हाईवे पर देर रात एक छोटी सी झपकी के कारण बहुत लोगों की जान चली जाती है. इस तरह के हादसों को रोकने के लिए IIT मद्रास ने कमाल की इंटेलिसीट विकसित की है.
भारत की सड़कें दुनिया की सबसे खतरनाक सड़कों में से एक हैं और ज्यादातर हादसों की वजह गाड़ियों की खराबी नहीं, बल्कि इंसानी गलतियां होती हैं. रात के सन्नाटे में अक्सर नींद के कारण आंखें भारी होने लगती हैं और फिर कुछ ही सेकंड की लापरवाही के कारण बड़ा हादसा हो जाता है. भारत के हाईवे पर होने वाले जानलेवा हादसों में एक बड़ी वजह ड्राइवर्स की नींद होती है. इसी समस्या को दूर करने के लिए एक इनोवेटिव और स्वदेशी समान खोज निकाला है IIT मद्रास के वैज्ञानिकों ने.
IIT मद्रास के रिहैबिलिटेशन बायोइंजीनियरिंग ग्रुप ने एक ऐसी स्मार्ट सीट तैयार कर ली है, जो ड्राइवर के सोने से ठीक पहले ही उसकी थकान को भांप लेती है और जोरदार अलर्ट देकर एक्सीडेंट होने से बचा लेती है. सबसे कमाल की बात है कि यह बिना कैमरे और तार के काम करती है. तो आइए जानते हैं आखिर क्या है यह इंटेलिसीट टेक्नोलॉजी और यह किस तरह बिना किसी कैमरे या तार के काम करती है.
आईआईटी मद्रास के रिहैबिलिटेशन बायोइंजीनियरिंग ग्रुप ने सीटिंग कंपनी हरिता के साथ मिलकर इस सीट को तैयार किया है, इसका नाम इंटेलिसीट दिया गया है. यह स्मार्ट सीट ड्राइवर के सोने से ठीक पहले ही उसकी थकान को पहचान लेती है और किसी हादसे होने से पहले ही अलर्ट कर देती है. देखने में यह एक नार्मल कार सीट की तरह दिखाई देती है, लेकिन इसके अंदर एडवांस सेंसर लगाए गए हैं.
बिना कैमरा और तार के करेगी काम
मार्केट में मौजूद दूसरी इस तरह की सीटे ड्राइवर पर नजर रखने के लिए कैमरे, सिर पर पट्टी या शरीर पर इलेक्ट्रोड यानी तार का इस्तेमाल करती हैं. वहीं इंटेलिसीट पूरी तरह से नॉन-इंट्रूसिव है. यानी ड्राइवर को शरीर पर कुछ भी पहनने की जरूरत नहीं है.
तो कैसे करती है पहचान
अब आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि जब कैमरा, सिर पर पट्टी और तार भी नहीं है, तो सीट कैसे ड्राइवर के सोने का पहचान कैसे करती है. इसका जवाब है कि सीट के बैकरेस्ट और बेस में लगे सेंसर, जो ड्राइवर के बैठने के तरीके, उसकी स्थिति और थकान के कारण शरीर में होने वाली हल्की हलचलों को महसूस करते हैं.
सर्फेस इलेक्ट्रोमायोग्राफी मांसपेशियों की थकान मापने के लिए यह सीट शरीर से निकलने वाले हल्के इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स को समझने का प्रयास करती है. इससे पता चलता है कि पीठ और कंधों की मांसपेशियां कब थकान महसूस कर रही है.
खतरे के हिसाब से 3 लेवल पर अलर्ट
यह सीट ड्राइवर की थकान को तीन चरणों में भांपकर एक्शन में आती है-
हल्की थकान डैशबोर्ड पर एक छोटी सी लाइट जलती है, जो सिर्फ ड्राइवर को सावधान करती है.
थकान लाइट के साथ-साथ एक बीप यानी अलर्ट मिलता है.
ज्यादा थकाम जब स्थिति ज्यादा खतरनाक होती है, तो सीट खुद कांपने लगती है. इसके साथ ही गाड़ी के मालिक को मोबाइल ऐप पर तुरंत नोटिफिकेशन पहुंच जाता है.
पुरानी गाड़ियों में भी आसानी से होगी फिट
इस सीट की यह खास बात है कि इसे पुरानी गाड़ियों में भी आसानी से फिट किया जा सकता है. इंटेलिसीट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे किसी भी मौजूदा ट्रक, बस या कार में आसानी से फिट किया जा सकता है. इसके लिए गाड़ी में ज्यादा टेक्निकल बदलाव करने की भी जरूरत नहीं पड़ती है. फिट करने के बाद चाबी ऑन करते ही यह काम करना शुरू कर देती है और मोबाइल ऐप के जरिए रियर-टाइम डेटा भेजती रहती है.
