40 साल तक दराज में पड़ा रहा ‘पत्थर’, जांच हुई तो निकला करोड़ों साल पुराना डायनासोर का जीवाश्म.

40 साल तक दराज में पड़ा रहा ‘पत्थर’, जांच हुई तो निकला करोड़ों साल पुराना डायनासोर का जीवाश्म.

दुनिया में कई बार ऐसी चीजें सामने आती हैं, जिनकी असली पहचान सामने आने में दशकों लग जाते हैं। अंटार्कटिका से जुड़ी एक ऐसी ही हैरान करने वाली खोज इन दिनों चर्चा में है। करीब 40 साल तक एक दराज में सामान्य पत्थर की तरह पड़ा एक नमूना जब वैज्ञानिकों की नजर में आया और उसकी गहराई से जांच की गई, तो उसकी असली पहचान ने सभी को चौंका दिया।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, जिसे इतने वर्षों तक मामूली पत्थर समझकर रखा गया था, वह दरअसल एक दुर्लभ डायनासोर की पूंछ की हड्डी का जीवाश्म निकला।

1985 में अंटार्कटिका से मिला था नमूना

इस जीवाश्म की कहानी करीब चार दशक पुरानी है। रिपोर्ट के मुताबिक, 1985 में अंटार्कटिका में एक वैज्ञानिक अभियान के दौरान यह नमूना मिला था। खोज के बाद इसे ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे के कैम्ब्रिज स्थित भूवैज्ञानिक संग्रह में सुरक्षित रख दिया गया।

नमूना वहां लंबे समय तक पड़ा रहा, लेकिन इसकी विस्तृत वैज्ञानिक जांच नहीं हो सकी। हाल के वर्षों में जब विशेषज्ञों ने पुराने जीवाश्मों और भूवैज्ञानिक नमूनों की दोबारा जांच शुरू की, तब यह नमूना भी उनके सामने आया।

इसके बाद इसकी बारीकी से जांच की गई और पता चला कि यह कोई साधारण चट्टान नहीं है।

जांच में सामने आई डायनासोर की कहानी

वैज्ञानिकों की जांच में संकेत मिला कि यह टाइटेनोसॉर नाम के विशाल शाकाहारी डायनासोर की पूंछ की हड्डी का हिस्सा है।

टाइटेनोसॉर विशाल आकार वाले शाकाहारी डायनासोरों का एक समूह था। इनके जीवाश्म दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मिले हैं। लेकिन अंटार्कटिका से डायनासोर के जीवाश्मों का मिलना बेहद दुर्लभ माना जाता है।

यही वजह है कि करीब 40 साल तक संग्रह में रखे इस नमूने की पहचान सामने आने के बाद वैज्ञानिकों की दिलचस्पी काफी बढ़ गई है।

आज बर्फ से ढका अंटार्कटिका कभी था हरा-भरा

आज अंटार्कटिका का नाम सुनते ही बर्फ से ढका विशाल इलाका आंखों के सामने आता है। लेकिन करोड़ों साल पहले इस महाद्वीप का वातावरण बिल्कुल अलग था।

वैज्ञानिकों के अनुसार, पृथ्वी के प्राचीन इतिहास के अलग-अलग दौर में अंटार्कटिका का मौसम आज की तुलना में काफी गर्म रहा होगा। यहां वनस्पतियां और जंगल मौजूद थे और विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु भी रहते थे।

डायनासोर का यह जीवाश्म उसी प्राचीन दुनिया की झलक देता है। इसके अध्ययन से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि उस समय अंटार्कटिका का पर्यावरण कैसा था और वहां रहने वाले जीव किस तरह के थे।

पुराने संग्रहों में छिपे हैं कई और राज

इस खोज का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि दुनिया के संग्रहालयों और शोध संस्थानों में दशकों पुराने हजारों जीवाश्म और भूवैज्ञानिक नमूने सुरक्षित रखे हुए हैं। इनमें से कई की पहचान या वैज्ञानिक महत्व अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है।

नई तकनीकों और आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों के जरिए अब पुराने नमूनों की दोबारा जांच की जा रही है। ऐसे में संभव है कि आने वाले समय में वैज्ञानिकों को पुराने संग्रहों से ही कई और महत्वपूर्ण जीवाश्म मिलें।

40 साल बाद बदली एक ‘पत्थर’ की पहचान

करीब चार दशक तक दराज में पड़े इस नमूने की कहानी यह बताती है कि वैज्ञानिक खोज हमेशा नई जगह पर खुदाई करने से ही नहीं होती। कई बार किसी संग्रह में वर्षों से रखी चीज भी बड़े वैज्ञानिक रहस्य का जवाब अपने अंदर छिपाए होती है।

जिस नमूने को कभी साधारण पत्थर समझकर रख दिया गया था, वही अब अंटार्कटिका के प्राचीन इतिहास और डायनासोरों की दुनिया को समझने में वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण सुराग बन गया है।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *