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  • आगरा: 3 साल के बच्चे ने बताया पिछले जन्म का राज! खुद को बताता था हत्या के शिकार दुकानदार का रूप, जानिए टीटू सिंह की रहस्यमयी कहानी.

    आगरा: 3 साल के बच्चे ने बताया पिछले जन्म का राज! खुद को बताता था हत्या के शिकार दुकानदार का रूप, जानिए टीटू सिंह की रहस्यमयी कहानी.

    आगरा: 3 साल के बच्चे ने बताया पिछले जन्म का राज! खुद को बताता था हत्या के शिकार दुकानदार का रूप, जानिए टीटू सिंह की रहस्यमयी कहानी.

    आगरा: क्या किसी बच्चे को अपने पिछले जन्म की बातें याद हो सकती हैं? क्या वह ऐसी जगहों, लोगों और घटनाओं के बारे में बता सकता है, जिनसे उसका मौजूदा जीवन में कोई परिचय न रहा हो? उत्तर प्रदेश के आगरा से जुड़ा टीटू सिंह का मामला वर्षों से ऐसे ही सवालों को लेकर चर्चा में रहा है। बताया जाता है कि बचपन में टीटू ने खुद को सुरेश वर्मा नाम के एक दुकानदार से जोड़ते हुए अपने कथित पिछले जीवन की कई बातें बताई थीं। इस मामले को पुनर्जन्म से जुड़े चर्चित दावों में गिना जाता है, हालांकि इसकी सभी कहानियों और निष्कर्षों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

    छोटी उम्र में करने लगा था पिछले जन्म की बातें

    मीडिया में प्रकाशित विवरणों के अनुसार, टीटू सिंह का जन्म 1983 में आगरा में हुआ था। बताया जाता है कि जब वह लगभग दो से तीन साल का था, तभी उसने अपने परिवार से कहना शुरू कर दिया कि उसका एक दूसरा परिवार भी है। वह कथित तौर पर किसी दूसरी जगह जाने की बात करता और एक ऐसी दुकान का जिक्र करता था, जिसे वह अपना बताता था।

    दावों के मुताबिक, टीटू उस दुकान को रेडियो और टेलीविजन की दुकान बताता था। वह एक महिला और बच्चों का भी जिक्र करता था, जिन्हें वह अपने पिछले जीवन का परिवार मानता था। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि वह अपनी कथित पिछली मौत के बारे में भी बातें करता था।

    शुरुआत में परिवार के लिए यह समझना मुश्किल था कि एक छोटा बच्चा ऐसी बातें क्यों कर रहा है। लेकिन जब उसने बार-बार एक जैसी बातें बताईं, तो कथित तौर पर परिवार ने उनके बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की।

    सुरेश वर्मा की जिंदगी से जोड़ा गया मामला

    इस कहानी में सुरेश वर्मा नाम के एक व्यक्ति का जिक्र आता है, जो आगरा में रेडियो और टेलीविजन की दुकान चलाते थे। उपलब्ध विवरणों के अनुसार, सुरेश वर्मा की 1983 में हत्या हुई थी। टीटू सिंह के बारे में किए जाने वाले दावों में कहा जाता है कि उसने अपने कथित पिछले जीवन की बातें बताते हुए सुरेश वर्मा की दुकान, परिवार और मौत से जुड़ी कुछ जानकारियों का उल्लेख किया था।

    यही समानताएं इस मामले को चर्चा में ले आईं। हालांकि, किसी बच्चे की बातों और किसी मृत व्यक्ति के जीवन के बीच समानता सामने आने भर से पुनर्जन्म वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं हो जाता। ऐसे मामलों में यह देखना भी जरूरी होता है कि जानकारी पहले कैसे दर्ज की गई, उसकी पुष्टि किस तरह हुई और क्या उसके दूसरे सामान्य कारण हो सकते हैं।

    मामले की जांच से जुड़े शोधकर्ताओं का नाम

    बच्चों के पिछले जन्म की कथित यादों पर लंबे समय तक शोध करने वाले अमेरिकी मनोचिकित्सक डॉ. इयान स्टीवेन्सन का नाम इस क्षेत्र के अध्ययन में प्रमुखता से लिया जाता है। उन्होंने अलग-अलग देशों में ऐसे हजारों मामलों का दस्तावेजीकरण किया, जिनमें बच्चों ने किसी कथित पिछले जीवन से जुड़ी बातें बताई थीं।

    भारत में डॉ. सत्वंत पासरिचा ने भी इस विषय पर शोध किया। ऐसे मामलों की जांच में आमतौर पर बच्चे के दावों को दर्ज करना, संबंधित परिवारों से जानकारी लेना और फिर उन दावों की उपलब्ध तथ्यों से तुलना करना शामिल होता है।

    टीटू सिंह के मामले को भी पुनर्जन्म से जुड़े चर्चित उदाहरणों में शामिल किया जाता है। हालांकि, इस कहानी के साथ किए जाने वाले कुछ बड़े दावों—खासकर हत्या के आरोपियों की पहचान और दोषसिद्धि में बच्चे की जानकारी की भूमिका—की पुष्टि के लिए पुलिस रिकॉर्ड, अदालत के दस्तावेज और मूल शोध विवरण देखना जरूरी है।

    क्या बच्चे की बातों से हत्या का मामला सुलझा था?

