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  • बाल झड़ने से लेकर कमजोर पाचन तक, भृंगराज दे सकता है कई समस्याओं में राहत.

    बाल झड़ने से लेकर कमजोर पाचन तक, भृंगराज दे सकता है कई समस्याओं में राहत.

    बाल झड़ने से लेकर कमजोर पाचन तक, भृंगराज दे सकता है कई समस्याओं में राहत.

    भृंगराज का नाम आते ही सबसे पहले बालों की देखभाल का ख्याल आता है। आयुर्वेद में इसे बालों को मजबूत और स्वस्थ बनाए रखने वाली महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियों में गिना जाता है। हालांकि, इसके गुण केवल बालों तक ही सीमित नहीं हैं। आयुर्वेद विशेषज्ञ के अनुसार, भृंगराज का सही तरीके से उपयोग करने पर यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने और गैस, अपच जैसी सामान्य समस्याओं में भी सहायक हो सकता है।

    भृंगराज में पाए जाते हैं औषधीय गुण

    आयुर्वेद के अनुसार भृंगराज में कई ऐसे प्राकृतिक तत्व मौजूद होते हैं, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट और सूजन कम करने वाले गुण पाए जाते हैं। ये गुण शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। इसी कारण सदियों से आयुर्वेदिक उपचारों में भृंगराज का उपयोग किया जाता रहा है।

    बालों के लिए क्यों माना जाता है फायदेमंद?

    भृंगराज को बालों की देखभाल के लिए सबसे प्रभावी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों में से एक माना जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि इसका तेल नियमित रूप से लगाने से बालों की जड़ों को पोषण मिल सकता है और स्कैल्प स्वस्थ बनी रहती है।

    जानें इसके फायदे

    बालों का झड़ना कम करने में मदद मिल सकती है।
    समय से पहले सफेद होने वाले बालों की समस्या में सहायक माना जाता है।
    रूखे और बेजान बालों को पोषण देकर उन्हें मुलायम और चमकदार बनाने में मदद कर सकता है।
    स्कैल्प को स्वस्थ रखने में सहायक हो सकता है।

    पाचन तंत्र के लिए भी हो सकता है लाभकारी

    आयुर्वेद में भृंगराज को पाचन तंत्र के लिए भी उपयोगी माना गया है। विशेषज्ञ के अनुसार, इसका सीमित और उचित मात्रा में सेवन गैस, अपच और कब्ज जैसी सामान्य समस्याओं में राहत देने में सहायक हो सकता है। साथ ही यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाने और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने की प्राकृतिक प्रक्रिया को समर्थन दे सकता है। हालांकि, यदि आपको लंबे समय से पेट की समस्या है या कोई गंभीर बीमारी है, तो केवल भृंगराज के भरोसे इलाज करने के बजाय डॉक्टर से जांच और सलाह जरूर लें।

    भृंगराज का उपयोग किन-किन रूपों में किया जाता है?

    भृंगराज का इस्तेमाल कई तरीकों से किया जाता है, जैसे
    भृंगराज तेल: बालों और स्कैल्प की देखभाल के लिए।
    भृंगराज चूर्ण: आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार सेवन किया जाता है।
    भृंगराज रस: स्वास्थ्य संबंधी लाभ के लिए सीमित मात्रा में उपयोग किया जाता है।
    भृंगराज काढ़ा: कुछ आयुर्वेदिक उपचारों में प्रयोग किया जाता है।
    किसी भी रूप में इसका सेवन या उपयोग विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।

    इस्तेमाल करते समय रखें ये सावधानियां

    विशेषज्ञ के अनुसार, कुछ लोगों को भृंगराज का उपयोग करने से पहले विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
    गर्भवती महिलाएं बिना डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन न करें।
    स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी पहले विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
    किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति इसका सेवन डॉक्टर की निगरानी में ही करें।
    यदि भृंगराज के उपयोग के बाद एलर्जी, त्वचा पर खुजली, पेट दर्द या कोई अन्य परेशानी महसूस हो, तो तुरंत इसका इस्तेमाल बंद कर डॉक्टर से संपर्क करें।
    निर्धारित मात्रा से अधिक सेवन करने से बचें।

    भृंगराज आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण औषधीय जड़ी-बूटी मानी जाती है। यह बालों की देखभाल के साथ-साथ पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में भी सहायक हो सकती है। हालांकि, इसे किसी बीमारी का निश्चित इलाज नहीं माना जाना चाहिए। बेहतर परिणाम और सुरक्षा के लिए इसका उपयोग हमेशा योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करें।

  • बाथरूम में आईना लगाने को लेकर क्या कहता है वास्तु? जानिए शुभ-अशुभ मान्यताएं..

    बाथरूम में आईना लगाने को लेकर क्या कहता है वास्तु? जानिए शुभ-अशुभ मान्यताएं..

    बाथरूम में आईना लगाने को लेकर क्या कहता है वास्तु? जानिए शुभ-अशुभ मान्यताएं..

    Bathroom Mirror Vastu: वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का बाथरूम घर का एक ऐसा भाग होता है जहां पर सबसे ज्यादा नकारात्मक उर्जा का वास होता है. ये एक ऐसी जगह होती है जिसकी साफ-सफाई से लेकर अन्य लापरवाहियां बरती गईं तो तुरंत पूरे घर में नकारात्मक ऊर्जा फैल सकती है. ऐसे में जरूरी है कि बाथरूम को साफ रखा जाए और उससे जुड़े वास्तु नियमों का पालन किया जाए. जब बात बाथरूम से जुड़े वास्तु नियमों की आती है तो एक सवाल जरूर मन में आता है कि क्या घर के बाथरूम में आईना यानी शीशा लगाएं या नहीं.

