मधेपुरा: बिहार के मधेपुरा जिले के चौसा थाना क्षेत्र में बुधवार देर रात एक टेंट मजदूर की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वारदात कलासन इलाके में हुई, जहां अज्ञात हमलावरों ने घर लौट रहे बबलू मेहता को निशाना बनाया। बताया जा रहा है कि घटना उनके घर से करीब 100 मीटर पहले हुई।
गोली लगने के बाद बबलू किसी तरह दौड़ते हुए अपने घर तक पहुंचे, लेकिन दरवाजे पर पहुंचते ही जमीन पर गिर पड़े। परिजन उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
टेंट का सामान उतारकर घर लौट रहे थे बबलू
मृतक की पहचान कलासन वार्ड नंबर 4 निवासी स्वर्गीय कमलेश्वरी मेहता के बेटे बबलू मेहता के रूप में हुई है। बबलू स्थानीय विदुर टेंट हाउस में मजदूरी करते थे और इसी काम से अपने परिवार का खर्च चलाते थे।
परिजनों के मुताबिक, बुधवार देर रात बबलू कलासन बाजार स्थित गोदाम में टेंट का भारी सामान उतारने के बाद पैदल अपने घर की ओर लौट रहे थे। घर से करीब 100 मीटर पहले अंधेरे में कुछ अज्ञात लोगों ने उन पर गोली चला दी।
हमले में दो गोलियां उनके सीने के नीचे के हिस्से में लगीं। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद बबलू ने घर तक पहुंचने की कोशिश की।
खून से लथपथ हालत में घर के दरवाजे तक पहुंचे
गोली लगने के बाद बबलू किसी तरह दौड़ते हुए अपने घर पहुंचे। जैसे ही वह दरवाजे पर पहुंचे, उनकी हालत बिगड़ गई और वे वहीं गिर पड़े।
परिजनों ने उन्हें खून से लथपथ देखा तो घर में चीख-पुकार मच गई। आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। इसके बाद पुलिस को घटना की सूचना दी गई।
पुलिस टीम ने घायल बबलू को तत्काल चौसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच
शास्त्रों के मुताबिक, अगर आटा गूंथकर उसे बिल्कुल गोल और प्लेन छोड़ दिया जाए, तो यह घर में नकारात्मकता ला सकता है. आइए जानते हैं कि आटे पर उंगलियों की छाप छोड़ने के पीछे का धार्मिक और वास्तु कारण क्या है.
रसोई में काम करते हुए आपने अक्सर अपनी दादी-नानी या घर की महिलाओं को देखा होगा कि वे आटा गूंथने के बाद उस पर अपनी उंगलियों से निशान बना देती हैं. कुछ लोग इसे सिर्फ एक आदत या परंपरा मान लेते हैं. लेकिन, सनातन धर्म और वास्तु शास्त्र में इसे खाने से जुड़ा खास नियम बताया गया है.
पितरों और पिंड दोष से जुड़ा है कनेक्शन
वास्तु शास्त्र के मुताबिक, जब आटे को पूरी तरह से गोल, चिकना और प्लेन छोड़ दिया जाता है, तो वह पिंड का रूप ले लेता है. हिंदू धर्म में पिंड का उपयोग मृत पूर्वजों (पितरों) को श्राद्ध या तर्पण के दौरान अर्पित करने के लिए किया जाता है. ऐसी मान्यता है कि जब रसोई में पिंड के आकार का गोल आटा रखा होता है, तो पितर या अन्य अदृश्य नकारात्मक शक्तियां उसकी ओर आकर्षित होने लगती हैं. गूंथे हुए आटे पर उंगलियों के निशान बनाकर उसकी उस विशेष गोलाई (पिंड के आकार) को तोड़ा जाता है. ऐसा करने से वह अन्न जीवित मनुष्यों के खाने योग्य और शुद्ध बना रहता है.
नकारात्मक ऊर्जा से बचाव
वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोई घर को पूरे घर का ऊर्जा केंद्र माना जाता है. प्लेन और गोल रखा हुआ आटा रसोई में नकारात्मक ऊर्जा को सक्रिय कर सकता है. इससे घर के सदस्यों के बीच बिना बात के कलह, मानसिक तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ने की संभावना रहती है. उंगलियों के निशान बनाने से आटे की ऊर्जा बदल जाती है और वह केवल परिवार के पोषण के लिए सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत बनता है.
मां अन्नपूर्णा का सम्मान और बरकत
हिंदू संस्कृति में अन्न को ब्रह्म माना गया है और रसोई को मां अन्नपूर्णा का निवास स्थान. आटे की गोलाई को तोड़कर उसे रोटियां बनाने के लिए तैयार करना, मां अन्नपूर्णा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का एक तरीका है. माना जाता है कि नियम और परंपरा के अनुसार बनाया गया भोजन परिवार में सुख, समृद्धि और बरकत लाता है.
