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  • सरकारी दफ्तर में ‘राजा बाबू’, शाही बर्थडे मनाने हाथी पर चढ़कर पहुंचे ऑफिस..​​​​​​

    सरकारी दफ्तर में ‘राजा बाबू’, शाही बर्थडे मनाने हाथी पर चढ़कर पहुंचे ऑफिस..​​​​​​

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    उज्जैन में बिजली कंपनी के एक सरकारी कार्यालय में जन्मदिन का जश्न सुर्खियों में आ गया है. यहां नियम-कायदों को ताक पर रखकर सहायक यंत्री का जन्मदिन मनाया गया. ढोल-नगाड़ों के साथ हाथी पर सवार होकर अधिकारी की एंट्री हुई और कार्यालय के भीतर केक काटकर पार्टी मनाई गई. अब इस जश्न का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभागीय कार्रवाई की बात कही जा रही है.

    मामला उज्जैन के मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के वल्लभ नगर जोन का है. यहां पदस्थ सहायक यंत्री रविकांत मालवीय के जन्मदिन समारोह के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं.

    कार्यालय के अंदर काटा गया केक
     वायरल वीडियो में सहायक यंत्री ढोल-धमाकों के बीच हाथी पर सवार होकर कार्यालय परिसर में प्रवेश करते दिखाई दे रहे हैं. इसके बाद कर्मचारी ढोल की थाप पर नाचते नजर आए. इतना ही नहीं, कार्यालय के अंदर ही केक काटकर जन्मदिन का जश्न मनाया गया.

    बताया जा रहा है कि रविकांत मालवीय का जन्मदिन रविवार को था, लेकिन सोमवार को समारोह के फोटो और वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया. सरकारी कार्यालय में इस तरह जश्न मनाए जाने को लेकर विभागीय नियमों और कार्यालय की गरिमा पर सवाल उठने लगे हैं.

    सहायक यंत्री को नोटिस जारी
    कार्यालय में इस तरह जन्मदिन मनाना उचित और कार्यालय की गरिमा के अनुरूप नहीं है. मामले में सहायक यंत्री को नोटिस जारी किया जाएगा. साथ ही भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सभी कर्मचारियों को भी स्पष्ट हिदायत दी जाएगी.

    वहीं, सहायक यंत्री रविकांत मालवीय ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनका जन्मदिन रविवार को कार्यालय की कॉलोनी परिसर में मनाया गया था. उनका कहना है कि कार्यालय 24 घंटे खुला रहता है और पार्टी के लिए अलग से कार्यालय नहीं खुलवाया गया. अब देखना होगा कि वायरल वीडियो के बाद बिजली कंपनी इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और सरकारी कार्यालय की गरिमा से जुड़े इस जश्न पर विभाग किस तरह का फैसला लेता है.

  • क्या कार पर किस करने से भी कटता है चालान? जानें यह नियम..​​​​​​

    क्या कार पर किस करने से भी कटता है चालान? जानें यह नियम..​​​​​​

    आमतौर पर कार को अलग दिखाने के लिए लोग स्टिकर, रैप या दूसरे मॉडिफिकेशन करवाते हैं, लेकिन ग्वालियर में कार को सजाने का तरीका बिल्कुल अलग था. कार की बॉडी पर लिपस्टिक से हजारों किस के निशान बनाए गए थे. उनकी गर्लफ्रेंड को सोशल मीडिया से यह आइडिया मिला और उसने सफेद कार पर किस मार्क्स बनाने का फैसला किया. करीब साढ़े तीन घंटे की मेहनत के बाद कार पर लगभग 3400 निशान बनाए गए.

    जब यह कार सड़क पर उतरी तो राह चलते लोगों की नजर इस पर टिक गई और कुछ ही समय में यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया. बाद में ट्रैफिक पुलिस ने कार को रोककर 5,500 रुपये का चालान काट दिया. अब ऐसे में जानते हैं कि इस स्थिति में ट्रैफिक रूल्स क्या हैं?

    क्या चालान का है प्रावधान?

    • मोटर व्हीकल एक्ट की बात करें तो कार पर किस करने पर कोई विशेष ट्रैफिक नियम नहीं बनाया गया है.
    • अगर कार किसी पब्लिक प्लेस या सुनसान जगह पर खड़ी है और वहां कोई आपत्तिजनक काम किया जाता है तो पुलिस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 294 के तहत कानूनी कार्रवाई या पूछताछ कर सकती है.
    • कार सड़क किनारे, मॉल या किसी पब्लिक पार्किंग में खड़ी है तो उसे कानूनन सार्वजनिक स्थान माना जाता है. बातचीत या साथ बैठना अपराध नहीं है, लेकिन आपत्तिजनक स्थिति होने पर पुलिस कार्रवाई कर सकती है जिसमें सजा का प्रावधान भी हो सकता है. पुलिस इस कंडीशन में 3 महीने तक की कैद या जुर्माना कर सकती है. एक चीज आपके लिए जानना जरूरी है कि ट्रैफिक पुलिस केवल यातायात नियमों के उल्लंघन जैसे गलत पार्किंग या स्टंट पर ही चालान काटती है.
    • सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो में आदित्य सिकरवार नाम के शख्स की गर्लफ्रेंड ने इंस्टाग्राम पर एक विदेशी वीडियो देखा था, जिसमें कार को किस के निशानों से सजाया गया था. वीडियो देखने के बाद उसने भी इसी तरह अपनी कार को सजाने का फैसला किया.
    • कार पर किए गए ये निशान किसी कंपनी प्रमोशन या प्रोफेशनल मॉडिफिकेशन का हिस्सा नहीं थे, कथित तौर पर प्यार जताने के एक निजी आइडिया का हिस्सा थे. सफेद कार होने की वजह से लिपस्टिक के निशान उस पर और ज्यादा साफ नजर आ रहे थे.
    • कार को इस तरह सजाने में करीब 3 घंटे 30 मिनट लगे. इस दौरान कार की अलग-अलग जगहों पर लगभग 3400 किस के निशान बनाए गए. इसके लिए कई लिपस्टिक का इस्तेमाल करना पड़ा और काफी समय तक लगातार काम करना पड़ा.
    • इतनी बड़ी संख्या में निशान होने के चलते कार का पूरा बाहरी हिस्सा दूसरी कारों से बिल्कुल अलग दिखाई दे रहा था. सफेद बॉडी पर लिपस्टिक के निशान दूर से ही नजर आ रहे थे, इसलिए सड़क पर निकलते ही यह कार लोगों का ध्यान खींचने लगी, जिससे पूरा मामला सामने आया.
    • जब आदित्य यह कार लेकर ग्वालियर की सड़कों पर निकले तो इसका अलग लुक देखकर लोग हैरान रह गए. सड़क पर चलने वाली कारों के बीच हजारों किस मार्क्स वाली सफेद कार आसानी से अलग नजर आ रही थी. इसी वजह से लोगों ने इसे देखा और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आने लगा. लेकिन जो चीज शुरुआत में मनोरंजन और आकर्षण का कारण बनी थी, वही बाद में कार मालिक के लिए परेशानी का कारण बन गई. ट्रैफिक पुलिस ने कार को रोककर उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए 5,500 रुपये का चालान काटा.

