मेनोपॉज के लक्षण कर रहे हैं परेशान तो आजमाएं यह 9 आयुर्वेदिक दवाएं और नुस्खे..

मेनोपॉज के लक्षण कर रहे हैं परेशान तो आजमाएं यह 9 आयुर्वेदिक दवाएं और नुस्खे..
मेनोपॉज के  लक्षण कर रहे हैं परेशान तो आजमाएं यह 9 आयुर्वेदिक दवाएं और नुस्खे

26 साल की निधि को आजकल उसकी मम्मी बेहद चिड़चिड़ी और परेशान नजर आती हैं। अपने कामों में व्यस्त होने की वजह से निधि को मम्मी के यह सिम्टम्स अब नजर आने शुरू हुए। उसने जब मम्मी से इसका कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि वह मेनोपॉज के दौर से गुजर रही हैं।

निधि को आश्चर्य हुआ क्योंकि वह तो अभी तक यही समझती थी कि पीरियड्स होना ही सबसे मुश्किल दौर है। लेकिन हम में से अधिकतर लोगों की तरह वह यह नहीं जानती थी कि पीरियड्स का बंद होना यानी मेनोपॉज का दौर महिलाओं के लिए बहुत मुश्किल होता है।

50 से लेकर 55 साल तक की उम्र के बीच अधिकतर महिलाएं मेनोपॉज से गुजरती है। इन मेनोपॉज एक ऐसा दौर है जिसके बाद महिलाओं की ओवरी एग बनाना बंद कर देती हैं। इस वजह से इस दौर के बाद महिलाओं को पीरियड जाने बंद हो जाते हैं और साथ ही इसके बाद वो मां नहीं बन सकतीं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि मेनोपॉज सिर्फ एक दिन या एक महीना नहीं होता। पीरियड्स का होना बंद होने के करीब 1 साल पहले से ही महिलाओं में प्री-मेनोपॉज लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं। उनकी चिड़चिड़ाहट बढ़ जाती है, वह परेशान और बेचैन नजर आने लगते हैं और हॉर्मोन्स के उतार-चढ़ाव की वजह से ही उनमें सेक्सुअल अर्ज कभी बढ़ती तो कभी बिल्कुल खत्म हो जाती है।

ऐसे में यह जरूरी है की इस दौर में कुछ उपाय अपनाए जाएं जिससे मेनोपॉज के दौर से गुजर रही महिला का जीवन थोड़ा सा आसान हो जाए।

आयुर्वेदिक डॉक्टर कहते हैं कि इस दौरान महिलाओं को ऐसे भोजन से दूर रहना चाहिए जो वात और पित्त को बढ़ाता हो। तीखा और तला भोजन अक्सर मेनोपॉज के दौरान होने वाले शारीरिक और मानसिक लक्षणों को और अधिक बढ़ा देता है, जिससे महिलाओं के लिए समस्या और बढ़ जाती है।

इसलिए इस दौरान महिलाओं को ऐसे कोई आइटम खाने चाहिए जिन की तासीर ठंडी हो। इनमें सौंफ, इलायची, नारियल पानी जैसे ठंडे फूड आइटम शामिल हो सकते हैं।

मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के आयुर्वेदिक इलाज और घरेलू उपाय

मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) महिलाओं के जीवन में एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें मासिक धर्म स्थायी रूप से बंद हो जाता है। इस दौरान कई शारीरिक और मानसिक परिवर्तन होते हैं, जिनसे निपटने के लिए आयुर्वेदिक उपचार और घरेलू उपाय प्रभावी हो सकते हैं।

चलिए आपको बताते हैं इसके अलावा महिलाएं अपने साथ कौन सी आयुर्वेदिक दवाएं और घरेलू नुस्खे रख सकते हैं जो मेनोपॉज के इस वक्त असहनीय लक्षणों कुछ काम करते हैं।

शिलाजीत एक प्रकार की जड़ी बूटी होती है जिसमें दिमाग और शरीर को रिलैक्स करने की काबिलियत होती है इसके साथ ही यह प्रेस हार्मोन का बनना कम करते हुए हैप्पी हारमोंस बनाने में शरीर की मदद करती है। इसके नियमित सेवन से एंजाइटी में सुधार होता है।

इसके साथ ही शिलाजीत का नियमित सेवन आपकी भूख बढ़ाने और कुल मिलाकर आपको अच्छा महसूस कराने में मददगार होता है। आप शिलाजीत को उपकर्म आयुर्वेद से खरीद सकते हैं, जहां शिलाजीत कैप्सूल रीजन और लिक्विड रूप में उपलब्ध होती है। ऐसा माना जाता है कि रेसिंग के रूप में उपलब्ध शिलाजीत सबसे प्योर है।

