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  • दिल्ली के पहाड़गंज में पुलिस’ और बदमाशों के बीच मुठभेड़, विकास कालिया गैंग के 2 बदमाशों के पैर में लगी गोली

    दिल्ली के पहाड़गंज में पुलिस’ और बदमाशों के बीच मुठभेड़, विकास कालिया गैंग के 2 बदमाशों के पैर में लगी गोली

    दिल्ली के पहाड़गंज में पुलिस’ और बदमाशों के बीच मुठभेड़, विकास कालिया गैंग के 2 बदमाशों के पैर में लगी गोली

    दिल्ली के पहाड़गंज इलाके में पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ का मामला सामने आया है. सेंट्रल दिल्ली पुलिस की स्पेशल स्टाफ टीम ने कार्रवाई करते हुए विकास कालिया गैंग के दो बदमाशों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपियों के साथ पुलिस की फायरिंग के दौरान मुठभेड़ हुई. इस दौरान दोनों बदमाशों के पैरों में गोली लगी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.

    पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए दोनों बदमाशों की पहचान मुकेश और आकाश के तौर पर हुई है. दोनों को विकास कालिया गैंग से जुड़ा बताया जा रहा है. विकास कालिया थाना सदर बाजार, नॉर्थ जिले का BC यानी Bad Character बताया गया है. सेंट्रल जिले की स्पेशल स्टाफ टीम ने दोनों आरोपियों को मुठभेड़ के बाद अपने कब्जे में लिया.

    पुलिस के अनुसार, मुकेश और आकाश की तलाश सितंबर के मध्य में हुई फायरिंग की एक घटना के सिलसिले में थी. यह फायरिंग सदर बाजार-नबी करीम इलाके में निकाली गई शोभा यात्रा के दौरान हुई थी. इस मामले में दोनों आरोपी पुलिस की वांटेड लिस्ट में थे और उनकी तलाश की जा रही थी. इसी कार्रवाई के तहत स्पेशल स्टाफ की टीम ने दोनों को पकड़ने के लिए अभियान चलाया था.

    बताया गया है कि पुलिस और आरोपियों के बीच हुई मुठभेड़ में दोनों बदमाशों के पैरों में गोली लगी है. घायल होने के बाद दोनों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस अब दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है और उनके आपराधिक रिकॉर्ड की भी जानकारी जुटाई जा रही है. मामले में आगे की कार्रवाई जारी है और पुलिस की ओर से विस्तृत जानकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में साझा की जाएगी.

    फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस की जांच जारी है. अधिकारियों के मुताबिक, मुठभेड़ और गिरफ्तारी से जुड़े अन्य विवरण प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सामने आएंगे. पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शोभा यात्रा के दौरान हुई फायरिंग में दोनों आरोपियों की क्या भूमिका थी. जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी.

  • अरे ये क्या चालान’ से बचने के लिए किया गजब का जुगाड़, पुलिसवाला भी रह गया हैरान

    अरे ये क्या चालान’ से बचने के लिए किया गजब का जुगाड़, पुलिसवाला भी रह गया हैरान

    अरे ये क्या! चालान से बचने के लिए किया गजब का जुगाड़, पुलिसवाला भी रह गया हैरान

    ट्रैफिक के बीच बाइक पर तीन लोग जा रहे थे, तभी सामने पुलिसकर्मी नजर आ गया. इसके बाद ऐसा जुगाड़ हुआ कि बाइक पर अचानक सिर्फ दो लोग रह गए. लगा कि चालान से बचने की तरकीब काम कर गई, लेकिन कॉन्स्टेबल की नजरों से ये ‘जादू’ नहीं बच पाया. उसने तुरंत पूरी कहानी समझ ली और फिर जो अंदाज अपनाया, उसे देखकर आप भी मुस्कुरा देंगे.

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    अरे ये क्या! चालान से बचने के लिए किया गजब का जुगाड़, पुलिसवाला भी हुआ हैरान

    सोचिए, सड़क पर ट्रैफिक के बीच आप बाइक पर जा रहे हों और अचानक सामने ट्रैफिक पुलिस वाला नजर आ जाए… दिल की धड़कन तो बढ़ेगी ही! लेकिन इस वीडियो में पुलिसकर्मी को देखते ही एक शख्स ने ऐसा ‘जादू’ किया कि बाइक पर तीन लोग से सीधे दो रह गए. उसे लगा कि शायद पुलिस की नजर से बच जाएगा, लेकिन कॉन्स्टेबल ने उसकी पूरी चाल पकड़ ली. इसके बाद जो हुआ, वो देखने लायक है.

    दरअसल, सड़क पर काफी ट्रैफिक था और इसी बीच ट्रैफिक पुलिस कॉन्स्टेबल की नजर एक बाइक पर पड़ी. बाइक पर तीन लोग सवार थे. कॉन्स्टेबल जैसे ही उनकी तरफ बढ़ा, तभी कुछ ऐसा हुआ कि बाइक पर सवार लोगों की गिनती अचानक बदल गई. आखिर एक शख्स कहां गायब हो गया? यहीं से शुरू होता है पूरा मजेदार खेल.

    ‘तीन से दो कैसे हो गए?’

    पुलिसकर्मी के पास पहुंचते ही बाइक पर बैठा एक व्यक्ति तुरंत नीचे उतर गया और बिना कुछ कहे ऐसे आगे बढ़ने लगा, जैसे उसका बाइक से कोई लेना-देना ही न हो. उसे शायद लगा कि इस तरह पुलिस की नजरों से बच जाएगा. लेकिन कॉन्स्टेबल की नजरें पहले ही उसकी चाल पकड़ चुकी थीं. पुलिसकर्मी ने उसे जाते हुए देखा तो तुरंत रोक लिया. फिर मजेदार अंदाज में पूछा, ‘अरे कहां जा रहे हो… तीन से दो कैसे हो गए?’ इसके बाद वह हंसते हुए कहता है कि अभी तो बाइक पर तीन लोग थे, अचानक दो कैसे रह गए.

