45 साल की उम्र में पतले होने के बावजूद हुआ फैटी लिवर, क्यों सिर्फ दुबला-पतला होना मेटाबॉलिक हेल्थ की गारंटी नहीं? डॉक्टर ने दी सारी जानकारी.

45 साल की उम्र में पतले होने के बावजूद हुआ फैटी लिवर, क्यों सिर्फ दुबला-पतला होना मेटाबॉलिक हेल्थ की गारंटी नहीं? डॉक्टर ने दी सारी जानकारी.
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मैं डॉ. सप्तर्षि भट्टाचार्य हूं और अपोलो अस्पताल, दिल्ली में वरिष्ठ एंडोक्राइनोलॉजिस्ट हूं। मेरे पास अक्सर मरीज अपनी कई तरह की परेशानियां लेकर आते हैं। हाल ही में मेरे पास 44 साल का अरुण नाम का एक शख्स आया। वो एसिडिटी से बहुत परेशान था। बार-बार होने वाली एसिडिटी से परेशान होकर उसने डॉक्टर की सलाह के मुताबिक कई जांच कराई। एक दिन वो अपनी कुछ रिपोर्ट और अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट लेकर मेरे क्लिनिक पहुंचा। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में उसके लिवर में फैट जमा होने यानी फैटी लिवर की समस्या सामने आई थी। उसने मुझसे पूछा कि मैं मोटा तो नहीं हूं फिर भी मेरा लिवर फैटी कैसे हो गया।

उसकी बात गलत भी नहीं थी। उसका BMI यानी बॉडी मास इंडेक्स 22.6 kg/m² था, जो एशियाई वयस्कों के लिए सामान्य या लीन रेंज में आता है। वह कभी-कभार शराब पीता था और उसके लिवर एंजाइम भी हल्के बढ़े हुए थे। देखने में वह पूरी तरह स्वस्थ नजर आता था, लेकिन जब उसकी दूसरी जांचें की गईं तो तस्वीर अलग थी। उसकी कमर 93 सेंटीमीटर थी, ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ा हुआ था और HbA1c यानी पिछले लगभग तीन महीनों की औसत ब्लड शुगर प्रीडायबिटीज की रेंज में थी। पूछताछ करने पर पता लगा कि वो सिटिंग जॉब करता है जिसकी वजह से घंटों बैठता है।  वो डाइट में चावल और रिफाइंड अनाज अधिक मात्रा में खाता था, नियमित रूप से एक्सरसाइज नहीं करता था और उसके शरीर में मांसपेशियों की मात्रा भी अपेक्षाकृत कम थी।

रूटीन ब्लड टेस्ट के आधार पर किए गए फाइब्रोसिस स्कोर का परिणाम स्पष्ट नहीं था। इसलिए लिवर इलास्टोग्राफी कराने की सलाह दी। जांच में लिवर में कई गंभीर परेशानियां सामने आई जो बाहर से नहीं दिख रही थी। आखिरकार उसे जांच में लीन मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टिएटोटिक लिवर डिजीज यानी Lean MASLD का डायग्नोज हुआ। यह मामला बताता है कि पतला होना और मेटाबॉलिक रूप से स्वस्थ होना एक ही बात नहीं है।

मोटापा न होने पर भी हो सकता है फैटी लिवर

MASLD फैटी लिवर की उस बीमारी का नया नाम है, जिसे पहले नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) कहा जाता था। इसमें लिवर में फैट जमा होने के साथ कम से कम एक कार्डियो मेटाबोलिक समस्या मौजूद होती है, जैसे

  • ब्लड शुगर बढ़ना
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ना
  • HDL यानी अच्छे कोलेस्ट्रॉल का कम होना
  • शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा होना

किसी व्यक्ति में ये सभी समस्याएं होना जरूरी नहीं है। उदाहरण के लिए, फैटी लिवर के साथ प्रीडायबिटीज या कमर का बढ़ा हुआ साइज भी व्यक्ति को MASLD की श्रेणी में ला सकता है।

एशियाई लोगों में BMI की सीमा अलग क्यों है?

