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  • मोबाइल चोरी हुआ तो घबराएं नहीं! इन सेटिंग्स से बैंक से जुड़ा आपका पैसा रहेगा सुरक्षित..

    मोबाइल चोरी हुआ तो घबराएं नहीं! इन सेटिंग्स से बैंक से जुड़ा आपका पैसा रहेगा सुरक्षित..

    मोबाइल चोरी हुआ तो घबराएं नहीं! इन सेटिंग्स से बैंक से जुड़ा आपका पैसा रहेगा सुरक्षित..

    मौजूदा समय में मोबाइल फोन सिर्फ बात करने के इस्तेमाल नहीं आता. बल्कि इसमें बैंकिंग ऐप, UPI ऐप, डिजिटल वॉलेट और इंवेस्टमेंट से जुड़ी कई जरूरी जानकारी रहती है. ऐसे में सोचें कि अगर फोन खो जाए, तो आपका कितना जरूरी डेटा किसी और के हाथ लग सकता है. होता भी ऐसा ही है जब लोगों का फोन खोता है तो वह सोचते हैं कि कहीं कोई व्यक्ति बैंक खाते का गलत इस्तेमाल न कर ले, जिससे बैंक खाता खाली हो जाए. लेकिन केवल फोन हाथ लग जाने से बैंक खाते से पैसे निकालना आसान नहीं होता, क्योंकि बैंकिंग ऐप में कई सेफ्टी लेयर्स होती हैं.

    क्या कोई भी बैंक खाते से पैसे निकाल सकता है?

    आमतौर पर बैंकिंग ऐप से पैसे भेजने के लिए स्क्रीन लॉक, ऐप पासवर्ड, MPIN, बायोमेट्रिक या UPI PIN की जरूरत होती है. इसलिए सिर्फ फोन मिलने से कोई व्यक्ति सीधे पैसे ट्रांसफर नहीं कर सकता. लेकिन अगर फोन में स्क्रीन लॉक नहीं है, और बैंकिंग ऐप पहले से लॉगिन है या PIN और पासवर्ड फोन में सेव हैं, तो खतरा बढ़ सकता है.

    फोन खोते ही सबसे पहले क्या करें?

    अगर आपका फोन चोरी हो गया है, तो इंतजार न करें. सबसे पहले फोन को Find My Device जैसी सुविधा से खोजने या दूर से लॉक करने की कोशिश करें. अगर फोन वापस मिलने की उम्मीद नहीं है, तो अगर पॉसिबल हो तो उसे रिमोट तरीके से डेटा डिलीट भी कर सकते हैं.

    इसके बाद अपनी मोबाइल कंपनी से संपर्क करके SIM बंद करवाएं. ऐसा करना जरूरी है, क्योंकि बैंक के OTP और दूसरे जरूरी मैसेज आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आते हैं. इसके साथ ही अपने बैंक को भी फोन खोने की जानकारी दें, ताकि जरूरत पड़ने पर बैंक जरूरी कार्रवाई कर सके.

    बैंक खाते पर रखें नजर

    फोन सेफ रखने के बाद भी कुछ दिनों तक अपने बैंक खाते पर नजर बनाएं रखें. बैंक से आने वाले SMS, अकाउंट स्टेटमेंट और UPI ट्रांजैक्शन देखें. अगर कोई ऐसा लेनदेन दिखता है जो आपने नहीं किया है, तो तुरंत बैंक को इसकी जानकारी दें. जल्दी शिकायत करने से बैंक मामले की जांच शुरू कर सकता है और आगे की जरूरी प्रक्रिया कर सकता है.

    किन बातों का रखें हमेशा ध्यान

    फोन में हमेशा मजबूत स्क्रीन लॉक और बायोमेट्रिक सेफ्टी लोक रखें. बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड या UPI PIN को फोन की नोट्स या मैसेज में सेव न करें. सभी बैंक खातों के ट्रांजैक्शन अलर्ट चालू रखें. नया फोन लेने पर पुराने फोन से बैंकिंग ऐप को लॉगआउट करके ही उसे रीसेट करें.

  • अंतिम संस्कार की तैयारी पूरी, तभी महिला ने खोल दी आंखें! 17 घंटे बाद जिंदा होने की कहानी चौंकाएगी..

    अंतिम संस्कार की तैयारी पूरी, तभी महिला ने खोल दी आंखें! 17 घंटे बाद जिंदा होने की कहानी चौंकाएगी..

    अंतिम संस्कार की तैयारी पूरी, तभी महिला ने खोल दी आंखें! 17 घंटे बाद जिंदा होने की कहानी चौंकाएगी..

