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  • पीलीभीत में सुबह-सुबह’ हत्या: 20 साल पुरानी रंजिश में बांक से काट दिया, गांव में तनाव के बाद PAC तैनात

    पीलीभीत में सुबह-सुबह’ हत्या: 20 साल पुरानी रंजिश में बांक से काट दिया, गांव में तनाव के बाद PAC तैनात

    पीलीभीत में सुबह-सुबह’ हत्या: 20 साल पुरानी रंजिश में बांक से काट दिया, गांव में तनाव के बाद PAC तैनात

    पूरनपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव बिलहरी में घर से खेत तरफ शौच को जा रहे ग्रामीण की पुरानी रंजिश के चलते बांका (धारदार हथियार) से प्रहार कर हत्या कर दी गई। हत्या करने के बाद आरोपित फरार हो गया। पुलिस ने गांव में पहुंचकर पड़ताल शुरू कर दी है। गांव में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पुलिस को तैनात कर दिया गया।

    घटना में पुलिस द्वारा तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों नामजद आरोपी रामदेव एवं श्यामदेव को हिरासत में ले लिया गया है तथा उनसे पूछताछ की जा रही है।

    कोतवाली क्षेत्र के गांव बिलहरी निवासी वेदराम का गांव के ही कुछ लोगों से करीब 20 साल पहले विवाद हो गया था। उस समय मारपीट और हमले के दौरान एक युवक की मृत्यु हो गई थी। इसी को लेकर पुरानी रंजिश चल रही थी। आरोपित पक्ष तभी से बदला लेने की सोच रहा था।

    मौके पर जमा लोग।

    पुरानी रंजिश को लेकर गांव के ही आरोपितों में दिया घटना का अंजाम

    मंगलवार की सुबह वेदराम आठ बजे के करीब घर से खेत पर शौच के लिए जा रहे थे। रास्ते में फिर कहासुनी हो गई। आरोपितों ने उन पर ताबड़तोड़ बांका से प्रहार किया, जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।

    सूचना पर इंस्पेक्टर कोतवाली पवन कुमार पांडेय पुलिस टीम के साथ पहुंच गए। हमला करने के बाद आरोपित भाग गए।

    20 वर्ष पहले एक युवक की हत्या करने को लेकर चल रही थी रंजिश

    आपसी रंजिश के चलते घटना से गांव के लोगों में दहशत व्याप्त है। गांव में पुलिस को तैनात कर दिया गया। गांव के लोग शव उठाने से पहले आरोपितों की गिरफ्तारी करने की मांग कर रहे हैं।

  • कटिहार में घर से डेढ़’ किलोमीटर दूर खेत में मिला 15 वर्षीय किशोर का शव, गला रेतकर हत्या की आशंका –

    कटिहार में घर से डेढ़’ किलोमीटर दूर खेत में मिला 15 वर्षीय किशोर का शव, गला रेतकर हत्या की आशंका –

    कटिहार में घर से डेढ़’ किलोमीटर दूर खेत में मिला 15 वर्षीय किशोर का शव, गला रेतकर हत्या की आशंका –

    बलिया बेलौन थाना क्षेत्र के विद्यानंदपुर गांव में धान के खेत में मंगलवार को करीब 15 वर्षीय नाबालिग का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई।

    मृतक की पहचान खादिम अशरफ, पिता मो. आरिफ, निवासी विद्यानपुर, पंचायत मधाईपुर, वार्ड संख्या पांच के रूप में हुई है। नाबालिग की गला रेतकर हत्या किए जाने की बात सामने आ रही है।

    शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू

    बताया गया कि घर से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर धान के खेत में नाबालिग का शव पड़ा मिला। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर जुट गए।

    सूचना पर बलिया बेलौन पुलिस भी पहुंची और घटनास्थल की जांच शुरू की। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है।

    पुलिस हत्या के कारणों और घटना में शामिल लोगों का पता लगाने में जुटी है। घटना के बाद मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, नाबालिग की हत्या से गांव में भी मातम और दहशत का माहौल है।

  • FASTag Annual Pass: 1 करोड़ से ज्यादा लोगों ने लिया पास, ₹3,075 में 200 टोल क्रॉसिंग की सुविधा, जानें कौन ले सकता है और आवेदन का तरीका.

    FASTag Annual Pass: 1 करोड़ से ज्यादा लोगों ने लिया पास, ₹3,075 में 200 टोल क्रॉसिंग की सुविधा, जानें कौन ले सकता है और आवेदन का तरीका.

    FASTag Annual Pass: 1 करोड़ से ज्यादा लोगों ने लिया पास, ₹3,075 में 200 टोल क्रॉसिंग की सुविधा, जानें कौन ले सकता है और आवेदन का तरीका.

