
नई दिल्ली: आजकल खराब खानपान, कम शारीरिक गतिविधि, बढ़ता वजन और हाई कोलेस्ट्रॉल दिल की सेहत के लिए बड़ी चिंता बन चुके हैं। ऐसे में डाइट में कौन-सी चीजें शामिल की जाएं, इसे लेकर लगातार रिसर्च सामने आती रहती हैं। एक नई स्टडी में एवोकाडो को लेकर दिलचस्प जानकारी सामने आई है।
रिसर्च के मुताबिक, पेट के आसपास मोटापे की समस्या से जूझ रहे लोगों ने करीब 6 महीने तक रोजाना एक एवोकाडो खाया तो उनके LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल से जुड़े कुछ कणों के स्तर में कमी देखी गई। शोधकर्ताओं ने इस बदलाव के आधार पर हृदय रोग के जोखिम में करीब 4% की संभावित कमी का अनुमान लगाया।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि रोज एक एवोकाडो खाने से हार्ट अटैक या स्ट्रोक से बचाव की गारंटी मिल जाती है। अध्ययन में वास्तविक हार्ट अटैक या स्ट्रोक की घटनाओं को कम होते हुए सीधे नहीं मापा गया था।
786 लोगों पर की गई स्टडी
इस रिसर्च में 25 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 786 वयस्कों को शामिल किया गया था। सभी प्रतिभागियों में पेट के आसपास मोटापे की समस्या थी।
अध्ययन में पुरुषों की कमर का आकार करीब 40 इंच या उससे अधिक और महिलाओं की कमर करीब 35 इंच या उससे अधिक थी। प्रतिभागियों को दो समूहों में बांटा गया। एक समूह ने अपनी सामान्य डाइट जारी रखी, जबकि दूसरे समूह को 6 महीने तक रोजाना एक एवोकाडो खाने के लिए कहा गया।
अध्ययन के अंत में एवोकाडो खाने वाले समूह में LDL से जुड़े कुछ कणों के स्तर में कमी देखी गई। वहीं, शरीर के वजन और कमर की चौड़ाई में कोई बड़ा अंतर नहीं पाया गया।
LDL के कणों में बदलाव क्यों है महत्वपूर्ण?
LDL को आमतौर पर बैड कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। खून में LDL का अधिक स्तर धमनियों में प्लाक बनने से जुड़ा हुआ है, जिससे समय के साथ हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
रिसर्च में एवोकाडो खाने वाले लोगों में LDL से जुड़े कणों में कमी देखी गई। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस तरह के बदलाव हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।
लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि LDL कणों में बदलाव और वास्तविक हार्ट अटैक या स्ट्रोक में कमी एक ही बात नहीं है। इसके लिए लंबे समय तक बड़े स्तर पर और ऐसे अध्ययन जरूरी हैं जिनमें वास्तविक हृदय संबंधी घटनाओं को देखा जाए।
एवोकाडो में क्या खास होता है?
एवोकाडो में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जिनमें मोनोअनसैचुरेटेड फैट, फाइबर, फाइटोस्टेरॉल्स, विटामिन ई और विभिन्न पौधों से मिलने वाले एंटीऑक्सीडेंट यौगिक शामिल हैं।
इसमें मौजूद फाइबर और हेल्दी फैट संतुलित डाइट का हिस्सा बनने पर हृदय और मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए उपयोगी हो सकते हैं। फाइटोस्टेरॉल्स भी शरीर में कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को प्रभावित कर सकते हैं।
हालांकि, किसी एक पोषक तत्व या फल को हृदय रोग से बचाव का अकेला उपाय नहीं माना जा सकता।
एवोकाडो को डाइट में कैसे शामिल करें?
अगर आप एवोकाडो खाना चाहते हैं तो इसे ऐसी चीजों की जगह इस्तेमाल करना ज्यादा बेहतर हो सकता है जिनमें संतृप्त वसा या ज्यादा कैलोरी होती है।
- मक्खन की जगह होल ग्रेन टोस्ट पर मैश किया हुआ एवोकाडो लें।
- सैंडविच में मेयोनीज की जगह एवोकाडो इस्तेमाल कर सकते हैं।
- सलाद या ग्रेन बाउल में इसे शामिल करें।
- क्रीमी ड्रेसिंग की जगह सीमित मात्रा में एवोकाडो इस्तेमाल किया जा सकता है।
- इसे सब्जियों और साबुत अनाज के साथ संतुलित भोजन का हिस्सा बनाएं।
ध्यान रखें कि एवोकाडो में हेल्दी फैट जरूर होता है, लेकिन यह कैलोरी से भरपूर फल भी है। इसलिए जरूरत से ज्यादा खाना वजन नियंत्रण के लिहाज से फायदेमंद नहीं होगा।
क्या रोज एक एवोकाडो खाने से दिल की बीमारी खत्म हो जाएगी?
नहीं। एवोकाडो को स्वस्थ डाइट का हिस्सा माना जा सकता है, लेकिन यह हृदय रोग से बचाव की कोई गारंटी या इलाज नहीं है।
दिल को स्वस्थ रखने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, स्वस्थ वजन, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना तथा धूम्रपान से दूरी बनाना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
इस रिसर्च की एक बड़ी सीमा यह भी है कि इसमें मुख्य रूप से पेट के आसपास मोटापे वाले लोगों को शामिल किया गया था। इसलिए इसके नतीजों को हर व्यक्ति पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता।
सबसे जरूरी बात: 4% की कमी का आंकड़ा LDL से जुड़े बदलावों के आधार पर लगाया गया अनुमान है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति में हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा वास्तव में 4% कम हो जाएगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख वैज्ञानिक शोध में सामने आए निष्कर्षों पर आधारित है। एवोकाडो किसी दवा या डॉक्टर द्वारा बताए गए उपचार का विकल्प नहीं है। अगर आपका कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है, हृदय रोग है या आप पहले से कोई दवा लेते हैं, तो अपनी डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या रजिस्टर्ड डायटीशियन से सलाह लें।

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