
क्या आप अक्सर जरूरी चीजें रखकर भूल जाते हैं? क्या काम करते समय ध्यान भटकता है या दिनभर की व्यस्तता के बीच दिमाग थका हुआ महसूस होता है? दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी नहीं कि आप सुबह 5 बजे उठें, घंटों मेडिटेशन करें या कठिन वर्कआउट करें। रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ छोटी-छोटी आदतें अपनाकर भी आप अपनी मानसिक सेहत, एकाग्रता और काम करने की क्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद पा सकते हैं।
न्यूरोसाइंटिस्ट, UCLA के प्रोफेसर और The Upward Spiral पुस्तक के लेखक एलेक्स कॉर्ब के मुताबिक, दिमाग को सक्रिय रखने के लिए बेहद सख्त दिनचर्या बनाने के बजाय ऐसी आदतों पर ध्यान देना बेहतर है, जिन्हें लंबे समय तक आसानी से अपनाया जा सके। उनकी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि, पसंदीदा काम, जीवन के उद्देश्य से जुड़े लक्ष्य, छोटी उपलब्धियों का आनंद, सामाजिक जुड़ाव और आराम जैसी चीजें शामिल हैं।
1. भारी वर्कआउट नहीं, रोजाना शारीरिक गतिविधि पर दें ध्यान
दिमाग और शरीर की सेहत एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि से मूड, नींद और सोचने-समझने की क्षमता को फायदा मिल सकता है। इसके लिए हर दिन कठिन व्यायाम करना जरूरी नहीं है।
एलेक्स कॉर्ब अपनी दिनचर्या में हल्की गतिविधियों को भी महत्व देते हैं। थोड़ी देर योग करना, पुश-अप्स लगाना, काम के बीच टहलना, सीढ़ियां चढ़ना या घर के छोटे-मोटे काम करना भी शारीरिक गतिविधि बढ़ाने के तरीके हैं।
अगर आप लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं, तो बीच-बीच में उठकर चलें। अपनी क्षमता के अनुसार पैदल चलने या व्यायाम करने की आदत बनाएं। नियमितता बनाए रखना, कभी-कभार बहुत ज्यादा मेहनत करने से अधिक व्यावहारिक हो सकता है।
2. हर दिन कुछ ऐसा करें, जिससे आपको खुशी मिले
लगातार काम करते रहने से मानसिक थकान महसूस हो सकती है। ऐसे में अपनी पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालना मूड को बेहतर बनाने और तनाव से राहत पाने में मदद कर सकता है।
एलेक्स कॉर्ब को गिटार बजाना, किताबें पढ़ना और पसंदीदा फिल्म या शो देखना जैसी गतिविधियां पसंद हैं। इसके अलावा, वह रोजमर्रा के कामों को भी मजेदार बनाने की कोशिश करते हैं।
आप भी संगीत सुन सकते हैं, बागवानी कर सकते हैं, कोई खेल खेल सकते हैं या अपने किसी शौक को समय दे सकते हैं। जरूरी नहीं कि हर गतिविधि का कोई बड़ा परिणाम निकले। कभी-कभी सिर्फ उसका आनंद लेना भी पर्याप्त होता है।
हालांकि, खुशी देने वाली गतिविधियां मानसिक स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकती हैं, लेकिन इन्हें किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या के इलाज का विकल्प नहीं समझना चाहिए।
3. अपने जरूरी कामों को किसी बड़े उद्देश्य से जोड़ें
हर काम मजेदार नहीं होता। कुछ काम ऐसे होते हैं जिन्हें पूरा करने में मेहनत, समय और धैर्य लगता है। लेकिन जब हम समझते हैं कि कोई काम हमारे लिए क्यों महत्वपूर्ण है, तो उसे पूरा करने की प्रेरणा बनाए रखना आसान हो सकता है।
उदाहरण के लिए, नियमित स्वास्थ्य जांच करवाना भले ही पसंदीदा काम न हो, लेकिन यह लंबे समय तक स्वस्थ रहने में मदद कर सकता है। किसी जरूरी ईमेल का जवाब देना, पढ़ाई पूरी करना या परिवार के लिए समय निकालना भी किसी बड़े उद्देश्य से जुड़ा हो सकता है।
एलेक्स कॉर्ब के अनुसार, कठिन कामों को अपने मूल्यों, लक्ष्यों और रिश्तों से जोड़कर देखना उपयोगी हो सकता है। इससे काम का महत्व समझने और उसके प्रति प्रेरित रहने में मदद मिल सकती है।
4. छोटी-छोटी उपलब्धियों को भी महत्व दें
