रिटायरमेंट के 23 साल बाद भी फ्री में करते हैं इलाज, दान देते हैं पेंशन… मशहूर डॉ. लहरी के साथ मारपीट का आरोप..

रिटायरमेंट के 23 साल बाद भी फ्री में करते हैं इलाज, दान देते हैं पेंशन… मशहूर डॉ. लहरी के साथ मारपीट का आरोप..
रिटायरमेंट के 23 साल बाद भी फ्री में करते हैं इलाज, दान देते हैं पेंशन… मशहूर डॉ. लहरी के साथ मारपीट का आरोप..

वाराणसी में बीएचयू के मशहूर डॉक्टर टीके लहरी के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है. उनके परिजनों ने आरोप लगाया है कि इलाज के दौरान उनके साथ डॉक्टर अरविंद पांडेय ने मारपीट की. परिवार का आरोप है कि इसकी के एक हफ्ते बाद तक भी बीएचयू प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की.

लाखों मरीजों के जीवन को दान देने वाले गरीबों के मसीहा पद्मश्री तपन कुमार लहरी से कथित मारपीट का आरोप परिजनों ने लगाया है. लेकिन इसकी शिकायत काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति कुल सचिव सहित दर्जनों अधिकारियों को मेल करके दी गई है. अर्जुन ने आरोप लगाया कि 29 अगस्त की घटना है. हफ्ता भर हो जाने के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. लोगों को घटना की जानकारी होते ही आक्रोश फैल गया. लोग कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं. वहीं, एसोसिएशन प्रोफेसर ने BHU के ऑफिशियल आईएमएस ग्रुप में शक्ति इस्तेमाल करने की बात की है, जबकि थप्पड़ मारने से इनकार किया है.

इलाज के दौरान हुआ विवाद- पिछले कई महीने से बीमार होने के कारण डॉ. लहरी को BHU के कार्डियोलॉजिक विभाग के आईसीयू में भर्ती कराया गया था. जहां पर एसोसिएट प्रोफेसर की डॉक्टर लहरी से किसी बात को लेकर विवाद हुआ. जिसके बाद उनके साथ कथित मारपीट का आरोप परिजनों ने लगाया है. परिजनों ने एक फोटो जारी किया है. जिसमें डॉ. लहरी के गालों पर उंगलियों के निशान, आंखों में ब्लड और आंखों के ऊपर काले निशान दिखाई दे रहे हैं.

आरोपी डॉक्टर पर कार्रवाई की हो रही मांग- डॉ. टीके लहरी के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं. आरोप है कि अस्पताल परिसर में उनके ही विभाग के चिकित्सक डॉ. अरविंद पांडेय ने डॉ. लहरी के साथ मारपीट की. घटना को लेकर शिकायत किए जाने के बावजूद करीब एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी प्राथमिकी दर्ज नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है. टीके लहरी के साथ मारपीट की घटना मीडिया में आने के बाद लोगों में आक्रोश है. इसको लेकर पुलिस में मुकदमा दर्ज करने कार्रवाई की मांग तेज हो गई है.

BHU प्रशासन की भूमिका पर सवाल- इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. BHU के हृदय विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं सीनरी कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर ओम शंकर ने आरोप लगाया जा रहा है कि BHU प्रशासन आरोपी चिकित्सक के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के बजाय मामले को टालने का प्रयास कर रहा है. उन्होंने आगे कहा कि एसोसिएशन प्रोफेसर ने खुद आईएमएस के ग्रुप में बताया है कि वह लहरी के साथ सख्ती से पेश आए थे. लेकिन वह इस घटना से इनकार नहीं कर रहे हैं. इसका आशय है कि वह घटना के समय वहां पर थे, इसकी जांच किया जाना चाहिए कि कैसे इतनी गंभीर चोट टीके लहरी को आई है. अगर आईसीयू में सीसीटीवी लगा है तो सारी चीजें सामने आ सकती हैं, अब यह पता लगाना होगा कि सीसीटीवी वहां लगी है कि नहीं?

रिटायर होने के बाद भी फ्री में करते हैं इलाज- काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) स्थित चिकित्सा संस्थान में पद्मश्री कार्डियोथोरेसिक सर्जन के रूप में कार्यरत 2003 रिटायर्ड है. उसके बाद भी वो लगातार BHU के सर सुंदरलाल अस्पताल में अपनी सेवाएं निशुल्क दे रहे हैं. यही नहीं, डॉक्टर लहरी अपनी पेंशन को भी काशी हिंदू विश्वविद्यालय को दान कर देते हैं. सिर्फ वह अपने खर्चे का पैसा अपने पास रखते हैं.

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