मां की मौत पर डाला पर्दा, कागजों में सालों तक रखी जिंदा, बेटे और गर्लफ्रेंड की साजिश का ऐसे हुआ खुलासा..

मां की मौत पर डाला पर्दा, कागजों में सालों तक रखी जिंदा, बेटे और गर्लफ्रेंड की साजिश का ऐसे हुआ खुलासा..
मां की मौत पर डाला पर्दा, कागजों में सालों तक रखी जिंदा, बेटे और गर्लफ्रेंड की साजिश का ऐसे हुआ खुलासा..

राजस्थान के जयपुर में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक बेटे ने अपनी मरी हुई मां को जिंदा बताकर उसकी लाखों की पेंशन में हड़प ली. पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.

Jaipur Cyber Fraud Case: राजस्थान के जयपुर में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां एक बेटे ने अपनी गर्लफ्रेंड और बैंक मैनेजर के साथ मिलकर अपनी मां के नाम पर धोखाधड़ी की. बेटे ने अपनी मरी हुई मां को पांच सालों से कागजों पर जिंदा रखा हुआ था और एसबीआई बैंक से 6.3 लाख रुपये की पेंशन हड़प ली. मामले का खुलासा होने पर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. 

2021 में हो गई थी मौत

जानकारी के अनुसार, जवाहरनगर थानाधिकारी सरला यादव ने इस बारे में बताया कि आरोपी लालचंद की मां शांति देवी का निधन 2 मई 2021 में हो गया था. इसके बावजूद वो उन्हें जिंदा बताता रहा, इसके लिए उसने फर्जी जीवित पत्र भी बनवाया और एसबीआई के तत्कालीन बैंक कर्मी के साथ मिलकर पेंशन लेता रहा. उसने एटीएम और दूसरे तरीकों का इस्तेमाल करके लगभग 6.3 लाख रुपए निकाल लिए. 

पुलिस ने आरोपियों को किया गिरफ्तार

पुलिस ने बताया कि उसके इस अपराध में लालचंद ने अपनी गर्लफ्रेंड खुशबू दीक्षित और बैंक के तत्कालीन कर्मचारी सिराज अहमद कुरैशी के साथ मिलकर प्लानिंग की और धोखाधड़ी को अंजाम दिया. इस मामले में खुलासा होने के बाद जवाहर नगर थाना पुलिस ने आरोपी लालचंद के साथ ही बैंक मैनेजर सिराज अहमद कुरैशी और लालचंद की गर्लफ्रेंड खुशबू दीक्षित उर्फ नेहा को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया और फिर तीनों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया. 

कैसे हुआ मामले का खुलासा?

इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब को SBI की राजापार्क ब्रांच के प्रबंधक तपिश श्रीवास्तव ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने शिकायत में दावा किया कि शांति देवी के नाम पर बीते कई सालों से पेंशन जा रही है लेकिन शांति देवी का निधन काफी पहले ही हो चुकी है. इस बारे में शिकायत मिलने पर जांच शुरू की गई. जांच में नगर निगम के मृत्यु प्रमाण पत्र से पता चला कि शांति देवी की मौत मई 2021 में ही हो चुकी है. इसके बावजूद भी पेंशन जारी रही और फर्जी जीवित प्रमाण पत्र के जरिए उन्हें जिंदा दिखाया गया और रकम निकाली जाती रही. 

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