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  • यूपी में बेटे की सरकारी नौकरी लगते ही पिता ने दिखाई राजाओं वाली शान, हाथी पर बैठाकर निकाला जुलूस

    यूपी में बेटे की सरकारी नौकरी लगते ही पिता ने दिखाई राजाओं वाली शान, हाथी पर बैठाकर निकाला जुलूस

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    उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद में हरैया थाना क्षेत्र के अंतर्गत केशवपुर गांव के रहने वाले अवनीश पाण्डेय ने ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर चयनित होकर पूरे जिले का नाम रोशन किया है. बेटे की इस शानदार सफलता पर पिता महेंद्र कुमार पाण्डेय की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. अपनी इस खुशी का इजहार करने के लिए पिता ने एक अनोखा और शाही तरीका अपनाया, जिसकी चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है. 

    संसारीपुर चौराहे पर गाजे-बाजे के साथ एक भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया. यहां पिता महेंद्र कुमार पाण्डेय ने नवचयनित अधिकारी बेटे अवनीश को बाकायदा हाथी पर बैठाकर पूरे गाजे-बाजे के साथ विजय जुलूस निकाला. ढोल-नगाड़ों की थाप और ग्रामीणों के उल्लास के बीच निकला यह जुलूस हर किसी के लिए कौतूहल और आकर्षण का केंद्र बना रहा.

    स्थानीय लोगों ने फूल-मालाओं से किया स्वागत 

    स्थानीय लोगों ने इस खुशी के मौके पर बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जगह-जगह फूल-मालाओं से अवनीश का स्वागत किया और परिजनों को बधाइयाँ दीं. सोशल मीडिया पर भी पिता-पुत्र के इस खास पल का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लोग एक पिता के गर्व और सफलता के जश्न का सबसे खूबसूरत दृश्य बता रहे हैं. अवनीश की यह उपलब्धि स्थानीय युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है.

    पूरे गांव में जश्न सा माहौल 

    ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर चयनित हुए अवनीश पाण्डेय को जब उनके पिता महेंद्र कुमार पाण्डेय ने संसारीपुर चौराहे पर हाथी पर बैठाकर ढोल-नगाड़ों के साथ गाँव में प्रवेश कराया, तो यह केवल एक पारिवारिक जश्न भर नहीं रहा. यह ग्रामीण समाज में सफलता, संघर्ष और सम्मान के बदलते आयामों को बयां करती एक ऐतिहासिक घटना बन गई. भारतीय समाज में, विशेषकर ग्रामीण अंचलों में, एक पिता अपनी पूरी ज़िंदगी बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य को संवारने में खपा देता है. जब वर्षों की वह तपस्या रंग लाती है, तो खुशी का बाँध टूटना स्वाभाविक है.

    पिता का यह बादशाही अंदाज दिखावा नहीं, बल्कि उस अथक परिश्रम और उम्मीदों की जीत का उत्सव है, जो एक साधारण परिवार ने वर्षों तक संजोया था. हाथी की सवारी कोई धन-दौलत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उस असीम गर्व की अभिव्यक्ति है जो एक पिता को उसके बेटे की योग्यता ने दी है.

    औरों के लिए बने प्रेरणा 

    यह वायरल होता वीडियो उन सभी युवाओं की आँखों में एक नया सपना बोता है कि अगर मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो एक दिन उनके माता-पिता का मस्तक भी इसी तरह गर्व से ऊँचा होगा. ग्राम पंचायत अधिकारी के रूप में अवनीश अब व्यवस्था का एक हिस्सा बनने जा रहे हैं. मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनकी इस सफलता का सच्चा उत्सव तब और सार्थक होगा जब वह अपने इस पद का उपयोग अपने गाँव और क्षेत्र के विकास के लिए पूरी निष्ठा से करेंगे. फिलहाल, यह पल एक पिता के त्याग और बेटे के समर्पण की उस जीत का है, जिसने बस्ती ही नहीं, पूरे प्रदेश के युवाओं को प्रेरित किया है.

  • ‘बदसूरती’ के मिले लाखों रुपये! इस डॉगी ने चमकाई मालकिन की किस्मत

    ‘बदसूरती’ के मिले लाखों रुपये! इस डॉगी ने चमकाई मालकिन की किस्मत

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    दुनियाभर में अक्सर खूबसूरती के चर्चे होते हैं, लेकिन कैलिफोर्निया में एक ऐसा कंपटीशन (competition) होता है, जहां डॉग्स की अनोखी बनावट और उनकी सादगी को सेलिब्रेट किया जाता है. कैलिफोर्निया (California) के सांता रोजा (Santa Rosa) में 14 अगस्त को आयोजित 50वें ‘वर्ल्ड्स अग्लिएस्ट डॉग कॉन्टेस्ट’ में 6 साल की पग ‘जिनी लू’ ने बाजी मारते हुए ये खिताब अपने नाम कर लिया है.

