कुदरत का अनोखा कमाल! आसमान से बिल्कुल फिंगरप्रिंट जैसा दिखता है ये टापू, पत्थरों की दीवार 23 KM लंबी..​​​​

कुदरत का अनोखा कमाल! आसमान से बिल्कुल फिंगरप्रिंट जैसा दिखता है ये टापू, पत्थरों की दीवार 23 KM लंबी..​​​​
Featured Image

दुनियाभर में प्रकृति और इंसानों की बनाई कई ऐसी अजीबोगरीब रचनाएं मौजूद हैं, जो अपनी अनूठी बनावट से लोगों को हैरान कर देती हैं. ऐसा ही एक अद्भुत नजारा एड्रियाटिक सागर में क्रोएशिया के तट के पास देखने को मिलता है. यहां शिबेनिक द्वीपसमूह के पास स्थित बाल्जेनाक नाम का एक छोटा सा टापू इन दिनों काफी सुर्खियां बटोर रहा है. इस टापू की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जब आप इसे आसमान से देखेंगे, तो यह इंसान के अंगूठे के निशान यानी एक विशाल फिंगरप्रिंट की तरह दिखाई देता है. महज 1.4 वर्ग किमी में फैला यह अंडाकार टापू दूर से किसी अजूबे से कम नहीं लगता. इसके फिंगरप्रिंट जैसा दिखने की वजह कोई कुदरती करिश्मा नहीं, बल्कि इस पर बनी सूखी पत्थरों की दीवारों का एक बहुत बड़ा जाल है. ये छोटी-छोटी दीवारें और उनके बीच की लकीरें दूर से देखने पर बिल्कुल इंसानी त्वचा की रेखाओं और झुर्रियों जैसी नजर आती हैं.

बता दें कि आयरलैंड, इंग्लैंड और स्कॉटलैंड जैसे कई पश्चिमी यूरोपीय देशों की तरह क्रोएशिया के ग्रामीण इलाकों और तटीय क्षेत्रों में भी पत्थरों की ऐसी दीवारें बनाने की सदियों पुरानी परंपरा रही है. इतिहास में इन दीवारों का निर्माण खेतों की सीमाओं को तय करने के लिए किया जाता था. इनको बनाने की सबसे खास बात यह है कि इन्हें जोड़ने के लिए सीमेंट, चूने या किसी भी तरह के गारे का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया गया है. इसके बजाय, पुराने जमाने के कुशल कारीगर और किसान पत्थरों को बहुत ध्यान से चुनते थे और उन्हें पहेली के टुकड़ों की तरह एक-दूसरे के ऊपर इतनी मजबूती से सेट करते थे कि वे सदियों तक हिले बिना टिकी रहें. क्रोएशिया का ज्यादातर तटीय इलाका पथरीला है, यानी जमीन पर हर तरफ चट्टानें और पत्थर बिखरे पड़े हैं. खेती करने लायक जमीन तैयार करने के लिए किसानों ने मिट्टी में से इन पत्थरों को चुनकर बाहर निकाला और खेतों के चारों तरफ चौकोर और जालीदार दीवारें खड़ी कर दीं.

महज आधा किलोमीटर लंबे बाल्जेनाक टापू पर इन दीवारों की कुल लंबाई 23 किलोमीटर से भी ज्यादा है. साल 2018 में यूनेस्को से इस अनोखे आईलैंड और इसकी सूखी पत्थरों की दीवारों को वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में शामिल कर लिया. बता दें कि खेतों की सीमाएं तय करने के अलावा इन पत्थरों की दीवारों का एक बहुत बड़ा वैज्ञानिक फायदा भी था. क्रोएशिया के तटीय इलाकों में ‘बुरा’ नाम की बहुत ही तेज और बर्फीली हवाएं चलती हैं, जो फसलों को पूरी तरह तबाह कर देती थीं. पत्थरों की ये ऊंची दीवारें इन तेज हवाओं को रोककर एक सुरक्षा कवच का काम करती थीं, जिससे पथरीले इलाकों में भी खेती करना मुमकिन हो पाता था. बाल्जेनाक के अलावा एड्रियाटिक सागर के सबसे लंबे तटीय क्षेत्र वाले ‘पाग’ नाम के आईलैंड पर भी किसानों ने पत्थरों की ऐसी दीवारें बनाई हैं, जिनकी कुल लंबाई 1,000 किमी से भी ज्यादा है. इंसानों और प्रकृति के इस अनोखे तालमेल को देखने के लिए आज दुनिया से लोग खिंचे चले आ रहे हैं.

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *