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  • गांजा तस्करी में शामिल पति-पत्नी, देवर और बिचैलिया गिरफ्तार, 29 लाख का गांजा भी जब्त…

    गांजा तस्करी में शामिल पति-पत्नी, देवर और बिचैलिया गिरफ्तार, 29 लाख का गांजा भी जब्त…

    गांजा तस्करी में शामिल पति-पत्नी, देवर और बिचैलिया गिरफ्तार, 29 लाख का गांजा भी जब्त…

    Raipur News: रायपुर। राजधानी रायपुर की कमिश्नरेट पुलिस ने 29 लाख के गांजा के साथ 5 आरोपियों को पकड़ा है। पकड़े गए आरोपियों में दंपती और देवर समेत बिचौलिए शामिल है। पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ थान टिकरापारा में कार्रवाई की गई है।

    गांजा सप्लाई की मिली थी शिकायत

    जानकारी के मुताबिक, कमिश्नरेट पुलिस को 11 जुलाई को मुखबिर से सूचना मिली थी कि टिकरापारा थाना क्षेत्र के कमल विहार इलाके में कुछ लोग बड़ी मात्रा में गांजा सप्लाई करने आने वाले है। सूचना को पुलिस ने गंभीरता से लिया और एएनटीएफ व टिकरापारा पुलिस की संयुक्त टीम गठित की गई। टीम ने कमल विहार रोड स्थित शिव मंदिर के सामने नीलगिरी प्लांटेशन के पास घेराबंदी की।

    पुलिस को देखकर भाग रहे थे आरोपी

    पुलिस ने कार्रवाई करते हुए महिला सहित तीन संदिग्ध को सुजुकी एक्सेस वाहन के साथ पकड़ा। पुलिस को देखकर तीनों भागने लगे, लेकिन घेराबंदी कर उन्हें पकड़ लिया गया। पूछताछ में आरोपियों ने अपनी पहचान कमलेश सोनवानी, राजा टंडन और नीतू टंडन निवासी पंडरी, रायपुर के रूप में बताई। वाहन की तलाशी लेने पर उसमें रखी तीन बोरियों और एक थैले से कुल 46.100 किलोग्राम गांजा मिला। पकड़े गए आरोपियों ने खुलासा किया कि यह गांजा ओडिशा के कालाहांडी जिले से लाया गया था।

    दो सप्लायर गिरफ्तार

    इस जानकारी के बाद पुलिस ने तस्करी की पूरी सप्लाई चेन को पकड़ने के लिए बैकवर्ड लिंकेज पर कार्रवाई शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की मदद से पुलिस ने रायपुर रेलवे स्टेशन के पास दो संदिग्ध सप्लायरों को घेराबंदी कर धर-दबोचा। तस्करों की पहचान बनमाली तांडी और अनु तांडी निवासी जिला कालाहांडी (ओडिशा) के रूप में की गई। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे ओडिशा से गांजा लाकर रायपुर में कमलेश सोनवानी, राजा टंडन और नीतू टंडन को सप्लाई करते थे। इसके बाद रायपुर में गांजे की अवैध बिक्री की जाती थी।

    थाना टिकरापारा में कार्रवाई

    पुलिस ने पांचों आरोपियों के खिलाफ थाना टिकरापारा में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट की धारा 20 (बी) (ii) (सी) के अंतर्गत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    जांच में यह भी सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी कमलेश सोनवानी के खिलाफ रायपुर और महासमुंद जिले के विभिन्न थानों में एनडीपीएस एक्ट के तहत पहले से करीब चार मामले दर्ज हैं। राजा टंडन के खिलाफ ओडिशा के टिटलागढ़ क्षेत्र में भी एनडीपीएस एक्ट का मामला दर्ज है, जिसमें वह पहले जेल जा चुका है।

  • सात फेरों के सपने हुए चकनाचूर! दहेज की मांग ने नवविवाहिता की जिंदगी बना दी दर्दनाक कहानी..

    सात फेरों के सपने हुए चकनाचूर! दहेज की मांग ने नवविवाहिता की जिंदगी बना दी दर्दनाक कहानी..

    सात फेरों के सपने हुए चकनाचूर! दहेज की मांग ने नवविवाहिता की जिंदगी बना दी दर्दनाक कहानी..

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    दहेज की मांग ने तोड़ा एक नवविवाहिता का सपना

    शादी हर लड़की के लिए नए जीवन, नए रिश्तों और खुशियों की शुरुआत होती है, लेकिन जब यही रिश्ता दहेज की मांग और प्रताड़ना का कारण बन जाए, तो एक परिवार की उम्मीदें टूटकर बिखर जाती हैं। ऐसा ही एक दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां शादी के कुछ ही दिनों बाद एक नवविवाहिता की जिंदगी खुशियों से निकलकर तनाव, अपमान और डर में बदल गई।

    युवती का कहना है कि शादी के बाद उसके ससुराल वाले लगातार महंगी कार और भारी रकम की मांग करने लगे। जब यह मांग पूरी नहीं हुई, तो उसके साथ तानों, दबाव और दुर्व्यवहार का सिलसिला शुरू हो गया। धीरे-धीरे घर का माहौल इतना खराब हो गया कि उसे हर दिन मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।

    पीड़िता ने आरोप लगाया है कि एक रात उसके पति ने उसके साथ बेहद अमानवीय और शर्मनाक हरकत की। उसका कहना है कि उसे अपमानित करने के लिए अश्लील तरीके से प्रताड़ित किया गया, जिससे वह अंदर से पूरी तरह टूट गई। जब उसने इस हरकत का विरोध किया, तो उसके साथ मारपीट की गई और उसे डराने-धमकाने की कोशिश भी की गई।

    इतना ही नहीं, युवती ने यह भी आरोप लगाया है कि घर के एक बड़े सदस्य ने उसके साथ गलत हरकत करने की कोशिश की। जब उसने खुद को बचाने के लिए आवाज उठाई, तो उसे घर से निकाल दिया गया। कुछ समय बाद जब वह अपने परिजनों के साथ वापस ससुराल पहुंची, तो उसके लिए दरवाजा तक नहीं खोला गया। इससे साफ है कि उसे न केवल प्रताड़ित किया गया, बल्कि पूरी तरह अकेला छोड़ दिया गया।

    पीड़िता का कहना है कि उस पर अब भी चुप रहने और सब कुछ सहने का दबाव बनाया जा रहा है। लेकिन उसने हिम्मत दिखाते हुए पुलिस से शिकायत की, ताकि उसके साथ हुए अन्याय को सामने लाया जा सके। शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और पुलिस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी सच्चाई सामने आएगी, उसी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    यह घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि दहेज जैसी कुप्रथा आज भी कई घरों में महिलाओं की जिंदगी को बर्बाद कर रही है। जरूरत इस बात की है कि ऐसे मामलों में पीड़ित को समय पर न्याय मिले और समाज भी चुप रहने के बजाय अन्याय के खिलाफ आवाज उठाए।

  • डिलीवरी बॉय की घिनौनी करतूत! महिला के घर में घुसकर दिखाने लगा प्राइवेट पार्ट

    डिलीवरी बॉय की घिनौनी करतूत! महिला के घर में घुसकर दिखाने लगा प्राइवेट पार्ट

    डिलीवरी बॉय की घिनौनी करतूत! महिला के घर में घुसकर दिखाने लगा प्राइवेट पार्ट

    बेंगलुरु में एक महिला ने डिलीवरी एजेंट पर गंभीर आरोप लगाए हैं. महिला का कहना है कि पार्सल देने के बाद डिलीवरी एजेंट ने टॉयलेट जाने का बहाना बनाया और उनकी मर्जी के बिना फ्लैट के अंदर घुस गया. इसके बाद उसने अश्लील हरकत की. महिला ने पूरी घटना सोशल मीडिया पर साझा की, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.

    टॉयलेट जाने के बहाने मांगी एंट्री

    महिला के अनुसार, डिलीवरी एजेंट पार्सल देने उनके घर आया था. पार्सल देने के बाद उसने टॉयलेट इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी.

    महिला ने बताया कि उन्होंने कई बार मना किया और साफ कहा कि वह किसी अनजान व्यक्ति को अपने घर के अंदर आने की अनुमति नहीं देतीं. उन्होंने यह भी कहा कि अगर ज्यादा जरूरत हो तो वह पड़ोसियों से मदद ले सकता है. लेकिन आरोप है कि डिलीवरी एजेंट उनकी बात नहीं माना और जबरन घर के अंदर चला गया.

    महिला ने लगाए अश्लील हरकत के आरोप

    महिला का आरोप है कि जब डिलीवरी एजेंट वॉशरूम से बाहर आया तो उसने उनके सामने अश्लील हरकत की. इस घटना के बाद महिला घबरा गईं और खुद को असुरक्षित महसूस करने लगीं.

    महिला ने कहा कि किसी महिला के साफ मना करने के बाद भी उसकी बात को नजरअंदाज करना और जबरन घर में घुसना पूरी तरह गलत है.

    डर के कारण तुरंत उठाया यह कदम

    महिला ने बताया कि घटना के दौरान उन्होंने तुरंत अपने मोबाइल का कैमरा चालू कर लिया और घर का मुख्य दरवाजा खोल दिया. वह दरवाजे के पास ही खड़ी रहीं ताकि जरूरत पड़ने पर बाहर निकलकर मदद मांग सकें.

    उनका कहना है कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ती घटनाओं को देखते हुए उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए ऐसा किया.

    पुलिस ने शुरू की जांच

    महिला की पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बेंगलुरु पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया. पुलिस ने महिला से संपर्क कर घटना से जुड़ी पूरी जानकारी और डिलीवरी एजेंट का विवरण मांगा है.

    पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों की जांच की जा रही है. जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

  • पति बना हैवान! 15 साल साथ निभाने के बाद पोस्टल असिस्टेंट पत्नी को उतारा मौत के घाट, इंदौर की दिल दहला देने वाली वारदात..

    पति बना हैवान! 15 साल साथ निभाने के बाद पोस्टल असिस्टेंट पत्नी को उतारा मौत के घाट, इंदौर की दिल दहला देने वाली वारदात..

    पति बना हैवान! 15 साल साथ निभाने के बाद पोस्टल असिस्टेंट पत्नी को उतारा मौत के घाट, इंदौर की दिल दहला देने वाली वारदात..