  • 12 लाख रुपये की बचत पर चूहों ने फेरा पानी, संदूक खोला तो उड़ गए होश; कुतरे हुए नोट देखकर पति-पत्नी रह गए हैरान..​​​​​​

    12 लाख रुपये की बचत पर चूहों ने फेरा पानी, संदूक खोला तो उड़ गए होश; कुतरे हुए नोट देखकर पति-पत्नी रह गए हैरान..​​​​​​

    उत्तर प्रदेश के गोंडा से जुड़ी एक हैरान करने वाली घटना सोशल मीडिया पर चर्चा में है। बताया जा रहा है कि एक महिला ने कई वर्षों तक थोड़े-थोड़े पैसे बचाकर करीब 12 लाख रुपये जमा किए थे। उसने यह रकम घर में रखे एक संदूक में संभालकर रखी थी। लेकिन जब काफी समय बाद संदूक खोला गया तो अंदर का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए।

    रिपोर्ट के मुताबिक, संदूक में रखे नोटों को चूहों ने कुतर दिया था। कई नोट बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके थे और उनके टुकड़े संदूक के अंदर बिखरे हुए थे। महिला ने कई साल तक जिस रकम को मेहनत से जमा किया था, उसका बड़ा हिस्सा खराब हो जाने से परिवार को बड़ा झटका लगा।

    कई सालों से बचा रही थी पैसे

    बताया जा रहा है कि महिला वर्ष 2019 से अपने पति को बताए बिना थोड़े-थोड़े पैसे जमा कर रही थी। समय के साथ उसकी बचत बढ़ती गई और रकम करीब 12 लाख रुपये तक पहुंच गई।

    महिला ने इस पैसे को घर में रखे एक संदूक में सुरक्षित समझकर रखा था। बताया गया कि उसका इरादा भविष्य में इस रकम से गहने खरीदने का था। लंबे समय तक संदूक नहीं खोला गया, जिसके कारण अंदर रखे नोटों को नुकसान होने की जानकारी भी नहीं हो सकी।

    संदूक खोला तो बिखरे मिले नोट

    जब महिला ने संदूक खोला तो वहां रखे नोटों की हालत देखकर वह हैरान रह गई। कई नोटों को चूहों ने कुतर दिया था। कुछ नोट फटे हुए थे, जबकि कई जगह सिर्फ करेंसी के टुकड़े नजर आ रहे थे।

    इसके बाद परिवार ने बचे हुए नोटों को अलग करना शुरू किया। जो नोट अपेक्षाकृत ठीक हालत में थे, उन्हें एक तरफ रखा गया और खराब नोटों को अलग किया गया।

    पति भी नोटों के टुकड़े करते रहे अलग

    इस घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें दंपती संदूक से निकले खराब नोटों और उनके टुकड़ों को अलग करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में बड़ी संख्या में क्षतिग्रस्त करेंसी दिखाई दे रही है।

    बताया जा रहा है कि बचत का बड़ा हिस्सा खराब हो चुका था। हालांकि, कितनी रकम पूरी तरह नष्ट हुई और कितनी करेंसी बैंक से बदली जा सकती है, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

    लोगों ने दी बैंक में पैसे रखने की सलाह

    घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने कहा कि घर में लंबे समय तक बड़ी रकम नकद रखने के बजाय उसे बैंक में सुरक्षित रखना बेहतर होता है।

    कुछ लोगों ने महिला की वर्षों की बचत बर्बाद होने पर दुख जताया। वहीं, कई यूजर्स ने यह सवाल भी उठाया कि इतनी बड़ी रकम को घर में रखने की जरूरत क्यों पड़ी।

    यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल रिपोर्ट्स के आधार पर चर्चा में है। रकम और घटना से जुड़ी सभी जानकारियों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है।

  • रोती हुई लड़की को ऑटो ड्राइवर ने दिया ऐसा सहारा, हिंदी नहीं जानता था फिर भी पूछ लिया- नाश्ता किया?​​​​​​

    रोती हुई लड़की को ऑटो ड्राइवर ने दिया ऐसा सहारा, हिंदी नहीं जानता था फिर भी पूछ लिया- नाश्ता किया?​​​​​​

    बेंगलुरु से सामने आई एक दिल छू लेने वाली घटना सोशल मीडिया पर चर्चा में है। भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां लोग अक्सर एक-दूसरे की परेशानी को नजरअंदाज कर देते हैं, वहीं एक ऑटो ड्राइवर ने एक अनजान लड़की की उदासी देखकर उसे सहज महसूस कराने की कोशिश की।

    इस पूरे अनुभव को आयुषी नाम की एक सोशल मीडिया यूजर ने साझा किया। उन्होंने बताया कि वह सुबह ऑफिस के लिए निकली थीं, लेकिन रास्ते में हुई एक घटना से उनका मन बेहद खराब हो गया। ऑटो में बैठने के बाद वह खुद को रोक नहीं पाईं और रोने लगीं।

    ड्राइवर ने रोती लड़की को देखा तो की बात

    आयुषी के मुताबिक, ऑटो ड्राइवर को हिंदी नहीं आती थी। इसके बावजूद उसने उनकी परेशानी को समझने की कोशिश की। उसने रास्तेभर उनसे बातचीत की, ताकि उनका ध्यान कुछ देर के लिए परेशानी से हट सके।

    भाषा की समस्या होने के बावजूद ड्राइवर ने जिस तरह उन्हें सहज करने की कोशिश की, वह आयुषी के लिए काफी भावुक अनुभव रहा।

    पूछा- क्या तुमने नाश्ता किया?