वैज्ञानिक नजरिया
धार्मिक कारणों के अलावा इसका एक व्यवहारिक पहलू भी है. पुराने समय में जब संयुक्त परिवार होते थे और रसोई में एक साथ कई काम चलते थे, तब आटे पर उंगलियों के निशान इस बात का संकेत होते थे कि यह आटा पूरी तरह से गूंथा जा चुका है और अब यह रोटी बनाने के लिए तैयार है. इससे रसोई में काम करने वाले दूसरे सदस्यों को भ्रम नहीं होता था
अहमदाबाद में सरकारी गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं ने खाने और पानी की गुणवत्ता को लेकर गंभीर शिकायतें सामने रखी हैं। गुजरात यूनिवर्सिटी के पास स्थित सरकारी समरस गर्ल्स हॉस्टल में छात्राओं का आरोप है कि उन्हें परोसे गए खाने में कीड़े मिले, जबकि पानी में छिपकली दिखाई दी। घटना की तस्वीरें सामने आने के बाद छात्राओं में नाराजगी बढ़ गई और उन्होंने एबीवीपी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर प्रदर्शन किया।
750 से ज्यादा छात्राएं रहती हैं हॉस्टल में
समरस गर्ल्स हॉस्टल में करीब 750 से अधिक छात्राएं रहती हैं। हॉस्टल में रहने वाली छात्राएं भोजन के लिए मेस की व्यवस्था पर निर्भर हैं। छात्राओं का कहना है कि खाने की गुणवत्ता को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन हर बार नोटिस जारी करने तक ही कार्रवाई सीमित रह गई।
छात्राओं के मुताबिक, पहले भी खाने में कीड़े मिलने की शिकायत सामने आई थी। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद संबंधित एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की गई।
पानी में छिपकली और खाने में कीड़े मिलने से बढ़ा आक्रोश
इस बार मामला तब ज्यादा गंभीर हो गया, जब छात्राओं ने पानी में छिपकली दिखाई देने और खाने में कीड़ा मिलने का दावा किया। छात्राओं ने इसकी तस्वीरें भी खींच लीं, जो बाद में सामने आईं। इसके
अक्सर विभागों में होता है कि एक इंसान दूसरे की परेशानी को समझता है.लेकिन सूरत से ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें परेशानी को समझने से बजाए उसे रिश्वत लेने के मौके में बदल दिया.
सूरत महानगरपालिका के वॉच एंड वार्ड विभाग में कार्यरत एक सिक्योरिटी ऑफिसर को एंटी करप्शन ब्यूरो ने 25 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है. आरोपी की पहचान शैलेष मणीलाल पारेख, सिक्योरिटी ऑफिसर, वर्ग-3, वॉच एंड वार्ड विभाग, तापीपुरा, सूरत महानगरपालिका के रूप में हुई है. आरोप है कि अधिकारी ने अपने ही विभाग में कार्यरत एक कर्मचारी से उसकी पत्नी की गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर के पास जाने के लिए ड्यूटी से छुट्टी देने और गैरहाजिरी का मेमो जारी नहीं करने के बदले 25 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी.
ACB से मिली जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता सूरत महानगरपालिका के वॉच एंड वार्ड विभाग में कार्यरत है. उसकी पत्नी गर्भवती हैं और गर्भावस्था के दौरान उन्हें समय-समय पर चिकित्सकीय जांच और उपचार के लिए डॉक्टर तथा अस्पताल जाना पड़ता था. पत्नी की मेडिकल जरूरतों के चलते शिकायतकर्ता को भी कई बार अपनी ड्यूटी के दौरान उनके साथ अस्पताल या डॉक्टर के पास जाना पड़ता था.
₹25000 दो, लगी रहेगी आज की अटेंडेंस
आरोप है कि इसी मामले को लेकर सिक्योरिटी ऑफिसर शैलेष मणीलाल पारेख ने शिकायतकर्ता से 25 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी.अधिकारी की ओर से कथित तौर पर कहा गया कि रकम देने के बाद उसे ड्यूटी के समय बाहर जाने की अनुमति दी जाएगी, उसकी गैरहाजिरी दर्ज नहीं की जाएगी और इस संबंध में कोई मेमो भी जारी नहीं किया जाएगा.
