
जम्मू: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए खौफनाक आतंकी नरसंहार के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सोमवार को एक बहुत बड़ी और निर्णायक कार्रवाई की है। एनआईए ने पाकिस्तान में छिपकर बैठे वैश्विक आतंकवादी और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के सरगना हाफिज सईद के खिलाफ अदालत में सप्लीमेंट्री (पूरक) चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच एजेंसी ने साफ किया है कि इस पूरे खूनी खेल का असली मास्टरमाइंड हाफिज सईद ही था, जिसने सीमा पार पाकिस्तान से इस बड़े हमले की साजिश रची थी।
याद दिला दें कि पिछले साल 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में छुट्टियों का लुत्फ उठा रहे बेगुनाह लोगों पर आतंकियों ने अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं, जिसमें 25 पर्यटकों और एक स्थानीय नागरिक समेत 26 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी।
हाफिज सईद पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने और UAPA के तहत गंभीर धाराएं
जम्मू की विशेष एनआईए अदालत में दाखिल की गई इस पूरक चार्जशीट में आतंकवाद-रोधी एजेंसी ने हाफिज सईद पर चौतरफा शिकंजा कसा है। उस पर व्यक्तिगत रूप से और साथ ही प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा व उसके मुखौटा संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) के आका के रूप में गंभीर आरोप तय किए गए हैं।
एनआईए के मुताबिक, हाफिज सईद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA), 1967 की कई बेहद सख्त धाराएं लगाई गई हैं। चार्जशीट में उस पर मुख्य रूप से भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और विदेशी धरती से कश्मीर में आतंक फैलाने का आरोपी बनाया गया है।
डिजिटल और वैज्ञानिक सबूतों से सजी 1,597 पन्नों की मूल चार्जशीट का विस्तार
एनआईए ने मीडिया को बताया कि यह नई सप्लीमेंट्री चार्जशीट पहले दाखिल की जा चुकी 1,597 पन्नों की मुख्य चार्जशीट का ही एक अहम हिस्सा है। इस चार्जशीट में पाकिस्तान की गहरी साजिश, हमले में हाफिज सईद की सीधी संलिप्तता और एनआईए की ग्राउंड व वैज्ञानिक जांच से जुटाए गए ऐसे पुख्ता डिजिटल सबूत शामिल किए गए हैं, जिन्हें अदालत में झुठलाया नहीं जा सकता। जांच एजेंसी ने बताया कि यह कार्रवाई पाकिस्तान के नापाक चेहरे को बेनकाब करने के लिए उसकी पिछली जांच को और ज्यादा मजबूत करती है।
ऑपरेशन महादेव में ढेर हो चुके हैं हमले में शामिल तीन दुर्दांत आतंकी
गौरतलब है कि इससे पहले दिसंबर 2025 में एनआईए ने पाकिस्तान में बैठे एक और हैंडलर साजिद जट्ट के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इसके साथ ही उन तीन स्थानीय आतंकियों को भी मुख्य चार्जशीट में नामजद किया गया था, जिन्हें भारतीय सुरक्षाबलों ने जुलाई 2025 में ‘ऑपरेशन महादेव’ के दौरान एक भीषण मुठभेड़ में मार गिराया था। मामले में दो अन्य मददगार आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।
एजेंसी ने लश्कर और टीआरएफ (TRF) को कानूनी संस्थाओं के रूप में आरोपी बनाते हुए स्पष्ट किया है कि इन्हीं संगठनों ने मिलकर पहलगाम हमले के लिए फंड मुहैया कराया, रेकी की और पूरी साजिश को अंजाम तक पहुंचाया। मामले की कड़ियां जोड़ने के लिए एनआईए की तफ्तीश अभी भी जारी है।

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