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  • एक सेल्फी से खाली हो सकता है बैंक खाता, भूलकर भी न खिंचवाएं ऐसे फोटोज!..

    एक सेल्फी से खाली हो सकता है बैंक खाता, भूलकर भी न खिंचवाएं ऐसे फोटोज!..

    एक सेल्फी से खाली हो सकता है बैंक खाता, भूलकर भी न खिंचवाएं ऐसे फोटोज!..

    आज के डिजिटल युग में जहां हम अपनी सुरक्षा के लिए बायोमेट्रिक्स और फिंगरप्रिंट लॉक पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं, वहीं एक ताजा चेतावनी ने स्मार्टफोन यूजर्स की नींद उड़ा दी है. साइबर सिक्युरिटी एक्सपर्ट्स ने आगाह किया है कि सोशल मीडिया पर ‘V’ साइन (तर्जनी और मध्यमा उंगली को बाहर की ओर फैलाकर) दिखाते हुए सेल्फी पोस्ट करना आपके लिए भारी मुसीबत बन सकता है. आधुनिक हाई-डेफिनिशन कैमरों और उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सॉफ्टवेयर के आने से अब यह तकनीकी रूप से संभव हो गया है कि आपकी तस्वीरों से आपके फिंगरप्रिंट की विस्तृत जानकारी चुराई जा सके और इसका उपयोग आपके बायोमेट्रिक सुरक्षा सिस्टम को भेदने के लिए किया जा सके. साथ ही उंगलियों के निशान से साइबर अपराधी बैंक खाता भी खाली कर सकते हैं.

    चीनी सिक्युरिटी एक्सपर्ट ली चांग ने हाल ही में एक रियलिटी शो के दौरान एक मशहूर हस्ती की सेल्फी का उदाहरण देते हुए यह दिखाया कि ‘V’ पोज वाली फोटो में उंगलियां कितनी स्पष्ट दिखाई देती हैं. चांग के विश्लेषण के अनुसार, यदि तस्वीर 1.5 मीटर से कम की दूरी से ली गई है और उंगलियां सीधे कैमरे के सामने हैं, तो फिंगरप्रिंट की जानकारी पूरी तरह से निकाली जा सकती है. सेल्फी के मामले में यह दूरी और भी कम होती है, जो इसे विशेष रूप से खतरनाक बनाती है. हैरान करने वाली बात यह है कि 3 मीटर तक की दूरी से ली गई तस्वीरों से भी लगभग आधे फिंगरप्रिंट डेटा को आसानी से निकाला जा सकता है. इस खतरे को और भी अधिक वास्तविक बनाता है आधुनिक AI तकनीक का विकास.

    एक टीवी शो में ली चांग ने दर्शकों को तब चौंका दिया, जब उन्होंने फोटो एडिटिंग सॉफ्टवेयर और AI की मदद से उन फिंगरप्रिंट्स को बहुत करीब से साफ-साफ दिखाया, जो खुली आंखों से देखने पर धुंधले नजर आ रहे थे. ‘चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज’ के क्रिप्टोग्राफी प्रोफेसर जिंग जिउ ने भी इस बात की पुष्टि की है कि हाई-डेफिनिशन कैमरों की मदद से केवल ‘V’ पोज का उपयोग करके हाथ की जानकारी निकाली जा सकती है और उसके फिंगरप्रिंट्स भी बनाए जा सकते हैं. हालांकि, इस खबर के वायरल होने के बाद कुछ एक्सपर्ट्स ने स्पष्ट किया है कि फिंगरप्रिंट चोरी करना और उसका गलत इस्तेमाल करना इतना आसान भी नहीं है.

    आसान नहीं है फिंगरप्रिंट्स कॉपी करना
    उन्होंने कहा कि किसी के बायोमेट्रिक्स को सफलतापूर्वक कॉपी करने के लिए रोशनी की स्थिति, कैमरे का फोकस और इमेज की स्पष्टता जैसे कई कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. साथ ही, पहचान चुराने वालों को सटीक मिलान के लिए एक ही व्यक्ति की कई अलग-अलग तस्वीरों की जरूरत पड़ सकती है. फिर भी, तकनीक जिस रफ्तार से आगे बढ़ रही है, उसे देखते हुए सुरक्षा विशेषज्ञ इसे एक उभरते हुए और गंभीर खतरे के रूप में देख रहे हैं. ऐसे में यदि आप अपनी बायोमेट्रिक सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, लेकिन सेल्फी में ‘V’ साइन बनाने की अपनी आदत को भी नहीं छोड़ पा रहे हैं, तो विशेषज्ञ ली चांग ने इसके लिए कुछ आसान उपाय सुझाए हैं.

