तिरुपति अपराध : तिरुपति ग्रामीण मंडल में ओटेरू राष्ट्रीय राजमार्ग के पास घटी घटना ने सनसनी मचा दी है। कुरनूल जिले के अडोनी निवासी मेस्त्री श्रीनिवासुलु (35) की इसी इलाके में बेरहमी से हत्या कर दी गई। रात में शराब पीने गए अज्ञात लोगों ने उन पर हमला किया। तिरुपति में मेस्त्री श्रीनिवासुलु की हत्या से स्थानीय लोग स्तब्ध हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
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तिरुपति में फोरमैन की हत्या
घटना का विवरण इस प्रकार है:
श्रीनिवास तिरुपति में काम के सिलसिले में रहते हैं और राजमिस्त्री का काम करके अपना जीवन यापन करते हैं। घटना वाली रात, जब वह शराब पी रहे थे, तभी हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया। उनके बीच क्या बात हुई, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन उन्होंने अचानक उन पर हमला कर दिया। उन्होंने कहीं से मिली सीमेंट की ईंटें उठाईं और श्रीनिवास के सिर पर वार किया। सिर में गंभीर चोट लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
तिरुपति अपराध: पुलिस संदिग्धों की तलाश कर रही है
सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया। हत्या के पीछे व्यक्तिगत विवाद या किसी अन्य कारण का पता लगाने के लिए जांच तेज कर दी गई है। घटनास्थल से जुटाए गए सबूतों के आधार पर आरोपी को पकड़ने के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। पुलिस ने कहा कि आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
उत्तर प्रदेश के एक शहर से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग शिक्षक कथित तौर पर कई दिनों तक अपने ही घर में बंद रहे। आरोप है कि उनकी पत्नी उन्हें कमरे में बंद कर मायके चली गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आसपास के लोग भी ताला खोलने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
बताया जा रहा है कि पत्नी घर छोड़ते समय कुछ दिनों का खाना बनाकर रख गई थी। जब वह खाना खत्म हो गया, तब बुजुर्ग के भाई ने खिड़की के रास्ते उन्हें भोजन पहुंचाना शुरू किया। कई दिनों तक यही सिलसिला चलता रहा।
पड़ोसियों ने दी पुलिस को सूचना
काफी दिन बीतने के बाद एक पड़ोसी ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने बुजुर्ग को बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन वह कथित तौर पर इतने डरे हुए थे कि उन्होंने पहले दरवाजा न खोलने की बात कही। बाद में पुलिस ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला।
पहले भी कई बार हो चुकी थी ऐसी घटना
बुजुर्ग ने बताया कि यह पहली बार नहीं था। उनका दावा है कि उनकी पत्नी पहले भी कई बार उन्हें कमरे में बंद करके बाहर जा चुकी है। इस बार भी कुछ दिनों के लिए खाना बनाकर रखा गया था और उसके बाद उनके भाई ने खिड़की के जरिए भोजन पहुंचाया।
मामले की जांच जारी
घटना सामने आने के बाद पुलिस ने पूरे मामले की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पक्षों से पूछताछ कर तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मैनपुर क्षेत्र के बहुचर्चित आकाश कश्यप हत्याकांड का पुलिस ने पर्दाफाश करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। वारदात में शामिल एक विधि से संघर्षरत बालक को भी संरक्षण में लिया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मामूली विवाद ने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया और आरोपियों ने युवक पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। इससे पहले मृतक के परिजनों ने हत्या का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की थी।
