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  • घर में आशिक संग रंगरेलियां मना रही थी बेवफा बीवी, अचानक आ धमका पति; फिर खंभे से बांधकर सिखाया सबक..!

    घर में आशिक संग रंगरेलियां मना रही थी बेवफा बीवी, अचानक आ धमका पति; फिर खंभे से बांधकर सिखाया सबक..!

    घर में आशिक संग रंगरेलियां मना रही थी बेवफा बीवी, अचानक आ धमका पति; फिर खंभे से बांधकर सिखाया सबक!

    उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले से पति-पत्नी और अवैध प्रेम-प्रसंग का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां सैनी कोतवाली क्षेत्र में एक पति ने अपनी पत्नी पर संगीन आरोप लगाए हैं. पति ने पत्नी को उसके कथित प्रेमी के साथ अपने ही घर में आपत्तिजनक स्थिति में रंगे हाथों पकड़ने का दावा किया है. इस पूरी घटना के बाद मौके पर भारी हंगामा खड़ा हो गया. परिजनों ने प्रेमी को पकड़कर खंभे से बांध दिया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

    पति की अनुपस्थिति में रचा गया खेल यह मामला सैनी कोतवाली इलाके के एक गांव का है. पीड़ित पति का आरोप है कि उसकी पत्नी का रोहित नाम के एक युवक के साथ काफी समय से प्रेम-प्रसंग चल रहा था. पति के मुताबिक, जब वह घर पर मौजूद नहीं था, तब उसकी पत्नी ने अपने प्रेमी को चोरी-छिपे घर बुला लिया. आरोप है कि दोनों घर के भीतर रंगरेलियां मना रहे थे और उनके बीच शारीरिक संबंध बनाए जा रहे थे. इसी बीच जब पति अचानक पहुंचा, तो कमरे का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए. उसने अपनी पत्नी को उसके कथित प्रेमी रोहित के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ लिया.

    अचानक पहुंचे पति ने खोला राज पति के हंगामे के बाद परिजन भी तुरंत मौके पर एकत्र हो गए. मामला बिगड़ता देख प्रेमी ने भागने की कोशिश की, लेकिन परिजनों ने उसे मौके पर ही धर दबोचा. परिजनों ने कथित प्रेमी को पकड़ लिया और खंभे से बांध दिया. इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया. देखते ही देखते यह वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गया, जो अब जमकर वायरल हो रहा है. वीडियो सामने आने के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

    मामले की जांच में जुटी पुलिस इस घटना के बाद पीड़ित पति ने सैनी कोतवाली पहुंचकर अपनी पत्नी और उसके कथित प्रेमी के खिलाफ लिखित शिकायती पत्र दिया है. पति ने पुलिस से इस मामले में कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है. जिसके बाद पुलिस शिकायती पत्र के आधार पर मामले की जांच में जुट गई है. जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.

  • सेक्स पावर बढ़ाने के लिए 48 लाख की ली दवा, तंबू में बैठे गुरुजी ने इंजीनियर को लगाया चूना..

    सेक्स पावर बढ़ाने के लिए 48 लाख की ली दवा, तंबू में बैठे गुरुजी ने इंजीनियर को लगाया चूना..

    बेंगलुरु में 29 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर के साथ लाखों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। उसने आरोप लगाया कि स्वघोषित आयुर्वेदिक हीलर ने उसे सेक्सुअल समस्याओं के इलाज के नाम पर महंगी और हानिकारक हर्बल प्रोडक्ट्स बेचे। इसके लिए उसे 48 लाख रुपये चुकाने पड़े। शिकायतकर्ता ने बताया कि इन दवाओं के सेवन से उसकी तबीयत बिगड़ गई और किडनी में समस्या आने लगी। पीड़ित ज्ञानभारती इलाके में रहता है और शिवमोग्गा जिले का मूल निवासी है। वह पिछले तीन वर्षों से एक निजी फर्म में नौकरी कर रहा है। उसने ज्ञानभारती पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

    शिकायतकर्ता के अनुसार, मार्च में उसकी शादी हुई। पति-पत्नी पहले बसवेश्वरनगर में रहते थे। शादी के शुरुआती महीनों में उसे सेक्सुअल समस्याएं होने लगीं। वह केंगरी में मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में इलाज के लिए गया, जहां डॉक्टरों ने टेस्ट कराए और कुछ दवाएं लिखीं। इस साल मई को अस्पताल जाते समय उसने उल्लाल में लॉ कॉलेज के पास सड़क किनारे आयुर्वेदिक तंबू देखा। यहां लगे पोस्टर पर सेक्सुअल समस्याओं के तुरंत समाधान का दावा किया गया था। वह टेंट के अंदर चला गया, जहां उसे एक व्यक्ति मिला। पीड़ित ने अपनी समस्याएं उसे बताईं। उस शख्स ने कहा कि ‘विजय गुरुजी’ इसका तेजी से इलाज कर सकते हैं। उसने विजय से मिलने की व्यवस्था करने का वादा किया।