    कैसे बचें ठगी से?
    उनका सुझाव है कि सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें पोस्ट करने से पहले डिजिटल एडिटिंग टूल्स का उपयोग करके अपनी उंगलियों के पोरों को ‘ब्लर’ (धुंधला) कर दें या अपने फिंगरप्रिंट के निशानों को स्मूथ (सपाट) कर दें. सुरक्षा के लिहाज से यह एक छोटी सी सावधानी आपके डिजिटल डेटा और वित्तीय खातों को सुरक्षित रखने में बड़ी भूमिका निभा सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में जैसे-जैसे कैमरे और अधिक शक्तिशाली होंगे, हमें अपनी ऑनलाइन प्राइवेसी को लेकर और भी अधिक जागरूक होना होगा. हालांकि, इस तरह की ठगी से बचने का सबसे बेहतर उपाय है कि वी सेप में उंगलियों के साथ फोटो ही न शेयर करें.

  • इस भारतीय को भगवान मानता है पूरा चीन, राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी झुकाते हैं सिर, फैमिली से बिना मिले नहीं लौटते देश..?

    इस भारतीय को भगवान मानता है पूरा चीन, राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी झुकाते हैं सिर, फैमिली से बिना मिले नहीं लौटते देश..?

    इस भारतीय को भगवान मानता है पूरा चीन, राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी झुकाते हैं सिर, फैमिली से बिना मिले नहीं लौटते देश..?

    एक ऐसा हिंदुस्तानी, जिसे खुद उसका अपना देश लगभग भूल चुका है. लेकिन सरहद पार हमारा पड़ोसी मुल्क चीन, आज भी उसे किसी मसीहा की तरह पूजता है. वहां के बच्चों को स्कूलों में उनकी कहानी पढ़ाई जाती है. उनके चेहरे वाले डाक टिकट जारी होते हैं. उनके नाम पर मेडिकल कॉलेज चलते हैं. यकीन मानिए, अगर इस जाबांज डॉक्टर की जिंदगी को आज के सिनेमाई परदे पर उतारा जाए, तो पूरी दुनिया दांतों तले उंगली दबा लेगी.

    बात शुरू होती है साल 1938 की. उस वक्त जापान ने चीन पर धावा बोल दिया था. चारों तरफ तबाही थी, चीख-पुकार थी और लाखों चीनी नागरिक और सैनिक लहूलुहान पड़े थे. मगर इलाज करने वाले डॉक्टर उंगलियों पर गिनने लायक भी नहीं थे. ऐसे में चीन के सेनापति जनरल झू दे ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को एक ख़त लिखा- ‘दोस्त, हमारी मदद करो, कुछ डॉक्टर भेजो’. तब का चीन आज जैसा ताकतवर और अमीर मुल्क नहीं था. नेहरू ने इस पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस से मशविरा किया, जो उस समय कांग्रेस के अध्यक्ष हुआ करते थे.

    नेताजी ने तुरंत पहल की और भारत के लोगों से पाई-पाई जोड़कर 22,000 रुपये का फंड इकट्ठा किया. फिर क्या था, पांच जाबांज हिंदुस्तानी डॉक्टरों की एक टीम समंदर के रास्ते चीन के लिए रवाना हो गई.

    Dr Dwarkanath Kotnis indian Doctor Hero in China Story

    पिता की मौत, लेकिन डॉक्टर का ईमान

    चीन गए तो पांच डॉक्टर थे, लेकिन जब जंग खत्म हुई तो लौटे सिर्फ चार. डॉक्टर कोटनीस वहीं रुक गए. उन्होंने वहां हजारों दम तोड़ते चीनी लोगों को मौत के मुंह से बाहर निकाला. इसी बीच भारत से खबर आई कि उनके पिता का साया हमेशा के लिए सिर से उठ गया है. कोई और होता तो घर भाग आता, लेकिन कोटनीस नहीं लौटे. उन्होंने रोते हुए भी यही कहा कि इस वक्त चीन के इन बेबस मरीजों को मेरी सबसे ज्यादा जरूरत है और मरीजों को बीच में छोड़ना एक डॉक्टर के ईमान के खिलाफ है.

    Dr Dwarkanath Kotnis indian Doctor Hero in China Story

    72-72 घंटे लगातार ड्यूटी

    कोटनीस सीधे जंग के मैदान में कूद पड़े. पहाड़ों की कड़कड़ाती ठंड और पत्थरों की गुफाओं में, जहां बुनियादी दवाइयां तक नसीब नहीं थीं, उन्होंने एक के बाद एक कई ऑपरेशन किए. कई-कई बार तो वो लगातार 72-72 घंटे बिना पलक झपकाए मरीजों की जान बचाते रहे. इस अकेले मोर्चे पर उन्होंने करीब 800 चीनी सैनिकों की जान बचाई. चीनी लोग उन्हें आदर से ‘के दिहुआ’ (Ke Dihua) पुकारने लगे, इसके मतलब था भारत की भूमि से आया हुआ उपकारी.