मैनपुर पुलिस के अनुसार, 3 जुलाई 2026 को आकाश कश्यप की संदिग्ध मौत के मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू की गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चिकित्सकीय परीक्षण और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि युवक की मौत गंभीर मारपीट के कारण हुई। इसके बाद पुलिस ने मामले को हत्या में तब्दील कर संदिग्धों से पूछताछ शुरू की।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने सामूहिक रूप से मारपीट करना स्वीकार किया। उनकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त दो लकड़ी के डंडे भी बरामद किए गए। पुलिस ने इस मामले में देवकुमार निषाद (20), भीखम यादव (18), मनीष यादव (19), लक्की नेताम (19), लोकेश यादव (23) और डिगेंद्र निर्मलकर (18) को गिरफ्तार किया है। वहीं एक 17 वर्षीय विधि से संघर्षरत बालक के विरुद्ध किशोर न्याय अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस ने सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं एसडीओपी के पर्यवेक्षण में मैनपुर थाना पुलिस की विशेष टीम ने की।
मामूली विवाद के बाद अचानक भड़की हिंसा
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि घटना किसी पूर्व नियोजित साजिश का परिणाम नहीं था, बल्कि मामूली विवाद के बाद अचानक भड़की हिंसा ने एक युवक की जान ले ली। हालांकि पुलिस अब इस बात की भी गहन जांच कर रही है कि मारपीट के पीछे कोई पुरानी रंजिश, आपसी दुश्मनी या अन्य कारण तो नहीं था। विवेचना अभी जारी है और नए तथ्य सामने आने पर आरोपियों के खिलाफ अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।
जोगुलम्बा गडवाल अपराध: खेत के पास सो रहे एक युवक की निर्मम हत्या..! यह घटना मालदकल मंडल के उलिगेपल्ली गांव में घटी। पुलिस मौके पर पहुंची… जोगुलम्बा गडवाल जिले के मालदकल मंडल के उलिगेपल्ली गांव में एक दुखद घटना घटी। बुधवार रात खेत के पास सो रहे 22 वर्षीय बोया महेश नामक युवक की निर्मम हत्या कर दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। हत्या के पूरे विवरण अभी तक ज्ञात नहीं हो पाए हैं।
उलिगेपल्ली में हुई क्रूर हत्या की घटना
जोगुलाम्बा गडवाल अपराध: जांच जारी
हत्या के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने जांच तेज कर दी है ताकि पता चल सके कि यह कोई पुराना विवाद था या कोई और कारण। पूरी जानकारी जुटाने के लिए वे महेश के परिवार के सदस्यों और स्थानीय लोगों से पूछताछ कर रहे हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हर पहलू से जांच कर रही है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर स्पष्टता की प्रतीक्षा है।
कोंडागांव। जिले के फरसगांव और केशकाल थाना क्षेत्र में शिक्षकों को विभिन्न बैंकों से पर्सनल लोन दिलाने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक अंतरजिला संगठित गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। करीब तीन महीने तक चली तकनीकी और वित्तीय जांच के बाद पुलिस ने गिरोह के पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों से मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, लैपटॉप, डेस्कटॉप कंप्यूटर, डायरी और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार अब तक इस गिरोह ने 43 शिक्षकों को अपना शिकार बनाया है और उनसे करीब 10 से 12 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। हालांकि कुछ पीड़ित शिक्षकों का कहना है कि बदनामी और सामाजिक संकोच के कारण कई लोग अब भी सामने नहीं आए हैं। उनका दावा है कि जिले में 150 से 200 शिक्षक इस तरह की ठगी का शिकार हो सकते हैं।
शिकायतों से खुला करोड़ों की ठगी का राज
मामले का खुलासा तब हुआ जब फरसगांव निवासी संजय कोडोपी ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि उन्हें और उनके साथियों को विभिन्न बैंकों से पर्सनल लोन दिलाने के नाम पर करीब दो करोड़ रुपये की ठगी की गई।
इसी तरह बड़ेडोंगर निवासी अनंत कुमार निर्मलकर ने करीब चार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई। वहीं केशकाल क्षेत्र के देवेन्द्र किशोर खवास, योगेश्वर बैद्य सहित अन्य शिक्षकों ने भी करोड़ों रुपये की ठगी की रिपोर्ट पुलिस को दी।
