रानी एलिजाबेथ प्रथम के दौर में गुप्त कमरों में क्यों छिपते थे धर्मगुरु, जानिए

रानी एलिजाबेथ प्रथम के दौर में गुप्त कमरों में क्यों छिपते थे धर्मगुरु, जानिए
रानी एलिजाबेथ प्रथम के दौर में गुप्त कमरों में क्यों छिपते थे धर्मगुरु, जानिए

लंदन. कल्पना कीजिए कि आप दीवार के भीतर बनी एक ऐसी तंग और अंधेरी कालकोठरी में खड़े हैं, जहां न आप ठीक से सांस ले सकते हैं और न ही हिल-डुल सकते हैं. बाहर आपकी तलाश में हथियारबंद शिकारी घूम रहे हैं, जो कमरों की नपाई कर रहे हैं. अगर आप जरा सा भी खांसे या जमीन पर पैर की सरसराहट हुई, तो सीधी मौत आपका इंतजार कर रही है. यह कोई थ्रिलर फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि 16वीं सदी के इंग्लैंड की वह भयावह हकीकत है, जिसने प्रीस्ट होल्स (Priest Holes) यानी पादरियों के गुप्त ठिकानों को जन्म दिया. 16वीं शताब्दी में यूरोप धार्मिक कट्टरता की आग में जल रहा था. इंग्लैंड के राजा हेनरी आठवें और उनके बाद एडवर्ड छठे ने कैथोलिक चर्च से नाते तोड़कर प्रोटेस्टेंट धर्म को बढ़ावा दिया. लेकिन इसके बाद गद्दी पर बैठीं रानी मैरी, जिन्होंने बड़ी बेरहमी से प्रोटेस्टेंटों को जिंदा जलवा दिया और इतिहास में ‘ब्लडी मैरी’ के नाम से कुख्यात हुईं.

मैरी के बाद उनकी बहन रानी एलिजाबेथ प्रथम सत्ता में आईं, तो पादरियों और कैथोलिकों पर कहर टूट पड़ा. पोप ने एलिजाबेथ को धर्मद्रोही घोषित कर दिया, जिसके बाद रानी को मारने की साजिशें रची जाने लगीं. गुस्से में आई रानी ने कैथोलिक पादरियों के इंग्लैंड में घुसने पर सख्त रोक लगा दी और जासूसों व प्रीस्ट हंटर्स का खौफनाक जाल बिछा दिया. जो भी पादरी पकड़ा जाता, उसे अमानवीय यातनाएं दी जातीं और सरेआम फांसी पर लटका दिया जाता. ऐसे दौर में पादरियों की जान बचाने के लिए रईस कैथोलिक परिवारों ने अपने बड़े-बड़े महलों और हवेलियों में गुप्त कमरे बनवाने शुरू किए, जिन्हें प्रीस्ट होल्स कहा गया. ये ठिकाने अक्सर सीढ़ियों के नीचे, अंगीठी के पीछे या नकली दीवारों के अंदर बनाए जाते थे. जब प्रीस्ट हंटर्स घर पर छापा मारते, तो वे हफ्तों तक वहीं डेरा डालते. वे कमरों की लंबाई-चौड़ाई नापते, ताकि गुप्त जगह का पता चल सके.

इस दौरान पादरी उस बेहद तंग जगह में बिना हिले-डुले, अपनी सांसें रोककर कई दिनों तक पड़े रहते थे. कई बार खाने-पानी की कमी या ऑक्सीजन न मिलने के कारण पादरी उस गुप्त ठिकाने के अंदर ही तड़प-तड़पकर दम तोड़ देते थे. इन नामुमकिन से दिखने वाले सीक्रेट चेम्बर्स को बनाने के पीछे एक मास्टरमाइंड जेसुइट निकोलस ओवेन थे. ओवेन ने अपना पूरा जीवन इन गुप्त कमरों को तराशने में लगा दिया. उनकी कारीगरी इतनी बेमिसाल थी कि सदियों बाद भी मकानों के जीर्णोद्धार के दौरान ये कमरे आसानी से नहीं खोजे जा सके. ओवेन ने वॉर्स्टरशायर के हारविंगटन हॉल जैसे महलों में सात-सात प्रीस्ट होल्स बनाए. 1606 में अपने साथी पादरियों को बचाने के लिए ओवेन ने खुद को दुश्मनों के हवाले कर दिया और टॉवर ऑफ लंदन में यातनाएं सहते हुए दम तोड़ दिया. आज ये प्रीस्ट होल्स इतिहास के उस खूनी अध्याय की गवाही देते हैं.

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