
खराब पाचन, पेट में गैस, ब्लोटिंग और कब्ज की समस्या आजकल बहुत आम हो चुकी है। गट हेल्थ को दुरुस्त रखने के लिए डाइट में सही पोषक तत्वों और प्रोबायोटिक्स का होना बेहद जरूरी है। भारतीय पारंपरिक खानपान में फर्मेंटेड यानी खमीर बने भोजन को पेट के लिए बहुत फायदेमंद माना गया है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञ एवं योगाचार्य नित्यानंदम श्री के अनुसार, हफ्ते में दो बार दही और चावल को एक साथ फर्मेंट करके खाने से आंतों में गुड बैक्टीरिया (Good Bacteria) बढ़ते हैं, जिससे पाचन क्रिया सुचारू होती है। हालांकि, इसे तैयार करने का सही तरीका और समय जानना बेहद जरूरी है, ताकि शरीर को इसका पूरा फायदा मिल सके। आइए एक्सपर्ट से समझते हैं कि फर्मेंटेड दही-चावल गट हेल्थ में कैसे सुधार कर सकते है और इसे डाइट में शामिल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
फर्मेंटेड फूड्स और गट हेल्थ का कनेक्शन
आंतों में मौजूद माइक्रोबायोम पाचन और शरीर की कई प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। कुछ फर्मेंटेड खाद्य पदार्थों में मौजूद जीवित सूक्ष्मजीव और उनके मेटाबोलिक उत्पाद आंतों की हेल्थ को सुधारने में मदद करते हैं। फर्मेंटेड फूड का सेवन करने से आंतों में मौजूद खराब बैक्टीरिया खत्म हो सकते हैं और गुड बैक्टीरिया बढ़ने लगते हैं। गट हेल्थ में सुधार करने के लिए डाइट में फर्मेंटेड फूड्स का सेवन करना, फल और सब्जियों का सेवन करना, पर्याप्त नींद लेना,बॉडी को एक्टिव रखना और बैलेंस डाइट का सेवन करना जरूरी है।
हफ्ते में एक से दो बार फर्मेंटेड दही और चावल को फर्मेंट करके खाना आपकी आंतों की सेहत में सुधार कर सकता है। लेकिन इसका रोज रोज सेवन नहीं करना चाहिए। किसी भी चीज की अधिकता सेहत को फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकती है।
फर्मेंटेड दही और चावल कैसे पाचन पर करते हैं असर?
दही और चावल का कॉम्बिनेशन भारतीय घरों में काफी पसंद किया जाता है। इसे फर्मेंट करके खाने की परंपरा भी कई जगहों पर देखने को मिलती है। फर्मेंटेशन के दौरान भोजन में मौजूद सूक्ष्मजीव सक्रिय होते हैं और उसमें कई तरह के बदलाव होते हैं। ऐसे फर्मेंटेड फूड्स को डाइट में शामिल करने से पाचन और आंतों के माइक्रोबायोम को फायदा मिल सकता है। हालांकि, किसी भी फर्मेंटेड फूड का सेवन संतुलित मात्रा में करना जरूरी है।
दही खट्टा लगता है तो दूसरे ऑप्शन भी हैं मौजूद
दही को लंबे समय तक रखने पर उसका स्वाद धीरे-धीरे खट्टा होने लगता है। इसका मुख्य कारण दही में मौजूद लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया द्वारा दूध में मौजूद लैक्टोज को लैक्टिक एसिड में बदलना है। जैसे-जैसे लैक्टिक एसिड की मात्रा बढ़ती है, दही का स्वाद अधिक खट्टा हो जाता है। बहुत खट्टी दही कुछ लोगों को पसंद नहीं आती और संवेदनशील लोगों में गले या पाचन से जुड़ी असहजता महसूस हो सकती है। अगर किसी कारण से दही का सेवन नहीं करना चाहते हैं, तो डाइट में दूसरे फर्मेंटेड फूड्स को शामिल कर सकते हैं। इडली, फर्मेंटेड बैटर से बना चीला और कांजी इसके कुछ उदाहरण हैं। फर्मेंटेड खाद्य पदार्थों में अलग-अलग तरह के सूक्ष्मजीव और उनके मेटाबोलिक उत्पाद मौजूद हो सकते हैं। हालांकि, इनके स्वास्थ्य प्रभाव फूड के प्रकार, फर्मेंटेशन की प्रक्रिया और सेवन की मात्रा पर निर्भर करते हैं।
खट्टा दही को कैसे चावल के साथ फर्मेंट करके बनाएं हेल्दी
अगर आपको दही खट्टा लगता है तो आप उसे चावल के साथ फर्मेंट करें। रात में अगर चावल के साथ दही को मिक्स करके रख दें तो सुबह ना सिर्फ दही फर्मेंट होगा बल्कि आपके चावल भी फर्मेंट हो जाएंगे। दही और चावल दोनों फूड आपकी सेहत को फायदा पहुंचाएंगे। दही-चावल को फर्मेंट करने के लिए पके हुए चावल में थोड़ी मात्रा में दही मिलाकर उसे ढककर रख दें। फर्मेंटेशन के बाद चावल और दही का मिश्रण सॉफ्ट हो जाता है और इसका स्वाद भी बदल जाता है। आपको दही और चावल को फर्मेंट करते समय कुछ सावधानी का बरतना जरूरी है।
खास तौर पर पके हुए चावल को कमरे के तापमान पर लंबे समय तक रखना सुरक्षित नहीं माना जाता। कमरे के तापमान में चावल में Bacillus cereus जैसे बैक्टीरिया बढ़ सकते हैं, जो फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकते हैं। इसलिए चावल को जल्दी ठंडा करके रेफ्रिजरेटर में रखना और सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी है। केवल दही मिलाने से चावल में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया खत्म होने की गारंटी नहीं होती।
दही-चावल में लगा सकते हैं तड़का
दही-चावल को स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें हल्का तड़का लगाया जा सकता है। इसके लिए थोड़े से सरसों या तिल के तेल में जीरा, राई या सरसों के दाने डाले जा सकते हैं। इसमें करी पत्ता और स्वाद के अनुसार थोड़ी हल्दी भी मिलाई जा सकती है। तड़का लगाने के बाद उसे थोड़ा ठंडा करके दही-चावल में मिलाना बेहतर रहता है। बहुत अधिक गर्म तेल या तड़के को सीधे दही में डालने से दही की बनावट और स्वाद प्रभावित हो सकता है। दही-चावल में तड़के के लिए थोड़ी मात्रा में तेल या घी का इस्तेमाल किया जा सकता है। दही-चावल में स्वाद के अनुसार सेंधा नमक, हरी मिर्च, टमाटर या दूसरे फूड्स या सब्जी मिलाई जा सकती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण पर आधारित है। फर्मेंटेड खाद्य पदार्थों के सेवन से होने वाले स्वास्थ्य लाभ व्यक्ति और भोजन की तैयारी के तरीके के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। पाचन संबंधी समस्या, फूड एलर्जी या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में विशेषज्ञ डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन की सलाह जरूर लें।

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