शिकायतकर्ता रिश्वत की रकम देने के पक्ष में नहीं था. इसके बाद उसने पूरे मामले की जानकारी एंटी करप्शन ब्यूरो को दी और आरोपी अधिकारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. शिकायत मिलने के बाद ACB ने मामले की प्राथमिक जांच की और रिश्वत के लेन-देन को पकड़ने के लिए ट्रैप की कार्रवाई की योजना बनाई थी.
ACB ने तैयार किया ट्रैप
28 सितंबर 2026 को ACB ने ट्रैप का आयोजन किया. तय योजना के अनुसार शिकायतकर्ता आरोपी सिक्योरिटी ऑफिसर के संपर्क में गया. इस दौरान रिश्वत की रकम को लेकर बातचीत हुई. ACB के अनुसार, आरोपी शैलेष पारेख ने शिकायतकर्ता से 25 हजार रुपए की रिश्वत की रकम स्वीकार कर ली.
रकम स्वीकारते ही आ धमकी ACB
आरोपी ने जैसे ही रिश्वत की रकम अपने कब्जे में ली, पहले से तैयार ACB की टीम ने मौके पर कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया. ACB की कार्रवाई सूरत महानगरपालिका के तापीपुरा स्थित मुख्य कार्यालय में सिक्योरिटी ऑफिसर के चेंबर में की गई. ट्रैप के दौरान आरोपी के पास से रिश्वत की पूरी रकम 25 हजार रुपए बरामद कर ली गई. इसके बाद ACB की टीम ने आरोपी को हिरासत में लेकर उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है.
क्या इससे पहले भी औरों से ली है रिश्वत?
ट्रैप कार्रवाई को सूरत ग्रामीण ACB पुलिस स्टेशन के पुलिस इंस्पेक्टर एस.डी. धोबी की अगुवाई में अंजाम दिया गया. ACB अब मामले में आगे की जांच कर रही है और यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी ने इससे पहले भी किसी कर्मचारी से इसी तरह की रिश्वत की मांग की थी या नहीं.
इस कार्रवाई के बाद सूरत महानगरपालिका के वॉच एंड वार्ड विभाग में भी हड़कंप मच गया है. फिलहाल ACB द्वारा गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ और मामले से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है.
कभी खूबसूरती और मॉडलिंग की दुनिया में पहचान बनाने वाली एक महिला की जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया कि उसका नाम बाद में अपराध की दुनिया से जुड़ने लगा। जिस चेहरे की चर्चा कभी फैशन और ग्लैमर की दुनिया में होती थी, वही चेहरा कुछ समय बाद एक बड़े ड्रग्स नेटवर्क की जांच में सामने आया।
कहा जाता है कि वह महिला अपनी खूबसूरती और ग्लैमरस अंदाज के लिए काफी मशहूर थी। उसने एक ब्यूटी कॉन्टेस्ट भी जीता था, लेकिन बाद में उसकी शादी से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद उससे यह खिताब वापस ले लिया गया। इसके बाद कुछ समय तक वह मीडिया की नजरों से दूर रही।
फिर उसकी जिंदगी में एक ऐसा दौर आया, जिसने सब कुछ बदल दिया।
मॉडलिंग से जुड़ी यह महिला बाद में विदेश चली गई, जहां उसकी मुलाकात एक चर्चित ड्रग डीलर से हुई। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और कुछ समय तक उनका रिश्ता चला। हालांकि बाद में दोनों अलग हो गए।
यहीं से उसकी जिंदगी अपराध की दुनिया की ओर मुड़ने लगी।
बताया जाता है कि इसके बाद उसने कथित तौर पर ड्रग्स के कारोबार से जुड़ा नेटवर्क खड़ा करना शुरू किया। उसकी ग्लैमरस पहचान और लोगों पर पड़ने वाला प्रभाव इस नेटवर्क में एक खास भूमिका निभाने लगा।
धीरे-धीरे उसके संपर्क का दायरा बढ़ता गया। अलग-अलग देशों की कुछ महिलाएं भी कथित तौर पर इस नेटवर्क से जुड़ती चली गईं। मॉडलिंग और ग्लैमर की दुनिया से जुड़े चेहरों के इस्तेमाल ने इस पूरे मामले को और चर्चा में ला दिया।