    मध्य प्रदेश में इंदौर जिले की मनोरमागंज स्थित डाक कुंज कॉलोनी में डाक विभाग की पोस्टल असिस्टेंट उर्मिला सैनी की हत्या के मामले में लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं। एक ओर पुलिस फरार आरोपी पति अखिलेश सैनी की तलाश में जुटी है, वहीं दूसरी ओर इस घटना ने परिवार के दो मासूम बच्चों की जिंदगी पूरी तरह बदल दी है। परिजनों के अनुसार, मां की हत्या के बाद दोनों बच्चे गहरे सदमे में हैं। बड़ी बेटी अपनी आंखों के सामने मां का खून से लथपथ शव देखने की घटना को भूल नहीं पा रही है, जबकि छोटा बेटा कभी मां को वापस लाने की जिद करता है तो कभी गुस्से में अपने पिता को ‘रावण’ कहकर उसे सजा देने की बात कहता है। मासूम की यह बात सुनकर परिवार के लोग भी भावुक हो जाते हैं।

    वारदात से पहले बनाई थी पूरी योजना

    पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी अखिलेश सैनी कथित तौर पर पूरी तैयारी के साथ घर पहुंचा था। जांच के अनुसार उसने पहले एक बड़ा चाकू खरीदा, फिर दोनों बच्चों के स्कूल जाने का इंतजार किया। घर में पत्नी के अकेले होने पर उसने उन पर ताबड़तोड़ चाकू से हमला कर दिया। गंभीर चोटों के कारण उर्मिला की मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी सीधे बेटी के स्कूल पहुंचा। वहां उसने बेटी को कुछ जरूरी सामान और एटीएम कार्ड सौंपते हुए भोपाल जाने की बात कही तथा दोनों बच्चों को मौसी के घर चले जाने के लिए कहा। जब बेटी घर पहुंची तो टीवी तेज आवाज में चल रहा था। लिविंग रूम में मां खून से लथपथ पड़ी थी। यह दृश्य देखकर वह घबरा गई और परिजनों को सूचना दी।

    हत्या से पहले भाई को किया था फोन

    परिजनों के मुताबिक, घटना से कुछ मिनट पहले उर्मिला ने अपने भाई मनोज मालाकार को फोन किया था। उर्मिला ने कहा था कि किसी भी स्थिति में वकील से बात करा दी जाए और उन्हें ऑफिस भेज दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा था कि वह अब अपने पति के साथ नहीं रहना चाहतीं। उस समय परिवार ने इसे सामान्य पारिवारिक विवाद समझा, लेकिन कुछ ही देर बाद हत्या की सूचना मिलने से सभी स्तब्ध रह गए।

    15 वर्षों से विवादों में था दांपत्य जीवन

    परिवार का कहना है कि 2011 में विवाह के बाद से ही अखिलेश सैनी पत्नी के चरित्र पर संदेह करता था। इसी कारण दोनों के बीच अक्सर विवाद होते थे। उर्मिला ने अलग-अलग समय पर महिला थाना, जूनी इंदौर थाना और भोपाल में भी शिकायतें दर्ज कराई थीं। हालांकि, हर बार आरोपी माफी मांग लेता था और बच्चों के भविष्य को देखते हुए उर्मिला समझौता कर लेती थीं। परिजनों का आरोप है कि आरोपी पत्नी के मोबाइल फोन और गतिविधियों पर लगातार नजर रखता था तथा बिना किसी ठोस आधार के उन पर संदेह करता था। यही वजह थी कि उनका वैवाहिक जीवन लंबे समय से तनावपूर्ण बना हुआ था।

    धमकियां भी देता था आरोपी

    परिजनों ने पुलिस को बताया कि आरोपी कई बार उर्मिला को जान से मारने की धमकी देता था। वह अपने एक रिश्तेदार के पुराने हत्या के मामले का जिक्र करते हुए कहता था कि हत्या करने पर भी ज्यादा सजा नहीं होती और वह जेल से बाहर आ जाएगा। परिवार का कहना है कि उन्होंने कई बार समझाने का प्रयास किया, लेकिन उसके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया।

    आरोपी की तलाश में चार पुलिस टीमें

    एसीपी नीति दंडोतिया ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए चार विशेष टीमें बनाई गई हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि घटना के बाद वह पैदल ही मौके से निकला और ऐसे रास्तों का इस्तेमाल किया जहां सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे। हालांकि बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन क्षेत्र में उसकी गतिविधियों के कुछ सुराग मिले हैं। पुलिस लगातार सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। उर्मिला के शव का पोस्टमार्टम कराया जा चुका है, जबकि आरोपी के परिजनों से भी पूछताछ जारी है।

  • पहले मां को हटाओ, फिर बेटी को ले जाओ…” सास की अजीब शर्त सुनकर पुलिस भी रह गई हैरान..

    पहले मां को हटाओ, फिर बेटी को ले जाओ…” सास की अजीब शर्त सुनकर पुलिस भी रह गई हैरान..

    पहले मां को हटाओ, फिर बेटी को ले जाओ…” सास की अजीब शर्त सुनकर पुलिस भी रह गई हैरान..

    Agra Crime News: उत्तर प्रदेश के आगरा से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने मां-बेटे के रिश्ते को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोप है कि जिस मां ने अपने बेटे को जन्म दिया, उसे पाल-पोसकर बड़ा किया और जीवन भर उसका साथ दिया, उसी बेटे ने उसे जहर मिला खाना खिला दिया.

    इस मामले में बेटे की सास पर भी साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया है. हालांकि, अभी इन आरोपों की जांच चल रही है और पूरी सच्चाई पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगी.

    छोले की सब्जी में जहर मिलाने का आरोप

    मामला आगरा के पिनाहट थाना क्षेत्र के बरपुरा गांव का है. पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक, 9 जुलाई 2026 को दोपहर करीब 3 बजे रविन्द्र पर अपनी मां राममूर्ति को जहरीला खाना खिलाने का आरोप लगा.

