मां-बेटे

    परिजनों के मुताबिक, घटना वाले दिन दुर्गा और पवन गुरुग्राम में रहने वाले अपने छोटे बेटे दीपक से मिलने गए थे। दीपक की तबीयत खराब थी। मुलाकात के बाद दीपक ने शाम करीब चार बजे उन्हें द्वारका सेक्टर-21 मेट्रो स्टेशन पर छोड़ा था।

    इसके करीब एक घंटे बाद दीपक को मां का फोन आया। परिवार के लिए वह फोन बेहद दुखद खबर लेकर आया। दीपक तुरंत दिल्ली के लिए रवाना हुए और लोक नायक जय प्रकाश (एलएनजेपी) अस्पताल पहुंचे। वहां उन्हें बताया गया कि उनके भाई पवन को मृत घोषित कर दिया गया है।

    दीपक ने अपने भाई को शांत स्वभाव का व्यक्ति बताया। उनके अनुसार, पवन आमतौर पर विवादों से दूर रहता था और अपने परिवार के प्रति समर्पित था।

    पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल

    पवन की मौत के बाद उनकी पत्नी और बच्चे गहरे सदमे में हैं। परिवार के सदस्यों ने कहा कि घर में हर कोई इस घटना से टूट गया है। उनके बेटे ने पिता की मौत के मामले में न्याय की मांग करते हुए कहा कि कथित आरोपियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए, जिससे भविष्य में किसी दूसरे परिवार को इस तरह का दुख न झेलना पड़े।

    परिजनों का कहना है कि पवन की मौत ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। परिवार अब जांच और कानूनी कार्रवाई के नतीजों का इंतजार कर रहा है।

    पुलिस ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार

    पुलिस के मुताबिक, मेट्रो में बुजुर्गों के लिए आरक्षित सीट को लेकर हुए विवाद के बाद कथित तौर पर मारपीट हुई थी। मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी संजय प्रताप सिंह और उनके बेटे को गिरफ्तार किया गया है।

    अब मामले में घटना के क्रम, कथित हमले और मौत के बीच संबंध सहित सभी पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी। आरोपियों की गिरफ्तारी अपने आप दोष साबित नहीं करती। अंतिम जिम्मेदारी और दोष का निर्धारण सबूतों तथा अदालत की कार्यवाही के आधार पर होगा।

    यह घटना सार्वजनिक परिवहन में यात्रियों के बीच विवाद को शांतिपूर्वक सुलझाने और किसी भी तरह की हिंसा से बचने की जरूरत को भी सामने लाती है। सीट को लेकर असहमति हो सकती है, लेकिन किसी भी विवाद में हिंसा का सहारा लेना गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है।

    डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट उपलब्ध समाचार विवरणों और परिजनों के बयानों पर आधारित है। घटना से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस लेख में नहीं की गई है। मामले के अंतिम तथ्य जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।

  • हरियाणा: 700 करोड़ रुपये के कथित फ्रॉड मामले में CBI की बड़ी कार्रवाई, 4 और आरोपी गिरफ्तार; अदालत ने 3 दिन की रिमांड पर भेजा.

    हरियाणा: 700 करोड़ रुपये के कथित फ्रॉड मामले में CBI की बड़ी कार्रवाई, 4 और आरोपी गिरफ्तार; अदालत ने 3 दिन की रिमांड पर भेजा.

    हरियाणा: 700 करोड़ रुपये के कथित फ्रॉड मामले में CBI की बड़ी कार्रवाई, 4 और आरोपी गिरफ्तार; अदालत ने 3 दिन की रिमांड पर भेजा.

    हरियाणा: सरकारी विभागों से जुड़े करीब 700 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय घोटाले की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पूछताछ के लिए तीन दिन की रिमांड पर भेज दिया गया। इस मामले में जांच एजेंसी कथित वित्तीय अनियमितताओं की कड़ियां जोड़ने और इसमें शामिल लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है।

    मामले में कथित तौर पर बड़ी रकम की धोखाधड़ी सामने आने के बाद सरकारी धन के लेनदेन और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, घोटाले की पूरी प्रक्रिया, रकम के लेनदेन और आरोपियों की भूमिका को लेकर विस्तृत जानकारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    चार और गिरफ्तारियों के बाद जांच तेज

    CBI ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए चार और लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी अब इन आरोपियों से पूछताछ के जरिए यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कथित वित्तीय गड़बड़ी किस तरह की गई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।

    तीन दिन की रिमांड के दौरान आरोपियों से संबंधित दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में पूछताछ की जा सकती है। जांच का एक अहम पहलू यह भी होगा कि कथित फ्रॉड में किसी अन्य व्यक्ति या समूह की भूमिका थी या नहीं।

    700 करोड़ रुपये के कथित फ्रॉड में किन पहलुओं की होगी जांच?