    सड़क किनारे टेंट पर पड़ी नजर

    रिपोर्ट के मुताबिक, उसी शाम एक व्यक्ति टेंट में आया और उसने खुद को विजय गुरुजी बताया। पीड़ित की जांच करने के बाद विजय ने कहा कि एक दुर्लभ दवा देवराज बूटि उसकी समस्या का इलाज कर देगी। उसने इसे यशवंतपुर में विजयलक्ष्मी आयुर्वेदिक मेडिसिन शॉप से खरीदने को कहा। उसने कहा कि यह दवा केवल उसी दुकान पर उपलब्ध है और वह इसे उत्तराखंड के हरिद्वार से लाता है। उसने कहा कि देवराज बूटि का एक ग्राम 1.6 लाख रुपये का है। उसने कहा कि दवा केवल नकद भुगतान से खरीदी जानी चाहिए। उसने सुझाव दिया कि पीड़ित अकेले जाए, क्योंकि दावा करते हुए कि अगर कोई साथ जाए तो उसकी शक्ति नष्ट हो जाएगी।

    माता-पिता से उधार लिए पैसे

    पीड़ित ने घर से नकद पैसे लिए और आयुर्वेदिक दुकान पर चला गया। वह दवा लेकर विजय के पास लौटा। स्वघोषित आयुर्वेदिक हीलर ने बताया कि देवराज बूटि का इस्तेमाल कैसे करना है और उसे खास तरह का तेल भी दिया। इस तेल की कीमत 76,000 रुपये प्रति ग्राम थी और 15 ग्राम तेल खरीदने को कहा। उसने हर हफ्ते अपनी पत्नी और माता-पिता से पैसे उधार लिए और कुल 17 लाख रुपये का भुगतान 15 ग्राम तेल और अन्य प्रोडक्ट्स के लिए किया।

    मेडिकल जांच की रिपोर्ट से हैरान

    विजय ने बाद में उसे अतिरिक्त 3 ग्राम देवराज बूटि’ खरीदने के लिए दबाव डाला। प्रत्येक ग्राम के लिए 1.6 लाख रुपये देने को कहा। पीड़ित ने बैंक से 20 लाख रुपये का लोन लिया और कुल 18 ग्राम देवराज बूटि खरीदी। बाद में उसे देवराज रसाबूटि नामक एक अन्य दवा खरीदने के लिए मनाया गया, जिसकी कीमत 2.6 लाख रुपये प्रति ग्राम थी। इसके लिए उसने दोस्त से 10 लाख रुपये उधार लिए और चार ग्राम देवराज रसाबूटि खरीदी। इस तरह पीड़ित ने विजयलक्ष्मी आयुर्वेदिक मेडिसिन शॉप से कुल 48 लाख रुपये देकर सभी दवाएं खरीदीं। सभी दवाओं का उपयोग करने के बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ। जब पीड़ित ने मेडिकल जांच कराई तो ब्लड टेस्ट के नतीजे से किडनी में समस्याएं दिखीं। अब शिकायतकर्ता का आरोप है कि विजय गुरुजी की हर्बल दवाओं के सेवन से उसकी सेहत बिगड़ी। उसने विजय, दवा दुकान मालिक और उस टेंट वाले के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जिसने उसे विजय से मिलवाया था।

  • जब कानून हुआ नाकाम, तब इंसाफ करने निकल पड़ा ‘शहंशाह’, जेल-अस्पताल हर जगह दरिंदों को लगाया ठिकाने; खौफ से भर उठे थे ‘दानव’

    जब कानून हुआ नाकाम, तब इंसाफ करने निकल पड़ा ‘शहंशाह’, जेल-अस्पताल हर जगह दरिंदों को लगाया ठिकाने; खौफ से भर उठे थे ‘दानव’

    जब कानून हुआ नाकाम, तब इंसाफ करने निकल पड़ा 'शहंशाह', जेल-अस्पताल हर जगह दरिंदों को लगाया ठिकाने; खौफ से भर उठे थे 'दानव'

    दुनिया में शायद ही कोई व्यक्ति होगा, जिसे जेल में रहना पसंद होगा. लेकिन एक व्यक्ति ऐसा है, जो दुनिया में सबसे लंबे वक्त से जेल में बंद आरोपी है. वह आरोपी हत्या के आरोप में 45 साल गुजार चुका है. उसे अब सरकार रिहा करना चाहती है लेकिन वह बाहर नहीं आना चाहता. वह सरकार से गुजारिश कर रहा है कि उसे बाहर न निकाला जाए, वरना वह फिर से मर्डर कर सकता है. अब उसकी अजीब गुजारिश के बाद सरकार असमंजस में है. उसे समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करे. वह उस अपराधी को रिहा करने पर विचार करे या जेल में ही सड़ता रहने दे.

    ब्रिटेन में सबसे लंबे वक्त से बंद कैदी

    डेली मिरर यूके की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में सबसे लंबे वक्त से कैद इस अपराधी का नाम रोबर्ट जॉन मॉड्सले (Robert Maudsley) है. वह एक ऐसा कैदी है, जिसके खौफ से आज भी ब्रिटेन वासी कांपते हैं. उसके बारे में कहा जाता था कि वह लोगों की हत्या करने के बाद उनका दिमाग खा जाता था. पुलिस की जांच में ऐसे दावे गलत साबित हुए, लेकिन इससे लोगों में उसके प्रति डर कम नहीं हुआ. ब्रिटिश मीडिया ने इन अफवाहों की वजह से उसे हैनिबल द कैनिबल यानी दिमाग खाने वाला दानव नाम दिया था.

