
दुनिया में शायद ही कोई व्यक्ति होगा, जिसे जेल में रहना पसंद होगा. लेकिन एक व्यक्ति ऐसा है, जो दुनिया में सबसे लंबे वक्त से जेल में बंद आरोपी है. वह आरोपी हत्या के आरोप में 45 साल गुजार चुका है. उसे अब सरकार रिहा करना चाहती है लेकिन वह बाहर नहीं आना चाहता. वह सरकार से गुजारिश कर रहा है कि उसे बाहर न निकाला जाए, वरना वह फिर से मर्डर कर सकता है. अब उसकी अजीब गुजारिश के बाद सरकार असमंजस में है. उसे समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करे. वह उस अपराधी को रिहा करने पर विचार करे या जेल में ही सड़ता रहने दे.
ब्रिटेन में सबसे लंबे वक्त से बंद कैदी
डेली मिरर यूके की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में सबसे लंबे वक्त से कैद इस अपराधी का नाम रोबर्ट जॉन मॉड्सले (Robert Maudsley) है. वह एक ऐसा कैदी है, जिसके खौफ से आज भी ब्रिटेन वासी कांपते हैं. उसके बारे में कहा जाता था कि वह लोगों की हत्या करने के बाद उनका दिमाग खा जाता था. पुलिस की जांच में ऐसे दावे गलत साबित हुए, लेकिन इससे लोगों में उसके प्रति डर कम नहीं हुआ. ब्रिटिश मीडिया ने इन अफवाहों की वजह से उसे हैनिबल द कैनिबल यानी दिमाग खाने वाला दानव नाम दिया था.
करीब 5 दशक पहले पुलिस ने उसे जब पकड़ा तो उसके खौफ की वजह से उसे जेल के एकांतवास में डाल दिया. उसके लिए जेल के बेसमेंट में विशेष रूप से कांच का बुलेटप्रूफ कमरा बनाया गया, जहां पर वो दिन के 23 घंटे बिल्कुल अकेले गुजारते था और महज 1 घंटे के लिए उसे खुले में लाया जाता था.
नारकीय बचपन से कातिल बनने का सफर
रिपोर्ट के मुताबिक, रोबर्ट मॉड्सले का जन्म 1953 में लिवरपूल में हुआ था. उसके शुरुआती दिन अनाथालय और पिता के खौफनाक उत्पीड़न के बीच बीते. उसके पिता हफ़्तों तक अंधेरे कमरे में बंद रखकर बेरहमी से पीटता था. बचपन की इन्हीं कड़वी यादों ने आगे चलकर उनके अंदर विकृत और हिंसक प्रवृत्ति को जन्म दिया. जवान होते ही वो नशे और अनैतिक गतिविधियों में शामिल हो गया. वर्ष 1974 में, 21 साल की उम्र में उसने पहली हत्या की. उसने एक ऐसे व्यक्ति को जान से मार डाला, जिसने उन्हें बच्चों के यौन शोषण की तस्वीरें दिखाई थीं. हत्या के बाद रोबर्ट ने खुद पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और कहा कि उसे मानसिक इलाज की ज़रूरत है.
रोबर्ट को इलाज के लिए मानसिक चिकित्सालय ब्रोडमूर हॉस्पिटल भेजा गया. Broadmoor Hospital) भेजा गया, लेकिन असली तबाही तो अभी शुरू होनी बाकी थी. वहां पर वर्ष 1977 में रोबर्ट ने एक अन्य कैदी डेविज फ्रांसिस के साथ मिलकर बच्चों का यौन शोषण करने वाले एक आरोपी की हत्या कर दी. उसे इतनी बेरहमी से मारा गया कि पुलिस समेत सब लोग सहम कर रह गए.
जेल पहुंचने पर एक ही दिन में 2 कत्ल
इन दो हत्याओं के बाद लोगों में रोबर्ट मॉड्सले को लेकर खौफ बैठ गया. पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर हाई सिक्योरिटी वाली वेकफील्ड जेल जेल में भेजा. वहां पर उसने एक ही दिन में 2 कैदियों को मौत के घाट उतार दिया. उनमें से एक अपनी पत्नी की हत्या करके जेल पहुंचा था, जबकि दूसरा आरोपी एक मासूम बच्ची का उत्पीड़न करने वाला दरिंदा था.
जब जेल के गार्डों ने उसे काबू करके हत्याओं की वजह पूछी तो रोबर्ट ने कहा कि वह केवल उन्हीं लोगों को मारता है, जो बच्चों या महिलाओं के खिलाफ घिनौने अपराध करता है. वे ऐसे शैतानों को जिंदा नहीं छोड़ सकता. ऐसा करके वो लोगों को न्याय देने वाला स्वयंभू सरकार मानने लगा था.
कांच के बने स्पेशल सेल में पिछले 5 दशक से बंद
चार-चार हत्याओं के बाद ब्रिटिश जेल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए. उन्हें लगा कि रोबर्ट को सामान्य कैदियों या सुरक्षा गार्डों के पास रखना भी खतरे से खाली नहीं है. इसके बाद 1983 में वेकफील्ड जेल में उनके लिए एक विशेष व्यवस्था की गई. उसके लिए बेसमेंट तैयार करवाकर वहां पर 5×4 मीटर का एक ऐसा कमरा तैयार किया गया. जिसकी दीवारें बुलेटप्रूफ कांच की थीं.
