
बुलंदशहर: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक किशोरी के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म और उसकी सहेली की हत्या के मामले में सुनवाई के दौरान नया मोड़ आ गया है। प्रतापगढ़ की रहने वाली मुख्य पीड़िता ने पॉक्सो अदालत में आरोपितों को पहचानने से इनकार कर दिया। इससे अभियोजन पक्ष के सामने मामला साबित करने की चुनौती बढ़ गई है। अब पुलिस और अभियोजन पक्ष अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर केस को आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं।
नौकरी की तलाश में आई थीं दोनों सहेलियां
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रतापगढ़ की रहने वाली 17 वर्षीय किशोरी अपनी सहेली के साथ नौकरी की तलाश में गौतमबुद्धनगर के सूरजपुर इलाके में आई थी। आरोप है कि अमित नाम के युवक ने दोनों को कार में बैठाया और अपने साथियों के साथ उनके साथ अभद्रता की।
शिकायत के अनुसार, विरोध करने पर दोनों के साथ मारपीट की गई। इसके बाद आरोपितों ने मेरठ के जानी थाना क्षेत्र में चलती कार से किशोरी की सहेली को बाहर धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। आरोप है कि इसके बाद मुख्य पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया।
खुर्जा पहुंचकर किशोरी ने दर्ज कराई थी शिकायत
रिपोर्ट के अनुसार, 7 मई 2025 की सुबह किशोरी आरोपितों के चंगुल से निकलकर खुर्जा पहुंची और पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और अमित, संदीप समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया। बाद की विवेचना में खुर्जा निवासी रिंकू का नाम भी सामने आया, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने जांच के बाद आरोपितों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। मामला पॉक्सो अदालत में विचाराधीन है।
अदालत में आरोपितों को पहचानने से इनकार
इस मामले में सबसे अहम बदलाव तब आया, जब सुनवाई के दौरान पीड़िता ने आरोपितों को पहचानने से इनकार कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले वह पुलिस और मजिस्ट्रेट के सामने बयान दे चुकी थी।
पीड़िता के अदालत में आरोपितों की पहचान नहीं करने से अभियोजन पक्ष के लिए मामले को साबित करना कठिन हो सकता है। हालांकि, केवल इस घटनाक्रम के आधार पर केस का अंतिम नतीजा तय नहीं माना जा सकता। अदालत अन्य साक्ष्यों और गवाहियों पर भी विचार करेगी।
फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों पर भरोसा
रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस अब फॉरेंसिक रिपोर्ट, मेडिकल साक्ष्य, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), डिजिटल चैट और जांच में जुटाए गए अन्य सबूतों के आधार पर अभियोजन को मजबूत करने की तैयारी कर रही है।
कानूनी जानकारों के मुताबिक, ऐसे मामलों में तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि, इनकी स्वीकार्यता और प्रमाणिकता का आकलन अदालत करेगी।
फिलहाल, मामला न्यायालय में विचाराधीन है। पीड़िता के बयान में आए बदलाव के बावजूद आरोपितों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की सच्चाई और उनकी जिम्मेदारी का निर्धारण अदालत में पेश किए गए समस्त साक्ष्यों के आधार पर होगा।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट पर आधारित है। मामले में लगाए गए आरोपों और जांच से जुड़े विवरणों का अंतिम निर्धारण न्यायालय करेगा।

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