इन शिकायतों के आधार पर फरसगांव और केशकाल थानों में कुल चार अलग-अलग अपराध दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की गई।
ऐसे फंसाए जाते थे शिक्षक
जांच में सामने आया कि आरोपी लंबे समय से संगठित तरीके से इस पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। गिरोह पहले शिक्षकों से संपर्क करता और कम समय में कई बैंकों से बड़ी राशि का पर्सनल लोन दिलाने का भरोसा देता।
इसके बाद बैंक कर्मचारियों और लोन एजेंटों के माध्यम से अलग-अलग बैंकों में लोन आवेदन करवाए जाते। लोन स्वीकृत होने के बाद शिक्षकों को केवल 40 प्रतिशत राशि दी जाती, जबकि शेष 60 प्रतिशत रकम आरोपियों और उनके सहयोगियों के विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करा ली जाती थी।
आरोपी पीड़ितों को भरोसा दिलाते थे कि दो से तीन वर्षों के भीतर पूरा लोन, ब्याज और एचआरए सहित चुका दिया जाएगा। लेकिन कुछ समय बाद आरोपी रकम लेकर फरार हो जाते थे और पूरा कर्ज शिक्षकों के सिर पर छोड़ देते थे।
फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंकों से कराया लोन
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने कई मामलों में फर्जी आधार कार्ड और कूटरचित दस्तावेज तैयार किए। कई शिक्षकों के पते में बदलाव कर नकली आधार कार्ड बनवाए गए और उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग बैंकों से लोन स्वीकृत कराया गया।
तीन महीने चली तकनीकी और वित्तीय जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा (आईपीएस) के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कपिल चंद्रा के मार्गदर्शन में एसडीओपी फरसगांव अभिनव उपाध्याय और एसडीओपी केशकाल अरुण नेताम के नेतृत्व में विशेष जांच टीम गठित की गई।
जांच के दौरान पुलिस ने पीड़ितों और आरोपियों के बैंक खातों का विस्तृत विश्लेषण किया। मोबाइल नंबरों की तकनीकी जांच, बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई। लगातार तीन महीने तक अलग-अलग जिलों में दबिश देने के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
ये आरोपी हुए गिरफ्तार
शिवशंकर दास (अंबिकापुर)
दिलीप कुमार सोनी (अंबिकापुर)
विरेंद्र तिर्की (जशपुर)
श्यामसुंदर जांगड़े (सारंगढ़)
अंशुमान सिंह (अंबिकापुर)
जब्त किए गए सामान
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, बैंक चेकबुक, एटीएम कार्ड, डायरी और रजिस्टर, लैपटॉप, डेस्कटॉप कंप्यूटर समेत अन्य महत्वपूर्ण बैंकिंग दस्तावेज जब्त किए हैं। इन सभी दस्तावेजों की जांच जारी है।
अन्य जिलों तक नेटवर्क फैले होने की आशंका
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, बैंक एजेंटों और संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि यह नेटवर्क प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी प्रकार की ठगी को अंजाम दे चुका है। इसी कारण जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
बैंकिंग व्यवस्था पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले ने बैंकिंग प्रणाली की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। जानकारी के अनुसार एक बैंक से लिया गया लोन क्रेडिट रिकॉर्ड (CIBIL/Loan Database) में अपडेट होने में लगभग 6 से 7 दिन का समय लग जाता है। इसी अंतराल का फायदा उठाकर आरोपी पीड़ितों के नाम पर दो से तीन दिनों के भीतर अलग-अलग बैंकों से कई पर्सनल लोन स्वीकृत करा लेते थे।
ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए सभी बैंकों के बीच रियल-टाइम क्रेडिट वेरिफिकेशन और लोन हिस्ट्री की तत्काल जांच की व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए, ताकि एक ही व्यक्ति को कम समय में कई बैंकों से समानांतर लोन मिलने की संभावना समाप्त हो सके।