कमरे में कंक्रीट का एक बेड, टेबल और टॉयलेट बना था. खाना देने के लिए दरवाजे में एक छोटा सा छेद बनाया गया था. जब भी रोबर्ट को कमरे से बाहर निकाला जाता, तो कम से कम 5 से 6 सुरक्षा गार्ड कड़े सुरक्षा कवच और ढालों के साथ उन्हें घेरकर रखते थे. एक घंटे तक बाहर रखने के बाद उन्हें फिर से कांच के बने उस कमरे में ठूंस दिया जाता था.
‘ऐसा लगता है कि मुझे ज़िंदा दफना दिया गया’
ब्रिटिश इतिहास में रोबर्ट मॉड्सले सबसे लंबे समय तक एकांत कारावास झेलने वाले कैदी हैं. इस कैद ने रोबर्ट को अंदर तक तोड़ दिया. उसके कई रिपोर्ट्स और इंटरव्यू सामने आए, जिसमें उसने अकेलेपन से जुड़ी पीड़ा जाहिर की. उसने कहा, ‘मुझे ऐसा लगता है कि मुझे ज़िंदा दफना दिया गया है. मैं बस किसी इंसान से बात करना चाहता हूं, पक्षियों की चहचहाहट सुनना चाहता हूं.’
कोर्ट को भेजी याचिका में रोबर्ट ने लिखा, ‘मुझे टीवी, रेडियो या कम से कम एक छोटा सा तोता पालने की इजाज़त दी जाए ताकि उनका अकेलापन दूर हो सके. यदि मुझे यह सुविधा नहीं दी जा सकती, तो साइनाइड की गोली देकर हमेशा के लिए सुला दिया जाए.’
‘मुझे जेल से कभी रिहा न किया जाए’
जेल में दशकों तक एकांत कारावास में रहने के दौरान अच्छे व्यवहार की वजह से प्रशासन ने उन्हें टीवी, रेडियो जैसी कुछ बुनियादी चीजें मुहैया करवाईं. हालांकि, जेल अधिकारियों के साथ तलाशी को लेकर हुए विवाद के बाद यह सुविधाएं बंद कर दी गई. इसके विरोध में रोबर्ट ने भूख हड़ताल शुरू की, जिस पर प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अप्रैल 2025 में वेकफील्ड से ‘एचएमपी व्हिटमूर’ नामक कैटगरी-ए जेल में शिफ्ट कर दिया गया. तब से रोबर्ट उसी जेल में बंद हैं.
अब रोबर्ट इसी जिंदगी को अपनी नियति मान चुके हैं. अपने वकीलों के जरिए दिए पत्र में रोबर्ट मॉड्सले (Robert Maudsley) ने खुद को जेल से रिहा न करने की मांग की है. रोबर्ट का कहना है कि अगर उन्हें सामान्य कैदियों के साथ रखा गया या रिहा कर समाज में जाने दिया गया, तो वे फिर से हत्या कर सकते हैं. उसके मुताबिक, ‘जब मेरा सामना बच्चों या महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वाले अपराधियों से होता है तो मैं खुद पर काबू नहीं रख पाता हूं. ऐसी स्थिति में मैं हिंसक हो जाता हूं, जिसका अंजाम कुछ भी हो सकता है.’
‘अकेलापन असहनीय हो जाए तो मुझे मार देना’
अपनी मानसिक स्थिति को भांपते हुए मॉड्सले ने न केवल अपनी रिहाई की अर्जी देने से इनकार किया, बल्कि बची जिंदगी में भी कांच से बने बुलेटप्रूफ कमरे में कैद रहने की इच्छा जताई. उसका मानना है कि वे बाहर की दुनिया के साथ-साथ जेल के भीतर भी अन्य लोगों के लिए एक निरंतर खतरा हैं. खुद को समाज और सामान्य दुनिया के लिए अनुपयुक्त मानते हुए उसने कहा कि अगर उसके अकेलेपन का दर्द असहनीय हो जाए, तो जेल से आजाद करने के बजाय साइनाइड की गोली देकर उनका जीवन समाप्त कर दी जाए.
रोबर्ट मॉड्सले की इस कहानी पर ब्रिटिश समाज दो हिस्सों में बंटा हुआ है. एक हिस्सा रोबर्ट को हीरो मानता है, जिसने महिलाओं-बच्चों पर अत्याचार करने वाले दरिंदों को मारकर सही काम किया. वहीं, दूसरा वर्ग उन्हें खतरनाक अपराधी मानता है, जो हिंसक होने पर किसी भी जान ले सकता है. इन सब चर्चाओं से परे रोबर्ट जेल के तहखाने में बने उस कांच के बंद कमरे में बिना किसी उम्मीद के अपनी बची जिंदगी को गुजार रहा है.

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