    करीब 5 दशक पहले पुलिस ने उसे जब पकड़ा तो उसके खौफ की वजह से उसे जेल के एकांतवास में डाल दिया. उसके लिए जेल के बेसमेंट में विशेष रूप से कांच का बुलेटप्रूफ कमरा बनाया गया, जहां पर वो दिन के 23 घंटे बिल्कुल अकेले गुजारते था और महज 1 घंटे के लिए उसे खुले में लाया जाता था.

    नारकीय बचपन से कातिल बनने का सफर

    रिपोर्ट के मुताबिक, रोबर्ट मॉड्सले का जन्म 1953 में लिवरपूल में हुआ था. उसके शुरुआती दिन अनाथालय और पिता के खौफनाक उत्पीड़न के बीच बीते. उसके पिता हफ़्तों तक अंधेरे कमरे में बंद रखकर बेरहमी से पीटता था. बचपन की इन्हीं कड़वी यादों ने आगे चलकर उनके अंदर विकृत और हिंसक प्रवृत्ति को जन्म दिया. जवान होते ही वो नशे और अनैतिक गतिविधियों में शामिल हो गया. वर्ष 1974 में, 21 साल की उम्र में उसने पहली हत्या की. उसने एक ऐसे व्यक्ति को जान से मार डाला, जिसने उन्हें बच्चों के यौन शोषण की तस्वीरें दिखाई थीं. हत्या के बाद रोबर्ट ने खुद पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और कहा कि उसे मानसिक इलाज की ज़रूरत है.

    रोबर्ट को इलाज के लिए मानसिक चिकित्सालय ब्रोडमूर हॉस्पिटल भेजा गया. Broadmoor Hospital) भेजा गया, लेकिन असली तबाही तो अभी शुरू होनी बाकी थी. वहां पर वर्ष 1977 में रोबर्ट ने एक अन्य कैदी डेविज फ्रांसिस के साथ मिलकर बच्चों का यौन शोषण करने वाले एक आरोपी की हत्या कर दी. उसे इतनी बेरहमी से मारा गया कि पुलिस समेत सब लोग सहम कर रह गए.

    जेल पहुंचने पर एक ही दिन में 2 कत्ल

    इन दो हत्याओं के बाद लोगों में रोबर्ट मॉड्सले को लेकर खौफ बैठ गया. पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर हाई सिक्योरिटी वाली वेकफील्ड जेल जेल में भेजा. वहां पर उसने एक ही दिन में 2 कैदियों को मौत के घाट उतार दिया. उनमें से एक अपनी पत्नी की हत्या करके जेल पहुंचा था, जबकि दूसरा आरोपी एक मासूम बच्ची का उत्पीड़न करने वाला दरिंदा था.

    जब जेल के गार्डों ने उसे काबू करके हत्याओं की वजह पूछी तो रोबर्ट ने कहा कि वह केवल उन्हीं लोगों को मारता है, जो बच्चों या महिलाओं के खिलाफ घिनौने अपराध करता है. वे ऐसे शैतानों को जिंदा नहीं छोड़ सकता. ऐसा करके वो लोगों को न्याय देने वाला स्वयंभू सरकार मानने लगा था.

    कांच के बने स्पेशल सेल में पिछले 5 दशक से बंद

    चार-चार हत्याओं के बाद ब्रिटिश जेल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए. उन्हें लगा कि रोबर्ट को सामान्य कैदियों या सुरक्षा गार्डों के पास रखना भी खतरे से खाली नहीं है. इसके बाद 1983 में वेकफील्ड जेल में उनके लिए एक विशेष व्यवस्था की गई. उसके लिए बेसमेंट तैयार करवाकर वहां पर 5×4 मीटर का एक ऐसा कमरा तैयार किया गया. जिसकी दीवारें बुलेटप्रूफ कांच की थीं.

    कमरे में कंक्रीट का एक बेड, टेबल और टॉयलेट बना था. खाना देने के लिए दरवाजे में एक छोटा सा छेद बनाया गया था. जब भी रोबर्ट को कमरे से बाहर निकाला जाता, तो कम से कम 5 से 6 सुरक्षा गार्ड कड़े सुरक्षा कवच और ढालों के साथ उन्हें घेरकर रखते थे. एक घंटे तक बाहर रखने के बाद उन्हें फिर से कांच के बने उस कमरे में ठूंस दिया जाता था.

    ‘ऐसा लगता है कि मुझे ज़िंदा दफना दिया गया’

    ब्रिटिश इतिहास में रोबर्ट मॉड्सले सबसे लंबे समय तक एकांत कारावास झेलने वाले कैदी हैं. इस कैद ने रोबर्ट को अंदर तक तोड़ दिया. उसके कई रिपोर्ट्स और इंटरव्यू सामने आए, जिसमें उसने अकेलेपन से जुड़ी पीड़ा जाहिर की. उसने कहा, ‘मुझे ऐसा लगता है कि मुझे ज़िंदा दफना दिया गया है. मैं बस किसी इंसान से बात करना चाहता हूं, पक्षियों की चहचहाहट सुनना चाहता हूं.’

    कोर्ट को भेजी याचिका में रोबर्ट ने लिखा, ‘मुझे टीवी, रेडियो या कम से कम एक छोटा सा तोता पालने की इजाज़त दी जाए ताकि उनका अकेलापन दूर हो सके. यदि मुझे यह सुविधा नहीं दी जा सकती, तो साइनाइड की गोली देकर हमेशा के लिए सुला दिया जाए.’