    अगर आप नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर अक्सर सफर करते हैं, तो FASTag Annual Pass आपके लिए उपयोगी हो सकता है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के मुताबिक, अब तक देश में 1 करोड़ से ज्यादा FASTag Annual Pass जारी किए जा चुके हैं। इस पास के जरिए पात्र वाहन तय नेशनल हाईवे और नेशनल एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा पर बार-बार अलग से टोल भुगतान करने की जरूरत से बच सकते हैं।

    FASTag Annual Pass को 15 अगस्त 2025 को शुरू किया गया था। मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 में इसकी फीस ₹3,075 निर्धारित है।

    ₹3,075 में कितने टोल पार कर सकते हैं?

    FASTag Annual Pass की मौजूदा फीस ₹3,075 है। NHAI ने 1 अप्रैल 2026 से इसकी फीस ₹3,000 से बढ़ाकर ₹3,075 की है।

    एक बार Annual Pass लेने के बाद यह सुविधा 1 साल या 200 टोल क्रॉसिंग, जो भी पहले पूरा हो, तब तक वैध रहती है।

    उदाहरण के तौर पर अगर किसी वाहन ने 200 टोल क्रॉसिंग पूरी कर लीं, तो पास की सुविधा वहीं समाप्त हो जाएगी। वहीं अगर एक साल पूरा हो जाता है लेकिन 200 क्रॉसिंग पूरी नहीं हुई हैं, तब भी Annual Pass की वैधता खत्म हो जाएगी।

    कौन ले सकता है FASTag Annual Pass?

    Annual Pass हर वाहन के लिए उपलब्ध नहीं है। यह सुविधा मुख्य रूप से नॉन-कमर्शियल प्राइवेट कार, जीप और वैन के लिए है।

    इसके लिए वाहन पर वैध FASTag लगा होना चाहिए और वह FASTag संबंधित वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर से लिंक होना जरूरी है। Annual Pass को दूसरे वाहन में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।

    Annual Pass लेने के लिए नया FASTag जरूरी है?

    नहीं। Annual Pass के लिए अलग से नया FASTag खरीदने की जरूरत नहीं है। पात्रता पूरी होने पर मौजूदा FASTag पर ही Annual Pass एक्टिव किया जा सकता है।

    ऐसे करें Annual Pass के लिए आवेदन

    1. Rajmargyatra ऐप खोलें या NHAI की वेबसाइट पर जाएं।
    2. FASTag Annual Pass के विकल्प को चुनें।
    3. अपने वाहन और FASTag की पात्रता जांचें।
    4. पात्रता सत्यापित होने के बाद ₹3,075 का भुगतान करें।
    5. भुगतान पूरा होने के बाद Annual Pass आपके मौजूदा FASTag पर एक्टिव हो जाएगा।
    6. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सामान्य तौर पर एक्टिवेशन में करीब 2 घंटे तक लग सकते हैं।

    करीब 1,150 टोल प्लाजा पर मिलेगा फायदा

    FASTag Annual Pass करीब 1,150 नेशनल हाईवे और नेशनल एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा पर लागू है। हालांकि हर टोल प्लाजा इस पास के दायरे में नहीं आता।

    राज्य सरकारों या स्थानीय निकायों की ओर से संचालित टोल प्लाजा, पार्किंग और कुछ अन्य स्थानों पर FASTag सामान्य तरीके से काम कर सकता है और वहां लागू शुल्क अलग से देना पड़ सकता है।

    इसलिए Annual Pass लेने से पहले यह देखना जरूरी है कि आपके नियमित रूट के टोल प्लाजा इस सुविधा के दायरे में आते हैं या नहीं।

    200 ट्रिप या एक साल पूरा होने के बाद क्या होगा?

    Annual Pass की 200 टोल क्रॉसिंग पूरी होने या एक साल की अवधि समाप्त होने के बाद FASTag बंद नहीं होता। वह दोबारा सामान्य FASTag की तरह काम करने लगता है और लागू टोल शुल्क आपके FASTag से सामान्य तरीके से लिया जा सकता है।

    Rajmargyatra ऐप पर OneTag सुविधा भी शुरू

    सितंबर 2026 में NHAI ने Rajmargyatra ऐप पर OneTag सुविधा भी शुरू की है। इसके जरिए यूजर FASTag का फिजिकल स्टिकर बदले बिना उसे नए बैंक अकाउंट से लिंक कर सकते हैं और FASTag जारी करने वाला बैंक बदलने की सुविधा पा सकते हैं।

    अगर आप हाईवे पर नियमित रूप से सफर करते हैं, तो Annual Pass लेने से पहले अपने वाहन की पात्रता और जिन टोल प्लाजा से आप अक्सर गुजरते हैं, उनकी कवरेज जरूर जांच लें।

  • अमेरिकी राज्य टेनेसी’ में 200 साल बाद महिला को मिली मौत की सजा, बॉयफ्रेंड संग मिलकर की थी युवती की हत्या