भारत में सड़क हादसों और थके हुए ड्राइवरों की वजह से जाने वाली जानों को बचाने में यह स्वदेशी इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) टेक्नोलॉजी एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकती है.
क्या आपके पास 1 से ज्यादा सिम है? क्या आप जानते हैं कि एक व्यक्ति अपने पास कितनी सिम रख सकता है? अगर नहीं, तो इस बारे में जरूर जान लें. दरअसल, दूरसंचार विभाग (DoT) ने साइबर फ्रॉड, डिजिटल धोखाधड़ी और फर्जी मोबाइल कनेक्शन पर लगाम कसने के लिए सिम कार्ड नियमों के सख्त पालन की दिशा में बड़ा कदम उठाया है.
विभाग की ओर से टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि निर्धारिक सीमा पूरी कर चुके ग्राहकों को नया मोबाइल कनेक्शन जारी न किया जाए. इसके लिए डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) का इस्तेमाल किया जाएगा, जहां सीमा तक पहुंच चुके ग्राहकों की पहचान और फोटो उपलब्ध रहेगी.
क्या है DoT का नया नियम?
हमारे देश में मोबाइल कनेक्शनों की अधिकतम सीमा पहले से ही तय है. सामान्य राज्यों में एक व्यक्ति अपने नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन रख सकता है. वहीं, असम, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों में ये सीमा 6 तय की गई है. अब DoT ने इस नियम को सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए नया मॉनिटरिंग मैकेनिज्म लागू करने का फैसला किया है.
कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
दूरसंचार विभाग के डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) में विभिन्न टेलीकॉम कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए गए ग्राहक डेटा का विश्लेषण किया जाता है. इससे पता चलता है कि किसी व्यक्ति के नाम पर कुल कितने मोबाइल नंबर सक्रिय हैं. अब इस प्लेटफॉर्म पर उन ग्राहकों की प्रतिनिधि तस्वीर भी उपलब्ध कराई जाएगी, जो तय सीमा तक पहुंच चुके हैं. इससे नया सिम जारी करने से पहले ग्राहक की पहचान आसान हो जाएगी.
लिमिट से ज्यादा सिम होने पर क्या होगा?
DoT ने इस बारे में स्पष्ट कर दिया है कि अगर किसी व्यक्ति का लिमिट से ज्यादा सिम है और कोई नया कनेक्शन एक्टिव हो गया है, तो उसे तुरंत सस्पेंड कर दिया जाए. ये कनेक्शन तब तक बंद रहेगा, जब तक अतिरिक्त सिम से जुड़े मामले का समाधान नहीं हो जाता.
30 नवंबर तक पूरा होगा इंटीग्रेशन
सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे 30 नवंबर 2026 तक इस व्यवस्था को अपने सब्सक्राइबर एनरोलमेंट और सिम एक्टिवेशन सिस्टम के साथ पूरी तरह जोड़ दें. इसके बाद नया सिम जारी करने की प्रक्रिया में रियल टाइम जांच की जा सकेगी.
क्यों उठाया जा रहा है ये कदम
पिछले कुछ सालों में फर्जी सिम कार्ड के जरिए बैंकिंग फ्रॉड, साइबर ठगी, फर्जी कॉल और ऑनलाइन क्रिमिनल तेजी से बढ़े हैं. कई मामलों में एक ही व्यक्ति के नाम पर बड़ी संख्या में मोबाइल कनेक्शन लेकर उनका गलत इस्तेमाल किया गया. सरकार का मानना है कि मोबाइल कनेक्शनों पर बेहतर निगरानी से ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी.
ब्राजील को बायोफ्यूल की दुनिया का सबसे सफल उदाहरण कहा जाता है.
क्रूड ऑयल की सप्लाई चेन में बाधा आने की वजह से बायोफ्यूल की चर्चा तेज हो चली है. भारत में ई-20 पेट्रोल अनिवार्य कर दिया गया है. दुनिया लंबे समय से क्रूड ऑयल पर निर्भर रही है. पेट्रोल, डीजल, गैस और विमान ईंधन के लिए कच्चे तेल का इस्तेमाल होता है. लेकिन अब ऊर्जा का यह मॉडल तेजी से बदल रहा है. महंगा तेल, बढ़ता प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौतियां बन चुके हैं. ऐसे समय में बायोफ्यूल एक मजबूत विकल्प बनकर सामने आया है. बायोफ्यूल पौधों, अनाज, गन्ने, मक्का, वनस्पति तेल, जैविक कचरे और पशु अवशेषों से बनाया जाता है. वर्ल्ड बायोफ्यूल डे के मौके पर जानिए, बायोफ्यूल का बादशाह देश कौन है? इससे कैसे दे रहा अर्थव्यवस्था को रफ्तार? क्यों दुनिया बायोफ्यूल की तरफ क्यों बढ़ रही?