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    बस, यही वो पल था जिसने पूरे वीडियो को मजेदार बना दिया. शख्स ने पुलिस को देखते ही खुद को बाइक से अलग करने की कोशिश तो की, लेकिन कॉन्स्टेबल ने उसकी ‘जादू की ट्रिक’ पकड़ ली. इसके बाद मामला सिर्फ चालान तक नहीं पहुंचा. कॉन्स्टेबल ने शख्स को समझाया कि बाइक पर तीन लोगों के बैठने के बजाय वह ऑटो से जाए. यानी पुलिस से बचने के लिए की गई छोटी-सी तरकीब आखिरकार काम नहीं आई.

    चालान नहीं, हेलमेट पहनाकर दिया सेफ्टी का सबक

    लेकिन वीडियो में इसके बाद जो हुआ, उसने लोगों का ध्यान और ज्यादा खींच लिया. कॉन्स्टेबल ने बाइक चालक को सही तरीके से हेलमेट पहनाया और उसे सुरक्षित सफर की अहमियत भी समझाई. यानी मजाक-मजाक में नियम तोड़ने की कोशिश पकड़ने वाला पुलिसकर्मी आखिर में सड़क सुरक्षा का संदेश देता नजर आया. यह वीडियो ट्रैफिक पुलिस कॉन्स्टेबल नितिन के इंस्टाग्राम अकाउंट @thenitinmavi से शेयर किया गया था. उन्होंने वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा, ‘जादू हो गया 3 से 2… जादू मत करो सुरक्षित चलो

     

     

  • संगरूर के बडरुखां गुरुद्वारे’ में आधी रात को हमला, 4 नकाबपोशों ने सेवादार को मारी गोली, वारदात CCTV में कैद

    संगरूर के बडरुखां गुरुद्वारे’ में आधी रात को हमला, 4 नकाबपोशों ने सेवादार को मारी गोली, वारदात CCTV में कैद

    संगरूर के बडरुखां गुरुद्वारे’ में आधी रात को हमला, 4 नकाबपोशों ने सेवादार को मारी गोली, वारदात CCTV में कैद

    पंजाब के संगरूर जिले के बडरुखां गांव में स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारे में आधी रात चार नकाबपोश हमलावरों के घुसने का मामला सामने आया है. आरोप है कि हमलावरों ने पहले लंगर के कमरे में सो रहे सेवादार अजीब सिंह को दबोच लिया और उसका गला दबाने की कोशिश की. अजीब सिंह के शोर मचाने पर दूसरे कमरे से लंगर सेवादार जसवंत सिंह बाहर आए. इसी दौरान हमलावरों ने जसवंत सिंह पर गोली चला दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए.

    संगरूर के नजदीक बडरुखां गांव में महाराजा रणजीत सिंह की याद में बनाए गए गुरुद्वारे में यह घटना देर रात करीब एक बजे हुई. बडरुखां को इतिहास में महाराजा रणजीत सिंह के जन्मस्थान के तौर पर भी बताया जाता है और उनकी याद में यहां गुरुद्वारा बनाया गया है. जानकारी के मुताबिक, करीब चार अज्ञात नकाबपोश गुरुद्वारे की हद में दाखिल हुए थे. बताया जा रहा है कि हमलावर एक गाड़ी में सवार होकर वहां पहुंचे थे.

    गुरुद्वारे में दाखिल होने के बाद हमलावर लंगर के कमरे में पहुंचे, जहां लंगरी अजीब सिंह सो रहे थे. आरोप है कि नकाबपोशों ने अजीब सिंह को चारपाई पर ही दबोच लिया और उसका गला दबाने की कोशिश की. अजीब सिंह ने खुद को हमलावरों के चंगुल से छुड़ाने की कोशिश की और शोर मचाना शुरू कर दिया. उसकी आवाज सुनकर गुरुद्वारे के दूसरे कमरे में मौजूद लंगर सेवादार जसवंत सिंह बाहर आ गए.

    अजीब सिंह के शोर के बाद जसवंत सिंह बाहर आए तो आरोप है कि हमलावरों ने उन पर गोली चला दी. गोली लगने से जसवंत सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए. घटना के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए. घायल जसवंत सिंह को गांव के लोगों की मदद से इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया. घटना के बाद पूरे गांव में दहशत और सहम का माहौल है.

    इस घटना से जुड़ी CCTV तस्वीरें और फुटेज भी सामने आई हैं. एक फुटेज में एक व्यक्ति हाथ में पिस्तौल लिए गुरुद्वारे की हद में दाखिल होता दिखाई दे रहा है. दूसरी फुटेज में कुछ नकाबपोश लोग चारपाई पर लेटे अजीब सिंह को दबोचते नजर आते हैं. फुटेज में अजीब सिंह के चीखने की आवाजें भी सुनाई देती हैं. इसके बाद दूसरे कमरे से जसवंत सिंह बाहर आते हैं और इसी दौरान हमलावर उन पर गोली चलाकर फरार हो जाते हैं.

    पीड़ित अजीब सिंह के मुताबिक, करीब रात एक बजे कुछ अज्ञात लोग उसके पास आए और उसका गला दबाने लगे. उसने हमलावरों से खुद को छुड़ाने की कोशिश की और शोर मचाया. इसी दौरान अंदर मौजूद जसवंत सिंह बाहर आए. अजीब सिंह के मुताबिक, इसके बाद हमलावरों ने जसवंत सिंह पर गोली चला दी. घटना के बाद आसपास के लोगों को इसकी जानकारी दी गई.

