Category: Gazab

  • राख के ढेर में मिला 2,000 साल पुराना अनोखा खजाना, घास से बनी चप्पलों ने वैज्ञानिकों को चौंकाया..

    राख के ढेर में मिला 2,000 साल पुराना अनोखा खजाना, घास से बनी चप्पलों ने वैज्ञानिकों को चौंकाया..

    राख के ढेर में मिला 2,000 साल पुराना अनोखा खजाना, घास से बनी चप्पलों ने वैज्ञानिकों को चौंकाया..

    स्पेन में पुरातत्वविदों को खुदाई के दौरान एक ऐसी खोज मिली है, जिसने प्राचीन इतिहास की कई परतें खोल दी हैं। शोधकर्ताओं को 2,000 वर्ष से अधिक पुरानी घास से बनी चप्पलें एक प्राचीन खदान के पास राख और कचरे के ढेर में मिली हैं। आश्चर्य की बात यह है कि सदियों तक राख में दबे रहने के बावजूद ये चप्पलें काफी हद तक सुरक्षित मिलीं।

    यह खोज स्पेन के उरियम (Urium) क्षेत्र में हुई, जो सेविल से करीब 55 मील दूर स्थित एक प्राचीन खनन स्थल है। पुरातत्वविदों को खुदाई के दौरान आठ चप्पलों के अवशेष मिले, जिन्हें एस्पार्टो (Esparto) घास से तैयार किया गया था। माना जाता है कि इनका इस्तेमाल रोमन साम्राज्य के आने से पहले आयरन एज के मजदूर किया करते थे।

    इस खोज पर आधारित अध्ययन वैज्ञानिक पत्रिका Pyrenae में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं के अनुसार, चप्पलें पहली शताब्दी ईसा पूर्व (BCE) की एक धातु कार्यशाला के पास स्थित राख के ढेर में मिलीं। उसी क्षेत्र में कई भट्टियां, कार्यस्थल और अन्य संरचनाएं भी मिली हैं, जिससे संकेत मिलता है कि यह स्थान उस समय औद्योगिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था।

    शोध में सामने आया कि ये चप्पलें कार्यशाला के अंदर नहीं, बल्कि पास के उस स्थान पर मिलीं जहां भट्टियों की राख और अन्य बेकार सामग्री फेंकी जाती थी। चप्पलों पर अधिक इस्तेमाल के स्पष्ट निशान मिले हैं, जिससे माना जा रहा है कि टूट-फूट जाने के बाद इन्हें कचरे के साथ फेंक दिया गया था।

    रेडियोकार्बन डेटिंग से चप्पलों की अलग-अलग आयु का भी पता चला। एक चप्पल का समय 28 से 124 ईस्वी (CE) के बीच का पाया गया, जबकि दूसरी 360 से 205 ईसा पूर्व (BCE) और तीसरी 175 से 56 ईसा पूर्व (BCE) की बताई गई। इससे संकेत मिलता है कि इस खनन क्षेत्र में कई सदियों तक लगातार काम होता रहा।

    पुरातत्वविदों का मानना है कि यह खोज आयरन एज के लोगों के दैनिक जीवन, उनके पहनावे, कार्य संस्कृति और उस समय इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक सामग्रियों को समझने में महत्वपूर्ण साबित होगी। राख की परतों ने इन जैविक वस्तुओं को लंबे समय तक सुरक्षित रखा, जिससे शोधकर्ताओं को प्राचीन मानव जीवन का एक दुर्लभ प्रमाण मिला है।

  • फटा हुआ दूध फेंकें नहीं, इससे बन सकती हैं 20 स्वादिष्ट मिठाइयाँ, जानिए एक आसान रेसिपी..

    फटा हुआ दूध फेंकें नहीं, इससे बन सकती हैं 20 स्वादिष्ट मिठाइयाँ, जानिए एक आसान रेसिपी..

    फटा हुआ दूध फेंकें नहीं, इससे बन सकती हैं 20 स्वादिष्ट मिठाइयाँ, जानिए एक आसान रेसिपी..