बायोफ्यूल का बादशाह कौन सा देश है? इसका उत्तर एक शब्द या एक लाइन में देना आसान नहीं है. यूं कुल बायोफ्यूल उत्पादन में अमेरिका नंबर एक है. वहीं, गन्ने से एथनॉल बनाने और उसे रोजमर्रा की परिवहन व्यवस्था का सफल हिस्सा बनाने में ब्राजील को दुनिया का सबसे प्रभावशाली मॉडल माना जाता है. इंडोनेशिया, चीन भी इस मामले में आगे आए हैं. भारत भी ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से इस ओर कदम बढ़ा चुका है. इसलिए इस एक सवाल को बड़े कैनवस पर देखना होगा.
प्रोडक्शन के मामले अमेरिका नंबर एक
साल 2024 के उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा बायोफ्यूल उत्पादक देश है. उसका कुल उत्पादन करीब 856 हजार बैरल तेल समतुल्य प्रतिदिन रहा. तेल समतुल्य बैरल का मतलब है कि अलग-अलग ईंधनों की ऊर्जा क्षमता को एक सामान्य पैमाने पर मापा गया है.
अमेरिका में बायोफ्यूल उत्पादन का सबसे बड़ा आधार मक्का है. मक्का से एथनॉल तैयार किया जाता है. यह एथनॉल पेट्रोल में मिलाया जाता है. इससे पेट्रोल की खपत कम होती है. अमेरिका में एथनॉल के साथ बायोडीजल और रिन्यूएबल डीजल का भी उत्पादन होता है. रिन्यूएबल डीजल को सामान्य डीजल के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. यही कारण है कि अमेरिका केवल एथनॉल में नहीं, बल्कि कुल तरल बायोफ्यूल उत्पादन में भी आगे है.
ब्राजील क्यों कहलाता है एथेनॉल का किंग?
ब्राजील कुल उत्पादन में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है. उसका कुल बायोफ्यूल उत्पादन करीब 510 हजार बैरल तेल-समतुल्य प्रतिदिन रहा. इसके बावजूद ब्राजील को बायोफ्यूल की दुनिया का सबसे सफल उदाहरण कहा जाता है. इसकी सबसे बड़ी वजह गन्ना एथनॉल है. ब्राजील ने 1970 के दशक में तेल संकट के दौरान एथेनॉल को गंभीरता से अपनाना शुरू किया था. तब से देश ने गन्ने से बनने वाले ईंधन को अपनी परिवहन व्यवस्था का अहम हिस्सा बना लिया. ब्राजील में बड़ी संख्या में फ्लेक्स-फ्यूल वाहन चलते हैं.
ये वाहन पेट्रोल, एथनॉल या दोनों के मिश्रण से चलते हैं. इससे वाहन मालिक को ईंधन चुनने की सुविधा मिलती है. ब्राजील में गन्ने से केवल चीनी नहीं बनती. गन्ने के रस और शीरे से एथनॉल तैयार होता है. चीनी निकालने के बाद बचने वाले रेशेदार अवशेष को बगास कहा जाता है. इस बगास से बिजली भी बनाई जाती है. यानी एक ही फसल से चीनी, ईंधन और बिजली मिलती है. यही ब्राजील के मॉडल की बड़ी ताकत है. इसलिए सही निष्कर्ष यह है कि अमेरिका कुल उत्पादन का नंबर एक देश है, जबकि ब्राजील गन्ना एथनॉल और फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल का वैश्विक नेता है.
इंडोनेशिया: बायोडीजल की बड़ी शक्ति
बायोफ्यूल उत्पादन में इंडोनेशिया तीसरे स्थान पर है. 2024 में उसका कुल उत्पादन करीब 205 हजार बैरल तेल समतुल्य प्रतिदिन रहा. इंडोनेशिया की ताकत पाम ऑयल से बनने वाला बायोडीजल है. देश में डीजल में बायोडीजल मिलाने की नीति लागू है. इसे बी-35 नीति के नाम से जाना जाता है. इसका मतलब है कि डीजल में 35 प्रतिशत तक बायोडीजल शामिल किया जा सकता है. इंडोनेशिया पाम ऑयल का बड़ा उत्पादक है.
इसलिए उसके पास बायोडीजल के लिए जरूरी कच्चा माल बड़ी मात्रा में उपलब्ध है. इससे उसे डीजल आयात कम करने और घरेलू उद्योग बढ़ाने में मदद मिलती है. हालांकि, पाम ऑयल आधारित बायोडीजल के साथ पर्यावरण की चिंता भी जुड़ी है. यदि जंगलों को काटकर पाम की खेती बढ़ाई जाए, तो पर्यावरण को नुकसान हो सकता है. इसलिए टिकाऊ खेती और जंगलों की सुरक्षा जरूरी है.