    उत्तर प्रदेश के आगरा में 65 साल की शीला देवी की जिंदगी और मौत से जुड़ी कहानी ने हर किसी को हैरान कर दिया था. जिस बुजुर्ग महिला को मृत मानकर परिवार अंतिम संस्कार की तैयारी कर चुका था, परिवार के मुताबिक करीब 17 घंटे बाद उनके शरीर में हलचल महसूस हुई और उन्हें जीवित पाया गया. लेकिन जिंदगी और मौत से करीब 9 दिन तक जंग लड़ने के बाद रविवार को शीला देवी की मौत हो गई.

    चल रही थी अंतिम संस्कार की तैयारी- शीला देवी आगरा के ट्रांस यमुना कॉलोनी के श्रीनगर क्षेत्र में अपने बेटे सुनील माहौर के साथ रहती थीं. वह सांस की बीमारी से पीड़ित थीं और उनका इलाज बरेली के एक निजी मेडिकल कॉलेज में चल रहा था. 30 जुलाई को इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. इसके बाद परिवार शीला देवी के शव को आगरा ले आया और अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दी गईं.

    कफन तक आ गया था, फिर हुआ चमत्कार- परिवार के मुताबिक, अंतिम संस्कार के लिए कपड़े और फूल-मालाएं तक मंगवा ली गई थीं. इसी दौरान शीला देवी के दामाद ने उनके पैर छुए. परिवार का दावा है कि पैर छूते ही उन्हें शरीर में हलचल महसूस हुई. इसके बाद शीला देवी ने कथित तौर पर बातचीत भी की और पूछा कि सभी लोग क्यों रो रहे हैं और उन्हें कहां ले जा रहे हैं.

    17 घंटे बाद जिंदा हो गई महिला- बुजुर्ग महिला को जीवित पाकर परिवार में हड़कंप मच गया. आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया. इसके बाद शीला देवी का इलाज आगरा के घटिया आजम खां स्थित पार्क हॉस्पिटल में चल रहा था. परिवार को उम्मीद थी कि वह जिंदगी की जंग जीतकर वापस घर लौटेंगी, लेकिन रविवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

    शीला देवी के दूसरे बेटे संजीव बदायूं के एक निजी अस्पताल में कार्यरत बताए जाते हैं. अब मां की मौत के बाद संजीव ने पार्क हॉस्पिटल के इलाज और व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.

    5 लाख का बिल, इलाज पर सवाल- संजीव का आरोप है कि अस्पताल में मरीजों को अस्पताल की खुद की कंपनी और लोकल ब्रांड की दवाइयां दी जाती हैं. उनका आरोप है कि नर्सिंग स्टाफ मरीजों की ठीक से देखभाल नहीं करता था. परिवार का यह भी दावा है कि इलाज के दौरान अस्पताल की ओर से करीब पांच लाख रुपये का बिल थमाया गया.

    बेटे ने की कार्रवाई की मांग- मां की मौत के बाद अब बेटे ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है. संजीव का कहना है कि वह पूरे मामले की शिकायत जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री से करेंगे और इलाज से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग करेंगे.

    हालांकि, अस्पताल पर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पार्क हॉस्पिटल प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है. ऐसे में अब जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि शीला देवी के इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई थी या नहीं.

    9 दिन तक मौत से लड़की रही महिला- जिस परिवार ने नौ दिन पहले शीला देवी को मृत मानकर अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी थी, उसी परिवार को उनके जीवित होने से नई उम्मीद मिली थी. लेकिन नौ दिन बाद वही उम्मीद फिर मातम में बदल गई. अब शीला देवी की मौत के बाद बेटे के आरोपों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और इलाज के खर्च को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

  • लोगों के राज जानना बना कमाई का जरिया, महिला ने चुगली से खड़े कर लिए दो-दो मकान..

    लोगों के राज जानना बना कमाई का जरिया, महिला ने चुगली से खड़े कर लिए दो-दो मकान..

    लोगों के राज जानना बना कमाई का जरिया, महिला ने चुगली से खड़े कर लिए दो-दो मकान..

    मोहल्ले में कोई खबर हो और आपको सबसे पहले पता चल जाए, तो अक्सर लोग आपको चुगलखोर कह देते हैं लेकिन कोलंबिया की 67 साल की मिरियम ने इसी आदत को कमाई का जरिया बना लिया. वो पड़ोस के लोगों की बातें सुनती हैं और जरूरत पड़ने पर इन्हें अच्छी कीमत पर बेचती हैं. मिरियम का दावा है कि इस अनोखे काम से उन्होंने दो घर तक खरीद लिए हैं.

    घर के बाहर बैठकर सुनती हैं मोहल्ले की खबरें मिरियम कोलंबिया की रहने वाली हैं और खुद को प्रोफेशनल चिसमोसा यानी गॉसिपर बताती हैं. उनका कहना है कि उन्हें बचपन से ही चुगली और लोगों की बातें सुनने का शौक है. इसी शौक को उन्होंने कारोबार में बदल दिया. मिरियम अक्सर अपने घर के बाहर बैठती हैं. यहां आने-जाने वाले लोगों की बातचीत पर कान लगाए रहती हैं. वह कहती हैं कि मोहल्ले की गॉसिपर को हर छोटी-बड़ी खबर पता होती है.