कुछ ही समय में जांच एजेंसियों को इस नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलने के संकेत मिलने लगे। मामला सिर्फ एक छोटे गिरोह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई देशों तक इसके तार पहुंचने की बात सामने आई।
लेकिन अपराध की दुनिया में बढ़ती यह चमक ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी।
एक दिन उसके नेटवर्क से जुड़ी एक मॉडल बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित ड्रग्स के साथ पकड़ी गई। बरामदगी की मात्रा इतनी ज्यादा थी कि जांच एजेंसियों का ध्यान सीधे इस पूरे नेटवर्क की ओर गया।
इसके बाद मुख्य संदिग्ध महिला की तलाश तेज कर दी गई।
कई महीनों तक जांच चलती रही और आखिरकार पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उस पर ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े गंभीर आरोप लगे और अदालत की प्रक्रिया शुरू हुई।
जिस महिला ने कभी मॉडलिंग और ग्लैमर की दुनिया में अपना नाम बनाया था, उसकी जिंदगी अब पूरी तरह बदल चुकी थी।
उसकी कहानी इस बात का उदाहरण बन गई कि चमक-दमक और खूबसूरती के पीछे छिपी जिंदगी हमेशा वैसी नहीं होती जैसी बाहर से दिखाई देती है। एक समय जिस चेहरे को लोग मॉडल के रूप में जानते थे, वही चेहरा बाद में अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स मामले की वजह से सुर्खियों में आ गया।
शाम का वक्त था। पुलिस अधिकारी अपने कार्यालय में दिनभर के काम निपटा ही रहे थे कि तभी एक पुराना मुखबिर उनके पास पहुंचा। उसके चेहरे पर इस बार अलग ही उत्साह था।
उसने कहा, “साहब, इस बार खबर बहुत बड़ी है। अगर समय रहते कार्रवाई हुई तो लाखों रुपये के नकली नोट बरामद हो सकते हैं।”
पुलिस अधिकारी ने तुरंत पूरी बात बताने को कहा।
मुखबिर ने बताया कि एक लग्जरी कार में कुछ लोग घूम रहे हैं। कार पर वीआईपी नंबर और लालबत्ती लगी है। देखने में ये लोग किसी बड़े परिवार से जुड़े लगते हैं, लेकिन उनके पास बड़ी मात्रा में दो हजार रुपये के संदिग्ध नोट हैं।
सूचना मिलते ही पुलिस ने आसपास के रास्तों पर निगरानी बढ़ा दी।
काफी देर तक गाड़ियों की जांच होती रही, लेकिन संदिग्ध कार दिखाई नहीं दी। रात गहराती गई और पुलिस का इंतजार बढ़ता गया।
फिर आधी रात के करीब दूर से एक सफेद रंग की लग्जरी कार आती दिखाई दी।
कार पर वीआईपी नंबर और लालबत्ती लगी थी।
पुलिस ने इशारा कर उसे रोक लिया।
ड्राइवर ने शीशा नीचे किया और नाराजगी भरे अंदाज में पूछा, “हमें क्यों रोका गया है?”
पुलिस ने कहा, “गाड़ी की तलाशी होगी। सभी लोग नीचे उतरिए।”
कार में बैठे लोगों ने खुद को प्रभावशाली परिवार से जुड़ा बताया और पुलिस को समझाने की कोशिश की कि उनकी गाड़ी में कोई गलत सामान नहीं है।
लेकिन पुलिस ने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया।
जैसे ही कार की तलाशी शुरू हुई, अंदर रखे तीन बैग देखकर पुलिस की नजरें ठहर गईं।
बैग खोलते ही उनमें दो हजार रुपये के नोटों की गड्डियां दिखाई दीं।
पहली नजर में नोट बिल्कुल असली जैसे लग रहे थे।
लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में नई करेंसी और मुखबिर की सूचना ने पुलिस का शक बढ़ा दिया।
तीनों लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई।
यहीं से एक ऐसी कहानी सामने आई, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
पूछताछ में पता चला कि पकड़ा गया युवक पढ़ा-लिखा था और तकनीकी क्षेत्र में अपना कारोबार शुरू कर चुका था। उसने पढ़ाई के दौरान कई प्रोजेक्ट तैयार किए थे और भविष्य में अपना बड़ा कारोबार खड़ा करने का सपना देख रहा था।