चीन: तेजी से बढ़ती बायोफ्यूल क्षमता
चीन इस सूची में चौथे स्थान पर है. उसका कुल बायोफ्यूल उत्पादन करीब 106 हजार बैरल तेल समतुल्य प्रतिदिन रहा. चीन एथनॉल, बायोडीजल और कचरे से बनने वाले जैव ईंधन के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है. चीन के सामने ऊर्जा सुरक्षा और वायु प्रदूषण बड़ी चुनौतियां हैं. विशाल वाहन बाजार भी उसकी ईंधन जरूरत बढ़ाता है. ऐसे में बायोफ्यूल उसके लिए एक उपयोगी विकल्प है. चीन कृषि और शहरी जैविक कचरे के बेहतर इस्तेमाल पर भी काम कर रहा है. भविष्य में वहां कचरे और गैर-खाद्य स्रोतों से बनने वाले बायोफ्यूल का महत्व बढ़ सकता है.
भारत: उभरती हुई बायोफ्यूल शक्ति
भारत दुनिया के टॉप पांच बायोफ्यूल उत्पादक देशों में शामिल है. 2024 में उसका कुल उत्पादन करीब 70 हजार बैरल तेल समतुल्य प्रतिदिन रहा. भारत का जोर मुख्य रूप से एथनॉल मिश्रण पर है. भारत पेट्रोल में एथनॉल मिलाकर पेट्रोलियम आयात घटाने की दिशा में काम कर रहा है. एथनॉल के लिए गन्ने के अलावा मक्का, टूटे चावल और अन्य अनुमत कृषि स्रोतों का इस्तेमाल किया जा रहा है.
भारत के लिए बायोफ्यूल का महत्व केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है. यह किसानों की आय से भी जुड़ा है. एथनॉल उत्पादन के लिए फसलों की मांग बढ़ने से कृषि क्षेत्र को नया बाजार मिल सकता है. इस्तेमाल किए गए खाना पकाने के तेल से बायोडीजल बनाने की संभावना भी बढ़ रही है. कृषि अवशेषों, गोबर और जैविक कचरे से बायोगैस तथा कंप्रेस्ड बायोगैस भी तैयार की जा सकती है. इससे पराली जलाने जैसी समस्याओं से निपटने में मदद मिल सकती है.
बायोफ्यूल से अर्थव्यवस्था को कैसे मिलती है रफ्तार?
बायोफ्यूल उद्योग का पहला लाभ किसानों को होता है. गन्ना, मक्का, तिलहन और अन्य कृषि उत्पादों की मांग बढ़ती है. इससे किसानों के लिए अतिरिक्त बाजार बनता है. दूसरा लाभ रोजगार के रूप में मिलता है. बायोफ्यूल संयंत्रों में उत्पादन, परिवहन, भंडारण, मशीनरी और तकनीकी सेवाओं से रोजगार पैदा होते हैं. ग्रामीण इलाकों में इसका प्रभाव अधिक दिखता है. तीसरा लाभ तेल आयात बिल में कमी का है. जो देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात से पूरा करते हैं, वे घरेलू बायोफ्यूल उत्पादन बढ़ाकर विदेशी मुद्रा बचा सकते हैं. चौथा लाभ ऊर्जा सुरक्षा है. यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत अचानक बढ़ जाए, तो बायोफ्यूल घरेलू विकल्प के रूप में कुछ राहत दे सकता है.
दुनिया बायोफ्यूल की तरफ क्यों बढ़ रही है?
दुनिया जलवायु परिवर्तन से जूझ रही है. पेट्रोल और डीजल जलने से कार्बन डाइऑक्साइड समेत कई प्रदूषक निकलते हैं. बायोफ्यूल को जीवाश्म ईंधन की तुलना में कम कार्बन वाला विकल्प माना जाता है. यह लाभ हर स्थिति में समान नहीं होता. उत्पादन की पूरी प्रक्रिया महत्वपूर्ण है. फसल उगाने में कितना पानी लगा, कितनी खाद और ऊर्जा लगी, परिवहन कितना हुआ और क्या जंगलों को नुकसान पहुंचा, इन सभी बातों का असर पड़ता है. फिर भी, सही तरीके से तैयार किया गया बायोफ्यूल प्रदूषण घटाने में मदद कर सकता है. खासकर विमानन, भारी ट्रक और समुद्री परिवहन जैसे क्षेत्रों में इसका महत्व बढ़ रहा है, जहां केवल बैटरी से काम चलाना अभी कठिन है.
क्या है बायोफ्यूल का भविष्य?