    हर खबर की कीमत 5 से 10 हजार रुपए तक मिरियम के मुताबिक साधारण और कम सनसनीखेज खबरों के लिए वह 5,000 से 10,000 कोलंबियन पेसो तक लेती हैं. हालांकि, अगर खबर ज्यादा बड़ी हो तो उसकी कीमत भी बढ़ जाती है. वह हर जगह अपने साथ एक नोटबुक रखती हैं. इसमें वह सुनी हुई बातों को लिख लेती हैं, ताकि बाद में कहानी बताते समय कोई गलती न हो. उनका कहना है कि वह बिना सबूत के किसी के बारे में कुछ नहीं कहतीं.

    सबूत के लिए तस्वीरें और पूरा रिकॉर्ड मिरियम ने एक इंटरव्यू के दौरान अपने घर में एक बोर्ड भी दिखाया. इसमें कई तस्वीरें और कंटेंट था. उनका दावा है कि ये उनके पास मौजूद सबूत हैं. इनमें कुछ तस्वीरें पड़ोसियों के अफेयर से जुड़ी हैं. कई लोग अपने राज सामने आने के डर से उन्हें पैसे देते हैं ताकि वह चुप रहें. उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति का किस्सा भी बताया, जिससे पत्नी की गैरमौजूदगी में अफेयर की बात छिपाने के बदले उन्होंने 7 लाख कोलंबियन पेसो लिए थे.

    गॉसिप से जमा पैसों को रखती हैं गुल्लक में मिरियम ने अपनी एक बड़ी गुल्लक भी दिखाई, जिसमें सिक्कों और नोटों की भरमार थी. उनका दावा है कि यह एक सामान्य हफ्ते की कमाई है. वह कहती हैं कि इसी काम से जमा किए पैसों की मदद से उन्होंने दो घर खरीदे हैं. अब पड़ोस की दूसरी महिलाएं भी उनकी नकल करने लगी हैं. लेकिन मिरियम का कहना है कि असली गॉसिप क्वीन बनना इतना आसान नहीं है.

    दोस्तों के साथ बांटती हैं ताजा गॉसिप मिरियम सिर्फ अपने घर के बाहर बैठकर ही खबरें नहीं जुटातीं. वह अपने दूसरे घर में दोस्तों के साथ गेम खेलते हुए भी मोहल्ले की नई-नई खबरों का आदान-प्रदान करती हैं.

    हर मोहल्ले में एक चुगलखोर जरूर होता है मिरियम अपने काम को सिर्फ चुगली नहीं मानतीं. उनका कहना है कि वह किसी के बारे में बिना सबूत कुछ नहीं बोलतीं. इसी वजह से इलाके में उनकी पहचान क्वीन ऑफ गॉसिप के रूप में हो गई है. उनका मानना है कि जब तक लोग रहेंगे, तब तक खबरें और गॉसिप भी रहेंगी. वह मजाकिया अंदाज में कहती हैं, हर अच्छे मोहल्ले में एक चुगलखोर होता है और अगर आपको कोई चुगलखोर नहीं पता, तो शायद वह चुगलखोर आप ही हैं.

  • भूत-प्रेत का खौफ या रहस्यमयी सच्चाई? दिल्ली की इन जगहों पर रात होते ही बदल जाता है माहौल

    भूत-प्रेत का खौफ या रहस्यमयी सच्चाई? दिल्ली की इन जगहों पर रात होते ही बदल जाता है माहौल

    भूत-प्रेत का खौफ या रहस्यमयी सच्चाई? दिल्ली की इन जगहों पर रात होते ही बदल जाता है माहौल

    दिल्ली सिर्फ लाल किले, कुतुब मीनार और खूबसूरत ऐतिहासिक इमारतों के लिए ही मशहूर नहीं है. इस शहर की कुछ गलियां और पुरानी इमारतें ऐसी भी हैं, जिनसे डरावनी और रहस्यमय कहानियां जुड़ी हैं. कहीं रात के सन्नाटे में अजीब आवाजें सुनाई देती हैं, तो कहीं परछाइयां दिखाई देने की बातें कही जाती हैं. हालांकि, इन कहानियों में कितना सच है और कितना लोगों का डर येतो कोई नहीं जानता. चलिए जानते हैं दिल्ली की इन भूतियां जगहों के बारे में.