यह एक तरह का होल फूड प्रोग्राम है जो 21 पौधों से मिलने वाले तत्वों से बनाया गया है। हर बैलेंस महिलाओं में हार्मोनल बैलेंस बनाए रखने उनके यू ट्राईंग फॉर वेजाइनल हेल्थ के लिए एक फायदेमंद होल फूड है।

यह ग्लूटेन फ्री, सोया फ्री, शुगर फ्री है और इसमें कोई भी आर्टिफिशियल मिठास नहीं मिलाई गई है। यह महिलाओं को उनके रिप्रोडक्टिव सिस्टम को स्वस्थ रखने में मददगार साबित होती है। इसमें मौजूद जड़ी बूटियां शरीर में एस्ट्रोजन लेवल को बरकरार रखती हैं। मेनोपॉज के दौरान होने वाले समस्याएं जैसे भूख न लगना, रातों में पसीना आना, घबराहट महसूस होना आदि से छुटकारा दिलाने में मददगार होती है। इसके सेवन के साथ ही आपको एक हेल्थी लाइफस्टाइल और एक्सरसाइज भी अपने जीवन में शामिल करनी चाहिए।

महिलाओं के लिए यह स्वास्थ्यवर्धक कैप्सूल उनके शारीरिक और इमोशनल बैलेंस को बनाए रखने में बहुत फायदेमंद होती है। यह उनका हार्मोनल बैलेंस सुधारने और बनाए रखने में मददगार होती है। इसके साथ ही यह पूरे रिप्रोडक्टिव सिस्टम को हेल्दी बनाती है।

यह PMS के दौरान होने वाले लक्षण जैसे शरीर में दर्द, सिर दर्द, थकान, वजन का बढ़ना आदि को कंट्रोल करती है। इसके साथ ही यह 100% वेजिटेरियन है। इस कैप्सूल में आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां जैसे अश्वगंधा, ब्राह्मी, तुलसी, अमलकी, मोरिंगा, त्रिफला और हल्दी आदि का मिश्रण है। यह आपको स्वस्थ रखने और मेनोपॉज के लक्षण को कंट्रोल करने में मददगार होती है।

हिमालया मीनोसान टेबलेट मेनोपॉज के दौरान होने वाले लक्षणों को बेहतर बनाने और महिलाओं के शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए एक हर्बल रिमेडी है।

यह एक अनोखे किस्म का हर्बल फार्मूला है जो महिलाओं को मेनोपॉज के दौरान आने वाले अनकंफरटेबल और परेशानी भरे लक्षणों से लड़ने में मददगार साबित होता है। यह दरअसल पौधों में पाए जाने वाले एक फॉर्मल फाइटोएस्ट्रोजन से बनता है। यह रिस्क फ्री हैं और इन्होंने मेनोपॉज के हर चरण में अपना फायदा दिखाया है । मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर से एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा कम हो जाती है। इस वजह से उन्हें चिड़चिड़ाहट मूड स्विंग नींद ना आना और थकान लगी रहती है। ऐसे में यह फाइटोएस्ट्रोजन महिलाओं के शरीर में इस हार्मोन की मात्रा को बैलेंस करने में मददगार साबित होते हैं।

ये किट एक बेहतरीन हर्बल तरीका है वजन घटाने, बॉडी को डीटॉक्स करने, ब्लोटिंग और एसिडिटी के साथ ही कब्ज से छुटकारा पाने का। महिलाओं को मेनोपॉज की वजह से होने वाली पेट संबंधी समस्या से आराम दिलाने में मददगार साबित होता है।

यह एक टॉक्सिन क्लींजर है यानी आपके शरीर में मौजूद सभी हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में आपकी मदद करेगा। इसके साथ ही यह शरीर में जमा एक्स्ट्रा फैट को भी बाहर निकालकर आपके डाइजेस्टिव सिस्टम को स्वस्थ और बेहतर स्टेमिना प्रदान करेगा। इस किट में दो ऐसे होते हैं एनडी टॉप्स के अलावा इसमें मौजूद विमेन हेल्थ किट महिलाओं को हार्मोनल और इमोशनल उतार-चढ़ाव में आराम दिलाने में मददगार साबित होती है। कुल मिलाकर जैकेट मेंनोपॉज के दौरान होने वाले पेट और हार्मोनल बदलावों को नियंत्रण में रखने में मददगार साबित होती है।

एलोवेरा जेल में हमारे शरीर के लिए जरूरी विटामिन और मिनरल्स कूट-कूट के भरे होते हैं। आप चाहें तो अपने आंगन में लगे हुए एलोवेरा के पौधे का जेल इस्तेमाल करें या चाहे तो इसे बाजार से खरीद सकते हैं।