    जिनी लू (Jinny Lu) की मालकिन मिशेल ग्रेडी (Michelle Grady) के मुताबिक, जिनी लू पिछले तीन सालों से इस कंपटीशन में हिस्सा ले रही थी, लेकिन जीत उसे फोर्थ अटेम में मिली. कंपटीशन में दूसरा स्थान चिहुआहुआ-पोमेरेनियन मिक्स (Chihuahua-Pomeranian mix) ‘पिंकी’ (Pinky) को मिला, जबकि तीसरा स्थान ‘ऑटो’ (Otto) नाम के डॉगी ने हासिल किया.

    जिनी लू को करीब 4 साल पहले पग रेस्क्यू के जरिए गोद लिया गया था, तब से वो अपनी मालकिन मिशेल की लाइफ में खुशियां भर रही है. कंपटीशन के ऑर्गनाइजरों का कहना है कि, ‘इस कॉन्टेस्ट का मकसद किसी जानवर का मजाक उड़ाना नहीं, बल्कि पालतू जानवरों को गोद लेने के प्रति जागरूकता फैलाना है.’

  • ओडिशा के गांव में बिगड़ी अमेरिकी टूरिस्ट की तबीयत, इलाज के बाद बिल देखकर रह गए दंग,

    ओडिशा के गांव में बिगड़ी अमेरिकी टूरिस्ट की तबीयत, इलाज के बाद बिल देखकर रह गए दंग,

    अमेरिकी फिल्म निर्देशक माइक नून की ओडिशा यात्रा के दौरान अचानक से तबीयत खराब हो गई। उन्हें तत्काल एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनको उचित देखभाल समय पर मिली। माइक ने बताया कि यदि यह स्थिति अमेरिका में होती, तो इलाज की लागत हजारों डॉलर तक पहुंच सकती थी। यह अनुभव भारत की ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करता है।

    माइक नून की ओडिशा यात्रा के दौरान तबीयत बिगड़ गई

    भारत घूमने आए अमेरिकी फिल्ममेकर माइक नून की ओडिशा यात्रा का एक अनुभव सोशल मीडिया पर चर्चा में है। घूमने के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें इलाज के लिए एक ग्रामीण सरकारी अस्पताल ले जाया गया। जहाँ एक तरफ वह अस्पताल की सुविधाओं और भाषा से बिल्कुल अनजान थे, वहीं दूसरी तरफ उन्हें समय पर इलाज मिला। ठीक होने के बाद उन्होंने इस अनुभव को सोशल मीडिया पर साझा किया और भारत में इलाज की लागत की तुलना अमेरिका से की।

    माइक के मुताबिक़, भारत आने के महज़ पाँचवें दिन उनकी तबीयत बिगड़ी। करीब 12 घंटे तक उन्हें लगातार उल्टियाँ होती रहीं और एक समय ऐसा आया जब लगभग हर 15 मिनट में उल्टी हो रही थी। इसके बाद उन्हें ओडिशा के एक ग्रामीण सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में उन्हें आईवी फ्लूइड, उल्टी रोकने की दवा और इंजेक्शन दिए गए। इलाज के दौरान उन्होंने अस्पताल के बिस्तर से वीडियो बनाकर अपनी स्थिति के बारे में बताया।

    गाँव के अस्पताल तक कैसे पहुँचा अमेरिकी पर्यटक?

    माइक ने बताया कि वह जिस अस्पताल में पहुँचे, वह ग्रामीण इलाक़े में था और वहाँ लिखी भाषा तक उनके लिए समझना मुश्किल थी। इसके बावजूद उन्हें इलाज मिला और उनकी हालत में सुधार हुआ। उन्होंने यह भी साफ़ किया कि उनकी तबीयत खराब होने की वजह फूड पॉइज़निंग नहीं थी। उनके मुताबिक़, उन्हें स्थानीय खाना इतना पसंद आया कि उन्होंने जरूरत से ज़्यादा खा लिया। इसके बाद उन्हें उल्टी और दूसरी परेशानियां शुरू हो गईं।

    यह अनुभव इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि आम तौर पर ग्रामीण सरकारी अस्पतालों को लेकर चर्चा स्थानीय आबादी की स्वास्थ्य सुविधाओं और पहुँच के संदर्भ में होती है। इस मामले में एक विदेशी पर्यटक ने भी ऐसे ही अस्पताल में इलाज मिलने का अपना अनुभव सामने रखा।