    ‘मुझे जेल से कभी रिहा न किया जाए’

    जेल में दशकों तक एकांत कारावास में रहने के दौरान अच्छे व्यवहार की वजह से प्रशासन ने उन्हें टीवी, रेडियो जैसी कुछ बुनियादी चीजें मुहैया करवाईं. हालांकि, जेल अधिकारियों के साथ तलाशी को लेकर हुए विवाद के बाद यह सुविधाएं बंद कर दी गई. इसके विरोध में रोबर्ट ने भूख हड़ताल शुरू की, जिस पर प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अप्रैल 2025 में वेकफील्ड से ‘एचएमपी व्हिटमूर’ नामक कैटगरी-ए जेल में शिफ्ट कर दिया गया. तब से रोबर्ट उसी जेल में बंद हैं.

    अब रोबर्ट इसी जिंदगी को अपनी नियति मान चुके हैं. अपने वकीलों के जरिए दिए पत्र में रोबर्ट मॉड्सले (Robert Maudsley) ने खुद को जेल से रिहा न करने की मांग की है. रोबर्ट का कहना है कि अगर उन्हें सामान्य कैदियों के साथ रखा गया या रिहा कर समाज में जाने दिया गया, तो वे फिर से हत्या कर सकते हैं. उसके मुताबिक, ‘जब मेरा सामना बच्चों या महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वाले अपराधियों से होता है तो मैं खुद पर काबू नहीं रख पाता हूं. ऐसी स्थिति में मैं हिंसक हो जाता हूं, जिसका अंजाम कुछ भी हो सकता है.’

    ‘अकेलापन असहनीय हो जाए तो मुझे मार देना’

    अपनी मानसिक स्थिति को भांपते हुए मॉड्सले ने न केवल अपनी रिहाई की अर्जी देने से इनकार किया, बल्कि बची जिंदगी में भी कांच से बने बुलेटप्रूफ कमरे में कैद रहने की इच्छा जताई. उसका मानना है कि वे बाहर की दुनिया के साथ-साथ जेल के भीतर भी अन्य लोगों के लिए एक निरंतर खतरा हैं. खुद को समाज और सामान्य दुनिया के लिए अनुपयुक्त मानते हुए उसने कहा कि अगर उसके अकेलेपन का दर्द असहनीय हो जाए, तो जेल से आजाद करने के बजाय साइनाइड की गोली देकर उनका जीवन समाप्त कर दी जाए.

    रोबर्ट मॉड्सले की इस कहानी पर ब्रिटिश समाज दो हिस्सों में बंटा हुआ है. एक हिस्सा रोबर्ट को हीरो मानता है, जिसने महिलाओं-बच्चों पर अत्याचार करने वाले दरिंदों को मारकर सही काम किया. वहीं, दूसरा वर्ग उन्हें खतरनाक अपराधी मानता है, जो हिंसक होने पर किसी भी जान ले सकता है. इन सब चर्चाओं से परे रोबर्ट जेल के तहखाने में बने उस कांच के बंद कमरे में बिना किसी उम्मीद के अपनी बची जिंदगी को गुजार रहा है.

  • गाड़ी में अब सो नहीं पाएंगे ड्राइवर, हिलने लगेगी कार की सीट, IIT मद्रास ने बनाई खास ‘इंटेलिसीट’, ऐसे बचाएगी जान..?

    गाड़ी में अब सो नहीं पाएंगे ड्राइवर, हिलने लगेगी कार की सीट, IIT मद्रास ने बनाई खास ‘इंटेलिसीट’, ऐसे बचाएगी जान..?

    गाड़ी में अब सो नहीं पाएंगे ड्राइवर, हिलने लगेगी कार की सीट, IIT मद्रास ने बनाई खास 'इंटेलिसीट', ऐसे बचाएगी जान!

    हाईवे पर देर रात एक छोटी सी झपकी के कारण बहुत लोगों की जान चली जाती है. इस तरह के हादसों को रोकने के लिए IIT मद्रास ने कमाल की इंटेलिसीट विकसित की है.

    भारत की सड़कें दुनिया की सबसे खतरनाक सड़कों में से एक हैं और ज्यादातर हादसों की वजह गाड़ियों की खराबी नहीं, बल्कि इंसानी गलतियां होती हैं. रात के सन्नाटे में अक्सर नींद के कारण आंखें भारी होने लगती हैं और फिर कुछ ही सेकंड की लापरवाही के कारण बड़ा हादसा हो जाता है. भारत के हाईवे पर होने वाले जानलेवा हादसों में एक बड़ी वजह ड्राइवर्स की नींद होती है. इसी समस्या को दूर करने के लिए एक इनोवेटिव और स्वदेशी समान खोज निकाला है IIT मद्रास के वैज्ञानिकों ने.

    IIT मद्रास के रिहैबिलिटेशन बायोइंजीनियरिंग ग्रुप ने एक ऐसी स्मार्ट सीट तैयार कर ली है, जो ड्राइवर के सोने से ठीक पहले ही उसकी थकान को भांप लेती है और जोरदार अलर्ट देकर एक्सीडेंट होने से बचा लेती है. सबसे कमाल की बात है कि यह बिना कैमरे और तार के काम करती है. तो आइए जानते हैं आखिर क्या है यह इंटेलिसीट टेक्नोलॉजी और यह किस तरह बिना किसी कैमरे या तार के काम करती है.

