शाहनवाज ने रुपयों के विवाद में दोस्त जानी की हत्या कर दी और शव को गन्ने के खेत में फेंक दिया ताकि यह तेंदुए का हमला लगे। मुरादाबाद पुलिस ने जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा किया।
रुपयों के लेनदेन का विवाद कुछ ऐसा बढ़ा कि शाहनवाज ने दोस्त जानी के सिर पर धारदार हथियार से हमला कर उसकी हत्या कर दी। चूंकि, ठाकुरद्वारा में तेंदुए के हमले में अब तक दो महिलाओं की मौत हो चुकी और कई घायल हो गए है। 16 अगस्त आरोपित शहनवाज ने भी जानी की हत्या करने के बाद शव इसलिए ही गन्ने के खेत में फेंका कि लोग तेंदुए के डर से खेतों पर नहीं जा रहे हैं।
ऐसे में तेंदुआ या तो जानी का शव खा जाएगा और अगर किसी शव मिले भी तो लोग समझें कि तेंदुए ने शिकार किया है। हालांकि, 18 अगस्त को शव मिला। चप्पल व कपड़ों से शिनाख्त हुई और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की वारदात सामने आ गई। पुलिस ने जांच के आधार पर सुराग जुटा आरोपित को दबोच लिया। 24 अगस्त को हकीकत पता चलने पर शाहनवाज को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया।
ठाकुरद्वारा क्षेत्र के वार्ड नंबर-19, मोहल्ला बहेड़ा वाला निवासी शाहनवाज और डिलारी क्षेत्र के गांव बुढ़नपुर निवासी जानी एक साल से दोस्त थे। दोनों का एक-दूसरे के घर आना-जाना था। दोनों के बीच रुपये के लेनदेन को लेकर विवाद चल रहा था। शाहनवाज ने उधार के रुपये लौटाने के बहाने जानी को फोन कर बुलाया था।
16 अगस्त की सुबह करीब 10 बजे जानी फोन पर बात करते हुए घर से निकला था, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटा। स्वजन ने काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। मोबाइल फोन भी बंद मिला। इसके बाद 17 अगस्त को जानी की मां संतोष ने थाना डिलारी में गुमशुदगी दर्ज कराई थी।
UP News:
यूपी के बस्ती से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां वाल्टरगंज थाना क्षेत्र स्थित बहेरिया गांव में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी को कमरे में बंद कर ईंट से कूच दिया। शोर सुनकर सो रहे बच्चों की नींद खुली और उन्होंने पड़ोसियों से मदद मांगी। पड़ोसी दौड़कर पहुंचे लेकिन तब तक आरोपी पति दरवाजा खोलकर भाग चुका था। कमरे में महिला का शव पड़ा था। लोगों ने घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
बहेरिया गांव निवासी फूलचंद की पत्नी किरण सिलाई-कढ़ाई करती थी। फूलचंद नशे का आदती था। वह अक्सर नशे की हालत में घर पहुंचता था और पत्नी किरण से मारपीट करता रहता था। रविवार की देर रात तकरीबन 11 बजे वह घर पहुंचा। बच्चे बरामदे में सो रहे थे। वह कमरे के अंदर गया और किसी बात को लेकर पत्नी किरण से कहासुनी करने लगा। शोर सुनकर बच्चों की नींद खुल गई। फूलचंद ने कमरे की कुंडी अंदर से बंद कर ली और पत्नी के सिर पर ईंट से तबाड़तोड़ प्रहार कर दिया। किरण चीखने-चिल्लाने लगी। उसकी चीख-पुकार बाहर बरामदे में मौजूद बेटा अमित ने दरवाजा खोलने का प्रयास किया लेकिन वह अंदर से बंद थे। अमित ने पड़ोस के लोगों को शोर मचाकर घटना की जानकारी दी और मदद की गुहार लगाई।
अमित की पुकार सुनकर जब तक गांव वाले पहुंचते तो आरोपी फूलचंद दरवाजा खोलकर फरार हो चुका था। कमरे के अंदर फर्श पर खून में सना किरण का शव पड़ा था। ग्रामीणों ने घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस तत्काल मौके पर पहुंच गई और महिला का शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अमित ने थाने पर तहरीर दी जिसके आधार पर पुलिस ने उसके पिता फूलचंद के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है।
चित्रकूट से अगवा कर ई-रिक्शा चालक की हत्याकर झांसी में फेंका
उधर, झांसी-मिर्जापुर नेशनल हाईवे से पांच दिन पहले अगवा किए गए ई-रिक्शा चालक की बेरहमी से हत्या कर शव को झांसी जिले के पहाड़ी डैम में फेंक दिया गया। सनसनीखेज वारदात का खुलासा कर पुलिस ने सगे भाई-भतीजे समेत सभी चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि संपत्ति के लालच में अगवा करने के बाद ई-रिक्शा चालक को पहले जमकर पीटा और फिर हाथ-पैर बांध गमछे से गला घोट दिया। अब पुलिस डैम में गोताखोरों की मदद से शव की तलाश कर रही है।