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में नशे के काले कारोबार पर पुलिस ने जबरदस्त कार्रवाई की है। जिला पुलिस ने नशा तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत महज 48 घंटे के भीतर तीन अलग-अलग जगहों पर एक महिला समेत 7 तस्करों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से कुल 24.53 ग्राम चिट्टा बरामद किया है। बरामद चिट्टे की कीमत अवैध बाजार में लाखों रुपए बताई जा रही है। वहीं पुलिस ने तीनों मामलों में एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर तस्करों के पूरे नैटवर्क को खंगालना शुरू कर दिया है।
कंदरौर में रिहायशी मकान में दबिश, 11.20 ग्राम चिट्टे के साथ 5 गिरफ्तार
पहले मामले में थाना सदर की टीम ने कंदरौर क्षेत्र के एक रिहायशी मकान में दबिश देकर 11.20 ग्राम चिट्टे के साथ 5 लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने ये कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर अमल में लाई है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान सुरजीत सिंह उर्फ कालू निवासी गांव कंदरौर, तहसील सदर व जिला बिलासपुर, शंकर दयाल निवासी बल्ही-झलेड़ा, डाकघर बिनौला व जिला बिलासपुर, हंसराज निवासी घरबासड़ा, डाकघर चलैहली, तहसील घुमारवीं व जिला बिलासपुर, शीतल उर्फ डेजी निवासी डियारा व जिला बिलासपुर और विपिन कुमार निवासी मैहरन, डाकघर हरलोग, तहसील घुमारवीं व जिला बिलासपुर के रूप में हुई है। पुलिस ने पांचों आरोपियों के खिलाफ सदर थाने में केस दर्ज किया है।
कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर नाकाबंदी, बाइक सवार से 8.48 ग्राम चिट्टा बरामद
दूसरी मामले में स्पैशल डिटैक्शन टीम ने कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर एक बाइक सवार को 8.48 ग्राम चिट्टे के साथ दबोचा है। जानकारी के अनुसार टीम ने पट्टा के समीप नाकाबंदी की हुई थी। इस दौरान एक बाइक सवार को रोककर जब तलाशी ली गई तो उसके कब्जे से 8.48 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ। इस मामले में पुलिस ने बाइक सवार अंकुर सैणी निवासी घरबासड़ा, डाकघर व तहसील बल्ह, जिला मंडी को गिरफ्तार किया है। इसके खिलाफ भी पुलिस थाना सदर में मामला दर्ज किया गया है।
पुराने सलापड़ पुल के पास 4.85 ग्राम चिट्टे के साथ तस्कर काबू
तीसरे मामले में बरमाणा थाना पुलिस ने पुराने सलापड़ पुल के पास नाका लगाया हुआ था। इसी दौरान पुलिस ने हरदयाल सिंह निवासी सलापड़, डाकघर सुदाहन, तहसील सुंदरनगर व जिला मंडी को चैकिंग के लिए रोका। तलाशी लेने पर उसके कब्जे से 4.85 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ। पुलिस ने आरोपी हरदयाल को गिरफ्तार कर थाना बरमाणा में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
तस्करों की सप्लाई चेन खंगाल रही पुलिस : एसपी
बिलासपुर के एसपी अभिषेक धीमान ने इन तीनों मामलों की पुष्टि करते हुए कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने बताया कि पुलिस अब इन मामलों में मादक पदार्थ की खरीद-फरोख्त, सप्लाई चेन और इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य सफेदपोश लोगों की भूमिका की गहन जांच कर रही है। एसपी ने स्पष्ट किया कि बिलासपुर पुलिस नशा तस्करी के खिलाफ जीरो टॉलरैंस की नीति अपनाते हुए लगातार प्रभावी कार्रवाई कर रही है। साथ ही उन्होंने आम जनता से अपील की है कि वे अपने आसपास होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि समय पर एक्शन लिया जा सके।
Odisha Crime News: ओडिशा के नबरंगपुर जिले के डबुगांव थाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक 12 वर्षीय लड़के पर अपनी ही 4 साल की मासूम रिश्तेदार के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगा है. इस कृत्य के बाद पीड़ित बच्ची की स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है.
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बच्ची अपने घर के पास खेल रही थी, तभी उसी गांव के रहने वाले उसके एक नाबालिग रिश्तेदार ने उसके साथ कथित तौर पर इस वारदात को अंजाम दिया. बच्ची के पिता ने जब उसे गंभीर हालत में देखा, तो वे तुरंत उसे इलाज के लिए डबुगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले गए.
