सिर्फ कब्ज नहीं! अगर साथ में कांपते हैं हाथ और शरीर हो रहा धीमा, तो इन संकेतों को न करें नजरअंदाज..​​​​​​

सिर्फ कब्ज नहीं! अगर साथ में कांपते हैं हाथ और शरीर हो रहा धीमा, तो इन संकेतों को न करें नजरअंदाज..​​​​​​

कब्ज एक आम समस्या है और इसके पीछे कम फाइबर, पानी की कमी, खराब खान-पान या कम शारीरिक गतिविधि जैसे कई कारण हो सकते हैं। लेकिन अगर कब्ज लंबे समय तक बनी रहे और इसके साथ हाथ-पैर में कंपकंपी, मांसपेशियों में जकड़न या चलने-फिरने में धीमापन जैसे लक्षण भी दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

कुछ शोधों में लंबे समय तक रहने वाली कब्ज और पार्किंसंस रोग के बीच संबंध पाया गया है। हालांकि, सिर्फ कब्ज होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को पार्किंसंस है। कब्ज बहुत आम है और ज्यादातर मामलों में इसका कारण पार्किंसंस नहीं होता।

कब्ज और पार्किंसंस के बीच क्या है कनेक्शन?

पार्किंसंस एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है, जिसमें मस्तिष्क की डोपामिन बनाने वाली कोशिकाएं धीरे-धीरे प्रभावित होती हैं। डोपामिन शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कुछ लोगों में कब्ज जैसे पाचन संबंधी लक्षण मोटर लक्षणों से काफी पहले दिखाई दे सकते हैं। आंत और मस्तिष्क के बीच संबंध को लेकर वैज्ञानिक शोध भी जारी है। हालांकि, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि कुछ मामलों में बीमारी की प्रक्रिया आंत से शुरू होती है या नहीं।

कब कब्ज को गंभीरता से लेना चाहिए?

अगर लंबे समय से कब्ज के साथ इनमें से कोई लक्षण दिखाई दे तो डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है:

  • हाथ या पैर में कंपकंपी
  • शरीर या गतिविधियों का धीमा होना
  • मांसपेशियों में जकड़न
  • चलते समय छोटे कदम लेना
  • संतुलन बिगड़ना या बार-बार गिरना
  • सूंघने की क्षमता कम होना
  • आवाज का धीमा या मुलायम होना
  • लिखावट पहले से छोटी हो जाना
  • चेहरे के हाव-भाव कम होना
  • नींद के दौरान सपनों के अनुसार हाथ-पैर चलाना

क्या कब्ज होने पर पार्किंसंस की चिंता करनी चाहिए?

नहीं। केवल कब्ज के आधार पर पार्किंसंस का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। कब्ज के कई सामान्य कारण होते हैं और यह अपने आप में पार्किंसंस की बीमारी का प्रमाण नहीं है।

अगर कब्ज के साथ ऊपर बताए गए न्यूरोलॉजिकल लक्षण भी दिखाई दें, तभी डॉक्टर से उचित जांच और सलाह लेना जरूरी है।

कब्ज से बचने के लिए क्या करें?

कब्ज को नियंत्रित करने के लिए डाइट में फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और दूसरे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें। पर्याप्त पानी पिएं और रोजाना कुछ समय पैदल चलने या व्यायाम के लिए निकालें।

फाइबर की मात्रा अचानक बहुत ज्यादा बढ़ाने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर है, क्योंकि इससे गैस और पेट फूलने की समस्या हो सकती है।

पार्किंसंस के प्रमुख लक्षण क्या हैं?

पार्किंसंस में आराम की स्थिति में हाथ-पैर कांपना, शरीर की गतिविधियां धीमी होना, मांसपेशियों में जकड़न, चलने में परेशानी, संतुलन बिगड़ना और छोटे कदम लेना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

इसके अलावा आवाज धीमी होना, लिखावट छोटी होना और चेहरे के भाव कम होना भी कुछ लोगों में देखने को मिल सकता है।

निष्कर्ष: लंबे समय से कब्ज को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, लेकिन इसे सीधे पार्किंसंस से जोड़ना भी सही नहीं है। अगर कब्ज के साथ कंपकंपी, जकड़न, धीमापन या संतुलन बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें तो न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेना बेहतर है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से है। इसमें दी गई जानकारी किसी बीमारी के निदान या इलाज का विकल्प नहीं है। लगातार कब्ज या न्यूरोलॉजिकल लक्षण होने पर योग्य डॉक्टर से जांच और सलाह जरूर लें।

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