    आजकल के घरों में जो बाथरूम बनाए जा रहे हैं उसमें विशेष रूप से शीशा या आईना लगवाया जा रहा है. मन में सवाल उठता है कि वास्तु अनुसार ऐसा करवाना शुभ या अशुभ है? आइए इस बारे में जानें और इससे जुड़े एक-एक वास्तु नियमों के बारे में भी जानें.

    बाथरूम में शीशा लगवाना सही या गलत

    वास्तु अनुसार, बाथरूम में शीशा लगवाना सही माना गया है. हालांकि अगर आप बाथरूम में शीशा लगवा रहे हैं तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि इसे हमेशा साफ रखते हों और इसकी दिशा वास्तु के अनुसार सही हो. बाथरूम में शीशा लगाते समय किन वास्तु नियमों पर ध्यान देना सबसे ज्यादा जरूरी है, आइए इसे भी जान लें.

    बाथरूम में शीशा लगवाने की सही दिशा

    वास्तु शास्त्र अनुसार बाथरूम में शीशे को हमेशा सही दिशा में ही लगाएं. बथरूम में कभी भी उत्तर या पूर्व दिशा में शीशा कभी न लगाएं. ध्यान रहे कि  शीशे के कभी भी बाथरूम के प्रवेश द्वार के पास न लगाएं. ऐसे करने से पूरे घर में बाथरूम से नकारात्मक ऊर्जा फैल सकती है.

    बाथरूम में किस तरह का शीशा लगाएं

    बाथरूम में आयताकार या चौकोर शीशा लगवाना शुभ माना गया है. गोल या अंडाकार शीशा लगाने से बाथरूम में वास्तु दोष लग सकता है. आयताकार शीशा बाथरूम में सकारात्मकता बनाए रखता है.

    इन बातों का रखें ध्यान

    बाथरूम में लगा शीशा समय-समय पर साफ करते रहें. ध्यान रखें कि उस पर पानी के छीटें या किसी तरह का दाग न हो. गंदे शीशे में चेहरा देखकर दिन की शुरुआत करना अशुभ सिद्ध हो सकता है. इसके अलावा बाथरूम में टूटा शीशा कतई न लगाएं. इससे वास्तु दोष लगता है और बनता काम भी बिगड़ जाता है.

    शीशे की ऊंचाई

    बाथरूम में शीश लगवा रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि शीशे की ऊंचाई ज्यादा न हो और न तो यह बहुत नीचे लगा हो. शीशा ऐसे लगवाएं कि उसमें आपका चेहरा पूरा दिखता हो. शीशे में आधा चेहरा दिखना अशुभ माना जाता है.

    (डिस्क्लेमर- यह जानकारी पारंपरिक वास्तु एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है. बताए गए उपायों के प्रभाव और परिणाम व्यक्ति विशेष की परिस्थितियों, आस्था, स्थान तथा अन्य कारकों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं.)

  • आगरा: बाथरूम के नीचे मिली लाश, रूबी ने अकेले कैसे तोड़ा सीमेंट का फर्श? जांच में उलझी पुलिस…

    आगरा: बाथरूम के नीचे मिली लाश, रूबी ने अकेले कैसे तोड़ा सीमेंट का फर्श? जांच में उलझी पुलिस…

    आगरा: बाथरूम के नीचे मिली लाश, रूबी ने अकेले कैसे तोड़ा सीमेंट का फर्श? जांच में उलझी पुलिस…

    Agra Murder: आगरा में फिल्म दृष्यम जैसे हुए मर्डर ने सभी को हैरान कर दिया है। दरअसल, पत्नी ने पति की हत्या कर उसका शव दफना दिया। फिर 46 दिन तक पुलिस को गुमराह करती रही। पत्नी रूबी के घर का बाथरूम करीब दस फीट लंबा और साढ़े चार फीट चौड़ा है। उसी के फर्श के नीचे से पुलिस ने पति सुरेंद्र कुमार शर्मा का कंकाल बरामद किया। नींद की गोलियां खीर में देकर पत्नी हत्या तो अकेले कर सकती है लेकिन अकेले शव ठिकाने नहीं लगा सकती। पुलिस इसी एंगल से जांच कर रही है।

    पुलिस ही नहीं मोहल्ले वालों और परिजनों के जेहन में भी कई सवाल हैं। जिनके जवाब फिलहाल पुलिस के पास नहीं है। रूबी ने बताया कि खीर में नींद की गोलियां दी थीं जिससे पति मर गया। 18 जून की सुबह पति का शव पलंग पर था। सास और बेटियां वायु विहार जेठ के घर चली गईं। उसने 400 रुपये देकर मिट्टी मंगवाई। बाथरूम का फर्श तोड़ा। शव को घसीटते हुए बाथरूम में लेकर आई। शव को बाथरूम में लिटाया। ऊपर से नमक फिर मिट्टी डाली और आखिर में उसे समतल किया।19 जून को मिस्त्री को बुलाकर फर्श पर प्लास्टर कराया। यहां तक कि एक दिन में फर्श सूख गया। इसके एक दिन बाद पतनी खुद जेठ के घर गई और बताया कि पति चार दिन से घर पर नहीं हैं, पता नहीं कहां चले गए।