    टीटू सिंह की कहानी के कुछ संस्करणों में दावा किया जाता है कि उसने सुरेश वर्मा की हत्या से संबंधित जानकारियां बताईं और इनसे जांच को मदद मिली। यही बात इस मामले को दूसरी पुनर्जन्म की कहानियों से अलग और अधिक सनसनीखेज बनाती है।

    लेकिन इस दावे को निश्चित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने से पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि पुलिस ने कौन-सी जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ाई, अदालत में क्या सबूत पेश किए गए और दोषसिद्धि का वास्तविक आधार क्या था। केवल प्रचलित कहानी के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि बच्चे की कथित यादों से ही हत्या का मामला सुलझ गया था।

    क्या बच्चों को सचमुच पिछले जन्म की यादें आती हैं?

    पुनर्जन्म की मान्यता हिंदू धर्म सहित कई धार्मिक और दार्शनिक परंपराओं में मिलती है। वहीं, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह सवाल अब भी विवाद और शोध का विषय है। कुछ शोधकर्ता बच्चों के ऐसे दावों का व्यवस्थित अध्ययन करते हैं, जबकि आलोचक सामान्य जानकारी के अनजाने संपर्क, परिवार या समाज से सुनी गई बातों, याददाश्त में बदलाव और बाद में कहानी के विस्तार जैसी संभावनाओं पर ध्यान देने की बात कहते हैं।

    ऐसे मामलों में सबसे अहम सवाल यह होता है कि बच्चे ने वास्तव में क्या कहा था, वह बात कब दर्ज की गई और उसकी पुष्टि किस स्वतंत्र स्रोत से हुई। यदि जानकारी पहले से लिखित रूप में दर्ज हो और बाद में स्वतंत्र जांच में मेल खाए, तो उसका मूल्यांकन अधिक गंभीरता से किया जा सकता है। इसके बावजूद, ऐसी समानताएं अपने आप पुनर्जन्म का निर्णायक वैज्ञानिक प्रमाण नहीं बन जातीं।

    उम्र बढ़ने के साथ कम हो जाती हैं कथित यादें?

    पिछले जन्म की बातें बताने वाले बच्चों के बारे में कई केस रिपोर्टों में उल्लेख मिलता है कि उम्र बढ़ने के साथ उनकी कथित यादें कम होने लगती हैं। कुछ शोध विवरणों में पांच से आठ साल की उम्र के बीच ऐसी बातों के कमजोर पड़ने का जिक्र है। हालांकि, यह हर बच्चे पर लागू होने वाला कोई निश्चित नियम नहीं है और इससे पुनर्जन्म की पुष्टि भी नहीं होती।

    टीटू सिंह की कहानी भी इसी कारण लोगों की जिज्ञासा का विषय बनी रही। इसमें बचपन के दावों, एक मृत दुकानदार की जिंदगी से कथित समानताओं और परिवारों के बीच संपर्क की बातें सामने आती हैं।

    टीटू सिंह की कहानी क्यों चर्चा में रहती है?

    टीटू सिंह का मामला लोगों को इसलिए आकर्षित करता है, क्योंकि इसमें एक छोटे बच्चे की कथित यादों को एक वास्तविक व्यक्ति की जिंदगी और हत्या की घटना से जोड़ा जाता है। यह कहानी पुनर्जन्म, स्मृति और चेतना से जुड़े कई सवाल उठाती है।

    हालांकि, इस मामले को समझते समय आस्था, व्यक्तिगत अनुभव और प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है। जब तक सभी प्रमुख दावों की पुष्टि मूल शोध और आधिकारिक दस्तावेजों से न हो, तब तक इसे पुनर्जन्म का निर्णायक प्रमाण या हत्या सुलझाने की सिद्ध कहानी कहना उचित नहीं होगा।

    डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध प्रकाशित विवरणों के आधार पर तैयार किया गया है। टीटू सिंह से जुड़े कुछ दावों, विशेषकर हत्या की जांच और दोषसिद्धि में उनकी कथित भूमिका, की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। पुनर्जन्म को लेकर वैज्ञानिक समुदाय में सर्वसम्मति नहीं है।

  • कानपुर में थाई महिला: का आरोप- शादी के बाद धर्म बदलने का दबाव, 55 लाख की स्पोर्ट्स बाइकें दिलाने का भी दावा

    कानपुर में थाई महिला: का आरोप- शादी के बाद धर्म बदलने का दबाव, 55 लाख की स्पोर्ट्स बाइकें दिलाने का भी दावा

    कानपुर में थाई महिला: का आरोप- शादी के बाद धर्म बदलने का दबाव, 55 लाख की स्पोर्ट्स बाइकें दिलाने का भी दावा

    कानपुर: थाईलैंड की रहने वाली एक महिला ने कानपुर के टेनरी कारोबारी मोहम्मद इरफान पर शादी के बाद धोखा देने, धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने और उससे लाखों रुपये की रकम लेने का आरोप लगाया है। महिला का दावा है कि उसने रिश्ते के दौरान इरफान को करीब 55 लाख रुपये की दो महंगी स्पोर्ट्स बाइकें दिलवाई थीं। आरोप है कि जब उसने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की तो इरफान ने उससे संपर्क कम कर दिया और बाद में बात करना भी बंद कर दिया।

    महिला मंगलवार को मामले की शिकायत लेकर पुलिस अधिकारियों के पास पहुंची। उसने पुलिस को शादी से जुड़ी तस्वीरें, कार्ड और अन्य दस्तावेज भी दिखाए हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    सोशल मीडिया के जरिए हुई थी पहचान

    महिला के मुताबिक, करीब चार साल पहले सोशल मीडिया के जरिए उसकी मुलाकात इरफान से हुई थी। इरफान कारोबार के सिलसिले में थाईलैंड आता-जाता था। दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और करीब चार साल तक उनका संपर्क बना रहा।