    गांव निवासी मेजर सिंह ने बताया कि अजीब सिंह हमलावरों के चंगुल से निकलकर उनके पास पहुंचा और पूरी घटना की जानकारी दी. इसके बाद उन्होंने गांव के लोगों को मौके पर बुलाया और घायल जसवंत सिंह को अस्पताल पहुंचाया. मेजर सिंह ने आशंका जताई कि हमलावर चोरी या गुरुद्वारे में बेअदबी की नीयत से दाखिल हुए हो सकते हैं. हालांकि हमलावरों के गुरुद्वारे में घुसने का वास्तविक मकसद अभी स्पष्ट नहीं है.

    गांव के सरपंच रणदीप सिंह मिंटू ने बताया कि उन्हें रात करीब एक बजे के बाद घटना की जानकारी मिली. इसके बाद गुरुद्वारे में अनाउंसमेंट करवाई गई, जिसके बाद धीरे-धीरे संगत मौके पर पहुंची. गांव के पास ही पुलिस चौकी मौजूद है और सूचना मिलने के बाद चौकी इंचार्ज भी मौके पर पहुंचे. घटना के बाद पुलिस ने मामले की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है और CCTV फुटेज भी जांच का अहम हिस्सा है.

    सरपंच रणदीप सिंह मिंटू के मुताबिक, गुरुद्वारे के ग्रंथी सिंह या वहां रहने वाले किसी व्यक्ति की किसी के साथ कोई पुरानी रंजिश नहीं है. उन्होंने बताया कि हमलावर करीब चार की संख्या में थे और एक गाड़ी में सवार होकर आए थे. ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर हमलावर आधी रात गुरुद्वारे में किस मकसद से दाखिल हुए थे. फिलहाल इस बारे में कोई निश्चित जानकारी सामने नहीं आई है.

    सरपंच ने संगरूर जिले में पिछले करीब दो महीनों के दौरान लगातार सामने आ रही घटनाओं को लेकर भी चिंता जताई. उनका कहना है कि करीब हर 15 दिन में कोई न कोई बड़ी घटना सामने आ रही है. उन्होंने घटना के पीछे किसी साजिश या मकसद की आशंका जताते हुए चुनाव के दौरान ऐसी घटनाओं का जिक्र किया और कहा कि चुनाव खत्म होने के बाद माहौल शांत होने की उम्मीद है.

    साथ ही उन्होंने कहा कि गांव में आज से पहरा शुरू किया जाएगा और ग्रामीण अपने लाइसेंसी हथियारों के साथ निगरानी करेंगे, ताकि किसी संदिग्ध व्यक्ति को गांव में दाखिल होने से रोका जा सके.

  • कॉर्पोरेट लॉयर की नौकरी. छोड़ी, लद्दाख के गांव में रहने लगीं नयनतारा, बोलीं अब समझ आई पानी की असली कीमत.

    कॉर्पोरेट लॉयर की नौकरी. छोड़ी, लद्दाख के गांव में रहने लगीं नयनतारा, बोलीं अब समझ आई पानी की असली कीमत.

    कॉर्पोरेट लॉयर की नौकरी. छोड़ी, लद्दाख के गांव में रहने लगीं नयनतारा, बोलीं अब समझ आई पानी की असली कीमत.

    शहर की तेज रफ्तार जिंदगी से दूर पहाड़ों में कुछ दिन बिताना कई लोगों का सपना होता है। छुट्टियों में लोग पहाड़ों की ठंडी हवा, शांत वातावरण और खूबसूरत नजारों का आनंद लेने पहुंचते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग कुछ दिन बाद वापस अपनी पुरानी जिंदगी में लौट आते हैं।

    नयनतारा चौहान की कहानी इससे अलग है। कॉर्पोरेट लॉयर की नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने मनाली में आउटडोर शेफ के तौर पर काम करना शुरू किया और अब वह लद्दाख के एक गांव में करीब दो महीने से रह रही हैं। सोशल मीडिया पर साझा किए गए उनके अनुभवों ने लोगों को लद्दाख की जिंदगी का एक ऐसा पहलू दिखाया है, जो आमतौर पर पर्यटकों को नजर नहीं आता।

    ड्राई टॉयलेट का इस्तेमाल कर समझी पानी की कीमत

    नयनतारा के मुताबिक, लद्दाख के गांव में रहना उनके लिए सिर्फ खूबसूरत पहाड़ों के बीच समय बिताना नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की कई ऐसी चीजों से सामना भी है जो शहरों में रहने वालों के लिए सामान्य नहीं हैं।

    उन्होंने बताया कि गांव में ड्राई टॉयलेट का इस्तेमाल किया जाता है। शुरुआत में उन्हें इसे अपनाने में कुछ परेशानी हुई और करीब एक सप्ताह में वह इसकी आदत डाल पाईं।

    यहां सामान्य फ्लश वाले टॉयलेट की तरह बड़ी मात्रा में पानी इस्तेमाल नहीं होता। पानी की जगह पेपर और मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता है। नयनतारा का कहना है कि इस अनुभव ने उन्हें शहरों में रोजाना इस्तेमाल होने वाले पानी की अहमियत को नए तरीके से समझने का मौका दिया।

    उनके मुताबिक, शहर में एक बार फ्लश करने में कितना पानी खर्च हो जाता है, इसका एहसास लद्दाख जैसे इलाके में रहने के बाद ज्यादा स्पष्ट हुआ।

    नदी पर निर्भर है पानी की सप्लाई

    लद्दाख के साबु गांव में पानी की व्यवस्था भी शहरों जैसी आसान नहीं है। नयनतारा ने बताया कि गांव की पानी की सप्लाई पास से गुजरने वाली नदी के पानी पर निर्भर करती है।