लीन यानी दुबले व्यक्ति की परिभाषा जातीयता और जनसंख्या के अनुसार अलग हो सकती है। एशियाई आबादी में आमतौर पर 23 kg/m² से कम BMI वाले व्यक्ति में फैटी लिवर होने को Lean MASLD माना जा सकता है। भारत और दक्षिण एशियाई देशों में यह सीमा खासतौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि दक्षिण एशियाई लोगों में पश्चिमी देशों की आबादी की तुलना में कम BMI पर ही डायबिटीज और दूसरी मेटाबॉलिक समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए अरुण कोई अपवाद नहीं था। वह ऐसे लोगों के समूह में शामिल था, जिनकी समस्या आसानी से नजरअंदाज हो सकती है, क्योंकि आमतौर पर फैटी लिवर को सिर्फ मोटापे से जोड़कर देखा जाता है।

BMI क्या नहीं बता पाता?

BMI शरीर के वजन और लंबाई के आधार पर निकाला जाता है, लेकिन यह नहीं बताता कि शरीर में फैट कहां जमा है और मांसपेशियों की मात्रा कितनी है। एक ही BMI वाले दो लोगों की मेटाबॉलिक हेल्थ बिल्कुल अलग हो सकती है। जब शरीर की स्किन के नीचे फैट को सुरक्षित तरीके से जमा करने की क्षमता कम पड़ जाती है, तो अतिरिक्त फैट पेट के अंदरूनी अंगों, लिवर, पैंक्रियाज और मांसपेशियों में जमा होने लगता है। इसे विसरल और एक्टोपिक फैट कहा जाता है। यह फैट इंसुलिन रेजिस्टेंस, सूजन और फैटी एसिड को लिवर तक पहुंचाने की प्रक्रिया को बढ़ावा दे सकता है। इसलिए किसी व्यक्ति के हाथ-पैर पतले हो सकते हैं, लेकिन पेट और कमर के आसपास मेटाबॉलिक रूप से नुकसानदायक फैट जमा हो सकता है।

कमर का कितना साइज होना हो सकता है खतरे की घंटी

दक्षिण एशियाई लोगों में पुरुषों की कमर 90 सेंटीमीटर या उससे ज्यादा होना खतरे की घंटी है।
महिलाओं की कमर 80 सेंटीमीटर या उससे ज्यादा होना खतरे की घंटी है।
कमर और लंबाई का अनुपात लगभग 0.5 होना भी एक उपयोगी संकेत माना जाता है।
कई बार व्यक्ति का वजन बिल्कुल नहीं बढ़ता, लेकिन उसकी कमर धीरे-धीरे बढ़ती रहती है। इसलिए सिर्फ वजन मशीन पर दिखने वाले आंकड़े पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है।

मांसपेशियों की कमी भी बढ़ा सकती है खतरा

शरीर की मांसपेशियां भोजन के बाद ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मांसपेशियां कम होने पर शरीर ग्लूकोज को प्रभावी तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता, जिससे लिवर पर मेटाबॉलिक दबाव बढ़ सकता है। इस स्थिति को अक्सर थिन-फैट” या सार्कोपेनिक फेनोटाइप कहा जाता है। बढ़ती उम्र, शारीरिक निष्क्रियता, पर्याप्त प्रोटीन न लेना और बार-बार क्रैश डाइटिंग करने से यह समस्या अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।

फैटी लिवर सिर्फ अल्ट्रासाउंड की सामान्य रिपोर्ट नहीं है

कई बार अल्ट्रासाउंड में फैटी लिवर आने को बहुत गंभीरता से नहीं लिया जाता। कुछ लोगों में यह स्थिति लंबे समय तक बिना गंभीर समस्या के रह सकती है। लेकिन कुछ मरीजों में लिवर में जमा फैट के साथ सूजन भी हो सकती है। इस स्थिति को मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोहेपेटाइटिस यानी MASH कहा जाता है। समय के साथ यह समस्या लिवर फाइब्रोसिस यानी लिवर में स्कारिंग,सिरोसिस और कुछ मामलों में लिवर कैंसर तक पहुंच सकती है। पतले लोगों में Lean MASLD का निदान देर से हो सकता है, क्योंकि अक्सर डॉक्टर और मरीज दोनों ही यह नहीं सोचते कि दुबले व्यक्ति को भी मेटाबॉलिक लिवर डिजीज हो सकता है। यह भी याद रखना जरूरी है कि लिवर एंजाइम सामान्य या लगभग सामान्य होने पर भी गंभीर फाइब्रोसिस की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

पतले व्यक्ति में फैटी लिवर हो तो कौन सी जांच कराना है जरूरी

  • कमर का साइज चेक करना
  • ब्लड प्रेशर
  • ब्लड ग्लूकोज
  • HbA1c
  • ट्राइग्लिसराइड्स
  • HDL कोलेस्ट्रॉल