उत्तर प्रदेश के भदोही से एक बेहद गंभीर और शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां एक डिजिटल लाइब्रेरी के टॉयलेट की दीवार में छात्राओं को छोटा सा छेद दिखाई दिया। शुरुआत में उन्हें यह सामान्य नहीं लगा, जिसके बाद उन्होंने आसपास के छात्रों को इसकी जानकारी दी। जांच करने पर मामले की गंभीरता सामने आई।
आरोप है कि मकान मालिक के कमरे और छात्राओं के टॉयलेट के बीच की दीवार में छेद किया गया था। शिकायत के मुताबिक, इसी रास्ते से छात्राओं की निजी गतिविधियों को रिकॉर्ड करने की कोशिश की जा रही थी। घटना सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी युवक को हिरासत में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी।
छात्राओं को छेद देखकर हुआ शक
जानकारी के मुताबिक, गोपीगंज क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-19 के पास एक मकान में कई वर्षों से डिजिटल लाइब्रेरी संचालित हो रही है। इसी लाइब्रेरी के टॉयलेट की दीवार में छात्राओं को एक छोटा सा छेद नजर आया।
छात्राओं को शक हुआ तो उन्होंने अन्य छात्रों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद मामले की जांच की गई। शिकायत के अनुसार, दीवार के दूसरी तरफ मकान मालिक का कमरा था। छात्रों ने वहां पहुंचकर आरोपी से पूछताछ की और उसके मोबाइल की जांच की।
मोबाइल की जांच के बाद बढ़ी चिंता
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मोबाइल में छात्राओं से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री मिली। मामले की जानकारी लाइब्रेरी संचालक को दी गई, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। घटना की खबर मिलते ही छात्र-छात्राओं के परिजन भी मौके पर पहुंच गए।
पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर उसका मोबाइल अपने कब्जे में ले लिया है। अब डिवाइस की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसमें मौजूद सामग्री कब और किस तरीके से तैयार की गई थी।
पुलिस कर रही मामले की जांच
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी के मोबाइल और अन्य संभावित साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि कहीं इस सामग्री को किसी दूसरे व्यक्ति तक भेजा तो नहीं गया या किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर साझा तो नहीं किया गया।
मामले में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
छात्राओं की सुरक्षा पर उठे सवाल
घटना ने शैक्षणिक संस्थानों और लाइब्रेरी जैसी जगहों पर छात्राओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे मामलों में पीड़ितों की निजता बनाए रखना और किसी भी निजी सामग्री को आगे साझा न करना बेहद जरूरी है। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपी ने कितने समय से ऐसी हरकत की थी और इसमें कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं।
शादी के लिए रिश्ता तलाश रहे लोगों को अब सिर्फ पारंपरिक ठगी से ही नहीं, बल्कि तकनीक के सहारे तैयार किए गए फर्जी रिश्तों से भी सावधान रहने की जरूरत है। कानपुर में सामने आए एक साइबर ठगी के मामले ने इस पूरे खेल का चौंकाने वाला तरीका उजागर किया है। आरोप है कि एक संगठित गिरोह ने फर्जी मैट्रिमोनियल कंपनियों और कॉल सेंटर की मदद से देशभर में शादी की तलाश कर रहे लोगों को निशाना बनाया।
गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित बताया जा रहा है। पहले शादी की इच्छा रखने वाले युवकों की जानकारी सोशल मीडिया और मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म से जुटाई जाती थी। इसके बाद आकर्षक महिला प्रोफाइल तैयार कर उनसे संपर्क किया जाता था। कई मामलों में तस्वीरों को एडिट करने और AI तकनीक की मदद लेने की बात भी जांच में सामने आई।
पहले दिखाया जाता था खूबसूरत रिश्ता
ठगी का खेल एक सामान्य मैट्रिमोनियल बातचीत की तरह शुरू होता था। युवक को किसी महिला की प्रोफाइल दिखाई जाती और फिर फोन पर बातचीत शुरू कराई जाती। दूसरी तरफ से महिला कर्मचारी लड़की बनकर बात करती थीं।
घंटों बातचीत के जरिए धीरे-धीरे युवक का भरोसा जीता जाता था। जब सामने वाले को लगने लगता कि रिश्ता वास्तविक है और शादी की बात आगे बढ़ सकती है, तभी पैसों की मांग शुरू होती थी।
कभी रजिस्ट्रेशन तो कभी सुरक्षा राशि