    घर में दूध फट जाए तो उसे बेकार समझकर फेंकने की जरूरत नहीं है। यदि दूध केवल गर्मी, नींबू या सिरके की वजह से फटा है और उसमें किसी तरह की खराब गंध नहीं है, तो उससे कई तरह की स्वादिष्ट मिठाइयाँ बनाई जा सकती हैं।

    फटे हुए दूध को छानने के बाद जो नरम हिस्सा बचता है, उसे छेना कहा जाता है। यही छेना कई लोकप्रिय भारतीय मिठाइयों का मुख्य आधार होता है।

    फटे हुए दूध से बनने वाली 20 लोकप्रिय मिठाइयाँ

    रसगुल्ला

    रसमलाई

    संदेश

    छेना मुरकी

    छेना की खीर

    छेना टोस्ट

    छेना बर्फी

    कलाकंद

    छेना लड्डू

    छेना मालपुआ

    छेना जलेबी

    राजभोग

    कमलाभोग

    छेना पोड़ा

    छेना गाजा

    छेना रोल

    छेना पेड़ा

    छेना हलवा

    मैंगो छेना मिठाई

    चॉकलेट छेना बाइट्स

    घर पर बनाएं स्वादिष्ट कलाकंद

    आवश्यक सामग्री

    फटे हुए दूध से तैयार छेना

    500 मिली फुल क्रीम दूध

    आधा कप चीनी

    आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर

    2 से 3 बड़े चम्मच दूध पाउडर (इच्छानुसार)

    कटे हुए बादाम और पिस्ता

    कुछ केसर के रेशे (इच्छानुसार)

    थोड़ा सा घी

    बनाने की विधि

    सबसे पहले फटे हुए दूध को सूती कपड़े में छान लें।

    छेने को एक बार साफ पानी से धो लें ताकि नींबू या सिरके का स्वाद निकल जाए।

    हल्का निचोड़ें लेकिन पूरी तरह सूखा न करें। छेने में थोड़ी नमी रहने दें।

    अब एक भारी तले की कड़ाही में फुल क्रीम दूध डालकर मध्यम आंच पर पकाएं।

    दूध लगभग आधा रह जाए तो उसमें तैयार छेना मिला दें।

    धीरे-धीरे चलाते रहें ताकि मिश्रण अच्छी तरह मिल जाए, लेकिन छेना पूरी तरह पेस्ट न बने। हल्का दानेदार टेक्सचर ही कलाकंद की खास पहचान है।

    अब इसमें चीनी डालें और लगातार चलाते रहें।

    जब मिश्रण दोबारा गाढ़ा होने लगे, तब इलायची पाउडर और चाहें तो दूध पाउडर मिला दें।

    एक प्लेट या ट्रे में हल्का घी लगाकर तैयार मिश्रण फैला दें।

    ऊपर से बादाम, पिस्ता और केसर डालकर हल्के हाथ से दबा दें।

    इसे कमरे के तापमान पर 2 से 3 घंटे या फ्रिज में लगभग 1 घंटे के लिए सेट होने दें।

    इसके बाद मनचाहे आकार में काटकर परोसें।

    स्वाद बढ़ाने के आसान टिप्स

    अंत में एक छोटा चम्मच देसी घी मिलाने से स्वाद और खुशबू बढ़ जाती है।

    यदि दानेदार कलाकंद पसंद है, तो छेने को ज्यादा न मसलें।

    केसर मिलाने से रंग और स्वाद दोनों बेहतर हो जाते हैं।

    कम मीठा पसंद हो तो चीनी की मात्रा अपनी पसंद के अनुसार कम रख सकते हैं।

    ध्यान रखें

    यदि दूध से बदबू आ रही हो या वह खराब हो चुका हो, तो उससे कोई भी मिठाई न बनाएं। केवल ताजा फटा हुआ दूध ही मिठाई बनाने के लिए इस्तेमाल करें।

    निष्कर्ष

    अगली बार यदि घर में दूध फट जाए तो उसे फेंकने की बजाय स्वादिष्ट मिठाइयों में बदलें। थोड़ी सी मेहनत और सही विधि अपनाकर आप घर पर ही बाजार जैसी लाजवाब मिठाइयाँ तैयार कर सकते हैं।

    curdled-milk-sweets | kalakand-recipe | phate-doodh-se-banane-wali mithaiyan
  • बारिश में लोहे के तवे और कड़ाही पर लग जाती है जंग? अपनाएं ये 4 आसान किचन हैक्स,,

    बारिश में लोहे के तवे और कड़ाही पर लग जाती है जंग? अपनाएं ये 4 आसान किचन हैक्स,,

    बारिश में लोहे के तवे और कड़ाही पर लग जाती है जंग? अपनाएं ये 4 आसान किचन हैक्स,,

    बरसात के मौसम में किचन की सबसे आम समस्याओं में से एक है लोहे के तवे और कड़ाही पर जंग लग जाना। कई बार बर्तन धोने के कुछ ही घंटों बाद उन पर लाल-भूरे रंग की परत दिखाई देने लगती है। इससे न केवल बर्तन की उम्र कम होती है, बल्कि उसमें खाना बनाना भी सुरक्षित और सुविधाजनक नहीं रहता।

    अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं, तो ये आसान घरेलू उपाय आपके लोहे के बर्तनों को लंबे समय तक जंग से बचाने में मदद कर सकते हैं।

    लोहे के बर्तनों पर जंग क्यों लगती है?