बच्ची की स्थिति देख किया गया रेफर
बच्ची की गंभीर शारीरिक स्थिति को देखते हुए, डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए नबरंगपुर जिला मुख्यालय अस्पताल रेफर कर दिया है. घटना के बाद पीड़ित बच्ची के पिता ने डबुगांव थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई.
नाबालिग लड़के को हिरासत में लेकर पूछताछ
पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. गुरुवार सुबह आरोपी नाबालिग लड़के को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है. डबुगांव थाना प्रभारी लक्ष्मी पराजा खुद इस पूरे मामले की निगरानी कर रही हैं.
बच्ची से उत्पीड़न का मामला दर्ज किया गया
SDPO ने मामले की जानकारी देते हुए बताया, “डबुगांव थाने में आज सुबह एक नाबालिग बच्ची से उत्पीड़न का मामला दर्ज किया गया है. डबुगांव IIC ने केस संख्या 160/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 62, 65(2), 486 और पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है. इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच जारी है.” फिलहाल बच्ची का इलाज जारी है और पुलिस जांच में जुटी है
Jaipur murder case: जयपुर के प्रताप नगर इलाके में सामने आई एक सनसनीखेज वारदात ने हर किसी को हैरान कर दिया है. जिस मां ने पति की मौत के बाद बेटी को पढ़ाया, परिवार को संभाला और दिव्यांग बेटे की देखभाल की, उसी मां की मौत की साजिश रचने का आरोप उसकी अपनी बेटी पर लगा है. पुलिस के मुताबिक सरकारी नौकरी, करोड़ों की संपत्ति और पारिवारिक अधिकार हासिल करने की चाह में यह पूरी योजना बनाई गई थी.
पति की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही थी निरज
मामला जयपुर की एयरपोर्ट कॉलोनी में रहने वाले परिवार से जुड़ा है. करीब ढाई वर्ष पहले लोअर कोर्ट में एलडीसी पद पर कार्यरत विजय वशिष्ठ उर्फ विजय शर्मा ने यहां अपना मकान बनवाया था. परिवार में उनकी पत्नी निरज शर्मा, बेटी आयुषी शर्मा और मानसिक रूप से दिव्यांग बेटा रहते थे. करीब एक वर्ष पहले विजय शर्मा का निधन हो गया. उस समय आयुषी ने 12वीं की परीक्षा पास की थी. पति की मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक और सामाजिक जिम्मेदारियों का बड़ा सवाल खड़ा हो गया था.
अनुकंपा नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद
विजय शर्मा की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति का मुद्दा सामने आया. आयुषी स्वयं नौकरी करना चाहती थी और शुरुआत में उसकी मां भी इसके पक्ष में थीं. इसी दौरान निरज शर्मा के भाई, जो स्वयं लोअर कोर्ट में एलडीसी हैं, उन्होंने निरज को समझाया कि वह पढ़ी-लिखी हैं और परिवार की जिम्मेदारियां बेहतर तरीके से संभाल सकती हैं. दिव्यांग बेटे की देखभाल और घर की जरूरतों को देखते हुए निरज शर्मा ने अपने दिवंगत पति के स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति स्वीकार कर ली. पुलिस के अनुसार यहीं से मां-बेटी के बीच तनाव बढ़ना शुरू हुआ.
मां के फैसले से नाराज होकर अलग रहने लगी आयुषी
पुलिस जांच के अनुसार मां द्वारा नौकरी स्वीकार किए जाने के बाद आयुषी नाराज हो गई. उसने एयरपोर्ट कॉलोनी का घर छोड़ दिया और कल्याण कॉलोनी स्थित अपने पिता के पुराने मकान में रहने लगी.
वहीं उसने अपने चचेरे भाई बलराम के साथ एलएलबी में दाखिला लिया. दोनों एक ही घर में रहने लगे. जांच एजेंसियों का दावा है कि इसी दौरान निरज शर्मा को रास्ते से हटाने की योजना तैयार की गई.
