Category: Bihar

  • सीवान में आभूषण कारोबारी से 20 लाख की लूट, विरोध करने पर पिस्टल के बट से किया हमला; हवाई फायरिंग कर भागे 4 बदमाश.

    सीवान में आभूषण कारोबारी से 20 लाख की लूट, विरोध करने पर पिस्टल के बट से किया हमला; हवाई फायरिंग कर भागे 4 बदमाश.

    सीवान में आभूषण कारोबारी से 20 लाख की लूट, विरोध करने पर पिस्टल के बट से किया हमला; हवाई फायरिंग कर भागे 4 बदमाश.

    सीवान, बिहार: दारौंदा थाना क्षेत्र में बेखौफ बदमाशों ने आभूषण कारोबारी को निशाना बनाकर लूट की बड़ी वारदात को अंजाम दिया। शुक्रवार शाम दो बाइक पर सवार चार बदमाशों ने डिब्बी-जलालपुर मार्ग पर कारोबारी को रोक लिया और हथियार के बल पर करीब 20 लाख रुपये के गहने और नकदी लूट ली। कारोबारी ने विरोध किया तो बदमाशों ने पिस्टल के बट से हमला कर उन्हें घायल कर दिया। वारदात के बाद दहशत फैलाने के लिए हवाई फायरिंग करते हुए सभी आरोपी फरार हो गए।

    दुकान बंद कर घर लौट रहे थे कारोबारी

    घायल कारोबारी की पहचान शिवजी प्रसाद के पुत्र रत्नेश कुमार के रूप में हुई है। मिली जानकारी के अनुसार, रत्नेश कुमार डीबी बाजार स्थित अपनी आभूषण की दुकान बंद करने के बाद मोटरसाइकिल से जलालपुर स्थित अपने घर लौट रहे थे।

    इसी दौरान डिब्बी-जलालपुर मार्ग के बीच दो बाइक पर सवार चार बदमाशों ने उन्हें ओवरटेक कर रोक लिया। आरोप है कि बदमाशों ने हथियार दिखाकर उनके पास मौजूद गहने और नकदी छीननी शुरू कर दी।

    विरोध करने पर पिस्टल के बट से किया हमला

    बताया गया है कि रत्नेश कुमार ने लूट का विरोध किया, तो बदमाशों ने पिस्टल के बट से उन पर हमला कर दिया। इससे कारोबारी घायल हो गए। इसके बाद आरोपी करीब 20 लाख रुपये के गहने और नकदी लेकर डिब्बी बाजार की ओर भाग निकले।

    भागते समय बदमाशों ने कई राउंड हवाई फायरिंग भी की। गोली चलने की आवाज से इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई।

    सूचना मिलने पर पुलिस ने शुरू की कार्रवाई

    घटना की सूचना मिलने के बाद दारौंदा थानाध्यक्ष विकास कुमार सिंह पुलिस बल के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हुए। शुरुआती जानकारी के अनुसार, घटना की सूचना दिए जाने के समय तक पुलिस घटनास्थल पर नहीं पहुंची थी।

    अब पुलिस के सामने वारदात की जांच करने, आरोपियों की पहचान करने और लूटे गए गहने व नकदी का पता लगाने की चुनौती है। हालांकि, आरोपियों की गिरफ्तारी और बरामदगी को लेकर आगे की कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

    इलाके में पहले भी हो चुकी है बड़ी लूट

    डिब्बी और आसपास के बाजार क्षेत्र में पहले भी लूट की बड़ी घटना सामने आ चुकी है। वर्ष 2022 में डिब्बी-चनचौरा बाजार स्थित एक स्वर्ण कारोबारी की दुकान पर छह बदमाशों ने धावा बोलकर करीब पांच लाख रुपये की संपत्ति लूट ली थी। उस घटना के दौरान बमबारी और फायरिंग किए जाने की भी जानकारी सामने आई थी। बदमाशों को पकड़ने की कोशिश करने वाले दो युवक घायल हो गए थे।

    लगातार ऐसी घटनाओं से क्षेत्र के कारोबारियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है। ताजा वारदात में पुलिस जांच के बाद ही लूट से जुड़े सभी तथ्यों और आरोपियों के बारे में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। घटना से जुड़े आरोपों और लूटी गई संपत्ति के मूल्य की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

  • मधेपुरा में डबल मर्डर से सनसनी, 12 साल के सुमित की गला रेतकर हत्या; गुस्साए ग्रामीणों ने आरोपी को पीट-पीटकर मार डाला.

    मधेपुरा में डबल मर्डर से सनसनी, 12 साल के सुमित की गला रेतकर हत्या; गुस्साए ग्रामीणों ने आरोपी को पीट-पीटकर मार डाला.

    मधेपुरा में डबल मर्डर से सनसनी, 12 साल के सुमित की गला रेतकर हत्या; गुस्साए ग्रामीणों ने आरोपी को पीट-पीटकर मार डाला.

    मधेपुरा, बिहार: मधेपुरा जिले के घैलाढ़ प्रखंड के ईटहरी गांव में शनिवार सुबह एक 12 वर्षीय बच्चे की हत्या के बाद हिंसा भड़क उठी। आरोप है कि 45 वर्षीय अनिल यादव ने सुमित कुमार की गला रेतकर हत्या कर दी। घटना की खबर फैलते ही आक्रोशित ग्रामीणों ने आरोपी को तलाशकर पकड़ लिया और उसकी पिटाई कर दी। इस हमले में अनिल यादव की भी मौत हो गई। एक ही घटना में दो लोगों की मौत से इलाके में सनसनी फैल गई।

    घर के बच्चे की हत्या से गांव में मचा हड़कंप

    मृतक सुमित कुमार ईटहरी गांव के वार्ड नंबर दो के निवासी सुनील ठाकुर का बेटा था। उसकी उम्र महज 12 साल थी। मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह करीब 11 बजे बच्चे पर धारदार हथियार से हमला किया गया, जिससे उसकी मौत हो गई।

