गरुड़ पुराण: मृत्यु के कितने दिनों बाद आत्मा यमलोक पहुंचती है, रास्ते में क्या-क्या पड़ता है..?

गरुड़ पुराण:  मृत्यु के कितने दिनों बाद आत्मा यमलोक पहुंचती है, रास्ते में क्या-क्या पड़ता है..?

मृत्यु को अटल सत्य कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जो आया है उसे जाना भी होगा। गरुड़ पुराण में लाइफ के हर रहस्य के बारे में लिखा है। व्यक्ति के मरने के बाद आत्मा 13 दिन तक घर में रहती है, फिर 47 दिन बात यमलोक जाती है। यमलोक जाने पर क्या-क्या मिलता है। इस 47 जिन की यात्रा के लिए आत्मा को किन चीजों से जूझना पड़ता है, इसके बारे में यमलोक में बताया गया है। वहां जाने के बाद होता है आपके कर्मों का हिसाब। आपने क्या अच्छा किया और क्या गलत किया इन सभी का हिसाब होता है। आइए जानें यमलोक कैसे जाते हैं रास्ते में कौन सी नदी पड़ती है और आत्मा कैसे यमलोक पहुंचती है।

मृत्यु से पहले दिखते हैं यमराज

जिसकी मृत्यु होने वाली होती है, उसे यमराज दिखते हैं। यमराज अंगूठे के बराबर आत्मा को अपने साथ ले जाते हैं, लेकिन फिर आत्मा वापस शरीर में जाने के लिए कहती है, यमराज उसे बांधे रखते हैं। इसके बाद 13 दिन तक आत्मा घर में रहती है और फिर 1 3 दिन बाद यमलोक के लिए जाती है। इसलिए 13वें दिन आत्मा के साथ चप्पल, छतरी, टॉर्च, बिस्तर आदि रख कर देते हैं।

पिंड-दान अगर ना किया जाए

अगर किसी व्यक्ति का पिंडदान या अंतिम संस्कार ना किया जाए तो आत्मा भटकने लगती है। अगर दाह संस्कार हो जाता है और विधि विधान से सभी कार्य होते हैं तो आत्मा यमलोक की यात्रा पर निकलती है। यमलोक 99 योजन दूर है। रास्त में कई दिक्कतें झेलनी पड़ती है, वहां बहुत गर्म होता है, रास्ते में खाना और पानी भी नहीं मिलता। यमराज के सामने प्रस्तुत करते हैं। यमराज उस आत्मा को उसके द्वारा किए गए पापों के अनुसार सजा देते हैं>

10 दिन तक पिंडदान

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद 13 दिन तक आत्मा घर में ही रहती है, लेकिन जब लगातार पिंडदान होते हैं तो पिंडदान से आत्मा का शरीर बनने लगता है। 13 दिन बात आत्मा घर से चली जाती है।

वैतरणी नदी यमलोक के जाने वाले रास्ते में मिलती है। इसे पारकरके ही यमलोक पहुंचा जा सकता है। यह रास्त उनके लिए कठिन हो जाता है, जिन्होंने पाप किए हैं, उनके लिए कई परेशानियां आती हैं। कहा जाता है कि यमलोक तक पहुंचने के लिए 16 पुरियों को पार करना होता है।

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