आयुर्वेदिक डॉक्टर डॉक्टर अखिलेश के मुताबिक एलोवेरा का जेल अपने प्योर रूप में फाइटोएस्ट्रोजन नाम के केमिकल का भंडार होता है। यह केमिकल महिलाओं के शरीर में हो रहे हार्मोनल इमबैलेंस को कंट्रोल करने में मददगार साबित होता है।

इसके साथ ही एलोवेरा महिलाओं के शरीर को हाइड्रेट करता है। मेनोपॉज के दौरान महिलाएं को डिहाइड्रेशन का बहुत सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में एलोवेरा जेल शरीर में पानी और जरूरी पोषक तत्वों की कमी नहीं होने देता

महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए शतावरी को बेहद फायदेमंद माना गया है। इसे दूध के साथ घोलकर पीना हार्मोनल बैलेंस बनाने में मददगार होता है। शतावरी को महिलाओं के लिए हेल्थ टॉनिक माना जाता है और सिर्फ इतना ही नहीं शरीर के साथ ही है मानसिक स्वास्थ्य को ही बेहतर बनाने में मददगार होता है। आयुर्वेद के मुताबिक यह मेनोपॉज द्वारा के समय आने वाली समस्याओं जैसे वेजाइनल डिसचार्ज घबराहट एंजाइटी और मूड स्विंग्स में भी आराम दिलाता है।

8. मेथी दाना (Fenugreek Seeds)

मेथी के दाने स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। यह ऐसी सामग्री है जो आमतौर पर हर घर में मौजूद होती है इसका इस्तेमाल कुछ सब्जियों में चौक लगाने के लिए भी किया जाता है। लेकिन जब बाद में नो पॉज की आती है तो मेथी दाना और मोनल बैलेंस बनाए रखने और पेट के फूलने और गैस से संबंधित समस्याओं से बचाने में मददगार होता है। आधा चम्मच मेथी दानों को आधे गिलास पानी में भिगोकर रात भर के लिए रख देना चाहिए। सुबह उठकर इसे खाली पेट पीना मेनोपॉज के दौरान होने वाली समस्याओं में मददगार माना जाता है।

अशोका एक जड़ी बूटी होती है जो महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। इसका पाउडर आयुर्वेद में दवाओं की तरह इस्तेमाल किया जाता है। इसे चूर्ण के रूप में खाया जाता है इसकी नियमित उपयोग या डॉक्टर द्वारा बताए गए इस्तेमाल से मेनोपॉज के शारीरिक और मानसिक लक्षणों में महिलाओं को आराम मिलता है।

FAQs: मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के आयुर्वेदिक इलाज और घरेलू उपाय

मेनोपॉज के सामान्य लक्षणों में मासिक धर्म का अनियमित या बंद होना, गर्मी के दौरे (हॉट फ्लैशेज), रात में पसीना, नींद में कठिनाई, मूड स्विंग्स, वजन बढ़ना, और बालों का पतला होना शामिल हैं।

आयुर्वेद में मेनोपॉज के लक्षणों को कम करने के लिए विभिन्न जड़ी-बूटियों और उपचारों का उपयोग किया जाता है, जो हार्मोनल संतुलन बनाए रखने और शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद करते हैं।

आयुर्वेद में शतावरी, अश्वगंधा, ब्राह्मी, और त्रिफला जैसी जड़ी-बूटियों का उपयोग मेनोपॉज के लक्षणों को कम करने के लिए किया जाता है। इनके सेवन से हार्मोनल संतुलन में सुधार होता है और शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है।

मेनोपॉज के लक्षणों को कम करने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, योग, प्राणायाम, और ध्यान जैसे घरेलू उपाय सहायक हो सकते हैं। साथ ही, कैफीन और मसालेदार भोजन से परहेज करना भी लाभदायक है।

ब्राह्मी और जटामांसी जैसी जड़ी-बूटियाँ मानसिक शांति प्रदान करती हैं, जिससे नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है। साथ ही, सोने से पहले गर्म दूध में हल्दी मिलाकर पीना भी लाभदायक है।

हाँ, आयुर्वेदिक उपचार मानसिक लक्षणों जैसे मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ापन, और अवसाद में राहत प्रदान करते हैं। अश्वगंधा और ब्राह्मी जैसी जड़ी-बूटियाँ मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करती हैं।

संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, और योग के माध्यम से वजन को नियंत्रित रखा जा सकता है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से, पाचन तंत्र को मजबूत रखने के लिए त्रिफला का सेवन लाभदायक है।

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