    नदी में पानी का बहाव मौसम और ग्लेशियर से आने वाले पानी के स्तर के साथ बदलता रहता है। जब पानी का बहाव पर्याप्त होता है तो घरों तक पानी पहुंचाना अपेक्षाकृत आसान रहता है। लेकिन जब नदी का प्रवाह कम हो जाता है, तो ग्रामीण मिलकर पानी को घरों तक पहुंचाने की व्यवस्था करते हैं।

    इसके लिए पानी का रास्ता तैयार करने के साथ रबड़ की पाइप और मोटर का इस्तेमाल किया जाता है। यह व्यवस्था नयनतारा के लिए शहर की लगातार उपलब्ध पानी की सप्लाई से बिल्कुल अलग अनुभव है।

    शाम की चाय और ताजी सब्जियों में मिलता है सुकून

    नयनतारा के अनुभवों में गांव की छोटी-छोटी चीजें भी खास जगह रखती हैं। उनका कहना है कि शाम के समय ठंडी हवा के बीच बैठकर चाय पीने का अनुभव अलग ही सुकून देता है।

    यहां शहरों की तरह हर समय पिज्जा, बर्गर या दूसरी चीजें आसानी से उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन ताजी सब्जियां मिल जाती हैं। खानपान साधारण है और जीवनशैली भी अपेक्षाकृत सीधी-सादी है।

    गांव के लोग एक-दूसरे से मिलते हैं, हालचाल पूछते हैं, साथ बैठकर बातें करते हैं और रोजमर्रा की जिंदगी में एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। नयनतारा को लोगों के बीच यह जुड़ाव खासा पसंद आया।

    खूबसूरत नजारों से आगे की कहानी

    लद्दाख को आमतौर पर ऊंचे पहाड़ों, बर्फीले इलाकों और खूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों के लिए जाना जाता है। लेकिन नयनतारा ने अपने सोशल मीडिया वीडियो में पर्यटन से अलग वहां की रोजमर्रा की जिंदगी दिखाने की कोशिश की है।

    उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर लद्दाख में रहने के अनुभव से जुड़े करीब 28 वीडियो साझा किए हैं। इनमें गांव का जीवन, पानी की व्यवस्था, रहने की परिस्थितियां, खानपान और स्थानीय लोगों की दिनचर्या जैसे पहलू दिखाई देते हैं।

    उनके वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कुछ लोगों ने उनके अनुभव को ऐसी जिंदगी से जोड़ा है, जिसे वे खुद जीना चाहते हैं, जबकि कुछ ने कहा कि किसी जगह को समझने के लिए उसकी खूबसूरती के साथ वहां की चुनौतियों को देखना भी जरूरी है।

    अब शहर लौटने का नहीं कर रहा मन

    करीब दो महीने गांव में रहने के बाद नयनतारा को यहां की सादगी और जीवनशैली पसंद आने लगी है। शहर की सुविधाओं से दूर रहने के बावजूद उन्हें ग्रामीण जीवन का आपसी जुड़ाव और प्रकृति के करीब रहने का अनुभव आकर्षित कर रहा है।

    उनकी कहानी इस बात की ओर भी ध्यान खींचती है कि जिन सुविधाओं को शहरों में हम बिल्कुल सामान्य मानते हैं, उनकी अहमियत उन जगहों पर जाकर समझ आती है जहां पानी और दूसरी बुनियादी चीजों के लिए भी लोगों को प्रकृति और सामूहिक प्रयास पर निर्भर रहना पड़ता है।

    नयनतारा के लिए लद्दाख का यह सफर सिर्फ एक यात्रा नहीं रह गया है। करीब दो महीने यहां बिताने के बाद उनका मन अब वापस शहर लौटने के बजाय इसी सादगी भरी जिंदगी में बसने का करने लगा है।

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  • गोरखपुर चौरी चौरा मर्डर’सुसाइड मिस्ट्री: 15 साल के शिवा की हत्या और श्याम की खुदकुशी! आखिर खंडहर में ऐसा क्या हुआ था?

    गोरखपुर चौरी चौरा मर्डर’सुसाइड मिस्ट्री: 15 साल के शिवा की हत्या और श्याम की खुदकुशी! आखिर खंडहर में ऐसा क्या हुआ था?

    गोरखपुर चौरी चौरा मर्डर’सुसाइड मिस्ट्री: 15 साल के शिवा की हत्या और श्याम की खुदकुशी! आखिर खंडहर में ऐसा क्या हुआ था?

    गोरखपुर के चौरीचौरा थानाक्षेत्र में दोस्त की हत्या और फिर आत्महत्या का सनसनीखेज मामला पुलिस के लिए चुनौती बन गया है. पुलिस को शक है कि चौरी टोला भरटोलिया के रहने वाले 16 वर्षीय सातवीं के छात्र श्याम राजभर ने पहले गला घोंटकर अपने 15 वर्ष के दोस्त शिवा की हत्या कर दी. उसके बाद खुद ट्रेन से कटकर आत्महत्या कर ली. दोनों एक ही स्कूल और क्लास में पढ़ते थे. पुलिस हत्या और आत्महत्या की वजह तलाशने में जुटी है.

    पुलिस की जांच में सामने आया है कि 23 सितंबर को दोनों एक साथ घर से निकले थे. 24 सितंबर को रेलवे ट्रैक पर श्याम राजभर (17) का शव मिला. अगले दिन 25 सितंबर को जलकल परिसर के एक खंडहरनुमा कमरे से दूसरे दोस्त शिवा (14) का सड़ा हुआ शव मिला था. सीसीटीवी मैं दोनों दोस्त साथ जलकल विभाग के कमरे में जाते हुए दिखाई दे रहे हैं. हालांकि शिवा कमरे से बाहर नहीं आता है और श्याम राजभर कमरे से अकेले बाहर आते हुए सीसीटीवी में कैद हुआ है. पुलिस का दावा है कि श्याम राजभर ने पहले अपने दोस्त शिवा की गला दबाकर हत्या की और उसके बाद ट्रेन के आगे कूद कर आत्महत्या कर ली.

