मेट्रो में सीट को लेकर हुआ विवाद बना जानलेवा, बेटे की मौत के बाद मां ने सुनाई आंखों देखी; परिवार ने मांगा न्याय’

मेट्रो में सीट को लेकर हुआ विवाद बना जानलेवा, बेटे की मौत के बाद मां ने सुनाई आंखों देखी; परिवार ने मांगा न्याय’

दिल्ली मेट्रो में बुजुर्गों के लिए आरक्षित सीट को लेकर शुरू हुआ विवाद एक परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गया। सफर के दौरान हुई कहासुनी के बाद कथित मारपीट में 47 वर्षीय पवन शर्मा की मौत हो गई। घटना के बाद उनकी मां दुर्गा गहरे सदमे में हैं। उन्होंने बताया कि उनकी आंखों के सामने बेटे के साथ मारपीट हुई और वह उसे बचाने की कोशिश करती रहीं, लेकिन उसे बचा नहीं सकीं।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के यमुना विहार स्थित घर में परिवार और परिचित शोक जताने पहुंचे। इस दौरान मां ने उस घटना को याद किया, जिसने उनके परिवार की जिंदगी बदल दी। मामले में पुलिस ने पूर्व आईएएस अधिकारी संजय प्रताप सिंह और उनके बेटे को गिरफ्तार किया है। आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होनी है।

मां ने बताया, सीट छोड़ने के बाद भी बढ़ता गया विवाद

दुर्गा के मुताबिक, 8 अक्टूबर को वह अपने बेटे पवन के साथ दिल्ली मेट्रो से घर लौट रही थीं। इसी दौरान वरिष्ठ नागरिकों के लिए आरक्षित सीट को लेकर विवाद शुरू हुआ। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति ने पवन को उठने के लिए कहा। पवन ने जवाब दिया, जिसके बाद उनकी मां ने भी अपनी बात रखी।

दुर्गा के अनुसार, पवन सीट से उठ गया और वह भी खड़ी हो गईं। इसके बावजूद विवाद बढ़ गया और कथित तौर पर उस व्यक्ति ने पवन पर हमला कर दिया। जब मां ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो उन्हें भी पीछे धकेल दिया गया।

घटना को याद करते हुए दुर्गा भावुक हो गईं। उनके मुताबिक, कुछ ही देर में स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पवन को गंभीर चोटें आईं और वह जमीन पर गिर पड़ा। उन्होंने बताया कि वह लगातार मदद के लिए चिल्लाती रहीं, लेकिन उस समय उन्हें बेटे को बचाने में असहाय महसूस हुआ।

बेटे को बचाने की कोशिश, लेकिन नहीं बच सकी जान

दुर्गा ने बताया कि पवन के जमीन पर गिरने के बाद वहां मौजूद कुछ लोगों ने उसे संभालने और होश में लाने की कोशिश की। उसके ऊपर पानी डाला गया और छाती दबाकर मदद करने का प्रयास किया गया, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ।

परिवार के लिए यह घटना अब भी विश्वास करना मुश्किल बना रही है। मां का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि रोजमर्रा के सफर में सीट को लेकर हुआ विवाद इतनी भयावह स्थिति में बदल जाएगा।

पवन की मौत के बाद उनकी मां, पत्नी, बच्चों और दूसरे परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिवार का कहना है कि वे चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए।

बीमार छोटे बेटे से मिलने गए थे मां-बेटे

परिजनों के मुताबिक, घटना वाले दिन दुर्गा और पवन गुरुग्राम में रहने वाले अपने छोटे बेटे दीपक से मिलने गए थे। दीपक की तबीयत खराब थी। मुलाकात के बाद दीपक ने शाम करीब चार बजे उन्हें द्वारका सेक्टर-21 मेट्रो स्टेशन पर छोड़ा था।

इसके करीब एक घंटे बाद दीपक को मां का फोन आया। परिवार के लिए वह फोन बेहद दुखद खबर लेकर आया। दीपक तुरंत दिल्ली के लिए रवाना हुए और लोक नायक जय प्रकाश (एलएनजेपी) अस्पताल पहुंचे। वहां उन्हें बताया गया कि उनके भाई पवन को मृत घोषित कर दिया गया है।

दीपक ने अपने भाई को शांत स्वभाव का व्यक्ति बताया। उनके अनुसार, पवन आमतौर पर विवादों से दूर रहता था और अपने परिवार के प्रति समर्पित था।

पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल

पवन की मौत के बाद उनकी पत्नी और बच्चे गहरे सदमे में हैं। परिवार के सदस्यों ने कहा कि घर में हर कोई इस घटना से टूट गया है। उनके बेटे ने पिता की मौत के मामले में न्याय की मांग करते हुए कहा कि कथित आरोपियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए, जिससे भविष्य में किसी दूसरे परिवार को इस तरह का दुख न झेलना पड़े।

परिजनों का कहना है कि पवन की मौत ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। परिवार अब जांच और कानूनी कार्रवाई के नतीजों का इंतजार कर रहा है।

पुलिस ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार

पुलिस के मुताबिक, मेट्रो में बुजुर्गों के लिए आरक्षित सीट को लेकर हुए विवाद के बाद कथित तौर पर मारपीट हुई थी। मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी संजय प्रताप सिंह और उनके बेटे को गिरफ्तार किया गया है।

अब मामले में घटना के क्रम, कथित हमले और मौत के बीच संबंध सहित सभी पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी। आरोपियों की गिरफ्तारी अपने आप दोष साबित नहीं करती। अंतिम जिम्मेदारी और दोष का निर्धारण सबूतों तथा अदालत की कार्यवाही के आधार पर होगा।

यह घटना सार्वजनिक परिवहन में यात्रियों के बीच विवाद को शांतिपूर्वक सुलझाने और किसी भी तरह की हिंसा से बचने की जरूरत को भी सामने लाती है। सीट को लेकर असहमति हो सकती है, लेकिन किसी भी विवाद में हिंसा का सहारा लेना गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट उपलब्ध समाचार विवरणों और परिजनों के बयानों पर आधारित है। घटना से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस लेख में नहीं की गई है। मामले के अंतिम तथ्य जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।

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