उसके साथ पकड़ी गई युवती उसकी करीबी रिश्तेदार थी। वह भी अच्छी पढ़ाई कर चुकी थी और कुछ समय से उसके कारोबार में काम कर रही थी।
शुरुआत में दोनों का ध्यान कारोबार बढ़ाने पर था। लेकिन धीरे-धीरे पैसों की जरूरत बढ़ने लगी।
इसी दौरान दोनों ने गलत रास्ता चुन लिया।
पुलिस के मुताबिक, पहले थोड़ी मात्रा में नकली नोट बाजार में चलाकर देखे गए। जब किसी को शक नहीं हुआ तो उनका हौसला बढ़ गया।
इसके बाद इस काम में कुछ और लोग जुड़ते चले गए।
एक कारोबारी भी कथित तौर पर इस नेटवर्क का हिस्सा बन गया। फिर नकली नोटों को अलग-अलग लोगों के जरिए बाजार में खपाने की कोशिश शुरू हुई।
देखते ही देखते यह छोटा सा खेल बड़े नेटवर्क में बदल गया।
पुलिस की जांच में सामने आया कि नकली नोट तैयार करने के लिए एक अलग जगह का इस्तेमाल किया जा रहा था। वहां से प्रिंटर, कागज और दूसरे सामान समेत कई चीजें बरामद किए जाने का दावा किया गया।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क में कुछ और लोग काम कर रहे थे, जिनकी तलाश शुरू कर दी गई।
लेकिन कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा वह लग्जरी कार थी, जिसमें बैठकर आरोपी लाखों रुपये के नकली नोट लेकर घूम रहे थे।
कार पर वीआईपी नंबर और लालबत्ती लगी थी।
आरोप था कि इसी दिखावे के सहारे लोगों को प्रभावित किया जाता था और पुलिस की नजर से बचने की कोशिश की जाती थी।
गिरफ्तारी के बाद जब मामले की जानकारी बाहर आई तो कुछ लोग पुलिस के पास अपनी शिकायत लेकर पहुंचे।
उन्होंने बताया कि उन्हें भी ऐसे नोट दिए गए थे, जिन्हें वे असली समझकर आगे इस्तेमाल कर चुके थे।
जांच आगे बढ़ी तो बैंक खातों और पैसों के लेन-देन की भी पड़ताल शुरू हुई।
बरामद नोटों को विशेषज्ञ जांच के लिए भेजा गया। जांच में नोटों के नकली होने की पुष्टि होने के बाद मामला और गंभीर हो गया।
इसके बाद आरोपियों को अदालत में पेश किया गया और न्यायिक प्रक्रिया शुरू हुई।
इस पूरे मामले ने एक अजीब तस्वीर सामने रखी।
जिस युवक ने पढ़ाई के बाद अपना कारोबार खड़ा करने और नई तकनीक के जरिए पहचान बनाने का सपना देखा था, वही कथित तौर पर जल्दी पैसा कमाने के लालच में अपराध के रास्ते पर पहुंच गया।
एक लग्जरी कार, वीआईपी होने का दिखावा और लाखों रुपये की नकली करेंसी ने उसके पूरे राज से पर्दा उठा दिया।
जिस कार को देखकर लोग रास्ता छोड़ देते थे, उसी कार ने आखिरकार पुलिस को उस कथित नकली नोटों के नेटवर्क तक पहुंचा दिया।
शाम का वक्त था। सुरेश अपनी किराने की दुकान पर जाने की तैयारी कर रहा था। तभी उसकी पत्नी कमला का फोन बजा। फोन उठाते ही कमला के चेहरे के भाव बदल गए। कुछ देर तक वह चुपचाप सामने देखती रही और फिर फोन रख दिया।
सुरेश ने पूछा, “क्या हुआ? किसका फोन था?”
कमला ने धीमी आवाज में कहा, “तुम्हें एक बात बतानी है… हमारी बेटी नंदिनी किसी लड़के के साथ घूमती है।”
सुरेश के हाथ वहीं रुक गए।
“किस लड़के के साथ?”
कमला ने बताया कि पड़ोस की एक रिश्तेदार ने फोन करके कहा है कि नंदिनी को गांव के बाहर अक्सर एक युवक अमन के साथ देखा जा रहा है।
सुरेश का चेहरा गुस्से से तमतमा उठा।
“तुम्हें पता है वह किस परिवार का लड़का है?”
कमला ने सिर झुका लिया।
“सुना है दूसरी जाति का है…”
इतना सुनते ही सुरेश ने कहा, “आज नंदिनी से बात करनी पड़ेगी। अगर बात सच निकली तो उसका कॉलेज जाना भी बंद कर देंगे।”
बेटी के घर लौटते ही शुरू हुआ सवाल-जवाब
नंदिनी शाम को कॉलेज से घर लौटी तो उसे देखते ही समझ आ गया कि घर का माहौल बदला हुआ है।
मां ने उससे सीधे पूछा, “कहां थी?”
“कॉलेज में थी।”
“अमन के साथ भी कॉलेज जाती हो?”