    इतनी बड़ी रकम से जुड़े मामले में जांच एजेंसी को वित्तीय लेनदेन की पूरी कड़ी समझने के लिए कई पहलुओं की पड़ताल करनी पड़ सकती है। इनमें बैंकिंग रिकॉर्ड, सरकारी विभागों से संबंधित दस्तावेज, भुगतान का विवरण और संबंधित लोगों के बीच हुए लेनदेन की जांच शामिल हो सकती है।

    इन साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट करने की कोशिश की जाएगी कि कथित अनियमितताएं कहां हुईं, सरकारी धन का इस्तेमाल किस तरह किया गया और संबंधित लोगों की क्या भूमिका रही।

    हालांकि, फिलहाल उपलब्ध जानकारी में कथित धोखाधड़ी के पूरे तरीके, संबंधित विभागों के नाम और गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों की पहचान का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इन पहलुओं पर किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

    पूछताछ के बाद सामने आ सकते हैं नए तथ्य

    आरोपियों को तीन दिन की रिमांड पर भेजे जाने के बाद CBI को उनसे पूछताछ करने का अवसर मिलेगा। जांच के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की आगे की दिशा तय हो सकती है।

    फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पूछताछ में क्या जानकारी सामने आई है और कथित घोटाले में कुल कितने लोग शामिल हो सकते हैं। मामले में आगे की कार्रवाई जांच एजेंसी के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट में दी गई जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। 700 करोड़ रुपये के कथित फ्रॉड और आरोपियों की भूमिका से जुड़े सभी तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

  • नशे की अवैध बिक्री के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह उर्फ झोटा की गोली मारकर हत्या, मेडिकल स्टोर संचालक पर आरोप; समर्थकों ने किया शहर बंद का ऐलान

    नशे की अवैध बिक्री के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह उर्फ झोटा की गोली मारकर हत्या, मेडिकल स्टोर संचालक पर आरोप; समर्थकों ने किया शहर बंद का ऐलान

    नशे की अवैध बिक्री के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह उर्फ झोटा की गोली मारकर हत्या, मेडिकल स्टोर संचालक पर आरोप; समर्थकों ने किया शहर बंद का ऐलान

    मानसा: पंजाब के मानसा जिले में नशे की अवैध बिक्री के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता परविंदर सिंह उर्फ झोटा की गोली लगने से मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया। पुलिस के मुताबिक, एक मेडिकल स्टोर संचालक के साथ दवाइयों की बिक्री को लेकर हुए विवाद के दौरान झोटा को गोली मारी गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

    परविंदर सिंह उर्फ झोटा दवा की दुकानों पर कथित तौर पर नशीली दवाओं की अवैध बिक्री का मुद्दा उठाने के लिए जाने जाते थे। बताया जा रहा है कि घटना के दिन भी वह एक मेडिकल स्टोर संचालक से कुछ दवाइयां बेचे जाने को लेकर सवाल कर रहे थे। इसी दौरान दोनों के बीच विवाद बढ़ गया और गोली चलने की घटना हुई।

    दवाइयों की बिक्री को लेकर हुआ था विवाद

    पुलिस के अनुसार, झोटा एक मेडिकल स्टोर संचालक से कुछ दवाइयां बेचे जाने के संबंध में पूछताछ कर रहे थे। वह मोबाइल फोन से बातचीत भी रिकॉर्ड कर रहे थे। इसी दौरान विवाद बढ़ गया।

    रिपोर्ट के मुताबिक, झोटा ने बातचीत के दौरान कहा था कि मेडिकल स्टोर संचालक ने पिस्तौल निकाल ली है। इसके बाद कथित तौर पर उन पर गोली चला दी गई। घटना में गंभीर रूप से घायल झोटा को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।

    हालांकि, घटना के पीछे की पूरी वजह और विवाद की परिस्थितियों को लेकर जांच जारी है। पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही मामले के सभी पहलू स्पष्ट हो सकेंगे।

    नशीली दवाओं की अवैध बिक्री का मुद्दा उठाते थे झोटा

    परविंदर सिंह उर्फ झोटा की पहचान मानसा में नशीली दवाओं की कथित अवैध बिक्री के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता के रूप में बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने पहले भी कुछ मेडिकल दुकानों पर नशीली दवाओं की बिक्री का मुद्दा उठाया था।

    इसी वजह से उनकी मौत के बाद नशे के खिलाफ अभियान से जुड़े लोगों और उनके समर्थकों में नाराजगी है। घटना ने क्षेत्र में नशीली दवाओं की अवैध बिक्री और इसके खिलाफ कार्रवाई को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    समर्थकों ने किया मानसा शहर बंद का ऐलान

    झोटा की मौत की खबर मिलने के बाद उनके परिजन और समर्थक सिविल अस्पताल के बाहर एकत्र हो गए। रिपोर्ट के मुताबिक, समर्थकों ने मानसा शहर बंद करने का ऐलान किया और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया।

    घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति को देखते हुए प्रशासन की कार्रवाई पर भी लोगों की नजर है। समर्थक मामले में सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने बुलाई अधिकारियों की बैठक

    रिपोर्ट के अनुसार, घटना के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सभी जिलों के उपायुक्तों (DC) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (SSP) की उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। इस घटनाक्रम के बीच कानून-व्यवस्था और नशे की समस्या से जुड़े मुद्दे चर्चा में हैं।

    फिलहाल पुलिस हत्या के मामले की जांच कर रही है। घटना में आरोपी की भूमिका, विवाद की वजह और अन्य परिस्थितियों से जुड़े तथ्यों की पुष्टि जांच के आधार पर होगी।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। घटना से जुड़े आरोपों और परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।