    अमेरिकी राज्य टेनेसी’ में 200 साल बाद महिला को मिली मौत की सजा, बॉयफ्रेंड संग मिलकर की थी युवती की हत्या

    अमेरिकी राज्य टेनेसी’ में 200 साल बाद महिला को मिली मौत की सजा, बॉयफ्रेंड संग मिलकर की थी युवती की हत्या

    यूनाइटेड स्टेट्स के राज्य टेनेसी में 200 साल में पहली बार किसी महिला को मौत की सजा दी जा रही है। क्रिस्टा पाइक वो महिला हैं, जिन्हें बुधवार, 30 सितंबर को सजा दी जाएगी।

    क्रिस्टा पाइक ने 18 साल की उम्र में जलन में आकर अपनी एक क्लासमेट की हत्या कर दी थी। इसी गुनाह के लिए उसे मौत की सजा दी गई। क्रिस्टा पाइक मौत की सजा पाने वाली सबसे उम्र की महिला बनी।

    200 साल में पहली बार महिला को मौत की सजा

    क्रिस्टा पाइक को उसके गुनाह के लिए अब 50 साल की उम्र में, बुधवार को मौत की सजी दी जानी है। यह टेनेसी में 200 साल में किसी महिला को दी जाने वाली पहली मौत की सजा होगी।

    क्रिस्टा पाइक और उनके बॉयफ्रेंड को 1995 में नॉक्सविले जॉब कॉर्प्स में उनकी क्लासमेट, 19 साल की कोलीन स्लेमर की हत्या का दोषी ठहराया गया था।

    सरकारी वकीलों का कहना था कि पाइक को डर था कि स्लेमर उनकी रोमांटिक राइवल है, इसलिए क्रिस्टा ने उसे एक सुनसान जगह पर बुलाया और बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर स्लेमर को प्रताड़ित किया और उसकी हत्या कर दी।

    इस मामले ने बहुत ध्यान खींचा क्योंकि हत्या बहुत बेरहमी से की गई थी, इसमें शामिल लोगों की उम्र कम थी और पीड़िता के शरीर पर शैतानी प्रतीक उकेरा गया था।

    क्रिस्टा पाइक ने कबूल किया गुनाह

    क्रिस्टा पाइक ने अपना गुनाह कबूल कर लिया, लेकिन पाइक के वकील ने तर्क दिया कि उस उम्र में, बिना इलाज वाली मानसिक बीमारी और बचपन में भयानक यौन शोषण और उपेक्षा झेलने वाले किशोर द्वारा किए गए अपराध के लिए मौत की सजा सही नहीं है।

    पीड़िता स्लेमर की मां चाहती हैं कि जानलेवा इंजेक्शन (lethal injection) के जरिए सजा दी जाए। उनका कहना है कि उन्होंने पाइक की सजा पर अमल होते देखने के लिए दशकों तक इंतजार किया है।

    टेनेसी के गवर्नर बिल ली ने सोमवार को घोषणा की कि वह दया याचिका मंजूर नहीं करेंगे। पाइक के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से सज पर रोक लगाने की अपील की है।

    बचपन में क्रिस्टा पाइक का हुआ यौन शोषण

    दया याचिका में पाइक के दर्दनाक अतीत का जिक्र किया गया है पाइक के वकीलों ने कहा कि उनका बचपन बहुत ही दर्दनाक और शोषण भरा रहा था।

    असिस्टेंट फेडरल डिफेंडर स्टीफन फेरेल ने कहा कि पाइक का यौन शोषण तब से हो रहा था जब वह बहुत छोटी बच्ची थीं और 11 व 17 साल की उम्र में उसका बलात्कार हुआ था।

    स्टीफन फेरेल ने कहा कि ट्रायल के सजा वाले चरण में पाइक के वकीलों ने जूरी के सामने उनके अतीत के बारे में जरूरी जानकारी पेश नहीं की और न ही इस बात पर जोर दिया कि उनकी उम्र पर भी विचार किया जाना चाहिए।

    बाद में पाइक में बाइपोलर डिसऑर्डर और पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) की पहचान हुई। पाइक ने पुलिस को बताया कि शुरू में वह सिर्फ स्लेमर से लड़ना चाहती थीं, लेकिन गुस्से में किए गए हमले में उन्होंने उसकी हत्या कर दी।

    अपनी दया याचिका में, पाइक के वकीलों ने कहा कि उनकी बिना इलाज वाली मानसिक बीमारी और बैकग्राउंड की वजह से वह खुद को रोक नहीं पाईं।

    पाइक ने अपनी दया याचिका में शामिल एक बयान में कहा, ‘मैं 18 साल की मानसिक रूप से बीमार लड़की थी। मैंने जो किया था, उसकी गंभीरता को समझने में ही मुझे कई साल लग गए और भी ज्यादा समय यह स्वीकार करने में लगा कि मैंने कितने लोगों की जिंदगी पर असर डाला। मैंने किसी के बच्चे, बहन या दोस्त की जान ले ली। अब यह सोचकर ही मुझे घिन आती है कि मुझमें ऐसा अपराध करने की क्षमता थी।’

  • ट्रैफिक चालान नहीं भरा’ तो बिजली बिल में जुड़ सकता है बकाया? सुप्रीम कोर्ट ने सुझाए कई विकल्प.