    पीड़िता के पति रनवीर सिंह का आरोप है कि रविन्द्र ने छोले की सब्जी में जहरीला पदार्थ मिलाकर अपनी मां को खिला दिया. खाना खाने के बाद राममूर्ति की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. फिलहाल उनका इलाज चल रहा है.

    सास पर भी साजिश का आरोप

    इस मामले में सबसे बड़ा आरोप रविन्द्र की सास फूलवती को लेकर लगाया गया है. एफआईआर के अनुसार, रविन्द्र ने अपने पिता को बताया कि जहरीला पदार्थ उसे उसकी सास ने दिया था. आरोप है कि फूलवती ने उसे गटपुरा गांव बुलाकर जहर की पुड़िया दी और कहा कि अगर वह अपनी मां को रास्ते से हटा देगा, तभी उसकी बेटी को उसके साथ भेजा जाएगा. यानी शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मां को नुकसान पहुंचाने की कथित साजिश में पत्नी की मां भी शामिल थी.

    जमीन विवाद को बताया जा रहा वजह

    रविन्द्र के भाई मुकेश ने आरोप लगाया है कि परिवार में जमीन को लेकर विवाद चल रहा था. उसका कहना है कि रविन्द्र की सास ने अपनी बेटी को मायके में रोक रखा था और कथित तौर पर शर्त रखी थी कि अगर रविन्द्र अपनी मां को जहर दे देगा, तभी बेटी को उसके साथ भेजा जाएगा. इसके बाद आरोप है कि छोले की सब्जी में जहर मिलाकर मां को खिला दिया गया.

    पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच जारी

    पुलिस ने इस मामले में रविन्द्र और उसकी सास फूलवती के खिलाफ बीएनएस की धारा 61, 109 और 123 के तहत केस दर्ज किया है. पुलिस ने आरोपी बेटे को गिरफ्तार कर लिया है. अब मामले की जांच मेडिकल रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और दूसरे सबूतों के आधार पर की जा रही है.

    फिलहाल एफआईआर में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है. मामले की पूरी सच्चाई पुलिस जांच और अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों के आधार पर ही सामने आएगी.

  • वीजा रिजेक्शन के बाद भी नहीं टूटी उम्मीद! इस मंदिर की मान्यता पर श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास..

    वीजा रिजेक्शन के बाद भी नहीं टूटी उम्मीद! इस मंदिर की मान्यता पर श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास..

    वीजा रिजेक्शन के बाद भी नहीं टूटी उम्मीद! इस मंदिर की मान्यता पर श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास..

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    भारत में आस्था और विश्वास के कई अनोखे रंग देखने को मिलते हैं. भगवान के प्रति लोगों की दीवानगी और श्रद्धा के कई किस्से आपने सुने होंगे. लेकिन क्या आपने कभी किसी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है, जहां लोग देवी देवताओं को चढ़ावे में मिठाई या फूल नहीं बल्कि अपना पासपोर्ट और वीजा की फाइल चढ़ाते हैं.

    जी हां, दिल्ली और हैदराबाद में बजरंगबली के कुछ ऐसे ही चमत्कारी मंदिर स्थित हैं. इन मंदिरों को लोग अब वीजा वाले हनुमान जी के नाम से जानने लगे हैं.

    यहां हर रोज सैकड़ों की तादाद में ऐसे युवा और लोग पहुंच रहे हैं, जिनका विदेश जाने का सपना किसी न किसी वजह से अटका हुआ है. लोगों की गहरी मान्यता है कि यहां आकर अर्जी लगाने से अमेरिका और कनाडा जैसे देशों का वीजा पलक झपकते ही मिल जाता है.

    दिल्ली के नेब सराय में लगती है भक्तों की भारी अदालत

    देश की राजधानी दिल्ली के नेब सराय इलाके में वीजा वाले हनुमान जी का एक बेहद मशहूर मंदिर है. इस मंदिर में आपको आम दिनों में भी पैर रखने की जगह नहीं मिलेगी.

    खासकर शनिवार और मंगलवार के दिन यहां का नजारा देखने लायक होता है. दूर दूर से युवा लड़के लड़कियां अपने हाथों में रंग बिरंगे पासपोर्ट और वीजा के जरूरी दस्तावेज लेकर लाइन में खड़े नजर आते हैं.

    भक्तों का अटूट विश्वास है कि अगर किसी का वीजा बार बार रिजेक्ट हो रहा है, या एम्बेसी से कॉल नहीं आ रही है, तो यहां आकर हनुमान जी के चरणों में अपनी फाइल रखने से सारे काम अपने आप बन जाते हैं.

    हैदराबाद के चिलकुर बालाजी मंदिर से शुरू हुई थी यह अनोखी परंपरा

    वीजा वाले भगवान की यह अनोखी और दिलचस्प परंपरा सबसे पहले आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बॉर्डर पर शुरू हुई थी. हैदराबाद के करीब स्थित चिलकुर बालाजी मंदिर को देश का पहला वीजा मंदिर कहा जाता है.

    ये मंदिर भगवान वेंकटेश्वर यानी बालाजी का है. माना जाता है कि साठ और सत्तर के दशक में जब भारत के आईटी प्रोफेशनल्स और छात्रों का अमेरिका जाने का क्रेज बढ़ा, तब कई युवाओं के वीजा रिजेक्ट होने लगे थे.