नंदिनी कुछ पल चुप रही। फिर उसने कहा, “हां, हम दोनों एक-दूसरे को पसंद करते हैं।”
कमला को जैसे झटका लगा।
नंदिनी ने आगे कहा, “अमन पढ़ा-लिखा है, नौकरी की तैयारी कर रहा है। वह मेरा सम्मान करता है। हम शादी करना चाहते हैं।”
लेकिन परिवार इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं था।
सुरेश ने साफ शब्दों में कह दिया कि वह अपनी बेटी की शादी परिवार की पसंद से ही करेगा।
नंदिनी ने भी अपनी बात रखी।
“अगर शादी करूंगी तो अमन से ही करूंगी। मुझे जाति देखकर किसी इंसान से रिश्ता तय नहीं करना।”
यह बात सुनकर घर में विवाद और बढ़ गया।
युवक के परिवार पर भी बढ़ा दबाव
नंदिनी और अमन को अलग करने के लिए दोनों परिवारों की ओर से दबाव बढ़ने लगा। अमन के घरवालों ने भी उसे समझाया कि वह इस रिश्ते से पीछे हट जाए, क्योंकि गांव में बात फैल चुकी थी।
लेकिन दोनों एक-दूसरे से शादी करने के फैसले पर कायम रहे।
इस बीच परिवार के कुछ लोगों ने दोनों को धमकाने की भी कोशिश की। उन्हें डर था कि अगर दोनों ने अपनी मर्जी से शादी कर ली तो गांव में परिवार की प्रतिष्ठा पर सवाल उठेंगे।
नंदिनी अपनी सहेली से फोन पर कहती थी कि वह किसी के दबाव में आकर अपना फैसला नहीं बदलेगी।
अचानक खेत में मिली दोनों की लाश
दो दिन बाद गांव के बाहर एक खेत में नंदिनी और अमन के शव मिलने की खबर फैल गई।
पुलिस मौके पर पहुंची तो दोनों की मौत हो चुकी थी। शुरुआती तौर पर मामला आत्महत्या का बताया जाने लगा, लेकिन घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला।
परिवार के लोगों ने दावा किया कि दोनों ने शायद साथ मरने का फैसला किया होगा।
लेकिन पुलिस को मामला इतना सीधा नहीं लगा।
दोनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और घटनास्थल से सबूत जुटाए गए। पुलिस ने दोनों परिवारों और उनके परिचितों से पूछताछ शुरू कर दी।
गांव में फैल गई अलग-अलग चर्चाएं
घटना के बाद गांव में तरह-तरह की बातें होने लगीं। कोई इसे प्रेम प्रसंग का दुखद अंत बता रहा था तो कोई दोनों की हत्या की आशंका जता रहा था।
नंदिनी की मां कमला अपनी बेटी की मौत से टूट चुकी थी।
उसे बार-बार वही बात याद आ रही थी जब उसकी बेटी ने कहा था कि वह अमन के साथ अपनी जिंदगी बिताना चाहती है।
कमला के मन में सवाल उठ रहा था कि अगर परिवार ने उनकी बात मान ली होती तो क्या आज दोनों जिंदा होते?
जांच ने बदल दी कहानी की दिशा
पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो मामला और पेचीदा होता गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल से मिले सबूतों के आधार पर पुलिस ने मौत की परिस्थितियों की बारीकी से जांच शुरू की।
जांच अधिकारियों ने दोनों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और आखिरी समय में उनके संपर्क में रहे लोगों की जानकारी जुटाई।
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही थी कि दोनों खेत तक खुद पहुंचे थे या किसी ने उन्हें वहां बुलाया था।
अब सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या यह वाकई आत्महत्या थी या प्रेम संबंध और परिवार की कथित इज्जत के विवाद में दोनों की जान ली गई?
जांच पूरी होने के बाद ही इस सवाल का जवाब सामने आने की उम्मीद थी।
कमला के लिए मगर कहानी का सच कुछ भी हो, उसकी बेटी हमेशा के लिए उससे दूर जा चुकी थी।
जिस बेटी के भविष्य के लिए परिवार ने इतने सपने देखे थे, वही बेटी अब एक ऐसी कहानी बन चुकी थी, जिसमें प्यार, परिवार का दबाव और समाज की सोच—तीनों आमने-सामने खड़े थे।
और सबसे बड़ा सवाल आज भी यही था—क्या दो बालिग लोगों के अपने जीवन का फैसला करने से किसी परिवार की ‘इज्जत’ सच में खत्म हो जाती है, या असली नुकसान तब होता है जब उस फैसले का जवाब हिंसा से दिया जाता है?