    जमाली-कमाली मस्जिद महरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क में मौजूद जमाली-कमाली मस्जिद और मकबरा ऐतिहासिक होने के साथ अपनी रहस्यमय कहानियों के लिए भी मशहूर है. मान्यता है कि यहां सूफी संत जमाली और कमाली की आत्माओं का साया है. स्थानीय लोगों के बीच ऐसी कई कहानियां प्रचलित हैं, जिनमें रात के समय अजीब आवाजें और डरावने अनुभव होने का जिक्र मिलता है. इसी वजह से लोग सूरज ढलने के बाद यहां जाने से बचते हैं.

    दिल्ली की खूनी नदी दिल्ली की खूनी नदी का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर पैदा हो जाता है. इस जगह को लेकर लंबे समय से कई डरावनी कहानियां कही जाती रही हैं. स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, यहां अतीत में कई हिंसक घटनाएं हुई थीं. कुछ लोगों का दावा है कि रात में नदी के आसपास अजीब आवाजें सुनाई देती हैं और कभी-कभी किसी अनजान शख्स के दिखाई देने की बात भी कही जती है, जो अचानक गायब हो जाता है.

    अग्रसेन की बावली कनॉट प्लेस के पास स्थित अग्रसेन की बावली दिल्ली की मशहूर ऐतिहासिक जगहों में शामिल है. इसकी सीढ़ियां और गहरी संरचना पर्यटकों को आकर्षित करती हैं. लेकिन इस जगह से जुड़ी कुछ डरावनी मान्यताएं भी हैं. कहा जाता है कि पुराने समय में लोग बावली के गहरे पानी में कूदकर आत्महत्या करते थे. इसी वजह से इसके पानी को लेकर कई तरह की रहस्यमय कहानियां प्रचलित हो गईं. शाम के समय यहां का सन्नाटा इन कहानियों को और डरावना बना देता है.

    भूली भटियारी का महल दिल्ली के जंगल इलाके में स्थित भूली भटियारी का महल फिरोज शाह तुगलक के समय से जुड़ा माना जाता है. वीरान माहौल और पुरानी इमारत इसे बाकी ऐतिहासिक स्थलों से अलग बनाती है. इस जगह को लेकर मान्यता है कि यहां किसी महिला का साया भटकता है.

    दिल्ली कैंट में सफेद साड़ी वाली महिला की कहानी दिल्ली कैंट से जुड़ी सबसे चर्चित डरावनी कहानी एक सफेद साड़ी पहने महिला की है. लोगों के बीच यह दावा लंबे समय से सुनने को मिलता है कि रात में सड़क पर एक महिला दिखाई देती है और फिर अचानक गायब हो जाती है. कुछ कहानियों में उसे ब्रिटिश महिला की आत्मा बताया जाता है.

  • जिस गोबर को लोग समझते हैं बेकार, उसी से 71 साल का किसान कमा रहा लाखों?

    जिस गोबर को लोग समझते हैं बेकार, उसी से 71 साल का किसान कमा रहा लाखों?

    जिस गोबर को लोग समझते हैं बेकार, उसी से 71 साल का किसान कमा रहा लाखों?

    उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के गांव महरवानी की रहने वाली 71 साल की किसान आदित्य त्यागी ने यह साबित कर दिया है कि अगर सोच नई हो तो गाय का गोबर भी लाखों की कमाई का जरिया बन सकता है. फॉरेस्ट रेंजर के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने देसी गायों का पालन शुरू किया, लेकिन केवल दूध बेचने से अपेक्षित मुनाफा नहीं मिला. इसके बाद उन्होंने देसी गाय के गोबर का बेहतर उपयोग करने का निर्णय लिया और उससे सम्भरानी कप (धूनी कप) बनाने का काम शुरू किया. आज उनके बनाए गए उत्पाद देशभर में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से बिक रहे हैं और उन्हें हर महीने लाखों रुपये की आय हो रही है.

    गोबर से बनाए संभरानी कप- आदित्य त्यागी ने देसी गाय के गोबर में गूगल और लोबान जैसी प्राकृतिक सामग्री मिलाकर ऐसे सम्भरानी कप तैयार किए हैं, जिनका उपयोग घरों में धूनी देने और वातावरण को सुगंधित बनाने के लिए किया जाता है. उनका कहना है कि बाजार में मिलने वाले अधिकांश सम्भरानी कप कोयले से बने होते हैं, जिनके जलने पर कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है. वहीं देसी गाय के गोबर से बने इन कपों को पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में तैयार किया गया है.

    उनका उद्देश्य केवल व्यवसाय करना नहीं, बल्कि लोगों तक शुद्ध और प्राकृतिक उत्पाद पहुंचाना भी है.