    घटना की जानकारी मिलते ही गांव में लोगों की भीड़ जुट गई। बच्चे की हत्या से नाराज ग्रामीणों ने कथित आरोपी अनिल यादव को खोजने के बाद उसे पकड़ लिया। इसके बाद लोगों ने उसकी जमकर पिटाई कर दी। गंभीर चोटों के कारण अनिल यादव की भी मौत हो गई।

    ग्रामीणों ने आरोपी को पकड़कर की पिटाई

    अनिल यादव बराही पंचायत के वार्ड नंबर आठ का रहने वाला था। वह स्वर्गीय राजकिशोर यादव का बेटा बताया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, वह मानसिक रूप से अस्वस्थ था। हालांकि, उसकी मानसिक स्थिति और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    बच्चे की हत्या के बाद ग्रामीणों की प्रतिक्रिया हिंसक हो गई और कानून अपने हाथ में लेने की इस घटना में कथित आरोपी की भी जान चली गई। मामले में पुलिस अब दोनों मौतों की परिस्थितियों की जांच कर रही है।

    पुलिस ने दोनों शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे

    मधेपुरा सदर थानाध्यक्ष विमलेंदु कुमार के अनुसार, पुलिस ने दोनों शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि बच्चे पर हमला किन परिस्थितियों में हुआ और उसके बाद आरोपी की पिटाई में कौन-कौन लोग शामिल थे।

    थानाध्यक्ष ने बताया कि कानून अपने हाथ में लेने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस के अनुसार, फिलहाल इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य है।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध जानकारी और पुलिस के शुरुआती बयान पर आधारित है। दोनों मौतों से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है। किसी भी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।

  • बांका में पिस्तौल के 60: हजार रुपये के बकाए को लेकर राकेश शर्मा की हत्या, 6 महीने से फरार आरोपी ने किया सरेंडर.

    बांका में पिस्तौल के 60: हजार रुपये के बकाए को लेकर राकेश शर्मा की हत्या, 6 महीने से फरार आरोपी ने किया सरेंडर.

    बांका में पिस्तौल के 60: हजार रुपये के बकाए को लेकर राकेश शर्मा की हत्या, 6 महीने से फरार आरोपी ने किया सरेंडर.

    अमरपुर, बांका, बिहार: बांका जिले के बल्लीकित्ता गांव के राकेश शर्मा की हत्या के मामले में करीब छह महीने से फरार चल रहे आरोपी नीतीश कुमार उर्फ बिट्टू ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया है। पुलिस के अनुसार, पिस्तौल खरीदने के बाद बकाया 60 हजार रुपये को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि इसी विवाद में राकेश की गला घोंटकर हत्या कर दी गई और शव को आम के बगीचे की झाड़ी में फेंक दिया गया।

    छह महीने से फरार था आरोपी

    पुलिस के मुताबिक, आरोपी नीतीश कुमार उर्फ बिट्टू मूल रूप से खगड़िया जिले के परबत्ता का रहने वाला है। राकेश शर्मा के अपहरण और हत्या के मामले में वह करीब छह महीने से फरार चल रहा था। उसकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही थी।

    पुलिस का कहना है कि दबाव बढ़ने के बाद आरोपी ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ पूरी होने पर उसे वापस न्यायालय भेज दिया गया।

    पिस्तौल के बकाए 60 हजार रुपये को लेकर हुआ विवाद

    पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि राकेश शर्मा ने उसके एक सहयोगी से देसी पिस्तौल खरीदी थी। इस सौदे के करीब 60 हजार रुपये बकाया थे। आरोप है कि रकम का भुगतान नहीं होने और इसे लेकर विवाद बढ़ने के बाद आरोपी 17 जनवरी 2026 को राकेश के बल्लीकित्ता स्थित घर पहुंचा था।

    वहां दोनों के बीच कहासुनी हुई। इसके बाद आरोपी कथित तौर पर राकेश को चारपहिया वाहन से लौंगाय ले गया। पुलिस के मुताबिक, वहां दोबारा विवाद हुआ और इसी दौरान राकेश की गला घोंटकर हत्या कर दी गई।

    आम के बगीचे की झाड़ी में फेंका शव

    पुलिस की जांच के अनुसार, हत्या के बाद राकेश का शव लौंगाय गांव के उत्तर में स्थित बहियार के एक आम के बगीचे की झाड़ी में फेंक दिया गया था। घटना के सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल की।

    पुलिस ने बताया कि इस मामले में घटना के अगले ही दिन एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया था। अब फरार आरोपी के आत्मसमर्पण और पूछताछ के बाद जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।

    पुलिस कर रही है पूछताछ में मिले तथ्यों की जांच

    थानाध्यक्ष राकेश कुमार के मुताबिक, आरोपी की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही थी। इसी बीच उसने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। रिमांड के दौरान पूछताछ में मिली जानकारियों की पुलिस जांच कर रही है।

    मामले में बकाया रकम के विवाद, हत्या की परिस्थितियों और अन्य संभावित संलिप्त लोगों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल जारी है। पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध पुलिस जानकारी और पूछताछ में सामने आए कथित बयान पर आधारित है। आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।

  • बांका में 6 दिन से लापता महिला का बांध में मिला सड़ा-गला शव, पति समेत 8 लोगों पर दहेज हत्या की FIR.

    बांका में 6 दिन से लापता महिला का बांध में मिला सड़ा-गला शव, पति समेत 8 लोगों पर दहेज हत्या की FIR.

    बांका में 6 दिन से लापता महिला का बांध में मिला सड़ा-गला शव, पति समेत 8 लोगों पर दहेज हत्या की FIR.