    लगातार बिना सोए काम करना, खराब मौसम और कम साधनों के बीच दिन-रात मरीजों की सेवा करने का असर डॉक्टर कोटनीस की सेहत पर पड़ने लगा. उनका शरीर थक चुका था. दिसंबर 1942 में, अपने बेटे के जन्म के महज तीन महीने बाद, सिर्फ 32 साल की उम्र में इस मसीहा ने हमेशा के लिए अपनी आंखें मूंद लीं. उनकी मौत की खबर से पूरा चीन सदमे में डूब गया. खुद माओ त्से तुंग ने बेहद भावुक होकर लिखा- “आज चीन ने अपना एक अनमोल दोस्त खो दिया है. हम उनके इस बलिदान को कभी नहीं भूलेंगे. उनका नाम हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेगा.”

    Dr Dwarkanath Kotnis indian Doctor Hero in China Story

    मगर यह कहानी यहां खत्म नहीं होती. चीन के सबसे बड़े नेता माओ त्से तुंग ने खुद अपने हाथों से उनके सम्मान में शोक संदेश लिखा था. उन्होंने कहा था- ‘हमारी सेना ने अपना एक मजबूत हाथ खो दिया है और हमारे देश ने अपना सबसे सच्चा दोस्त गंवा दिया है’.

    आज भी चीन के शीजियाझुआंग (Shijiazhuang) शहर में उनकी एक भव्य समाधि और स्मारक है. उनके नाम पर वहां एक मेडिकल स्कूल चलाया जाता है. आज भी जब उस मेडिकल स्कूल के छात्र डॉक्टर बनकर निकलते हैं, तो वे डॉक्टर कोटनीस के नाम की शपथ लेते हैं.

    साल 2009 में जब चीन में वोटिंग हुई, तो वहां की जनता ने डॉक्टर कोटनीस को सदी के ‘टॉप 10 विदेशी नायकों’ में चुना. दशकों तक तो यह परंपरा ही बन गई थी कि चीन का कोई भी बड़ा नेता जब भी भारत के दौरे पर आता, तो डॉक्टर कोटनीस के परिवार से मिलने उनके घर जरूर जाता था. डॉक्टर कोटनीस को किसी सरहद या नक्शे से प्यार नहीं था, उन्हें तो बस इंसानों की जान बचाने से सरोकार था. सचमुच, इंसानी जज्बे की ऐसी मिसालें हर सदी में पैदा होनी चाहिए.

  • 10 मिनट के लिए मरकर दोबारा जिंदा हुआ शख्स, अब मौत को लेकर किया ऐसा खुलासा..

    10 मिनट के लिए मरकर दोबारा जिंदा हुआ शख्स, अब मौत को लेकर किया ऐसा खुलासा..

    10 मिनट के लिए मरकर दोबारा जिंदा हुआ शख्स, अब मौत को लेकर किया ऐसा खुलासा..

    क्या आप जानते हैं कि मौत के बाद की दुनिया कैसी दिखती है? इस सवाल का जवाब खोजने के लिए लोग सदियों से रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन रोमफोर्ड, ईस्ट लंदन के रहने वाले मैथ्यू एलिक के पास इस बारे में एक ऐसा जवाब है, जो आपको निराश कर सकता है. यकीनन, बहुत कम लोगों को पता होगा कि 43 साल के मैथ्यू, जो एक पिता, एक्टर और मॉडल हैं, अगस्त 2023 में करीब 10 मिनट के लिए क्लीनिकली डेड घोषित कर दिए गए थे. उस वक्त उन्हें एक बहुत बड़ा हार्ट अटैक आया था, जिसके बाद उनकी सांसें थम गईं और दिल ने धड़कना बंद कर दिया था.

    मैथ्यू को सांस लेने में दिक्कत और पैरों में सूजन की वजह से अस्पताल ले जाया गया था. डॉक्टरों ने पाया कि उनके दिल और फेफड़ों में क्रिकेट की गेंद के आकार के खून के थक्के जम गए थे. पल्मोनरी एम्बोलिज्म की वजह से उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ और वे वहीं गिर पड़े. डॉक्टरों ने उन्हें वापस लाने के लिए डिफिब्रिलेटर का इस्तेमाल किया और इतनी ताकत से सीपीआर दिया कि उनके शरीर के अंदर ब्लीडिंग होने लगी. लगभग 10 मिनट तक क्लीनिकली डेड रहने के बाद आखिरकार डॉक्टरों ने उन्हें होश में ला दिया और फिर वे तीन दिनों तक कोमा में रहे.

    मौत का वो ‘निराश’ करने वाला अनुभव
    मैथ्यू जब कोमा से बाहर आए, तो उनसे सबसे पहला सवाल यही पूछा गया कि उन्होंने ‘दूसरी दुनिया’ में क्या देखा? मैथ्यू का जवाब सुनकर सब हैरान रह गए. उन्होंने कहा कि उन्हें कुछ भी याद नहीं है. उनके मुताबिक, मौत का अनुभव किसी दिव्य रोशनी या स्वर्ग जैसा नहीं था, बल्कि यह एक बेहद शांतिपूर्ण नींद से जागने जैसा महसूस हुआ. मैथ्यू का यह खुलासा उन लोगों के लिए निराशाजनक हो सकता है, जो मौत के बाद किसी जादुई दुनिया की उम्मीद करते हैं.