    जब लोहे के बर्तन लंबे समय तक नमी और हवा के संपर्क में रहते हैं, तो उनकी सतह पर आयरन ऑक्साइड बनने लगता है। यही परत जंग कहलाती है।

    बरसात के मौसम में हवा में नमी अधिक होने के कारण यह प्रक्रिया तेजी से होती है। यदि बर्तन धोने के बाद ठीक से न सुखाए जाएं, तो जंग और जल्दी लग सकती है।

    पहला उपाय

    बर्तन धोने के बाद उन्हें केवल सुखाने के लिए न छोड़ें।

    पहले साफ और सूखे कपड़े से अच्छी तरह पोंछें।

    इसके बाद 1 से 2 मिनट तक हल्की आंच पर गर्म करें ताकि अंदर बची हुई नमी भी पूरी तरह खत्म हो जाए।

    दूसरा उपाय

    बर्तन पूरी तरह सूख जाने के बाद उस पर खाने वाले किसी भी तेल की बहुत हल्की परत लगा दें।

    सरसों का तेल, रिफाइंड ऑयल या कोई भी कुकिंग ऑयल इस्तेमाल किया जा सकता है।

    यह पतली परत नमी और लोहे के बीच सुरक्षा कवच का काम करती है और जंग लगने की संभावना कम कर देती है।

    तीसरा उपाय

    लोहे के बर्तनों को कभी भी गीले सिंक में लंबे समय तक न छोड़ें।

    उन्हें हमेशा सूखी और हवादार जगह पर रखें।

    नम वातावरण में रखने से जंग तेजी से फैल सकती है।

    चौथा उपाय

    समय-समय पर लोहे के तवे और कड़ाही की सीजनिंग करें।

    इसके लिए बर्तन को अच्छी तरह साफ करके हल्का तेल लगाएं और कुछ मिनट तक गर्म करें।

    यह प्रक्रिया बर्तन की सतह पर प्राकृतिक सुरक्षा परत बना देती है, जिससे जंग लगने का खतरा कम होता है और खाना भी कम चिपकता है।

    यदि जंग लग जाए तो क्या करें?

    यदि बर्तन पर हल्की जंग दिखाई दे, तो उसे नमक और नींबू या बेकिंग सोडा की मदद से अच्छी तरह साफ करें।

    इसके बाद बर्तन को धोकर पूरी तरह सुखाएं, हल्का तेल लगाएं और दोबारा सीजनिंग करें।

    बहुत अधिक जंग लगे या सतह खराब हो चुके बर्तनों का उपयोग करने से बचें।

    कुछ जरूरी बातें

    लोहे के बर्तन धोने के बाद तुरंत सुखाएं।

    लंबे समय तक पानी में भिगोकर न रखें।

    बारिश के मौसम में नियमित रूप से तेल की हल्की परत लगाते रहें।

    समय-समय पर सीजनिंग करना न भूलें।

    निष्कर्ष

    बरसात के मौसम में थोड़ी सी सावधानी अपनाकर आप अपने लोहे के तवे और कड़ाही को लंबे समय तक जंग से सुरक्षित रख सकते हैं। सही तरीके से सुखाना, तेल लगाना, सूखी जगह पर रखना और नियमित सीजनिंग करना इन बर्तनों की उम्र बढ़ाने के सबसे आसान और प्रभावी उपाय हैं।

  • पसीने की गंध से आकर्षित होकर बिस्तर तक पहुंच सकता है यह सांप! ‘साइलेंट किलर’ के नाम से है बदनाम..

    पसीने की गंध से आकर्षित होकर बिस्तर तक पहुंच सकता है यह सांप! ‘साइलेंट किलर’ के नाम से है बदनाम..

    पसीने की गंध से आकर्षित होकर बिस्तर तक पहुंच सकता है यह सांप! ‘साइलेंट किलर’ के नाम से है बदनाम..

    Silent Killer Snake: बारिश का मौसम शुरू होते ही सांपों के निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे समय में विशेषज्ञ सबसे अधिक सावधानी कॉमन करैत (Common Krait) से बरतने की सलाह देते हैं। यह भारत के सबसे विषैले सांपों में गिना जाता है और अपनी खामोश लेकिन घातक प्रकृति के कारण इसे ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है।

    रात में सबसे ज्यादा सक्रिय रहता है

    स्नेक कैचर रवि मीणा के अनुसार कॉमन करैत दिन के मुकाबले रात में अधिक सक्रिय होता है। अंधेरा होते ही यह भोजन की तलाश में अपने बिल से बाहर निकलता है और कई बार इंसानी बस्तियों तक भी पहुंच जाता है।