भविष्य में बायोफ्यूल का ध्यान केवल गन्ने और मक्का तक सीमित नहीं रहेगा. कृषि कचरा, पराली, लकड़ी के अवशेष, शैवाल, नगरों का जैविक कचरा और इस्तेमाल किया गया खाद्य तेल महत्वपूर्ण स्रोत बन सकते हैं. इसे दूसरी और तीसरी पीढ़ी का बायोफ्यूल कहा जाता है. इसका लाभ यह है कि इससे खाद्य फसलों पर दबाव कम हो सकता है. बायोफ्यूल, इलेक्ट्रिक वाहन और ग्रीन हाइड्रोजन एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं. आने वाले समय में ये सभी ऊर्जा विकल्प अलग-अलग जरूरतों के लिए साथ काम करेंगे.
आजकल कई कार और बाइक मालिक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि पेट्रोल में बढ़ते इथेनॉल मिश्रण की वजह से उनकी गाड़ी का माइलेज कम हो रहा है
सरकार ने E20 पेट्रोल को बढ़ावा दिया है और भविष्य के लिए E22 E25 E27 और E30 जैसे अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के मानक भी जारी किए हैं
हाल ही में फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के लिए E85 फ्यूल भी पेश किया गया है जिसमें 85 प्रतिशत तक इथेनॉल मिला होता है
लेकिन क्या सच में इथेनॉल की वजह से माइलेज 30 प्रतिशत तक घट जाता है
वास्तविकता इससे अलग है
इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल की तुलना में कम होती है इसलिए माइलेज पर कुछ असर जरूर पड़ता है
लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में E10 पेट्रोल पर माइलेज लगभग 2 से 3 प्रतिशत तक और E20 पेट्रोल पर लगभग 5 से 6 प्रतिशत तक कम हो सकता है
सोशल मीडिया पर किए जा रहे 30 प्रतिशत तक माइलेज घटने के दावे सामान्य परिस्थितियों में सही नहीं माने जाते
यदि आपकी गाड़ी का माइलेज बहुत ज्यादा कम हो गया है तो इसके पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं
भीषण गर्मी में लगातार एयर कंडीशनर चलाने से माइलेज 10 से 15 प्रतिशत तक प्रभावित हो सकता है
पुरानी गाड़ियों में इथेनॉल मिश्रित ईंधन के साथ फ्यूल सिस्टम को तालमेल बैठाने में परेशानी हो सकती है
इथेनॉल में सफाई के गुण होते हैं जिससे पुरानी गंदगी ढीली होकर फ्यूल इंजेक्टर या फिल्टर को प्रभावित कर सकती है
नई गाड़ियों के लिए क्या स्थिति है
वर्ष 2023 और 2024 के बाद बनी कई नई गाड़ियों को इथेनॉल मिश्रित ईंधन के अनुरूप डिजाइन और ट्यून किया गया है
ऐसी गाड़ियों में E20 ईंधन का उपयोग सामान्य रूप से सुरक्षित माना जाता है यदि निर्माता ने इसकी अनुमति दी हो
गाड़ी का माइलेज और प्रदर्शन बेहतर बनाए रखने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखें
समय समय पर फ्यूल फिल्टर और स्पार्क प्लग की जांच कराएं
टायर में सही हवा का दबाव बनाए रखें
बार बार तेज एक्सेलरेशन और अनावश्यक रेविंग से बचें
वाहन निर्माता द्वारा सुझाए गए सर्विस शेड्यूल का पालन करें
यदि आपके पास पुरानी गाड़ी है तो इथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग शुरू करने से पहले अधिकृत सर्विस सेंटर या डीलर से सलाह लें
फ्लेक्स फ्यूल वाहन भी बाजार में आ चुके हैं
भारत में अब कई कंपनियां फ्लेक्स फ्यूल वाहन पेश कर रही हैं जो E85 जैसे अधिक इथेनॉल मिश्रित ईंधन पर भी चल सकते हैं
इन वाहनों को विशेष रूप से ऐसे ईंधन के अनुसार तैयार किया गया है इसलिए इनमें उच्च इथेनॉल मिश्रण का उपयोग सुरक्षित रहता है
निष्कर्ष
इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से माइलेज में कुछ कमी आ सकती है लेकिन सामान्य परिस्थितियों में यह कमी सीमित होती है
यदि माइलेज में बहुत अधिक गिरावट दिखाई दे रही है तो केवल इथेनॉल को जिम्मेदार मानने के बजाय वाहन की सर्विसिंग ड्राइविंग आदतों मौसम और इंजन की स्थिति की भी जांच करानी चाहिए
Instagram New Feature: Instagram ने अपने यूजर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए एक नया फीचर लॉन्च किया है। अब यूजर्स पहले से पब्लिश किए गए फीड पोस्ट का म्यूजिक आसानी से बदल सकेंगे। इसके लिए पोस्ट डिलीट करके दोबारा अपलोड करने की जरूरत नहीं होगी। कंपनी ने इस नए फीचर का नाम Replace Audio रखा है, जिसकी मदद से कुछ आसान स्टेप्स में पुराने पोस्ट का ऑडियो बदला जा सकेगा।
क्या है Replace Audio फीचर?