    महिला का दावा है कि करीब दो साल पहले दोनों ने थाई परंपरा के अनुसार शादी की थी। इस दावे के समर्थन में उसने पुलिस को शादी की तस्वीरें, कार्ड और अन्य दस्तावेज सौंपे हैं।

    साथ रहने के लिए धर्म बदलने का आरोप

    महिला का आरोप है कि शादी के बाद जब उसने भारत आकर इरफान के साथ रहने की बात कही तो उसका रवैया बदल गया। उसके मुताबिक, इरफान ने कहा कि अगर उसे भारत में उसके साथ रहना है तो उसे इस्लाम कबूल करना होगा और बुर्का पहनकर रहना पड़ेगा।

    महिला का कहना है कि उसने धर्म परिवर्तन से इनकार कर दिया। इसके बाद उसने इरफान से अपनी दी हुई रकम वापस मांगनी शुरू की। आरोप है कि पहले रकम लौटाने में टालमटोल की गई और बाद में उसका फोन उठाना भी बंद कर दिया गया।

    भारत पहुंची तो सामने आई पहली शादी की जानकारी

    महिला के अनुसार, फरवरी 2026 में इरफान भारत लौट आया था। शुरुआत में उसने बीमारी का हवाला दिया, लेकिन बाद में दोनों के बीच संपर्क पूरी तरह टूट गया। कई बार फोन करने के बाद भी जब बात नहीं हुई तो वह कानपुर पहुंच गई।

    महिला का दावा है कि वह एक परिचित के साथ इरफान के लाटूश रोड स्थित घर पहुंची। वहां उसे पता चला कि इरफान पहले से शादीशुदा है और उसके तीन बच्चे हैं।

    महिला ने आरोप लगाया कि घर पहुंचने पर इरफान ने पहले उसे पहचानने से इनकार किया। बाद में पहचानने के बावजूद दोनों के बीच विवाद हुआ। महिला का दावा है कि धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया और विरोध करने पर उसके साथ मारपीट तथा अभद्रता की गई।

    दो स्पोर्ट्स बाइक के लिए 55 लाख रुपये देने का दावा

    महिला ने पुलिस को बताया कि इरफान को महंगी कारों और स्पोर्ट्स बाइक का शौक है। उसका दावा है कि इरफान के दो जन्मदिन के मौके पर उसने दो महंगी बाइकों की खरीद के लिए रकम दी थी।

    उसके मुताबिक, पहली बाइक के लिए करीब 21 लाख रुपये और दूसरी के लिए लगभग 34 लाख रुपये दिए गए। इस तरह दोनों बाइक पर करीब 55 लाख रुपये खर्च होने का दावा किया गया है।

    महिला ने यह भी दावा किया कि इरफान सोशल मीडिया पर इन महंगी बाइकों के साथ तस्वीरें और पोस्ट साझा करता रहा है।

    रेस्टोरेंट गिरवी रखकर पैसे जुटाने का दावा

    महिला का कहना है कि थाईलैंड में उसका रेस्टोरेंट और कैंटीन का कारोबार है। उसका आरोप है कि इरफान पर खर्च करते-करते जब उसके पास पैसे कम पड़ने लगे तो उसने अपना रेस्टोरेंट बैंक के पास गिरवी रखकर लोन लिया।

    उसके मुताबिक, इसके बाद भी जरूरत पड़ने पर उसने अपनी बहन और रिश्तेदारों से पैसे उधार लिए और इरफान को रकम देती रही। अब वह अपनी रकम वापस मांग रही है, लेकिन इरफान ने उससे संपर्क खत्म कर लिया।

    इरफान की 2012 में हुई थी पहली शादी

    पुलिस जांच के मुताबिक, इरफान की पहली शादी वर्ष 2012 में हुई थी और उसके तीन बच्चे हैं। जाजमऊ में उसके टेनरी कारोबार से जुड़े होने की जानकारी भी सामने आई है।

    पुलिस ने इरफान को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद जब उसे मीडिया के सामने लाया गया तो वह भावुक होकर रोने लगा। दूसरी ओर, इरफान की मां ने थाई महिला के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।

    मां ने लगाए ब्लैकमेलिंग के आरोप

    इरफान की मां का दावा है कि थाई महिला उनके बेटे को पैसे के लिए फंसा रही है और ब्लैकमेल कर रही है। उनका कहना है कि इरफान ने परिवार को कारोबार में नुकसान होने की बात बताई थी और परिवार ने भी उसकी आर्थिक मदद की थी।

    महंगी बाइकों को लेकर मां का दावा है कि उन्हें इरफान ने अपनी कमाई से खरीदा था। उन्होंने यह भी कहा कि बाइक खरीदने को लेकर परिवार में पहले भी नाराजगी रही थी।

    पुलिस ने दर्ज किया केस

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, महिला की शिकायत के आधार पर इरफान के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने, मारपीट, धोखाधड़ी समेत अन्य आरोप लगाए गए हैं।

    फिलहाल पुलिस महिला के दावों, शादी से जुड़े दस्तावेजों, पैसों के लेन-देन और दोनों पक्षों के बयानों की जांच कर रही है। महिला और इरफान की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

  • मेरठ: 540 दिन बाद अमित हत्याकांड में पत्नी रविता और प्रेमी अमरदीप दोषी, 51 कॉल और 1000 रुपये के सांप ने खोला राज.