    पसीने की गंध से हो सकता है आकर्षित

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह सांप इंसान के शरीर से आने वाली पसीने की गंध की ओर आकर्षित हो सकता है। इसी वजह से कई बार यह रात में घरों के भीतर और यहां तक कि बिस्तर के पास भी पहुंच जाता है। यदि सोते समय अनजाने में व्यक्ति का हाथ या पैर इस पर पड़ जाए, तो यह तुरंत काट सकता है।

    काटने का पता भी नहीं चलता

    कॉमन करैत के दांत बेहद छोटे होते हैं। इसके काटने पर अक्सर न ज्यादा दर्द होता है और न ही स्पष्ट घाव दिखाई देता है। कई लोग इसे मामूली कीड़े का काटना समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन जब तक शरीर में जहर का असर दिखाई देने लगता है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है।

    तंत्रिका तंत्र पर करता है हमला

    रवि मीणा के मुताबिक कॉमन करैत का जहर बेहद शक्तिशाली होता है और इसका सीधा असर शरीर के नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) पर पड़ता है। समय पर इलाज न मिलने पर शरीर की मांसपेशियां काम करना बंद कर सकती हैं, जिससे सांस लेने में गंभीर दिक्कत हो सकती है और मरीज की जान भी जा सकती है।

    ध्यान दें: यह दावा कि “कॉमन करैत का जहर कोबरा से कई गुना ज्यादा खतरनाक है” या “एक बार में 8–10 लोगों की जान ले सकता है” अलग-अलग स्रोतों में अलग तरह से बताया जाता है। इसलिए ऐसे दावों को निश्चित वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

    बारिश में रखें ये सावधानियां

    • रात में फर्श पर सोने से बचें।
    • सोने से पहले बिस्तर, चादर और कमरे के कोनों की अच्छी तरह जांच करें।
    • घर के आसपास झाड़ियां, लकड़ी और कबाड़ जमा न होने दें।
    • यदि सांप दिखाई दे तो उससे दूरी बनाए रखें और प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को बुलाएं।

    सांप काटने पर क्या करें?

    यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो घबराएं नहीं। झाड़-फूंक, तांत्रिक उपचार या घरेलू नुस्खों में समय बर्बाद करने के बजाय उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं। समय पर एंटी-स्नेक वेनम (ASV) और उचित चिकित्सकीय उपचार मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।

  • क्या भारत में थी दुनिया की पहली सभ्यता? इतिहासकार के दावे से छिड़ी नई बहस, लोथल बंदरगाह को बताया सबसे बड़ा सबूत..

    क्या भारत में थी दुनिया की पहली सभ्यता? इतिहासकार के दावे से छिड़ी नई बहस, लोथल बंदरगाह को बताया सबसे बड़ा सबूत..

    क्या भारत में थी दुनिया की पहली सभ्यता? इतिहासकार के दावे से छिड़ी नई बहस, लोथल बंदरगाह को बताया सबसे बड़ा सबूत..

    Civilisation in India: प्राचीन सभ्यताओं की उत्पत्ति को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। समुद्री इतिहासकार निक कॉलिंस ने दावा किया है कि दुनिया की पहली विकसित सभ्यता मेसोपोटामिया नहीं, बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप में विकसित हुई थी। उन्होंने गुजरात के लोथल को इस दावे का अहम प्रमाण बताते हुए कहा कि यहां दुनिया के सबसे प्राचीन ज्ञात डॉकयार्ड (बंदरगाह) में से एक मौजूद था।

    क्या है इतिहासकार का दावा?

    निक कॉलिंस का कहना है कि लंबे समय तक पश्चिमी इतिहास लेखन में मेसोपोटामिया (वर्तमान इराक) को सभ्यता का जन्मस्थल बताया जाता रहा, जबकि उपलब्ध पुरातात्विक और समुद्री व्यापार से जुड़े साक्ष्य भारतीय उपमहाद्वीप की उन्नत सभ्यता की ओर संकेत करते हैं।

    उनके अनुसार सिंधु-सरस्वती सभ्यता के नगरों में सुनियोजित सड़कें, जल निकासी व्यवस्था, मानकीकृत ईंटें, व्यापारिक नेटवर्क और विकसित शहरी व्यवस्था मौजूद थी, जो उस समय के लिए अत्यंत उन्नत मानी जाती है।

    लोथल को बताया सबसे बड़ा प्रमाण

    कॉलिंस ने गुजरात के लोथल में मिले विशाल ईंट-निर्मित ढांचे को प्राचीन डॉकयार्ड बताया। उनका कहना है कि यह समुद्री व्यापार के लिए विकसित बंदरगाह था, जहां से जहाजों का संचालन होता था।

    भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अनुसार भी लोथल सिंधु सभ्यता का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र था और यहां समुद्री गतिविधियों के प्रमाण मिले हैं। हालांकि, इस संरचना को लेकर विद्वानों के बीच अलग-अलग मत भी रहे हैं और इसके स्वरूप पर शोध जारी है।

    यूरोप से पहले विकसित समुद्री व्यापार?