    रूबी की बात सुनकर पुलिस फिर भी असमंजस में है। यह मानकर चल रही है कि इस वारदात में कोई न कोई और शामिल रहा होगा। रूबी ने पूछताछ में यह बताया कि नींद की गोलियां उसकी सास खाती हैं। पति भी खाया करते थे। इसलिए नींद की गोलियां घर में ही मौजूद थीं। पति से परेशान होकर उसने वारदात को अंजाम दिया। शव को इसलिए छिपाया ताकि जेल नहीं जाना पड़े। बेटियों की अकेले देखभाल कर सकते। इससे पहले जब भी पत्नी ने पति को मारा है तो इसके पीछे अवैध संबंधों का मामला निकला है। इसलिए पुलिस इसी एंगल से जांच को आगे बढ़ा रही है।

    इन सवालों के जवाब तलाश रही पुलिस

    16 नींद की गोलियां खाने से किसी की मौत हो सकती है क्या। ऐसा तो नहीं पत्नी ने गला भी दबाया हो।

    बाथरूम दस फीट लंबा और करीब साढ़े चार फीट चौड़ा है। आखिर में इंडियन सीट करीब आठ इंच ऊंचाई पर लगी थी। शेष बाथरूम का फर्श नीचा था।

    शव को उस हिस्से में दफनाया गया जहां परिजन नहाया करते थे। पहले से पक्का फर्श था। उसे तोड़ा गया। करीब आधा फीट खुदाई की गई। शव दफनाया गया। उसके बाद मिट्टी डाली गई।

    सवाल यह उठ रहा है कि यह सब कुछ अकेले रूबी ने कैसे कर लिया। मिस्त्री ने तो सिर्फ सीमेंट किया था।

    बाथरूम में सीमेंट से पहले लेवल चेक किया जाता है। ताकि पानी की निकासी में दिक्कत न हो। रूबी यह कैसे कर सकती है।

    सुरेंद्र शर्मा की लंबी और वजन कितना था। शव को बाथरूम में बिना गड्ढा खोदे दफनाया नहीं जा सकता।

  • मालकिन के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचकर खुद को बचाने की कोशिश, इंस्टाग्राम रील ने खोल दी चोरी की कहानी..

    मालकिन के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचकर खुद को बचाने की कोशिश, इंस्टाग्राम रील ने खोल दी चोरी की कहानी..

    मालकिन के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचकर खुद को बचाने की कोशिश, इंस्टाग्राम रील ने खोल दी चोरी की कहानी..

    उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से चोरी का एक ऐसा अनोखा और दिलचस्प मामला सामने आया है, जिसे सुनकर पुलिस भी हैरान रह गई। दून आईटी पार्क इलाके में रहने वाली एक महिला के घर से करीब एक साल पहले लाखों रुपये के हीरे और सोने के जेवरात गायब हो गए थे। शातिर नौकरानी ने चोरी करने के बाद मालकिन का भरोसा जीतने के लिए ऐसा ड्रामा रचा कि किसी को उस पर शक ही नहीं हुआ। लेकिन कहते हैं न कि चोर चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कोई न कोई गलती कर ही बैठता है। इस मामले में भी नौकरानी का सोशल मीडिया का शौक और रील (Instagram Reel) बनाने का भूत उसकी गिरफ्तारी की वजह बन गया। मालकिन ने जब नौकरानी की रील और व्हाट्सऐप स्टेटस देखा, तो उनके होश उड़ गए नौकरानी उन्हीं के चोरी हुए कीमती गहने पहनकर ठुमके लगा रही थी।

    एक साल पहले हुई थी वारदात, शक होने पर नौकरानी ने खेला ‘इमोशनल कार्ड’

    पुलिस को दी गई शिकायत में सिक्का किमाया ग्रीन, दून आईटी पार्क की रहने वाली नितिशा वत्स ने बताया कि करीब एक साल पहले जब वह जाखन के दून रिपब्लिक अपार्टमेंट में रहती थीं, तब उनके घर से दो हीरा जड़ित अंगूठियां, एक सोने की चेन और एक कीमती हीरा जड़ित पेंडेंट अचानक गायब हो गए थे। नितिशा को शुरुआत में अपनी घरेलू सहायिका (नौकरानी) विमला देवी पर शक हुआ था। जब उन्होंने विमला से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने बड़े ही मासूम चेहरे के साथ चोरी की बात से साफ इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, उसने उल्टा मालकिन को ही पुलिस में शिकायत करने की सलाह दे डाली और खुद नितिशा के साथ पुलिस चौकी तक गई ताकि किसी को उस पर रत्ती भर भी शक न हो। विमला के इस झांसे में आकर मालकिन को लगा कि वह बेकसूर है।

    व्हाट्सऐप स्टेटस और इंस्टाग्राम रील ने खोल दी पोल

    नौकरानी के इस शातिर व्यवहार के चलते नितिशा का विश्वास उस पर पक्का हो गया और वह अपने ही घर के कोने-कोने में गहने तलाशती रहीं। समय बीतता गया और मामला शांत हो गया। लेकिन कहानी में ट्विस्ट 29 जून की सुबह आया। नितिशा ने जैसे ही विमला देवी का व्हाट्सऐप स्टेटस और उसकी इंस्टाग्राम रील देखी, वह दंग रह गईं। विमला रील में जिन गहनों को पहनकर वीडियो बना रही थी, वे हूबहू नितिशा के वही जेवरात थे जो साल भर पहले चोरी हुए थे। चोरी का पक्का सबूत मिलते ही नितिशा तुरंत जाखन पुलिस चौकी पहुंचीं और लिखित शिकायत दर्ज कराई। राजपुर थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत मुकदमा दर्ज कर चोर नौकरानी की तलाश शुरू कर दी।