गिरोह कथित तौर पर अलग-अलग बहानों से पैसे मांगता था। कभी रजिस्ट्रेशन फीस, कभी प्रोफाइल फीस तो कभी परिवार की सहमति या सुरक्षा जमा के नाम पर रकम मांगी जाती थी।
शुरुआत में रकम कम रखी जाती थी, लेकिन जैसे-जैसे पीड़ित का भरोसा बढ़ता जाता, पैसों की मांग भी बढ़ती जाती थी। कई लोग शादी का रिश्ता हाथ से निकल जाने के डर से बार-बार भुगतान करते रहते थे।
AI और एडिटेड तस्वीरों से तैयार होती थीं प्रोफाइल
इस ठगी का सबसे चौंकाने वाला पहलू कथित तौर पर फर्जी महिला प्रोफाइल तैयार करने का तरीका था। जांच में सामने आया कि आकर्षक तस्वीरों और AI तकनीक का इस्तेमाल करके ऐसी प्रोफाइल बनाई जाती थीं, जिससे पीड़ित को शक न हो।
फर्जी नामों और तस्वीरों के साथ प्रोफाइल तैयार करने के बाद कॉल सेंटर में मौजूद कर्मचारी फोन पर बातचीत करते थे। इस तरह पीड़ित को लगता था कि वह वास्तव में शादी के लिए किसी युवती से बात कर रहा है।
रिश्ता टूटने का डर बनता था सबसे बड़ा हथियार
ठगों की रणनीति सिर्फ पैसे मांगने तक सीमित नहीं थी। कथित तौर पर पीड़ितों पर भावनात्मक दबाव भी बनाया जाता था। उन्हें बताया जाता कि रिश्ता लगभग तय हो चुका है और अगर उन्होंने मांगी गई रकम समय पर नहीं दी तो शादी की प्रक्रिया रुक सकती है।
कई लोग शादी की उम्मीद में लगातार पैसे भेजते रहते थे। बाद में जब उन्हें ठगी का एहसास होता, तब तक काफी रकम उनके हाथ से निकल चुकी होती थी।
शिकायत करने पर भी बनाया जाता था दबाव
मामला सामने आने के बाद जांच में यह भी पता चला कि कुछ मामलों में पीड़ितों को शिकायत न करने या मामला खत्म करने के लिए मनाने की कोशिश की जाती थी। इसका मकसद कथित तौर पर गिरोह के बाकी सदस्यों और पूरे नेटवर्क को जांच से बचाना था।
कानपुर साइबर पुलिस ने मामले की जांच करते हुए इस कथित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। जांच में फर्जी मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म, कॉल सेंटर और ऑनलाइन प्रोफाइल से जुड़े पहलुओं को खंगाला जा रहा है।
ऑनलाइन रिश्ते में इन बातों का रखें ध्यान
ऑनलाइन किसी से दोस्ती या शादी के लिए बातचीत करते समय जल्दबाजी में भरोसा करना भारी पड़ सकता है। अगर सामने वाला व्यक्ति बिना मिले ही पैसे मांगने लगे, रजिस्ट्रेशन या किसी अन्य फीस के नाम पर भुगतान का दबाव बनाए या लगातार भावनात्मक दबाव डालकर रकम ट्रांसफर करवाए, तो सावधान हो जाएं।
किसी भी ऑनलाइन रिश्ते में पैसे भेजने से पहले सामने वाले की पहचान और उसके दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है। खासकर AI से बनी या एडिट की गई तस्वीरों के दौर में सिर्फ फोटो देखकर किसी प्रोफाइल को असली मानना सुरक्षित नहीं है।
शादी का सपना दिखाकर भरोसा जीतना और फिर उसी भरोसे का इस्तेमाल पैसे ऐंठने के लिए करना साइबर ठगी का खतरनाक तरीका बनता जा रहा है। इसलिए ऑनलाइन रिश्तों में भावनाओं के साथ-साथ सतर्कता भी जरूरी है।
उत्तर प्रदेश के गोंडा में दिसंबर की एक रात एक परिवार के लिए जिंदगी भर न भूलने वाली घटना बन गई। कुछ दिन पहले ही जिस लड़की को परिवार ने धूमधाम से बहू बनाकर घर में प्रवेश कराया था, वही कथित तौर पर घर के लोगों को नशीला पदार्थ खिलाकर लाखों रुपये के जेवर और सामान लेकर फरार हो गई।
सुबह जब परिवार के लोगों को होश आया तो घर का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। बहू गायब थी और घर में रखा कीमती सामान भी नहीं था।
मामला पुलिस तक पहुंचा तो जांच शुरू हुई और धीरे-धीरे इस कथित ‘लुटेरी दुल्हन’ के पीछे चल रहे गिरोह की कहानी सामने आने लगी।
शादी के लिए परेशान था परिवार
गोंडा के खरगूपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले बृजभूषण पांडेय की शादी लंबे समय से नहीं हो पा रही थी। परिवार चाहता था कि किसी तरह उनके घर में बहू आए।
इसी दौरान जोखू नाम का एक बिचौलिया उनके संपर्क में आया। उसने लखीमपुर खीरी की रहने वाली शिवानी उर्फ गोमती देवी नाम की युवती के बारे में बताया।
बात आगे बढ़ी और दोनों परिवारों के बीच शादी की सहमति बन गई।
17 दिसंबर को बृजभूषण और शिवानी की शादी धूमधाम से कर दी गई।
परिवार को उस समय जरा भी अंदाजा नहीं था कि शादी के कुछ ही दिनों बाद उनके घर में ऐसी घटना होने वाली है।
शादी के बाद शुरू हुए रस्मों के कार्यक्रम