    इतिहासकार का दावा है कि लोथल जैसी उन्नत समुद्री संरचना उस समय यूरोप में मौजूद नहीं थी। उनके अनुसार भारतीय उपमहाद्वीप से पश्चिम एशिया तक व्यापारिक संपर्क स्थापित थे और मोतियों, आभूषणों समेत कई वस्तुओं का निर्यात किया जाता था।

    आर्य आक्रमण सिद्धांत पर भी उठाए सवाल

    निक कॉलिंस ने अपने लेख में आर्य आक्रमण सिद्धांत पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भारतीय सभ्यता के विकास को लंबे समय तक पश्चिमी नजरिए से देखा गया। हालांकि, इस विषय पर इतिहासकारों, पुरातत्वविदों और आनुवंशिकी विशेषज्ञों के बीच आज भी विभिन्न मत मौजूद हैं और यह शोध का विषय बना हुआ है।

    इतिहासकारों की क्या राय है?

    प्राचीन सभ्यताओं की उत्पत्ति और विकास को लेकर अकादमिक जगत में कई सिद्धांत प्रचलित हैं। अधिकांश मुख्यधारा के इतिहासकार मेसोपोटामिया, मिस्र, सिंधु घाटी और चीन को दुनिया की प्रारंभिक प्रमुख सभ्यताओं में शामिल मानते हैं। इनमें से किसे “पहली सभ्यता” कहा जाए, इस पर अब भी शोध और बहस जारी है।

    नोट: निक कॉलिंस के विचार उनके व्यक्तिगत ऐतिहासिक विश्लेषण पर आधारित हैं। इन्हें इतिहासकारों के बीच सर्वसम्मत निष्कर्ष नहीं माना जाता। सभ्यताओं की उत्पत्ति, आर्य सिद्धांत और लोथल के स्वरूप जैसे विषयों पर अकादमिक जगत में विभिन्न मत मौजूद हैं।

  • धरती का अनोखा जानवर! गुस्सा आते ही सामने वाले पर थूक देता है, जानें इसके पीछे की वजह..

    धरती का अनोखा जानवर! गुस्सा आते ही सामने वाले पर थूक देता है, जानें इसके पीछे की वजह..

    धरती का अनोखा जानवर! गुस्सा आते ही सामने वाले पर थूक देता है, जानें इसके पीछे की वजह..

    दुनिया में लाखों जीव-जंतु पाए जाते हैं और हर प्रजाति की अपनी अलग पहचान होती है। कोई अपनी रफ्तार के लिए मशहूर है तो कोई अपनी ताकत या शिकार करने के तरीके के लिए। लेकिन एक ऐसा जानवर भी है, जो अपने अनोखे बचाव के तरीके के कारण पूरी दुनिया में जाना जाता है। यह है लामा (Llama), जो खतरा महसूस होने या गुस्सा आने पर सामने वाले पर थूक देता है।

    क्यों थूकता है लामा?

    लामा के लिए थूकना सिर्फ एक अजीब आदत नहीं, बल्कि आत्मरक्षा और चेतावनी देने का प्राकृतिक तरीका है। जब उसे लगता है कि कोई उसकी सीमा में दखल दे रहा है, उसे परेशान कर रहा है या उससे खतरा है, तो वह सामने वाले पर थूककर उसे दूर रहने का संकेत देता है।

    सिर्फ लार नहीं, पेट का पदार्थ भी फेंक सकता है

    यदि लामा हल्का नाराज होता है तो वह केवल लार फेंकता है। लेकिन जब वह बेहद गुस्से में होता है, तो उसके थूक में आधा पचा हुआ भोजन और पेट का तरल पदार्थ भी शामिल हो सकता है। इसकी गंध काफी तेज होती है, जिससे सामने वाला तुरंत दूर हटने की कोशिश करता है।

    किन परिस्थितियों में थूकते हैं लामा?