उत्तर प्रदेश से सामने आई एक वारदात ने रिश्तों और तथाकथित इज्जत के नाम पर होने वाली हिंसा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक नाबालिग लड़की की उसके ही पिता ने हत्या कर दी। लड़की की गांव के ही एक युवक से दोस्ती थी और इसी बात को लेकर पिता कथित तौर पर नाराज चल रहा था।
मामला एकता थाना क्षेत्र के एक गांव का बताया जा रहा है। घटना सितंबर की शुरुआत की है। पुलिस के मुताबिक, करीब 17 साल की किशोरी कुछ दिन पहले बिना बताए घर से चली गई थी। देर रात जब वह वापस लौटी तो परिवार को उसके एक युवक से संपर्क और दोस्ती की जानकारी हुई। इसके बाद घर में तनाव का माहौल बताया गया।
बेटी की दोस्ती से नाराज था पिता
बताया जा रहा है कि लड़की की गांव के ही एक युवक से दोस्ती थी। परिवार को यह रिश्ता पसंद नहीं था। घटना वाले दिन लड़की घर पर अकेली थी। उसका भाई काम के सिलसिले में बाहर गया हुआ था, जबकि मां भी किसी काम से घर से बाहर थी।
इसी दौरान आरोप है कि पिता ने बेटी से विवाद किया। विवाद इतना बढ़ गया कि उसने कथित तौर पर धारदार कृषि उपकरण से उस पर हमला कर दिया। गंभीर चोट लगने के बाद लड़की की मौत हो गई।
हत्या के बाद खुद पुलिस को दी जानकारी
घटना के बाद आरोपी पिता ने कथित तौर पर खुद पुलिस को सूचना दी। पुलिस पूछताछ में उसने बेटी की हत्या करने की बात स्वीकार किए जाने का दावा किया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, आरोपी ने परिवार की कथित ‘इज्जत’ का हवाला दिया था।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। मामले में पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की।
आगरा में पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
आगरा में इससे पहले भी प्रेम संबंध या परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी को लेकर युवतियों की हत्या के मामले सामने आते रहे हैं। एक मामले में युवती ने परिवार की इच्छा के खिलाफ दूसरे समुदाय में शादी की थी। इसके बाद उसकी हत्या का आरोप उसके परिजनों पर लगा था।
एक अन्य मामले में भी प्रेम संबंध की जानकारी सामने आने के बाद युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। पुलिस ने जांच के दौरान परिवार के सदस्यों की भूमिका की जांच की थी।
‘इज्जत’ के नाम पर बेटी की जान लेना बना गंभीर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि परिवार की कथित प्रतिष्ठा या सामाजिक दबाव के नाम पर किसी की जिंदगी खत्म करने का अधिकार आखिर किसे है। प्रेम संबंध या शादी को लेकर परिवार में असहमति हो सकती है, लेकिन हिंसा और हत्या किसी भी स्थिति में गंभीर अपराध है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। घटना के पीछे वास्तविक विवाद क्या था, हत्या किस परिस्थिति में हुई और इसमें अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं, इन सभी बिंदुओं की जांच के बाद तस्वीर पूरी तरह साफ होने की उम्मीद है।
गुजरात के सूरत से चोरी की एक ऐसी घटना सामने आई है, जहां चोरी करने पहुंचे दो युवक खुद ही मुसीबत में फंस गए। दोनों चोरी के इरादे से एक बंद कारखाने में दाखिल हुए थे, लेकिन अंदर जाने के बाद उन्हें बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला। कई घंटे तक रास्ता तलाशने के बाद जब कोई रास्ता नहीं मिला तो दोनों खिड़की से लोगों को आवाज लगाकर मदद मांगने लगे।
कारखाने के अंदर से रात के समय ‘बचाओ-बचाओ’ की आवाज सुनकर आसपास के लोगों को शक हुआ। उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची तो पता चला कि दो युवक कारखाने के अंदर फंसे हुए हैं। इसके बाद उन्हें बाहर निकालने के लिए फायर ब्रिगेड की मदद ली गई।
चोरी करने के इरादे से बंद कारखाने में घुसे थे
मामला सूरत के खटोदरा GIDC इलाके में बमरोली रोड का है। जानकारी के मुताबिक, पांडेसरा के आशापुरी इलाके में रहने वाला 18 वर्षीय रोशन बिनखादर सहानी अपने एक नाबालिग साथी के साथ रविवार शाम एक लूम्स कारखाने में दाखिल हुआ था।
बताया जा रहा है कि दोनों ने कारखाने में काम बंद होने का फायदा उठाया और चोरी के इरादे से अंदर प्रवेश किया। उन्हें उम्मीद थी कि सामान लेने के बाद वे आसानी से बाहर निकल जाएंगे। हालांकि, अंदर जाने के बाद उनकी मुश्किल बढ़ गई।