    ट्रैफिक चालान नहीं भरा’ तो बिजली बिल में जुड़ सकता है बकाया? सुप्रीम कोर्ट ने सुझाए कई विकल्प.

    ट्रैफिक चालान नहीं भरा’ तो बिजली बिल में जुड़ सकता है बकाया? सुप्रीम कोर्ट ने सुझाए कई विकल्प.

    अगर आपका ट्रैफिक चालान कट चुका है और वह अभी तक जमा नहीं हुआ है, तो उसकी वसूली को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने लंबित ई-चालानों की रकम वसूलने के लिए कई संभावित उपायों पर चर्चा की। इनमें एक सुझाव यह भी था कि लंबे समय से बकाया ट्रैफिक चालान को बिजली बिल के बकाये से जोड़ने की संभावना तलाश की जा सकती है।

    हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अभी कोई लागू नियम या सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं है। फिलहाल ऐसा कोई प्रावधान लागू नहीं हुआ है जिसके तहत ट्रैफिक चालान अपने आप बिजली बिल में जुड़ जाए।

    करीब 45 हजार करोड़ रुपये के ई-चालान बकाया

    सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में करीब 45 हजार करोड़ रुपये के ई-चालान की वसूली लंबित है। इनमें से करीब 25 हजार करोड़ रुपये की वसूली किए जाने की जानकारी दी गई।

    कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि सिर्फ बड़ी संख्या में ई-चालान जारी करना पर्याप्त नहीं है। असली चुनौती इन चालानों के जरिए लगाए गए जुर्माने की वसूली करना है। मामले की सुनवाई जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ कर रही थी।

    बिजली बिल से जोड़ने का सुझाव क्या है?

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह संभावना तलाशने का सुझाव दिया कि लंबे समय से ट्रैफिक चालान का भुगतान नहीं करने वाले व्यक्ति के बकाये को बिजली बिल से जोड़ने की व्यवस्था बनाई जा सकती है।

    इसका उद्देश्य बकाया राशि की वसूली के लिए ऐसा व्यावहारिक तरीका तलाशना था, जिससे लोग अपने पुराने चालान का भुगतान करें।

    लेकिन फिलहाल इसे लागू नियम समझना सही नहीं होगा। अभी ट्रैफिक चालान का बकाया अपने आप बिजली बिल में जोड़ने की व्यवस्था लागू नहीं हुई है।

    चालान नहीं भरने पर दूसरे विकल्पों पर भी चर्चा

    सुप्रीम कोर्ट में लंबित ई-चालानों की वसूली के लिए कई अन्य संभावित उपायों पर भी चर्चा हुई। इनमें बकाया चालान वाले वाहनों के रजिस्ट्रेशन से जुड़े कुछ कामों पर रोक लगाने का विकल्प शामिल है।

    उदाहरण के तौर पर ऐसे वाहन के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के नवीनीकरण को रोकने, डुप्लीकेट आरसी जारी करने और वाहन का मालिकाना हक दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर करने पर रोक लगाने जैसे उपायों पर विचार किया गया।

    फिटनेस और PUC पर भी रोक का विकल्प

    बकाया चालान वाले वाहनों के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने पर रोक लगाने का सुझाव भी चर्चा में आया। इसके अलावा ऐसे वाहनों को परिवहन विभाग के Parivahan पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट करने की संभावना पर भी बात हुई।

    इसी तरह पुराने चालान का भुगतान होने तक वाहन के लिए PUC सर्टिफिकेट जारी करने पर रोक और ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण को रोकने जैसे विकल्पों पर भी चर्चा हुई।

    सड़क पर रैंडम चेकिंग का सुझाव

    कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ ऑनलाइन सिस्टम के भरोसे रहने के बजाय जमीन पर भी प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। इसके लिए वाहनों की रैंडम चेकिंग की जा सकती है।

    अगर जांच के दौरान किसी वाहन पर लंबे समय से ई-चालान बकाया मिलता है, तो परिस्थितियों के अनुसार वाहन जब्त करने जैसे कदम पर भी विचार किया जा सकता है।

    फिलहाल इन सभी बातों में अंतर समझना जरूरी है। बिजली बिल से चालान जोड़ना और

  • सुलतानपुर में सरकारी स्कूल’ के हेडमास्टर और पत्नी की हत्या, घर में खून से लथपथ मिले शव