शादी के बाद घर में सामान्य माहौल था। 21 दिसंबर को विवाह से जुड़े कुछ रस्मोरिवाजों का कार्यक्रम भी रखा गया।
इस दौरान नवविवाहिता की तरफ से उसका कथित भाई और कुछ अन्य लोग भी घर पहुंचे।
परिवार के लिए ये लोग मेहमान थे। किसी को उनके इरादों पर संदेह नहीं हुआ।
दिनभर घर में शादी की खुशियां और रस्मों का माहौल बना रहा।
लेकिन रात होते-होते कहानी ने अचानक दूसरा मोड़ ले लिया।
रात के खाने के बाद एक-एक कर बेहोश होने लगे लोग
पुलिस के मुताबिक, आरोप है कि रात में शिवानी ने अपने पति और ससुराल के दूसरे सदस्यों को खाने में नशीला पदार्थ मिला दिया।
खाना खाने के बाद परिवार के लोग धीरे-धीरे बेहोशी की हालत में पहुंच गए।
घर में जब कोई होश में नहीं था, उसी दौरान कथित तौर पर शिवानी ने अपने साथियों को बुलाया।
इसके बाद घर से शादी का सामान, नकदी और कीमती जेवर निकाल लिए गए।
आरोप है कि लाखों रुपये के जेवर लेकर नवविवाहिता अपने साथियों के साथ वहां से निकल गई।
सुबह आंख खुली तो दुल्हन और सामान दोनों गायब
जब परिवार के लोगों को होश आया तो उन्हें कुछ भी समझ नहीं आया।
घर में अफरातफरी मच गई।
सबसे पहले लोगों ने शिवानी को तलाशना शुरू किया, लेकिन वह कहीं नहीं मिली।
इसके बाद घर में रखे सामान की जांच हुई तो कीमती जेवर और अन्य सामान भी गायब था।
तब परिवार को समझ आया कि उनके साथ बड़ी धोखाधड़ी हो चुकी है।
उन्होंने तत्काल पुलिस से शिकायत की।
पुलिस ने शुरू की जांच
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने शादी से जुड़े लोगों, बिचौलिए और नवविवाहिता के संपर्कों की जानकारी जुटानी शुरू की।
जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को शक हुआ कि यह सिर्फ एक महिला का किया हुआ अपराध नहीं है।
मामले में कई लोग शामिल हो सकते हैं।
इसके बाद पुलिस ने शिवानी को गिरफ्तार कर लिया। उसके साथ चार अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया।
तलाशी में मिलीं नशीली गोलियां
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से लूटे गए कथित जेवर और घर का सामान बरामद किया गया।
इसके अलावा करीब 350 नशीली गोलियां और एक मोबाइल फोन भी बरामद होने की बात सामने आई।
नशीली गोलियों की बरामदगी ने जांच को और गंभीर बना दिया, क्योंकि पुलिस को शक था कि परिवार को बेहोश करने के लिए इसी तरह के पदार्थ का इस्तेमाल किया गया था।
बरामद सामान को पुलिस ने जांच का हिस्सा बनाया और आरोपियों से पूछताछ शुरू की।
पूछताछ में सामने आया कथित गिरोह
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वे एक संगठित गिरोह के तौर पर काम करते थे।
आरोप है कि गिरोह शादी के लिए परिवार तलाशता था, फिर बिचौलियों के जरिए रिश्ता तय कराया जाता था।
शादी के बाद मौका देखकर घर में मौजूद लोगों को नशीला पदार्थ खिलाकर बेहोश करने और कीमती सामान लेकर फरार होने की योजना बनाई जाती थी।
अगर जांच में यह पूरा नेटवर्क सही साबित होता है, तो गोंडा की घटना किसी एक परिवार के साथ हुई अकेली वारदात नहीं बल्कि एक बड़े आपराधिक तरीके का हिस्सा हो सकती है।
कुछ दिनों की दुल्हन और फिर पुलिस की गिरफ्त
जिस लड़की को परिवार ने 17 दिसंबर को धूमधाम से बहू बनाकर घर में लाया था, वही कुछ दिनों बाद पुलिस की गिरफ्त में थी।
परिवार के लिए यह घटना इसलिए भी सदमे वाली थी क्योंकि उन्होंने जिस रिश्ते पर भरोसा करके शादी की थी, उसी रिश्ते के जरिए कथित तौर पर उनके घर को निशाना बनाया गया।
शादी के बाद घर में आई बहू पर परिवार ने भरोसा किया था। इसी भरोसे का कथित तौर पर फायदा उठाया गया।
शादी के नाम पर होने वाली ठगी से सावधान
ऐसे मामलों के बाद शादी के लिए रिश्ते तय करने वाले परिवारों के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वे सामने वाले व्यक्ति की पहचान और पारिवारिक पृष्ठभूमि की अच्छी तरह जांच करें।
सिर्फ किसी बिचौलिए की बात पर भरोसा करके शादी का फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है। पहचान पत्र, स्थायी पता, परिवार और पुराने रिकॉर्ड की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है।
गोंडा की यह घटना भी यही बताती है कि कभी-कभी अपराधी रिश्ते और भरोसे जैसी भावनात्मक चीजों का इस्तेमाल ही अपने अपराध के लिए हथियार बना लेते हैं।
नोट: यह कहानी उपलब्ध पुलिस कार्रवाई और आरोपों के आधार पर पुनर्लिखी गई है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
