दूषित हवा सिर्फ फेफड़ों; नहीं, किडनी को भी पहुंचा सकती है नुकसान, 10 साल की रिसर्च में सामने आया PM2.5 का असर

दूषित हवा सिर्फ फेफड़ों; नहीं, किडनी को भी पहुंचा सकती है नुकसान, 10 साल की रिसर्च में सामने आया PM2.5 का असर
दूषित हवा सिर्फ फेफड़ों; नहीं, किडनी को भी पहुंचा सकती है नुकसान, 10 साल की रिसर्च में सामने आया PM2.5 का असर

नई दिल्ली: वायु प्रदूषण को आमतौर पर फेफड़ों और सांस से जुड़ी बीमारियों के लिए बड़ा जोखिम माना जाता है, लेकिन इसका असर शरीर के दूसरे अंगों पर भी पड़ सकता है। एक हालिया अध्ययन में वायु प्रदूषण और किडनी की कार्यक्षमता के बीच संबंध सामने आया है।

Kidney International Reports में प्रकाशित इस शोध में 12 हजार से ज्यादा लोगों के स्वास्थ्य और प्रदूषण के संपर्क का लंबे समय तक अध्ययन किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि हवा में मौजूद PM2.5 के अधिक संपर्क का संबंध किडनी की फिल्टर करने की क्षमता में कमी से था। यह संबंध डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसे कुछ प्रमुख जोखिम कारकों को ध्यान में रखने के बाद भी देखा गया।

दिल्ली और चेन्नई के लोगों पर हुई तुलना

अध्ययन में दिल्ली और चेन्नई जैसे अलग-अलग वायु प्रदूषण स्तर वाले शहरों के लोगों को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों की किडनी की कार्यक्षमता को eGFR (estimated glomerular filtration rate) के जरिए आंका।

अध्ययन के अनुसार, दिल्ली में PM2.5 का स्तर चेन्नई की तुलना में काफी अधिक था और दिल्ली के प्रतिभागियों में किडनी की फिल्ट्रेशन क्षमता अपेक्षाकृत कम पाई गई।

शोध में यह भी पाया गया कि PM2.5 के संपर्क में हर 5 μg/m³ की वृद्धि किडनी की कार्यक्षमता में गिरावट से जुड़ी थी। हालांकि, ऐसे अध्ययन किसी संबंध को दिखाते हैं और अकेले यह साबित नहीं करते कि प्रदूषण ही हर व्यक्ति में किडनी की बीमारी का प्रत्यक्ष कारण है।

PM2.5 किडनी को कैसे प्रभावित कर सकता है?

PM2.5 बेहद छोटे प्रदूषण कण होते हैं, जो सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। कुछ परिस्थितियों में इनके कारण शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस जैसी प्रक्रियाएं बढ़ सकती हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से कई तरह की जैविक प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिनका असर रक्त वाहिकाओं और शरीर के विभिन्न अंगों पर पड़ सकता है।

किडनी में बहुत महीन रक्त वाहिकाओं का जाल होता है और यह अंग लगातार रक्त को फिल्टर करता है। इसलिए लंबे समय तक होने वाली सूजन, रक्त वाहिकाओं को नुकसान और अन्य मेटाबॉलिक बदलाव किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित करने में भूमिका निभा सकते हैं।

सिर्फ बुजुर्गों के लिए चिंता की बात नहीं

किडनी पर प्रदूषण के संभावित प्रभाव को केवल बुजुर्गों या पहले से किडनी की बीमारी वाले लोगों तक सीमित नहीं माना जा सकता। अध्ययन में अलग-अलग स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोगों को शामिल किया गया था।

हालांकि, जिन लोगों को पहले से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा या किडनी की बीमारी है, उनमें किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले कई जोखिम एक साथ मौजूद हो सकते हैं। ऐसे लोगों के लिए प्रदूषण के साथ-साथ इन बीमारियों को नियंत्रित रखना भी महत्वपूर्ण है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह रिसर्च?

भारत के कई बड़े शहरों में वायु प्रदूषण एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। वहीं क्रॉनिक किडनी डिजीज यानी CKD भी बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करती है।

ऐसे में प्रदूषण और किडनी की कार्यक्षमता के बीच संबंध को समझना महत्वपूर्ण है। यह शोध इस बात की ओर संकेत करता है कि खराब हवा का प्रभाव केवल सांस और फेफड़ों तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि लंबे समय में शरीर के दूसरे अंग भी प्रभावित हो सकते हैं।

प्रदूषण के दिनों में किडनी और फेफड़ों का कैसे रखें ध्यान?

जब हवा

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