    सुलतानपुर में सरकारी स्कूल’ के हेडमास्टर और पत्नी की हत्या, घर में खून से लथपथ मिले शव

    सुलतानपुर में सरकारी स्कूल’ के हेडमास्टर और पत्नी की हत्या, घर में खून से लथपथ मिले शव

    कादीपुर के कुंभी डडिया गांव में सोमवार रात अज्ञात बदमाशों ने 48 वर्षीय प्रधानाध्यापक मुकेश सिंह और उनकी 45 वर्षीय पत्नी विनीता सिंह की हत्या कर दी। पत्नी गांव में निजी विद्यालय का संचालन करती थी।

    मुकेश और विनीता निजी विद्यालय परिसर स्थित आवास में ही रहते थे। वह कंपोजिट विद्यालय खनुहट में तैनात थे। साथ ही मोतिगरपुर प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष भी थे।

    घटना के बाद से गांव में दहशत का माहौल है। सूचना पर पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल, अपर पुलिस अधीक्षक वृज नारायण सिंह ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है।

    पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल ने बताया कि सुबह पुलिस को दो लोगों के शव मिलने की सूचना मिली थी। तत्काल टीम ने मौके पर पहुंचकर छानबीन शुरू की। प्रथम दृष्टया गला रेतकर हत्या किए जाने की बात सामने आई है।

    मौके से पुलिस को एक कुल्हाड़ी भी मिली है। कुल्हाड़ी में भी खून लगा हुआ था। घटना का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सका है। आशंका है कि बदमाशों ने पहले विनीता सिंह की हत्या की उसके बाद जान बचाकर भाग रहे मुकेश सिंह पर वार किए।

    दोनों की घटनास्थल पर ही मौत हो चुकी थी। स्कूल परिसर में ही दोनों के लहूलुहान शव पड़े थे। विनीता का शव उनके कमरे के पास पड़ा था जबकि मुकेश का शव लगभग 150 मीटर दूर था।

    दोनों के सिर, चेहरे, पीठ और गले पर गहरे घाव थे। फिलहाल पुलिस सीसी फुटेज और अन्य माध्यमों से छानबीन कर रही है। एसपी ने बताया कि रंजिश और अन्य बिंदुओं पर मामले की जांच की जा रही है।

    शिक्षक संघ का चुनाव लड़ रहे थे मुकेश

    मुकेश स्थानीय स्तर पर शिक्षकों की राजनीति में सक्रिय थे। वह शिक्षक संघ का चुनाव लड़ रहे थे। 28 सितंबर को मतदान होना था लेकिन वह टल गया था। उनकी पत्नी विनीता भी जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ चुकी थी। इस चुनाव में उन्हें तीसरा स्थान मिला था। हालांकि, पुलिस ने फिलहाल चुनाव या घटना को लेकर अन्य कारण स्पष्ट नहीं किए हैं।

  • तरुण हत्याकांड मुख्य’ गवाह टेकचंद पर घर के बाहर हमला, केस से दूर रहने की दी धमकी.

    तरुण हत्याकांड मुख्य’ गवाह टेकचंद पर घर के बाहर हमला, केस से दूर रहने की दी धमकी.

    तरुण हत्याकांड मुख्य’ गवाह टेकचंद पर घर के बाहर हमला, केस से दूर रहने की दी धमकी.

    उत्तम नगर के हस्तसाल में होली की रात पानी के छींटा पड़ने के विवाद में लोगों के झुंड द्वारा पीट पीट कर हत्या कर दिए गए तरूण के चाचा और मुख्य गवाह टेक चंद पर सोमवार देर रात दो युवको ने हमला कर दिया।

    टेकचंद का आरोप है कि हमलावरों ने उन लोगों ने उन्हें तरुण हत्याकांड के मामले से दूर रहने की धमकी दी। हमलावर इस मामले में अदालत से रिहा किए जा चुके एक व्यक्ति का भाई है। हमले में टेकचंद के चेहरे और शरीर पर चोटें आई हैं। पुलिस उन्हें मेडिकल जांच के लिए अस्पताल लेकर गई।

    सुनवाई का हवाला देकर दी धमकी

    टेकचंद के अनुसार, रात करीब साढ़े दस बजे वह अपने घर के बाहर थे। इसी दौरान कुछ युवक वहां पहुंचे और उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावरों ने आगामी जेजे बोर्ड की सुनवाई का हवाला देते हुए केस से दूर रहने की धमकी दी।

