
सर्दी का मौसम आते ही हमारे खानपान की आदतें बदलने लगती हैं, जिसका सीधा असर हमारे पाचन तंत्र (Digestive System) पर पड़ता है। मौसम में बदलाव के कारण अक्सर पेट में भारीपन, गैस या ब्लोटिंग जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। हालांकि, सही डाइट और मौसमी फलों को अपनी डेली डाइट में शामिल करके गट हेल्थ (Gut Health) को आसानी से बेहतर रखा जा सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स और डायटीशियनों के अनुसार, सर्दियों में मिलने वाले कुछ खास फल न केवल पाचन क्रिया को सुचारू बनाते हैं, बल्कि आंतों के गुड बैक्टीरिया को भी बढ़ावा देते हैं।
सीनियर न्यूट्रिशन एडिटर और डायटीशियन जेसिका बॉल के मुताबिक, मौसम बदलने पर अपनी डाइट में फाइबर से भरपूर फल शामिल करना पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद हो सकता है। सेब, नाशपाती और बेरीज जैसे फलों में डाइटरी फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और दूसरे पोषक तत्व पाए जाते हैं। फाइबर आंतों की सेहत बनाए रखने और मल त्याग को नियमित रखने में मदद करता है।इन फलों को आप दिन में स्नैक के तौर पर या नाश्ते के साथ खा सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति का पाचन तंत्र अलग होता है। कुछ लोगों को सेब और नाशपाती जैसे फलों से गैस या पेट फूलने की समस्या हो सकती है, खासकर अगर उन्हें फ्रुक्टोज पचाने में परेशानी होती है। इसलिए अपनी पाचन क्षमता के अनुसार फलों का चुनाव और मात्रा तय करना बेहतर है। आइए जानते हैं कि सेब, नाशपाती और बेरीज पाचन तंत्र के लिए किस तरह फायदेमंद हो सकते हैं।
सेब का करें सेवन
सेब सर्दी के मौसम का प्रमुख फल है जिसकी कई किस्में सर्द मौसम में मौजूद रहती हैं। Journal of Food Science and Technology (2017) में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक सेब के छिलके (Apple Peel) में गूदे की तुलना में 2 से 3 गुना अधिक फेनोलिक कंपाउंड और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। छिलके में मौजूद क्वेरसेटिन (Quercetin) और कैटेचिन (Catechin) आंतों की अंदरूनी परत को सूजन से बचाते हैं। Nutrients जर्नल (2020) की रिसर्च बताती है कि 100 ग्राम सेब में औसतन 2.4 ग्राम फाइबर होता है । सेब का फाइबर पाचन तंत्र में पानी को सोखकर स्टूल (Stool) के वॉल्यूम को बढ़ाता है, जिससे कब्ज की समस्या दूर होती है।
सेब को आप सीधे खा सकते हैं या सलाद, डेजर्ट और दूसरे व्यंजनों में शामिल कर सकते हैं। एक सेब में लगभग 4 ग्राम फाइबर होता है, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखने और मल त्याग को नियमित रखने में मदद कर सकता है। सेब में कुछ फेनोलिक कंपाउंड भी पाए जाते हैं, जो पेट और छोटी आंत में पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। सेब खाते समय कोशिश करें कि उसे छिलके के साथ खाएं, क्योंकि छिलके सहित सेब में छिले हुए सेब की तुलना में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा ज्यादा होती है।
नाशपाती का करें सेवन
नाशपाती भी इस मौसम में मिलने वाला पौष्टिक फल है जिसे आप छिलके के साथ खा सकते हैं। Frontiers in Nutrition और Microorganisms (2021) में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, नाशपाती में प्रचुर मात्रा में घुलनशील फाइबर पेक्टिन पाया जाता है। पेक्टिन आंतों में पहुंचकर एक जेल (Gel Layer) बनाता है, जो पाचन को सुचारू बनाता है। पेक्टिन आंतों में Bifidobacteria और Lactobacillus जैसे गुड बैक्टीरिया के लिए प्रीबायोटिक के रूप में काम करता है, जिससे शॉर्ट-चेन फैटी एसिड (SCFAs) का निर्माण होता है और गट हेल्थ मजबूत होती है। American Journal of Clinical Nutrition के अनुसार, नाशपाती में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले सोर्बिटोल और फ्रुक्टोज में माइल्ड लैक्सेटिव गुण होते हैं, जो प्राकृतिक रूप से पेट साफ करने में मदद करते हैं।
इसे आप सीधे खा सकते हैं या केक, टार्ट और दूसरे व्यंजनों में इस्तेमाल कर सकते हैं। नाशपाती में लगभग 6 ग्राम फाइबर पाया जाता है। इसमें मौजूद घुलनशील फाइबर पेक्टिन आंत में जेल जैसा पदार्थ बनाता है, जिससे मल में मात्रा बढ़ाने और उसे आसानी से बाहर निकालने में मदद मिल सकती है। पेक्टिन एक प्रीबायोटिक की तरह भी काम कर सकता है, यानी यह आंत में मौजूद गुड बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करता है। नाशपाती में मौजूद फ्रुक्टोज, सोर्बिटोल और फाइबर के कारण इसका हल्का प्राकृतिक लैक्सेटिव प्रभाव भी हो सकता है।
बेरीज का करें सेवन
USDA Food Data Central और Journal of Agricultural and Food Chemistry के अनुसार, 1 कप रास्पबेरी या ब्लैकबेरी में लगभग 8 ग्राम फाइबर होता है। इनके छोटे-छोटे बीजों में अघुलनशील फाइबर होता है, जो आंतों की पेरीस्टाल्टिक मूवमेंट को बढ़ाता है। Nutrients (2018) और Food & Function जर्नल की रिसर्च में पाया गया कि बेरीज में मौजूद एंथोसायनिन (Anthocyanins) और पॉलीफेनॉल्स (Polyphenols) आंतों की सूजन (Intestinal Inflammation) को कम करते हैं। यह गट बैरियर को मजबूत बनाकर इंफ्लेमेटरी बाउल डिसीज (IBD) और पेट से जुड़ी दूसरी समस्याओं से राहत दिलाने में मददगार साबित होते हैं।
ब्लैकबेरी और रास्पबेरी जैसी बेरीज को स्मूदी, दही या दूसरे व्यंजनों में आसानी से शामिल किया जा सकता है। ये पाचन तंत्र के लिए भी उपयोगी हो सकती हैं। एक कप ब्लैकबेरी या रास्पबेरी में लगभग 8 ग्राम फाइबर पाया जाता है। इनमें मौजूद छोटे-छोटे बीज भी अघुलनशील फाइबर देते हैं, जो आंतों में भोजन और मल की गति को बनाए रखने में मदद करता है। बेरीज में पॉलीफेनॉल नामक एंटीऑक्सीडेंट भी होते हैं। कुछ रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि पॉलीफेनॉल आंतों में सूजन को कम करने में मददगार साबित होता है।
डिस्क्लेमर : यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से प्रदान की गई है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। पाचन से जुड़ी गंभीर समस्या होने पर या डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर या प्रमाणित डायटीशियन से परामर्श अवश्य लें।

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