    इलाज के बाद अमेरिका के खर्च से की तुलना

    माइक ने वीडियो में बताया कि भारत में इलाज मिलने के बाद उन्हें सबसे ज़्यादा हैरानी इसके खर्च को लेकर हुई। उन्होंने कहा कि अमेरिका में आईवी फ्लूइड, उल्टी रोकने वाली दवा और इंजेक्शन जैसी चिकित्सा सुविधाओं पर उन्हें हज़ारों डॉलर तक खर्च करना पड़ सकता था। इसके उलट, उनके मुताबिक़ जिस ग्रामीण सरकारी अस्पताल में उनका इलाज हुआ, वहां उनसे इलाज के लिए कोई पैसा नहीं लिया गया। उन्होंने इस बात को अपने अंदाज़ में बताया और भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था की तुलना अमेरिका की महंगी चिकित्सा व्यवस्था से की।

    सोशल मीडिया पर वायरल हुआ अनुभव

    माइक के इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी आने लगीं। कई यूज़र्स ने भारत में कम लागत वाली सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की तारीफ़ की। कुछ लोगों ने उन्हें ओडिशा में मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में बताया, तो कुछ ने बीमारी के बाद खान-पान को लेकर सलाह दी। हालांकि, इस एक अनुभव के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि हर विदेशी नागरिक को भारत के हर सरकारी अस्पताल में हर तरह का इलाज मुफ़्त मिलता है। अस्पताल और इलाज के प्रकार के हिसाब से नियम और शुल्क अलग हो सकते हैं।

    ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की भी दिखी एक तस्वीर

    माइक का अनुभव केवल एक वायरल वीडियो की कहानी नहीं है। यह ग्रामीण भारत के सरकारी अस्पतालों की उस भूमिका की ओर भी ध्यान खींचता है, जहाँ स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले लोगों को भी ज़रूरत पड़ने पर चिकित्सा सहायता मिल सकती है।

    ओडिशा में घूमने आए एक विदेशी पर्यटक का ग्रामीण अस्पताल तक पहुँचना और वहाँ इलाज पाना इस बात को सामने लाता है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाएँ ग्रामीण इलाक़ों में कितनी अहम भूमिका निभाती हैं। माइक के लिए यह यात्रा का एक अप्रत्याशित पड़ाव था, लेकिन उनके अनुभव ने सोशल मीडिया पर भारत की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और इलाज की लागत को लेकर एक नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है।

  • लेह पैलेस जाते समय पहाड़ पर दिखी ‘हनुमानजी की गदा’! शहर से पहाड़ों में शिफ्ट हुए कपल ने बनाया वीडियो..

    लेह पैलेस जाते समय पहाड़ पर दिखी ‘हनुमानजी की गदा’! शहर से पहाड़ों में शिफ्ट हुए कपल ने बनाया वीडियो..

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    शहर की जिंदगी छोड़कर हिमालय के गांव में शिफ्ट हुए एक कपल ने 14 सेकंड का एक वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया है, जिसमें पहाड़ पर ‘हनुमान जी की गदा’ दिखाई दे रही है. यह वीडियो उन्होंने लेह पैलेस जाते समय रास्ते में बनाया है, जिसे देखकर हर कोई हैरान हो रहा है. कपल का भी कहना है कि जब उन्होंने इस नजारे को देखा तो पहली बार में उन्हें भी अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ.

    14 सेकंड के वीडियो में क्या दिखा रहा है?

    Two Vagabond Monks नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट से यह वीडियो 3 अगस्त को पोस्ट किया गया है, जिसमें कंधे पर बैग टांगकर हाइकिंग करते हुए अंकुर इस नजारे को अपने कैमरे में कैद करते  नजर आ रहे हैं. उनका कहना है कि यह दृश्य उन्होंने लेह पैलेस के ठीक सामने देखा है. वीडियो में पहाड़ पर पड़ रही सूरज की रोशनी और परछाई से ये दृश्य बना है, जो लोगों को खूब पसंद आ रहा है.

    यहां देखें वीडियो

     

    ‘आप जो कुछ भी सोच सकते हैं, वह सच है’

    इस वीडियो को देखने के बाद ज्यादा लोग इसे अद्भुत बता रहे हैं. एक यूजर ने कमेंट में लिखा है कि हनुमानजी हर जगह हैं. जबकि दूसरे यूजर पाब्लो पिकासो का नाम लेकर कहते हैं कि आप जो कुछ भी सोच सकते हैं, वह सच है. तीसरे यूजर ने कहा कि प्रकृति हमेशा अपनी सुंदरता से आपको हैरान कर देती है.