    बांका, बिहार: बांका जिले के बेलहर थाना क्षेत्र में छह दिनों से लापता 35 वर्षीय महिला उषा देवी का शव तरौना बांध में तैरता हुआ मिला। शव की हालत काफी खराब थी। महिला के मायके वालों ने उसके पति समेत आठ लोगों पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने और हत्या करने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिया के पास पानी में दिखाई दिया महिला का हाथ

    यह मामला तेलियाकुमरी पंचायत के हरदिया गांव का है। उषा देवी पिछले छह दिनों से लापता थीं। शुक्रवार को तरौना बांध में जरलाही गांव की ओर जाने वाली पुलिया के पास स्थानीय लोगों को पानी में एक महिला का हाथ दिखाई दिया। इसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी।

    मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पानी से बाहर निकाला। महिला के मायके वालों ने शव की पहचान उषा देवी के रूप में की। इसके बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए बांका सदर अस्पताल भेज दिया।

    पति समेत आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज

    उषा देवी के पिता नरेश यादव, जो फुल्लीडुमर थाना क्षेत्र के ललबामोड़ गांव के निवासी हैं, ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में महिला के पति प्रदीप यादव समेत आठ लोगों को नामजद किया गया है।

    आरोपियों में प्रवेश यादव, भोला यादव, अकलू यादव, सुलेखा देवी, कौशल्या देवी, वीना देवी और भवेश यादव के नाम भी शामिल हैं। पुलिस सभी नामजद आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। खबर लिखे जाने तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी।

    पिता ने लगाया दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप

    मृतका के पिता के मुताबिक, करीब 20 साल पहले उषा देवी की शादी प्रदीप यादव से हुई थी। उनका आरोप है कि शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग दहेज को लेकर उनकी बेटी को परेशान करते थे और उसके साथ मारपीट की जाती थी।

    परिवार का कहना है कि विवाद सुलझाने के लिए कई बार ग्रामीणों की मौजूदगी में पंचायत भी हुई थी। इसके बावजूद उषा देवी अपनी सुरक्षा को लेकर आशंकित रहती थीं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

    तीन अक्टूबर को मिली थी बेटी की तबीयत बिगड़ने की सूचना

    नरेश यादव ने पुलिस को बताया कि तीन अक्टूबर को उन्हें फोन पर सूचना मिली थी कि उनकी बेटी ने जहर खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की है। इसके बाद वह हरदिया गांव जाने के लिए निकले। इसी दौरान उनके दामाद ने फोन कर बताया कि उषा देवी को इलाज के लिए जमुई ले जाया जा रहा है।

    पिता के अनुसार, गांव पहुंचने पर उन्हें परिवार के कई सदस्य नहीं मिले। उनके दोनों नाती भी वहां मौजूद नहीं थे। इसके बाद से परिवार की चिंता बढ़ गई थी। अब बांध में शव मिलने के बाद मायके पक्ष ने हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की है।

    कई दिनों तक तलाश में जुटी रही पुलिस

    महिला की तलाश के लिए पुलिस टीम बांका-जमुई सीमा के आसपास नदी, नालों, जंगल और झाड़ियों में खोजबीन कर रही थी। तलाशी अभियान में स्वान दस्ते की भी मदद ली गई थी। पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर तकनीकी और वैज्ञानिक तरीके से भी मामले की जांच की जा रही है।

    थाना पुलिस के मुताबिक, नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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  • भागलपुर में शादी से इनकार करने पर छात्रा की गोली मारकर हत्या, आरोपी फरार; जबरन शादी का दबाव बनाने का आरोप.

    भागलपुर में शादी से इनकार करने पर छात्रा की गोली मारकर हत्या, आरोपी फरार; जबरन शादी का दबाव बनाने का आरोप.

    भागलपुर में शादी से इनकार करने पर छात्रा की गोली मारकर हत्या, आरोपी फरार; जबरन शादी का दबाव बनाने का आरोप.

    नवगछिया, बिहार: भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल में छात्रा की गोली मारकर हत्या किए जाने से इलाके में सनसनी फैल गई। रंगरा थाना क्षेत्र के सधुआ गांव की रहने वाली नेहा कुमारी की गुरुवार रात कटरिया रेलवे स्टेशन के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतका के परिजनों ने गांव के ही एक युवक पर जबरन शादी का दबाव बनाने और विरोध करने पर धमकी देने का आरोप लगाया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    शादी का दबाव बनाने का आरोप

    मृतका के भाई सोनू कुमार के बयान के मुताबिक, गांव का रहने वाला फौजी साह कथित तौर पर नेहा से शादी करना चाहता था। आरोप है कि वह उस पर शादी करने का दबाव बनाता था और इनकार करने पर धमकियां देता था।

    परिवार का कहना है कि इस विवाद को लेकर गांव में दो बार पंचायत भी हुई थी। इसके बावजूद मामला शांत नहीं हुआ। नेहा के परिजनों ने आरोप लगाया कि युवक शादी की जिद पर अड़ा हुआ था।

    पुलिस भर्ती की तैयारी कर रही थी नेहा

    परिजनों के अनुसार, नेहा ने नवगछिया के मदन अहिल्या कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद वह पुलिस भर्ती की तैयारी कर रही थी और पढ़ाई से जुड़े कामों के लिए नियमित रूप से आती-जाती थी।

    परिवार ने बताया कि नेहा की शादी के लिए भी बातचीत चल रही थी। कुछ दिन पहले खरीक क्षेत्र के एक युवक के साथ उसका रिश्ता तय हुआ था। उसके पिता शादी से जुड़ी आगे की रस्मों की तारीख तय करने के लिए लुधियाना गए हुए थे।

    कटरिया रेलवे स्टेशन के पास मारी गोली

    सोनू कुमार ने आरोप लगाया कि गुरुवार रात नेहा शौच के लिए कटरिया रेलवे स्टेशन के पास गई थी। लौटते समय रेलवे पटरी के किनारे उस पर गोली चलाई गई।

    भाई के मुताबिक, गोली की आवाज सुनकर वह स्टेशन की ओर पहुंचा तो उसने आरोपी को भागते हुए देखा। कुछ अन्य ग्रामीणों ने भी एक युवक को वहां से भागते देखने की बात कही। लोगों ने उसका पीछा करने की कोशिश की, लेकिन वह अंधेरे का फायदा उठाकर पश्चिम दिशा की ओर फरार हो गया।

    हत्या का मामला दर्ज, आरोपी की तलाश

    नेहा के भाई की शिकायत पर पुलिस ने फौजी साह के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस घटना की परिस्थितियों, परिजनों के आरोपों और आरोपी की भूमिका की जांच कर रही है। आरोपी की गिरफ्तारी और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    इस घटना से गांव में शोक का माहौल है। परिवार ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध जानकारी और परिजनों की शिकायत के आधार पर तैयार की गई है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में दोष तय करना जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।

  • वैशाली की चिकित्सा पदाधिकारी पर रिश्वत लेने का आरोप, पटना आवास पर छापेमारी में 15 लाख से ज्यादा नकदी और गहने बरामद.