    आयुषी ने बताया कि ड्राइवर ने उनसे चिंता जताते हुए पूछा कि उन्होंने नाश्ता किया है या नहीं। उसने उन्हें भरोसा दिलाने की कोशिश की कि मुश्किल समय में अकेले महसूस करने की जरूरत नहीं है और ईश्वर पर विश्वास रखना चाहिए।

    एक अनजान व्यक्ति की यह छोटी सी कोशिश उस समय आयुषी के लिए काफी मायने रखती थी। उन्होंने ड्राइवर को प्यार से ‘अन्ना’ कहकर संबोधित किया।

    भाषा से बड़ी होती है इंसानियत

    आयुषी के मुताबिक, इस घटना ने उन्हें महसूस कराया कि किसी को सहारा देने के लिए हमेशा एक जैसी भाषा बोलना जरूरी नहीं होता। सामने वाले के प्रति संवेदना और अपनापन भी बहुत कुछ कह देता है।

    उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि जिस शहर में उन्हें किसी घटना की वजह से बुरा महसूस हुआ, उसी जगह उन्हें एक अजनबी से ऐसा अपनापन भी मिला, जिसने उनका नजरिया बदल दिया।

    सोशल मीडिया पर वायरल हुई कहानी

    आयुषी की पोस्ट सामने आने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने इसे शेयर किया। कई यूजर्स ने ऑटो ड्राइवर के व्यवहार की तारीफ की और कहा कि किसी परेशान व्यक्ति को कुछ पल का सहारा देना भी बहुत बड़ी बात होती है।

    वहीं, कुछ लोगों ने आयुषी को अपनी सुरक्षा का ध्यान रखने की सलाह भी दी। इस घटना ने सोशल मीडिया पर इंसानियत और अनजान लोगों से मिलने वाली छोटी-छोटी खुशियों को लेकर चर्चा छेड़ दी है।

  • भीख मांगकर गुजारा करती थी बुजुर्ग महिला, मौत के बाद घर से मिले नकदी से भरे बैग; रकम ने सबको चौंकाया..​​​​​​

    भीख मांगकर गुजारा करती थी बुजुर्ग महिला, मौत के बाद घर से मिले नकदी से भरे बैग; रकम ने सबको चौंकाया..​​​​​​

    कर्नाटक के मांड्या जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक बुजुर्ग महिला की मौत के बाद उसके किराए के घर से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने की बात सामने आई है। महिला के बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि वह लंबे समय से भीख मांगकर अपना गुजारा करती थी और अकेले रहती थी।

    मामला गुथालू इलाके का बताया जा रहा है। महिला की पहचान हूर उन्नीसा के तौर पर हुई है। उनकी मौत के बाद जब स्थानीय लोग घर पहुंचे तो वहां कई बैग रखे मिले। इनमें नकदी होने की जानकारी सामने आने के बाद इलाके में चर्चा शुरू हो गई।

    बहन की मौत के बाद अकेली रहती थी महिला

    स्थानीय लोगों के मुताबिक, हूर उन्नीसा पहले अपनी बहन के साथ रहती थीं। करीब दो साल पहले बहन की मौत के बाद वह अकेली रह गई थीं। इसके बाद वह भीख मांगकर अपना खर्च चलाती थीं।

    बताया गया कि वह काफी समय से बीमार भी थीं। 23 अगस्त को बीमारी के चलते उनकी मौत हो गई। इसके बाद जब आसपास के लोग उनके घर पहुंचे तो वहां रखे बैग देखकर सभी हैरान रह गए।

    घर में मिले कई बैग, नकदी की गिनती जारी

    रिपोर्ट के अनुसार, घर से 30 से ज्यादा बैग मिलने की बात सामने आई है। इनमें से कुछ बैगों में मौजूद नोटों की गिनती की जा चुकी थी। शुरुआती गिनती में करीब 8 से 9 लाख रुपये की रकम सामने आने की जानकारी है, जबकि बाकी बैगों की गिनती होना अभी बाकी बताया गया है।

    इसी आधार पर स्थानीय स्तर पर अनुमान लगाया जा रहा है कि घर में मौजूद कुल नकदी करीब 30 लाख रुपये तक हो सकती है। हालांकि, इस पूरी रकम की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अंतिम राशि नोटों की गिनती पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

    आखिर कहां से आई इतनी रकम?

    सबसे बड़ा सवाल यही है कि भीख मांगकर जीवन गुजारने वाली महिला के पास इतनी बड़ी मात्रा में नकदी कैसे जमा हुई। फिलहाल इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

    यह भी पता नहीं चल पाया है कि महिला ने यह पैसा कितने समय में जमा किया था और इसे घर में रखने की वजह क्या थी। मामले में आगे की जानकारी जांच और नकदी की आधिकारिक गिनती के बाद ही सामने आ सकेगी।

    मस्जिद की निगरानी में रखी गई रकम

    बताया गया है कि स्थानीय लोगों ने बरामद नकदी को सुरक्षित रखने के लिए गुथालू की मस्जिद की कस्टडी में सौंप दिया है। समुदाय के लोगों ने महिला के रिश्तेदारों को भी घटना की जानकारी दी है।