    JKSRTC बसे से ट्रैवल करके जा रहे लद्दाख

    ये कपल इस मनाली के एक गांव में रहता है और समय-समय पर ट्रैवल करते हुए लोगों के लिए ऐसे वीडियो बनाता है जो उनके काम आते हैं. इस वक्त वे जम्मू और कश्मीर स्टेट एंड रोड ट्रांसपोर्ट की बस में सफर करते हुए लद्दाख घूम रहे हैं और अपनी जर्नी का एक्सपीरियंस शेयर कर रहे हैं.

  • 35 साल की शादी और बेमिसाल मोहब्बत, पत्नी की एक पुरानी ख्वाहिश के लिए पति ने बेच दिया घर, किया ऐसा काम..दुनिया कर रही है सलाम..?

    35 साल की शादी और बेमिसाल मोहब्बत, पत्नी की एक पुरानी ख्वाहिश के लिए पति ने बेच दिया घर, किया ऐसा काम..दुनिया कर रही है सलाम..?

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    कहते हैं अगर प्यार (love story) सच्चा हो तो इंसान नामुमकिन को भी मुमकिन बना देता है. बड़े से बड़े पहाड़ को काट देता है. हाल ही में चीन के सिचुआन प्रांत के रहने वाले झोउ शाओलिन (Zhou Xiaolin) ने अपनी पत्नी यिन जी (Yin Jie) के लिए कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) के मुताबिक, 2013 में यिन जी ने बस यूं ही अपने पति के सामने बचपन के फेवरेट हॉलीहॉक फूलों का जिक्र कर दिया था, जिसके बाद झोउ ने उनसे वादा किया कि एक दिन वो उनके लिए एक पूरा बाग तैयार करेंगे. अपनी पत्नी की बचपन की यादों को संजोने के लिए झोउ ने 80 हेक्टेयर बंजर जमीन को दुनिया के सबसे बड़े हॉलीहॉक गार्डन में बदल दिया.

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    बिना किसी गार्डनिंग एक्सपीरियंस के झोउ ने अपना घर तक बेच दिया और ट्रुआनलोंग टाउन में जमीन खरीद ली. उन्होंने 10 साल तक कड़ी मेहनत की, देसी और विदेशी बीजों को ढूंढा और 80 हेक्टेयर की बंजर घाटी को फूलों से सजा दिया. आज ये जगह दुनिया की सबसे बड़ी हॉलीहॉक गार्डन बन चुकी है. इसमें हॉलीहॉक की 700 से ज्यादा किस्में, 1.5 लाख लिली और 1 लाख हिबिस्कस के पौधे मौजूद हैं.

    दोनों (कपल) की पहली मुलाकात 1985 में हुई थी, जब झोउ एक ट्रेनी टूर गाइड थे. 5 साल तक चिट्ठियों के जरिए बातें करने के बाद दोनों ने आखिरकार शादी कर ली. तिब्बत ट्रिप के दौरान भयानक बर्फबारी में फंसने पर झोउ अपनी पत्नी को पीठ पर लादकर गुफा तक ले गए थे, जहां उन्होंने तीन दिन बिताए. यिन जी मानती हैं कि ऐसे लाइफ पार्टनर के साथ जिंदगी का हर लम्हा खूबसूरत हो जाता है. आज शादी के 35 साल बाद भी ये कपल अपने इस खूबसूरत बाग में पालतू डॉग्स और बिल्लियों के साथ रहता है. कपल के बच्चे नहीं हैं. दोनों हर जन्मदिन और एनिवर्सरी पर एक-दूसरे को हाथ से लिखे खत देते हैं. चीन के केंद्रीय टेलीविजन (CCTV) पर दिखाए जाने के बाद ये जोड़ा देशभर में ‘ड्रीम कपल’ के नाम से फेमस हो चुका है.

  • ना पेट्रोल की समस्या ना चार्जिंग का सिर दर्द, शख्स की जुगाड़ बाइक हुई..

    ना पेट्रोल की समस्या ना चार्जिंग का सिर दर्द, शख्स की जुगाड़ बाइक हुई..