    मेरठ: 540 दिन बाद अमित हत्याकांड में पत्नी रविता और प्रेमी अमरदीप दोषी, 51 कॉल और 1000 रुपये के सांप ने खोला राज.

    मेरठ: 540 दिन बाद अमित हत्याकांड में पत्नी रविता और प्रेमी अमरदीप दोषी, 51 कॉल और 1000 रुपये के सांप ने खोला राज.

    मेरठ, उत्तर प्रदेश: अमित कश्यप हत्याकांड में करीब 540 दिनों की सुनवाई के बाद अदालत ने उसकी पत्नी रविता कश्यप और उसके कथित प्रेमी अमरदीप को दोषी करार दिया है। मामले में अभियोजन की ओर से 12 गवाह पेश किए गए। पुलिस जांच में सामने आए कॉल रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सांप से जुड़ी गवाही को भी अहम साक्ष्य माना गया।

    इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि हत्या को कथित तौर पर सांप के डसने से हुई मौत का रूप देने की कोशिश की गई थी। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सर्पदंश का कोई निशान नहीं मिला और मौत का कारण दम घुटना सामने आया।

    हत्या के बाद 51 बार हुई बातचीत

    अभियोजन के मुताबिक, 12 अप्रैल 2025 की रात से अगले दिन तक रविता और अमरदीप के बीच 51 बार बातचीत हुई थी। मोबाइल कंपनियों के अधिकारियों ने अदालत में कॉल डिटेल रिकॉर्ड की पुष्टि की।

    अभियोजन का कहना था कि हत्या के बाद अमरदीप अपनी बुआ के घर चला गया था और वहां से रविता से बार-बार संपर्क कर रहा था। बचाव पक्ष ने इस घटनाक्रम पर अलग दलील दी।

    रविता ने अदालत में दावा किया कि जिस नंबर पर अमरदीप से बातचीत हुई, वह अमित इस्तेमाल कर रहा था और उसने खुद अमरदीप को कोई कॉल नहीं की थी। अभियोजन ने इस दावे को पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर चुनौती दी।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल

    जांच अधिकारी ने अदालत में बताया कि पोस्टमार्टम के अनुसार अमित की मौत 12 अप्रैल की रात ही हो चुकी थी। ऐसे में अगले दिन अमित के मोबाइल से बातचीत होने का दावा संदेह के घेरे में आया।

    अमित की मां मुनेश और भाई मोनू को भी अभियोजन की ओर से गवाह बनाया गया। मां ने अमरदीप को 12 अप्रैल की रात घर से निकलते देखने की बात अदालत में कही।

    अभियोजन ने अमरदीप की गतिविधियों के समय को लेकर भी अदालत में तर्क दिया। बचाव पक्ष की ओर से अमरदीप के मामा ने दावा किया था कि वह रात करीब 10 बजे तक अपनी बुआ के घर पर मौजूद था। अभियोजन ने उसकी आवाजाही के समय और दूरी को सामने रखते हुए अपनी दलील रखी।

    करीब 1000 रुपये में लिया गया था सांप

    मामले में सांप की कहानी भी जांच का अहम हिस्सा बनी। अभियोजन के गवाह कृष्ण ने अदालत में बताया कि उसने करीब 1000 रुपये में सांप उपलब्ध कराया था।

    बताया गया कि सांप की मांग यह कहकर की गई थी कि उसे माता के जागरण में पूजा के लिए इस्तेमाल किया जाना है और वह जहरीला नहीं होना चाहिए। कृष्ण ने यह सांप सपेरे प्रीतम नाथ से लिया था।

    सपेरे प्रीतम नाथ ने अदालत में बताया कि उसने कृष्ण को ‘बूढ़ा घोड़ा पछाड़’ नाम का सांप दिया था। घटना के बाद सुखपाल और पिंटू ने सांप को पकड़कर बोरे में बंद करने की बात कही।

    चारपाई पर मिला था सांप, लेकिन डसने के निशान नहीं

    अभियोजन के अनुसार, सांप को अमित की चारपाई पर रखा गया था ताकि उसकी मौत को सर्पदंश से हुई घटना बताया जा सके। हालांकि, पोस्टमार्टम के दौरान शरीर पर सांप के काटने का कोई निशान नहीं मिला।

    इसके बाद जांच में यह सवाल महत्वपूर्ण बन गया कि अगर मौत सांप के डसने से नहीं हुई तो अमित की जान कैसे गई।

    गला दबाने से हुई मौत

    डॉक्टर कपिल गर्ग की गवाही के मुताबिक, अमित की मौत सांप के काटने से नहीं बल्कि गला और नाक-मुंह दबाने के कारण दम घुटने से हुई थी।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गर्दन पर चोट और संघर्ष के निशान पाए गए। त्वचा

  • गाजियाबाद: बेटे की मौत को हादसा नहीं मान रहे रिटायर्ड वायु सैनिक, तीन दिन से धरने पर बैठे पिता ने मांगी CBI जांच.

    गाजियाबाद: बेटे की मौत को हादसा नहीं मान रहे रिटायर्ड वायु सैनिक, तीन दिन से धरने पर बैठे पिता ने मांगी CBI जांच.

    गाजियाबाद: बेटे की मौत को हादसा नहीं मान रहे रिटायर्ड वायु सैनिक, तीन दिन से धरने पर बैठे पिता ने मांगी CBI जांच.

    गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश: अपने बेटे की मौत के मामले में न्याय की मांग को लेकर एक सेवानिवृत्त वायु सैनिक पिछले तीन दिनों से गाजियाबाद कलक्ट्रेट के बाहर धरने पर बैठे हैं। रिटायर्ड वायु सैनिक खजान सिंह का कहना है कि उनके बेटे आयुष प्रताप सिंह की मौत को शुरुआत में हादसा माना गया था, लेकिन बाद में सामने आए कुछ तथ्यों ने उन्हें घटना पर संदेह करने के लिए मजबूर किया।

    खजान सिंह का कहना है कि वह भारतीय वायु सेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनका कहना है कि जिस दिन देश में एयरफोर्स डे मनाया जा रहा है, उस दिन भी वह कार्यक्रम में शामिल होने के बजाय अपने बेटे को न्याय दिलाने के लिए धरने पर बैठे हैं।

    दही लेने घर से निकला था बेटा

    खजान सिंह के अनुसार, उनका बेटा आयुष IIT की परीक्षा की तैयारी कर रहा था। 28 दिसंबर 2025 को दोपहर करीब एक बजे वह घर से दही लेने के लिए निकला था। काफी देर तक वापस नहीं आने पर परिवार ने उसके मोबाइल पर फोन किया।

    पिता का दावा है कि फोन किसी दूसरे व्यक्ति ने उठाया और बताया कि आश्रम रोड पर आयुष का एक्सीडेंट हो गया है और उसे महात्मा गांधी अस्पताल ले जाया जा रहा है। परिवार के लोग अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने आयुष को मृत घोषित कर दिया।

    CCTV और हेलमेट को लेकर पिता ने उठाए सवाल

    खजान सिंह का कहना है कि शुरुआत में उन्होंने भी इसे सड़क हादसा ही माना था, लेकिन बाद में उन्हें यह बात संदिग्ध लगी कि आयुष दही लेने के लिए घर से करीब साढ़े तीन किलोमीटर दूर क्यों गया था।

    उन्होंने खुद घटना की जानकारी जुटानी शुरू की। पिता के मुताबिक, घटनास्थल से कुछ दूरी पहले लगे CCTV की फुटेज में आयुष के हेलमेट पहने होने की जानकारी मिली। उनका आरोप है कि हादसे के दौरान उसके सिर और नाक पर चोट लगी, जबकि हेलमेट सड़क के दूसरी तरफ पड़ा मिला। इन्हीं परिस्थितियों के आधार पर वह घटना की दोबारा जांच की मांग कर रहे हैं।

    ठेकेदार समेत चार लोगों पर लगाया आरोप

    खजान सिंह ने आरोप लगाया है कि पाइपलाइन डालने के काम में कथित भ्रष्टाचार का विरोध करने के कारण कुछ लोगों से उनकी रंजिश थी। उनका दावा है कि इसी विवाद के चलते एक ठेकेदार समेत चार लोगों की भूमिका उनके बेटे की मौत में हो सकती है।

    हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच में ही यह स्पष्ट होगा कि आयुष की मौत सड़क हादसा थी या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।

    छह अक्टूबर से धरना, CBI जांच की मांग

    खजान सिंह के मुताबिक, उन्होंने मामले में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अभी तक आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। इसी के विरोध में उन्होंने 6 अक्टूबर से गाजियाबाद कलक्ट्रेट के बाहर धरना शुरू किया है।

    धरने के पहले दिन उन्होंने भूख हड़ताल भी की। किसान यूनियन ने भी उनके आंदोलन को समर्थन दिया है। संगठन की ओर से मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मामले की CBI जांच कराने की मांग की गई है।

    परिवार अब मामले की निष्पक्ष जांच और बेटे की मौत की असली वजह सामने लाने की मांग कर रहा है।

  • रामपुर: शराब के ठेके पर दिनदहाड़े छह गोलियां चलने से सनसनी, 24 से ज्यादा मुकदमों वाले बदमाश की हत्या.

    रामपुर: शराब के ठेके पर दिनदहाड़े छह गोलियां चलने से सनसनी, 24 से ज्यादा मुकदमों वाले बदमाश की हत्या.

    रामपुर: शराब के ठेके पर दिनदहाड़े छह गोलियां चलने से सनसनी, 24 से ज्यादा मुकदमों वाले बदमाश की हत्या.

    रामपुर, उत्तर प्रदेश: बिलासपुर कोतवाली क्षेत्र में गुरुवार को शराब के ठेके पर दिनदहाड़े गोलीबारी से हड़कंप मच गया। बाइक सवार तीन हमलावरों ने एक व्यक्ति पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोली लगने से उसकी मौत हो गई। मृतक की पहचान सनी उर्फ सनया के रूप में हुई है।

    शराब के ठेके पर हुई वारदात

    बताया जा रहा है कि सनी गांव स्थित शराब के ठेके पर मौजूद था। इसी दौरान एक बाइक पर सवार होकर तीन हमलावर वहां पहुंचे और उस पर फायरिंग कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने करीब छह गोलियां चलाईं और वारदात के बाद मौके से फरार हो गए।

    गोलीबारी से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल की जांच शुरू की।

    मृतक पर दो दर्जन से ज्यादा मुकदमे

    पुलिस के अनुसार, मृतक मूल रूप से बरेली का रहने वाला था और वर्तमान में बिलासपुर के सुभाषनगर डिबडिबा क्षेत्र में रह रहा था। उसके खिलाफ करीब 24 से ज्यादा मुकदमे दर्ज होने की बात सामने आई है।

    मृतक पर गुंडा एक्ट के तहत भी कार्रवाई हो चुकी थी। पुलिस के मुताबिक, इससे पहले एक मुठभेड़ के दौरान उसे गिरफ्तार किया गया था और उस कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगने से वह घायल हुआ था।

    हमलावरों की तलाश में जुटी पुलिस

    फिलहाल हत्या के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस हमलावरों की पहचान और वारदात के कारणों का पता लगाने में जुटी है।

    पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ करने के साथ घटनास्थल के आसपास उपलब्ध CCTV फुटेज की भी जांच कर रही है। हमलावर किस दिशा से आए और वारदात के बाद किस रास्ते से फरार हुए, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।

    मामले में पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ हत्या की वजह और हमलावरों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।

  • मथुरा: तीन दोस्तों के साथ जंगल गया युवक नहीं लौटा, पुलिस डॉग ने गड्ढे तक पहुंचाया; शव बरामद.