    जिंदगी की चुनौतियों से मुकाबला
    मौत के मुंह से वापस आने के बाद मैथ्यू की जिंदगी आसान नहीं थी. पिछले दो सालों में उन्होंने एक रिश्ता टूटने, नौकरी जाने, आर्थिक तंगी और अपने बेटे की खराब सेहत जैसी कई बड़ी चुनौतियों का सामना किया. लेकिन मैथ्यू का कहना है कि जब आप मौत को हरा देते हैं, तो कोई भी चुनौती आपको डरा नहीं सकती. उन्होंने रोने और हार मानने के बजाय खुद को दोबारा खड़ा करने का फैसला किया. आज वे अपनी बेस्ट फ्रेंड से सगाई कर चुके हैं, दोनों ने अपना घर खरीद लिया है और उनके बच्चे भी लाइफ में अच्छा कर रहे हैं.

    किताब के जरिए दी नई प्रेरणा
    मैथ्यू ने अपनी मौत और उसके बाद के 18 महीनों के संघर्ष को एक किताब ‘लाइफ आफ्टर बीइंग क्लीनिकली डेड’ बताया है. डिस्लेक्सिया (पढ़ने-लिखने की बीमारी) होने के बावजूद उन्होंने डिक्टाफोन में बोलकर अपनी कहानी लिखी और आज उनकी किताब की 1,000 से ज्यादा प्रतियां बिक चुकी हैं. मैथ्यू अब मोटिवेशनल स्पीच देते हैं और ब्लड फाउंडेशन के साथ काम करते हैं, क्योंकि 7 बार खून चढ़ने की वजह से ही उनकी जान बच पाई थी. मैथ्यू की सेहत अब पहले जैसी नहीं रही और उन्हें पूरी उम्र खून पतला करने वाली दवा लेनी होगी, लेकिन वे अपनी कमियों पर नहीं बल्कि अपनी काबिलियत पर ध्यान दे रहे हैं. उनका मानना है कि जिंदगी बहुत छोटी है और हमें हर पल का लुत्फ उठाना चाहिए.

  • हजारों साल पुराना लकड़ी का ये बाजार देख हक्के-बक्के रह गए लोग, खूबसूरती बना देगी दीवाना..

    हजारों साल पुराना लकड़ी का ये बाजार देख हक्के-बक्के रह गए लोग, खूबसूरती बना देगी दीवाना..

    हजारों साल पुराना लकड़ी का ये बाजार देख हक्के-बक्के रह गए लोग, खूबसूरती बना देगी दीवाना..
    हजारों साल पुराना लकड़ी का ये बाजार देख हक्के-बक्के रह गए लोग, खूबसूरती बना देगी दीवाना 

    मिस्र यानी इजिप्ट की राजधानी काहिरा अपनी हिस्ट्री और आर्किटेक्चर के लिए दुनियाभर में जानी जाती है. इन दिनों इंटरनेट पर काहिरा के एक बिजी मार्केट में हजारों साल पुराना एक ऐसा ऐतिहासिक ढांचा मौजूद है, जिसकी छत पूरी तरह से लकड़ी की बनी हुई है. इस लकड़ी की छत की ऊंचाई जमीन से लगभग 25 से 30 फीट है. इतने सालों बाद भी लकड़ी का ये काम बिना किसी नुकसान और बिना किसी मरम्मत के वैसे ही बेहद खूबसूरती से नजर आ रहा है. शायद यही वजह है कि, ये वीडियो लोगों का ध्यान खींच रहा है.

    वायरल हो रहे इस वीडियो में देखा जा सकता है कि, इस पुरानी इमारत की दीवारों पर पत्थरों की बहुत बारीक और सुंदर नक्काशी की गई है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, ये पुराना ढांचा और उसकी लकड़ी की छत लगभग हजारों साल पुरानी है. खास बात ये है कि इस पुरानी इमारत में अब तक कोई बड़ा मरम्मत का काम नहीं हुआ है. बावजूद इसके ये आज भी अपनी पुरानी चमक और मजबूती बनाए हुए है.

     

     
    आपके

    वीडियो में देखा जा सकता है कि, इमारत के नीचे के एरिया में आज दुकानें और मार्केट सज रहे हैं, जबकि इसके अंदर मदरसा भी मौजूद है. पत्थरों का महीन काम और ऊपर से लकड़ी की बड़ी सी छत इसे देखने आने वाले हर शख्स को हैरान कर देती है.