    अब रिश्तेदारों के पहुंचने के बाद बाकी बैगों में रखी रकम की गिनती पूरी किए जाने की बात कही जा रही है। इसके बाद यह तय होगा कि नकदी पर कानूनी रूप से किसका अधिकार बनता है और इसे आगे किस प्रक्रिया के तहत सौंपा जाएगा।

    फिलहाल यह मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि जिस महिला को लोग वर्षों से भीख मांगकर जीवन गुजारते हुए देखते थे, उसके घर से इतनी बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की बात ने हर किसी को हैरान कर दिया है।

  • बाजार में रेलवे की चादर ओढ़े घूमते दिखे 3 लोग, 4 साल में करोड़ों का बेडरोल गायब होने का दावा​​​​​​

    रेलवे की ट्रेनों में यात्रियों को दी जाने वाली चादर और दूसरे बेडरोल सामान के गायब होने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें तीन लोग बाजार जैसी जगह पर सफेद चादरें ओढ़े नजर आ रहे हैं। इन चादरों पर ‘वेस्टर्न रेलवे’ लिखा हुआ दिखाई देता है।

    वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया कि ये रेलवे के एसी कोच में यात्रियों को उपलब्ध कराई जाने वाली चादरें हो सकती हैं। हालांकि, वीडियो कहां का है और उसमें दिखाई दे रहे लोगों के पास ये चादरें कहां से आईं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए केवल वायरल पोस्ट के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा।

    रेलवे के बेडरोल को लेकर सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

    वायरल वीडियो के बीच रेलवे के बेडरोल सामान के गायब होने से जुड़े आंकड़े भी चर्चा में हैं। आरटीआई के जरिए रेलवे के अलग-अलग डिवीजनों से जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच बड़ी संख्या में बेडरोल आइटम के चोरी या गायब होने की शिकायतें दर्ज हुईं।

    आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में करीब 1.27 करोड़ से ज्यादा बेडरोल आइटम गायब होने की जानकारी सामने आई। इन सामानों की अनुमानित कीमत 104.51 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।

    गायब हुए सामान में करीब 46.54 लाख फेस टॉवल, 41.13 लाख बेडशीट, 23.59 लाख पिलो कवर, 12.95 लाख कंबल और 2.76 लाख तकिए शामिल बताए गए हैं।

    एसी कोच में रोजाना लाखों यात्री करते हैं सफर

    रेलवे के एसी कोच में सफर करने वाले यात्रियों को यात्रा के दौरान बेडरोल उपलब्ध कराया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, हर रात करीब 8 लाख यात्री एसी कोच में सफर करते हैं।

    अधिकांश यात्री यात्रा पूरी होने के बाद चादर, कंबल और दूसरे सामान वापस कर देते हैं। हालांकि, आंकड़ों में ऐसे यात्रियों की संख्या भी सामने आती है जो इनमें से कुछ सामान अपने साथ ले जाते हैं।

    वायरल पोस्ट पर लोगों ने उठाए सवाल

    वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई यूजर्स ने रेलवे की संपत्ति को निजी इस्तेमाल में लेने पर नाराजगी जताई। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल रेलवे की नहीं, बल्कि यात्रियों की भी है।

    कुछ यूजर्स ने बेडरोल की निगरानी मजबूत करने और सामान गायब होने की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है। वहीं, कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि रेलवे को महंगे सामान की सुरक्षा के लिए नई व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।

    फिलहाल वायरल वीडियो में नजर आ रहे तीन लोगों की पहचान और वीडियो की जगह की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में वीडियो को लेकर किए जा रहे दावों को तथ्यों की पुष्टि होने तक दावे के तौर पर ही देखना उचित होगा।

  • कार पर 3400 लिपस्टिक किस, सोशल मीडिया पर मचा बवाल; फिर पुलिस ने काटा 5500 रुपये का चालान​​​​​​

    सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए लोग तरह-तरह के तरीके आजमा रहे हैं। मध्य प्रदेश के ग्वालियर से सामने आया एक ऐसा ही मामला इन दिनों चर्चा में है। यहां एक युवक ने अपनी सफेद कार पर गर्लफ्रेंड से करीब 3,400 लिपस्टिक किस करवाए। इसके बाद कार को लेकर बनाई गई रील सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गई।

    रील को लाखों लोगों ने देखा, लेकिन इस वायरल स्टंट का दूसरा पहलू युवक के लिए परेशानी खड़ी करने वाला साबित हुआ। ग्वालियर ट्रैफिक पुलिस की नजर जब इस पोस्ट पर पड़ी तो कार की पहचान कर कार्रवाई की गई और युवक पर 5,500 रुपये का जुर्माना लगाया गया।

    सोशल मीडिया ट्रेंड से आया आइडिया

    मामला ग्वालियर के आदित्य सिकरवार से जुड़ा बताया जा रहा है। आदित्य के मुताबिक, उन्हें सोशल मीडिया पर चल रहे एक ट्रेंड से यह आइडिया मिला। इसके बाद उन्होंने अपनी सफेद स्विफ्ट कार को अलग अंदाज में सजाने का फैसला किया।

    बताया गया कि उनकी गर्लफ्रेंड ने कार की बॉडी पर करीब 3,400 लिपस्टिक किस के निशान बनाए। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग साढ़े तीन घंटे लगे। इसके लिए करीब 800 से 900 रुपये की लिपस्टिक इस्तेमाल होने की बात भी सामने आई।

    रील पर आए 55 लाख से ज्यादा व्यूज

    कार पर इतने सारे किस मार्क्स के बाद बनाई गई रील सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, पोस्ट को 55 लाख से ज्यादा बार देखा गया। वीडियो में कार का नंबर भी साफ नजर आ रहा था।

    युवक का मकसद सोशल मीडिया पर ज्यादा से ज्यादा लोगों का ध्यान खींचना था और इसमें वह कामयाब भी रहा। हालांकि, उसे शायद अंदाजा नहीं था कि वायरल होने के साथ-साथ यह पोस्ट ट्रैफिक पुलिस की नजर में भी आ जाएगी।

    पुलिस ने क्यों काटा 5,500 रुपये का चालान?

    पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के आधार पर कार की पहचान की। पुलिस के मुताबिक, वाहन को इस तरह से इस्तेमाल किया गया था कि वह सामान्य स्थिति से काफी अलग नजर आ रहा था। इसके अलावा वीडियो में कार को सड़क पर तेज रफ्तार से चलाने की बात भी सामने आई।

    पुलिस ने इन्हीं नियमों के उल्लंघन के आधार पर कार्रवाई करते हुए युवक का 5,500 रुपये का चालान किया। कार को थाटीपुर इलाके से पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है।

    पुलिस ने कार से निशान भी हटवाए

    कार पर बने हजारों निशानों को लेकर पुलिस ने युवक से उन्हें साफ करवाया। इसके बाद कार को सामान्य स्थिति में लाया गया। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के लिए सड़क पर ऐसा व्यवहार करना दूसरे लोगों के लिए परेशानी और जोखिम पैदा कर सकता है।

    वायरल होने की चाहत पड़ सकती है भारी

    यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने के चक्कर में लोग कई बार ऐसे प्रयोग कर बैठते हैं, जिनका असर बाद में उल्टा पड़ सकता है। रील बनाना या किसी ट्रेंड में शामिल होना अलग बात है, लेकिन सड़क पर वाहन चलाते समय नियमों का पालन करना जरूरी है।

    आदित्य के मामले में रील को जबरदस्त लोकप्रियता मिली, लेकिन उसके साथ पुलिस की कार्रवाई भी हो गई। बताया गया है कि कार्रवाई के बाद उन्होंने अपना सोशल मीडिया अकाउंट भी बंद कर दिया।

  • कुंडली सिर्फ पैसा-नौकरी और शादी नहीं, जीवन का असली मकसद भी बताती है! जानें कैसे..​​​​​​

    कुंडली सिर्फ पैसा-नौकरी और शादी नहीं, जीवन का असली मकसद भी बताती है! जानें कैसे..​​​​​​

    Hindu Dharam: जब भी कोई व्यक्ति अपनी जन्म कुंडली दिखाने जाता है तो उसके मन में अक्सर कुछ गिने-चुने सवाल होते हैं—पैसा कब आएगा? नौकरी कब मिलेगी? कारोबार में सफलता कब मिलेगी? शादी कब होगी? जीवन में तरक्की कब होगी? लेकिन ज्योतिष की परंपरा में कुंडली को केवल भविष्य में होने वाली घटनाओं का अनुमान लगाने का माध्यम नहीं माना गया है।

    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, जन्म कुंडली व्यक्ति के स्वभाव, उसकी रुचियों, क्षमताओं, चुनौतियों और जीवन की संभावित दिशाओं को समझने का एक माध्यम हो सकती है। यानी कुंडली केवल यह जानने के लिए नहीं है कि “मुझे क्या मिलेगा?”, बल्कि यह सवाल पूछने में भी मदद कर सकती है कि “मैं कौन हूं और अपने जीवन को किस दिशा में ले जाना चाहता हूं?”

    हर इंसान की अपनी अलग क्षमता और प्रवृत्ति होती है

    इस दुनिया में हर व्यक्ति एक जैसा नहीं होता। किसी में नेतृत्व करने की क्षमता होती है तो कोई रचनात्मक कार्यों में बेहतर प्रदर्शन करता है। कोई व्यक्ति दूसरों की मदद करके संतुष्टि महसूस करता है तो किसी की रुचि ज्ञान, शिक्षा, व्यापार या आध्यात्मिकता में हो सकती है।

    ज्योतिषीय दृष्टिकोण में जन्म कुंडली को इन्हीं संभावनाओं और प्रवृत्तियों का संकेतक माना जाता है। कुंडली के ग्रह, भाव और उनकी स्थिति के आधार पर व्यक्ति के स्वभाव और रुचियों को समझने की कोशिश की जाती है।

    हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि कुंडली व्यक्ति का पूरा भविष्य तय कर देती है। व्यक्ति के फैसले, मेहनत, शिक्षा, अनुशासन और परिस्थितियां भी उसके जीवन को प्रभावित करती हैं।

    क्या कुंडली जीवन का उद्देश्य बता सकती है?

    ज्योतिष में जीवन के उद्देश्य को समझने के लिए केवल धन या करियर से जुड़े योगों को नहीं देखा जाता। व्यक्ति के स्वभाव, उसकी जिम्मेदारियों, रुचियों और कर्म की दिशा पर भी ध्यान दिया जाता है।

    इसी आधार पर ज्योतिषीय परंपरा में यह समझने की कोशिश की जाती है कि व्यक्ति किन क्षेत्रों में अपनी ऊर्जा लगाकर बेहतर संतुलन और संतुष्टि प्राप्त कर सकता है।

    उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति की रुचि ज्ञान हासिल करने और दूसरों को सिखाने में है, तो उसके लिए शिक्षा या मार्गदर्शन से जुड़े क्षेत्र अधिक अनुकूल हो सकते हैं। वहीं किसी दूसरे व्यक्ति में नेतृत्व, प्रबंधन या व्यापार की क्षमता अधिक हो सकती है।

    इस तरह कुंडली को जीवन की दिशा समझने के लिए एक संकेत या मार्गदर्शक के रूप में देखा जाता है, न कि अंतिम फैसला सुनाने वाली किताब के रूप में।

    केवल पैसा और पद तलाशना क्यों अधूरा नजरिया है?