उत्तर प्रदेश के बदायूं शहर में एक समय ऐसा परिवार था, जिसे देखकर किसी को अंदाजा नहीं होता था कि आने वाले दिनों में उसके भीतर इतनी बड़ी उथल-पुथल मचने वाली है। पति राजकुमार पादरी था और पत्नी निशा एक स्कूल में पढ़ाती थी। दोनों की जिंदगी अपनी दो बेटियों के साथ सामान्य तरीके से चल रही थी।
राजकुमार की ड्यूटी बदायूं जिला मुख्यालय से करीब 23 किलोमीटर दूर वजीरगंज की एक चर्च में थी। चर्च में जब काम ज्यादा होता तो उसे वहीं रात रुकना पड़ता था। दूसरी ओर निशा सिविल लाइंस इलाके के होली चाइल्ड स्कूल में पढ़ाती थी और स्कूल परिसर में मिले कमरे में परिवार के साथ रहती थी।
लेकिन जिस रिश्ते की शुरुआत पसंद और पारिवारिक सहमति से हुई थी, वह आगे चलकर गंभीर विवादों से घिर गया।
ट्रेनिंग के दौरान हुई थी पहली मुलाकात
राजकुमार और निशा की पहली मुलाकात लखनऊ में हुई थी। दोनों वहां पादरी के काम से जुड़ी ट्रेनिंग के सिलसिले में पहुंचे थे।
राजकुमार बरेली के रहने वाले रघुवीर मसीह का बेटा था। उसके पिता पुलिस विभाग में वायरलेस मैसेंजर के पद पर बदायूं में तैनात रह चुके थे।
निशा मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली थी और उसके पिता दयाशंकर भी पादरी थे।
दोनों की मुलाकातें बढ़ीं तो एक-दूसरे के प्रति लगाव पैदा हो गया। परिवारों के बीच भी पहले से रिश्तेदारी का संबंध था। निशा की बड़ी बहन शारदा की शादी राजकुमार के बड़े भाई दिलीप से हुई थी।
इसी पारिवारिक रिश्ते के कारण राजकुमार और निशा एक-दूसरे के करीब आए और दोनों ने अपनी पसंद की बात परिवार के सामने रख दी।
परिवार की सहमति से हुई शादी
राजकुमार ने लखनऊ में अपनी ट्रेनिंग पूरी कर ली, जबकि निशा किन्हीं कारणों से ट्रेनिंग बीच में ही छोड़कर वापस चली गई।
इसके बाद दोनों परिवारों की सहमति से वर्ष 2014 में राजकुमार और निशा की शादी हो गई।
शादी के बाद परिवार बढ़ा और दोनों दो बेटियों के माता-पिता बने। निशा ने स्कूल में नौकरी शुरू की और राजकुमार चर्च की जिम्मेदारियां संभालता रहा।
शुरुआती समय सामान्य तरीके से गुजरता रहा।
अलग-अलग जिम्मेदारियों के बीच बढ़ने लगी दूरी
राजकुमार की ड्यूटी अक्सर घर से दूर रहती थी। वजीरगंज की चर्च में काम होने पर वह रात में वहीं रुक जाता था।
निशा दूसरी ओर बदायूं में स्कूल की जिम्मेदारी संभालती थी। दोनों अपनी-अपनी जगह व्यस्त रहते थे।
ऐसे में पति-पत्नी के बीच समय कम मिलने लगा।
यहीं से रिश्ते में गलतफहमियों और तनाव की शुरुआत होने की बात सामने आती है।
फिर रिश्ते पर उठने लगे सवाल
समय बीतने के साथ राजकुमार और निशा के संबंधों में कथित तौर पर तनाव बढ़ता गया। पत्नी के किसी दूसरे व्यक्ति से संबंध होने का शक राजकुमार के मन में पैदा होने की बात कही गई।
यह शक कितना सही था और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या थे, यह जांच का विषय रहा। लेकिन इतना जरूर था कि पति-पत्नी के बीच विश्वास कमजोर पड़ चुका था।
किसी भी रिश्ते में जब भरोसे की जगह शक ले लेता है तो छोटी-सी बात भी बड़े विवाद का कारण बन सकती है।
राजकुमार और निशा के मामले में भी हालात धीरे-धीरे गंभीर होते चले गए।
परिवार के बीच भी बढ़ने लगी बेचैनी
राजकुमार के परिवार में उसके तीन भाई और दो बहनें थीं। सबसे बड़े भाई रवि की शादी बाराबंकी निवासी अनुराधा से हुई थी। दूसरे भाई दिलीप की शादी निशा की बड़ी बहन शारदा से हुई थी।
यानी दोनों परिवार पहले से एक-दूसरे से जुड़े हुए थे।
इस वजह से पति-पत्नी के बीच होने वाले विवाद का असर सिर्फ दोनों तक सीमित नहीं रहता था। परिवार के दूसरे सदस्य भी इस तनाव से प्रभावित होते थे।
एक सामान्य परिवार अचानक चर्चा में आ गया
जिस घर में दो बेटियों की हंसी गूंजती थी, वहां अब पति-पत्नी के रिश्ते को लेकर सवाल उठने लगे।
राजकुमार चर्च में पादरी के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाता था और निशा स्कूल में अध्यापन करती थी। बाहर से दोनों का जीवन व्यवस्थित दिखाई देता था।
लेकिन अंदर ही अंदर रिश्ते में क्या चल रहा था, इसकी पूरी तस्वीर बाद की घटनाओं से सामने आई।
पति की मौत ने पूरे मामले को अचानक गंभीर बना दिया।
पत्नी पर लगे आरोपों ने मामले को और उलझाया