    मथुरा: तीन दोस्तों के साथ जंगल गया युवक नहीं लौटा, पुलिस डॉग ने गड्ढे तक पहुंचाया; शव बरामद.

    मथुरा: तीन दोस्तों के साथ जंगल गया युवक नहीं लौटा, पुलिस डॉग ने गड्ढे तक पहुंचाया; शव बरामद.

    मथुरा, उत्तर प्रदेश: कोसीकलां थाना क्षेत्र के बरका गांव में एक युवक की हत्या कर शव जंगल में दफन किए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस ने डॉग स्क्वायड की मदद से जंगल में एक गड्ढे से युवक का शव बरामद किया। मामले में युवक के साथ जंगल गए उसके तीन दोस्तों पर हत्या का आरोप लगाया गया है, जो घटना के बाद से फरार बताए जा रहे हैं।

    सुबह तीन दोस्तों के साथ जंगल गया था युवक

    बरका गांव निवासी शौकीन बुधवार सुबह करीब 8 बजे अपने तीन दोस्तों विष्णु, लक्ष्मण और आशीष के साथ जंगल की ओर गया था। तीनों दोस्त वापस गांव लौट आए, लेकिन शौकीन घर नहीं पहुंचा।

    काफी देर तक उसका इंतजार करने के बाद परिजनों को अनहोनी की आशंका हुई। परिवार के लोग तीनों दोस्तों के घर पहुंचे और शौकीन के बारे में पूछताछ की। आरोप है कि तीनों ने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। इसके बाद तीनों गांव से गायब हो गए।

    परिजनों ने जताई हत्या की आशंका

    तीनों दोस्तों के अचानक गायब होने के बाद परिजनों का शक गहरा गया। परिवार ने पुलिस को शिकायत देकर तीनों युवकों पर शौकीन की हत्या करने का आरोप लगाया।

    सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों के साथ मिलकर युवक की तलाश शुरू की। काफी तलाश के बाद पुलिस ने डॉग स्क्वायड की मदद लेने का फैसला किया।

    खोजी कुत्ते ने गड्ढे तक पहुंचाया

    रात करीब 9 बजे डॉग स्क्वायड की मदद से जंगल में तलाश शुरू की गई। पुलिस के मुताबिक, खोजी कुत्ता एक स्थान पर पहुंचा, जहां जमीन में गड्ढा था। खुदाई करने पर वहां से शौकीन का शव बरामद हुआ।

    पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। हत्या के कारणों का अभी स्पष्ट रूप से पता नहीं चल पाया है।

    शराब पीने के बाद विवाद की आशंका

    कोसीकलां थाना प्रभारी के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि चारों युवकों ने जंगल में एक साथ शराब पी थी। पुलिस को आशंका है कि इसी दौरान किसी बात को लेकर विवाद हुआ और शौकीन की हत्या कर दी गई। इसके बाद शव को गड्ढा खोदकर जमीन में दबा दिया गया।

    हालांकि, हत्या की वास्तविक वजह और वारदात में तीनों आरोपितों की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

    तीनों नामजद आरोपी फरार

    परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीनों युवकों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस उनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

    पुलिस का कहना है कि आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में हत्या की पूरी वजह और घटनाक्रम का खुलासा होने की उम्मीद है।

  • उन्नाव: कपड़े धोने को लेकर शुरू हुआ विवाद, सगे भाई पर धारदार हथियारों से हमला; मौत के बाद कई आरोपी हिरासत में.

    उन्नाव: कपड़े धोने को लेकर शुरू हुआ विवाद, सगे भाई पर धारदार हथियारों से हमला; मौत के बाद कई आरोपी हिरासत में.

    उन्नाव: कपड़े धोने को लेकर शुरू हुआ विवाद, सगे भाई पर धारदार हथियारों से हमला; मौत के बाद कई आरोपी हिरासत में.

    उन्नाव, उत्तर प्रदेश: बांगरमऊ कोतवाली क्षेत्र में कपड़े धोने को लेकर शुरू हुआ पारिवारिक विवाद कथित तौर पर खूनी संघर्ष में बदल गया। आरोप है कि परिवार के ही लोगों ने दिलशाद उर्फ पप्पू पर कुल्हाड़ी, तलवार और लाठी-डंडों से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल दिलशाद को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    वाशिंग मशीन में कपड़े धोने को लेकर हुआ विवाद

    घटना बांगरमऊ के गंज मुरादाबाद स्थित मोचियाना मोहल्ले की बताई जा रही है। मृतक की पत्नी सूफिया बानो के मुताबिक, वह सुबह घर में वाशिंग मशीन से कपड़े धो रही थी। इसी दौरान उसके ससुर मुर्तजा ने कपड़े धोने को लेकर आपत्ति जताई।