    विशेषज्ञों के अनुसार, लामा इन स्थितियों में सबसे ज्यादा थूकते हैं—

    • अपना वर्चस्व दिखाने के लिए
    • खाने को लेकर प्रतिस्पर्धा होने पर
    • खुद को खतरे में महसूस करने पर
    • तनाव या असहज स्थिति में
    • बार-बार परेशान किए जाने पर
    • गलत तरीके से पकड़ने या संभालने पर

    कई बार इंसान भी उनके निशाने पर आ सकते हैं, यदि वे उन्हें ज्यादा परेशान करें।

    थूकने से पहले देते हैं संकेत

    लामा आमतौर पर बिना वजह किसी पर थूकते नहीं हैं। इससे पहले वे कई तरह के संकेत देते हैं, जैसे—

    • कान पीछे की ओर कर लेना
    • सिर ऊंचा उठाना
    • गुनगुनाहट जैसी आवाज निकालना
    • बेचैन या तनावग्रस्त दिखाई देना

    यदि इन संकेतों के बाद भी खतरा दूर नहीं होता, तब वे थूककर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं।

    हर बार थूक एक जैसा नहीं होता

    लामा का थूक उनके गुस्से के स्तर पर निर्भर करता है। हल्की नाराजगी में वे केवल थोड़ा-सा थूक फेंकते हैं, जबकि अधिक आक्रामक होने पर वे पेट से निकला आधा पचा भोजन भी तेज़ी से सामने वाले की ओर उछाल सकते हैं।

    बेहद प्रभावी है यह बचाव का तरीका

    वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, लामा का यह व्यवहार हिंसक हमला करने के बजाय संघर्ष से बचने की रणनीति है। उनके थूक की तेज बदबू और अचानक होने वाली प्रतिक्रिया से अधिकांश शिकारी या अन्य जानवर पीछे हट जाते हैं। इस तरह बिना लड़ाई किए ही लामा खुद को सुरक्षित रखने में सफल हो जाते हैं।

  • खुदाई के दौरान मजदूर को मिली पिनों से भरी रहस्यमयी गुड़िया, कीलें निकालते ही बोला- ‘अब कोई आजाद हो गया होगा’, वीडियो ने छेड़ी बहस..

    सोशल मीडिया पर इन दिनों एक निर्माण स्थल का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में खुदाई कर रहे एक मजदूर को जमीन के भीतर से लकड़ी की एक ऐसी गुड़िया मिलती है, जिसमें कई पिन और कीलें चुभी हुई दिखाई देती हैं। इस अजीबोगरीब खोज के बाद मजदूर का दावा लोगों का ध्यान खींच रहा है।

    वीडियो में मजदूर बताता है कि खुदाई के दौरान उसे यह गुड़िया मिली। उसके मुताबिक, गुड़िया में बड़ी संख्या में पिन और कीलें लगी थीं। वह प्लास की मदद से एक-एक करके सभी पिन निकालता है और कहता है कि जिस व्यक्ति को इस गुड़िया के जरिए कथित तौर पर बांधा गया होगा, वह अब आजाद हो गया होगा।

    पिन निकालते समय मजदूर उन लोगों की भी आलोचना करता नजर आता है, जिन्होंने कथित तौर पर इस गुड़िया को जमीन में दबाया था। उसका मानना है कि इसे किसी टोने-टोटके या तांत्रिक मान्यता के तहत छिपाया गया होगा।


    हालांकि, इस वीडियो की वास्तविक लोकेशन की पुष्टि नहीं हो सकी है। इंटरनेट पर उपलब्ध रिपोर्ट्स में भी घटना का सटीक स्थान स्पष्ट नहीं बताया गया है। वायरल क्लिप को इंस्टाग्राम पर @lindaikejiblogofficial नाम के अकाउंट से साझा किया गया, जहां इसे लाखों बार देखा जा चुका है।

    वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की राय बंटी हुई है। कुछ यूजर्स इसे रहस्यमयी घटना मानते हुए मजदूर के दावे का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कई लोगों का कहना है कि ऐसी बातें केवल अंधविश्वास हैं और इनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। कई यूजर्स ने लोगों से तथ्यों और तर्क के आधार पर ऐसी घटनाओं को देखने की अपील भी की है।

  • बॉस की जान बचाने के लिए किडनी दान की, फिर नौकरी से निकालने का आरोप; सालों पुराना मामला फिर चर्चा में.

    बॉस की जान बचाने के लिए किडनी दान की, फिर नौकरी से निकालने का आरोप; सालों पुराना मामला फिर चर्चा में.

    बॉस की जान बचाने के लिए किडनी दान की, फिर नौकरी से निकालने का आरोप; सालों पुराना मामला फिर चर्चा में.