करोड़ों की जमीन और संपत्ति का लालच बना कथित वजह
पुलिस के अनुसार आयुषी ने कथित रूप से बलराम को साजिश में शामिल करने के लिए बड़ी संपत्तियों का लालच दिया. जांच में सामने आया कि आगरा रोड स्थित लगभग पांच करोड़ रुपये मूल्य की पांच बीघा जमीन और भरतपुर में करीब पांच करोड़ रुपये की चार बीघा जमीन का जिक्र किया गया. बताया गया कि मां की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति हासिल करने के साथ-साथ जयपुर के दोनों मकानों पर भी उसका अधिकार हो सकता था. इसी आर्थिक लाभ को कथित तौर पर हत्या की मुख्य वजह माना जा रहा है.
एक महीने पहले भी हुई थी कुचलने की कोशिश
जांच में यह भी सामने आया कि हत्या से लगभग एक महीने पहले निरज शर्मा को उनके घर के बाहर थार वाहन से कुचलने का प्रयास किया गया था. हालांकि उस समय वह बच गई थीं. घटना के बाद उन्हें किसी खतरे का आभास हो गया था. उन्होंने अपने भाई को पूरी बात बताई और बाहर निकलना कम कर दिया. सुरक्षा के लिए घर में जालियां लगवाई गईं और बाहर चार सीसीटीवी कैमरे भी लगवाए गए.
मां को घर से बाहर निकालने के लिए अपनाए गए कथित टोटके
पुलिस जांच में सामने आया कि सुरक्षा बढ़ने के बाद आरोपियों के लिए योजना को अंजाम देना मुश्किल हो गया. इसके बाद कथित तौर पर घर के बाहर नींबू-मिर्च, लाल सिंदूर और जलता हुआ नारियल फेंकने जैसी गतिविधियां शुरू की गईं. जांच एजेंसियों का मानना है कि इसका उद्देश्य निरज शर्मा को घर से बाहर निकलने के लिए मजबूर करना था ताकि उन पर हमला किया जा सके.
4 जुलाई को अंजाम दी गई साजिश
पुलिस के मुताबिक 4 जुलाई को निरज शर्मा अपने दिव्यांग बेटे को लेकर फिजियोथेरेपिस्ट के पास गई थीं. इसी दौरान आयुषी ने उन्हें किसी जरूरी काम का हवाला देकर घर लौटने के लिए कहा. जब निरज वापस लौट रही थीं, तब 60 फीट रोड पर पहले से मौजूद हमलावरों ने कथित तौर पर स्कॉर्पियो वाहन से उन्हें टक्कर मार दी. इस घटना में उनकी मौत हो गई. शुरुआत में इसे सड़क हादसा माना गया, लेकिन जांच के दौरान मामला हत्या का निकला.
सड़क हादसा दिखाने की थी पूरी तैयारी
पुलिस के अनुसार पूरी साजिश इस तरह बनाई गई थी कि घटना एक सामान्य हिट एंड रन दुर्घटना लगे. जांच में यह भी सामने आया कि आयुषी, उसके चचेरे भाई बलराम और कुछ अन्य लोगों को कथित रूप से इस योजना की जानकारी थी. साजिश के तहत वाहन से कुचलकर हत्या करने का फैसला लिया गया ताकि किसी को शक न हो और मामला दुर्घटना मानकर बंद हो जाए.
सीसीटीवी और तकनीकी साक्ष्यों ने खोली साजिश की परतें
हालांकि वारदात को दुर्घटना दिखाने की कोशिश ज्यादा दिन तक सफल नहीं हो सकी. पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की. जांच आगे बढ़ी तो हत्या के पीछे कथित पारिवारिक साजिश की परतें खुलती चली गईं. पुलिस ने कुछ ही दिनों में मामले का खुलासा कर दिया और आरोपियों को हिरासत में ले लिया.
गिरफ्तारी के बाद भी नहीं दिखा पछतावा
पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के दौरान आयुषी के व्यवहार में किसी तरह का पछतावा दिखाई नहीं दिया. वह लगातार सवालों को टालती रही और कई बार उलझाने वाले जवाब देती रही. मीडिया से बातचीत की कोशिशों के दौरान भी उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और कैमरे के सामने चुप्पी साधे रखी. पुलिस अब पूरे मामले में अन्य संभावित आरोपियों और साजिश से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है.
