मानसून में डाइट में शामिल कर सकते हैं ये 7 हर्बल फूड्स, आयुर्वेदिक एक्सपर्ट मानते हैं इन्हें अमृत,

मानसून में डाइट में शामिल कर सकते हैं ये 7 हर्बल फूड्स, आयुर्वेदिक एक्सपर्ट मानते हैं इन्हें अमृत,
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बरसात का मौसम कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। खासकर डायबिटीज और कुछ दूसरी क्रोनिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों में संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है और बीमारी होने पर complications की संभावना भी अधिक हो सकती है।आयुर्वेद के मुताबिक बरसात के महीनों में शरीर में ‘पित्त’ और ‘वात’ दोष का असंतुलन हो जाता है जिससे बॉडी में बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है। आयुर्वेद के मुताबिक बरसात के महीने में बॉडी को हेल्दी रखने के लिए और इम्यूनिटी को स्ट्रांग करने के लिए किचन में मौजूद कुछ देसी चीजों का सेवन बेहद असरदार साबित होता है।

आधुनिक विज्ञान और न्यूट्रिशन रिसर्च भी कुछ हर्ब्स और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-बैक्टीरियल और इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुण शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद करते हैं। अगर आप भी इस मौसम में बिना बीमार पड़े सेहतमंद रहना चाहते हैं, तो अपनी दैनिक डाइट में इन 7 हर्बल फूड्स को शामिल कर सकते हैं। आइए, आयुर्वेदिक विशेषज्ञों और वैज्ञानिक रिसर्च के नजरिए से जानते हैं कि ये हर्बल फूड्स आपकी सेहत के लिए किस तरह फायदेमंद साबित हो सकते हैं और इसका सेवन कैसे करना चाहिए।

गुनगुना पानी

सावन के मौसम में वातावरण में नमी और आर्द्रता बढ़ने से पाचन पर असर पड़ सकता है ऐसे में आपको रोज गुनगुना पानी पीना चाहिए।आयुर्वेदिक एक्सपर्ट और योग गुरु बाबा रामदेव के मुताबिक सुबह खाली पेट और दिनभर हल्का गुनगुना पानी पीने से पाचन दुरुस्त रहता है। रोज गुनगुना पानी पीने से पेट में गैस, ब्लोटिंग, कब्ज और भारीपन जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है। उबला या गुनगुना पानी पीना मानसून में जलजनित संक्रमणों से बचाव के लिए भी उपयोगी बताया गया है।

अदरक का करें सेवन

नेशनल सेंटर फॉर कॉम्प्लिमेंटरी एंड इंटीग्रेटेड हेल्थ (NCCIH) अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ (NIH) का एक प्रमुख हिस्सा है,के मुताबिक संतुलित मात्रा में अदरक का सेवन सेहत को फायदा पहुंचाता है। कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि अदरक का सेवन पीरियड्स पेन, घुटने के दर्द या ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षणों को कम करने में मददगार होता है। अदरक को मानसून में पाचन और सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं के लिए उपयोगी बताया गया है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और दूसरे बायोएक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं। इसे हर्बल टी, काढ़े या सब्जियों में शामिल किया जा सकता है।

त्रिफला चूर्ण का करें सेवन

आयुर्वेदिक एक्सपर्ट नित्यानंदम श्री के मुताबिक त्रिफला एक ऐसी जड़ी बूटी है जो पेट से लेकर डायबिटीज तक का इलाज करती है। एक चम्मच इस हर्ब के पाउडर का सेवन करने से बॉडी में जमा सारी गंदगी बाहर निकल जाती है। त्रिफला आंवला, हरड़ और बहेड़ा से बना पारंपरिक आयुर्वेदिक मिश्रण है। इसे खासतौर पर कब्ज और पाचन संबंधी समस्याओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है। रात को सोने से पहले आधा चम्मच त्रिफला गुनगुने पानी के साथ लेने से सेहत को फायदा होता है। नियमित या लंबे समय तक सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

भुना हुआ जीरा खाएं

आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉक्टर रूपाली जैन ने बताया है कि जीरे का सेवन पाचन को दुरुस्त करता है। जीरा पाचन को सपोर्ट करने वाला मसाला है। इसे छाछ या पानी में थोड़ा सा मिलाकर लिया जा सकता है। बरसात में जीरे का सेवन करने से पाचन से जुड़ी दिक्कते जैसे गैस, पेट फूलने, भारीपन और अपच जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है। भोजन में सीमित मात्रा में भुना जीरा शामिल करना मानसून के दौरान एक आसान विकल्प हो सकता है।

सेंधा नमक का करें सेवन

सेंधा नमक का इस्तेमाल खासतौर पर व्रत और उपवास के दौरान किया जाता है लेकिन आयुर्वेद इसे सामान्य नमक से बेहतर विकल्प के तौर पर देखता है। netmeds में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक सेंधा नमक पेट में पाचक एंजाइम और हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl) के स्राव को बढ़ावा देता है। यह भोजन के बेहतर अवशोषण, गैस, ब्लोटिंग (पेट फूलना) और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मददगार है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि सेंधा नमक भी मुख्य रूप से सोडियम क्लोराइड ही है और ज्यादा मात्रा में इसका सेवन हाई ब्लड प्रेशर या वाटर रिटेंशन वाले लोगों के लिए उचित नहीं है। इसलिए इसकी मात्रा सीमित रखना जरूरी है।

तुलसी के पत्ते

आयुर्वेदिक एक्सपर्ट आचार्य बालकृष्ण के मुताबिक तुलसी का इस्तेमाल भारतीय पारंपरिक चिकित्सा में लंबे समय से किया जाता रहा है। तुलसी में यूजेनॉल समेत कई बायोएक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं। बरसात के मौसम में तुलसी की चाय या काढ़े को पीने से मानसून में सर्दी-जुकाम और गले की परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है। हालांकि, तुलसी को प्राकृतिक एंटीबायोटिक या वायरल संक्रमण का इलाज मानना सही नहीं है।

नीम की पत्तियां

नीम में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुणों वाले कई कंपाउंड पाए जाते हैं और पारंपरिक चिकित्सा में इसका इस्तेमाल त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए किया जाता रहा है। बरसात के मौसम में आयुर्वेदिक एक्सपर्ट नीम की कोपलें खाने और नीम के पानी से नहाने की सलाह देते हैं ताकि इम्यूनिटी मजबूत रहे और बॉडी का बीमारियों से बचाव हो।  हालांकि, नीम की पत्तियों का नियमित सेवन हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, बच्चों और दवाएं लेने वाले लोगों को बिना विशेषज्ञ की सलाह इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दी गई जानकारी किसी बीमारी के इलाज, दवा या डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी खाद्य पदार्थ, घरेलू नुस्खे या हर्बल उत्पाद का नियमित सेवन शुरू करने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति और चल रही दवाओं को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह ले

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