    10 ग्राम गोबर में बनता है एक कप- उन्होंने बताया कि एक सम्भरानी कप बनाने में लगभग 10 ग्राम देसी गाय का गोबर लगता है, जबकि एक कप की कीमत करीब 10 रुपये पड़ती है. इस हिसाब से गोबर का मूल्य 400 रुपये प्रति किलो से भी अधिक हो जाता है. उनके उत्पाद होलसेल में करीब 90 रुपये और ऑनलाइन लगभग 220 रुपये में बिकते हैं.

    विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर देशभर से ऑर्डर मिल रहे हैं, जिनमें दक्षिण भारत से सबसे अधिक मांग आ रही है. इस वर्ष उन्होंने 20 हजार सम्भरानी कप तैयार किए, जिनमें से एक महीने के भीतर ही 7 से 8 हजार कप की बिक्री हो चुकी है.

  • भूतों से नहीं डरती थी, खौफनाक जगहों पर बनाती थी VIDEO; देवी की मूर्ति तोड़ी, फिर हुआ दर्दनाक हादसा..

    भूतों से नहीं डरती थी, खौफनाक जगहों पर बनाती थी VIDEO; देवी की मूर्ति तोड़ी, फिर हुआ दर्दनाक हादसा..

    भूतों से नहीं डरती थी, खौफनाक जगहों पर बनाती थी VIDEO; देवी की मूर्ति तोड़ी, फिर हुआ दर्दनाक हादसा..

    किसी को भूतों से डर लगता है तो कोई इनपर भरोसा ही नहीं करता. चीन की 24 साल की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर जियांग शियाओरू भी दूसरी तरह की थीं. वह डरावनी जगहों पर रात बिताती थीं, अंधविश्वास को चुनौती देती थीं और अपने वीडियो में पैरानॉर्मल एक्टिविटी पर सवाल उठाती थीं. लेकिन जुलाई में हुए एक भीषण सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई. अब लोग इसे भूत-प्रेत से जोड़कर देख रहे हैं.

    24 साल की इन्फ्लुएंसर, लाखों लोग देखते थे वीडियो जियांग शियाओरू को चीन के Douyin प्लेटफॉर्म पर 姜小柔吖 नाम से जाना जाता था. उनके अकाउंट पर 12 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स थे. उनका कंटेंट मुख्य रूप से डरावनी जगहों की खोज, पैरानॉर्मल एक्टिविटी और अंधविश्वास के खिलाफ बनाए गए वीडियो पर बेस्ड था. वह खाली इमारतों में रात बिताती थीं और उन जगहों पर जाती थीं, जिन्हें लोग भूत-प्रेत या डरावनी कहानियों से जोड़ते थे. उनका मकसद इन मान्यताओं को गलत साबित करना था.

    मूर्ति तोड़ने वाले वीडियो से हुआ था विवाद अगस्त 2025 में उनका एक वीडियो काफी विवादों में रहा था. इसमें उन्होंने हथौड़े से मिट्टी की गुआनयिन प्रतिमा तोड़ दी थी. यह बौद्ध धर्म से जुड़ी धार्मिक प्रतिमा है. वीडियो में उन्होंने अपनी जान को लेकर भी एक चुनौतीपूर्ण बात कही थी. यह सब उन्होंने अंधविश्वास के खिलाफ स्टंट के तौर पर किया था. उनके कुछ पुराने वीडियो में कर्म और श्राप जैसी मान्यताओं पर भी सवाल उठाए गए थे. मौत के बाद इन्हीं पुराने वीडियो को सोशल मीडिया यूजर्स फिर से शेयर करने लगे.

    हादसे से पहले बोली थीं- कार एक्सीडेंट होगा सबसे ज्यादा चर्चा उनके एक पुराने वीडियो को लेकर है. रिपोर्टों के मुताबिक एक वीडियो में उन्होंने धूप जलाते हुए अपनी कार के एक्सीडेंट की बात कही थी. इसके बाद 9 जुलाई को उन्होंने अपना आखिरी वीडियो पोस्ट किया. इस वीडियो में वह फैंस की ओर से सुझाए गए कुछ फोन नंबरों पर कॉल करती नजर आई थीं. इनमें एक नंबर कथित तौर पर सड़क हादसे में मारे गए व्यक्ति से जुड़ा बताया गया. कॉल कनेक्ट होने पर उन्हें सिर्फ अपनी ही आवाज की गूंज सुनाई दी. इसके कुछ ही दिन बाद उनके साथ गंभीर सड़क हादसा हो गया.

