डेयरी व्हाइटनर: रोज चाय में डालते हैं तो जान लें सेहत पर क्या पड़ सकता है असर.

डेयरी व्हाइटनर: रोज चाय में डालते हैं तो जान लें सेहत पर क्या पड़ सकता है असर.
डेयरी व्हाइटनर: रोज चाय में डालते हैं तो जान लें सेहत पर क्या पड़ सकता है असर.

नई दिल्ली: चाय पीने वालों की संख्या भारत में काफी ज्यादा है। कई लोग समय बचाने या सुविधा के लिए दूध की जगह डेयरी व्हाइटनर का इस्तेमाल करते हैं। चाय में इसे मिलाने से स्वाद और रंग दूध जैसा हो जाता है, लेकिन डेयरी व्हाइटनर को सीधे दूध समझना सही नहीं है। यह एक प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट होता है और इसमें अलग-अलग तरह के एडिटिव्स शामिल हो सकते हैं।

हाल ही में एक डेयरी व्हाइटनर के सैंपल को लेकर खाद्य सुरक्षा से जुड़ी जांच सामने आई है। इसके बाद रोजाना डेयरी व्हाइटनर इस्तेमाल करने वाले लोगों के बीच इसके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर चर्चा बढ़ गई है। खासतौर पर फॉस्फेट एडिटिव्स के सेवन और किडनी की सेहत को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

डेयरी व्हाइटनर क्या होता है?

डेयरी व्हाइटनर दूध नहीं होता। इसे इस तरह तैयार किया जाता है कि चाय या कॉफी में मिलाने पर दूध जैसा रंग, स्वाद और टेक्सचर मिल सके। अलग-अलग ब्रांड के उत्पादों में इनके ingredients अलग हो सकते हैं, इसलिए पैकेट पर दी गई पूरी सामग्री सूची पढ़ना जरूरी है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति दिन में कई कप चाय पीता है और हर बार उसमें व्हाइटनर इस्तेमाल करता है, तो उसे यह देखना चाहिए कि उस प्रोडक्ट के जरिए उसकी डाइट में कौन-कौन से अतिरिक्त ingredients और food additives शामिल हो रहे हैं।

फॉस्फेट एडिटिव्स को लेकर क्यों होती है चिंता?

फॉस्फोरस शरीर के लिए जरूरी खनिज है। यह दूध, दाल, मांस, नट्स और कई अन्य खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। लेकिन प्राकृतिक रूप से मौजूद फॉस्फोरस और खाद्य पदार्थों में मिलाए जाने वाले फॉस्फेट एडिटिव्स का शरीर में अवशोषण अलग-अलग हो सकता है।

कुछ फॉस्फेट एडिटिव्स शरीर में अपेक्षाकृत आसानी से अवशोषित हो सकते हैं। इसलिए यदि किसी व्यक्ति के आहार में ऐसे एडिटिव्स वाले कई प्रोसेस्ड फूड नियमित रूप से शामिल हैं, तो कुल फॉस्फोरस सेवन बढ़ सकता है।

एक-दो कप चाय में थोड़ी मात्रा में व्हाइटनर इस्तेमाल करना अपने आप में बड़ी मात्रा नहीं माना जा सकता। लेकिन यदि कोई व्यक्ति रोजाना तीन-चार या उससे ज्यादा कप चाय में इसका इस्तेमाल करता है और साथ ही अन्य प्रोसेस्ड फूड भी खाता है, तो कुल सेवन पर ध्यान देना उचित है।

किडनी की बीमारी वाले लोगों को क्यों रहना चाहिए सावधान?

स्वस्थ किडनी शरीर में फॉस्फोरस का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन जब किडनी की कार्यक्षमता कम हो जाती है, तो शरीर से अतिरिक्त फॉस्फोरस बाहर निकालने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

क्रॉनिक किडनी डिजीज वाले लोगों में लंबे समय तक फॉस्फोरस का बढ़ा हुआ स्तर हड्डियों और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्याओं के साथ-साथ हृदय संबंधी जोखिम से भी जुड़ा पाया गया है। इसलिए किडनी की बीमारी से जूझ रहे लोगों को प्रोसेस्ड फूड और फॉस्फेट एडिटिव्स के सेवन को लेकर अपने डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह माननी चाहिए।

हालांकि, सामान्य स्वस्थ लोगों में केवल फॉस्फेट एडिटिव्स के सेवन से गंभीर बीमारी होने का सीधा कारण-परिणाम संबंध साबित करने वाले प्रमाण सीमित हैं। इसलिए इसे लेकर अनावश्यक डरने के बजाय संतुलित आहार और लेबल पढ़ने की आदत ज्यादा महत्वपूर्ण है।

डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर वालों को भी ध्यान देना चाहिए

जिन लोगों को डायबिटीज, किडनी की बीमारी या हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं हैं, उन्हें प्रोसेस्ड फूड का चुनाव करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे लोगों के लिए कुल डाइट, सोडियम, शुगर, फॉस्फोरस और अन्य पोषक तत्वों का संतुलन महत्वपूर्ण हो सकता है।

इसलिए केवल चाय में इस्तेमाल होने वाले व्हाइटनर पर ध्यान देने के बजाय पूरे दिन के खान-पान को देखना ज्यादा जरूरी है।

जिस प्रोडक्ट की जांच हुई, उसके बारे में क्या सामने आया?

रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्ली के द ललित होटल से लिए गए एक लो-फैट डेयरी व्हाइटनर के सैंपल को लेकर खाद्य सुरक्षा से जुड़ी जांच में सवाल उठे। खाद्य विश्लेषक की रिपोर्ट में सैंपल को निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं बताया गया।

वहीं, संबंधित कंपनी की ओर से यह कहा गया है कि उसका उत्पाद निर्धारित मानकों के अनुसार है और जांच में कुल फॉस्फोरस की मात्रा मापी गई हो सकती है, जिसमें प्राकृतिक रूप से मौजूद फॉस्फोरस भी शामिल हो सकता है। इस तकनीकी मुद्दे पर अंतिम स्थिति संबंधित नियामक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

डेयरी व्हाइटनर खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • पैकेट पर दी गई इंग्रीडिएंट लिस्ट जरूर पढ़ें।
  • फॉस्फेट या अन्य food additives की मौजूदगी देखें।
  • INS 338 से 343 और 450 से 452 जैसे नंबर दिखाई दें तो उनके बारे में जानकारी जरूर लें।
  • यदि संभव हो तो रोजाना इस्तेमाल के लिए ताजा दूध जैसे कम प्रोसेस्ड विकल्पों को प्राथमिकता दें।
  • डायबिटीज, किडनी की बीमारी या हाई ब्लड प्रेशर होने पर अपने डॉक्टर/डाइटिशियन से डाइट संबंधी सलाह लें।
  • दिन में कई बार चाय पीते हैं तो उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री के साथ-साथ पूरी डाइट पर भी ध्यान दें।

ध्यान रखें: किसी एक खाद्य पदार्थ को अपने आप में हार्ट या किडनी की बीमारी का कारण मानना सही नहीं है। स्वास्थ्य पर असर व्यक्ति की पूरी डाइट, मात्रा, उम्र, मौजूदा बीमारियों और जीवनशैली पर निर्भर करता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी और स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। यदि आपको किडनी, हार्ट, डायबिटीज या अन्य कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले योग्य डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लें।

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