    बात बढ़ने पर परिवार के अन्य सदस्य भी कथित तौर पर विवाद में शामिल हो गए। महिला ने आरोप लगाया कि इसी दौरान उसके साथ मारपीट की गई, जिससे उसके हाथ में चोट आई। उसका दावा है कि उसने पुलिस से शिकायत भी की थी।

    घर में घुसकर दिलशाद पर हमला करने का आरोप

    महिला के अनुसार, विवाद के कुछ समय बाद आरोपियों ने कथित तौर पर दिलशाद पर हमला कर दिया। आरोप है कि हमलावरों के पास कुल्हाड़ी और तलवार जैसे धारदार हथियार थे।

    हमले में दिलशाद गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर गया। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची और उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बांगरमऊ ले जाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया

    पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। सीओ बांगरमऊ के मुताबिक, सुबह करीब 9:30 बजे पारिवारिक विवाद में मारपीट की सूचना मिली थी। परिजनों की शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

    पुलिस ने मामले में कई मुख्य आरोपियों और संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। घटना से जुड़े उपलब्ध साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    नोट: मामले में लगाए गए आरोप पुलिस जांच और शिकायत पर आधारित हैं। आरोपियों की दोषसिद्धि अदालत के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगी।

  • बिजनौर: महज 80 रुपये के लिए दोस्त की हत्या का आरोप, शराब पीते समय हाथ-पैर पकड़े और नुकीली सलाई से किए वार.

    बिजनौर: महज 80 रुपये के लिए दोस्त की हत्या का आरोप, शराब पीते समय हाथ-पैर पकड़े और नुकीली सलाई से किए वार.

    बिजनौर: महज 80 रुपये के लिए दोस्त की हत्या का आरोप, शराब पीते समय हाथ-पैर पकड़े और नुकीली सलाई से किए वार.

    बिजनौर, उत्तर प्रदेश: स्योहारा क्षेत्र में दोस्ती के रिश्ते को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। पुलिस जांच के मुताबिक, शराब पीने के दौरान तीन दोस्तों ने कथित तौर पर अनीस की हत्या कर दी। आरोपियों को शक था कि अनीस के पास काफी पैसे हैं, लेकिन वारदात के बाद उसकी जेब से सिर्फ 80 रुपये मिले।

    शराब पीने के दौरान बिगड़ी बात

    पुलिस के अनुसार घटना 23 सितंबर की रात की है। अनीस अपने साथियों हिमांशु, राजा और जसविन्दर उर्फ हर्ष उर्फ अंगा के साथ स्योहारा क्षेत्र में बैठकर शराब पी रहा था।

    इसी दौरान किसी बात को लेकर कहासुनी और गाली-गलौज शुरू हो गई। पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपियों को कथित तौर पर लगा कि अनीस के पास काफी रकम है। इसके बाद उस पर हमला करने की योजना बनाई गई।

    हाथ-पैर पकड़े और गला दबाने का आरोप

    पुलिस के मुताबिक, हिमांशु और राजा ने कथित तौर पर अनीस के हाथ-पैर पकड़ लिए। इसके बाद जसविन्दर पर बेल्ट से उसका गला दबाने और पगड़ी में इस्तेमाल होने वाली नुकीली सलाई से उसकी गर्दन पर वार करने का आरोप है।

    पुलिस का कहना है कि गंभीर चोट और दम घुटने के कारण अनीस की मौत हो गई।

    जेब से निकले सिर्फ 80 रुपये

    वारदात के बाद आरोपियों ने अनीस की जेब तलाशी तो कथित तौर पर उसमें सिर्फ 80 रुपये मिले। इसके बाद शव को कुम्हारपुरा गांव के पास राजवाह के किनारे गन्ने के खेत में छिपाने का आरोप है।

    जांच के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर घटना के दौरान पहने खून लगे कपड़े भी अलग-अलग जगहों पर फेंक दिए और अनीस की स्प्लेंडर मोटरसाइकिल लेकर वहां से चले गए।

    गुमशुदगी के बाद पुलिस ने शुरू की जांच

    अनीस के घर नहीं लौटने पर उसके भाई जमील ने 27 सितंबर को स्योहारा थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने सर्विलांस और स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाकर जांच आगे बढ़ाई।

    जांच के दौरान पुलिस का शक अनीस के करीबी दोस्तों पर गया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के बाद हिमांशु और राजा को पहले गिरफ्तार किया गया था। अब तीसरे आरोपी जसविन्दर को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

    आरोपी की निशानदे

  • संभल में अनोखी शवयात्रा: आगे-आगे पालतू हाथी, पीछे राम-कृष्ण की झांकी और सैकड़ों ट्रैक्टर.

    संभल में अनोखी शवयात्रा: आगे-आगे पालतू हाथी, पीछे राम-कृष्ण की झांकी और सैकड़ों ट्रैक्टर.

    संभल में अनोखी शवयात्रा: आगे-आगे पालतू हाथी, पीछे राम-कृष्ण की झांकी और सैकड़ों ट्रैक्टर.