    15 जुलाई को हुआ भीषण सड़क हादसा 15 जुलाई 2026 की सुबह जियांग शियाओरू लियूझोउ से गुआंगझोउ जा रही थीं. रास्ते में गुआंगडोंग के झाओकिंग इलाके में उनकी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया. उन्हें गंभीर सिर की चोट लगी और इसके बाद कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया. उन्हें झोंगशान यूनिवर्सिटी सन यात-सेन मेमोरियल हॉस्पिटल के ICU में भर्ती कराया गया. करीब चार हफ्ते तक इलाज चलने के बाद 10 अगस्त को उनकी मौत हो गई. परिवार ने 11 अगस्त को उनके Douyin अकाउंट के जरिए इसकी पुष्टि की.लोग बोले-भविष्यवाणी सच हो गई मौत की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर ‘भविष्यवाणी सच हो गई’ और ‘कर्म का फल’ जैसी बातें वायरल होने लगीं. लोगों ने उनके पुराने वीडियो निकालकर हादसे से जोड़ना शुरू कर दिया. कुछ यूजर्स ने इसे अंधविश्वास को चुनौती देने का नतीजा बताया.

  • 4 घंटे झींगुर की आवाज सुनने से इस लड़के के कान हुए खराब…जंगल में नेचर म्यूजिक एन्जॉय करने गया था

    4 घंटे झींगुर की आवाज सुनने से इस लड़के के कान हुए खराब…जंगल में नेचर म्यूजिक एन्जॉय करने गया था

    4 घंटे झींगुर की आवाज सुनने से इस लड़के के कान हुए खराब…जंगल में नेचर म्यूजिक एन्जॉय करने गया था

    चीन में 18 साल के एक लड़के को सिर्फ चार घंटे तक झींगुर की लगातार आवाज सुनना इतना भारी पड़ गया कि उसकी सुनने की क्षमता ही चली गई. शुक्र इस बात का था कि इलाज के बाद उसकी सुनने की क्षमता वापस लौट आई. लेकिन डॉक्टरों का कहना था कि हर किसी के साथ ऐसा नहीं होता. कई मामलों में यह नुकसान हमेशा के लिए भी हो सकता है.

    4 घंटे जंगल में रहा, सुनता रहा झींगुर की आवाज पूर्वी चीन के झेजियांग प्रांत के निंगबो शहर में रहने वाला 18 वर्षीय यांग जुलाई की शुरुआत में जंगल में कैंपिंग के लिए गया था. दोपहर के समय जंगल में झींगुर एक साथ आवाज कर रहे थे. यांग बिना किसी ईयर प्रोटेक्शन के करीब चार घंटे तक उसी माहौल में रहा. शाम होते-होते उसे कान बंद होने जैसा महसूस हुआ. कानों में सूजन आ गई और हालत यह हो गई कि उसे पक्षियों की चहचहाहट और मोबाइल की नोटिफिकेशन टोन जैसी तेज पिच वाली आवाजें भी सुनाई नहीं दे रही थीं.

    झींगुर करीब 70 डेसिबल तक आवाज करता है जांच में पता चला कि यांग को तेज आवाज के कारण अस्थायी हियरिंग लॉस हुआ है. डॉक्टरों ने उसे शोर से दूर रहने और इलाज की सलाह दी. करीब 14 दिन बाद उसकी सुनने की क्षमता सामान्य हो गई. डॉक्टर बताते हैं कि लोगों को लगता है कि प्रकृति की आवाजें नुकसान नहीं पहुंचातीं, जबकि सच्चाई इससे अलग है.

    उनके मुताबिक, एक झींगुर करीब 70 डेसिबल तक आवाज करता है, जो सामान्य तौर पर सुरक्षित मानी जाती है. लेकिन जब हजारों सिकाडे एक साथ आवाज करते हैं, तो शोर 85 डेसिबल से ज्यादा पहुंच सकता है. यही वह स्तर है, जहां से कानों को नुकसान शुरू हो सकता है.

    कानों के अंदर की कोशिकाएं मर गईं तो फिर वापस नहीं आतीं तेज आवाज से कान के अंदर मौजूद कोक्लिया की बेहद नाजुक हेयर सेल्स में सूजन आ जाती है. अगर समय रहते आराम मिल जाए तो ये कोशिकाएं ठीक हो सकती हैं. लेकिन अगर ये नष्ट हो जाएं, तो दोबारा नहीं बनतीं. ऐसी स्थिति में सुनने की क्षमता हमेशा के लिए खत्म हो सकती है और मरीज को हियरिंग एड का सहारा लेना पड़ सकता है.

    अब हमेशा के लिए कम सुनाई देता है 60 वर्षीय माली लियू पिछले 12 साल से जून से अगस्त तक रोज पेड़ों की छंटाई करते रहे. इस दौरान वे घंटों झींगुर की तेज आवाज के बीच काम करते थे. धीरे-धीरे उन्हें कानों में लगातार सीटी बजने की शिकायत होने लगी. महिलाओं की आवाज और धीमी बातचीत सुनना भी मुश्किल हो गया. जांच में पता चला कि उन्हें स्थायी हियरिंग लॉस हो चुका है.

  • 2 साल बाद पति का ऐसा राज खुला कि पत्नी के पैरों तले खिसक गई जमीन, सवाल किया तो कर दी पिटाई..