राजकुमार की मौत के बाद उसकी पत्नी निशा के कथित संबंधों को लेकर सवाल उठने लगे। आरोप लगाया गया कि पत्नी के किसी अन्य व्यक्ति से संबंध थे और इसी वजह से पति-पत्नी के बीच तनाव पैदा हुआ था।
हालांकि, किसी भी व्यक्ति पर लगाए गए ऐसे आरोपों को बिना जांच और कानूनी पुष्टि के सच नहीं माना जा सकता।
पुलिस जांच का उद्देश्य यही होता है कि मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या था, किन परिस्थितियों में घटना हुई और उसमें कौन जिम्मेदार था।
इस कहानी का सबसे दर्दनाक हिस्सा दो बेटियां थीं
राजकुमार और निशा की दो बेटियां थीं।
पति की मौत और उसके बाद परिवार में पैदा हुए विवादों का सबसे गहरा असर इन्हीं मासूम बच्चों पर पड़ा।
बच्चों के लिए मां और पिता का विवाद समझना वैसे ही मुश्किल होता है, लेकिन जब मामला मौत तक पहुंच जाए तो उनकी पूरी दुनिया बदल जाती है।
एक परिवार, जिसकी शुरुआत आपसी पसंद और पारिवारिक सहमति से हुई थी, समय के साथ ऐसे मोड़ पर पहुंच गया जहां रिश्तों से ज्यादा सवाल और आरोप रह गए।
शक रिश्ते को किस हद तक ले जा सकता है?
राजकुमार और निशा की कहानी का सबसे बड़ा सवाल यही है कि किसी रिश्ते में शक पैदा होने के बाद उसे बातचीत और विश्वास से दूर किया जाए या आरोपों और टकराव से।
पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास टूटने के बाद हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं। लेकिन किसी भी गंभीर घटना की जिम्मेदारी तय करने के लिए सिर्फ शक या आरोप पर्याप्त नहीं होते।
इस मामले ने परिवार, रिश्तों और भरोसे से जुड़े कई सवाल खड़े किए।
कभी जिस रिश्ते की शुरुआत दो लोगों की पसंद से हुई थी, उसी रिश्ते में बाद में अविश्वास की जगह बन गई। दो बेटियों के माता-पिता बने राजकुमार और निशा की जिंदगी जिस मोड़ पर पहुंची, उसने पूरे परिवार को झकझोर दिया।
नोट: यह कहानी उपलब्ध सामग्री के आधार पर कहानी शैली में पुनर्लिखी गई है। पत्नी के कथित संबंधों या किसी व्यक्ति की भूमिका से जुड़े आरोपों को न्यायिक पुष्टि के बिना तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
गाजियाबाद के खोड़ा थाना क्षेत्र के लोकप्रिय विहार में शनिवार तड़के एक मीट कारोबारी ने अपनी पत्नी और बेटी की मीट काटने वाले धारदार हथियार ‘बुगदे’ से गला काटकर हत्या कर दी। इसके बाद उसने दूसरी बेटी पर भी हमला किया, लेकिन वह बचकर भाग गई। शोर सुनकर मौके पर पहुंचे पड़ोसियों द्वारा सूचना दिए जाने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने घायल बेटी को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस ने आरोपी व्यक्ति को भी हिरासत में ले लिया है।
लोकप्रिय विहार में नूरानी मस्जिद के पास रहने वाला मोहम्मद राजा अंसारी मीट कारोबारी है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी का अपनी पत्नी 40 वर्षीय बेबी तबस्सुम से झगड़ा हुआ था। काफी देर तक हुए झगड़े के बाद सभी से गए। कुछ देर बाद आरोपी ने घर में रखा बुगदा निकाला और पहले पत्नी का गला काटा और फिर 18 वर्षीय बेटी सना तबस्सुम की भी गला काटकर हत्या कर दी। मां और बहन की चीख सुनकर छोटी बेटी जोया भी जाग गई। इसके बाद आरोपी ने उस पर भी हमला कर दिया, मगर वह बचकर वहां से भागने लगी तो आरोपी ने उस पर बुगदा फेंककर मारा, जो जोया की जांघ पर जा लगा। मगर वह किसी तरह से बचकर घर से बाहर निकली और अपनी जान बचाई।
पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस और फोरेंसिक विभाग की टीमों ने घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए। पुलिस की अब तक की शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी का शुक्रवार रात पत्नी और बेटियों से किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर छानबीनशुरू कर दी है।
लखनऊ में पत्नी दिव्या मिश्रा और बहन शीबा की गोली मारकर हत्या के बाद खुदकुशी करने वाले मानस बाजपेई के मामले में मामा अवधेश बाजपेई, अमोल बाजपेई और साली प्रज्ञा मिश्रा ने कई बड़े खुलासे किए हैं. 2017 में अरेंज मैरिज करने वाले मानस और दिव्या के रिश्ते 2019 में मां की मौत के बाद खराब हुए थे. मानस के पास दो पिस्टल और एक तमंचा कहां से आया, इसे लेकर मामा हैरान हैं. वहीं, दिव्या की बहन प्रज्ञा मिश्रा ने आरोप लगाया कि मानस और उसकी बहन ने अपनी मां को पीटा था जिससे उनकी मौत हुई थी.