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    Viral News : देश में जुगाड़ बनाने वाले वालों की कमी नहीं है। अपने दिमांग का इस्तेमाल कर कर लोग समस्या का समाधान निकालने के लिए जुगाड़ लगा ही लेते हैं। सोशल मीडिया पर आज कई मजेदार जुगाड़ के वीडियो वायरल हो रहे हैं। ऐसा ही एक देसी जुगाड़ सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसने तहलका मचा रखा है। यह वायरल जुगाड़ देख कई लोग हैरत में पड़ गए तो कुछ लोग इसे बनाने वाले के दिमांग की तारीफ करते नहीं थक रहे। दरअसल एक शख्स ने गधे के सर पर बाइक ही हैडलाइट लगाकर दी। इसके साथ ही उसकी पीठ पर बाइक की सीट को भी बांध दिया। शख्स ने अपने जुगाड़ का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है। जिसे देखने के बाद लोग तमाम तरीके की प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

    सर पर हेडलाइट और साइड इंडिकेटर्स भी लगाए

    देश में बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल के दामों में लगातार होने वाली वृद्धि को देखते हुए एक शख्स ने अपने जुगाड़ से लोगों को हैरान कर दिया है। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि रात के समय बाजार में सड़क के किनारे एक गधे को देख हर कोई हंसकर लोटपोट हो रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस अतरंगी जुगाड का जमकर मचा ले रहे हैं। दरअसल वीडियो में दिखाई देने वाला गधा कोई साधारण नहीं बल्कि उसे बाइक का अवतार दिया गया है। गधे की पीठ पर मोटरसाइकिल की लंबी सीट बंधी है। सिर पर हेडलाइट और साइड इंडिकेटर्स लगे हैं। मतलब गधा अगर रात के समय चलेगा तो उसपर सवार शख्स हेडलाइट जलाकर चल सकता है।

    गधा भी नहीं रहा गधा बना जुगाड़

    वायरल वीडियो को देख कुछ लोगों ने इसपर अपनी प्रतिक्रिया दी है। वीडियो देखने वाला इसे फ्यूचरिस्टिक बाइक भी बोल रहे हैं। वीडियो देखने के बाद कई लोगों ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि इस बंदे ने ऐसा जुगाड़ बनाकर दिमाग ही चकरा दिया। एक अन्य शख्स ने लिखा है कि बिना पेट्रोल के चलने वाली टिकाऊ गाड़ी। तो वहीं एक अन्य शख्स ने लिखा कि इस गाड़ी को चलाने के लिए किसी तरह का लाइसेंस भी नहीं बनवाना पडेगा। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को देखने के बाद कुछ लोगों ने यह भी कहा कि गधा भी अब गधा नहीं रहा बल्कि बन गया है बेहतरीन जुगाड़!

  • 3 करोड़ साल से यहां लिपटे पड़े हैं 4 सांप, आज भी जिंदा है नर्क के दानव का श्राप..

    3 करोड़ साल से यहां लिपटे पड़े हैं 4 सांप, आज भी जिंदा है नर्क के दानव का श्राप..

    S सोचिए, करीब 3.8 करोड़ साल पहले के चार सांप एक ही जगह दबे रह गए और इतने लंबे वक्त बाद उनके कंकाल वैज्ञानिकों के हाथ लगे. अमेरिका के व्योमिंग में मिले इन दुर्लभ अवशेषों ने सांपों की पुरानी दुनिया को समझने का एक नया रास्ता खोल दिया है. वैज्ञानिकों ने इन अवशेषों की जांच के बाद एक नई प्रजाति Hibernophis breithaupti की पहचान की है. इसके करीब चार लगभग पूरे कंकाल मिले हैं. इनमें से तीन सांप एक साथ, बिल जैसी संरचना में दबे हुए थे, जबकि चौथा सांप उसी चट्टानी परत में थोड़ी अलग जगह से मिला. अब सवाल उठता है कि ये सांप एक साथ वहां पहुंचे कैसे? यही इस खोज को खास बनाता है.

    जमीन से निकला करोड़ों साल पुराना राज

    ये फॉसिल अमेरिका के Wyoming स्थित White River Formation की चट्टानों से मिले हैं. इनकी उम्र शुरुआती Oligocene काल की बताई गई है, यानी ये 3 करोड़ साल से भी ज्यादा पुराने. भूगर्भीय साक्ष्यों के आधार पर इस क्षेत्र की चट्टानों की न्यूनतम उम्र करीब 32 मिलियन साल आंकी गई है. जीवाश्म जिस बारीक रेतीली मिट्टी वाली चट्टान में मिले, उसके बारे में वैज्ञानिकों का मानना है कि यह किसी छोटी बाढ़ के दौरान जमा हुई होगी. मिट्टी, पानी और ज्वालामुखीय राख से जुड़े इस वातावरण ने सांपों के अवशेषों को असाधारण तरीके से सुरक्षित रखने में मदद की.