    2 साल बाद पति का ऐसा राज खुला कि पत्नी के पैरों तले खिसक गई जमीन, सवाल किया तो कर दी पिटाई..

    2 साल बाद पति का ऐसा राज खुला कि पत्नी के पैरों तले खिसक गई जमीन, सवाल किया तो कर दी पिटाई..

    अहमदाबाद की रहने वाली 30 वर्षीय महिला ने अपने पति और ससुराल पक्ष के लोगों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना, मारपीट और घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराई है. महिला का आरोप है कि शादी के दो साल बाद उसे पति के लैपटॉप में दूसरी युवती के साथ हुई चैट मिली, जिसमें I Love You और I Miss You जैसे मैसेज थे. जब उसने इस बारे में सवाल किया तो पति ने उसके साथ मारपीट की. शिकायत के आधार पर महिला पश्चिम पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

    शादी के बाद शुरू हुई पैसों की मांग पुलिस शिकायत के मुताबिक महिला की शादी वर्ष 2023 में मेहसाणा के एक युवक से हुई थी. महिला का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही पति ने शेयर बाजार में निवेश करने के लिए पैसों की मांग शुरू कर दी. इस पर उसने अपने पिता से 1.50 लाख रुपये नकद और सोने के गहने लेकर पति को दिए. महिला का कहना है कि इसके बाद भी पति और ससुराल वाले लगातार दहेज में और पैसे मांगते रहे. मांग पूरी नहीं होने पर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा.

    तबीयत खराब होने पर भी कराया काम शिकायत में महिला ने आरोप लगाया है कि उसकी तबीयत खराब होने के बावजूद उसे इलाज के लिए अस्पताल नहीं ले जाया गया. इसके बजाय उससे जबरन खाना बनवाया जाता था. महिला का यह भी आरोप है कि पति ने कई बार उसके पेट पर बैठकर उसका मुंह और गला दबाया तथा उसके साथ मारपीट की. महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसकी ननद उसे नेपाली कहकर अपमानित करती थी और खाना बनाने जैसी बातों को लेकर अक्सर झगड़ा करती थी.

    लैपटॉप में मिली दूसरी युवती से चैट महिला के अनुसार, एक दिन उसने पति के लैपटॉप में किसी दूसरी युवती के साथ चैट देखी. चैट में I Love You और I Miss You जैसे मैसेज लिखे थे. जब उसने पति से इस बारे में पूछताछ की तो पति ने उसकी पिटाई कर दी. शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पति ने महिला की बुआ की एक महिला मित्र से अश्लील इशारों के जरिए संपर्क करने की कोशिश की थी. इसके बाद उस महिला के बॉयफ्रेंड ने पति को धमकियां भी दी थीं.

    5 लाख रुपये की मांग, घर से निकाला महिला का आरोप है कि इसके बाद पति ने उससे 5 लाख रुपये लाने का दबाव बनाया. मांग पूरी नहीं होने पर उसे घर से निकाल दिया गया. इसके बाद वह अपने मायके में रहने लगी. बाद में महिला ने पूरे मामले की शिकायत महिला पश्चिम पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई. पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. फिलहाल पुलिस सभी आरोपों की जांच कर रही है.

  • महंगे पेट्रोल से परेशान शख्स ने निकाला गजब का देसी जुगाड़! फ्यूल खर्च हुआ आधा

    महंगे पेट्रोल से परेशान शख्स ने निकाला गजब का देसी जुगाड़! फ्यूल खर्च हुआ आधा

    महंगे पेट्रोल से परेशान शख्स ने निकाला गजब का देसी जुगाड़! फ्यूल खर्च हुआ आधा

    जबलपुर . कहते हैं न कि ‘आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है’. इस कहावत को सच कर दिखाया है बीकॉम पास एक होनहार शख्स ने. महंगे पेट्रोल से तंग आकर इस शख्स ने एक ऐसा नायाब जुगाड़ और आविष्कार किया है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है.

    दरअसल, हम बात कर रहे हैं गोरखपुर निवासी रूपेंद्र आनंद की. जिनकी आईडी स्विगी, जोमैटो, रैपिडो और ओला जैसी तमाम डिलीवरी सेवाओं पर एक्टिव है. दिनभर की भागदौड़ और डिलीवरी के दौरान रोजाना उनकी गाड़ी में 400 से 500 रुपये का पेट्रोल खर्च हो जाता था. पेट्रोल के इस भारी-भरकम इन्वेस्टमेंट से वह काफी परेशान हो चुके थे. तभी उनके दिमाग में आया कि क्यों न कुछ ऐसा बदलाव किया जाए, जिससे सफर भी आसान हो जाए और रोजाना का भारी खर्च भी बच सके. जिसके लिए पिछले 5-6 सालों से इसी सोच के साथ इस पर काम कर रहे थे.