  • बेजुबान के लिए बुजुर्ग का ऐसा प्यार देख नम हो गईं आंखें, घायल डॉगी को अस्पताल ले जाकर बने सहारा

    बेजुबान के लिए बुजुर्ग का ऐसा प्यार देख नम हो गईं आंखें, घायल डॉगी को अस्पताल ले जाकर बने सहारा

    बेजुबान के लिए बुजुर्ग का ऐसा प्यार देख नम हो गईं आंखें, घायल डॉगी को अस्पताल ले जाकर बने सहारा

    कहते हैं कि इंसानियत के लिए न तो दौलत जरूरी है और न ही कोई बड़ा पद। सच्ची संवेदना हो तो इंसान किसी भी जीव के दर्द को अपना समझ सकता है। ऐसा ही एक भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग ने घायल आवारा कुत्ते के लिए जो किया, उसने लोगों का दिल जीत लिया।

    दरअसल, बुजुर्ग को सड़क पर एक घायल आवारा डॉगी मिला। उसकी हालत देखकर उन्होंने उसे अकेला छोड़ने के बजाय इलाज कराने का फैसला किया। वह डॉगी को लेकर पशु अस्पताल पहुंचे और उसके इलाज के दौरान लगातार उसके पास खड़े रहे।

    इलाज के दौरान डॉगी के पास खड़े रहे बुजुर्ग

    अस्पताल में डॉक्टर जब घायल डॉगी की जांच और इलाज कर रहे थे, उस दौरान बुजुर्ग उसके बिल्कुल पास खड़े रहे। वह लगातार इस बात का ख्याल रखते नजर आए कि घायल जानवर इलाज के दौरान खुद को अकेला या असहाय महसूस न करे।

    बुजुर्ग का यह व्यवहार बताता है कि इंसानियत सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है। किसी बेजुबान के दर्द को समझना और मुश्किल वक्त में उसका साथ देना भी सच्ची संवेदनशीलता की निशानी है।

    लोगों ने जमकर की बुजुर्ग की तारीफ

    घटना की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने बुजुर्ग की जमकर तारीफ की। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कहा कि असली अमीरी इंसान के बैंक बैलेंस में नहीं, बल्कि उसके दिल में मौजूद दया और करुणा में होती है।

    कुछ लोगों ने घायल डॉगी के इलाज में आर्थिक मदद करने की इच्छा भी जताई। इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया कि किसी बेजुबान के लिए किया गया छोटा सा प्रयास भी लोगों के दिल को छू सकता है।

    यह घटना हमें यही संदेश देती है कि किसी जरूरतमंद जीव की मदद करने के लिए बड़े साधनों की नहीं, बल्कि एक संवेदनशील दिल की जरूरत होती है।

  • खाने में मंडराती हैं मक्खियां? एक बार अपना लें ये आसान घरेलू उपाय… कभी नहीं आएंगी वापस..?

    खाने में मंडराती हैं मक्खियां? एक बार अपना लें ये आसान घरेलू उपाय… कभी नहीं आएंगी वापस..?

    खाने में मंडराती हैं मक्खियां? एक बार अपना लें ये आसान घरेलू उपाय… कभी नहीं आएंगी वापस..?

    बारिश का मौसम आते ही घर में मक्खियों का आतंक बढ़ जाता है. किचन, डाइनिंग टेबल और खाने की चीजों के आसपास मंडराती मक्खियां सिर्फ परेशानी ही नहीं, बल्कि कई बीमारियों की वजह भी बन सकती हैं. अगर आप भी इनसे छुटकारा पाने के लिए केमिकल स्प्रे का इस्तेमाल करते-करते परेशान हो चुके हैं, तो कुछ आसान घरेलू उपाय आपकी बड़ी समस्या को मिनटों में कम कर सकते हैं. तो चलिए आपको बताते हैं कुछ ऐसे उपायों के बारे में जिससे आपके घर से मक्खियां गायब हो जाएंगी.

    सिरका
    मक्खियां खमीर जैसी गंध की ओर जल्दी आकर्षित होती हैं. इसके लिए एक छोटे बर्तन में सेब का सिरका डालें और उसमें एक बूंद डिशवॉश लिक्विड मिला दें. अब बर्तन को प्लास्टिक रैप से ढककर उसमें छोटे-छोटे छेद कर दें. मक्खियां अंदर तो चली जाएंगी, लेकिन बाहर नहीं निकल पाएंगी.

    नींबू और लौंग
    एक नींबू को दो हिस्सों में काट लें और उसमें 6 से 10 लौंग लगा दें. इसे खिड़की, डाइनिंग टेबल या किचन काउंटर पर रखें. नींबू और लौंग की तेज खुशबू मक्खियों को दूर रखने में मदद करती है.

    तुलसी या पुदीना
    तुलसी और पुदीने की खुशबू मक्खियों को पसंद नहीं होती. इसलिए इन पौधों को घर के दरवाजों, खिड़कियों या रसोई के पास रखें. इससे मक्खियां कम आएंगी और घर का वातावरण भी ताजा बना रहेगा.

    कपूर
    कपूर की तेज गंध मक्खियों को दूर रखने में मदद करती है. इसे किसी कटोरी में रखकर या कपड़े में बांधकर खिड़कियों और दरवाजों के पास रखा जा सकता है. बरसात के मौसम में यह उपाय काफी उपयोगी माना जाता है.

