बच्चे को बुखार में तुरंत एंटीबायोटिक देना पड़ सकता है भारी! डॉक्टर ने बताए 5 बड़े मिथक और जरूरी सावधानियां…

बच्चे को बुखार में तुरंत एंटीबायोटिक देना पड़ सकता है भारी! डॉक्टर ने बताए 5 बड़े मिथक और जरूरी सावधानियां…
बच्चे को बुखार में तुरंत एंटीबायोटिक देना पड़ सकता है भारी! डॉक्टर ने बताए 5 बड़े मिथक और जरूरी सावधानियां…

बच्चे के बुखार में माता-पिता को सिर्फ थर्मामीटर की रीडिंग पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि बच्चे की पूरी स्थिति पर नजर रखनी चाहिए. सही जानकारी और समय पर चिकित्सकीय सलाह अनावश्यक दवाओं से बचाने के साथ गंभीर बीमारी की पहचान में भी मदद कर सकती है.

बच्चों को बुखार आते ही माता-पिता अक्सर घबरा जाते हैं और तापमान कम करने के लिए तुरंत दवा, ठंडे पानी की पट्टी या एंटीबायोटिक का सहारा लेने लगते हैं. हालांकि, हर बुखार गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता. बुखार शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का संक्रमण से लड़ने का एक स्वाभाविक तरीका है. ऐसे में जरूरी है कि माता-पिता केवल थर्मामीटर की रीडिंग पर ध्यान देने के बजाय बच्चे की पूरी स्थिति को समझें. बच्चों में बुखार को लेकर के डॉ. जैन से बात की. उन्होंने बच्चों के बुखार से जुड़े कुछ आम मिथकों और जरूरी सावधानियों के बारे में बताया है.

मिथक 1: तेज बुखार का मतलब गंभीर बीमारी नहीं… तेज बुखार हमेशा गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता. वायरल संक्रमण में भी बच्चे का तापमान काफी बढ़ सकता है. बीमारी की गंभीरता जानने के लिए बच्चे का व्यवहार, उसकी सक्रियता, सांस लेने में परेशानी और पानी पीने की क्षमता पर ध्यान देना जरूरी है. अगर बुखार कम होने के बाद बच्चा सामान्य तरीके से खेल रहा है और तरल पदार्थ ले रहा है तो यह राहत की बात हो सकती है.

मिथक 2: हर बुखार में एंटीबायोटिक जरूरी अधिकांश बच्चों में बुखार वायरल संक्रमण के कारण होता है और एंटीबायोटिक वायरस पर असर नहीं करती. बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक देने से दुष्प्रभाव और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए दवा देने से पहले बुखार का कारण समझना जरूरी है.

मिथक 3: तापमान को तुरंत 98.6°F करना जरूरी बुखार का इलाज केवल तापमान को सामान्य करने के लिए नहीं किया जाता, बल्कि बच्चे की परेशानी कम करना मुख्य उद्देश्य होता है. बच्चा आराम से है, पर्याप्त तरल पदार्थ ले रहा है और सामान्य व्यवहार कर रहा है तो सिर्फ तापमान के आंकड़े को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है. आराम और पर्याप्त तरल पदार्थ देना भी महत्वपूर्ण है.

मिथक 4: ठंडे पानी या बर्फ से बुखार जल्दी उतरता है बहुत ठंडे पानी या बर्फ का इस्तेमाल करने से बच्चे को कंपकंपी हो सकती है और वह ज्यादा असहज महसूस कर सकता है. बच्चे को हल्के और आरामदायक कपड़े पहनाएं और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ दें.

मिथक 5: दांत निकलने से तेज बुखार होता है दांत निकलने के दौरान बच्चे में चिड़चिड़ापन हो सकता है, लेकिन तेज बुखार को केवल दांत निकलने की वजह मानना सही नहीं है. ऐसे में संक्रमण जैसे दूसरे संभावित कारणों पर भी ध्यान देना चाहिए.इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें अगर बच्चा बहुत सुस्त है, उसे जगाने में परेशानी हो रही है, सांस लेने में दिक्कत है, लगातार उल्टी हो रही है, वह पानी नहीं पी पा रहा है, पेशाब कम हो गया है, गर्दन अकड़ रही है, दौरा पड़ा है या शरीर पर असामान्य बैंगनी या खूनी दाने दिखाई दे रहे हैं तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लें. तीन महीने से कम उम्र के बच्चे का तापमान 38°C या 100.4°F या इससे अधिक होने पर भी तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

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