    आज के समय में बहुत से लोग कुंडली में केवल अपनी इच्छाओं का जवाब तलाशते हैं। उन्हें जानना होता है कि कब बड़ा पैसा मिलेगा, कब अपना घर होगा, कब गाड़ी आएगी या कब समाज में प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

    भौतिक सुख और आर्थिक सुरक्षा जीवन के महत्वपूर्ण हिस्से हैं, लेकिन इन्हें ही जीवन का पूरा उद्देश्य मान लेना व्यक्ति के लिए मानसिक दबाव भी पैदा कर सकता है।

    जब मनुष्य अपनी सारी खुशी केवल किसी खास उपलब्धि से जोड़ देता है और वह उपलब्धि समय पर नहीं मिलती, तो निराशा और बेचैनी बढ़ सकती है।

    इसके विपरीत अगर व्यक्ति अपनी क्षमताओं और वास्तविक जरूरतों को समझकर आगे बढ़ता है तो वह सफलता को अधिक संतुलित तरीके से देख सकता है।

    कुंडली आत्मचिंतन का माध्यम कैसे बन सकती है?

    कुंडली का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह हो सकता है कि यह व्यक्ति को अपने बारे में सोचने का अवसर दे।

    मैं किस काम में अच्छा हूं?
    मेरी सबसे बड़ी कमजोरी क्या है?
    मुझे किन चीजों पर ज्यादा मेहनत करनी चाहिए?
    मेरी प्राथमिकताएं क्या हैं?
    मैं अपने परिवार और समाज के लिए क्या योगदान दे सकता हूं?

    ऐसे सवाल व्यक्ति को अपने जीवन को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर सकते हैं।

    ज्योतिषीय परंपरा में कुंडली के माध्यम से व्यक्ति की प्रवृत्तियों और संभावनाओं का विश्लेषण किया जाता है। अगर व्यक्ति इन संकेतों को आत्मचिंतन के साथ देखे और अपनी वास्तविक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखे, तो वह अपने फैसलों को अधिक सोच-समझकर लेने की कोशिश कर सकता है।

    कुंडली कर्म का विकल्प नहीं है

    ज्योतिष से जुड़ी सबसे जरूरी बात यही है कि किसी भी व्यक्ति को अपनी मेहनत छोड़कर केवल कुंडली या ग्रहों के भरोसे नहीं बैठना चाहिए।

    मान लीजिए कुंडली में किसी क्षेत्र में सफलता की संभावना बताई जाती है, लेकिन व्यक्ति उस क्षेत्र में मेहनत ही नहीं करता, तो केवल संभावना से सफलता हासिल नहीं हो जाती।

    इसी तरह अगर किसी समय को चुनौतीपूर्ण बताया जाता है, तो इसका अर्थ यह नहीं कि व्यक्ति कुछ कर ही नहीं सकता। सही निर्णय, मेहनत, अनुशासन और सावधानी से परिस्थितियों का सामना किया जा सकता है।

    इसलिए कुंडली को कर्म का विकल्प नहीं बल्कि कर्म की दिशा पर विचार करने का एक माध्यम समझना ज्यादा उचित है।

    जीवन का असली उद्देश्य सिर्फ कमाई नहीं

    मानव जीवन में धन, नौकरी, परिवार और सामाजिक प्रतिष्ठा का अपना महत्व है, लेकिन इनके साथ मानसिक शांति, आत्मविकास, जिम्मेदारी और दूसरों के प्रति योगदान भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

    हिंदू दर्शन में जीवन को केवल भौतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं माना गया है। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को जीवन के चार पुरुषार्थों के रूप में समझाया गया है। इसका व्यापक अर्थ यही है कि जीवन में भौतिक आवश्यकताओं के साथ कर्तव्य, संतुलन और आध्यात्मिक विकास का भी महत्व है।

    इसी दृष्टिकोण से देखा जाए तो कुंडली का उद्देश्य केवल यह जानना नहीं होना चाहिए कि “मुझे भविष्य में कितना पैसा मिलेगा?” बल्कि यह भी होना चाहिए कि “मैं अपनी क्षमताओं का सही इस्तेमाल कैसे करूं और अपने जीवन को सार्थक कैसे बनाऊं?”

    सही दिशा में बढ़ना ही सबसे बड़ी उपलब्धि

    जन्म और मृत्यु के बीच मिलने वाला समय सीमित है। इसलिए जीवन को सार्थक बनाना हर व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है।

    कुंडली में बताए गए संकेतों को यदि कोई व्यक्ति आत्मचिंतन के लिए इस्तेमाल करता है, अपनी कमियों पर काम करता है और अपनी क्षमताओं को विकसित करने की कोशिश करता है, तो उसका जीवन अधिक जागरूक दिशा में आगे बढ़ सकता है।

    आखिरकार किसी भी व्यक्ति का भविष्य केवल ग्रहों की स्थिति से तय नहीं होता। उसके कर्म, निर्णय, मेहनत, शिक्षा, संस्कार और परिस्थितियों की भी बड़ी भूमिका होती है।

    इसलिए कुंडली को भविष्य की गारंटी समझने के बजाय खुद को समझने और जीवन की दिशा पर विचार करने का माध्यम माना जाए, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

    कुंडली शायद यह तय न करे कि आपकी जिंदगी में हर घटना कब होगी, लेकिन इसके बहाने अगर आप खुद को समझने लगें, अपनी क्षमताओं को पहचान लें और अपने कर्म की दिशा सही कर लें, तो यही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि हो सकती है।

    नोट: ज्योतिषीय बातें धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित भविष्यवाणी के रूप में नहीं लेना चाहिए।

  • शादी से सिर्फ 4 दिन पहले प्रेमी संग घर से निकल गई रचना, मंडप की तैयारियों के बीच मचा हड़कंप; बचपन के प्यार के सामने परिवार ने तय कर दी थी दूसरी शादी..​​​​​​

    शादी से सिर्फ 4 दिन पहले प्रेमी संग घर से निकल गई रचना, मंडप की तैयारियों के बीच मचा हड़कंप; बचपन के प्यार के सामने परिवार ने तय कर दी थी दूसरी शादी..​​​​​​

    खजुराहो के पास बमीठा इलाके का एक छोटा-सा गांव। फरवरी की ठंडी सुबहें थीं और भैरो पटेल के घर में शादी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही थीं। आंगन में रिश्तेदारों की आवाजाही थी, घर की महिलाएं रस्मों की तैयारी में जुटी थीं और हर किसी की जुबान पर एक ही बात थी—11 फरवरी को रचना की शादी है।