    ऐसे में कुछ छात्रों ने यहां आकर मन्नत मांगी और उनका वीजा तुरंत लग गया. बस तभी से इस मंदिर का नाम वीजा बालाजी पड़ गया और आज भी लोग यहां पासपोर्ट लेकर मन्नत मांगने आते हैं.

    पासपोर्ट को भगवान के चरणों में छुआकर लगाई जाती है परिक्रमा

    इन मंदिरों में मन्नत मांगने का तरीका भी बेहद अलग और दिलचस्प है. मंदिर पहुंचने के बाद भक्त सबसे पहले हनुमान जी या बालाजी भगवान के दर्शन करते हैं.

    इसके बाद वे अपने ओरिजिनल पासपोर्ट या वीजा की जेरॉक्स कॉपी को भगवान के चरणों से स्पर्श कराते हैं. कई मंदिरों में मन्नत पूरी करने के लिए भगवान की मूर्ति के इर्द गिर्द 11 या 21 बार परिक्रमा करने का नियम है.

    लोग पूरी श्रद्धा के साथ हाथ में अपनी फाइल थामे भगवान का नाम जपते हुए चक्कर काटते हैं. मंदिर के पुजारियों के मुताबिक भगवान के लिए कोई भी काम असंभव नहीं है, इसलिए वे भक्तों की राह में आने वाली हर कानूनी और कागजी अड़चन को दूर कर देते हैं.

    मन्नत पूरी होने पर नारियल चढ़ाने और धन्यवाद करने दोबारा आते हैं लोग

    सोशल मीडिया और इंटरनेट के इस दौर में इन मंदिरों की ख्याति अब सात समंदर पार तक पहुंच चुकी है. केवल भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में रहने वाले भारतीय भी अपने रिश्तेदारों के जरिए यहां अर्जियां लगवा रहे हैं.

    मंदिर परिसर में आपको ऐसे कई लोग मिल जाएंगे जो अपनी मन्नत पूरी होने के बाद भगवान का शुक्रिया अदा करने आते हैं. नियम के अनुसार जब किसी भक्त का वीजा आ जाता है, तो वह दोबारा मंदिर आकर भगवान को नारियल, मिठाई या लाल चोला चढ़ाता है.

    विज्ञान और आधुनिकता के इस युग में भी ‘वीजा वाले हनुमान जी’ के प्रति लोगों का यह अनोखा भरोसा लगातार बढ़ता ही जा रहा है.

  • रातभर फोन चलाने की आदत पड़ सकती है भारी! कम नींद शरीर को पहुंचा सकती है गंभीर नुकसान.

    रातभर फोन चलाने की आदत पड़ सकती है भारी! कम नींद शरीर को पहुंचा सकती है गंभीर नुकसान.

    रातभर फोन चलाने की आदत पड़ सकती है भारी! कम नींद शरीर को पहुंचा सकती है गंभीर नुकसान.

    Sleep Disorder: ये नींद क्या है ? क्यों आती है नींद ? रात को जागने से लंबी बीमारियों से कैसे मौत के मुंह में जाता है इंसान ? जानिए नींद का वैज्ञानिक रहस्य. आजकल विज्ञान , कम्प्यूटर और नेट का जमाना है और पूरी दुनियां इंटरनेट से जुड़ गयी है. इसलिए मनुष्य रात और दिन काम करने लगा है. कॉल सेंटर और रात की शिफ्ट में काम करने वाले लोगों का बुरा हाल है. जवान बच्चे बहुत जल्दी नपुंसक और बूढ़े हो रहे हैं. दिनरात काम करने के कारण मनुष्य डिप्रेशन की भयंकर बीमारी और मानसिक रोगों का शिकार होने लगा है. बीमारियां कुकुरमुत्ते की तरह बढ़ रही हैं. रातभर जागना और दिन में सोना प्रकृति के नियमों के विरुद्ध है. जब-जब भी हम प्रकृति के नियमों का उल्लंघन करेंगे तब-तब तबाही के कगार पर आ जाएंगे.

    रातभर जागने के नुकसान

    आखिर क्यों रात को जागने से शुगर , उच्च रक्तचाप, किडनी फैलोर, कम उम्र में हार्ट अटैक , डिप्रेशन , सिरदर्द , बुद्धि का कमजोर होना , याद न रहना , और बुढ़ापा तथा हिजडापन जैसी बीमारियां आ रही हैं. नींद शरीर का एक ऑटोमैटिक सेंसर है, जो अपान प्राण के द्वारा संचालित है. पांचों प्राणों का संबंध शरीर की ऊर्जा शक्ति के साथ होता है. नींद का संबंध शरीर की ऊर्जा शक्ति के साथ साथ 72,72 ,10,202 नस-नाड़ियों के साथ होता है. जब शरीर में ऊर्जा की कमी होनी शुरू हो जाती है तो अपान प्राण नींद को संकेत कर देता है कि शरीर से काम लेना बंद कर दें और ऊर्जा की खपत को बंद कर दें क्योंकि शरीर थक चुका है. अन्यथा शरीर के अंगों पर दुष्प्रभाव पड़ेगा. प्राण सूर्य की किरणों से संचालित होते हैं. प्राण दिन में सूर्य से ऊर्जा एकत्रित कर लेते हैं.

    क्यों होती हैं बीमारियां?