अब तक अगर किसी यूजर को अपने पोस्ट का म्यूजिक बदलना होता था, तो उसे पोस्ट हटाकर फिर से अपलोड करना पड़ता था। ऐसा करने से पोस्ट की रीच, लाइक्स और व्यूज पर असर पड़ सकता था। लेकिन Replace Audio फीचर आने के बाद पोस्ट अपनी जगह पर ही रहेगा और केवल उसका म्यूजिक बदला जा सकेगा। इससे पोस्ट का एंगेजमेंट भी प्रभावित नहीं होगा।
कंटेंट क्रिएटर्स को होगा बड़ा फायदा
यह फीचर खासतौर पर कंटेंट क्रिएटर्स के लिए काफी उपयोगी साबित होगा। अगर किसी पोस्ट में गलत ऑडियो लग गया हो या किसी ट्रेंडिंग सॉन्ग को जोड़ना हो, तो अब पोस्ट दोबारा अपलोड करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे समय की बचत होगी और पोस्ट की परफॉर्मेंस भी बनी रहेगी।
प्रोफाइल ग्रिड को भी कर सकते हैं कस्टमाइज
Instagram ने हाल ही में प्रोफाइल ग्रिड को रीऑर्डर करने का फीचर भी पेश किया है। इसकी मदद से यूजर्स अपनी प्रोफाइल पर दिखाई देने वाले पोस्ट को अपनी पसंद के अनुसार ऊपर-नीचे या आगे-पीछे कर सकते हैं। हालांकि इससे पोस्ट की मूल अपलोड डेट में कोई बदलाव नहीं होगा।
पुराने पोस्ट का म्यूजिक कैसे बदलें?
Instagram ऐप खोलें और उस पोस्ट पर जाएं जिसका म्यूजिक बदलना है।
पोस्ट के ऊपर दिए गए तीन डॉट (More) पर टैप करें।
इसके बाद Edit विकल्प चुनें।
अब Replace Audio पर टैप करें।
अपनी पसंद का नया म्यूजिक चुनें।
आखिर में Save पर टैप करें।
इसके बाद आपका पोस्ट पहले की तरह प्रोफाइल पर रहेगा, लेकिन उसका म्यूजिक बदल जाएगा।
ध्यान दें
Replace Audio फीचर धीरे-धीरे सभी यूजर्स के लिए जारी किया जा रहा है। अगर आपके Instagram ऐप में यह विकल्प अभी दिखाई नहीं दे रहा है, तो ऐप को लेटेस्ट वर्जन में अपडेट करें या फीचर उपलब्ध होने का इंतजार करें।
बलिया (उत्तर प्रदेश): बलिया जिले के चिलकहर ब्लॉक के नरावं गांव में एक महुआ का पेड़ इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का दावा है कि यह हरा-भरा पेड़ पिछले छह दिनों से अंदर ही अंदर सुलग रहा है। हैरानी की बात यह है कि बारिश होने के बावजूद पेड़ की गर्माहट कम नहीं हुई और बाहर से धुआं भी दिखाई नहीं दे रहा। इस अनोखी घटना को देखने के लिए दूर-दूर से लोग गांव पहुंच रहे हैं।
स्थानीय लोगों के बीच इस घटना को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं हैं। कुछ इसे प्रकृति का अनोखा रहस्य मान रहे हैं, जबकि कई लोग इसे चमत्कार और दैवीय संकेत बताकर पेड़ की पूजा-अर्चना करने लगे हैं। पेड़ के नीचे लाल कपड़ा, ईंटें और चढ़ावा रखा गया है तथा कुछ लोगों ने यहां मंदिर बनाने की भी बात कही है।
पूर्व सैनिक संघ के अध्यक्ष महात्मा सिंह ने बताया कि सोशल मीडिया पर पेड़ में आग लगने की खबर देखने के बाद वे मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के अनुसार पेड़ में बीच-बीच में आग जैसी लपट दिखाई देती है, लेकिन धुआं नहीं निकलता। उनके मुताबिक, इस तरह की घटना की वास्तविक वजह वैज्ञानिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीण अवधेश पांडेय ने पेड़ के पास त्रिशूल स्थापित कर दिया है। उनका कहना है कि लोग इस पेड़ को अब ‘महुआ बाबा’ के रूप में मानने लगे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि घटना के पीछे कोई प्राकृतिक या वैज्ञानिक कारण भी हो सकता है और जांच से जो तथ्य सामने आएंगे, उन्हें स्वीकार किया जाना चाहिए।