मामा बोले- अंधेरे से डरने वाला हत्यारा कैसे बना
मानस के मामा अवधेश और अमोल बाजपेई ने बताया कि मानस बेहद डरपोक स्वभाव का था और रात में सुनसान गली से जाने से भी डरता था. वह किसी नशे या बुरी संगत में नहीं था. परिजनों ने बताया कि दोनों अच्छा कमाते थे, लेकिन 2019 में मां की मौत के बाद रिश्ते बिगड़े. बीते 1 साल से दोनों के बीच अलगाव था और कोर्ट में केस चल रहा था.
बीमार बहन का बहुत ख्याल रखता था मानस
मामा के मुताबिक, मां की मौत के बाद मानस की बहन डिप्रेशन में चली गई थी. मानस उसका पूरा इलाज कराता था. उसने घर में सीसीटीवी कैमरे लगवाए थे ताकि बैंक में रहकर भी देख सके कि बहन ने समय से दवा खाई या नहीं. मामा का कहना है कि मां पर कई बार दवा न खाने पर गुस्सा होना हत्या का सबूत नहीं है.
साली प्रज्ञा मिश्रा ने खड़े किए गंभीर सवाल
मृतका दिव्या की बहन और यूट्यूबर पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कई सवाल उठाए हैं. उन्होंने पूछा कि बैंककर्मी मानस के पास तीन-तीन हथियार कहां से पहुंचे. उसने ऑटो से आकर हत्या की, ऐसे में ऑटो वाले की भूमिका की जांच होनी चाहिए. प्रज्ञा का दावा है कि फैमिली कोर्ट में काउंसलर से भी मानस की झड़प हुई थी.
खर्चे को लेकर था विवाद, दिव्या रखना चाहती थी व्रत
प्रज्ञा मिश्रा के अनुसार, मानस ने घर के खर्चों की आधी-आधी लिस्ट बनाई थी जिसे दिव्या ने स्वीकार किया था. जब दिव्या ने अपने हिस्से का खर्च देना बंद किया, तो मानस को चीटिंग लगा. विवाद के बावजूद दिव्या तीज का व्रत रखने वाली थी और उसने हाथ से मानस के नाम का टैटू भी नहीं हटवाया था.
जयपाल/वाराणसी: वाराणसी के सिगरा थाना क्षेत्र के शिवपुरवा इलाके से गत 6 अगस्त से लापता ईशू कन्नौजिया की उसके ही तीन दोस्तों ने बेरहमी से हत्या कर दी. आरोपियों ने शव की पहचान छिपाने और बदबू दबाने के लिए यूट्यूब पर वीडियो देखकर शव को 5 टुकड़ों में काटा और प्लास्टिक के बोरे में भरकर गोबर के गड्ढे में फेंक दिया. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी प्रदीप, उसके सगे भाई रामकृष्ण और उनके मित्र रोहित को गिरफ्तार कर लिया है.
जानिए हत्या की वजह गत 3 अगस्त को शराब पीने के दौरान ईशू ने आरोपी प्रदीप की पिटाई कर दी थी. इसी रंजिश का बदला लेने के लिए प्रदीप ने अपने भाई और दोस्त के साथ मिलकर हत्या की खौफनाक साजिश रची.
ऐसे दिया वारदात को अंजाम 7 अगस्त की रात तीनों ने ईशू को अधिक मात्रा में शराब पिलाई. इसके बाद रोहित और रामकृष्ण ने उसके हाथ पकड़े और प्रदीप ने चापड़ से वार कर उसका गला काट दिया. पहचान छिपाने के लिए सिर और धड़ अलग कर शव के 5 टुकड़े किए गए. 6 अगस्त से लापता ईशू की 17 अगस्त को परिजनों ने सिगरा थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी.