    सफाई का रखें खास ध्यान
    घरेलू उपाय तभी पूरी तरह असर दिखाते हैं, जब घर की साफ-सफाई का भी ध्यान रखा जाए. खाने को हमेशा ढककर रखें. किचन की सतहों को नियमित रूप से साफ करें और डस्टबिन समय पर खाली करें. इससे मक्खियां घर की ओर कम आकर्षित होंगी और परिवार भी संक्रमण के खतरे से सुरक्षित रहेगा.

  • पाइप में पानी का प्रेशर है कम, तो प्लंबर के खर्च को कहें टाटा..

    पाइप में पानी का प्रेशर है कम, तो प्लंबर के खर्च को कहें टाटा..

    पाइप में पानी का प्रेशर है कम, तो प्लंबर के खर्च को कहें टाटा..

    अगर घर के नल से पानी बहुत धीरे आने लगे, तो रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में कई लोग बिना वजह तुरंत प्लंबर को बुला लेते हैं. जबकि कई बार यह परेशानी बहुत छोटी होती है और इसे कुछ आसान तरीकों से घर पर ही ठीक किया जा सकता है. इन तरीकों से आप प्लंबर पर खर्च होने वाले पैसे भी बच सकते हैं और पानी का प्रेशर भी पहले जैसा कर सकते हैं.

    एयर बैंड से मिलेगी मदद

    अगर आपके घर की पाइपलाइन पहले से लगी हुई है और उसे बदलना नहीं चाहते, तो एयर बैंड एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. इसे पाइप के मोड़ वाली जगह पर लगाया जाता है. कई मामलों में इससे पानी का बहाव बेहतर हो जाता है और नल से पानी पहले की तुलना में तेज आने लगता है. यह तरीका आसान भी है और ज्यादा खर्चीला भी नहीं होता.

    वॉटर प्रेशर बूस्टर पंप

    अगर सिर्फ एयर बैंड से काम नहीं बनता, तो वॉटर प्रेशर बूस्टर पंप का इस्तेमाल किया जा सकता है. यह एक ऑटोमैटिक मशीन होती है, जिसे पानी की लाइन या ओवरहेड टैंक से जोड़ा जाता है. जैसे ही आप नल खोलते हैं, यह अपने आप चालू हो जाती है और पानी का प्रेशर बढ़ाने में मदद करती है. इससे बाथरूम, किचन और दूसरे नलों में भी पानी का बहाव बेहतर हो सकता है.

    क्यों कम होता है पानी का प्रेशर?

    पानी का प्रेशर कम होने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं. सबसे आम कारण पाइपलाइन में लीकेज होना है. अगर कहीं से पानी बाहर निकल रहा है, तो नल तक पूरा प्रेशर नहीं पहुंच पाता.

    इसके अलावा पाइप के अंदर मिट्टी, कचरा या दूसरी गंदगी जमा होने से भी पानी का रास्ता रुक सकता है. कई बार नल का एरेटर जाम हो जाता है, जिससे पानी कम निकलता है. वहीं अगर घर की पानी की टंकी में पानी का लेवल कम हो, तब भी नल का प्रेशर घट सकता है.

    कब बुलाएं प्लंबर को?

    अगर बार-बार पानी का प्रेशर कम हो रहा है और आसान तरीके अपनाने  के बाद भी परेशानी लगातार बनी रहती है, तो प्लंबर की मदद लेना सही रहेगा. अगर पानी की मोटर ठीक से काम कर रही है, फिर भी नल से पानी कम आ रहा है, तो पाइपलाइन की जांच जरूरी हो सकती है. इसी तरह अगर पाइप में लीकेज हो या किसी हिस्से में बड़ी खराबी हो, तो खुद ठीक करने की बजाय किसी प्लंबर को बुलाना बेहतर रहेगा.

  • प्राचीन काल की ईंटें, मिट्टी की सुराही, हैंडल वाली धूपदानी… रायबरेली में मिली रहस्यमयी सुरंग

    प्राचीन काल की ईंटें, मिट्टी की सुराही, हैंडल वाली धूपदानी… रायबरेली में मिली रहस्यमयी सुरंग

    प्राचीन काल की ईंटें, मिट्टी की सुराही, हैंडल वाली धूपदानी… रायबरेली में मिली रहस्यमयी सुरंग

    उत्तर प्रदेश में रायबरेली जिले के हरचंदपुर थाना क्षेत्र के ओई गांव में मिली रहस्यमयी सुरंग और प्राचीन अवशेष मिले हैं. पिछले हफ्ते ओई गांव में बारिश के बाद अचानक जमीन धंस गई. जमीन धंसने से वहां एक रहस्यमयी सुरंग और पक्की दीवार जैसी संरचना दिखाई दी है. इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है.

    अचानक खेत में हो गया गड्ढा-
    मामला रायबरेली जिले के हरचंदपुर थाना क्षेत्र का है, यहां स्थित ओई गांव में एक निजी खेत के अंदर अचानक एक मीटर चौड़ा गड्ढा हो गया. जब लोगों ने पास जाकर देखा, तो वहां पक्की दीवार से बनी एक प्राचीन सुरंग जैसी आकृति नजर आई. इस अनोखी संरचना को देखने के लिए देखते ही देखते पूरे गांव की भीड़ जमा हो गई.