वहीं, कई अन्य ग्रामीण इसे अपनी आस्था से जोड़ रहे हैं। गांव में कीर्तन और सुंदरकांड पाठ का आयोजन भी शुरू हो गया है तथा श्रद्धालु पेड़ के पास पहुंचकर पूजा और चढ़ावा चढ़ा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि इस घटना की वैज्ञानिक जांच कराई जानी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि पेड़ के भीतर लगातार गर्मी या सुलगने जैसी स्थिति किस कारण बनी हुई है। फिलहाल यह रहस्यमयी घटना पूरे इलाके में कौतूहल और चर्चा का विषय बनी हुई है।
दक्षिण अफ़्रीका के उत्तरी केप प्रांत की राजधानी किम्बरली में पति ने पहले तो अपनी पत्नी के साथ दुष्कर्म किया फिर इसके बाद उसकी हत्या कर दी. हत्या के बाद पति ने आत्महत्या जैसा दिखाने की कोशिश की.अपने बच्चों के अलावा रोंडा एंडरसन के जीवन में संगीत का भी बहुत महत्व था. हैरत की बात यह है कि ऐसे में जब 29 वर्षीय महिला रोंडा एंडरसन बाथटब में करंट लगने से मृत पाई गई और उसके पास पानी में उसका मेन-पावर्ड ‘घेटो ब्लास्टर’ (पोर्टेबल रेडियो/टेप प्लेयर) चालू हालत में था तो ऐसा लगा कि यह मौत एक दुखद दुर्घटना थी. रोंडा एंडरसन अपने दो छोटे बच्चों के पिता माइकल थॉम्पसन से अलग हो गई थी, लेकिन ऐसा लगता था कि उसके पास जीने के लिए बहुत कुछ था. इसके बाद में कोरोनर ने भी माना कि उसकी दुखद मौत एक दुर्घटना थी और यह एक बेवकूफी भरी गलती का नतीजा थी.
वहीं, 25 साल बाद रोंडा एंडरसन की मौत का मामला तब एक नया मोड़ ले गया जब माइकल थॉम्पसन की अलग हो चुकी पत्नी किम्बरली भी मृत पाई गई. शुरुआत में यह मामला आत्महत्या जैसा लग रहा था. सुनवाई के दौरान जूरी को बताया गया कि 56 वर्षीय थॉम्पसन ने पिछले साल अगस्त में एक सुबह 43 वर्षीय किम्बरली का दुष्कर्म किया और फिर उसकी हत्या कर दी. उसने ऐसा आपत्तिजनक वीडियो देखने और किम्बरली के नए रिश्ते और तलाक की कार्रवाई के तहत भारी वित्तीय समझौते की मांग को लेकर मन में गुस्सा पालने के बाद किया था.
बिस्तर पर क्यों मिला था तस्वीरों का कॉलोज
इसके बाद उसने नॉर्थम्प्टन स्थित अपने घर में उसकी लाश के पास शराब की खाली बोतलें और गोलियों के पैकेट रखकर ऐसा माहौल बनाया जिससे लगे कि उसने आत्महत्या की है. माइकल थॉम्पसन ने उसके फोन से सोशल मीडिया पर मैसेज भी भेजे जिनमें दावा किया गया कि उसने शराब पी रखी थी. साथ ही उसने पुलिस और पैरामेडिक्स को यह बताने से पहले कि उसे बेडरूम में पत्नी बेसुध हालत में मिली है. उसके बिस्तर पर उसकी शादी की तस्वीर और उसकी दिवंगत बहन (जिसने आत्महत्या की थी) की तस्वीरों का एक कोलाज भी रखा.
हत्या के दो मामले में ठहराए गए दोषी
यहां पर बता दें कि माइकल थॉम्पसन (जो पहले डोरमैन और शौकिया बॉक्सर थे) को मिसेज थॉम्पसन के मर्डर, दुष्कर्म और न्याय की प्रक्रिया में बाधा डालने के दो मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद ‘डेली मेल’ ने अब मिस एंडरसन की मौत से जुड़ी जानकारी दी है.