कई बार लोग बड़े लक्ष्य हासिल करने पर ही खुद को सफल मानते हैं। जब परिणाम जल्दी नहीं मिलता, तो निराशा होने लगती है। ऐसे में बड़े काम को छोटे हिस्सों में बांटना उपयोगी तरीका हो सकता है।
एलेक्स कॉर्ब पोमोडोरो तकनीक जैसी कार्य-पद्धतियों का इस्तेमाल करते हैं। इसमें आमतौर पर 25 मिनट तक किसी एक काम पर ध्यान दिया जाता है और फिर छोटा ब्रेक लिया जाता है। हर व्यक्ति अपनी जरूरत के अनुसार समय में बदलाव कर सकता है।
उदाहरण के लिए, अगर आपको कोई लंबी रिपोर्ट तैयार करनी है, तो पहले उसकी रूपरेखा बनाएं, फिर एक हिस्से पर काम करें और उसके बाद अगले हिस्से की ओर बढ़ें। पूरे हुए छोटे कामों को लिख लेना भी प्रगति का एहसास दिला सकता है।
इसका उद्देश्य हर समय उत्पादक बने रहना नहीं, बल्कि काम को व्यवस्थित करना और अपनी कोशिशों को पहचानना है।
5. दोस्तों और परिवार के साथ जुड़े रहें
व्यस्त दिनचर्या में अक्सर लोग दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलना-जुलना कम कर देते हैं। लेकिन सामाजिक जुड़ाव मानसिक स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
करीबी लोगों के साथ समय बिताना, अपनी बातें साझा करना और जरूरत के समय भावनात्मक सहयोग मिलना तनाव से निपटने में मदद कर सकता है। अकेलापन महसूस होने पर किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बातचीत करना भी उपयोगी हो सकता है।
इसके लिए बड़े कार्यक्रम आयोजित करने की जरूरत नहीं है। किसी दोस्त को फोन करना, परिवार के साथ भोजन करना या किसी करीबी के साथ थोड़ी देर टहलना भी अच्छा तरीका हो सकता है।
सामाजिक संबंध हर व्यक्ति के लिए अलग होते हैं। इसलिए अपनी सहजता और जरूरत के अनुसार लोगों से जुड़ने का तरीका चुनें।
6. दिमाग को आराम देने के लिए भी समय निकालें
लगातार काम करना हमेशा बेहतर प्रदर्शन की गारंटी नहीं देता। पर्याप्त नींद और बीच-बीच में आराम करना ध्यान, सीखने और याददाश्त से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
एलेक्स कॉर्ब आराम को भी अपनी दिनचर्या का जरूरी हिस्सा मानते हैं। जिस तरह खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रशिक्षण के साथ आराम की जरूरत होती है, उसी तरह व्यस्त दिनचर्या में काम के बीच छोटे ब्रेक लेना भी उपयोगी हो सकता है।
आप काम के दौरान थोड़ी देर उठकर चल सकते हैं, स्क्रीन से नजर हटा सकते हैं या शांत बैठकर आराम कर सकते हैं। रात में पर्याप्त नींद लेने और सोने-जागने का समय नियमित रखने की कोशिश करें।
आराम करने का मतलब आलस करना नहीं है। जरूरत के अनुसार विराम लेना लंबे समय तक ऊर्जा और एकाग्रता बनाए रखने में मदद कर सकता है।
दिमाग और याददाश्त को स्वस्थ रखने के लिए क्या ध्यान रखें?
इन छह आदतों को अपनाने के साथ संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि और तनाव को संभालने पर भी ध्यान दें। दिमाग को तेज रखने के लिए किसी एक खास उपाय या दिनचर्या पर निर्भर रहने के बजाय अपनी जीवनशैली में छोटे और टिकाऊ बदलाव करना बेहतर है।
यह भी ध्यान रखें कि कभी-कभार चीजें भूलना या ध्यान भटकना हमेशा किसी बीमारी का संकेत नहीं होता। लेकिन अगर याददाश्त में लगातार गिरावट आ रही है, रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं या भ्रम जैसी परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लें।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। बताई गई आदतें सामान्य मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को सहारा दे सकती हैं, लेकिन याददाश्त संबंधी समस्याओं की रोकथाम या उपचार की गारंटी नहीं देतीं। लगातार या गंभीर लक्षण होने पर योग्य डॉक्टर से परामर्श लें।

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