    आईआईटी मद्रास के रिहैबिलिटेशन बायोइंजीनियरिंग ग्रुप ने सीटिंग कंपनी हरिता के साथ मिलकर इस सीट को तैयार किया है, इसका नाम इंटेलिसीट दिया गया है. यह स्मार्ट सीट ड्राइवर के सोने से ठीक पहले ही उसकी थकान को पहचान लेती है और किसी हादसे होने से पहले ही अलर्ट कर देती है. देखने में यह एक नार्मल कार सीट की तरह दिखाई देती है, लेकिन इसके अंदर एडवांस सेंसर लगाए गए हैं.

    बिना कैमरा और तार के करेगी काम

    मार्केट में मौजूद दूसरी इस तरह की सीटे ड्राइवर पर नजर रखने के लिए कैमरे, सिर पर पट्टी या शरीर पर इलेक्ट्रोड यानी तार का इस्तेमाल करती हैं. वहीं इंटेलिसीट पूरी तरह से नॉन-इंट्रूसिव है. यानी ड्राइवर को शरीर पर कुछ भी पहनने की जरूरत नहीं है.

    तो कैसे करती है पहचान

    अब आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि जब कैमरा, सिर पर पट्टी और तार भी नहीं है, तो सीट कैसे ड्राइवर के सोने का पहचान कैसे करती है. इसका जवाब है कि सीट के बैकरेस्ट और बेस में लगे सेंसर, जो ड्राइवर के बैठने के तरीके, उसकी स्थिति और थकान के कारण शरीर में होने वाली हल्की हलचलों को महसूस करते हैं.

    सर्फेस इलेक्ट्रोमायोग्राफी मांसपेशियों की थकान मापने के लिए यह सीट शरीर से निकलने वाले हल्के इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स को समझने का प्रयास करती है. इससे पता चलता है कि पीठ और कंधों की मांसपेशियां कब थकान महसूस कर रही है.

    खतरे के हिसाब से 3 लेवल पर अलर्ट

    यह सीट ड्राइवर की थकान को तीन चरणों में भांपकर एक्शन में आती है-

    हल्की थकान डैशबोर्ड पर एक छोटी सी लाइट जलती है, जो सिर्फ ड्राइवर को सावधान करती है.

    थकान लाइट के साथ-साथ एक बीप यानी अलर्ट मिलता है.

    ज्यादा थकाम जब स्थिति ज्यादा खतरनाक होती है, तो सीट खुद कांपने लगती है. इसके साथ ही गाड़ी के मालिक को मोबाइल ऐप पर तुरंत नोटिफिकेशन पहुंच जाता है.

    पुरानी गाड़ियों में भी आसानी से होगी फिट

    इस सीट की यह खास बात है कि इसे पुरानी गाड़ियों में भी आसानी से फिट किया जा सकता है. इंटेलिसीट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे किसी भी मौजूदा ट्रक, बस या कार में आसानी से फिट किया जा सकता है. इसके लिए गाड़ी में ज्यादा टेक्निकल बदलाव करने की भी जरूरत नहीं पड़ती है. फिट करने के बाद चाबी ऑन करते ही यह काम करना शुरू कर देती है और मोबाइल ऐप के जरिए रियर-टाइम डेटा भेजती रहती है.

    भारत में सड़क हादसों और थके हुए ड्राइवरों की वजह से जाने वाली जानों को बचाने में यह स्वदेशी इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) टेक्नोलॉजी एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकती है.

  • गरुड़ पुराण:  मृत्यु के कितने दिनों बाद आत्मा यमलोक पहुंचती है, रास्ते में क्या-क्या पड़ता है..?

    गरुड़ पुराण: मृत्यु के कितने दिनों बाद आत्मा यमलोक पहुंचती है, रास्ते में क्या-क्या पड़ता है..?

    मृत्यु को अटल सत्य कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जो आया है उसे जाना भी होगा। गरुड़ पुराण में लाइफ के हर रहस्य के बारे में लिखा है। व्यक्ति के मरने के बाद आत्मा 13 दिन तक घर में रहती है, फिर 47 दिन बात यमलोक जाती है। यमलोक जाने पर क्या-क्या मिलता है। इस 47 जिन की यात्रा के लिए आत्मा को किन चीजों से जूझना पड़ता है, इसके बारे में यमलोक में बताया गया है। वहां जाने के बाद होता है आपके कर्मों का हिसाब। आपने क्या अच्छा किया और क्या गलत किया इन सभी का हिसाब होता है। आइए जानें यमलोक कैसे जाते हैं रास्ते में कौन सी नदी पड़ती है और आत्मा कैसे यमलोक पहुंचती है।

    मृत्यु से पहले दिखते हैं यमराज

    जिसकी मृत्यु होने वाली होती है, उसे यमराज दिखते हैं। यमराज अंगूठे के बराबर आत्मा को अपने साथ ले जाते हैं, लेकिन फिर आत्मा वापस शरीर में जाने के लिए कहती है, यमराज उसे बांधे रखते हैं। इसके बाद 13 दिन तक आत्मा घर में रहती है और फिर 1 3 दिन बाद यमलोक के लिए जाती है। इसलिए 13वें दिन आत्मा के साथ चप्पल, छतरी, टॉर्च, बिस्तर आदि रख कर देते हैं।