    गोरखपुर जिले के चौरीचौरा में शिवा और श्याम 7वीं क्लास में साथ में पढ़ते थे. 23 सितंबर को दोपहर करीब एक बजे शिवा और श्याम चकदेड्या गांव स्थित जलकल परिसर में पहुंचे थे. दोनों के परिसर में प्रवेश करने की तस्वीर सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है. करीब सवा घंटे बाद श्याम अकेले बाहर निकलता दिखाई दिया. वह कपड़े साफ करते हुए परिसर से निकला और घर चला गया. अगले दिन 24 सितंबर को उसका शव सतहवा के पास रेलवे ट्रैक पर मिला. पुलिस के मुताबिक उसकी मौत ट्रेन की चपेट में आने से हुई.

    जानिए पूरी कहानी

    25 सितंबर को जलकल परिसर के कमरे से शिवा का शव मिला था. शव से दुर्गंध उठने पर आस-पास के लोगों ने पुलिस को सूचना दी थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई. इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की कड़ियां जोड़ीं तो घटना में श्याम की भूमिका सामने आई. अब जांच का केंद्र हत्या की वजह है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों किशोरों के बीच ऐसा क्या हुआ था कि दोस्ती का रिश्ता अचानक हत्या तक पहुंच गया. घटना से पहले दोनों की गतिविधियों और आपसी संबंधों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है.

    शिवा के परिजनों का कहना है कि दोनों अच्छे दोस्त थे. उन्हें भी समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर श्याम राजभर ने शिव की हत्या क्यों की. हत्या की कोई वजह तो होनी चाहिए. पुलिस गहनता से इस मामले की जांच करे. पुलिस भी परिजनों और दोस्तों से पूछताछ कर हत्या और सुसाइड की वजह पता कर रही है.

    शिव की मां मीना ने बताया कि मेरे बेटे को साजिश करके मारा गया है. मेरे लड़के के साथ क्या हुआ, किसने मारा है, इसकी गहनता से जांच होनी चाहिए. शिवा के पिता कमलेश राजभर पेंट पालिश का काम करते हैं. उन्होंने किसी से दुश्मनी की बात से भी इन्कार किया है.

    श्याम के पिता रविंद्र राजभर ने बताया कि एक आदमी अकेले किसी को नहीं मार सकता है. मेरे बेटे की लाश रेलवे ट्रैक पर मिली है. बताया जा रहा है कि उसने शिवा का गला घोटकर हत्या किया है. लेकिन यकीन नहीं हो रहा है. दोनों हमेशा साथ ही घूमते थे, फिर ऐसा कैसे हो सकता है.

    इस संबंध में एसपी नॉर्थ राजेश घुनावत ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से श्याम द्वारा शिवा की गला घोंटकर हत्या किए जाने की बात सामने आई है. अगले दिन श्याम की इंटरसिटी ट्रेन से कटकर मौत हुई. हत्या की वजह अभी स्पष्ट नहीं है. परिजनों से पूछताछ कर घटना के कारण का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है.

  • पार्सल के डिब्बे ज्यादातर’ भूरे रंग के ही क्यों होते हैं, जानिए इसके पीछे की वजह.

    पार्सल के डिब्बे ज्यादातर’ भूरे रंग के ही क्यों होते हैं, जानिए इसके पीछे की वजह.

    पार्सल के डिब्बे ज्यादातर’ भूरे रंग के ही क्यों होते हैं, जानिए इसके पीछे की वजह.

    ऑनलाइन शॉपिंग का दौर है। घर के दरवाजे पर जब भी कोई पार्सल पहुंचता है, तो सबसे पहले नजर अक्सर एक भूरे रंग के डिब्बे पर जाती है। कपड़े हों, जूते, किताबें या कोई इलेक्ट्रॉनिक सामान, सामान्य शिपिंग पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाला बॉक्स अक्सर भूरे रंग का ही दिखाई देता है।

    लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पार्सल के डिब्बे ज्यादातर इसी रंग के क्यों होते हैं? इसके पीछे सिर्फ कोई डिजाइन या परंपरा नहीं, बल्कि पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले कागज की प्रकृति और लागत से जुड़ी वजहें हैं।

    क्राफ्ट पेपर से बनते हैं ज्यादातर बॉक्स

    पार्सल बॉक्स बनाने के लिए अक्सर क्राफ्ट पेपर और उससे तैयार किए गए कोरुगेटेड फाइबरबोर्ड का इस्तेमाल किया जाता है। क्राफ्ट पेपर का प्राकृतिक रंग आमतौर पर भूरा या टैन होता है।

    इसे सफेद या दूसरे रंगों में बदलने के लिए अतिरिक्त प्रोसेसिंग और ब्लीचिंग की जरूरत पड़ सकती है। सामान्य शिपिंग बॉक्स में ऐसा करना जरूरी नहीं होता, इसलिए प्राकृतिक भूरे रंग को ही बरकरार रखा जाता है।

    मजबूत होने के साथ किफायती भी

    पार्सल की पैकेजिंग का सबसे जरूरी काम सामान को सुरक्षित रखना है। डिब्बे को रास्ते में लगने वाले झटकों, दबाव और सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के दौरान होने वाली सामान्य टूट-फूट से बचाने में मदद करनी होती है।

    कोरुगेटेड फाइबरबोर्ड की कई परतों से बने बॉक्स इस काम के लिए उपयोगी होते हैं। साथ ही, सामान्य भूरे बॉक्स पर अतिरिक्त रंग या सजावट की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे बड़े पैमाने पर पैकेजिंग की लागत को नियंत्रित रखना आसान होता है।

    ऑनलाइन शॉपिंग में क्यों बढ़ गया इस्तेमाल?

    ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों को हर दिन बड़ी संख्या में सामान पैक करके भेजना पड़ता है। ऐसे में पैकेजिंग की कीमत भी कारोबार की लागत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाती है।

    सादा भूरा बॉक्स इस मामले में व्यावहारिक विकल्प होता है। यह अपेक्षाकृत मजबूत होता है, आसानी से उपलब्ध होता है और उस पर कंपनी का नाम, पता, बारकोड या दूसरी जरूरी जानकारी भी प्रिंट की जा सकती है।

    क्या हर पार्सल बॉक्स भूरा ही होता है?

    नहीं। यह कहना सही नहीं होगा कि दुनिया में हर पार्सल सिर्फ भूरे रंग के डिब्बे में ही आता है।

    कई कंपनियां अपनी ब्रांड पहचान के लिए रंगीन, प्रिंटेड या आकर्षक डिजाइन वाले बॉक्स का इस्तेमाल करती हैं। खासकर प्रीमियम और ब्रांडेड उत्पादों की पैकेजिंग में अलग-अलग रंग और डिजाइन देखने को मिलते हैं।

    फिर भी सामान्य शिपिंग और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाली पैकेजिंग में भूरा रंग सबसे आम नजर आता है।

    अगली बार पार्सल आए तो ध्यान दीजिएगा

    अब अगली बार आपके घर कोई ऑनलाइन पार्सल पहुंचे और उसके हाथ में आते ही आपको वही परिचित भूरा डिब्बा दिखाई दे, तो समझ जाइए कि इसका रंग महज संयोग नहीं है। इसके पीछे क्राफ्ट पेपर का प्राकृतिक रंग, पैकेजिंग की मजबूती, लागत और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की सुविधा जैसी कई व्यावहारिक वजहें जुड़ी हैं।

  • जमशेदपुर में बैंक डकैती’ से हड़कंप, 23 किलो सोना और 42 लाख नकद लूटकर फरार हुए बदमाश.

    जमशेदपुर में बैंक डकैती’ से हड़कंप, 23 किलो सोना और 42 लाख नकद लूटकर फरार हुए बदमाश.

    जमशेदपुर में बैंक डकैती’ से हड़कंप, 23 किलो सोना और 42 लाख नकद लूटकर फरार हुए बदमाश.

    झारखंड के जमशेदपुर में बैंक डकैती की बड़ी वारदात से हड़कंप मच गया। गोलमुरी इलाके में स्थित कैनरा बैंक की शाखा में हथियारबंद बदमाशों ने धावा बोलकर करीब 23 किलोग्राम सोना और 42 लाख रुपये नकद लूट लिए। लूटे गए सोने की कीमत करीब 33 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।

    वारदात के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। घटना से जुड़े CCTV फुटेज भी सामने आए हैं, जिनमें कथित तौर पर बदमाश बैंक के अंदर और आसपास नजर आ रहे हैं।

    हथियारों के बल पर बैंक में घुसे बदमाश

    जानकारी के मुताबिक, पांच हथियारबंद लुटेरे बैंक की शाखा में दाखिल हुए। बदमाशों ने बैंक कर्मचारियों को हथियारों के बल पर अपने कब्जे में लिया और इसके बाद लॉकर तथा अन्य जगहों पर रखे सोने और नकदी को निशाना बनाया।

    बताया जा रहा है कि पूरी वारदात करीब 1 घंटे 8 मिनट में अंजाम दी गई। इसके बाद आरोपी लूट का सामान लेकर मौके से फरार हो गए।

    23 किलो सोना और 42 लाख रुपये नकद ले गए

    डकैती के दौरान बदमाश करीब 23 किलोग्राम सोना और 42 लाख रुपये नकद ले गए। सोने की अनुमानित कीमत 33 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है। नकदी और सोने को मिलाकर वारदात में करोड़ों रुपये की संपत्ति लूटी गई है।

    इतनी बड़ी रकम और सोने की लूट के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के सामने आरोपियों तक पहुंचना बड़ी चुनौती बन गया है।

    CCTV फुटेज में नजर आए संदिग्ध

    पुलिस को जांच के दौरान बैंक और आसपास लगे CCTV कैमरों से महत्वपूर्ण फुटेज मिले हैं। इनमें कथित तौर पर लूट में शामिल बदमाश दिखाई दे रहे हैं।

    पुलिस ने इन फुटेज और तस्वीरों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने की कोशिश शुरू कर दी है। लोगों से भी संदिग्धों के बारे में जानकारी मिलने पर पुलिस को सूचना देने की अपील की गई है।

    चार दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली

    वारदात के चार दिन बाद भी पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। जांच टीम CCTV फुटेज के अलावा बदमाशों के आने-जाने के रास्तों और दूसरे संभावित सुरागों की जांच कर रही है।

    पुलिस ने आरोपियों की तस्वीरें जारी कर उनकी पहचान में आम लोगों से मदद मांगी है। जानकारी देने वाले व्यक्ति के लिए इनाम की घोषणा किए जाने की भी बात सामने आई है।

    फिलहाल पुलिस अलग-अलग संभावित एंगल से मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई जारी है।

  • राजस्थान में खेतों के’ बीच मिलता है शुद्ध सात्विक भोजन, गाय के घी और मिट्टी के बर्तनों में तैयार होता है खाना.

    राजस्थान में खेतों के’ बीच मिलता है शुद्ध सात्विक भोजन, गाय के घी और मिट्टी के बर्तनों में तैयार होता है खाना.