    इस सुनवाई में तरुण की हत्या में शामिल मुख्य आरोपित की उम्र को लेकर फैसला होना है। गौरतलब है कि एसडीएम ने मुख्य आरोपित के वर्ष 2011 के उस जन्म प्रमाण पत्र को खारिज कर दिया है, जिसके आधार पर उसे नाबालिग बताया जा रहा था। इसी उम्र विवाद को लेकर जेजे बोर्ड में सुनवाई चल रही है।

    पर्याप्त सुरक्षा नहीं होने से घटना होने का आरोप

    मामले में अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता सुमित चौहान ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद तरुण के स्वजन के घर के आसपास पर्याप्त सुरक्षा नहीं होने के कारण यह घटना हुई है।

    उन्होंने स्वजन की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है और मांग की है कि न्यायालय के निर्देशानुसार सुरक्षा मुहैया कराई जाय। ताकि आगे एसी घटना न हो।

  • गैस सिलेंडर के पीछे: छिपा था 8 फीट लंबा सांप, घर में मचा अफरा-तफरी

    गैस सिलेंडर के पीछे: छिपा था 8 फीट लंबा सांप, घर में मचा अफरा-तफरी

    गैस सिलेंडर के पीछे: छिपा था 8 फीट लंबा सांप, घर में मचा अफरा-तफरी

    मध्य प्रदेश के सागर में सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक घर की किचन में करीब 8 फीट लंबा सांप घुस आया. सांप किचन में रखी गैस सिलेंडर के पीछे छिपकर बैठा था. परिवार की महिला जब किचन में पहुंची, तो अचानक उसकी नजर इतने बड़े सांप पर पड़ गई. सांप को देखते ही महिला घबरा गई और तुरंत किचन से बाहर निकल आई. उसने परिवार के अन्य सदस्यों को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद पूरे घर में अफरा-तफरी मच गई.

    किचन में गैस सिलेंडर के पीछे था सांप- मामला सागर के बहेरिया तिगड्डा के पास स्थित रुसल्ला क्षेत्र का बताया जा रहा है. घर की किचन में विशाल सांप होने की जानकारी मिलते ही परिवार के सभी सदस्य बाहर निकल आए. सांप काफी बड़ा था और गैस सिलेंडर के पीछे ऐसी जगह छिपा हुआ था, जहां उसे पकड़ना आसान नहीं था. परिवार ने खुद सांप को पकड़ने का जोखिम नहीं उठाया और तुरंत स्नेक कैचर को सूचना दी.

    सांप को किया गया रेस्क्यू- इसके बाद स्नेक कैचर बबलू पवार मौके पर पहुंचे. उन्होंने सबसे पहले किचन का निरीक्षण किया और सांप के छिपे होने की जगह को देखा. गैस सिलेंडर के पीछे मौजूद सांप को बाहर निकालने के लिए काफी सावधानी बरतनी पड़ी. सांप के अचानक बाहर आने की आशंका को देखते हुए रेस्क्यू के दौरान परिवार के लोगों को सुरक्षित दूरी पर रखा गया.

    8 फीट का था सांप- काफी मशक्कत के बाद स्नेक कैचर ने सांप को सुरक्षित पकड़ लिया. रेस्क्यू के बाद जब सांप को बाहर निकाला गया, तो उसकी लंबाई देखकर लोग हैरान रह गए. स्नेक कैचर बबलू पवार के मुताबिक, रेस्क्यू किया गया सांप घोड़ा पछाड़ प्रजाति का है और उसकी लंबाई करीब 8 फीट है. सांप को सुरक्षित पकड़ने के बाद उसे जंगल में छोड़ने की तैयारी की गई.

    बताया गया कि बारिश के मौसम में अक्सर सांप और दूसरे जीव-जंतु सुरक्षित जगह की तलाश में अपने ठिकानों से बाहर निकल आते हैं. ऐसे में घरों के आसपास या कभी-कभी घर के अंदर भी सांप पहुंच जाते हैं. माना जा रहा है कि बारिश से बचने के लिए यह सांप भी किसी रास्ते से घर की किचन में पहुंचा होगा और गैस सिलेंडर के पीछे छिप गया.

    सांप के सुरक्षित रेस्क्यू होने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली. हालांकि, किचन जैसी जगह पर करीब 8 फीट लंबे सांप के मिलने से आसपास के लोग भी हैरान रह गए.

    स्नेक कैचर की अपील- स्नेक कैचर ने लोगों से अपील की है कि बारिश के मौसम में घर के आसपास साफ-सफाई रखें और ऐसी जगहों पर विशेष ध्यान दें, जहां सांप छिप सकते हैं. अगर घर या आसपास सांप दिखाई दे, तो उसे खुद पकड़ने या मारने की कोशिश बिल्कुल न करें. तुरंत किसी प्रशिक्षित स्नेक कैचर या विशेषज्ञ को सूचना दें. इससे इंसानों के साथ-साथ सांप को भी सुरक्षित बचाया जा सकता है.