    कई ऐतिहासिक चीजें मिली-
    मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन तुरंत एक्शन में आया. एसडीएम महराजगंज और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI लखनऊ मंडल की टीम मौके पर पहुंची. सहायक पुरातत्वविद डॉ. मनोज कुमार यादव के नेतृत्व में टीम सीढ़ी के सहारे इस रहस्यमयी सुरंग के अंदर उतरी. उन्हें बताया की सुरंग के अंदर जांच के दौरान पुरातत्व विभाग की टीम को कई ऐतिहासिक चीजें मिली हैं. यहां से प्राचीन काल की पुरानी ईंटें, मिट्टी की सुराही और एक हैंडल वाली धूपदानी बरामद की गई है.

    कुषाण कालीन अवशेष मिले-
    एक्सपर्ट्स के शुरुआती आकलन के मुताबिक, ये सभी अवशेष कुषाण कालीन बताए जा रहे हैं. इतना ही नहीं, इस मामले में आज एक बड़ा अपडेट सामने आया है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण लखनऊ मंडल की टीम ने आज गांव के ही निवासी अशोक प्रताप मौर्य के घर पहुंचकर उनके पास मौजूद प्राचीन अवशेषों का बारीकी से निरीक्षण किया. गौरतलब है कि अशोक प्रताप मौर्य 1985 से इन ऐतिहासिक अवशेषों को सहेज कर रख रहे हैं. उनके दावे के अनुसार, यह ओई भीट पुरातत्व विभाग के अभिलेखों में दर्ज एक ऐतिहासिक स्थल है.

    फिलहाल, सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने पूरे इलाके को सील कर दिया है. मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है और ग्रामीणों को गड्ढे के पास जाने से साफ मना किया गया है. एएसआई की विस्तृत वैज्ञानिक रिपोर्ट आने के बाद ही इस प्राचीन और ऐतिहासिक सुरंग का पूरा सच सामने आ सकेगा.


    डॉ कुमार ने बताया कि निरीक्षण के दौरान हम लोगों ने यहां पर देखा कि तकरीबन 15 से 20 फीट की जमीन धंसी हुई है. जिसके अंदर कुछ ईंटों के संरचना मिले, जिनका ओरियंटेशन उत्तर से लेकर दक्षिण की तरफ है और जब हम लोगों ने नीचे जाकर ईंटों को देखा तो उनकी साइज 40 /28 /8 सेंटीमीटर है, जो कुषाण कालीन संरचना से मिलती-जुलती है और बहुत सारे अवशेष देखने को मिले, जो सरफेस पर भी है और यहां के स्थानीय लोगों के द्वारा संग्रह भी किया गया है और इन्हें बनाने में जो ड्राइव है, जो मूर्तियां हैं, कुछ अवशेष हैं, जो यह सारी संरचनाओं हैं, कुषाण कल के समय जो बनती थी, यह उससे मिलती-जुलती हैं. यह 2000 साल पहले का है और अभी इसकी रिपोर्ट सबमिट की जाएगी. फिर उसके बाद जैसे शासन निर्देश करेगी, उसी हिसाब से कार्यवाही की जाएगी.

  • Aadhaar Bometric Lock: कर लें इस सेटिंग को ऑन… नहीं कर पाएगा कोई आधार का गलत इस्तेमाल, बायोमेट्रिक रहेंगे पूरी तरह सेफ

    Aadhaar Bometric Lock: कर लें इस सेटिंग को ऑन… नहीं कर पाएगा कोई आधार का गलत इस्तेमाल, बायोमेट्रिक रहेंगे पूरी तरह सेफ

    Aadhaar Bometric Lock: कर लें इस सेटिंग को ऑन… नहीं कर पाएगा कोई आधार का गलत इस्तेमाल, बायोमेट्रिक रहेंगे पूरी तरह सेफ

    आधार कार्ड आज बैंक, सरकारी स्कीम, सिम कार्ड खरीदने और कई जरूरी कामों में इस्तेमाल होता है. ऐसे में अगर आपके आधार का गलत इस्तेमाल हो जाए तो बड़ी परेशानी हो सकती है. इसी खतरे को कम करने के लिए नए Aadhaar App में एक खास फीचर दिया गया है. अब यूजर अपने फिंगरप्रिंट और आइरिस (आंखों की पहचान) को जब चाहें लॉक और जरूरत पड़ने पर अनलॉक कर सकते हैं. इससे आपकी बायोमेट्रिक जानकारी ज्यादा सेफ रहती है.

    बायोमेट्रिक लॉक क्यों जरूरी है?

    आधार से जुड़ी बायोमेट्रिक जानकारी में आपके फिंगरप्रिंट और आइरिस की जानकारी होती है. अगर यह जानकारी लॉक रहती है, तो कोई भी व्यक्ति आपकी पर्मिशन के बिना बायोमेट्रिक से आधार का इस्तेमाल नहीं कर सकता. इससे धोखाधड़ी की आशंका काफी कम हो जाती है.