    एसएसपी के निर्देश पर बनी टीम, ₹10 लाख के जेवरात के साथ आरोपी गिरफ्तार

    मामले के सोशल मीडिया से जुड़ने और हाईप्रोफाइल होने के कारण देहरादून के एसएसपी प्रमेन्द्र डोबाल ने तुरंत एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया। मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया गया और शुक्रवार को पुलिस ने जोहड़ी रोड के पास से आरोपी महिला विमला देवी को घेराबंदी करके दबोच लिया। महिला की निशानदेही पर पुलिस ने चोरी किया गया एक शानदार हीरे का हार, सोने का लॉकेट, दो सोने की अंगूठियां, एक सोने का पेंडल और वारदात में इस्तेमाल मोबाइल फोन बरामद कर लिया है। बरामद किए गए इन सभी शाही आभूषणों की अनुमानित बाजार कीमत लगभग 10 लाख रुपये आंकी गई है।

    लॉकर देखकर आया था लालच, महंगे होने के कारण बेच नहीं पाई गहने

    पुलिस की कड़ी पूछताछ में आरोपी विमला देवी ने अपना जुर्म कबूल करते हुए पूरी कहानी बयां की। उसने बताया कि वह नितिशा के घर में झाड़ू-पोछा और सफाई का काम करती थी। इस दौरान उसने कई बार घर के लॉकर में रखे हुए महंगे और चमकदार आभूषण देखे थे, जिससे उसके मन में लालच आ गया। मौका मिलते ही उसने बड़ी चालाकी से लॉकर साफ कर दिया और मालकिन को झांसे में रखा। विमला ने यह भी कुबूला कि उसने इन जेवरातों को बाजार में बेचने की कई बार कोशिश की, लेकिन हीरे के बेहद कीमती और विशिष्ट आभूषण होने के कारण कोई भी सुनार उन्हें खरीदने को तैयार नहीं हुआ। विमला देवी (मूल निवासी लखीमपुर खीरी, यूपी; हाल निवासी बापू नगर, जाखन) को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर दिया गया है। वहीं, इस अनोखे मामले का त्वरित खुलासा करने वाली पुलिस टीम को एसएसपी देहरादून ने 2,500 रुपये का नकद पुरस्कार देने का एलान किया है।

  • र्जी पहचान के आरोप में फंसे मोहम्मद यूनुस को अदालत से नहीं मिली राहत, जमानत अर्जी खारिज..

    र्जी पहचान के आरोप में फंसे मोहम्मद यूनुस को अदालत से नहीं मिली राहत, जमानत अर्जी खारिज..

    र्जी पहचान के आरोप में फंसे मोहम्मद यूनुस को अदालत से नहीं मिली राहत, जमानत अर्जी खारिज..

    नैनीताल : जनपद में नाम और धर्म छिपाकर युवती को धोखे में रखने, शारीरिक संबंध बनाने, धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने, उत्पीड़न करने तथा 17 लाख रुपये हड़पने के आरोपों से जुड़े चर्चित मामले में न्यायालय ने आरोपित मोहम्मद यूनुस उर्फ एमडी उर्फ बॉबी की जमानत याचिका निरस्त कर दी है।

    अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट) सुधीर कुमार तोमर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से इनकार किया। प्राप्त जानकारी के अनुसार पीड़िता ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2020 में आरोपित ने स्वयं को केवल ‘एमडी’ बताकर उससे संपर्क किया और लंबे समय तक अपना वास्तविक नाम तथा धर्म छिपाए रखा।

    शिकायत के अनुसार इस दौरान आरोपित ने उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए तथा बाद में धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालते हुए धार्मिक रीति-रिवाज अपनाने, विशेष प्रकार का भोजन करने, मेकअप छोड़ने और ढीले वस्त्र पहनने के लिए कहा। विरोध करने पर मारपीट और मानसिक उत्पीड़न करने के भी आरोप लगाए गए हैं। पीड़िता का यह भी आरोप है कि वर्ष 2022 में विवाह का दबाव बनाने पर आरोपित ने अपना वास्तविक नाम यूनुस बताया, जिसके बाद उसे धोखे का पता चला।

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपित ने विभिन्न बहानों से उससे लगभग 17 लाख रुपये भी हड़प लिए। मामले में उच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल की जांच के बाद मल्लीताल थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 69, 115 एवं 319, उत्तराखंड धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 3 एवं 5 तथा आयुध अधिनियम की धारा 4ध्25 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय को बताया कि भीमताल में आरोपित के कमरे की तलाशी के दौरान आठ चाकू, एक हथकड़ी, लैपटॉप, मोबाइल फोन, विजिटिंग कार्ड और अन्य सामग्री भी बरामद हुई थी।

    अभियोजन ने इन तथ्यों के आधार पर जमानत का विरोध किया। वहीं बचाव पक्ष ने न्यायालय में तर्क दिया कि आरोपित को झूठा फंसाया गया है, उसने कभी अपना नाम या धर्म नहीं छिपाया और उसका कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है। साथ ही उसके फरार होने की संभावना से भी इनकार किया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने तथा केस डायरी, आरोप पत्र और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने माना कि प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और मामले का विचारण अभी प्रारंभिक अवस्था में है।

    न्यायालय ने पर्याप्त आधार न पाते हुए आरोपित मोहम्मद यूनुस उर्फ एमडी उर्फ बॉबी की जमानत याचिका खारिज कर दी। मामले में अब नियमित सुनवाई के दौरान आरोप तय होने और साक्ष्य दर्ज किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

  • दो शातिर वाहन चोर गिरफ्तार, चोरी की स्कूटी समेत तीन वाहन पुलिस ने किए बरामद..