  • गोरखपुर में कोचिंग गए’ छात्र की चिलुआताल में मिली लाश, परिवार वालों ने किया हंगामा.

    गोरखपुर में कोचिंग गए’ छात्र की चिलुआताल में मिली लाश, परिवार वालों ने किया हंगामा.

    गोरखपुर में कोचिंग गए’ छात्र की चिलुआताल में मिली लाश, परिवार वालों ने किया हंगामा.

    पांच दिन से लापता 17 वर्षीय किशोर का शव सोमवार शाम शेषपुरवा गांव के पास चिलुआताल नदी में उतराता मिला। शव पुराना होने के कारण सड़-गल गया था। कपड़ों के आधार पर उसकी पहचान मोहरीपुर निवासी प्रिंस निषाद के रूप में हुई। स्वजन ने किशोर की हत्या की आशंका जताते हुए पोस्टमार्टम हाउस पर हंगामा किया। मौके पर पहुंची चिलुआताल थाना पुलिस ने स्वजन को समझाते हुए कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत कराया। पुलिस आगे की विधिक कार्रवाई कर रही है। मूल रूप से मोहम्मदपुर टोला परसौना निवासी नंदकिशोर मोहरीपुर मुख्य चौराहे के पास किराये के मकान में सपरिवार रहते है। उन्होंने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि उनका बेटा प्रिंस 23 सितंबर की सुबह आठ बजे कैंट थाना के बेतियाहाता स्थित मोमेंटम इंस्टीट्यूट में कोचिंग के लिए निकला था। देर शाम तक घर नहीं लौटने पर स्वजन ने उसकी तलाश शुरू की। रिश्तेदारों और परिचितों से पूछताछ के साथ संभावित स्थानों पर भी खोजबीन की गई, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली।

    कोचिंग संस्थान से संपर्क किया तो बताया गया कि उस दिन प्रिंस की परीक्षा थी। वह न तो संस्थान पहुंचा और न ही परीक्षा में शामिल हुआ। चिलुआताल पुलिस ने तहरीर के आधार पर गुमशुदगी दर्ज कर मोबाइल फोन की काल डिटेल और लोकेशन खंगाली। जांच में मोबाइल फोन की अंतिम लोकेशन पीपीगंज क्षेत्र में मिली। इसके बाद फोन बंद हो गया। जिससे पुलिस को आगे की जानकारी नहीं मिल सकी। पुलिस टीम आशंका में आसपास के मार्गों पर लगे सीसी कैमरों की फुटेज से किशोर की तलाश कर रही थी। इसी बीच सोमवार शाम नदी में शव मिलने की सूचना पर पीआरवी और थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकाला, कपड़ों के आधार पर स्वजन ने शव की पहचान प्रिंस के रूप में की। इसके बाद पुलिस ने विधिक कार्रवाई करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

    पीछे-पीछे स्वजन और ग्रामीण भी पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए और हत्या का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे। मौके पर मोजूद थानाध्यक्ष सूरज सिंह ने स्वजन को समझा-बुझाकर शांत कराया। थानाध्यक्ष ने बताया कि रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। सीसी कैमरे की फुटेज, मोबाइल फोन की गतिविधियों और अन्य बिंदुओं की जांच चल रही है।इंजीनियर बनना चाहता था प्रिंसपिता नंदकिशोर मेडिकल स्टोर चलाते है। उन्होंने बताया कि उनका बेटा प्रिंस हाईस्कूल टापर था, उसका सपना था कि वह एक आइआइटी इंजीनियर बने। अपने सपने को पूरा करने के लिए वह मोमेंटम में तैयारी करता था। पढ़ने में भी होनहार था। उन्हें भरोसा है कि उनका बेटा कोचिंग नहीं छोड़ सकता है। निश्चित रूप से उसकी हत्या की गई है। उन्होंने पुलिस से जांच कर कार्रवाई की मांग की है।पुलिस पर लगाए गंभीर आरोपनंदकिशोर ने पुलिस पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि उनके बेटे का शव महेसरा पुल के नीचे अपराह्न तीन बजे ही मिल गया था। लेकिन, सूचना मिलने के बाद पुलिस तीन घण्टे बाद शाम छह बजे मौके पर पहुंची और शिनाख्त शुरू की और उन्हें सूचना दी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि, अगर समय रहते पुलिस गंभीरता से उनके बेटे की तलाश की होती तो उसके बरामद होने की संभावना थी। लेकिन, पुलिस ने हिलाहवाली की।

  • 7 साल की उम्र में काम शुरू किया, अब मुनक नहर साफ कर रहे विनय, 1600 बच्चे-युवा साथ, 2500+ मूर्तियां निकालीं..

    7 साल की उम्र में काम शुरू किया, अब मुनक नहर साफ कर रहे विनय, 1600 बच्चे-युवा साथ, 2500+ मूर्तियां निकालीं..