    एक नहीं, तीन सांप एक साथ मिले

    इस खोज की सबसे खास बात यह है कि तीन सांप एक ही जगह पर साथ-साथ मिले. वैज्ञानिकों को ये तीनों सांप चट्टान के दो ऐसे हिस्सों में मिले, जो आपस में जुड़े हुए थे. यानी ऐसा लग रहा था जैसे ये किसी एक जगह पर साथ मौजूद थे और फिर उसी दौरान मिट्टी और चट्टान के नीचे दब गए. पहली नजर में चट्टान के ऊपर सिर्फ दो सांपों के कंकाल दिखाई दे रहे थे. लेकिन जब वैज्ञानिकों ने इसका CT स्कैन किया, तो चट्टान के अंदर छिपा तीसरा सांप भी सामने आ गया. वहीं, चौथा सांप इसी इलाके की दूसरी जगह से मिला.

    मजेदार बात यह है कि इन सांपों का यह अजीब तरीके से एक साथ मिलना नया नहीं था. वैज्ञानिकों की नजर इन पर करीब 40 साल पहले, 1986 में ही पड़ गई थी. उस समय Brent H. Breithaupt और David Duvall ने अनुमान लगाया था कि शायद ये सांप ठंड से बचने के लिए किसी साझा बिल या आश्रय में एक साथ जमा हुए थे. इसे वैज्ञानिक भाषा में हाइबरनेकुलम कहा जाता है.

    अब नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने इन कंकालों की हड्डियों और शरीर की बनावट को बारीकी से जांचा. इसके बाद पता चला कि ये पहले से पहचानी गई किसी प्रजाति के सांप नहीं, बल्कि एक नई प्रजाति के सदस्य थे. Hibernophis breithaupti के UW-11990 नमूने की तस्वीर। इमेज क्रेडिट: Zoological Journal of the Linnean Society

    वैज्ञानिकों ने दिया नया नाम

    रिसर्चर्स ने इस प्राचीन सांप को Hibernophis breithaupti नाम दिया है. इसके नाम में ‘hibernare’ यानी सर्दियों में रहना और ग्रीक शब्द ‘ophis’ यानी सांप शामिल है. रिसर्च के मुताबिक इसकी खोपड़ी और रीढ़ की हड्डियों की बनावट पहले से पहचाने गए कुछ जीवाश्म सांपों से अलग है. इसी आधार पर इसे एक अलग प्रजाति माना गया है.

    क्या ये सांप सच में साथ रहते थे?

    तीन सांपों का एक साथ और बिल जैसी जगह में मिलना देखकर वैज्ञानिकों को लगता है कि शायद ये ठंड से बचने के लिए किसी साझा ठिकाने में रहते थे. आज भी सांपों की कुछ प्रजातियां ठंड के मौसम में एक साथ बिलों या सुरक्षित जगहों पर जमा होती हैं. लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है. करोड़ों साल पुराने कंकालों को देखकर यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि ये सांप साथ में हाइबरनेट ही कर रहे थे. हो सकता है कि किसी दूसरी वजह से तीनों एक ही जगह पर पहुंचे हों और बाद में वहीं दब गए हों. इसलिए वैज्ञानिक इसे संभावित communal sheltering behaviour का संकेत मानते हैं, पक्के सबूत के तौर पर नहीं.

  •  वियाग्रा की गोली से भी ज्यादा इफेक्टिव हैं ये 8 फूड्स, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन से बचा सकते हैं..

     वियाग्रा की गोली से भी ज्यादा इफेक्टिव हैं ये 8 फूड्स, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन से बचा सकते हैं..

    Erectile Dysfunction: इरेक्टाइल डिस्फंक्शन यानी इरेक्शन हासिल करने या उसे बनाए रखने में परेशानी पुरुषों की सेक्सुअल हेल्थ से जुड़ी एक आम समस्या है। खराब खान-पान, अनहेल्दी लाइफस्टाइल और तनाव जैसी कई वजहें यौन स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं। ऐसे में अपनी डाइट पर ध्यान देना भी जरूरी हो जाता है।

    कुछ पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ शरीर में बेहतर ब्लड फ्लो और सामान्य हार्मोनल हेल्थ को सपोर्ट कर सकते हैं। हालांकि, इन्हें किसी दवा या वियाग्रा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। अगर इरेक्शन की समस्या लगातार बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

    ये 8 फूड्स डाइट में कर सकते हैं मदद

    1. पालक

    पालक फोलेट और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है। ये पोषक तत्व शरीर में सामान्य रक्त संचार और ओवरऑल हेल्थ को सपोर्ट करने में भूमिका निभाते हैं। संतुलित डाइट का हिस्सा बनाकर पालक को पुरुषों की हेल्दी डाइट में शामिल किया जा सकता है।