    राजस्थान में खेतों के’ बीच मिलता है शुद्ध सात्विक भोजन, गाय के घी और मिट्टी के बर्तनों में तैयार होता है खाना.

    आज के दौर में शुद्ध और पारंपरिक तरीके से बना खाना मिलना काफी मुश्किल हो गया है। गांवों में भी आधुनिक जीवनशैली का असर दिखाई देने लगा है और मिट्टी के बर्तन, चूल्हे पर बना खाना तथा देसी तरीके से तैयार भोजन धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। ऐसे में अगर कोई ऐसी जगह हो जहां खेतों के बीच बैठकर पारंपरिक तरीके से तैयार सात्विक भोजन खाने को मिले, तो यह अनुभव अपने आप में खास हो सकता है।

    राजस्थान में ऐसी ही एक जगह लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां भोजन किसी सामान्य होटल या रेस्टोरेंट की तरह नहीं बल्कि खेतों के बीच पारंपरिक माहौल में तैयार किया जाता है।

    खेत में उगती है खाने की सामग्री

    इस सात्विक भोजनालय की खास बात यह बताई जाती है कि यहां इस्तेमाल होने वाली कई खाद्य सामग्री खेत में ही तैयार की जाती है। भोजन के लिए ऑर्गेनिक तरीके से उगाई गई फसलों और स्थानीय उत्पादों का इस्तेमाल किया जाता है।

    यानी खाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के लिए बाजार पर निर्भरता कम रखने की कोशिश की जाती है। खेतों के बीच तैयार होने वाले इस भोजन का उद्देश्य लोगों को प्राकृतिक और पारंपरिक खान-पान का अनुभव देना है।

    मिट्टी के बर्तनों में पकाया जाता है खाना

    यहां खाना बनाने का तरीका भी इसे दूसरे भोजनालयों से अलग बनाता है। भोजन पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों में तैयार किया जाता है। खाना पकाने में गाय के घी का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे भोजन का स्वाद और खुशबू देसी अंदाज वाली महसूस होती है।

    मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने की परंपरा भारत के कई हिस्सों में लंबे समय से चली आ रही है। ऐसे बर्तनों में तैयार भोजन को देखने और खाने का अनुभव आज के आधुनिक किचन से काफी अलग होता है।

    सात्विक भोजन पर रहता है जोर

    इस जगह की पहचान मुख्य रूप से सात्विक भोजन के लिए बताई जाती है। यहां तैयार किए जाने वाले व्यंजनों में पारंपरिक भारतीय खान-पान को प्राथमिकता दी जाती है।

    खेतों के बीच प्राकृतिक माहौल, देसी तरीके से तैयार खाना और मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल इस जगह को एक सामान्य भोजनालय के बजाय पारंपरिक ग्रामीण भोजन के अनुभव जैसा बनाता है।

    शहर की भागदौड़ से अलग अनुभव

    आजकल लोग खाने के साथ-साथ उसके अनुभव को भी महत्व देने लगे हैं। ऐसे में खेतों के बीच बैठकर पारंपरिक भोजन करना उन लोगों के लिए खास अनुभव हो सकता है, जो शहर की भीड़ और आधुनिक रेस्टोरेंट के माहौल से अलग कुछ तलाशते हैं।

    राजस्थान की ग्रामीण पृष्ठभूमि के बीच इस तरह का भोजनालय पारंपरिक खान-पान और प्राकृतिक वातावरण को एक साथ महसूस करने का मौका देता है।

    हालांकि, सात्विक भोजन की परिभाषा अलग-अलग परंपराओं और लोगों की मान्यताओं के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए यहां मिलने वाले व्यंजनों और उनकी सामग्री के बारे में जाने से पहले भोजनालय के मौजूदा मेन्यू और नियमों की जानकारी लेना बेहतर रहेगा।

     

     

  • विनीत मिनोचा हत्याकांड में 21 दिन बाद जेल से बाहर आई शालू, बोलीं पति की करतूत का नहीं था अंदाजा.

    विनीत मिनोचा हत्याकांड में 21 दिन बाद जेल से बाहर आई शालू, बोलीं पति की करतूत का नहीं था अंदाजा.

    विनीत मिनोचा हत्याकांड में 21 दिन बाद जेल से बाहर आई शालू, बोलीं पति की करतूत का नहीं था अंदाजा.

    कानपुर के चर्चित विनीत मिनोचा हत्याकांड में शालू की जेल से रिहाई के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। हत्या के मामले में पुलिस ने शालू को आरोपी बनाया था और उन्हें करीब 21 दिन जेल में रहना पड़ा। अब कोर्ट के आदेश के बाद शालू जेल से बाहर आ गई हैं।

    रिहाई के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में जेल में बिताए दिनों और पूरे मामले को लेकर अपना पक्ष रखा। शालू का कहना है कि इन 21 दिनों का समय उनके लिए बेहद मुश्किल रहा और उन्हें मानसिक परेशानी से गुजरना पड़ा।

    पति की भूमिका की जानकारी नहीं होने का दावा

    शालू ने बातचीत में दावा किया कि उनके पति सुब्रत ने जो कुछ किया, उसकी उन्हें पहले से कोई जानकारी नहीं थी। उनका कहना है कि पति की कथित गतिविधियों से वह पूरी तरह अनजान थीं और उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि मामला इतना गंभीर रूप ले चुका है।

    उन्होंने बताया कि अचानक हत्या के मामले में नाम आने और जेल जाने के बाद उनके लिए परिस्थितियां काफी कठिन हो गईं।