    पिंड-दान अगर ना किया जाए

    अगर किसी व्यक्ति का पिंडदान या अंतिम संस्कार ना किया जाए तो आत्मा भटकने लगती है। अगर दाह संस्कार हो जाता है और विधि विधान से सभी कार्य होते हैं तो आत्मा यमलोक की यात्रा पर निकलती है। यमलोक 99 योजन दूर है। रास्त में कई दिक्कतें झेलनी पड़ती है, वहां बहुत गर्म होता है, रास्ते में खाना और पानी भी नहीं मिलता। यमराज के सामने प्रस्तुत करते हैं। यमराज उस आत्मा को उसके द्वारा किए गए पापों के अनुसार सजा देते हैं>

    10 दिन तक पिंडदान

    गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद 13 दिन तक आत्मा घर में ही रहती है, लेकिन जब लगातार पिंडदान होते हैं तो पिंडदान से आत्मा का शरीर बनने लगता है। 13 दिन बात आत्मा घर से चली जाती है।

    वैतरणी नदी यमलोक के जाने वाले रास्ते में मिलती है। इसे पारकरके ही यमलोक पहुंचा जा सकता है। यह रास्त उनके लिए कठिन हो जाता है, जिन्होंने पाप किए हैं, उनके लिए कई परेशानियां आती हैं। कहा जाता है कि यमलोक तक पहुंचने के लिए 16 पुरियों को पार करना होता है।

  • पति की दो शादियों का खुला राज, थाने से कोर्ट तक पहुंचा मामला; आखिर दोनों पत्नियों ने मिलकर लिया बड़ा फैसला..

    पति की दो शादियों का खुला राज, थाने से कोर्ट तक पहुंचा मामला; आखिर दोनों पत्नियों ने मिलकर लिया बड़ा फैसला..

    उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से रिश्तों से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया था, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया था। एक युवक ने पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी कर ली थी, लेकिन लंबे समय तक पहली पत्नी को इसकी भनक तक नहीं लगी थी। जब दूसरी शादी का राज खुला तो घर में जमकर विवाद हुआ और मामला पुलिस तक पहुंच गया था।

    बताया गया था कि युवक की पहली शादी करीब 13 साल पहले हुई थी। शादी के बाद दोनों के दो बच्चे भी हुए थे। परिवार में सब कुछ सामान्य चल रहा था। इसी बीच युवक के जीवन में दूसरी महिला की एंट्री हुई और दोनों के बीच संबंध बन गए।

    पहली पत्नी को ऐसे पता चला था राज

    करीब पांच साल पहले युवक ने कथित तौर पर पहली पत्नी से छिपाकर दूसरी शादी कर ली थी। काफी समय तक दोनों रिश्ते अलग-अलग चलते रहे। लेकिन कुछ समय पहले पहली पत्नी को पति की दूसरी शादी की जानकारी मिल गई थी।

    सच्चाई सामने आते ही पति-पत्नी के बीच विवाद शुरू हो गया था। गुस्से में पहली पत्नी पुलिस के पास पहुंच गई और पति के खिलाफ शिकायत कर दी थी।

    पुलिस ने युवक को हिरासत में लिया था

    शिकायत के बाद पुलिस ने युवक को हिरासत में लेकर शांति भंग की कार्रवाई की थी। इसके बाद मामला न्यायालय तक पहुंच गया था। यहां कहानी ने ऐसा मोड़ लिया जिसकी शायद किसी ने कल्पना नहीं की थी।

    मामले की सुनवाई के दौरान दोनों महिलाएं अदालत में मौजूद थीं। पहली पत्नी की शिकायत के बावजूद दोनों ने युवक को जेल भेजने का विरोध किया। दोनों ने अदालत के सामने अपनी सहमति से मामला सुलझाने की बात कही थी।

    दोनों पत्नियां साथ रहने को तैयार

    अदालत में दोनों महिलाओं के बीच समझौता हो गया था। उन्होंने युवक को जेल भेजने के बजाय उसके साथ रहने की सहमति जताई थी। बताया गया कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए दोनों ने यह फैसला लिया था।

    दोनों पक्षों की सहमति को ध्यान में रखते हुए युवक को रिहा कर दिया गया था। इसके बाद दोनों पत्नियों ने बच्चों के हित में पति के साथ रहने का निर्णय लिया था।

    यह मामला इसलिए भी चर्चा में रहा था क्योंकि जहां आमतौर पर पति की दूसरी शादी का पता चलने पर विवाद और कानूनी लड़ाई देखने को मिलती है, वहीं यहां मामला अदालत पहुंचने के बाद दोनों महिलाओं ने मिलकर अलग रास्ता चुन लिया था।

  • पिज्जा कैफे में प्रेमी के साथ बैठी थी युवती, तभी पहुंचा भाई; युवक की पिटाई ..

    पिज्जा कैफे में प्रेमी के साथ बैठी थी युवती, तभी पहुंचा भाई; युवक की पिटाई ..