    प्राण शरीर को इन्वर्टर की तरह चार्ज कर देते हैं. रात को प्राणों को ऊर्जा की सप्लाई नहीं हो पाती है, फिर भी रात भर जागने से शरीर तो काम करता है और ऊर्जा की खपत भी करता है. ऐसी स्थिति में समान प्राण शरीर को ऊर्जा की पूर्ति के लिए शरीर के चलायमान अंगो से ( लीवर, किडनी, फेफड़े, आंते, हृदय, मस्तिष्क , पेनक्रिया तथा पेट ) से ऊर्जा लेना शुरू कर देता है. शरीर में ऊर्जा की सप्लाई का काम समान प्राण के पास होता है. जब पूरी रात जागते हैं तो 1 हफ्ते में शरीर के ये अंग बहुत कमजोर हो जाते हैं और इन अंगो की ऊर्जा शक्ति समाप्त हो जाती है, जिसके कारण उपर लिखी हुई बीमारियां पैदा हो जाती हैं. जब ये शरीर के अंग कमजोर हो जाते हैं तो फिर समान प्राण शरीर के बाहरी हिस्से से ऊर्जा लेना शुरू कर देता है, जिसके कारण मनुष्य पहले अन्दर के अंगों से कमजोर होता है उसके बाद शरीर के बाहरी हिस्से से अंगो ( हिप्स , जांघे , हाथ , गाल , गर्दन ) से कमजोर होकर दुबला होना शुरू हो जाता है.

    रात को जागना क्यों हैं घातक?

    ज्यादा काम करने वाले लोगों को ज्यादा नींद आती है, क्योंकि शरीर में ऊर्जा की खपत ज्यादा हो जाती है और शरीर थक जाता है. शरीर में दुबारा ऊर्जा की आपूर्ति के लिए नींद शरीर को निष्क्रिय अवस्था में कर देती है या हम यह कह सकते हैं कि (Non Working Mode) पर डाल देती है, जिसके कारण शरीर अचेतन अवस्था में चला जाता है और सो जाता है . इसलिए नींद शरीर का एक ऑटोमैटिक ऊर्जा मापक यंत्र है, जो आपको समय-समय पर संकेत देता है कि अब आप सो जाओ अन्यथा अंग बीमार हो जाएंगे. अगर आप नींद की नहीं मानोगे तो वह आपके शरीर के अंगो को नुकसान (damage) कर देगी,  इसलिए रात को जागने वाले और दिन को सोने वाले लोग की उम्र आधी रह जाती है और लंबी बीमारी के कारण अचानक जल्दी म्रत्यु को प्राप्त हो जाते हैं. इसलिए स्वस्थ रहने के लिए मनुष्य को रात को पूरी नींद करनी चाहिए. गहरी नींद लेने का समय 10 से 4 बजे तक ही होता है.

  • गिरनार की सीढ़ियों पर बच्चे पर शेर का हमला, परिवार के सामने ले गया; घटना के बाद तीर्थयात्रा रोकी गई

    गिरनार की सीढ़ियों पर बच्चे पर शेर का हमला, परिवार के सामने ले गया; घटना के बाद तीर्थयात्रा रोकी गई

    गिरनार की सीढ़ियों पर बच्चे पर शेर का हमला, परिवार के सामने ले गया; घटना के बाद तीर्थयात्रा रोकी गई

    Gujarat News: गुजरात के गिरनार हिल्स से एक खौफनाक मामला सामने आया है. यहां रविवार तड़के अपने परिवार के साथ इस पहाड़ी पर चढ़ाई कर रहे एक 11 साल के लड़के को एक शेर ने घसीटकर मार डाला. इस घटना के बाद अधिकारियों ने तीर्थयात्रा को स्थगित कर दिया और तलाशी अभियान शुरू किया गया.

    घटना सुबह लगभग 5 बजकर 45 मिनट की बताई जा रही है. यहां खेड़ा जिले के मोदज गांव का यह परिवार पहाड़ी पर चढ़ रहा था, तभी सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में शेर ने अचानक उस पर हमला कर दिया.

    बच्चे को घसीटकर ले गया शेर

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शेर बच्चे को घसीटकर पास के जंगल में ले गया. बाद में शव के अवशेष घटनास्थल से लगभग 100 मीटर दूर मिले. अवशेषों को फॉरेंसिक इन्वेस्टिगेशन के लिए भेज दिया गया है. वन विभाग ने तुरंत श्रद्धालुओं को गिरनार की सीढ़ियों का इस्तेमाल करने से रोक दिया और ट्रैकर्स, फॉरेस्ट गार्ड्स और वेटर्निटी टीमों के साथ एक सर्च ऑपरेशन शुरू किया.

    शेरों को पकड़ा

    अधिकारियों ने लगभग 4 घंटों के अंदर शेर को पकड़ लिया. माना जा रहा था कि वही शेर हमले के लिए जिम्मेदार था. एहतियात के तौर पर इलाके में देखे गए 2 अन्य शेरों को भी पकड़ लिया गया और जांच के लिए सक्करबाग चिड़ियाघर भेज दिया गया. वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हमले को अंजाम देने वाली संदिग्ध शेरनी ने जांच के दौरान उल्टी की और उल्टी में मानव अवशेष पाए गए, जिससे घटना में उसकी शामिल होने का संदेह और पुख्ता हो गया. वहीं, अन्य 2 शेरों की भी जांच की जा रही है.