    18 साल की रचना की शादी पास के गांव हीरापुर में तय हुई थी। परिवार अपनी हैसियत के मुताबिक शादी की तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहता था। कपड़े आ चुके थे, मेहमानों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था और घर में शादी से पहले होने वाली रस्मों की तैयारी चल रही थी।

    लेकिन इसी घर में एक ऐसी कहानी भी पल रही थी, जिसकी भनक परिवार को शायद पूरी तरह नहीं थी।

    रचना बचपन से ही नीरज को जानती थी। दोनों एक ही इलाके के रहने वाले थे। बचपन की दोस्ती कब एक-दूसरे के लिए गहरी भावनाओं में बदल गई, शायद उन्हें भी पता नहीं चला। समय बीतता गया और दोनों का रिश्ता मजबूत होता गया।

    रचना के लिए नीरज कोई अचानक आया हुआ रिश्ता नहीं था। वह उसके बचपन का साथी था, जिसे वह लंबे समय से जानती और समझती थी।

    लेकिन परिवार ने रचना के लिए किसी और को चुन लिया था।

    घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं, मगर रचना के मन में कुछ और ही उथल-पुथल थी। एक तरफ परिवार की इच्छा थी, दूसरी तरफ वह रिश्ता था, जो उसके साथ बचपन से चला आ रहा था।

    शादी में अब सिर्फ चार दिन बाकी थे।

    घर में महिलाएं ‘छई माटी’ की रस्म की तैयारी कर रही थीं। बुंदेलखंड के गांवों में यह रस्म शादी से पहले बड़े उत्साह से निभाई जाती है। महिलाएं खेत से मिट्टी लेने जाती हैं, गीत गाती हैं और आने वाली शादी के लिए पूजा-पाठ करती हैं।

    भैरो पटेल के घर में भी ऐसा ही माहौल था। किसी को अंदाजा नहीं था कि जिस बेटी की शादी के गीत गाए जा रहे हैं, वह कुछ ही घंटों बाद घर में नहीं होगी।

    फिर अचानक रचना गायब हो गई।

    पहले परिवार को लगा कि वह किसी रिश्तेदार या पड़ोसी के यहां गई होगी। लेकिन जब काफी देर तक उसका कोई पता नहीं चला तो घरवालों ने तलाश शुरू की। रिश्तेदारों से पूछा गया, आसपास के घरों में खोजा गया और गांव में भी खबर भेजी गई।

    तभी परिवार को पता चला कि रचना नीरज के साथ घर से चली गई है।

    यह खबर मिलते ही शादी वाले घर का माहौल पूरी तरह बदल गया। जहां कुछ देर पहले तक हंसी-खुशी और रस्मों की बातें हो रही थीं, वहां अब घबराहट और तनाव था। शादी की तैयारियां रुक गईं और परिवार बेटी की तलाश में जुट गया।

    गांव में भी यह बात तेजी से फैल गई कि रचना अपनी शादी से सिर्फ चार दिन पहले बचपन के प्रेमी के साथ चली गई है।

    लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कोई इसे परिवार की इज्जत से जोड़कर देख रहा था, तो कोई कह रहा था कि रचना ने अपने पुराने प्यार को चुना है।

    लेकिन इस कहानी का सबसे बड़ा सवाल यही था कि अगर रचना और नीरज एक-दूसरे से प्यार करते थे, तो परिवार को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी? और अगर जानकारी थी, तो रचना की शादी किसी और जगह क्यों तय की गई?

    भैरो पटेल अपनी बेटी की शादी ऐसे परिवार में करना चाहते थे, जिसे वे अपनी हैसियत और सामाजिक स्थिति के मुताबिक मानते थे। उनके लिए यह शादी परिवार की प्रतिष्ठा से जुड़ी थी। दूसरी तरफ रचना के लिए यह उसके पूरे जीवन का फैसला था।

    शायद यही वजह थी कि उसने आखिरी समय में वह कदम उठाया, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी।

    रचना के घर से जाने के बाद परिवार के सामने सिर्फ बेटी को ढूंढने की चिंता नहीं थी। शादी की तारीख नजदीक थी, रिश्तेदार घर पर थे और गांव में हर कोई इस घटना की चर्चा कर रहा था।

    जिस आंगन में बेटी की डोली उठने वाली थी, वहां अब सन्नाटा पसरा था।

    रचना और नीरज की कहानी को गांव में लोग अलग-अलग नजरिए से देख रहे थे। कुछ लोगों के लिए यह परिवार के खिलाफ उठाया गया कदम था, तो कुछ के लिए यह दो पुराने प्रेमियों का साथ रहने का फैसला।

    लेकिन सच यह था कि दोनों का रिश्ता अचानक नहीं बना था। वे बचपन से एक-दूसरे को जानते थे। उनके बीच समय के साथ भरोसा और लगाव बढ़ा था। रचना के सामने जब दूसरी शादी का फैसला रखा गया, तो शायद उसे लगा कि अगर अब उसने कुछ नहीं किया, तो वह अपने पुराने रिश्ते को हमेशा के लिए खो देगी।

    और फिर शादी से चार दिन पहले उसने घर छोड़ दिया।

    इस घटना ने पूरे गांव को सोचने पर मजबूर कर दिया। क्या परिवारों को बच्चों की पसंद के बारे में समय रहते बात करनी चाहिए? क्या रचना अपनी बात परिवार के सामने खुलकर रख पाई थी? क्या सामाजिक दबाव ने दोनों को ऐसा कदम उठाने पर मजबूर किया?