इसके अलावा व्यक्ति के शराब के सेवन और दवाओं की भी समीक्षा की जानी चाहिए। लिवर में फैट या लिवर टेस्ट असामान्य होने के दूसरे कारणों, जैसे वायरल हेपेटाइटिस और जरूरत के अनुसार कुछ हार्मोनल, ऑटोइम्यून, पोषण संबंधी या आनुवंशिक स्थितियों की भी जांच की जा सकती है।

फैटी लिवर का इलाज सिर्फ वजन कम करना नहीं

फैटी  लिवर के इलाज को सिर्फ वजन कम करने तक सीमित नहीं करना चाहिए। आमतौर पर फैटी लिवर के मरीजों को शरीर का 7 से 10 प्रतिशत वजन कम करने की सलाह दी जाती है। लेकिन पतले व्यक्ति के लिए यह सलाह हमेशा सही नहीं हो सकती, खासकर तब जब उसकी मांसपेशियां पहले से कम हों। Lean MASLD में लक्ष्य सिर्फ वजन कम करना नहीं होना चाहिए। इस स्थिति में मरीज को जो सुधार करना है वो है

  • पेट के अंदर जमा विसरल फैट को कम करना
  • इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार करना
  • मांसपेशियों को सुरक्षित रखना या बढ़ाना

भारतीय डाइट में क्या बदलाव करें?

फैटी लिवर का इलाज करने के लिए डाइट में बदलाव करना जरूरी है। भारतीय खानपान में आमतौर पर कुछ फूड्स जैसे पॉलिश चावल की अधिक मात्रा, मैदा और रिफाइंड आटा,मिठाइयां,फ्रूट जूस और मीठे ड्रिंक का सेवन कंट्रोल करना चाहिए। डाइट पर कंट्रोल करने का मतलब ये नहीं है कि कार्बोहाइड्रेट को पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। कुछ फूड्स की डाइट में मात्रा बढ़ाना भी जरूरी है जैसे फाइबर से भरपूर सब्जियां,दालें और दूसरी पल्सेज। फैटी लिवर का इलाज करने के लिए सैचुरेटेड फैट और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स को सीमित करना चाहिए। शराब का सेवन कम से कम करना या क्लीनिक स्थिति के अनुसार पूरी तरह बंद करना बेहतर हो सकता है।

बॉडी की एक्टिविटी के लिए क्या सिर्फ वॉक है जरूरी

लिवर के फैट को कंट्रोल करने के लिए सिर्फ वॉक ही काफी नहीं है आप हफ्ते में कम से कम 150 मिनट एरोबिक एक्सरसाइज भी करें। हफ्ते में दो या उससे अधिक दिन रेजिस्टेंस या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी है जरूरी। चलना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है, लेकिन यह मांसपेशियों को बढ़ाने का पूरा कार्यक्रम नहीं है। इसलिए फैटी लिवर और कम मांसपेशियों वाले लोगों के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को भी एक्सरसाइज रूटीन का हिस्सा बनाना जरूरी है। अरुण ने रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम की, फाइबर से भरपूर सब्जियां, दालें और प्रोटीन बढ़ाया तथा डॉक्टर की निगरानी में रेजिस्टेंस एक्सरसाइज शुरू की। उसे डिस्लिपिडेमिया के लिए भी इलाज दिया गया।

डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल को भी कंट्रोल करना जरूरी

डायबिटीज, प्रीडायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और डिस्लिपिडेमिया का सही इलाज करना जरूरी है। लिवर एंजाइम हल्के बढ़े होने के कारण स्टेटिन जैसी कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाओं को अपने आप बंद नहीं करना चाहिए। हृदय रोग से बचाव भी बेहद महत्वपूर्ण है। दिलचस्प बात यह रही कि अरुण ने लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव करके अपना कमर का साइज कम किया,ब्लड शुगर कंट्रोल बेहतर हुआ। उसकी बॉडी में ताकत बढ़ी और लिवर से जुड़े मार्कर्स में सुधार हुआ। हालांकि उसका वजन कुछ खास कम नहीं हुआ। लिवर की हेल्थ में सुधार करने के लिए सिर्फ BMI पर ध्यान न दें। शरीर की वह मेटाबॉलिक सेहत जांचें, जो BMI नहीं दिखा पाता।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। फैटी लिवर या किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में स्वयं इलाज करने के बजाय डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें। हर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है, इसलिए जांच और उपचार व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार किया जाना चाहिए।

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