    21 दिन जेल में रहने के बाद मिली रिहाई

    शालू करीब 21 दिनों तक जेल में रहीं। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर उन्हें रिहा कर दिया गया। बाहर आने के बाद उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जेल में बिताया गया समय उनके लिए भावनात्मक और मानसिक तौर पर बेहद कठिन रहा।

    मामले में उनकी भूमिका को लेकर पुलिस की शुरुआती जांच और बाद की जांच में सामने आई परिस्थितियों को लेकर अब कानूनी प्रक्रिया जारी है। ऐसे में शालू को पूरी तरह निर्दोष साबित होने की बात को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष के तौर पर पेश करने से पहले अदालत के अंतिम आदेश और जांच की स्थिति को देखना जरूरी होगा।

    हत्याकांड की जांच पर बनी हुई है नजर

    विनीत मिनोचा हत्याकांड ने कानपुर में काफी चर्चा बटोरी थी। मामले में पुलिस ने अलग-अलग पहलुओं की जांच की और आरोपियों की भूमिका को लेकर कार्रवाई की।

    शालू की रिहाई के बाद अब मामले की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर लोगों की नजर है। वहीं, शालू ने अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर अपना पक्ष सामने रखा है और कहा है कि उन्हें अपने पति की कथित करतूत की जानकारी नहीं थी।

    मामले में अंतिम स्थिति अदालत में होने वाली आगे की सुनवाई और जांच से जुड़े आधिकारिक तथ्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

  • करोड़ों रुपये लेकर फरार हुआ सरकारी टीचर, लोगों को दिया था चिट फंड और ज्यादा रिटर्न का दिया झांसा

    करोड़ों रुपये लेकर फरार हुआ सरकारी टीचर, लोगों को दिया था चिट फंड और ज्यादा रिटर्न का दिया झांसा

    करोड़ों रुपये लेकर फरार हुआ सरकारी टीचर, लोगों को दिया था चिट फंड और ज्यादा रिटर्न का दिया झांसा

    तेलंगाना के सूर्यापेट जिले से एक सरकारी टीचर पर करोड़ों रुपये लेकर फरार होने का आरोप लगा है. आरोपी की पहचान बनोथ राजू के रूप में हुई है, जो चिव्वेमला मंडल के एनागंटी थांडा का रहने वाला बताया जा रहा है. राजू एक सरकारी स्कूल में पढ़ाने का काम करता है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि वह पिछले करीब एक दशक से चिट फंड और डेली कलेक्शन जैसे काम कर रहा था.

    पीड़ितों के मुताबिक, राजू लोगों को बैंक के ब्याज से ज्यादा रिटर्न देने का भरोसा दिलाकर अपने साथ पैसे लगाने के लिए तैयार करता था. उसके संपर्क में किसान, शिक्षक, पुलिसकर्मी, मजदूर और दूसरे स्थानीय लोग भी थे. कई लोगों ने कथित तौर पर उसके जरिए चिट फंड में पैसा लगाया, जबकि कुछ लोगों ने निजी तौर पर रकम उधार भी दी. लंबे समय तक लेन-देन चलते रहने की वजह से लोगों का उस पर भरोसा बढ़ता गया.

    बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले राजू ने अचानक अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए और गायब हो गया. जब कुछ लोग उसके घर पहुंचे तो वहां ताला लगा मिला. पीड़ितों का कहना है कि राजू के परिवार के सदस्य भी करीब 10 दिनों से दिखाई नहीं दिए हैं. इसके बाद लोगों को अपने पैसे वापस मिलने को लेकर चिंता बढ़ गई और कई पीड़ित उसके घर के बाहर जमा हो गए.

    पैसे वापस नहीं मिलने से नाराज पीड़ितों ने राजू के घर के बाहर प्रदर्शन भी किया. इसके बाद उन्होंने सूर्यापेट जिला एसपी से मुलाकात कर शिकायत दर्ज कराने और अपनी रकम वापस दिलाने की मांग की. पीड़ितों ने पुलिस से आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने और कथित तौर पर जमा किए गए पैसों का पता लगाने की भी अपील की है. इस पूरे मामले में अब पुलिस की जांच पर लोगों की नजर है.

    एक पीड़ित ने आरोप लगाया कि राजू ने उसके लिए 1.5 करोड़ रुपये का बैंक लोन और 50 लाख रुपये का फाइनेंस लोन दिलाने में मदद की थी. पीड़ित का दावा है कि बाद में ज्यादा रिटर्न देने का भरोसा देकर राजू ने वह रकम अपने कब्जे में ले ली. हालांकि, पुलिस के मुताबिक अभी तक सामने आई जानकारी में कथित तौर पर उधार या जमा की गई कुल रकम करीब 6 से 7 करोड़ रुपये बताई जा रही है. वास्तविक रकम कितनी है, यह जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो सकेगा.

    वहीं, चिव्वेमला पुलिस का कहना है कि मामले में अभी तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई थी. पुलिस के अनुसार, शिकायत और जांच के आधार पर ही पूरे मामले में रकम और अन्य तथ्यों की पुष्टि की जाएगी. चिव्वेमला थाने के एसआई महेश ने आरोपों की जांच शुरू कर दी है. पुलिस आरोपी बनोथ राजू की तलाश कर रही है और फिलहाल उसे फरार बताया जा रहा है.

    पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने राजू पर वर्षों के कारोबारी और निजी संपर्क की वजह से भरोसा किया था. एक पीड़ित ने कहा, “हमने उस पर भरोसा किया क्योंकि वह कई साल से हमारे साथ लेन-देन कर रहा था. अब वह गायब हो गया है और हम अपनी मेहनत की कमाई वापस नहीं ले पा रहे हैं.” फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है और जांच के बाद ही कथित वित्तीय लेन-देन, कुल रकम और आरोपी की भूमिका को लेकर स्थिति साफ होगी.