
Finland Traffic Fine: ज्यादातर देशों में ट्रैफिक फाइन आमतौर पर तय होते हैं. भले ही कोई व्यक्ति करोड़पति हो या फिर औसत सैलरी वाला कर्मचारी एक ही ट्रैफिक नियम तोड़ने पर जुर्माना आमतौर पर एक जैसा ही होता है. फिनलैंड का तरीका लेकिन काफी ज्यादा अलग है. यह देश एक प्रोग्रेसिव डे फाइन सिस्टम का इस्तेमाल करता है.
इसके तहत कुछ ट्रैफिक जुर्माने व्यक्ति की इनकम से जुड़े होते हैं. इसका मतलब है कि आमिर ड्राइवर को उसी नियम को तोड़ने के लिए काफी ज्यादा जुर्माना देना पड़ सकता है जिसके लिए एक आम ड्राइवर को काफी कम जुर्माना देना पड़ता है.
अमीर चालकों को समान गलती पर बहुत ज़्यादा चुकाना।
फिनलैंड का डे फाइन सिस्टम क्या है?
यह सिस्टम 1921 से लागू है. सभी पर एक जैसा तय जुर्माना लगाने के बजाय यह सिस्टम अपराध की गंभीरता और अपराधी की आर्थिक स्थिति दोनों को ध्यान में रखता है. सबसे पहले अधिकारी यह तय करते हैं कि ट्रैफिक नियम का उल्लंघन कितना गंभीर है. ड्राइवर ने स्पीड लिमिट से कितनी ज्यादा स्पीड से गाड़ी चलाई है जैसी वजह डे फाइन यूनिट की संख्या तय करने में असर डाल सकते हैं. उदाहरण के लिए किसी उलझन के लिए 10, 20 या फिर उससे ज्यादा डे फाइन यूनिट लग सकती है. इसके बाद हर यूनिट की कीमत ड्राइवर की इनकम के आधार पर तय की जाती है.
जुर्माना कैसे तय किया जाता है?
फाइन की कीमत लगभग ड्राइवर की रोजाना की खर्च योग्य नेट इनकम के 50% पर आधारित होती है. अधिकारी सरकारी टैक्स रिकॉर्ड के जरिए किसी व्यक्ति की कमाई की जांच कर सकते हैं. इससे दो लोगों को एक ही अपराध के लिए जो जुर्माना देना पड़ सकता है उसमें काफी अंतर आ जाता है.
उदाहरण के लिए मान लीजिए कि औसत इनकम वाले ड्राइवर और एक अरबपति दोनों को स्पीड लिमिट तोड़ने के लिए 10 डे फाइन यूनिट का जुर्माना लगाया जाता है. दोनों को पेनल्टी यूनिट की संख्या तो एक जैसी मिलती है लेकिन उन यूनिटों की कीमत काफी अलग होगी. औसत इनकम वाले व्यक्ति को कुछ सौ यूरो देने पड़ सकते हैं जबकि अरबपति को लाखों यूरो का जुर्माना देना पड़ सकता है. इस सिस्टम के तहत जुर्माने की कोई ऊपरी सीमा भी तय नहीं है. इससे काफी अमीर लोगों पर लगने वाला जुर्माना काफी ज्यादा हो सकता है.
जब आमिर ड्राइवर को लाखों का जुर्माना देना पड़ा
फिनलैंड के इस सिस्टम की वजह से अमीर लोगों पर कई बार काफी ज्यादा ट्रैफिक जुर्माना लगाया गया है. 2023 में बिजनेसमैन पर तय स्पीड लिमिट से 30 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा तेजी से गाड़ी चलाने के लिए लगभग 1.1 करोड़ का जुर्माना लगाया गया था.
फिनलैंड इस सिस्टम का इस्तेमाल क्यों करता है?
इस सिस्टम को इस्तेमाल करने के पीछे की मुख्य वजह यह है की सजा का आर्थिक असर अलग-अलग आर्थिक हालात वाले लोगों के लिए एक जगह होना चाहिए. उदाहरण के लिए ₹25000 का तय जुर्माना मिडिल क्लास या फिर कम इनकम वाले परिवार के लिए एक बड़ा आर्थिक बोझ हो सकता है. लेकिन काफी ज्यादा अमीर व्यक्ति के लिए इस रकम का असली असर शायद कुछ और ही हो.
जुर्माने को इनकम से जोड़कर फिनलैंड अलग-अलग इनकम वाले समूह के बीच ट्रैफिक नियमों के डर को बनाए रखना चाहता है. अपराध से सजा की गंभीरता तय होती है जबकि व्यक्ति की आर्थिक स्थिति से यह तय होता है कि उस सजा की कीमत कितनी होगी.
ट्रैफिक नियम को लागू करने का एक अलग तरीका
इस वजह से फिनलैंड का ट्रैफिक सिस्टम ट्रैफिक जुर्माने को आम तय जुर्माने वाले मॉडल से अलग तरह से देखता है. एक ही तरह का उल्लंघन करने वाले दो ड्राइवर को पेनल्टी यूनिट्स की संख्या तो एक जैसी मिल सकती है लेकिन उन्हें काफी अलग-अलग रकम चुकानी पड़ सकती है.
इसका मकसद यह नहीं है कि अमीर लोगों को एक ही अपराध के लिए सजा की गंभीरता के तौर पर ज्यादा पैसा देना पड़े. इसके बजाय यह सिस्टम जुर्माने के आर्थिक असर को व्यक्ति की भुगतान करने की क्षमता के अनुपात में रखने की कोशिश करता है.

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