    वैशाली की चिकित्सा पदाधिकारी पर रिश्वत लेने का आरोप, पटना आवास पर छापेमारी में 15 लाख से ज्यादा नकदी और गहने बरामद.

    वैशाली की चिकित्सा पदाधिकारी पर रिश्वत लेने का आरोप, पटना आवास पर छापेमारी में 15 लाख से ज्यादा नकदी और गहने बरामद.

    वैशाली, बिहार: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के दौरान निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने वैशाली जिले के बेलसर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. कामिनी प्रसाद और उनके कंप्यूटर ऑपरेटर हिमांशु कुमार को रिश्वत लेने के आरोप में पकड़ा है। इसके बाद निगरानी टीम ने पटना स्थित डॉक्टर के आवास पर तलाशी शुरू की। अब तक की कार्रवाई में 15 लाख रुपये से अधिक नकदी, सोने-चांदी के आभूषण और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई है। बैंक खातों में करीब एक करोड़ रुपये जमा होने का ब्योरा भी जांच में सामने आया है।

    रिश्वत के आरोप में हुई कार्रवाई

    निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के मुताबिक, डॉ. कामिनी प्रसाद के खिलाफ 8 अक्टूबर 2026 को निगरानी थाना कांड संख्या 119/26 दर्ज किया गया था। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ब्यूरो को शिकायत मिली थी कि चिकित्सा पदाधिकारी कथित तौर पर काम करने के बदले रिश्वत की मांग करती थीं। इसी मामले में कार्रवाई करते हुए डॉक्टर और उनके कंप्यूटर ऑपरेटर को पकड़ा गया।

    पटना स्थित आवास पर तलाशी

    कार्रवाई के बाद निगरानी टीम ने डॉ. कामिनी प्रसाद के पटना स्थित आवास पर तलाशी शुरू की। जांच के दौरान अब तक 15 लाख रुपये से अधिक नकदी मिलने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा सोने-चांदी के जेवरात भी बरामद किए गए हैं।

    टीम को फ्लैट और बीमा से संबंधित दस्तावेज भी मिले हैं। इन कागजात की जांच की जा रही है, ताकि संपत्ति और वित्तीय लेन-देन से जुड़ी जानकारी स्पष्ट हो सके।

    बैंक खातों में करीब एक करोड़ रुपये जमा

    निगरानी ब्यूरो की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, जांच के दौरान बैंक खातों में कुल 99,61,623 रुपये जमा होने का ब्योरा सामने आया है। टीम नकदी, आभूषणों और दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है।

    हालांकि, बैंक खातों में जमा रकम या संपत्ति के दस्तावेज मिलना अपने आप में अवैध कमाई का अंतिम प्रमाण नहीं है। जांच के दौरान इन संपत्तियों के स्रोत और संबंधित आय का हिसाब भी देखा जाना है।

    तलाशी जारी, जांच के बाद सामने आएगा पूरा ब्योरा

    निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार, पटना स्थित आवास पर तलाशी की कार्रवाई जारी है। तलाशी पूरी होने के बाद बरामद नकदी, आभूषणों और दस्तावेजों का विस्तृत विवरण सामने आ सकता है।

    फिलहाल, मामला जांच के अधीन है। रिश्वत लेने के आरोपों और संपत्ति से जुड़े तथ्यों पर अंतिम निष्कर्ष जांच तथा कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अदालत में साबित होना बाकी है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर तय होगा।

  • मुंगेर में CISF जवान के बंद घर को चोरों ने बनाया निशाना, मां पटना एम्स में करा रही थीं इलाज; लाखों के गहने और नकदी गायब.

    मुंगेर में CISF जवान के बंद घर को चोरों ने बनाया निशाना, मां पटना एम्स में करा रही थीं इलाज; लाखों के गहने और नकदी गायब.

    मुंगेर में CISF जवान के बंद घर को चोरों ने बनाया निशाना, मां पटना एम्स में करा रही थीं इलाज; लाखों के गहने और नकदी गायब.

    मुंगेर, बिहार: जमालपुर में चोरी की एक घटना सामने आई है, जहां चोरों ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के एक जवान के बंद घर को निशाना बनाया। जवान की मां इलाज कराने के लिए पटना एम्स गई हुई थीं। इसी दौरान चोरों ने घर का ताला तोड़कर सोने-चांदी के आभूषण, लैपटॉप, नकदी और अन्य कीमती सामान चोरी कर लिया। चोरी गई संपत्ति की कुल कीमत करीब दो लाख रुपये बताई जा रही है।

    घर बंद देखकर चोरों ने तोड़ा ताला

    यह घटना जमालपुर थाना क्षेत्र के छोटी केशोपुर नालापार इलाके में दलपूज्जी काली मंदिर के पास, टोरिल मंडल स्कूल के समीप हुई। छत्तीसगढ़ में तैनात CISF जवान राजीव कुमार के घर में उस समय कोई मौजूद नहीं था। उनकी मां मंजू देवी इलाज के लिए पटना एम्स गई हुई थीं।

    इसी दौरान चोरों ने घर के मुख्य दरवाजे का ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने बक्से और अलमारी के ताले तोड़ दिए और उनमें रखे कीमती सामान को समेटकर फरार हो गए।

    सोने-चांदी के गहने, लैपटॉप और नकदी चोरी

    घर से सोने-चांदी के आभूषण, एक लैपटॉप, 15 हजार रुपये नकद और अन्य कीमती सामान चोरी होने की जानकारी सामने आई है। चोरी गई संपत्ति का अनुमानित मूल्य करीब दो लाख रुपये बताया गया है।