    तीर्थयात्रा को किया बंद

    घटना को लेकर अधिकारियों ने बताया कि जांच के तहत घटनास्थल से जानवरों के पैरों के निशान, घसीटने के निशान और अन्य सबूत इकट्ठा कर लिए गए हैं. गिरनार तीर्थयात्रा मार्ग को अगली सूचना तक लोगों के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है. इस घटना से लोग सहमे हुए हैं.

  • पाकिस्तान में कजिन मैरिज पर नई रिसर्च ने चौंकाया, वैज्ञानिकों को मिले हजारों ‘स्विच ऑफ’ जीन

    पाकिस्तान में कजिन मैरिज पर नई रिसर्च ने चौंकाया, वैज्ञानिकों को मिले हजारों ‘स्विच ऑफ’ जीन

    पाकिस्तान में कजिन मैरिज पर नई रिसर्च ने चौंकाया, वैज्ञानिकों को मिले हजारों ‘स्विच ऑफ’ जीन

    क्या परिवार के भीतर होने वाली शादियां आने वाली पीढ़ियों की सेहत को प्रभावित कर सकती हैं? यह सवाल लंबे समय से वैज्ञानिकों के बीच चर्चा का विषय रहा है। अब एक नई रिसर्च ने इस बहस को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।

    वैज्ञानिकों के अनुसार, करीबी रिश्तेदारों के बीच विवाह (कजिन मैरिज) से कुछ आनुवंशिक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसी विषय पर किए गए एक बड़े अध्ययन में पाकिस्तान के जीनोमिक डेटा से कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं।

    आखिर क्या है ‘ह्यूमन नॉकआउट’?

    शोधकर्ताओं के मुताबिक, अध्ययन के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मामले मिले जिन्हें ह्यूमन नॉकआउट कहा जाता है। इसका मतलब है कि किसी व्यक्ति के शरीर में एक या अधिक जीन पूरी तरह काम करना बंद कर देते हैं या उनकी कार्यशील प्रतियां मौजूद नहीं रहतीं।

    हर व्यक्ति को हर जीन की दो प्रतियां मिलती हैं—एक मां से और दूसरी पिता से। यदि दोनों प्रतियों में एक जैसा हानिकारक बदलाव (म्यूटेशन) मौजूद हो, तो संबंधित जीन का सामान्य कार्य प्रभावित हो सकता है।

    कजिन मैरिज से क्यों बढ़ सकता है जोखिम?

    विशेषज्ञों के अनुसार, करीबी रिश्तेदारों में कुछ आनुवंशिक बदलाव समान होने की संभावना सामान्य आबादी की तुलना में अधिक होती है। ऐसे में यदि दोनों माता-पिता से बच्चे को एक ही परिवर्तित जीन मिलता है, तो कुछ दुर्लभ आनुवंशिक विकारों का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि इसका यह अर्थ नहीं है कि हर कजिन मैरिज से जन्म लेने वाले बच्चे में कोई बीमारी अवश्य होगी, बल्कि जोखिम सांख्यिकीय रूप से अधिक हो सकता है।

    रिसर्च में क्या सामने आया?

    नेचर जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, दक्षिण एशिया के 1,73,303 जीनोम का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि अध्ययन में शामिल पाकिस्तान जीनोम संसाधन के प्रतिभागियों में हर पांच में से लगभग एक व्यक्ति में कम से कम एक ऐसा जीन था, जो सामान्य रूप से कार्य नहीं कर रहा था। अध्ययन में करीब 6,500 जीन ऐसे मिले, जिनमें कार्यक्षमता प्रभावित होने के संकेत मिले।

    वैज्ञानिकों का मानना है कि इन निष्कर्षों से यह समझने में मदद मिलेगी कि अलग-अलग जीन शरीर में क्या भूमिका निभाते हैं और उनके निष्क्रिय होने से स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।

    दवाओं के विकास में मिल सकती है मदद

    शोधकर्ताओं का कहना है कि पहले ऐसे कई अध्ययन मुख्य रूप से चूहों पर किए जाते थे। लेकिन इंसानों और चूहों की आनुवंशिक संरचना में महत्वपूर्ण अंतर होने के कारण कई बार पशुओं पर सफल दवाएं इंसानों में अपेक्षित परिणाम नहीं दे पातीं।

    मानव जीनोम पर आधारित इस तरह के अध्ययन भविष्य में नई दवाओं के विकास, दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों की पहचान और बेहतर इलाज की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की रिसर्च से व्यक्तिगत चिकित्सा (Personalized Medicine) और जीन आधारित उपचार को भी नई दिशा मिल सकती है।

  • दक्षिण भारत के इन मंदिरों का अनोखा चमत्कार! कहीं मूर्ति की धड़कन महसूस होती है, तो कहीं आता है पसीना

    दक्षिण भारत के इन मंदिरों का अनोखा चमत्कार! कहीं मूर्ति की धड़कन महसूस होती है, तो कहीं आता है पसीना

    दक्षिण भारत के इन मंदिरों का अनोखा चमत्कार! कहीं मूर्ति की धड़कन महसूस होती है, तो कहीं आता है पसीना

    दक्षिण भारत के मंदिर सिर्फ पूजा पाठ की जगह नहीं हैं, ये पुराने जमाने की साइंस और कला का ऐसा बेजोड़ नमूना हैं जिसे देखकर आज के इंजीनियर्स का भी सिर चकरा जाता है. हमने मंदिरों के कई तरह के चमत्कारों के बारे में सुना है, लेकिन साउथ में तीन मंदिर ऐसे हैं जहां की मूर्तियां बिल्कुल किसी जीते जागते इंसान की तरह बर्ताव करती हैं.