    7 साल की उम्र में काम शुरू किया, अब मुनक नहर साफ कर रहे विनय, 1600 बच्चे-युवा साथ, 2500+ मूर्तियां निकालीं..

    विनय दास की इस मुहिम की शुरुआत करीब एक साल पहले हुई थी. शुरुआत में करीब 150 बच्चे उनके साथ जुड़े थे. आज इस अभियान से 1600 से ज्यादा बच्चे और युवा जुड़ चुके हैं. इनमें करीब 350 एक्टिव वॉलंटियर्स हैं.

    दिल्ली की मुनक नहर… एक ऐसी नहर, जो लंबे वक्त से कचरे और गंदगी की वजह से चर्चा में रही है. लेकिन इसी नहर को साफ करने की जिम्मेदारी एक युवक ने अपने हाथों में ली है. इनमें एक नाम है विनय दास का, जो पिछले कई सालों से बच्चों और युवाओं की टीम के साथ मुनक नहर की सफाई में जुटे हैं. कहीं प्लास्टिक का कचरा, कहीं पूजा सामग्री, तो कहीं नहर के किनारे जमा मलबा. इसी गंदगी के बीच पहुंचती है विनय दास की टीम… हाथों में दस्ताने, कंधों पर कचरे से भरे बोरे और मकसद सिर्फ एक…मुनक नहर को साफ करना.

    मूर्तियों के विसर्जन ने किया परेशान विनय बताते हैं कि इस मुहिम की शुरुआत तब हुई, जब उन्होंने बड़ी संख्या में देवी-देवताओं की मूर्तियों को मुनक नहर में विसर्जित होते देखा. यह देखकर उनका मन काफी परेशान हुआ. इसके बाद उन्होंने नहर की सफाई का बीड़ा उठाने का फैसला किया और यहीं से इस मिशन की शुरुआत हुई. सफाई का यह काम सिर्फ किनारे से कचरा उठाने तक सीमित नहीं है. टीम नहर के आसपास जमा प्लास्टिक, पूजा सामग्री, मलबे और दूसरे कचरे को निकालती है.

    एक साल में 1600 से ज्यादा बच्चे-युवा जुड़े विनय दास की इस मुहिम की शुरुआत करीब एक साल पहले हुई थी. शुरुआत में करीब 150 बच्चे उनके साथ जुड़े थे. आज इस अभियान से 1600 से ज्यादा बच्चे और युवा जुड़ चुके हैं. इनमें करीब 350 एक्टिव वॉलंटियर्स हैं. ये वॉलंटियर्स अलग-अलग ग्रुप में काम करते हैं और मुनक नहर के किनारे सफाई अभियान चलाते हैं. अब तक टीम करीब 3 किलोमीटर के हिस्से में सफाई अभियान चला चुकी है. विनय की टीम अब तक मुनक नहर से 2500 से ज्यादा मूर्तियां निकाल चुकी है. हाल ही में गणेश विसर्जन के बाद भी विनय और उनकी टीम ने मुनक नहर से कई मूर्तियां निकालीं.

    कचरे में मिला 30-35 किलो का शिवलिंग मुनक नहर की सफाई के दौरान टीम को कई बार ऐसी चीजें भी मिलीं, जिन्हें देखकर लोग हैरान रह गए. हाल ही के एक अभियान में कचरे के बीच करीब 30 से 35 किलो का शिवलिंग मिला. इसके अलावा सैकड़ों धार्मिक मूर्तियां और पूजा सामग्री भी नहर से निकाली गई. टीम इन चीजों को नहर से बाहर निकालकर आसपास के इलाके की सफाई करती है.

    विनय खुद भी एक बेहद साधारण परिवार से आते हैं. उनके पिता एक प्यून थे. विनय का बचपन जेजे कॉलोनी में बीता है. विनय बताते हैं कि पढ़ाई करने के लिए उन्होंने 7 साल की उम्र से ही काम करना शुरू कर दिया था. इसके बावजूद उन्होंने नहर की सफाई के इस अभियान को अपने जीवन का मिशन बना लिया.

    कांच, सुई और केमिकल के बीच होती है सफाई मुनक नहर की सफाई का काम जितना आसान दिखाई देता है, असल में उतना ही जोखिम भरा है. कचरे के बीच कांच, सुई और दूसरे खतरनाक सामान तक मिल जाते हैं. कई बार सफाई के दौरान विनय और उनकी टीम के सदस्यों को चोटें भी लगी हैं. एक बार कचरे से भरे बोरे से निकले केमिकल की वजह से विनय के हाथों में छाले तक पड़ गए थे. इसके बावजूद विनय की मुहिम रुकी नहीं. वह लगातार बच्चों और युवाओं के साथ मिलकर नहर की सफाई में जुटे हुए हैं.