    दो शातिर वाहन चोर गिरफ्तार, चोरी की स्कूटी समेत तीन वाहन पुलिस ने किए बरामद..

    दो शातिर वाहन चोर गिरफ्तार, चोरी की स्कूटी समेत तीन वाहन पुलिस ने किए बरामद..

    नॉर्थ-ईस्ट जिला पुलिस की एंटी ऑटो थेफ्ट स्क्वाड (AATS) ने वाहन चोरी के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करते हुए दो शातिर ऑटो-लिफ्टरों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे और निशानदेही पर कुल तीन चोरी के दोपहिया वाहन बरामद किए गए हैं। इस कार्रवाई से मोटर वाहन चोरी के कई मामलों का भी खुलासा हुआ है।

    पुलिस के अनुसार, 2 जुलाई 2026 को एएटीएस टीम को सूचना मिली कि दो युवक चोरी की स्कूटी पर मौजपुर स्थित शास्त्री मार्ग गली से गुजरने वाले हैं। सूचना के आधार पर इंस्पेक्टर दीपक पांडेय के नेतृत्व में टीम ने मौके पर घेराबंदी कर दोनों संदिग्धों को रोक लिया। जांच के दौरान जिस स्कूटी पर दोनों सवार थे, वह सीमापुरी थाना क्षेत्र से चोरी की निकली।

    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमान उर्फ कोमा 18, निवासी पुराना मुस्तफाबाद, और जीशान उर्फ जिशु 18, निवासी नूर-ए-इलाही, दिल्ली, के रूप में हुई है।

    पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने वाहन चोरी की कई वारदातों में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने भजनपुरा और दयालपुर थाना क्षेत्रों से चोरी किए गए दो अन्य दोपहिया वाहन भी बरामद कर लिए। इसके साथ ही कुल तीन चोरी के वाहन बरामद हुए हैं।

    पुलिस ने इस संबंध में जाफराबाद थाने में बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों के अन्य मामलों में शामिल होने की भी जांच की जा रही है। फिलहाल, दोनों का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है।

    पुलिस का कहना है कि बरामद वाहनों के आधार पर मोटर वाहन चोरी के कई मामलों का खुलासा हुआ है और मामले की आगे की जांच जारी है।

  • महिलाओं के दो गुटों में भिड़ंत, घंटेभर तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे से मचा बवाल

    महिलाओं के दो गुटों में भिड़ंत, घंटेभर तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे से मचा बवाल

    महिलाओं के दो गुटों में भिड़ंत, घंटेभर तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे से मचा बवाल

    आखिरकार जो अंदेशा था, वही हुआ। निघासन विकासखंड में वित्तीय अनियमितताओं में दोषी महिलाओं के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर गिरफ्तारी कराने और पदाधिकारियों का चुनाव कराने की मांग को लेकर विकास खंड कार्यालय पहुंची महिलाओं का आरोपी महिलाओं के गुट से आमना-सामना हो गया। आरोप है कि आरोपी सीएलएफ बेलरायां की पदाधिकारियों ने अन्य महिलाओं के साथ मिलकर उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। ज्ञापन की प्रति भी फाड़कर फेंक दी। महिलाएं करीब एक घंटे तक जमकर बवाल करती रहीं।

    महिलाओं का रौद्र रूप देखकर कर्मचारी ऑफिस छोड़कर भाग गए। एक घंटे जमकर महिलाओं ने बवाल काटा। बवाल के बाद पहुंची पुलिस ने किसी तरह से महिलाओं को शांत कराया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार प्रदर्शनकारी महिलाएं पहले एसडीएम राजीव निगम को ज्ञापन सौंप चुकी थीं और इसके बाद बीडीओ को ज्ञापन देने ब्लॉक कार्यालय पहुंचीं। इसी दौरान पहले से मौजूद आरोपी पक्ष की बेलरायां सीएलएफ की पदाधिकारियों की महिलाओं ने उनसे बहस शुरू कर दी। दूसरे पक्ष की महिलाएं कुछ समझ पाती। इससे पहले ही बेलरायां सीएलएफ की पदाधिकारियों और उनके समर्थकों ने विरोध करने वाली महिलाओं पर हमला कर सुमन यादव नाम की महिला के हाथ से ज्ञापन छीनकर फाड़ दिया। इससे अन्य महिलाएं भी भड़क गईं और बवाल उग्र हो गया।

    दोनों पक्षों की महिलाओं ने एक-दूसरे के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की, जिससे पूरे विकास खंड परिसर में अफरातफरी मच गई। महिलाओं के आक्रोश को देखकर ब्लॉक कार्यालय के कर्मचारी अपने-अपने कार्यालय छोड़कर बाहर निकल गए। पीड़ित सुमन यादव ने बताया कि सीएलएफ की पदाधिकारी सुकेता तिवारी और लक्ष्मी श्रीवास्तव ने उनके साथ मारपीट की। ज्ञापन फाड़ दिया। उनके पति को भी दौड़ाकर अभद्रता की। करीब एक घंटे तक चले हंगामे के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद दोनों पक्षों को शांत कराया और स्थिति को नियंत्रण में लिया। घटना के दौरान ब्लॉक परिसर में लोगों की भारी भीड़ जुट गई। ब्लॉक परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। वहीं प्रदर्शनकारी महिलाओं ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, गिरफ्तारी और सभी क्लस्टरों में निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग दोहराई है।
     
