
नई दिल्ली: भारत को भाषाई विविधता वाला देश कहा जाता है, जहां अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में सैकड़ों भाषाएं और बोलियां बोली जाती हैं। आमतौर पर कई लोगों को लगता है कि हिंदी के बाद भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा उर्दू है, लेकिन 2011 की आधिकारिक जनगणना के आंकड़े कुछ और तस्वीर पेश करते हैं। आंकड़ों के मुताबिक हिंदी के बाद बंगाली भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है, जबकि उर्दू इस सूची में सातवें स्थान पर आती है।
हिंदी सबसे आगे
2011 की जनगणना के अनुसार हिंदी देश में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। करीब 52.83 करोड़ लोगों ने हिंदी को अपनी मातृभाषा बताया था। यह कुल आबादी का लगभग 43.63 प्रतिशत है।
जनगणना में हिंदी की श्रेणी के तहत कई बोलियों और भाषाई रूपों को भी शामिल किया गया है। इनमें भोजपुरी, राजस्थानी, छत्तीसगढ़ी और हिमाचली समेत कई अन्य भाषाएं और बोलियां शामिल हैं।
दूसरे नंबर पर बंगाली
बंगाली भारत में दूसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। करीब 9.72 करोड़ लोग इसे अपनी मातृभाषा बताते हैं, जो उस समय की आबादी का लगभग 8.03 प्रतिशत है।
पश्चिम बंगाल बंगाली भाषा का प्रमुख केंद्र है। इसके अलावा त्रिपुरा, असम की बराक घाटी और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भी बड़ी संख्या में लोग बंगाली बोलते हैं।
मराठी तीसरे और तेलुगु चौथे नंबर पर
भाषाओं की सूची में मराठी तीसरे स्थान पर है। करीब 8.30 करोड़ लोग मराठी बोलते हैं। यह मुख्य रूप से महाराष्ट्र और गोवा में बोली जाती है।
इसके बाद तेलुगु का नंबर आता है। करीब 8.11 करोड़ लोग तेलुगु बोलते हैं। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पुडुचेरी में इसका व्यापक इस्तेमाल होता है। तेलुगु द्रविड़ भाषा परिवार की प्रमुख भाषाओं में शामिल है।
तमिल पांचवें स्थान पर
तमिल भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में पांचवें नंबर पर है। करीब 6.90 करोड़ लोग तमिल बोलते हैं। यह मुख्य रूप से तमिलनाडु और आसपास के क्षेत्रों में बोली जाती है।
उर्दू सातवें नंबर पर
उर्दू को लेकर अक्सर यह धारणा रहती है कि हिंदी के बाद यही भारत में सबसे ज्यादा बोली जाती है, लेकिन जनगणना के आंकड़ों के अनुसार उर्दू सातवें स्थान पर है।
करीब 5.07 करोड़ लोग उर्दू बोलते हैं। यह उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना समेत देश के कई हिस्सों में बोली जाती है।
भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली टॉप-10 भाषाएं
- हिंदी – करीब 52.83 करोड़ वक्ता
- बंगाली – करीब 9.72 करोड़ वक्ता
- मराठी – करीब 8.30 करोड़ वक्ता
- तेलुगु – करीब 8.11 करोड़ वक्ता
- तमिल – करीब 6.90 करोड़ वक्ता
- गुजराती – करीब 5.54 करोड़ वक्ता
- उर्दू – करीब 5.07 करोड़ वक्ता
- कन्नड़ – करीब 4.37 करोड़ वक्ता
- ओड़िया – करीब 3.75 करोड़ वक्ता
- मलयालम – करीब 3.48 करोड़ वक्ता
देश की भाषाई विविधता की तस्वीर
2011 की जनगणना के आंकड़े भारत की विशाल भाषाई विविधता को दिखाते हैं। देश की बड़ी आबादी संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 अनुसूचित भाषाओं में से किसी न किसी भाषा को अपनी मातृभाषा के रूप में बोलती है।
इन आंकड़ों से साफ है कि हिंदी के बाद बंगाली भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। इसके बाद मराठी, तेलुगु, तमिल, गुजराती और अन्य भाषाओं का स्थान आता है। करोड़ों लोगों द्वारा बोली जाने वाली ये भाषाएं भारत की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता को दर्शाती हैं।

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