यूट्यूब से सीखा तरीका मुख्य आरोपी प्रदीप ने यूट्यूब पर वीडियो देखकर शव ठिकाने लगाने का तरीका सीखा था. पहचान छिपाने और बदबू दबाने के लिए तीनों ने शव को प्लास्टिक के बोरे में भरा और गोबर से ढके गड्ढे में फेंक दिया.
सीडीआर और सीसीटीवी से खुलासा लापता ईशू की कॉल डिटेल (CDR) निकालने पर अंतिम कॉल प्रदीप की पाई गई. पुलिसिया पूछताछ और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर प्रदीप ने अपना जुर्म कबूल कर लिया.
शव की बरामदगी शुक्रवार रात करीब 10 बजे पुलिस ने लहरतारा-छातडीह पोखरी के पास रेलवे के खंडहरनुमा क्वार्टर में बने गोबर के गड्ढे से सड़ चुका शव बरामद किया. बोरे में गोबर भरे होने और कई दिन बीत जाने के कारण शव काफी हद तक सड़ चुका था. शव को मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा स्थित मोर्चरी में रखवाया गया, सिगरा पुलिस अग्रिम कार्रवाई में जुटी है.
क्या कहती है पुलिस.. वैभव बांगर, ADCP, काशी जोन ने बताया कि ये सारे एक साथ शराब का सेवन कर रहे थे. प्रदीप और ईशू के बीच कहासुनी हो गई और किसी धारदार हत्या से हमला किया. पुलिस ने बताया कि शव को बरामद कर लिया गया है.तीनों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है. पुलिस ने बताया कि ईशू के दोस्तों ने हत्या के बाद बड़े ही सफाई से शव को ठिकाने लगाया. ऐसी जगह चुनी जहां किसी को शंका तक न हो सके। गोबर के गड्ढे में शव को प्लास्टिक के बोरे में भरकर फेंका गया ताकि आसपास के लोगों को दुर्गंध न महसूस हो सके. रेलवे के पास शव को दफन कर दिया.
आगरा के ताजगंज थाना क्षेत्र में 16 वर्षीय छात्र और उसकी 38 वर्षीय ट्यूशन शिक्षिका के एक साथ लापता होने से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. छात्र 11वीं कक्षा में पढ़ता है, जबकि शिक्षिका विवाहित हैं और उनके दो बच्चे हैं. दोनों की उम्र में करीब 22 साल का अंतर है. परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने अलग-अलग पहलुओं से मामले की जांच शुरू की.
स्कूल प्रोजेक्ट के नाम पर निकला था छात्र
परिजनों के अनुसार, चार अगस्त को छात्र स्कूल प्रोजेक्ट से जुड़े काम के लिए करीब तीन हजार रुपये लेकर घर से निकला था. उसने अपनी साइकिल एक दोस्त के घर खड़ी कर दी थी. काफी देर तक घर नहीं लौटने पर परिवार ने उसकी तलाश शुरू की. इसी दौरान पता चला कि जिस शिक्षिका से वह ट्यूशन पढ़ता था, वह भी अपने घर पर मौजूद नहीं थीं. इसके बाद मामला और गंभीर हो गया.
कॉल डिटेल से मिली अहम कड़ी
छात्र के परिजनों ने ताजगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने अपहरण की धाराओं में जांच शुरू की. शिक्षिका के पति ने भी उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई. पुलिस ने दोनों के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल खंगाली तो उनके बीच लंबे समय तक बातचीत होने की जानकारी मिली. इससे जांचकर्ताओं को दोनों के एक साथ निकलने की आशंका हुई.
रेलवे स्टेशन की फुटेज ने बदली जांच
पुलिस ने संभावित रास्तों और स्थानों के सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू किए. आगरा कैंट रेलवे स्टेशन की फुटेज में दोनों ट्रेन में सवार होते नजर आए. इसके बाद पुलिस ने रेलवे रूट और मोबाइल लोकेशन के आधार पर तलाश तेज कर दी. जांच में सामने आया कि छात्र ग्वालियर पहुंचा और बाद में बयाना होते हुए कैलादेवी गया. कुछ समय बाद दोनों अलग-अलग स्थानों पर चले गए.
नोएडा और मथुरा से सुरक्षित बरामद
तकनीकी निगरानी के जरिए पुलिस ने छात्र को नोएडा और शिक्षिका को मथुरा से बरामद कर लिया. पूछताछ में शिक्षिका ने बताया कि छात्र पढ़ाई को लेकर घर में डांट से परेशान था और चार अगस्त को फोन पर उसने आत्महत्या की बात कही थी. उनका दावा है कि उसे रोकने के लिए वह साथ चली गई थीं. बाद में उन्हें अपने फैसले पर पछतावा हुआ, लेकिन लौटने की हिम्मत नहीं जुटा सकीं. पुलिस ने दोनों के बयान दर्ज करने के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया. थाना प्रभारी नीरज कुमार शर्मा के मुताबिक, फिलहाल परिवारों ने आगे कानूनी कार्रवाई से इनकार किया है.