    इन सवालों के जवाब शायद उस समय किसी के पास नहीं थे।

    भैरो पटेल के घर में शादी की तैयारियां जिस उत्साह से शुरू हुई थीं, वह कुछ ही घंटों में चिंता में बदल गईं। रिश्तेदारों के बीच फुसफुसाहट शुरू हो गई। गांव के लोग घर के बाहर जमा होने लगे और हर कोई यही जानना चाहता था कि रचना कहां गई और अब आगे क्या होगा।

    एक तरफ परिवार बेटी को वापस लाने की कोशिश कर रहा था, दूसरी तरफ रचना अपने बचपन के प्यार के साथ चली गई थी।

    यह कहानी सिर्फ एक लड़की के घर से चले जाने की नहीं थी। यह उस टकराव की कहानी थी, जिसमें एक तरफ परिवार की उम्मीदें थीं और दूसरी तरफ दो लोगों का पुराना रिश्ता।

    रचना की शादी 11 फरवरी को होनी थी, लेकिन उससे चार दिन पहले ही उसने अपनी जिंदगी का रास्ता खुद चुन लिया।

    जिस घर में शादी के गीत गूंजने वाले थे, वहां अचानक सवालों और सन्नाटे ने जगह ले ली।

    और गांव में लंबे समय तक लोग यही कहते रहे—रचना ने शादी से भागकर सिर्फ एक घर नहीं छोड़ा, उसने अपने बचपन के प्यार को बचाने के लिए परिवार और समाज के सामने एक बड़ा फैसला रख दिया था।

  • 150 से ज्यादा ‘बॉयफ्रेंड’ नहीं, ब्लैकमेलिंग का था खेल! खूबसूरती के जाल में फंसाती, वीडियो बनाती और फिर केस की धमकी देकर वसूलती थी लाखों..​​​​​​

    150 से ज्यादा ‘बॉयफ्रेंड’ नहीं, ब्लैकमेलिंग का था खेल! खूबसूरती के जाल में फंसाती, वीडियो बनाती और फिर केस की धमकी देकर वसूलती थी लाखों..​​​​​​

    गोरखपुर में एक लड़की की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर उसके बारे में कई तरह की बातें सामने आने लगीं। कोई उसे ‘लेडी डॉन’ कह रहा था तो कोई दावा कर रहा था कि उसके 150 से ज्यादा बॉयफ्रेंड थे। लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कहानी कुछ और ही सामने आती दिखी।

    आरोप है कि लड़की लोगों से दोस्ती करती, उन्हें अपने भरोसे में लेती और फिर वीडियो कॉल के दौरान उनकी निजी रिकॉर्डिंग कर लेती थी। इसके बाद शुरू होता था धमकी और पैसों की मांग का सिलसिला। सामने वाले को डराया जाता कि अगर उसने रकम नहीं दी तो उसके खिलाफ दुष्कर्म या पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर मामलों में शिकायत कर दी जाएगी।

    बताया जा रहा है कि लड़की मूल रूप से गोरखपुर के हरपुर बुदहट थाना क्षेत्र की रहने वाली है। परिवार से विवाद के बाद उसने संतकबीर नगर के खलीलाबाद में किराये का मकान ले लिया था। यहीं से उसने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से संपर्क बढ़ाना शुरू किया।

    शुरुआत में बातचीत सामान्य होती थी। सामने वाले को लगता था कि वह एक युवती से दोस्ती कर रहा है। धीरे-धीरे बातचीत निजी होने लगती और फिर वीडियो कॉल तक पहुंच जाती। आरोप है कि इसी दौरान निजी पलों की रिकॉर्डिंग कर ली जाती थी। बाद में उसी वीडियो को दिखाकर पैसे मांगे जाते।

    पुलिस जांच में करीब 150 लोगों को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है। इनमें आम लोगों के साथ कुछ पुलिसकर्मियों के नाम भी बताए जा रहे हैं। अयोध्या में तैनात एक सीओ समेत करीब 15 पुलिसकर्मियों को भी कथित तौर पर इस जाल में फंसाने का दावा किया गया है।

    यह सिलसिला वर्ष 2021 के आसपास शुरू होने की बात कही जा रही है। पहला मामला देवरिया के एक युवक से जुड़ा बताया गया है। आरोप है कि उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के बाद समझौते के नाम पर रकम ली गई। इसके बाद इसी तरीके से दूसरे लोगों को भी डराकर पैसे वसूलने का आरोप है।

    हर मामले में तरीका लगभग एक जैसा बताया जा रहा है। पहले सोशल मीडिया पर संपर्क, फिर दोस्ती और भरोसा, उसके बाद वीडियो कॉल और अंत में मुकदमे में फंसाने की धमकी।

    खलीलाबाद में रहने के दौरान भी लड़की का विवादों से नाता जुड़ा रहा। मकान मालिक ने देर रात युवकों के आने-जाने पर आपत्ति जताई थी। आरोप है कि मकान खाली करने के बदले उससे दो लाख रुपये लिए गए।

    इसी दौरान सूरज सिंह समेत पांच लोगों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कराने की बात सामने आई। आरोप है कि बाद में समझौते के नाम पर उनसे पैसे मांगे गए। खलीलाबाद के ही प्रियांशु सिंह से भी फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर 50 हजार रुपये लेने का आरोप लगाया गया है।

    सोशल मीडिया पर भले ही इसे 150 बॉयफ्रेंड की कहानी बताया जा रहा हो, लेकिन जांच में इसे प्रेम संबंधों के बजाय कथित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क के रूप में देखा जा रहा है। आरोप है कि लड़की ने कई लोगों से संपर्क बनाए, लेकिन उसका मकसद रिश्ते बनाना नहीं, बल्कि निजी जानकारी और वीडियो के जरिए उन्हें डराकर पैसे वसूलना था।

    गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब उसके मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट, चैट और बैंक खातों की जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि वह इस काम में अकेली थी या उसके साथ कोई और भी शामिल था।

    अगर जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला सिर्फ एक लड़की की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए चलाए जा रहे एक बड़े हनीट्रैप और सेक्सटॉर्शन नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।

    इस मामले ने यह भी दिखाया है कि सोशल मीडिया पर शुरू हुई दोस्ती कितनी जल्दी खतरे में बदल सकती है। निजी बातचीत और वीडियो साझा करने से पहले सावधानी न बरतने पर लोग ब्लैकमेलिंग का शिकार हो सकते हैं। हालांकि, लगाए गए सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।