
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले करतला थाना क्षेत्र से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां के केराकछार गांव की रहने वाली एक महिला अपने मोबाइल पर रील्स देख रही थी, तभी उसे फोन का नेटवर्क गायब हो गया. महिला इस बात से नाराज हो गई और गुस्से में उसने अपना मोबाइल फोन उठाकर जोर से जमीन पर दे मारा, जिससे फोन टूटकर चकनाचूर हो गया. लेकिन महिला का गुस्सा इतने पर ही खत्म नहीं हुआ. फोन तोड़ने के कुछ देर बाद ही आवेश में आकर उसने घर में रखा जहरीला कीटनाशक पी लिया. परिजनों द्वारा आनन-फानन में अस्पताल ले जाने के बाद इलाज के दौरान रविवार रात उसकी दर्दनाक मौत हो गई. यह दुखद हादसा शनिवार दोपहर का है, जिसका खुलासा मंगलवार को हुआ. महिला का नाम मंगलो बाई है, जिसकी उम्र 52 साल थी.
बताया जाता है कि घटना के समय घर में मंगलो बाई की छोटी बेटी मौजूद थी. रील बंद होने के गुस्से में फोन तोड़ने के बाद मंगलो अपने कमरे में चली गई और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया. वहीं, उसने कीटनाशक गटक लिया. बेटी को घटना की भनक तब लगी, जब कमरे के भीतर से मंगलो के उल्टी करने की आवाजें आने लगीं. जब परिजन कमरे में पहुंचे तो वहां कीटनाशक की खाली शीशी पड़ी मिली, जिसके बाद परिजनों में हड़कंप मच गया. हैरानी की बात यह रही कि घटना के तुरंत बाद परिजन महिला को डॉक्टर या अस्पताल ले जाने के बजाय खुद ही घरेलू नुस्खों से जहर बाहर निकालने के प्रयास में जुट गए. इस दौरान महिला की जान बचाने के अंधविश्वास और गलत तरीके के तहत पति द्वारा उसे गोबर मिला पानी भी पिलाया गया. घरेलू हथकंडों के चक्कर में काफी कीमती समय बर्बाद हो गया और जब महिला की स्थिति बिगड़ने लगी, तब जाकर डायल-112 की मदद से उसे करतला स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया.
प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत को देखते हुए उसे कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद महिला ने दम तोड़ दिया. इस मामले में दैनिक भास्कर से बात करते हुए मनोवैज्ञानिक डॉ कमलेश रात्रे ने सोशल मीडिया और रील की लत को लेकर गंभीर चेतावनियां दी हैं. उन्होंने बताया कि लगातार शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट देखने से मस्तिष्क का रिवॉर्ड सिस्टम अत्यधिक सक्रिय हो जाता है, जिसमें डोपामाइन न्यूरोट्रांसमीटर की मुख्य भूमिका होती है. ऐसी स्थिति में अचानक नेटवर्क चले जाने या फोन हटा लिए जाने जैसी रुकावट आने पर कुछ लोगों में चिड़चिड़ापन, गुस्सा, घबराहट और बेचैनी जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं. मनोचिकित्सकों ने सलाह दी है कि सोशल मीडिया के इस्तेमाल की समय-सीमा तय करना बेहद जरूरी है. भोजन के दौरान और सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल का प्रयोग बिल्कुल बंद कर देना चाहिए.

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