    उत्तर प्रदेश के हापुड़ में कुछ समय पहले एक ऐसा मामला सामने आया था, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया। एक युवती अपने परिचित युवक के साथ पिज्जा कैफे में बैठी थी। इसी दौरान उसका भाई कुछ लोगों के साथ वहां पहुंच गया और देखते ही देखते कैफे का माहौल तनावपूर्ण हो गया।

    बताया गया था कि घटना नगर कोतवाली क्षेत्र के एक कैफे की थी। युवती अपने परिचित युवक के साथ बैठकर बातचीत कर रही थी। इसी दौरान उसके भाई को दोनों के वहां होने की जानकारी मिली। इसके बाद वह कुछ अन्य युवकों के साथ कैफे पहुंच गया।

    कैफे में पहुंचते ही भाई और उसके साथ आए लोगों ने युवक के साथ मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि युवक को लात-घूंसों और डंडे से पीटा गया। अचानक हुए इस विवाद से कैफे में मौजूद दूसरे लोग भी घबरा गए।

    बताया गया कि युवती ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन विवाद और बढ़ गया। इसी दौरान भाई ने अपनी बहन के साथ भी मारपीट की। पूरी घटना कैफे में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड होने की बात सामने आई थी।

    वीडियो सामने आने के बाद घटना को लेकर इलाके में चर्चा शुरू हो गई। कैफे में मौजूद लोगों के बीच भी इस घटना को लेकर काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल रहा।

    मामले के सामने आने के बाद लोगों ने सवाल उठाए कि निजी विवाद को बातचीत से सुलझाने के बजाय सार्वजनिक जगह पर मारपीट करना कितना उचित है। वहीं, घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी लोगों की नजरें टिकी थीं।

    फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने परिवारिक रिश्तों, युवाओं के आपसी संबंध और गुस्से में कानून हाथ में लेने जैसे मुद्दों को लेकर चर्चा छेड़ दी थी।

  • पासपोर्ट बनवाने का कहकर घर से निकला तीन बच्चों का पिता, फिर साली को लेकर हुआ फरार..

    पासपोर्ट बनवाने का कहकर घर से निकला तीन बच्चों का पिता, फिर साली को लेकर हुआ फरार..

    उत्तर प्रदेश में कुछ समय पहले एक ऐसा मामला सामने आया था, जिसने एक परिवार को गहरे संकट में डाल दिया था। तीन बच्चों का पिता घर से पासपोर्ट बनवाने की बात कहकर निकला, लेकिन इसके बाद वापस नहीं लौटा। बाद में पत्नी को जानकारी मिली कि वह अपनी साली को साथ लेकर चला गया है।

    बताया गया था कि युवक ने घर से निकलते समय पत्नी से कहा था कि वह पासपोर्ट के सिलसिले में बाहर जा रहा है। इसके बाद काफी समय बीतने के बावजूद वह घर नहीं लौटा। पत्नी ने कई बार फोन करने की कोशिश की, लेकिन पहले फोन नहीं उठाया गया और बाद में मोबाइल बंद हो गया।

    जब महिला ने अपने स्तर पर जानकारी जुटाई तो उसे पता चला कि उसका पति उसकी छोटी बहन को भी अपने साथ लेकर चला गया है। इसके बाद वह अपने तीन छोटे बच्चों के साथ पुलिस के पास पहुंची और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।

    महिला के मुताबिक, उसके पति और उसकी छोटी बहन के बीच पिछले काफी समय से बातचीत और नजदीकियां थीं। उसे अंदाजा नहीं था कि दोनों एक दिन घर छोड़कर चले जाएंगे। महिला ने बताया था कि उसके तीन बच्चे हैं और सबसे छोटा बच्चा महज कुछ महीने का था।

    पीड़िता ने पुलिस से पति और अपनी बहन दोनों को तलाशने की गुहार लगाई थी। उसका कहना था कि अगर दोनों वापस लौट आते हैं तो वह परिवार को फिर से साथ रखने के लिए तैयार थी।

    महिला ने अपनी छोटी बहन पर भरोसा तोड़ने का आरोप भी लगाया था। उसका कहना था कि जिस बहन को वह अपना करीबी मानती थी, उसी ने उसके वैवाहिक जीवन में ऐसी स्थिति पैदा कर दी।

    शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी थी। पुलिस दोनों के बारे में जानकारी जुटाने और उनके संभावित ठिकानों का पता लगाने में लगी थी। परिवार की स्थिति को देखते हुए यह मामला इलाके में काफी चर्चा का विषय बन गया था।

  • शादी की पहली रात दुल्हन को आया चक्कर, दूल्हे ने थमाई प्रेग्नेंसी टेस्ट किट तो मच गया बवाल..

    शादी की पहली रात दुल्हन को आया चक्कर, दूल्हे ने थमाई प्रेग्नेंसी टेस्ट किट तो मच गया बवाल..