    अमेरिका का एक पुराना मामला एक बार फिर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें एक महिला कर्मचारी ने अपनी बॉस की जान बचाने के लिए किडनी दान करने की प्रक्रिया में हिस्सा लिया था। लेकिन बाद में महिला ने आरोप लगाया कि इस मानवीय कदम के बावजूद उसे सम्मान या सहयोग मिलने के बजाय नौकरी से निकाल दिया गया।

    रिपोर्टों के अनुसार, यह मामला साल 2011 का है और इसमें कर्मचारी डेबी स्टीवंस (Debbie Stevens) तथा उनकी बॉस जैकी ब्रूसिया (Jackie Brucia) का नाम सामने आया था।

    बताया जाता है कि डेबी की किडनी उनकी बॉस से सीधे मैच नहीं हुई। इसके बावजूद उन्होंने पीछे हटने के बजाय पेयर्ड किडनी एक्सचेंज (Paired Kidney Exchange) कार्यक्रम में भाग लिया। इस व्यवस्था के तहत डेबी ने अपनी किडनी एक अन्य मरीज को दान की, जबकि डोनर चेन के जरिए उनकी बॉस को किसी दूसरे उपयुक्त दाता की किडनी मिल गई। इस प्रक्रिया के बाद बॉस का सफल किडनी ट्रांसप्लांट हो सका।

    हालांकि, डेबी ने बाद में आरोप लगाया कि ऑपरेशन के बाद स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उन्हें छुट्टियां लेनी पड़ीं। इसी दौरान उन्हें कार्यस्थल पर प्रताड़ना का सामना करना पड़ा और अंततः यह कहते हुए नौकरी से निकाल दिया गया कि वे लंबे समय तक काम से अनुपस्थित रहती हैं।

    यह मामला बाद में अदालत तक पहुंचा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच अंततः गोपनीय (Confidential) समझौता हुआ, जिसके बाद कानूनी विवाद समाप्त हो गया। समझौते की शर्तें सार्वजनिक नहीं की गई थीं।

    सोशल मीडिया पर यह मामला फिर से चर्चा में आने के बाद लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई यूजर्स इसे मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा मामला बताते हुए कर्मचारी के साथ सहानुभूति जता रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

  • नई जैसी दिखेगी आपकी डेनिम जींस! बस धोने से पहले अपनाएं ये 7 आसान ट्रिक्स..

    नई जैसी दिखेगी आपकी डेनिम जींस! बस धोने से पहले अपनाएं ये 7 आसान ट्रिक्स..

    नई जैसी दिखेगी आपकी डेनिम जींस! बस धोने से पहले अपनाएं ये 7 आसान ट्रिक्स..

    डेनिम जींस लगभग हर किसी की वॉर्डरोब का अहम हिस्सा होती है। यह मजबूत, स्टाइलिश और लंबे समय तक चलने वाला कपड़ा माना जाता है। लेकिन अगर इसे सही तरीके से साफ और मेंटेन न किया जाए, तो इसका रंग फीका पड़ सकता है, कपड़ा ढीला हो सकता है या इसकी फिटिंग भी खराब हो सकती है।

    अगर आप चाहते हैं कि आपकी पसंदीदा जींस लंबे समय तक नई जैसी दिखे, तो इन आसान टिप्स को जरूर अपनाएं।

    1. बार-बार धोने से बचें

    हर बार पहनने के बाद जींस धोना जरूरी नहीं होता। यदि जींस पर कोई दाग नहीं है और उसमें दुर्गंध नहीं आ रही, तो उसे कई बार पहनने के बाद ही धोना बेहतर माना जाता है। इससे उसका रंग और फैब्रिक लंबे समय तक सुरक्षित रहता है।


    2. दाग लगे तो पूरी जींस धोने की बजाय वहीं साफ करें

    अगर जींस पर हल्का दाग लग गया है, तो पूरी जींस धोने के बजाय केवल दाग वाली जगह को हल्के साबुन और मुलायम कपड़े या पुराने नरम टूथब्रश की मदद से साफ करें। इससे बार-बार धुलाई की जरूरत नहीं पड़ती।


    3. धोने से पहले जींस को उल्टा कर लें

    वॉशिंग मशीन या हाथ से धोने से पहले जींस को अंदर की तरफ पलट दें। इससे बाहरी रंग सीधे डिटर्जेंट और घर्षण के संपर्क में नहीं आता, जिससे रंग लंबे समय तक बना रहता है।


    4. जिप और बटन हमेशा बंद रखें

    धुलाई से पहले जींस की जिप और सभी बटन बंद कर दें। इससे कपड़े का आकार बना रहता है और मशीन में जिप या बटन के खराब होने की संभावना भी कम हो जाती है।


    5. गहरे और हल्के रंग की जींस अलग-अलग धोएं

    डेनिम को हमेशा समान रंग वाले कपड़ों के साथ धोना बेहतर होता है। गहरे रंग की जींस को हल्के रंग के कपड़ों के साथ धोने से रंग छोड़ने का खतरा बढ़ सकता है।


    6. हल्के डिटर्जेंट का इस्तेमाल करें

    तेज या ब्लीच वाले डिटर्जेंट डेनिम के रंग और कपड़े को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए हमेशा माइल्ड डिटर्जेंट का उपयोग करें, खासकर गहरे रंग की जींस के लिए।