दक्षिण अफ़्रीका के उत्तरी केप प्रांत की राजधानी किम्बरली में पति ने पहले तो अपनी पत्नी के साथ दुष्कर्म किया फिर इसके बाद उसकी हत्या कर दी. हत्या के बाद पति ने आत्महत्या जैसा दिखाने की कोशिश की.अपने बच्चों के अलावा रोंडा एंडरसन के जीवन में संगीत का भी बहुत महत्व था. हैरत की बात यह है कि ऐसे में जब 29 वर्षीय महिला रोंडा एंडरसन बाथटब में करंट लगने से मृत पाई गई और उसके पास पानी में उसका मेन-पावर्ड ‘घेटो ब्लास्टर’ (पोर्टेबल रेडियो/टेप प्लेयर) चालू हालत में था तो ऐसा लगा कि यह मौत एक दुखद दुर्घटना थी. रोंडा एंडरसन अपने दो छोटे बच्चों के पिता माइकल थॉम्पसन से अलग हो गई थी, लेकिन ऐसा लगता था कि उसके पास जीने के लिए बहुत कुछ था. इसके बाद में कोरोनर ने भी माना कि उसकी दुखद मौत एक दुर्घटना थी और यह एक बेवकूफी भरी गलती का नतीजा थी.
वहीं, 25 साल बाद रोंडा एंडरसन की मौत का मामला तब एक नया मोड़ ले गया जब माइकल थॉम्पसन की अलग हो चुकी पत्नी किम्बरली भी मृत पाई गई. शुरुआत में यह मामला आत्महत्या जैसा लग रहा था. सुनवाई के दौरान जूरी को बताया गया कि 56 वर्षीय थॉम्पसन ने पिछले साल अगस्त में एक सुबह 43 वर्षीय किम्बरली का दुष्कर्म किया और फिर उसकी हत्या कर दी. उसने ऐसा आपत्तिजनक वीडियो देखने और किम्बरली के नए रिश्ते और तलाक की कार्रवाई के तहत भारी वित्तीय समझौते की मांग को लेकर मन में गुस्सा पालने के बाद किया था.
बिस्तर पर क्यों मिला था तस्वीरों का कॉलोज
इसके बाद उसने नॉर्थम्प्टन स्थित अपने घर में उसकी लाश के पास शराब की खाली बोतलें और गोलियों के पैकेट रखकर ऐसा माहौल बनाया जिससे लगे कि उसने आत्महत्या की है. माइकल थॉम्पसन ने उसके फोन से सोशल मीडिया पर मैसेज भी भेजे जिनमें दावा किया गया कि उसने शराब पी रखी थी. साथ ही उसने पुलिस और पैरामेडिक्स को यह बताने से पहले कि उसे बेडरूम में पत्नी बेसुध हालत में मिली है. उसके बिस्तर पर उसकी शादी की तस्वीर और उसकी दिवंगत बहन (जिसने आत्महत्या की थी) की तस्वीरों का एक कोलाज भी रखा.
हत्या के दो मामले में ठहराए गए दोषी
यहां पर बता दें कि माइकल थॉम्पसन (जो पहले डोरमैन और शौकिया बॉक्सर थे) को मिसेज थॉम्पसन के मर्डर, दुष्कर्म और न्याय की प्रक्रिया में बाधा डालने के दो मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद ‘डेली मेल’ ने अब मिस एंडरसन की मौत से जुड़ी जानकारी दी है.
अमेरिका में भारतीय इंजीनियर अविनाश ने पत्नी की हत्या कर लाश की फोटो गर्लफ्रेंड को भेजी. जानिए बंद बाथरूम और कड़वी स्मूदी के पीछे छिपे इस खौफनाक कत्ल का सच.
अमेरिका में एक भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर को अपनी पत्नी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. पुलिस का आरोप है कि उसने अपनी पत्नी का गला घोंटकर उसे मौत के घाट उतार दिया और अगले ही दिन उसकी लाश की तस्वीर भारत में रह रही अपनी गर्लफ्रेंड को भेज दी.
