
रांची: झारखंड में बच्चा चोरी के शक ने एक व्यक्ति की जान ले ली। मैक्लुस्कीगंज थाना क्षेत्र के दुल्ली गांव स्थित करमकोचा जंगल में मिले राम कच्छप लोहरा के शव के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों को संदेह था कि राम बच्चा चोर है। इसी शक में उन्होंने कथित तौर पर डंडों से उसकी पिटाई कर दी, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद पहचान छिपाने के इरादे से शव को जंगल में फेंक दिया गया।
बच्चा चोर होने का शक बना हत्या की वजह
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दुल्ली गांव के करमकोचा टोला निवासी जीतवाहन उरांव (26) और मंडल मुंडा के रूप में हुई है। आरोप है कि दोनों को राम कच्छप लोहरा पर बच्चा चोर होने का संदेह हुआ था।
इसी संदेह के चलते उन्होंने उसके साथ मारपीट की। पुलिस का कहना है कि डंडों से की गई पिटाई के कारण राम की मौत हो गई। हालांकि, किसी व्यक्ति पर केवल शक होना उसके अपराधी होने का प्रमाण नहीं है। मामले में पुलिस की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकलेगा।
जंगल में मिला था अज्ञात व्यक्ति का शव
पुलिस के मुताबिक, बीते 4 अगस्त को मैक्लुस्कीगंज थाना क्षेत्र के करमकोचा जंगल से एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद हुआ था। शुरुआत में मृतक की पहचान नहीं हो पाई थी।
बाद में मांडर थाना क्षेत्र के बांसजाड़ी निवासी लक्ष्मी देवी ने शव की पहचान अपने बेटे राम कच्छप लोहरा के रूप में की। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
विशेष टीम ने छापेमारी कर दो आरोपियों को पकड़ा
मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची के वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर खलारी डीएसपी के नेतृत्व में विशेष छापेमारी दल बनाया गया। इसमें खलारी और मैक्लुस्कीगंज थानों के पुलिस अधिकारी एवं जवान शामिल थे।
पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए 12 अक्टूबर को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर हत्या करने और शव को जंगल में फेंकने की बात स्वीकार की।
आरोपियों की निशानदेही पर डंडा और कंबल बरामद
पुलिस के अनुसार, आरोपियों की निशानदेही पर मृतक का कंबल और कथित वारदात में इस्तेमाल किया गया डंडा बरामद किया गया है। पुलिस अब मामले से जुड़े साक्ष्यों और घटनाक्रम की जांच कर रही है।
इस घटना ने अफवाहों और बिना प्रमाण लगाए गए आरोपों के खतरनाक परिणामों को सामने ला दिया है। किसी को बच्चा चोर समझकर कानून अपने हाथ में लेना गंभीर अपराध है। ऐसी किसी भी आशंका की स्थिति में खुद कार्रवाई करने के बजाय पुलिस को सूचना देना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और पुलिस के हवाले से प्रकाशित जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। आरोपियों के खिलाफ आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।

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