    इलाज कराने के बाद जब मंजू देवी घर लौटीं, तो दरवाजे के ताले टूटे हुए मिले। अंदर जाने पर सामान बिखरा पड़ा था। घर की हालत देखकर उन्हें चोरी का पता चला। इसके बाद उन्होंने आसपास के लोगों को घटना की जानकारी दी।

    पुलिस को दी गई सूचना, जांच की तैयारी

    घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय लोग और सामाजिक कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे। इसके बाद जमालपुर थाना पुलिस को सूचना दी गई।

    थानाध्यक्ष पंकज कुमार पासवान के अनुसार, पुलिस को चोरी की घटना की सूचना मिली है। उनके मुताबिक, पीड़ित पक्ष की ओर से आवेदन मिलने के बाद मामले की जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    इलाके में चोरी की घटनाओं से चिंता

    स्थानीय क्षेत्र में चोरी की इस घटना के बाद लोगों में चिंता है। बताया गया है कि इलाके में इससे पहले भी आपराधिक घटनाएं सामने आई हैं। अब पुलिस के सामने चोरी की घटना की जांच कर सामान और आरोपियों का पता लगाने की चुनौती है।

    फिलहाल, चोरी के मामले में आगे की कार्रवाई पीड़ित पक्ष के आवेदन और जांच के आधार पर की जाएगी।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। चोरी की घटना और संपत्ति के नुकसान से जुड़े विवरणों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

  • मुजफ्फरपुर जमीन घोटाले में बड़ी कार्रवाई, निलंबित CO और राजस्व अधिकारी गिरफ्तार; विधायक अमित कुमार रानू का भी नाम.

    मुजफ्फरपुर जमीन घोटाले में बड़ी कार्रवाई, निलंबित CO और राजस्व अधिकारी गिरफ्तार; विधायक अमित कुमार रानू का भी नाम.

    मुजफ्फरपुर जमीन घोटाले में बड़ी कार्रवाई, निलंबित CO और राजस्व अधिकारी गिरफ्तार; विधायक अमित कुमार रानू का भी नाम.

    मुजफ्फरपुर, बिहार: मुशहरी अंचल से जुड़े कथित जमीन फर्जीवाड़े के मामले में पुलिस ने दो राजस्व अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अधिकारियों की पहचान निलंबित अंचलाधिकारी (CO) महेंद्र कुमार शुक्ला और राजस्व अधिकारी करुण करण के रूप में हुई है। दोनों को मेडिकल जांच के बाद न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। मामला एक सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी की 70 डिसमिल पुश्तैनी जमीन से जुड़े कथित फर्जी दस्तावेजों और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों से संबंधित है। इस मामले में बेलसंड के विधायक अमित कुमार रानू समेत आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

    70 डिसमिल पुश्तैनी जमीन को लेकर शुरू हुआ विवाद

    यह मामला मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाना क्षेत्र के शहबाजपुर निवासी विजय कुमार की पुश्तैनी जमीन से जुड़ा है। विजय कुमार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार में अवर सचिव के पद से सेवानिवृत्त बताए गए हैं। उनकी शिकायत के मुताबिक, परिवार की 70 डिसमिल जमीन को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दूसरे लोगों के नाम दर्ज कराने की कोशिश की गई।

    शिकायत में जमीन का संबंध उनके पिता जितेंद्र प्रसाद शाही और दादा योगेंद्र प्रसाद शाही से बताया गया है। जमीन का विवरण खाता संख्या 53 और खेसरा संख्या 403 के रूप में दिया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुराने दस्तावेजों का कथित दुरुपयोग कर राजस्व रिकॉर्ड में नाम बदलवाने और दाखिल-खारिज कराने की प्रक्रिया अपनाई गई।

    अब जांच में जमीन के स्वामित्व से जुड़े पुराने अभिलेखों, निबंधन कार्यालय के रिकॉर्ड और अंचल कार्यालय में उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान महत्वपूर्ण होगा।

    वर्ष 1986 के दस्तावेज पर उठे सवाल

    शिकायतकर्ता ने जमीन पर दूसरे पक्ष के स्वामित्व के दावे को लेकर वर्ष 1986 के एक कथित निबंधन दस्तावेज पर सवाल उठाए हैं। शिकायत के अनुसार, हाजीपुर के सेलमपुर कुचुनदास कोर्ट निवासी कृष्णनंदन पासवान ने जमीन का खरीदार होने का दावा किया था। इसके समर्थन में निबंधन कार्यालय के दस्तावेज संख्या 10612 और 6 जून 1986 की तारीख का उल्लेख किया गया।

    विजय कुमार का आरोप है कि संबंधित दस्तावेज संख्या की जांच करने पर वह किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्ज मिली। इसी आधार पर जमीन से जुड़े दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े किए गए।

    हालांकि, दस्तावेजों को लेकर शिकायत में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही होगी। इसके लिए मूल निबंधन रिकॉर्ड, प्रमाणित प्रतियों और राजस्व अभिलेखों का सत्यापन जरूरी है।

    दाखिल-खारिज में कथित गड़बड़ी का आरोप

    शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विवादित जमीन का दाखिल-खारिज कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कराया गया। इसके बाद जमीन को अभिनव कुमार, अरविंद कुमार मेहता और तुषार सिंह के नाम दर्ज कराने तथा दोबारा दाखिल-खारिज की प्रक्रिया अपनाए जाने का भी उल्लेख है।

    दाखिल-खारिज की प्रक्रिया के तहत जमीन से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज किया जाता है। इस दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों और पुराने अभिलेखों का सत्यापन महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में जांच का अहम बिंदु यह है कि विवादित जमीन के लिए कौन-से दस्तावेज पेश किए गए, उनकी जांच किस स्तर पर हुई और रिकॉर्ड में बदलाव किस आधार पर दर्ज किया गया।

    यदि दस्तावेजों में अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित प्रक्रिया में शामिल लोगों की भूमिका और जिम्मेदारी भी जांच के दायरे में आएगी।

    विधायक अमित कुमार रानू समेत आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी

    इस मामले में बेलसंड के विधायक अमित कुमार रानू, उनके भाई अभिनव कुमार, तत्कालीन अंचलाधिकारी महेंद्र कुमार शुक्ला, राजस्व अधिकारी करुण करण और अंचल कार्यालय से जुड़े कर्मचारियों समेत कुल आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने की बात सामने आई है।

    शिकायतकर्ता ने जमीन के दस्तावेजों और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में कथित मिलीभगत का आरोप लगाया है। दो अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद मामले में प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर भी ध्यान केंद्रित हुआ है।

    हालांकि, प्राथमिकी में किसी व्यक्ति का नाम होना अपने आप में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। प्रत्येक आरोपित की भूमिका का निर्धारण जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों और न्यायालय की प्रक्रिया के आधार पर होगा।

    CO के खिलाफ पहले भी हुई थी कार्रवाई

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निलंबित अंचलाधिकारी महेंद्र कुमार शुक्ला के खिलाफ दाखिल-खारिज से जुड़े एक अन्य मामले में भी आरोप सामने आए थे। उस मामले में मालती देवी नाम की मृत महिला के नाम से दर्ज आपत्ति को स्वीकार करने और आवेदन को लगभग 140 दिनों तक लंबित रखने का आरोप लगाया गया था।

    बताया गया है कि जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने उन्हें निलंबित कर दिया था। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय सारण प्रमंडल के आयुक्त कार्यालय में निर्धारित किया गया था।

    यह अलग मामला बताया गया है। मौजूदा जमीन विवाद में गिरफ्तारी के बाद राजस्व रिकॉर्ड के सत्यापन और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में अधिकारियों की जिम्मेदारी को लेकर सवाल फिर चर्चा में हैं।

    ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड और LPC की भी हो सकती है जांच

    मामले में कथित फर्जी केवाला, दाखिल-खारिज, ऑनलाइन परिमार्जन प्लस और भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र (LPC) से संबंधित अनियमितताओं के आरोप भी लगाए गए हैं।

    जांच के दौरान यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विवादित जमीन के ऑनलाइन रिकॉर्ड में कब और किस आधार पर बदलाव किए गए। इसके साथ ही यह भी जांचा जा सकता है कि आवेदन किसने दिया, कौन-से दस्तावेज लगाए गए और संबंधित अधिकारियों ने निर्णय लेते समय किन अभिलेखों

  • पूर्णिया: डायन होने के शक में एक ही परिवार के 5 लोगों को जिंदा जलाया, नवविवाहित जोड़े की भी हुई हत्या; अंधविश्वास ने उजाड़ दिया पूरा घर.

    पूर्णिया: डायन होने के शक में एक ही परिवार के 5 लोगों को जिंदा जलाया, नवविवाहित जोड़े की भी हुई हत्या; अंधविश्वास ने उजाड़ दिया पूरा घर.

    पूर्णिया: डायन होने के शक में एक ही परिवार के 5 लोगों को जिंदा जलाया, नवविवाहित जोड़े की भी हुई हत्या; अंधविश्वास ने उजाड़ दिया पूरा घर.

    पूर्णिया, बिहार: अंधविश्वास और जादू-टोने के शक ने बिहार के पूर्णिया जिले के टेटगामा गांव में एक परिवार को ऐसा दर्द दिया, जिसे भुला पाना आसान नहीं है। 6 जुलाई 2025 को कथित तौर पर डायन होने के संदेह में एक ही परिवार के पांच लोगों की हत्या कर दी गई। मृतकों में तीन महिलाएं और एक नवविवाहित जोड़ा भी शामिल था। इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर कब तक अंधविश्वास के नाम पर निर्दोष लोगों की जान ली जाती रहेगी?

    एक झटके में उजड़ गया पूरा परिवार

    टेटगामा गांव पूर्णिया शहर से लगभग 13 किलोमीटर दूर रानीपतरा इलाके में स्थित है। यह गांव प्रशासनिक रूप से पूर्णिया पूर्व प्रखंड की रजीगंज पंचायत के अंतर्गत आता है। घटना के बाद गांव में डर और मातम का माहौल था।

    रिपोर्ट के मुताबिक, मृतकों में बाबू लाल उरांव, सीता देवी, मंजीत उरांव, रानी देवी और काकतो मसोमास शामिल थे। पांचों के शव बिसारिया बहियार से बरामद किए गए थे। परिवार के लोगों के लिए यह घटना किसी भयावह सपने से कम नहीं थी।

    बाबू लाल उरांव के घर तक जाने वाली सड़क का कुछ हिस्सा कच्चा था। घर की हालत और आसपास के माहौल के बीच यह दर्दनाक घटना गांव में व्याप्त सामाजिक समस्याओं की ओर भी ध्यान खींचती है।

    बच्चे की मौत के बाद परिवार पर लगा आरोप

    रिपोर्ट में बताया गया कि पड़ोस में रहने वाले एक परिवार के बच्चे की मौत हो गई थी। इसके बाद कथित तौर पर बाबू लाल उरांव के परिवार पर जादू-टोना करने का आरोप लगाया गया। इसी संदेह ने हिंसक रूप ले लिया।

    परिजनों के अनुसार, बाबू लाल के परिवार पर पहले भी इस तरह के आरोप लगाए जाते रहे थे। उनके भाई ने बताया कि करीब दस साल पहले उनकी मां पर भी डायन होने का आरोप लगा था। उस समय गांव के कुछ लोग उन्हें एक ओझा के पास ले गए थे, जहां कथित तौर पर आरोप को खारिज कर दिया गया था।

    इसके बावजूद परिवार को लेकर संदेह और अंधविश्वास खत्म नहीं हुआ। आखिरकार, इसी तरह के आरोपों के बीच पांच लोगों की जान चली गई।

    हथियारों से लैस भीड़ का दावा

    मृतकों के परिजनों ने घटना को याद करते हुए बताया कि उस दिन बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए थे। परिवार के एक सदस्य के मुताबिक, भीड़ में करीब 150 लोग थे और कुछ लोगों के पास लाठी-डंडे, तलवार, सरिया तथा अन्य हथियार थे।

    परिजनों का कहना था कि उन्होंने अपने लोगों को बचाने की कोशिश की, लेकिन जान से मारने की धमकियों के कारण वे बेबस हो गए। परिवार के एक करीबी ने पांच लोगों की मौत पर दुख जताते हुए कहा कि एक ही खानदान के इतने लोगों को खोने से उनका घर सूना हो गया।

    इन बयानों के आधार पर पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू की थी। घटना से जुड़े आरोपों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका का निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के जरिए किया जाना है।

    प्रशासन ने क्या बताया था?