    जांच टीम अधूरे बयान लेकर लौटी
    इसी बीच जिले से वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए पहुंची टीम भी विवाद के कारण अपना काम पूरा नहीं कर सकी। हंगामे के चलते कई महिलाओं के बयान अधूरे रह गए। बाद में बीडीओ ने जांच आगे जारी रखने की बात कही और बिना पूर्व सूचना के पहुंचने पर जांच टीम को भी फटकार लगाई। बताते हैं कि जांच करने के लिए जिला मिशन प्रबंधक सुरजन सिंह के नेतृत्व में दो सदस्यीय टीम पहुंची थी, टीम और औपचारिकता पूरी कर वापस लौट गई।  

    बीएमएम आशीष दीक्षित का स्थानांतरण
    बीडीओ जयेश कुमार सिंह ने बताया कि लगातार बन रहे विवाद और तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए बीएमएम आशीष दीक्षित का स्थानांतरण उपायुक्त एनआरएलएम जितेंद्र कुमार मिश्रा ने विकासखंड कुंभी कर दिया है। उनके स्थान पर अभी किसी बीएमएम की तैनाती नहीं की गई है।

    समय रहते जांच और कार्रवाई होती तो टल सकता था बवाल
    निघासन में शुक्रवार को जो भी कुछ हुआ। उसके पीछे उपायुक्त स्वरोजगार जितेंद्र कुमार मिश्रा की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। माना जाता है कि यदि डीसी जांच, कार्रवाई और चुनाव को लेकर टालमटोल न करते और समय से कार्रवाई कर देते तो शायद यह घटना न होती। पीड़ित पक्ष की महिलाओं ने डीसी एनआरएलम को इसके लिए दोषी ठहराया है और उनका स्थानांतरण कर पूरे घोटाले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। महिलाओं का कहना है कि वह करीब तीन महीने से डीसी कार्यालय के चक्कर काट रहीं और कार्रवाई की मांग कर रहीं थी, लेकिन वह कार्रवाई का भरोसा देते हुए सिर्फ टहलाते रहे। आरोपी पक्ष भी लगातार डीसी कार्यालय पर जाता रहा। आरोप है कि दोनों पक्षों के बीच चल रही तल्खी से विवाद के आसार बन गए थे, लेकिन वित्तीय अनियमितताओं में फंसी महिलाओं को संरक्षण देते हुए उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। जब मामला मीडिया में सुर्खियां में आया। तब भी उनकी लापरवाही जारी रही। महिलाओं ने कहा कि यदि डीसी समय से जांच कराकर वित्तीय अनियिमताओं को कर नियम विरुद्ध तरीके से लाखों रुपये की हेराफेरी करने के मामले में दोषियों पर कार्रवाई करते और चुनाव कराते तो यह बवाल नहीं होता।

    ब्लॉक स्तरीय जांच को भी दबा गए उपायुक्त 
    घोटाले की खबरें जब अमृत विचार में प्रमुखता से छपी तो हरकत में आए डीसी जितेंद्र कुमार मिश्रा ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की थी। जांच टीम में शामिल सहायक विकास अधिकारी निघासन राकेश कुमार, फूलबेहड़ के अनुराग पांडेय और धौरहरा के अनुज अवस्थी ने जांच कर 3 जून 2026 को रिपोर्ट डीसी एनआरएलएम को सौंप दी थी, जांच रिपोर्ट में लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितताएं मिली थीं। जांच टीम ने प्रथम आरोप सही पाए थे। साथ ही सीएलएफ के पदाधिकारियों को वर्ष 2016 से अपने पदों पर यथावत पाया था, जबकि हर दो साल पर चुनाव होना था। टीम ने पदाधिकारियों के बदलाव पर जोर दिया था, लेकिन डीसी एनआरएलएम पूरी रिपोर्ट को दबाए रहे और जांच जारी होने की बात कहकर कार्रवाई से बचते रहे।

  • 17 साल के किशोर का अपहरण कर की गई हत्या, मामूली टक्कर के बाद सामने आई दिल दहला देने वाली वारदात..

    17 साल के किशोर का अपहरण कर की गई हत्या, मामूली टक्कर के बाद सामने आई दिल दहला देने वाली वारदात..

    17 साल के किशोर का अपहरण कर की गई हत्या, मामूली टक्कर के बाद सामने आई दिल दहला देने वाली वारदात..