    उत्तर प्रदेश में कुछ समय पहले शादी के तुरंत बाद एक ऐसा मामला सामने आया था, जिसने दोनों परिवारों के बीच तनाव पैदा कर दिया था। शादी के बाद जब दुल्हन पहली बार ससुराल पहुंची तो गर्मी और थकान की वजह से उसे चक्कर आ गया। दूल्हे ने इस सामान्य स्थिति को लेकर ऐसा कदम उठा लिया, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया।

    बताया गया था कि युवक की शादी पूरे रीति-रिवाज के साथ हुई थी। शादी की रस्में पूरी होने के बाद दुल्हन ससुराल पहुंची। वहां कुछ देर बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और उसे चक्कर आ गया। दूल्हा यह देखकर घबरा गया और उसने अपने दोस्तों से इस बारे में बातचीत की।

    दोस्तों की बातचीत के दौरान गर्भावस्था को लेकर मजाक में कही गई बात को दूल्हे ने गंभीरता से ले लिया। इसके बाद वह मेडिकल स्टोर से प्रेग्नेंसी टेस्ट किट ले आया और पत्नी को जांच के लिए दे दी।

    किट देखते ही दुल्हन नाराज हो गई। उसे लगा कि दूल्हा शादी के तुरंत बाद ही उस पर शक कर रहा है। उसने तत्काल मायके में फोन कर पूरी बात बताई। कुछ ही समय बाद उसके परिवार के लोग ससुराल पहुंच गए और दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया।

    मामला बढ़ने के बाद गांव के लोगों ने हस्तक्षेप किया और पंचायत बुलाई गई। पंचायत में दुल्हन ने कहा कि पति का उस पर भरोसा नहीं है और वह इस व्यवहार से काफी आहत हुई है।

    वहीं दूल्हे ने सफाई देते हुए कहा कि उसका मकसद पत्नी पर आरोप लगाना नहीं था। उसने दोस्तों की बात को सच मानकर नासमझी में प्रेग्नेंसी टेस्ट किट खरीद ली थी। विवाद बढ़ने के बाद दूल्हे ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए पत्नी और उसके परिवार से माफी मांगी।

    काफी बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया और मामला शांत कराया गया। शादी के तुरंत बाद हुई इस घटना की चर्चा इलाके में काफी समय तक होती रही।

  • 700 साल पुराने गांव की अनोखी मान्यता, लोग कहते हैं- जहरीला सांप काटे तो भी नहीं जाती जान!

    700 साल पुराने गांव की अनोखी मान्यता, लोग कहते हैं- जहरीला सांप काटे तो भी नहीं जाती जान!

    उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक ऐसा गांव है, जो अपनी अनोखी धार्मिक मान्यताओं के कारण लंबे समय से चर्चा में रहा है। करीब 700 साल पुराने इस गांव को लेकर स्थानीय लोगों के बीच ऐसी मान्यता है कि यहां जहरीले सांप के काटने के बाद भी व्यक्ति की जान नहीं जाती। ग्रामीण इसे एक संत की कृपा से जोड़कर देखते हैं।

    यह गांव अपने प्राचीन धार्मिक इतिहास और मंदिरों के लिए भी जाना जाता है। यहां स्थित एक पुराने मंदिर और समाधि स्थल पर आसपास के कई गांवों के लोग श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं।

    बाबा नारायण दास से जुड़ी है मान्यता

    स्थानीय मान्यता के अनुसार, कई सदियों पहले इस क्षेत्र में बाबा नारायण दास का जन्म हुआ था। बताया जाता है कि वह भगवान शिव के भक्त थे और उन्होंने अलग-अलग स्थानों पर रहकर साधना की थी।

    कहा जाता है कि उन्होंने अपनी काफी जमीन मंदिर के लिए दान कर दी थी। बाद में एक प्राचीन शिव मंदिर के पास साधना करते समय उन्होंने वहीं समाधि ले ली। समय के साथ उस स्थान पर उनकी समाधि बनाई गई, जहां आज भी लोग पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।

    12 गांवों में मानी जाती है खास आस्था

    स्थानीय लोगों के अनुसार, बाबा नारायण दास को आसपास के करीब 12 गांवों में ग्राम देवता के रूप में माना जाता है। इन गांवों के लोग किसी भी शुभ कार्य से पहले बाबा की समाधि पर पहुंचकर आशीर्वाद लेते हैं।

    ग्रामीणों का विश्वास है कि बाबा की कृपा के कारण यहां सांप के काटने की घटनाओं में भी लोगों को नुकसान नहीं होता। कुछ स्थानीय लोगों का दावा है कि उन्होंने आज तक किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में नहीं सुना जिसकी सांप के काटने से मौत हुई हो।

    क्या सच में सांप का जहर असर नहीं करता?

    सांप के काटने को लेकर गांव में प्रचलित यह बात धार्मिक आस्था और स्थानीय मान्यता का हिस्सा है। हालांकि जहरीले सांप के काटने पर जहर का असर न होने की बात को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।

    सांप के काटने की स्थिति में किसी भी तरह की देरी या झाड़-फूंक पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है। पीड़ित व्यक्ति को तुरंत अस्पताल ले जाना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार कराना जरूरी है।

    मंदिर में दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु

    बाबा की समाधि को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी आस्था है। श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं और पूजा-पाठ करते हैं। ग्रामीणों के लिए यह स्थान सिर्फ धार्मिक महत्व नहीं रखता, बल्कि उनके गांव की सदियों पुरानी परंपरा और विश्वास से भी जुड़ा हुआ है।

    सांप के काटने से मौत न होने की कहानी भले ही स्थानीय मान्यता हो, लेकिन इसी अनोखी मान्यता ने इस गांव को आसपास के इलाकों में खास पहचान दिला दी है।