    घटना के बाद पूर्णिया के तत्कालीन जिलाधिकारी अंशुल कुमार के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि शव बरामद कर पोस्टमार्टम कराया गया था और अंतिम संस्कार भी हो चुका था।

    रिपोर्ट के अनुसार, मामले में 23 नामजद लोगों और 150 से 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मुख्य आरोपी सहित तीन लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी भी दी गई थी, जिनमें एक नाबालिग शामिल था।

    ये जानकारियां घटना के समय की रिपोर्ट पर आधारित हैं। मामले में बाद की कानूनी कार्रवाई या वर्तमान स्थिति की पुष्टि अलग से किए जाने की जरूरत है।

    बिहार में डायन के नाम पर हिंसा का पुराना सवाल

    बिहार में डायन होने के संदेह में महिलाओं को प्रताड़ित करने और हिंसा की घटनाएं लंबे समय से चिंता का विषय रही हैं। ऐसी घटनाओं के पीछे अंधविश्वास, अशिक्षा, सामाजिक दबाव और पुरानी दुश्मनी जैसे कई कारण हो सकते हैं।

    डायन होने का आरोप किसी व्यक्ति के खिलाफ हिंसा करने का कोई आधार नहीं है। किसी बच्चे या अन्य व्यक्ति की बीमारी अथवा मृत्यु का कारण बिना वैज्ञानिक और चिकित्सकीय जांच के किसी महिला या परिवार पर थोपना गंभीर अन्याय है।

    बिहार में वर्ष 1999 में डायन प्रथा से जुड़ी प्रताड़ना और पहचान के खिलाफ कानून बनाया गया था। इसका उद्देश्य किसी महिला को डायन बताकर अपमानित करने, धमकाने या नुकसान पहुंचाने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाना था। हालांकि, कानून के मौजूद होने के बावजूद ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई, जागरूकता और पीड़ितों की सुरक्षा बेहद जरूरी है।

    अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता क्यों जरूरी है?

    टेटगामा की घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़ा गंभीर सवाल भी है। जब किसी बीमारी या मौत का कारण जादू-टोना मान लिया जाता है, तो बिना प्रमाण के किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने का खतरा बढ़ जाता है।

    ऐसे मामलों में पुलिस जांच, चिकित्सकीय जानकारी और कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा करना जरूरी है। गांवों में जागरूकता अभियान, शिक्षा, स्थानीय प्रशासन की सक्रियता और पीड़ित परिवारों को सुरक्षा देना भी महत्वपूर्ण है।

    किसी भी व्यक्ति को डायन बताकर मारना या प्रताड़ित करना अपराध है। किसी पर आरोप होने से वह दोषी साबित नहीं हो जाता। दोष का फैसला सबूतों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होना चाहिए।

    डिस्क्लेमर: यह लेख घटना के समय प्रकाशित रिपोर्ट और उसमें दर्ज बयानों पर आधारित है। आरोपों, गिरफ्तारियों और मामले की आगे की स्थिति को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

  • बिहार: राजगीर की इस “गुफा में छिपा है राजा का सोना? अंग्रेजों ने तोप से तोड़ने की कोशिश की, फिर भी नहीं खुली रहस्यमयी दीवार.

    बिहार: राजगीर की इस “गुफा में छिपा है राजा का सोना? अंग्रेजों ने तोप से तोड़ने की कोशिश की, फिर भी नहीं खुली रहस्यमयी दीवार.

    बिहार: राजगीर की इस “गुफा में छिपा है राजा का सोना? अंग्रेजों ने तोप से तोड़ने की कोशिश की, फिर भी नहीं खुली रहस्यमयी दीवार.

    बिहार के राजगीर में मौजूद सोन भंडार गुफाएं सदियों से अपने भीतर छिपे खजाने की कहानी को लेकर चर्चा में हैं। कहा जाता है कि इन गुफाओं की एक पत्थर की दीवार के पीछे प्राचीन राजा का सोना छिपा हुआ है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, अंग्रेजों ने भी इस दीवार को तोड़कर खजाना निकालने की कोशिश की थी। दावा है कि तोप से हमला करने के बावजूद दीवार नहीं टूटी और उस पर निशान रह गया। लेकिन इन कहानियों के पीछे का ऐतिहासिक सच क्या है?

    सोन भंडार गुफाओं का रहस्य क्या है?

    बिहार के राजगीर में वैभार पहाड़ियों के पास चट्टानों को काटकर बनाई गई दो प्राचीन गुफाएं मौजूद हैं। इन्हें सोन भंडार गुफाओं के नाम से जाना जाता है। इनका नाम सुनते ही लोगों के मन में छिपे हुए सोने और किसी गुप्त खजाने की तस्वीर उभर आती है।

    इनमें से बड़ी गुफा का आकार आयताकार है। इसकी छत ऊपर की ओर नुकीली दिखाई देती है और प्रवेश द्वार भी खास बनावट वाला है। गुफा के भीतर की चट्टानों को बेहद चिकना बनाया गया है। सबसे ज्यादा ध्यान खींचती है इसकी पिछली दीवार, जिसे लेकर दावा किया जाता है कि इसके पीछे किसी खजाने तक पहुंचने का रास्ता मौजूद है।

    हालांकि, अब तक इस दीवार के पीछे किसी खजाने या गुप्त तहखाने के होने की पुष्टि नहीं हुई है।