    7. ठंडे पानी से धोएं और फैब्रिक सॉफ्टनर से बचें

    गर्म पानी में जींस धोने से उसका रंग जल्दी फीका पड़ सकता है और कपड़ा सिकुड़ भी सकता है। इसलिए हमेशा ठंडे या सामान्य तापमान वाले पानी का इस्तेमाल करें।

    साथ ही, फैब्रिक सॉफ्टनर का अधिक उपयोग करने से डेनिम की बनावट प्रभावित हो सकती है। यदि जरूरत हो, तो हल्के डिटर्जेंट के साथ थोड़ा-सा सफेद सिरका इस्तेमाल किया जा सकता है।

    निष्कर्ष

    डेनिम जींस की सही देखभाल करना मुश्किल नहीं है। बस कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप अपनी जींस का रंग, फिटिंग और गुणवत्ता लंबे समय तक बरकरार रख सकते हैं। कम धुलाई, ठंडा पानी, हल्का डिटर्जेंट और सही तरीके से सुखाना—ये आदतें आपकी पसंदीदा जींस को लंबे समय तक नया जैसा बनाए रखने में मदद करेंगी।

  • ब्रेस्ट मिल्क बेचकर हर दिन हजारों रुपये कमा रही है महिला! 100 लीटर से ज्यादा दूध बेच चुकी, बॉडीबिल्डर भी हैं ग्राहक,,

    ब्रेस्ट मिल्क बेचकर हर दिन हजारों रुपये कमा रही है महिला! 100 लीटर से ज्यादा दूध बेच चुकी, बॉडीबिल्डर भी हैं ग्राहक,,

    ब्रेस्ट मिल्क बेचकर हर दिन हजारों रुपये कमा रही है महिला! 100 लीटर से ज्यादा दूध बेच चुकी, बॉडीबिल्डर भी हैं ग्राहक,,

    क्या कोई मां अपने अतिरिक्त ब्रेस्ट मिल्क को बेचकर अच्छी कमाई कर सकती है? अमेरिका से सामने आई एक महिला की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। दावा किया जा रहा है कि वह अपने अतिरिक्त ब्रेस्ट मिल्क को बेचकर हर दिन करीब 66 हजार रुपये तक की कमाई कर रही है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका की कीरा विलियम्स मां बनने के बाद अपने बच्चे की जरूरत से अधिक बनने वाले ब्रेस्ट मिल्क को बेच रही हैं। बताया जाता है कि अब तक वह 100 लीटर से ज्यादा दूध बेच चुकी हैं और उनके ग्राहक लगातार बढ़ रहे हैं।

    सबसे दिलचस्प बात यह है कि उनके ग्राहकों में सिर्फ वे माताएं ही नहीं हैं, जिन्हें किसी कारणवश अपने बच्चों के लिए पर्याप्त दूध नहीं बनता, बल्कि कुछ बॉडीबिल्डर और फिटनेस प्रेमी भी शामिल बताए जाते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इनमें से कुछ लोग इसे पोषक तत्वों से भरपूर मानते हुए खरीदते हैं।

    आखिर क्यों बढ़ी ब्रेस्ट मिल्क की मांग?

    विशेषज्ञों के अनुसार, मां का दूध नवजात शिशुओं के लिए सबसे पौष्टिक आहार माना जाता है। इसमें कई जरूरी पोषक तत्व, एंटीबॉडी और अन्य जैविक तत्व मौजूद होते हैं, जो शिशु के शुरुआती विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।

    कई महिलाओं में बच्चे की जरूरत से अधिक दूध बनने लगता है। ऐसे में कुछ देशों में सुरक्षित और नियमों के तहत अतिरिक्त ब्रेस्ट मिल्क दान करने या बेचने की व्यवस्था भी मौजूद है, जिससे जरूरतमंद माताओं और शिशुओं को मदद मिल सके।

    सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी कहानी

    महिला की कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। जहां कुछ लोग इसे अतिरिक्त संसाधन का बेहतर उपयोग बता रहे हैं, वहीं कुछ लोग इस तरह के कारोबार को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं।

    हालांकि, विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि ब्रेस्ट मिल्क का उपयोग केवल चिकित्सकीय सलाह और सुरक्षित स्रोतों के माध्यम से ही किया जाना चाहिए। स्वस्थ नवजात शिशुओं के लिए इसकी उपयोगिता वैज्ञानिक रूप से स्थापित है, लेकिन वयस्कों, विशेषकर बॉडीबिल्डर्स के लिए इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ के दावों के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

    इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल दावों पर भरोसा करने से पहले विश्वसनीय जानकारी और विशेषज्ञों की सलाह लेना हमेशा जरूरी है।