    नए Aadhaar App से कैसे करें लॉक?

    अगर आप अपने फिंगरप्रिंट और आइरिस को लॉक करना चाहते हैं, तो सबसे पहले नया Aadhaar App खोलें. इसके बाद अपने आधार खाते में लॉग इन करें. ऐप के होम पेज पर आपको Biometric Lock का ऑप्शन दिखाई देगा. इस पर टैप करें और स्क्रीन पर दी गई जानकारी को पूरा करें. प्रोसेस पूरा होते ही आपका बायोमेट्रिक डेटा लॉक हो जाएगा. इसके बाद किसी भी बायोमेट्रिक जांच के लिए पहले इसे अनलॉक करना जरूरी होगा.

    जरूरत पड़ने पर ऐसे करें अनलॉक

    जब आपको बैंक, आधार सेवा केंद्र या किसी अन्य जगह फिंगरप्रिंट या आइरिस से पहचान करानी हो, तब Aadhaar App खोलें. फिर Biometric Unlock ऑप्शन चुनें और पहचान की प्रोसेस पूरी करें. आपका बायोमेट्रिक कुछ समय के लिए अनलॉक हो जाएगा. काम पूरा होने के बाद आप इसे दोबारा लॉक भी कर सकते हैं.

    किनके लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद?

    अगर आपका आधार कई सेवाओं से जुड़ा है, आप अक्सर बैंक या सरकारी काम करते हैं या आपको आधार के गलत इस्तेमाल की चिंता रहती है, तो यह सुविधा आपके लिए काफी फायदेमंद है. जरूरत न होने पर बायोमेट्रिक लॉक रखने से सेफ्टी बढ़ जाती है और आपकी निजी जानकारी सेफ रहती है. नए Aadhaar App में यह सुविधा अब पहले से ज्यादा आसान और तेज तरीके से होती है.

  • AI कैमरों को भी कर सकते हैं कन्फ्यूज ये खास कपड़े! आखिर क्यों बढ़ रही है इनकी चर्चा?

    AI कैमरों को भी कर सकते हैं कन्फ्यूज ये खास कपड़े! आखिर क्यों बढ़ रही है इनकी चर्चा?

    AI कैमरों को भी कर सकते हैं कन्फ्यूज ये खास कपड़े! आखिर क्यों बढ़ रही है इनकी चर्चा?

    सोचिए, आपने एक ऐसी टी-शर्ट या जैकेट पहन रखी हो जिसे देखकर AI कैमरे आपकी पहचान करने में मुश्किल महसूस करें. सुनने में यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसा लगता है, लेकिन अब ऐसे खास कपड़ों की चर्चा हो रही है. इन्हें Adversarial Clothing कहा जाता है. इन कपड़ों को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि कुछ फेस रिकग्निशन सिस्टम के लिए किसी व्यक्ति की पहचान करना मुश्किल हो सकता है.

    Adversarial Clothing ऐसे कपड़े होते हैं जिन पर खास तरह के पैटर्न और डिजाइन बनाए जाते हैं. इनका मकसद कुछ AI कैमरों और फेस रिकग्निशन सिस्टम को भ्रम में डालना है. कुछ डिजाइनर ऐसे जैकेट भी बना रहे हैं जिनमें इंफ्रारेड LED का इस्तेमाल किया जाता है. दावा है कि इससे कुछ कैमरों के लिए चेहरा साफ पहचानना कठिन हो सकता है. लेकिन, यह तकनीक हर जगह एक जैसी असरदार नहीं मानी जाती.

    आखिर लोग क्यों खरीदना चाहते हैं ऐसे कपड़े?

    आज दुनिया के कई शहरों में AI कैमरों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, मॉल और दूसरी सार्वजनिक जगहों पर फेस रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे में कई लोग अपनी प्राइवेसी को लेकर चिंता जताते हैं. इसी वजह से कुछ लोग ऐसे कपड़ों को सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि अपनी निजता से जोड़कर भी देख रहे हैं.

    क्या सच में AI कैमरों को धोखा दे सकते हैं?

    इस सवाल का जवाब पूरी तरह ‘हां’ नहीं है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक अलग-अलग कंपनियों के कैमरे और AI सिस्टम अलग तरीके से काम करते हैं. इसलिए कोई भी कपड़ा हर जगह या हर सिस्टम को चकमा दे देगा, ऐसा कहना सही नहीं होगा. कई बार कैमरे फिर भी व्यक्ति की पहचान कर सकते हैं.

    क्या आगे बढ़ेगा यह ट्रेंड?

    फैशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर बड़े फैशन ब्रांड और मशहूर लोग ऐसे डिजाइन अपनाते हैं, तो यह ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो सकता है. वहीं, अगर भविष्य में ऐसे कपड़े निगरानी तकनीक को बड़े स्तर पर प्रभावित करने लगते हैं, तो सरकारें इनके इस्तेमाल को लेकर नए नियम भी बना सकती हैं.