    नॉन-आरटीओ मोटर और बैटरी का बेहतरीन तालमेल
    उन्होंने अपनी पुरानी बाइक में एक खास नॉन-आरटीओ मोटर फिट की है. इस मोटर की रफ्तार 35 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक जाती है, जो शहर के भीतर की डिलीवरी के लिए बिल्कुल मुफीद है. सबसे बड़ी बात यह है कि इस बाइक को इलेक्ट्रिकली और पेट्रोल दोनों तरीकों से चलाया जा सकता है. नॉन-आरटीओ मोटर होने की वजह से उन्हें आरटीओ के झंझटों या कागजी कार्रवाई की टेंशन भी नहीं है. बाइक में लेड-एसिड बैटरी का इस्तेमाल किया गया है, जिसे बारिश या पानी से बचाने के लिए पूरी तरह से सुरक्षित और पेटी के भीतर ताला लगाकर करके रखा गया है.

    महीने के हजारों रुपये की हो रही बचत
    इस देसी और शानदार जुगाड़ ने शख्स की जिंदगी आसान कर दी है. पहले जहां उन्हें महीने में केवल पेट्रोल के नाम पर 12 हजार से 15 हजार रुपये चुकाने पड़ते थे, वह खर्च अब सिमटकर महज 25 सौ से 3 हजार रुपये पर आ गया है. हालांकि, इस पूरी मैन्युफैक्चरिंग को तैयार करने में एक बार का खर्च 35 हजार से 40 हजार रुपये के आसपास आया था, लेकिन लंबे समय में यह उनके लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रहा है. बढ़ती महंगाई के दौर में इस शख्स का यह आविष्कार आज आसपास के इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और हर कोई उनके इस हुनर की तारीफ कर रहा है.

  • लाल रंग की बिल्ली देख कांप गए लोग, अमेरिका के इस शहर..

    लाल रंग की बिल्ली देख कांप गए लोग, अमेरिका के इस शहर..

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    अमेरिका के टेक्सस राज्य के लीग सिटी से एक बेहद अजीबोगरीब और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां सड़कों पर चमकीले गहरे लाल रंग की एक बिल्ली घूमती हुई देखी गई है. पहली नजर में खून से सनी या लाल रंग में रंगी दिखाई देने वाली इस बिल्ली को देखकर स्थानीय निवासी दहशत में आ गए हैं. सोशल मीडिया पर लोगों ने इस अजीबोगरीब जीव को ‘नरक की बिल्ली’ और ‘लूसिफर (यमराज)’ तक का नाम दे दिया है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पशु संरक्षण विभाग ने आपातकालीन अलर्ट जारी कर आम जनता को इस बिल्ली से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है. लीग सिटी एनिमल केयर की टीम इस लाल रंग की बिल्ली को सुरक्षित पकड़ने के लिए लगातार रेस्क्यू अभियान चला रही है.

    अधिकारियों ने आम लोगों से अपील की है कि वे बिल्ली को खुद पकड़ने या उसके पास जाने की कोशिश बिल्कुल न करें, क्योंकि इससे बिल्ली डरकर भाग सकती है और रेस्क्यू टीम के प्रयासों में बाधा आ सकती है. संस्था ने बयान जारी कर बताया कि वे आसपास के कैट-केयरगिवर्स की मदद से पिंजरा लगाकर बिल्ली को सुरक्षित हिरासत में लेने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि उसके शरीर पर लगे खतरनाक केमिकल या डाई का इलाज किया जा सके. सोशल मीडिया पर इस लाल बिल्ली की तस्वीरें वायरल होते ही लोगों ने जानवर के प्रति क्रूरता और अवैध गतिविधियों से जुड़े कई गंभीर दावे किए हैं.

    कुछ स्थानीय लोगों का आशंका जताई है कि इस बिल्ली को किसी अवैध डॉग-फाइटिंग रिंग (कुत्तों की खूनी लड़ाई) का शिकार बनाने या टारगेट प्रैक्टिस के लिए लाल रंग से रंगा गया हो सकता है. लोगों का मानना है कि बिल्ली किसी तरह वहां से भाग निकली है. ऐसे में पुलिस को इस इलाके में जानवरों की क्रूरता से जुड़े गिरोहों की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए. वहीं, कुछ कैट लवर्स ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है. हालांकि, पुलिस ने अभी तक किसी औपचारिक आपराधिक जांच या एनिमल क्रुएल्टी केस दर्ज करने की घोषणा नहीं की है. फिलहाल रेस्क्यू टीम का पूरा ध्यान बिल्ली को सुरक्षित पकड़कर उसका मेडिकल चेकअप करने और उसे एक सुरक्षित घर दिलाने पर टिका हुआ है.