संभल:
जिले की एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर युवती और उसके दो साथियों पर हनी ट्रैप और ब्लैकमेलिंग का गंभीर आरोप लगा है। फास्ट फूड कारोबारी युवक की शिकायत पर पुलिस ने तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित का दावा है कि पहले उसे प्रेम संबंध के जाल में फंसाया गया, फिर आपत्तिजनक फोटो और वीडियो के जरिए लगातार धमकाकर रुपये ऐंठे गए। शहर के चौधरी सराय निवासी 22 वर्षीय युवक ने एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर युवती और उसके दो सहयोगियों पर हनी ट्रैप के जरिए ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया है। पीड़ित की तहरीर पर संभल कोतवाली पुलिस ने युवती समेत तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
नैनीताल में हुई थी मुलाकात
पीड़ित, शहर में फास्ट फूड सेंटर संचालित करता है। उसने बताया कि करीब तीन साल पहले नैनीताल यात्रा के दौरान उसकी मुलाकात अरिशा से हुई थी। दोनों के एक ही शहर के होने के कारण बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे संपर्क बढ़ता गया। युवक का आरोप है कि इसी दौरान विश्वास में लेकर उसके आपत्तिजनक फोटो और वीडियो बना लिए गए। शिकायत के अनुसार, कुछ समय बाद युवती ने उन्हीं फोटो और वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर रुपये की मांग शुरू कर दी। विरोध करने पर छेड़छाड़ के झूठे मुकदमे में फंसाने और सामाजिक रूप से बदनाम करने की धमकी भी दी गई। डर के कारण उसने अलग-अलग समय पर करीब 55 हजार रुपये दे दिए, लेकिन इसके बाद भी कथित ब्लैकमेलिंग नहीं रुकी।
साथियों के साथ मिलकर फंसाने का आरोप
युवक का आरोप है कि बाद में जानकारी जुटाने पर पता चला कि युवती अपने दो साथियों अनस और शुऐब के साथ मिलकर लोगों को प्रेम संबंधों के बहाने फंसाने और फिर आपत्तिजनक सामग्री के जरिए वसूली करने का काम करती है। जब उसने युवती से दूरी बनानी शुरू की तो तीनों की ओर से दबाव और धमकियां और बढ़ गईं। पीड़ित ने यह भी दावा किया कि एक जुलाई 2023 को दोनों पक्षों के बीच स्टाम्प पेपर पर समझौता हुआ था, जिसे नोटरी भी कराया गया था। उसके मुताबिक उस समझौते में युवती ने पहले लगाए गए आरोपों को गलत बताया था। इसके बावजूद अब फिर से फोटो-वीडियो वायरल करने और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर रकम मांगने का सिलसिला शुरू हो गया।
तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज
पुलिस ने शनिवार देर रात युवती और उसके दोनों साथियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली। अधिकारियों का कहना है कि सभी आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उधर इनफ्लुएंसर अरिशा का भी एफआईआर के बाद एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वो खुद को निर्दोष बताते हुए संभल पुलिस से पूरे मामले की निस्पक्ष जांच की मांग करती सुनी जा सकती है।
Most Dangerous Murder Case: मुंबई में हुए एक दिल दहला देने वाले कांड ने हर किसी को दहला कर रख दिया था. इस हत्याकांड को मुंबई ( Mumbai Crime News) के सबसे खौफनाक हत्याकांड में से एक माना जाता है. यह श्रद्धा वालकर हत्याकांड से भी ज्यादा भयानक था. मुंबई के मिरा रोड के पास एक 36 साल की महिला अपने 56 साल के लिव इन पार्टनर (Live In Partner Murder) मनोज साने के साथ रहती थी. एक रोज उसने महिला की हत्या कर दी थी.
मुंबई का सबसे खौफनाक हत्याकांड
जब ये खबर देश के सामने आई तो हर किसी का दिल हैवानियत देख दहल उठा. युवती की हत्या करने के बाद उसने शरीर के टूकड़े कर दिए और फिर धीरे-धीरे उन्हें डिस्पोज करने लगा. हैरान करने वाली बात तो ये थी कि उसने लाश को ठिकाने के लिए दरींदगी की सारी सीमा पार कर दी थी. वह शव के टूकड़े कर पहले कुकर में उबालता था और फिर उसे ठिकाने लगाता था. सुत्रों के मुताबिक, उसने कुछ टूकड़ों को पीसकर टॉइलट में भी (Woman cut into pieces) फल्श कर दिए थे. शख्स यही नहीं रुकी उसने महिला की लाश के टुकड़े कुत्ते को भी खिलाए. जब पड़ोसियों के घर से बदबू आने लगी तब हत्या का खुलासा हुआ था. इस मामले ने हर किसी को सन्न कर दिया था.
महिला के टुकड़े कर कुत्ते को खिलाए
पुलिस ने आरोपी मनोज साने (56) को गिरफ्तार कर लिया था. पुलिस के इस खबर की जानकारी पड़ोसियों ने दी थी. उन्होंने फोन कर बताया था कि फ्लैट नंबर 704 से दुर्गंध आ रही है. जिसके बाद पुलिस मनोज के घर पहुंची और वहां का नजारा देख हैरान रह गई. पुलिस को शुरूआत में फ्लैट से एक महिला के पैर बरामद हुए थे. आरोपी ने बताया था कि उसने शव के टूकड़े कर ठिकाने लगा दिए हैं.
ये हत्याकांड मुंबई के सबसे भयानक हत्याकांड में से एक माना जाता है. इसने पूरे भारत को हिलाकर रख दिया था. दरअशल, सरस्वती वैद्य 36 साल की युवती 56 साल के मनोज सहनी के साथ लिव-इन में रहती थी.