    2. एवोकाडो

    एवोकाडो में हेल्दी फैट के साथ कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें मौजूद जिंक पुरुषों की रिप्रोडक्टिव हेल्थ और सामान्य हार्मोन फंक्शन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए एवोकाडो को संतुलित डाइट में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।

    3. सेब

    सेब सिर्फ सामान्य सेहत के लिए ही नहीं, बल्कि प्रोस्टेट हेल्थ के लिहाज से भी चर्चा में रहता है। इसके छिलके में उर्सोलिक एसिड जैसे कंपाउंड पाए जाते हैं। फल और सब्जियों से भरपूर डाइट पुरुषों की ओवरऑल हेल्थ के लिए बेहतर मानी जाती है।

    4. कद्दू के बीज

    कद्दू के बीजों में जिंक और ओमेगा-3 फैटी एसिड जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जिंक पुरुषों की रिप्रोडक्टिव हेल्थ और सामान्य हार्मोन फंक्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इन्हें सलाद, ओट्स या स्नैक के तौर पर डाइट में शामिल किया जा सकता है।

    5. तरबूज

    तरबूज में पानी की मात्रा अधिक होने के साथ-साथ सिट्रुलिन नामक अमीनो एसिड पाया जाता है। शरीर में सिट्रुलिन से आर्जिनिन बनने की प्रक्रिया होती है, जो नाइट्रिक ऑक्साइड से जुड़ी होती है और रक्त वाहिकाओं के सामान्य फंक्शन में भूमिका निभाती है।

    6. केला

    केले में पोटैशियम और विटामिन B6 जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। पोटैशियम शरीर में सामान्य ब्लड प्रेशर और मांसपेशियों के कामकाज के लिए जरूरी है। हेल्दी डाइट में केला एक आसान और पौष्टिक विकल्प हो सकता है।

    7. अनार

    अनार एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल है। इसे संतुलित डाइट का हिस्सा बनाने से शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। मूल स्रोत में अनार को ब्लड फ्लो और सेक्सुअल हेल्थ से जोड़कर बताया गया है, हालांकि इसे वियाग्रा का प्राकृतिक विकल्प मानना सही नहीं होगा।

    8. डार्क चॉकलेट

    कम मात्रा में डार्क चॉकलेट का सेवन एक संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकता है। इसमें मौजूद कोकोआ फ्लेवोनॉइड्स और अन्य कंपाउंड्स पर हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़े संभावित प्रभावों को लेकर अध्ययन हुए हैं। तनाव भी सेक्सुअल परफॉर्मेंस को प्रभावित कर सकता है, इसलिए तनाव कम रखने वाली स्वस्थ जीवनशैली महत्वपूर्ण है।

    क्या ये फूड्स वियाग्रा की जगह ले सकते हैं?

    नहीं। इन खाद्य पदार्थों को वियाग्रा या ED की दवा का विकल्प नहीं समझना चाहिए। इनका फायदा मुख्य रूप से संतुलित और पौष्टिक डाइट के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए। इरेक्टाइल डिस्फंक्शन बार-बार हो रहा है तो इसके पीछे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय संबंधी समस्या, तनाव या अन्य कारण हो सकते हैं।

    ऐसी स्थिति में खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहतर है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे किसी चिकित्सकीय जांच, निदान या उपचार का विकल्प न मानें। इरेक्शन से जुड़ी समस्या लगातार बनी रहती है या अचानक शुरू हुई है, तो योग्य डॉक्टर से सलाह लें।

  • खाने को तरसेंगे हिमालयन वयाग्रा, जानें क्‍या है कारण..

    खाने को तरसेंगे हिमालयन वयाग्रा, जानें क्‍या है कारण..

    खाने को तरसेंगे हिमालयन वयाग्रा, जानें क्‍या है कारण

    नेपाल के प्रतिबंध से हजारों लोग प्रभावित

    काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, मुगु जिले में मुगाम कर्माराम ग्रामीण नगर पालिका और छायानाथ रारा नगर पालिका क्षेत्र में रहने वाले हजारों लोग नेपाली सरकार के इस फैसले से प्रभावित हुए हैं। ये लोग खतरनाक हिमालयी इलाकों में जाकर यार्सागुम्बा को इकठ्ठा कर व्यापारियों को बेचते हैं।

    क्या है हिमालयन वयाग्रा

    यार्सागुम्बा एक कीड़ा है जो हिमालय की ऊंची जगहों में उगने वाले खास किस्म के पेड़ों पर ही पाया जाता है। यह कीड़ा भूरे रंग का होता है जिसकी लंबाई 2 इंच के आसपास होती है। इन कीड़ों को नेपाल में यार्सागुम्बा नाम से जाना जाता है।