अंधेरे में भूल गए बाहर निकलने का रास्ता
कारखाने के अंदर पहुंचने के बाद दोनों युवक कथित तौर पर बाहर निकलने का रास्ता तलाशने लगे, लेकिन उन्हें रास्ता नहीं मिला। अंधेरा होने की वजह से परेशानी और बढ़ गई। दोनों काफी देर तक इधर-उधर घूमते रहे, लेकिन बाहर जाने का रास्ता नहीं खोज सके।
समय बीतने के साथ दोनों घबरा गए। आखिरकार उन्होंने खिड़की से बाहर झांककर आसपास मौजूद लोगों से मदद मांगना शुरू कर दिया।
रात में सुनाई दी बचाओ-बचाओ की आवाज
कारखाने के अंदर से अचानक ‘बचाओ-बचाओ’ की आवाज सुनकर आसपास के लोग हैरान रह गए। लोगों को लगा कि इमारत के अंदर कोई व्यक्ति मुसीबत में फंस गया है। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
खटोदरा थाने की PCR वैन मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने स्थिति का जायजा लिया तो पता चला कि दो युवक कारखाने के अंदर फंसे हुए हैं। उन्हें बाहर निकालने के लिए फायर ब्रिगेड को बुलाया गया।
फायर ब्रिगेड ने काटी खिड़की की ग्रिल
सूचना मिलने के बाद मजूरा फायर स्टेशन की टीम बमरोली रोड स्थित एसके नगर-03, कोमल सर्कल पेट्रोल पंप के पास पहुंची। दोनों युवक तीन मंजिला इमारत के एक हिस्से में फंसे हुए थे।
फायर ब्रिगेड की टीम ने खिड़की तक पहुंचकर लोहे की ग्रिल काटी और दोनों युवकों के बाहर निकलने का रास्ता बनाया। इसके बाद दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
बाहर आते ही पुलिस ने हिरासत में लिया
रेस्क्यू के बाद PCR पुलिस ने दोनों युवकों को हिरासत में लिया और खटोदरा थाने ले गई। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि दोनों कथित तौर पर चोरी करने के इरादे से कारखाने में घुसे थे। इनमें से एक युवक नाबालिग बताया जा रहा है।
खटोदरा पुलिस इंस्पेक्टर नितिन भरवाड़ ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों युवक चोरी के इरादे से कारखाने में दाखिल हुए थे। पुलिस अब चोरी के प्रयास को लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।
उत्तर प्रदेश के औरैया में ओवरटेक को लेकर हुए विवाद के बाद एक महिला द्वारा स्कॉर्पियो के शीशे तोड़ने का मामला सामने आया है। घटना औरैया-जालौन चौराहे के पास की बताई जा रही है। महिला ने लोहे की रॉड से स्कॉर्पियो के शीशों पर कई वार किए, जिससे गाड़ी के शीशे टूट गए। घटना के दौरान आसपास मौजूद लोग मौके पर जमा हो गए।
मामले को लेकर महिला ने औरैया सदर कोतवाली में शिकायत भी दी है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।
दिल्ली जा रही थी महिला, ओवरटेक को लेकर हुआ विवाद
जानकारी के मुताबिक, देवनपुर, कानपुर देहात निवासी कुमकुम देवी अपने पति के साथ वाहन से दिल्ली जा रही थीं। जब वे औरैया के पास पहुंचीं, तभी एक कार और काले रंग की स्कॉर्पियो ने उन्हें ओवरटेक किया।
महिला का आरोप है कि स्कॉर्पियो सवार व्यक्ति ने साइड को लेकर उनके साथ गाली-गलौज की। कुछ दूरी आगे जाने के बाद स्कॉर्पियो को कथित तौर पर उनकी गाड़ी के आगे लगा दिया गया।
विवाद बढ़ने के बाद रॉड से तोड़े शीशे
महिला के मुताबिक, जब उन्होंने गाली देने की वजह पूछी तो स्कॉर्पियो सवार लोगों ने उनके साथ अभद्रता और मारपीट करने की कोशिश की। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई।
मामला बढ़ने पर आसपास के लोगों ने बीच-बचाव किया। इसी दौरान स्कॉर्पियो सवार लोग अपनी गाड़ी छोड़कर वहां से चले गए।
इसके बाद महिला ने लोहे की रॉड उठाई और सड़क किनारे खड़ी स्कॉर्पियो के शीशों पर वार करना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में गाड़ी के कई शीशे टूट गए।
पुलिस ने शुरू की मामले की जांच
घटना के बाद महिला ने सदर कोतवाली पहुंचकर पुलिस को लिखित शिकायत दी। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और विवाद से जुड़े लोगों से पूछताछ की जा रही है।
फिलहाल पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद की शुरुआत किस वजह से हुई और दोनों पक्षों के बीच वास्तव में क्या हुआ था। मामले में सामने आए आरोपों की भी जांच की जा रही है।