    संभल: उत्तर प्रदेश के संभल में 74 वर्षीय रामबेटी देवी की अंतिम यात्रा चर्चा का विषय बन गई। उनकी शवयात्रा में आगे-आगे परिवार के पालतू हाथी मोहन और परमा चलते रहे, जबकि पीछे भगवान शिव और कृष्ण की झांकी के साथ सैकड़ों ट्रैक्टरों का काफिला नजर आया। करीब 15 किलोमीटर लंबी इस अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।

    पालतू हाथियों के साथ निकली अंतिम यात्रा

    रजपुरा थाना क्षेत्र के ब्यौरा गांव की रहने वाली रामबेटी देवी की तबीयत खराब होने के बाद उन्हें अलीगढ़ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बुधवार सुबह उनका निधन हो गया। इसकी जानकारी मिलते ही आसपास के इलाकों से लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने लगे।

    परिवार ने अंतिम संस्कार की तैयारी की और जब अंतिम यात्रा गांव से निकली तो उसमें रामबेटी देवी के पालतू हाथी मोहन और परमा भी शामिल हुए। दोनों हाथी अर्थी के आगे-आगे चलते हुए राजघाट गंगा घाट तक पहुंचे।

    राम-कृष्ण की झांकी और ट्रैक्टरों का काफिला

    रामबेटी देवी की अंतिम यात्रा में धार्मिक झांकियां भी शामिल थीं। अर्थी के पीछे ट्रैक्टर पर भगवान शिव और कृष्ण की झांकी सजाई गई थी। इसके अलावा बड़ी संख्या में ट्रैक्टर अंतिम यात्रा में शामिल हुए।

    बताया गया कि ब्यौरा गांव से शुरू हुई अंतिम यात्रा करीब 15 किलोमीटर दूर राजघाट गंगा घाट तक पहुंची। इस दौरान करीब एक हजार लोग इसमें शामिल हुए।

    पति के निधन के बाद दोनों हाथियों को पाला

    रामबेटी देवी के बेटे मनवीर के मुताबिक, उनके पिता का वर्ष 2012 में निधन हो गया था। इसके बाद उनकी मां ने दोनों हाथियों मोहन और परमा की देखभाल की और उन्हें परिवार के सदस्य की तरह पाला।

    परिवार का कहना है कि रामबेटी देवी का दोनों हाथियों से काफी लगाव था। इसी वजह से उनकी इच्छा और परिवार के रिश्ते को देखते हुए दोनों हाथियों को अंतिम यात्रा में शामिल किया गया।

    मां की मौत के बाद उदास हैं हाथी

    परिवार के मुताबिक, रामबेटी देवी के निधन के बाद दोनों हाथियों के व्यवहार में भी उदासी नजर आ रही है। आसपास के इलाके में इस परिवार की पहचान भी हाथियों के कारण रही है।

    रामबेटी देवी की अंतिम यात्रा में पालतू हाथियों की मौजूदगी ने इसे बेहद अलग बना दिया। परिवार के लिए यह सिर्फ एक अंतिम यात्रा नहीं थी, बल्कि उस महिला को अंतिम विदाई देने का भावुक पल था, जिसने वर्षों तक दोनों हाथियों को अपने परिवार के सदस्य की तरह संभाला था।

  • पीलीभीत: पति के साथ कोर्ट आई महिला की नजर प्रेमी पर पड़ी, देखते ही गले लग गई, मामला पहुंचा हैरान करने वाला मोड़.

    पीलीभीत: पति के साथ कोर्ट आई महिला की नजर प्रेमी पर पड़ी, देखते ही गले लग गई, मामला पहुंचा हैरान करने वाला मोड़.

    पीलीभीत: कचहरी परिसर के बाहर उस समय हंगामा हो गया, जब एक महिला अपने पहले पति के साथ कोर्ट पहुंची और वहां मौजूद दूसरे युवक को देखते ही उससे लिपट गई। पहले पति और उसके साथ मौजूद लोगों ने महिला को युवक से अलग करने की कोशिश की, लेकिन वह उसके साथ रहने की जिद पर अड़ी रही।

    शुरुआत में युवक को महिला का प्रेमी बताया जा रहा था, लेकिन पुलिस की जांच में मामला कुछ और निकला। पूछताछ के दौरान सामने आया कि महिला ने कथित तौर पर पहले पति से तलाक लिए बिना करीब छह महीने पहले उसी युवक से कोर्ट मैरिज कर ली थी।

    कोर्ट में तारीख पर पहुंची थी महिला

    जानकारी के मुताबिक, महिला अपने पहले पति के साथ एक मामले में तारीख पर पीलीभीत कचहरी पहुंची थी। इसी दौरान उसकी नजर वहां मौजूद एक युवक पर पड़ी। युवक को देखते ही महिला उसके पास पहुंच गई और उससे लिपट गई।

    इसको लेकर मौके पर विवाद और हंगामा शुरू हो गया। पहले पति की ओर से महिला को युवक से अलग करने का प्रयास किया गया, लेकिन महिला युवक के साथ जाने की बात कहती रही।

    पुलिस जांच में सामने आया दूसरा निकाह/विवाह

    मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंची तो जांच शुरू हुई। पुलिस की पूछताछ में कथित तौर पर पता चला कि जिस युवक को पहले महिला का प्रेमी समझा जा रहा था, वह उसका दूसरा पति है।

    जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया कि महिला ने पहले पति से कानूनी तौर पर तलाक लिए बिना करीब छह महीने पहले दूसरे युवक के साथ कोर्ट मैरिज की थी।

    पहले पति के साथ चल रहा था विवाद

    बताया जा रहा है कि महिला और उसके पहले पति के बीच पहले से वैवाहिक विवाद चल रहा था। इसी मामले में दोनों कोर्ट पहुंचे थे। कचहरी परिसर में दूसरे युवक के सामने आने के बाद पूरा मामला सार्वजनिक हो गया।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। महिला ने दूसरी शादी किन परिस्थितियों में की, पहली शादी की कानूनी स्थिति क्या थी और दोनों पक्षों के बीच विवाद की वास्तविक वजह क्या है, इन सभी पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है।