मीडिया की नौकरी छूटी: तो नोएडा की सड़कों पर बेचा वड़ा पाव, 12 साल एंकरिंग करने वाले इस कपल के जज्बे को लोग कर रहे सलाम

मीडिया की नौकरी छूटी: तो नोएडा की सड़कों पर बेचा वड़ा पाव, 12 साल एंकरिंग करने वाले इस कपल के जज्बे को लोग कर रहे सलाम
मीडिया की नौकरी छूटी: तो नोएडा की सड़कों पर बेचा वड़ा पाव, 12 साल एंकरिंग करने वाले इस कपल के जज्बे को लोग कर रहे सलाम

नोएडा में वड़ा पाव का स्टॉल चलाने वाले पूर्व न्यूज एंकर और प्रड्यूसर जसवीर और सुधा की कहानी संघर्ष और आत्मसम्मान की अनूठी मिसाल है. मीडिया क्षेत्र की अनिश्चितता और आर्थिक तंगी से उबरकर दोनों ने अपनी नई पहचान बनाई है.

वक्त कब जिंदगी का रुख बदल दे, इसका अंदाजा लगाना आसान नहीं होता. जसवीर और उनकी पत्नी सुधा ने भी कभी नहीं सोचा था कि जिस चकाचौंध और पत्रकारिता की दुनिया को दोनों ने अपनी जिंदगी के कई साल दिए, एक दिन उसी पेशे की अनिश्चितता उन्हें बिल्कुल नया रास्ता चुनने के लिए मजबूर कर देगी. जसवीर करीब 12 साल और सुधा 7 साल तक पत्रकारिता से जुड़ी रहीं. दोनों ने एंकर और निर्माता के तौर पर काम किया. लेकिन नौकरी की अनिश्चितता ने जब उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया, तो उन्हें अपने पुराने पेशे से बाहर निकलकर कुछ नया शुरू करने का फैसला लेना पड़ा और उन्होंने वड़ा पाव बेचना शुरू कर दिया.

12 साल के करियर में देखीं कई मुश्किलें जसवीर बताते हैं कि नौकरी की दुनिया में यह तय नहीं होता कि अगले दिन भी नौकरी रहेगी या नहीं. अपने 12 साल के करियर में उन्होंने लागत घटाने के नाम पर होने वाली छंटनी देखी, कई लोगों को नौकरी से जाते देखा और खुद भी छंटनी की उस सूची में आने का सामना उन्हें करना पड़ा. एक समय ऐसा आया जब सुधा की नौकरी चली गई और जसवीर की तनख्वाह इतनी कम कर दी गई कि उससे किराया तक देना मुश्किल हो गया. दोनों उस समय भी किराए के मकान में रह रहे थे और आज भी किराए के घर में ही रहते हैं.

नौकरी मिली, लेकिन घर चलाना मुश्किल रहा इसके बाद जसवीर ने महीनों तक नौकरी तलाश की. काम मिला भी, लेकिन वेतन इतना कम था कि उससे परिवार की जरूरतें पूरी करना आसान नहीं था. उस समय उनके सामने यह सवाल नहीं था कि आगे कौन सा पेशा चुनना है. सबसे बड़ी चिंता यह थी कि घर का खर्च कैसे चलेगा. इसी मजबूरी ने उन्हें नौकरी से आगे कुछ नया सोचने पर मजबूर किया.

वड़ा पाव से पहले शुरू की थी टिफिन सेवा वड़ा पाव बेचने का फैसला अचानक लिया गया कदम नहीं था. इससे पहले करीब एक साल तक दोनों टिफिन सेवा चलाते रहे. वे घरों और दफ्तरों तक खाना पहुंचाते थे. शुरुआत में जसवीर ने लोगों को योग भी सिखाया, लेकिन उससे उन्हें उम्मीद के मुताबिक आमदनी नहीं हो पाई. इसके बाद उनकी जिंदगी धीरे-धीरे एक ऐसे मोड़ पर पहुंची, जहां उन्होंने खाने के कारोबार की तरफ कदम बढ़ाया.

शिरडी से लौटने के बाद आया विचार जसवीर बताते हैं कि एक दिन उन्हें बाबा का बुलावा आया और वे पत्नी के साथ शिरडी तथा सिद्धिविनायक गए. वहां उन्होंने लस्सी के साथ वड़ा पाव खाया. घर लौटने के बाद यही साधारण सा अनुभव उनके लिए एक नए रास्ते की शुरुआत बन गया. उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि वह सड़क पर रेहड़ी लगाकर वड़ा पाव बेचेंगे. लेकिन जसवीर इसे भगवान की देन और उनके दिखाए रास्ते के तौर पर देखते हैं. जसवीर ने सबसे पहले अपने लिए वड़ा पाव बनाया. इसके बाद पड़ोसियों को खिलाया. कई बार बनाने और सुधारने के बाद जब उन्हें लगा कि उनके वड़ा पाव में अब अपना खास स्वाद और अंदाज आ गया है, तब उन्होंने इसे लोगों को बेचने का फैसला किया. उन्होंने 9 अक्टूबर 2023 को उन्होंने पहली बार वड़ा पाव बेचा.

आज वही जसवीर और सुधा, जिन्होंने पत्रकारिता में कई साल एंकरिंग और निर्माण का काम किया, नोएडा की सड़कों पर वड़ा पाव बेचते हैं. उनकी कहानी सिर्फ पेशा बदलने की कहानी नहीं है. यह उस दौर की कहानी है, जब नौकरी की अनिश्चितता के बीच दोनों के सामने घर चलाने की चुनौती थी और उन्होंने परिस्थितियों के सामने रुकने के बजाय खुद के लिए एक नया रास्ता बनाने का फैसला किया.

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