    कहीं भगवान के सीने में धड़कन महसूस होती है, तो कहीं उन्हें हम इंसानों की तरह पसीना आता है. इन मंदिरों की कहानियां इतनी अनोखी हैं कि इन पर यकीन करना किसी के लिए भी मुश्किल हो जाता है.

    आइए आज आपको दक्षिण भारत के इन्हीं तीन सबसे अनोखे और रहस्यमयी मंदिरों की सैर पर ले चलते हैं, जहां का सच विज्ञान की समझ से भी कोसों दूर है.

    चिदंबरम नटराज मंदिर का महा रहस्य

    तमिलनाडु में स्थित चिदंबरम नटराज मंदिर भगवान शिव के सबसे खास धामों में से एक माना जाता है. यहां भगवान शिव की नटराज रूप में बेहद खूबसूरत मूर्ति स्थापित है.

    इस मंदिर को लेकर वैज्ञानिकों और रिसर्च करने वालों के बीच हमेशा से एक बड़ी बहस चलती आई है. दावा किया जाता है कि इस मंदिर की मुख्य मूर्ति के ठीक दिल वाली जगह पर अगर बहुत ध्यान से महसूस किया जाए, तो वहां लगातार एक धड़कन की आवाज सुनाई देती है.

    ये धड़कन बिल्कुल वैसी ही होती है जैसी किसी जीवित इंसान के सीने से आती है. यहां तक कि कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यह मंदिर पृथ्वी के चुंबकीय केंद्र पर बना हुआ है, जिसकी वजह से यहां एक बेहद शक्तिशाली ऊर्जा का अहसास होता है.

    इस रहस्य को समझने के लिए कई लोगों ने कोशिश की, लेकिन आज तक कोई भी इसके पीछे की असली वजह का पता नहीं लगा पाया है.

    थिरुमालीरुंचोलई मंदिर का सच

    अब बात करते हैं तमिलनाडु के ही तिरुनेलवेली में बने थिरुमालीरुंचोलई मंदिर की. यह पावन धाम भगवान विष्णु को समर्पित है और यहां का नजारा गर्मियों के दिनों में हर किसी को हैरान कर देता है.

    जब बाहर कड़ाके की धूप होती है और गर्मी का पारा चढ़ने लगता है, तो मंदिर के गर्भगृह में मौजूद भगवान विष्णु की पत्थर की मूर्ति को साक्षात पसीना आने लगता है.

    मूर्ति के चेहरे और शरीर पर पानी की छोटी छोटी बूंदें साफ दिखाई देने लगती हैं, बिल्कुल वैसे ही जैसे किसी आम इंसान को उमस भरे मौसम में पसीना आता है. इस अनोखी घटना को देखने के लिए दूर दूर से लोग आते हैं.

    मंदिर के पुजारी हर दिन सूती कपड़े से भगवान के इस पसीने को बहुत आदर के साथ पोंछते हैं. विज्ञान के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि एक बंद और ठंडे गर्भगृह में रखे ठोस पत्थर से पानी की बूंदें इस तरह कैसे बाहर निकल सकती हैं.

    पेरूर पट्टेश्वरर मंदिर का अजूबा

    कोयंबटूर के पास स्थित पेरूर पट्टेश्वरर मंदिर अपने आप में प्राचीन कला का एक अद्भुत केंद्र है. लेकिन यहां की सबसे बड़ी चर्चा एक खास मूर्ति को लेकर होती है. इस मंदिर के परिसर में बनी एक मूर्ति की मूंछें समय के साथ अपने आप बड़ी होती जाती हैं.

    स्थानीय लोगों और मंदिर के पुराने पुजारियों का कहना है कि इस मूर्ति की मूंछों के बाल प्राकृतिक रूप से बढ़ते हैं, जिसके कारण एक निश्चित समय के बाद उन्हें हल्का सा तराशा या ठीक किया जाता है.

    निर्जीव पत्थर पर बालों का इस तरह से उगना और उनका बढ़ना किसी के भी रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है. कई लोगों ने इसे महज़ एक वहम माना, लेकिन सालों से इस बदलाव को करीब से देखने वाले भक्त इसे भगवान का साक्षात चमत्कार ही मानते हैं.

    आस्था और विज्ञान की इस अनोखी जंग में जीत हमेशा श्रद्धा की ही होती है

    इन तीनों मंदिरों की अद्भुत घटनाएं यह सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि क्या वाकई इन प्राचीन मूर्तियों में कोई दिव्य जीवन वास करता है. विज्ञान जहां इसे पत्थरों की खास बनावट, वातावरण की नमी या किसी खास रासायनिक प्रतिक्रिया का नाम देकर टालने की कोशिश करता है, वहीं भक्तों के लिए यह उनके आराध्य का साक्षात रूप है.

    हमारे पूर्वजों ने इन मंदिरों को किस तकनीक और सोच के साथ बनाया था, यह रहस्य आज भी उन ऐतिहासिक दीवारों के भीतर ही दफन है. लेकिन एक बात तो बिल्कुल साफ है भाई, इन मंदिरों में कदम रखते ही जो असीम शांति और चमत्कारों का अहसास होता है, उसे शब्दों में बयां कर पाना नामुमकिन है.

    यही वजह है कि सदियों बाद आज भी इन पवित्र जगहों के प्रति लोगों की आस्था रत्ती भर भी कम नहीं हुई है.