    मर्दाना कमजोरी की अचकू दवा

    हिमालय के ऊंचाई वाले इलाकों में पाई जाने वाली यार्सागुम्बा को हिमालयन वयाग्रा के नाम से जाना जाता है। इसका इस्तेमाल मर्दाना कमजोरी को दूर करने के लिए औषधि के रूप में किया जाता है। हर साल गर्मियों में नेपाली लोग हिमालय में 10000 फुट की ऊंचाई पर जाकर इस दवा की खोज करते हैं।

    महंगी बिकती है हिमालयन वयाग्रा

    हिमालयन वयाग्रा बहुत ही महंगे दाम में बिकती है। इसकी कीमत प्रति ग्राम 100 यूएस डॉलर से भी ज्यादा होती है। इसकी मांग विदेशों में खासकर अमेरिका और यूरोप में ज्यादा है। यार्सागुम्बा का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। हालांकि, हर्ट के मरीजों के लिए यह जानलेवा हो सकती है।

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    यूट्यूबर ने अपने जिगरी दोस्त को पहनाया भिखारी का लिबास, जानिए 8 घंटे में कितनी हुई कमाई..

    हरिद्वार के कांवड़ मेले में एक यूट्यूबर के अनोखे एक्सपेरिमेंट ने इंटरनेट पर हचचल मचा दी है. इस एक्सपेरिमेंट में उसके दोस्त ने भिखारी का भेष बनाकर एक ही दिन में श्रद्धालुओं से हजारों रुपये हासिल कर लिए. यूट्यूबर पुरुषोत्तम वशिष्ठ और उनके दोस्त सचिन ने ये प्रैंक इसलिए किया ताकि ये देखा जा सके कि भारत के इस अहम धार्मिक आयोजन के दौरान भीख मांगकर कितना पैसा कमाया सकता है. सचिन ने फटे-पुराने कपड़े पहने, चेहरे पर धूल लगाई और भिखारी जैसा दिखने के लिए हाथ में एक छोटा कटोरा लिया. उसने अपने गले में एक यूपीआई क्यूआर कोड भी लटकाया.

    मुश्किलों भरा एक्सपेरिमेंट

    भीख मांगने के दौरान शुरुआती घंटों में सचिन ने तकरीबन 130 रुपये जमा किए. जहां कई श्रद्धालुओं ने पैसे देने से मना कर दिया, वहीं कुछ लोगों ने थोड़ी-बहुत रकम दी. मेले में घूमते हुए उसने दुकानदारों और वेंडर्स से भी बातचीत की. सनग्लास बेचने वाले एक शख्स ने उसे चश्मा दिया, जबकि क्यूआर कोड के जरिए डिजिटल पेमेंट से करीब 40 रुपये मिले. 4 घंटे बीतने के बाद, उसकी कुल जमा रकम तकरीबन 800 रुपये हो गई थी. भारी बारिश, लंबी दूरी तक पैदल चलने और सुरक्षा गार्ड्स की तरफ से परेशान किए जाने के बावजूद एक्सपेरिमेंट जारी रहा.

    आखिर में टोटल कमाई ने चौंकाया

    दिन के आखिर में यूट्यूबरवशिष्ठ और सचिन ने बताया कि उन्होंने लगभग 4000 रुपये जमा कर लिए थे. उन्होंने अंदाजा लगाया कि अगर रोजाना ऐसी ही कमाई हो, तो महीने में लगभग 1.2 लाख रुपये जमा हो सकते हैं. हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भीख मांगना फिजीकली और मेंटली थका देने वाला काम है. उन्होंने कहा कि पैसे के लिए लगातार अजनबियों के पास जाने में बहुत मेहनत लगती है.

    यूजर्स के रिएक्शंस

    एक्स पर वीडियो शेयर किए जाने के बाद, यूजर्स ने कमाई को लेकर हैरानी जताई. कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या धार्मिक और टूरिस्ट प्लेस पर भीख मांगना एक संगठित रोजगार बन गया है, जबकि दूसरों का कहना था कि एक दिन का एक्सपेरिमेंट उन लोगों की मुश्किलों को नहीं दिखा सकता जो असल में भीख मांगकर गुजारा करते हैं. आखिर में दोनों ने अपने फॉलोअर्स को सलाह दी कि वो कमाई के जरिया के तौर पर भीख मांगने के बजाय कोई अच्छी जगह नौकरी या काम की तलाश करें.