    राजा बिंबिसार और छिपे हुए खजाने की कहानी

    सोन भंडार गुफाओं से जुड़ी सबसे लोकप्रिय कहानी मगध के प्राचीन राजा बिंबिसार की है। बिंबिसार का नाम भगवान बुद्ध और भगवान महावीर के समकालीन शासकों में लिया जाता है।

    स्थानीय किंवदंती के अनुसार, जीवन के अंतिम दौर में राजा बिंबिसार सांसारिक मोह-माया से दूर होकर अपनी संपत्ति दान करना चाहते थे। लेकिन उनके बेटे अजातशत्रु की महत्वाकांक्षाएं अलग थीं। कहानी में बताया जाता है कि अजातशत्रु ने सत्ता अपने हाथ में ले ली और अपने पिता को कैद कर लिया।

    कहा जाता है कि राजा की संपत्ति को अपने कब्जे में जाने से बचाने के लिए उनकी रानी ने सोने और दूसरे कीमती सामान को पहाड़ियों में बनी एक गुफा के भीतर छिपा दिया। इसके बाद उस स्थान को पत्थर से बंद कर दिया गया।

    इसी कहानी के कारण इन गुफाओं को सोन भंडार यानी सोने का भंडार कहा जाने लगा। हालांकि, खजाने को छिपाने वाली इस घटना का ठोस ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

    दीवार पर लिखे रहस्यमयी अक्षरों का क्या है राज?

    गुफा की दीवार पर एक प्राचीन और सजावटी लिपि में लिखे अक्षर भी दिखाई देते हैं। इनके घुमावदार आकार के कारण इन्हें शंखलिपि कहा जाता है। इस लिपि के बारे में स्थानीय मान्यता है कि इसमें खजाने तक पहुंचने का रहस्य छिपा है।

    कहानी के अनुसार, जो व्यक्ति इन अक्षरों का सही अर्थ समझ लेगा, वह गुप्त दरवाजे को खोलने का तरीका जान सकता है। हालांकि, इस दावे की पुष्टि करने वाला कोई प्रमाण नहीं है।

    गुफा में एक दूसरा शिलालेख भी है, जिसे पढ़ा जा सकता है। यह गुप्तकालीन लिपि में है और इसमें वैरदेव नाम के एक जैन मुनि का उल्लेख मिलता है। इस अभिलेख के आधार पर माना जाता है कि गुफाओं का निर्माण जैन साधुओं के रहने और ध्यान करने के उद्देश्य से कराया गया था।

    इन गुफाओं को आम तौर पर तीसरी या चौथी शताब्दी ईस्वी का माना जाता है, हालांकि कुछ विद्वान इनके निर्माण को इससे भी पुराने समय से जोड़ते हैं।

    क्या अंग्रेजों ने तोप से तोड़ने की कोशिश की थी?

    सोन भंडार गुफाओं से जुड़ी एक और चर्चित कहानी अंग्रेजों के समय की है। स्थानीय लोगों और गाइडों के अनुसार, अंग्रेज अधिकारी भी इस कथित खजाने का रहस्य जानना चाहते थे।

    कहानी कहती है कि दीवार के पीछे खजाना होने की बात पर विश्वास करके अंग्रेज सैनिक एक तोप लेकर आए और उन्होंने गुफा की पिछली दीवार पर हमला किया। लेकिन चट्टान नहीं टूटी और खजाना भी बाहर नहीं आया।

    आज भी दीवार पर मौजूद एक निशान को इसी कथित हमले से जोड़कर दिखाया जाता है। हालांकि, इस घटना की पुष्टि करने वाला कोई ठोस समकालीन दस्तावेज सामने नहीं है। इसलिए तोप से हमला करने की कहानी को प्रमाणित ऐतिहासिक घटना के बजाय स्थानीय परंपरा के रूप में देखना उचित है।

    खजाने के बजाय गुफाओं का ऐतिहासिक महत्व

    सोन भंडार गुफाओं की अहमियत केवल खजाने की कहानी तक सीमित नहीं है। इनकी चट्टानों पर की गई नक्काशी, चिकनी सतह और प्राचीन शिलालेख उस समय की स्थापत्य कला और धार्मिक परंपराओं की जानकारी देते हैं।

    गुफाओं के बाहरी हिस्से में जैन तीर्थंकरों की आकृतियां भी उकेरी गई हैं। ये आकृतियां इस स्थान के जैन धर्म से जुड़े महत्व को दर्शाती हैं। राजगीर का क्षेत्र बौद्ध और जैन दोनों परंपराओं के लिए ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है।

    भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने यहां किसी छिपे हुए सोने के खजाने की पुष्टि नहीं की है। अब तक न तो कोई प्रमाणित खजाना मिला है और न ही दीवार के पीछे किसी गुप्त तहखाने का प्रमाण सामने आया है।

    आखिर दीवार के पीछे क्या है?

    उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारी के आधार पर सबसे संभावित व्याख्या यही है कि सोन भंडार गुफाएं जैन साधुओं के निवास और ध्यान के लिए बनाई गई थीं। इनके शिलालेख भी इसी धार्मिक उद्देश्य की ओर संकेत करते हैं।

    राजा बिंबिसार, उनकी रानी और छिपे हुए सोने की कहानी ने इन गुफाओं को रहस्य का रूप दे दिया। दीवार पर मौजूद निशान और प्राचीन लिपि ने इस जिज्ञासा को और बढ़ाया है। लेकिन किसी कहानी का सदियों तक प्रचलित रहना इस बात का प्रमाण नहीं है कि उसके सभी दावे सच हैं।

    आज भी लोग इस दीवार को देखने और इसके रहस्य के बारे में जानने के लिए राजगीर पहुंचते हैं। खजाना मिले या न मिले, सोन भंडार गुफाएं प्राचीन भारत की कला, धर्म और इतिहास की एक महत्वपूर्ण धरोहर हैं।

    डिस्क्लेमर: इस लेख में खजाने, राजा बिंबिसार और अंग्रेजों द्वारा तोप से हमला करने से जुड़ी बातें स्थानीय किंवदंतियों और प्रचलित विवरणों पर आधारित हैं। छिपे हुए सोने या दीवार के पीछे गुप्त खजाने की मौजूदगी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।