
आमतौर पर पुराना मोबाइल फोन खराब होने के बाद कबाड़ समझ लिया जाता है, लेकिन जापान ने इसी इलेक्ट्रॉनिक कचरे का ऐसा इस्तेमाल किया, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। टोक्यो 2020 ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों के लिए जापान ने पुराने मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से धातुएं निकालकर करीब 5,000 मेडल तैयार किए थे।
इसके लिए जापान में वर्ष 2017 से 2019 के बीच एक विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत लोगों से अपने पुराने मोबाइल फोन और छोटी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जमा करने की अपील की गई, ताकि उनमें मौजूद उपयोगी धातुओं को दोबारा इस्तेमाल किया जा सके।
लाखों पुराने मोबाइल फोन किए गए जमा
अभियान के दौरान जापान में करीब 62.1 लाख पुराने मोबाइल फोन जमा किए गए। इसके अलावा लगभग 79 हजार छोटी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी एकत्र की गईं। इस अभियान को सफल बनाने में स्थानीय सरकारों, नगरपालिकाओं और कई कंपनियों ने भी सहयोग किया।
पुराने फोन और इलेक्ट्रॉनिक सामान को सीधे पिघलाकर मेडल नहीं बनाए गए। पहले इन उपकरणों को प्रोसेस किया गया और उनमें मौजूद अलग-अलग धातुओं को निकाला गया। इसके बाद इन धातुओं को रिफाइन किया गया, ताकि उनका इस्तेमाल मेडल बनाने के लिए किया जा सके।
निकाली गई सोना, चांदी और दूसरी धातुएं
इस प्रक्रिया से करीब 32 किलोग्राम सोना और 3,500 किलोग्राम चांदी हासिल की गई। इसके अलावा ब्रॉन्ज मेडल के लिए जरूरी धातु भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से प्राप्त की गई। इन संसाधनों का इस्तेमाल टोक्यो ओलंपिक और पैरालंपिक के लिए करीब 5,000 मेडल तैयार करने में किया गया।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं था कि हर मेडल पूरी तरह पुराने मोबाइल फोन से निकली धातु से बना था। इलेक्ट्रॉनिक कचरे से धातुओं को निकालने और शुद्ध करने के बाद उन्हें मेडल निर्माण की प्रक्रिया में इस्तेमाल किया गया।
सोने का मेडल भी पूरी तरह सोने का नहीं होता
टोक्यो 2020 के मेडल्स को लेकर एक और दिलचस्प बात यह है कि गोल्ड मेडल पूरी तरह सोने से नहीं बना था। इसकी मुख्य बॉडी चांदी की थी और उसके ऊपर 6 ग्राम से अधिक सोने की परत इस्तेमाल की गई थी।
वहीं सिल्वर मेडल चांदी से तैयार किया गया था, जबकि ब्रॉन्ज मेडल के लिए कॉपर-रिच एलॉय का इस्तेमाल किया गया था।
कबाड़ से ओलंपिक तक का सफर
जापान के इस अभियान की खासियत केवल हजारों मेडल तैयार करना नहीं थी। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि जिन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को आमतौर पर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, उनमें मौजूद कीमती संसाधनों को दोबारा इस्तेमाल किया गया।
मोबाइल फोन और दूसरी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में सोना, चांदी, तांबा जैसी कई उपयोगी धातुएं मौजूद होती हैं। इन्हें उचित तकनीक से अलग करके दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।
टोक्यो ओलंपिक के लिए चलाया गया यह अभियान रीसाइक्लिंग और संसाधनों के दोबारा इस्तेमाल का एक अनोखा उदाहरण बन गया। इस पहल ने यह भी दिखाया कि इलेक्ट्रॉनिक कचरे को केवल समस्या मानने के बजाय उसमें मौजूद संसाधनों को दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है।

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