    गाजियाबाद : उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के लोनी बॉर्डर इलाके से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला ‘रोड रेज’ का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां सड़क पर हुई एक मामूली बाइक-कार की टक्कर के बाद हर्जाने को लेकर हुए विवाद में दो दबंगों ने मिलकर एक 17 वर्षीय किशोर पर कथित तौर पर इतना बर्बर हमला किया कि इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। हालांकि, मुस्तैद पुलिस ने इस खौफनाक वारदात के दोनों मुख्य आरोपियों को धर-दबोचा है। मृतक किशोर की पहचान मुस्तफाबाद कॉलोनी के रहने वाले मोहम्मद जैद के रूप में हुई है।

    दोस्तों के साथ स्विमिंग पूल से लौट रहा था जैद, गैस प्लांट के पास हुई टक्कर

    यह पूरी वारदात 29 जून की बताई जा रही है। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, 17 वर्षीय मोहम्मद जैद बेहटा हाजीपुर नहर रोड के पास स्थित एक स्विमिंग पूल में दोस्तों के साथ तैराकी का लुत्फ उठाने गया था। वहां से वह अपने दोस्तों के साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर वापस घर लौट रहा था। जैद और उसके दोस्त जैसे ही इंद्रप्रस्थ गैस प्लांट क्रॉसिंग के पास पहुंचे, तभी उनकी मोटरसाइकिल की टक्कर सामने से आ रही एक कार से हो गई। इस मामूली दुर्घटना के बाद दोनों पक्षों के बीच सड़क पर ही तीखी बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते खूनी खेल में बदल गई।

    कार में डालकर किया अपहरण, प्रॉपर्टी डीलर के दफ्तर में ले जाकर ढहाया कहर

    पुलिस के अनुसार, कार सवार राहुल मावी उर्फ पहलवान और अनुज कसाना नाम के दो युवकों पर खून इस कदर सवार हो गया कि उन्होंने सरेराह कानून की धज्जियां उड़ा दीं। दोनों आरोपियों ने जैद को जबरन घसीटते हुए अपनी कार में बैठाया और उसका अपहरण कर पास ही स्थित एक प्रॉपर्टी डीलर के कार्यालय में ले गए। वहां कार को पहुंचे नुकसान के मुआवजे (हर्जाने) को लेकर दोनों आरोपी जैद पर पैसों का दबाव बनाने लगे। जब जैद ने इसका विरोध किया, तो राहुल और अनुज ने कमरे के भीतर उसे बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। बेदम पिटाई से जैद गंभीर रूप से घायल हो गया और बेहोश होकर गिर पड़ा। बाद में जैद के दोस्त उसे आनन-फानन में नजदीकी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन घाव इतने गहरे थे कि इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

    भाई की तहरीर पर मुकदमा दर्ज, सीसीटीवी और सर्विलांस की मदद से दबोचे गए हत्यारे

    मासूम जैद की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया। मृतक के भाई शाकिर की तहरीर पर लोनी बॉर्डर थाने में संगीन धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। सहायक पुलिस आयुक्त (अंकुर विहार) अमरदीप कुमार मौर्य ने बताया कि घटना की गंभीरता को देखते हुए कई टीमें गठित की गई थीं। पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, सर्विलांस इनपुट और तकनीकी साक्ष्यों का बारीकी से विश्लेषण किया। पुख्ता सुराग मिलते ही पुलिस ने घेराबंदी कर मुख्य आरोपी राहुल मावी उर्फ पहलवान को दबोच लिया। राहुल ने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल करते हुए पूरी कहानी उगल दी, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दूसरे आरोपी अनुज कसाना को भी लोनी बॉर्डर इलाके से गिरफ्तार कर लिया।

    वारदात में इस्तेमाल कार बरामद, कड़े सबूतों के बाद मुकदमे में बढ़ीं गंभीर धाराएं

    एसीपी अमरदीप कुमार मौर्य के मुताबिक, पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई कार को भी बरामद कर लिया है। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे कार के मुआवजे की बात पर भड़क गए थे और दफ्तर के अंदर ले जाकर उन्होंने जैद के साथ मारपीट की थी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल से मिले पुख्ता तकनीकी सबूतों के आधार पर मुकदमे में हत्या और अपहरण जैसी कई और गंभीर धाराएं जोड़ दी गई हैं। दोनों आरोपियों को आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई के लिए अदालत में पेश किया जा चुका है और पुलिस इस मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए कड़ी सजा दिलाने की तैयारी कर रही है।

  • साली के लिए पत्नी को तेजाब पिलाने का आरोप, पति और ससुराल वालों के खिलाफ केस दर्ज..

    साली के लिए पत्नी को तेजाब पिलाने का आरोप, पति और ससुराल वालों के खिलाफ केस दर्ज..

    साली के लिए पत्नी को तेजाब पिलाने का आरोप, पति और ससुराल वालों के खिलाफ केस दर्ज..

    मेरठ में दहेज की मांग पूरी न होने पर महिला को टॉयलेट साफ करने वाला तेजाब पिलाने का आरोप है. इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. पुलिस ने पति समेत छह लोगों पर मामला दर्ज किया.

    Muskan Murder Case: उत्तर प्रेदश के मेरठ से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां एक पति ने दहेज के लालच में अपनी पत्नी की हत्या कर दी. उसने पत्नी को जबरदस्ती तेजाब पिलाया, जिससे महिला की मौत हो गई. युवक पत्नी पर 16 साल की साली से निकाह करने का दबाव बना रहा थआ. महिला को गंभीर हालत में तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां उसकी मौत हो गई. परिवार वालों मे ससुराल पक्ष को हत्या का जिम्मेदार बताया है. 

    साली से निकाह करना चाहता था जीजा 

    जानकारी के मुताबिक, परीक्षितगढ़ के अमरसिंह निवासी रहीमुद्दीन ने साल 2025 में अपनी बेटी के शादी  लोहियानगर के फतेहउल्लापुर निवासी नासिर से की थी. परिवार ने आरोप लगाए कि नासिर मुस्कान को दहेज के लिए काफी प्रताड़ित करता था और पिछले दो महीने से अपनी 16 साल की साली से निकाह करने दबाव बना रहा था. पत्नी ने ये बाद नहीं स्वीकार की, जिसके कारण पति उसे रोज प्रताड़ित करता था. 

    जबरदस्ती पिलाया तेजाब 

    बुधवार को आरोपी और मुस्कान के बीच इसी बात को लेकर काफी विवाद चल रहा था. आरोप है कि नासिर ने पत्नी के मुंह में तेजाब डाल दिया. तेजाब पीने के कारण मुस्कान की हालत काफी ज्यादा बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई. पुलिस को जब घटना की जानकारी हुई, तो वह तुरंत मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया. मुस्कान के पिता ने नासिर और उसके परिजनों पर जबरदस्ती तेजाब पिलाने का मुकदमा भी दर्ज कराया है. ब पिलाने का मुकदमा दर्ज कराया था.

    मारपीट का लगाया गंभीर आरोप 

    मुस्कान की मौत के बाद पुलिस ने मामले में हत्या की धारा जोड़ दी है. फिलहाल सभी आरोपी फरार हैं और उनकी तलाश की जा रही है. मुस्कान के परिवार का आरोप है कि ससुराल वाले लंबे समय से दहेज के लिए उसे परेशान करते थे और उसके साथ मारपीट करते थे. परिजनों का कहना है कि पिछले दो महीनों से उस पर अपनी नाबालिग छोटी बहन की शादी अपने पति से कराने का दबाव भी बनाया जा रहा था.

    न्याय के मांग कर रहा परिवार 

    परिवार के मुताबिक, मुस्कान ने इसका विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की गई और बाद में उसे तेजाब पिलाकर मार दिया गया. परिजनों ने आरोप लगाया कि इस मामले में आरोपी के परिवार के अन्य लोग भी उसका साथ दे रहे थे. पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है.

  • रामकुंवर हत्याकांड: तीन दशक बाद भी नहीं मिली राहत, हाईकोर्ट ने उम्रकैद बरकरार रखते हुए सरेंडर का आदेश दिया

    रामकुंवर हत्याकांड: तीन दशक बाद भी नहीं मिली राहत, हाईकोर्ट ने उम्रकैद बरकरार रखते हुए सरेंडर का आदेश दिया

    रामकुंवर हत्याकांड: तीन दशक बाद भी नहीं मिली राहत, हाईकोर्ट ने उम्रकैद बरकरार रखते हुए सरेंडर का आदेश दिया
    फोटो AI

    मुरादाबाद। करीब 35 वर्ष पुराने चर्चित रामकुंवर हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है। अदालत ने दोषियों की अपील खारिज करते हुए उन्हें 15 दिनों के भीतर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। आदेश का पालन नहीं करने पर उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए जाएंगे।

    न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, चिकित्सीय साक्ष्य और अन्य सबूत दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं। अदालत ने बलिस्टर, महेश और नरेश की अपील को निरस्त करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा।

    1987 में हुई थी सनसनीखेज हत्या

    मामला 27 सितंबर 1987 का है। थाना कुंदरकी क्षेत्र के बसेड़ा गांव में मंदिर से अखंड रामायण पाठ सुनकर लौट रहे रामकुंवर की पुरानी रंजिश के चलते गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि हत्या के बाद आरोपियों ने शव को रस्सी से बांधकर जंगल तक घसीटा और पहचान छिपाने के उद्देश्य से धड़ से सिर अलग कर दिया। घटना के दौरान हुई फायरिंग में वीरम नाम की युवती भी छर्रे लगने से घायल हो गई थी। पुलिस ने 4 अक्टूबर 1987 को गन्ने के खेत से रामकुंवर का धड़ बरामद किया था, लेकिन सिर कभी बरामद नहीं हो सका।

    पुरानी रंजिश बनी हत्या की वजह

    जांच में सामने आया कि घटना से करीब ढाई साल पहले महेश ने अपनी बहन सुमन को भगाने का आरोप लगाते हुए रामकुंवर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। अभियोजन के अनुसार इसी पुरानी रंजिश के चलते हत्या की साजिश रची गई और वारदात को अंजाम दिया गया।

    निचली अदालत ने 1989 में सुनाई थी उम्रकैद

    अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने 2 मई 1989 को महेश, नरेश और विरपाल को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत तथा बलिस्टर को धारा 302/34 के तहत आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके अलावा उन्हें धारा 201 और धारा 324/34 के तहत भी दोषी ठहराया गया था।

    हाईकोर्ट ने खारिज किए सभी तर्क

    दोषियों ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि प्राथमिकी दर्ज करने में देरी हुई, गवाह मृतक के परिजन थे और उनके बयानों में विरोधाभास है। हालांकि अदालत ने इन सभी तर्कों को खारिज कर दिया। खंडपीठ ने कहा कि घटना के लगभग साढ़े चार घंटे के भीतर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई थी, इसलिए इसमें किसी प्रकार की मनगढ़ंत कहानी या अनावश्यक देरी का सवाल नहीं उठता। अदालत ने यह भी माना कि प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सीय साक्ष्यों से पूरी तरह मेल खाते हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर किसी गवाह की गवाही को खारिज नहीं किया जा सकता कि वह मृतक का रिश्तेदार है।

    पीड़ित पक्ष ने फैसले का किया स्वागत

    हाईकोर्ट के फैसले के बाद पीड़ित पक्ष ने संतोष जताते हुए कहा कि भले ही न्याय मिलने में लंबा समय लगा, लेकिन इस निर्णय ने न्यायपालिका में उनका विश्वास और मजबूत किया है।