करीब 9 महीने तक चली लंबी और बारीकी से जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया है. वह फिलहाल पुलिस हिरासत में है और उसकी जमानत के लिए 5 मिलियन डॉलर (करीब 47 करोड़ रुपये) की भारी-भरकम राशि तय की गई है. अगर अदालत में उसका दोष साबित हो जाता है, तो उसे उम्रकैद की सजा हो सकती है.
आरोपी की पहचान 30 वर्षीय अविनाश नारने के रूप में हुई है, जो मूल रूप से तेलंगाना का रहने वाला है और अमेरिका में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करता है. अविनाश ने 5 जून 2025 को 27 वर्षीय रजिता सब्बिनेनी से शादी की थी.
शादी के महज 5 महीने बाद मिला पत्नी का शव
27 अक्टूबर 2025 को अविनाश ने खुद पुलिस को फोन किया और बताया कि उसकी पत्नी ने खुद को अंदर से बाथरूम में बंद कर लिया है और वह दरवाजा नहीं खोल रही है. जब पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दरवाजा तोड़ा, तो अंदर रजिता का शव पड़ा हुआ था. अविनाश ने पुलिस को गुमराह करने के लिए कहानी गढ़ी कि वह करीब 40 मिनट के लिए घर से बाहर गया था और जब वापस लौटा, तो पत्नी का कमरा अंदर से बंद मिला.
हालांकि, पुलिस ने जब अपार्टमेंट के ‘स्मार्ट लॉक’ और सुरक्षा प्रणाली के डिजिटल डेटा की जांच की, तो सच सामने आ गया. डेटा से साफ हुआ कि अविनाश के बाहर रहने के दौरान कोई भी दूसरा शख्स फ्लैट के अंदर नहीं आया था. इसके बाद पुलिस ने किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा हत्या किए जाने की आशंका को पूरी तरह खारिज कर दिया.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी साफ हो गया कि रजिता की मौत गला घोंटने के कारण दम घुटने से हुई थी. इसके बाद पुलिस ने इसे पूरी तरह हत्या का मामला मानकर जांच आगे बढ़ाई.
शादी के बाद भी गर्लफ्रेंड से जुड़ा रहा अविनाश
पुलिस तफ्तीश में यह दिल दहला देने वाला सच सामने आया कि अविनाश का भारत में एक महिला के साथ पिछले कई सालों से प्रेम प्रसंग चल रहा था. इसी बीच उसने रजिता के साथ अरेंज मैरिज कर ली. पुलिस के मुताबिक, उसकी गर्लफ्रेंड उसकी शादी में भी शामिल हुई थी और शादी के बाद भी दोनों लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे.
मर्डर वाले दिन भी अविनाश ने अपनी गर्लफ्रेंड से कम से कम चार बार बात की थी. कड़ी पूछताछ में उसने खुद कबूल किया कि पत्नी की मौत के अगले दिन उसने रजिता के शव की तस्वीर अपनी गर्लफ्रेंड को भेजी थी.
चैट से खुला राज
जांच के दौरान पुलिस ने रजिता और अविनाश के बीच के व्हाट्सएप चैट और मैसेज रिकवर किए. इन मैसेजेस से पता चला कि रजिता अक्सर शिकायत करती थी कि उसका पति जो ड्रिंक्स बनाता है, उनका स्वाद बहुत कड़वा होता है.
अपनी मौत वाले दिन भी रजिता ने अविनाश को मैसेज किया था कि उसके पति ने जो ‘स्मूदी’ बनाई है, उसका स्वाद किसी कड़वी दवाई या कफ सिरप जैसा लग रहा है. वहीं, जब पुलिस घटना के दिन घर पहुंची थी, तो अविनाश ने यह दावा किया था कि उसकी पत्नी की तबीयत ठीक नहीं थी और शायद कफ सिरप पीने के बाद चक्कर आने से वह बाथरूम में गिर गई.
रजिता की मौत के बाद, पुलिस ने कई महीनों तक डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स और अन्य पुख्ता सबूत जुटाए. आखिरकार, जुलाई 2026 में अविनाश से दोबारा कड़ी पूछताछ की गई और उसे सोची-समझी हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया.