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  • मनी प्लांट के अलावा ये 5 पौधे घर में बढ़ाते हैं सुख-शांति, सोख लेती है नेगेटिव एनर्जी..

    मनी प्लांट के अलावा ये 5 पौधे घर में बढ़ाते हैं सुख-शांति, सोख लेती है नेगेटिव एनर्जी..

    मनी प्लांट के अलावा ये 5 पौधे घर में बढ़ाते हैं सुख-शांति, सोख लेती है नेगेटिव एनर्जी..

    Indoor Plant Vastu: जब भी घर के अंदर इंडोर प्लांट से सजावट, सुख-शांति और धन बढ़ाने की बात आती है, तो सबसे पहले ‘मनी प्लांट’ का नाम सामने आता है. लेकिन प्रकृति की गोद में कुछ ऐसे बेमिसाल पौधे भी हैं, जो मनी प्लांट से कई गुना तेजी में घर की नेगेटिव एनर्जी को सोख लेते हैं. आइए जानते हैं, ऐसे 5 जादुई इंडोर प्लांट के बारे में, जो न केवल घर को एक मॉडर्न लुक देते हैं, बल्कि जीवन में सुख, शांति और धन की आमद का रास्ता भी सुगम बनाने में मदद करते हैं.

    स्नेक प्लांट

    स्नेक प्लांट की खासियत यह है कि यह पौधा पीपल की तरह रात में भी ऑक्सीजन छोड़ता है. साथ ही यह हवा में व्याप्त टॉक्सिक यानी हानिकारक कणों को सबसे अधिक जल्दी से सोखता है. इससे घर में पाजिटिव एनर्जी बनी रहती है. मान्यता है कि इसे घर के पूर्वी, दक्षिणी और दक्षिणी-पूर्वी कोने में रखने से तनाव कम होता है.

    पीस लिली

    पीस लिली के बारे में कहा जाता है कि यह कार्बन डाइऑक्साइड के अलावा बेंजीन, फॉर्मेल्डिहाइड और जाइलीन के हानिकारक कणों को भी सोख लेता है. साथ ही यह भी रात में ऑक्सीजन बनाता है. कहते हैं, घर में पॉजिटिव झगड़ा-क्लेश दूर कर शांति के लिए पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना चाहिए.

    जेड प्लांट

    जेड प्लांट को ‘धन का पौधा’ और ‘फ्रेंडशिप ट्री’ भी कहा जाता है. इसके बारे में मान्यता है कि यह वातावरण में ‘फ्रेशनेस’ बनाए रखता है. साथ ही यह मानसिक तनाव को पास फटकने भी नहीं देता है. लोग अपने घर में सुख-समृद्धि और धन की आमद बढ़ाने के लिए मुख्य द्वार के पास या उत्तर-पूर्व दिशा में रखते हैं.

    स्पाइडर प्लांट

    स्पाइडर प्लांट के बारे में कहा है कि यह 24 घंटे में हवा की 95 फीसदी नेगेटिव वाइब्स यानी अशुद्धियों को सोख लेता है. इस प्रकार हवा को शुद्ध बनाने में यह पौधा लाजवाब है. तनाव और नेगेटिव थॉट्स को दूर करने और रिश्तों में सुधार के लिए इस पौधे को घर उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व कोने में रखते हैं.

    लकी बैम्बू

    यह पौधा केवल पानी में उगाया जाता है, जो घर के भीतर की हवा को साफ कर वातावरण को सकारात्मक बनाता है. यह एक डंठल वाला पौधा है, जिसकी संख्या के आधार पर फल अलग-अलग होते हैं. कहते हैं, सुख-शांति के लिए 3 डंठल और धन-संपत्ति के लिए 5 डंठल वाले बैम्बू सबसे अधिक लकी होते हैं. कहते हैं, इसे घर की पूर्व या दक्षिण दिशा में रखने घर के सदस्यों की सेहत भी अच्छी रहती है.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • यहां डस्टबिन से बातें करते हैं लोग! आवाज सुनकर समझता है बात, फिर अपने आप खोल देता है ढक्कन.

    यहां डस्टबिन से बातें करते हैं लोग! आवाज सुनकर समझता है बात, फिर अपने आप खोल देता है ढक्कन.

    यहां डस्टबिन से बातें करते हैं लोग! आवाज सुनकर समझता है बात, फिर अपने आप खोल देता है ढक्कन.

    डस्टबिन का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में ऐसी साधारण चीज की तस्वीर आती है, जिसमें कूड़ा डालने के बाद उसे सफाईकर्मी उठा ले जाते हैं। लेकिन तकनीक के इस दौर में अब डस्टबिन भी स्मार्ट हो रहे हैं। चीन से जुड़ी स्मार्ट टेक्नोलॉजी में ऐसे डस्टबिन का कॉन्सेप्ट सामने आया है, जो इंसान की आवाज को समझकर उसके निर्देश के मुताबिक काम कर सकता है।

    यानी अगर कोई व्यक्ति कूड़ा लेकर डस्टबिन के पास पहुंचे और उसे ढक्कन खोलने के लिए कहे, तो सिस्टम आवाज को पहचानकर ढक्कन खोलने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। यही वजह है कि स्मार्ट डस्टबिन का यह कॉन्सेप्ट लोगों के बीच काफी दिलचस्प बना हुआ है।

    आखिर स्मार्ट डस्टबिन में ऐसा क्या लगा होता है?

    स्मार्ट डस्टबिन सामान्य कूड़ेदान से काफी अलग होता है। इसमें कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक और तकनीकी उपकरण लगाए जा सकते हैं।

    इनमें माइक्रोफोन, सेंसर, कंट्रोल सिस्टम, मोटर और सॉफ्टवेयर जैसे हिस्से शामिल हो सकते हैं। जब कोई व्यक्ति डस्टबिन के पास बोलता है, तो माइक्रोफोन उसकी आवाज को कैप्चर करता है।

    इसके बाद सिस्टम आवाज में दिए गए निर्देश को समझने की कोशिश करता है। अगर कमांड ढक्कन खोलने की है, तो कंट्रोल यूनिट मोटर को सक्रिय कर सकती है। मोटर ढक्कन को ऊपर उठाती है और कचरा डालने के बाद ढक्कन दोबारा बंद हो सकता है।

    यानी डस्टबिन खुद से इंसानों की तरह नहीं सोचता, बल्कि कई तकनीकी सिस्टम मिलकर उसके निर्देशों को पूरा करते हैं।

    सिर्फ आवाज सुनना ही नहीं, कचरे को पहचानने की भी कोशिश

    स्मार्ट डस्टबिन की खासियत केवल वॉयस कमांड तक सीमित नहीं है। कुछ आधुनिक सिस्टम कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटने की दिशा में भी काम कर सकते हैं।

    कचरे को आमतौर पर रिसाइकिल होने वाली चीजों, खाने के कचरे और दूसरे सामान्य कचरे में अलग करना जरूरी होता है। ऐसे में कुछ स्मार्ट डस्टबिन में अलग-अलग कम्पार्टमेंट दिए जा सकते हैं और सेंसर या सॉफ्टवेयर की मदद से सही हिस्से का चुनाव किया जा सकता है।

    हालांकि हर स्मार्ट डस्टबिन में ये सभी सुविधाएं मौजूद हों, यह जरूरी नहीं है। किसी मॉडल में केवल ऑटोमैटिक ढक्कन हो सकता है, जबकि दूसरे में आवाज पहचानने, सेंसर या कचरे की पहचान जैसी अतिरिक्त सुविधाएं मिल सकती हैं।

    चीन में तेजी से बढ़ रहा स्मार्ट सिटी का कॉन्सेप्ट

    चीन में पिछले कुछ वर्षों में स्मार्ट सिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और रोबोटिक्स से जुड़ी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ा है।

    शहरी इलाकों में स्मार्ट कैमरे, ऑटोमेटेड मशीनें, डिजिटल पेमेंट सिस्टम और AI आधारित सेवाओं का इस्तेमाल देखने को मिलता है। अब इसी तरह की तकनीक का इस्तेमाल कचरा प्रबंधन को बेहतर और ज्यादा ऑटोमेटेड बनाने की दिशा में भी किया जा रहा है।

    रोजमर्रा की चीजें भी बन रही हैं स्मार्ट

    स्मार्ट डस्टबिन का कॉन्सेप्ट यह दिखाता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल सिर्फ मोबाइल फोन, चैटबॉट या कैमरा सिस्टम तक सीमित नहीं है।

    अब रोजमर्रा की बेहद साधारण चीजों में भी सेंसर, सॉफ्टवेयर और ऑटोमेशन जोड़े जा रहे हैं। आने वाले समय में कचरा प्रबंधन जैसे कामों में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल और बढ़ सकता है।

    हालांकि किसी खास स्मार्ट डस्टबिन की वास्तविक क्षमता उसके मॉडल और तकनीकी सिस्टम पर निर्भर करती है। सभी स्मार्ट डस्टबिन इंसानी बातचीत को पूरी तरह समझने या हर तरह के कचरे की पहचान करने में सक्षम हों, ऐसा जरूरी नहीं है।

     

     
  • इस मंदिर में स्टाम्प पेपर पर मनोकामना लिख टांगते हैं भक्त, मन्नत पूरी होने पर चढ़ाते हैं ये चीज

    इस मंदिर में स्टाम्प पेपर पर मनोकामना लिख टांगते हैं भक्त, मन्नत पूरी होने पर चढ़ाते हैं ये चीज

    Temples-of-India

    भारत को मदिरों और आश्रमों का देश कहा जाता है। उत्तर से लेकर दक्षिण तक, पूरब से लेकर पश्चिम विविध प्रकार के देवता और उनके अनोखे मंदिर और उससे जुड़ी लाखों रहस्यमय कथा-कहानियां हैं, जहां के रीति-रिवाज और नियम भी अनूठे हैं। ऐसा ही एक मंदिर लोककथाओं और प्राकृतिक सुंदरता की नगरी अल्मोड़ा की घाटियों में है।

    चितई गोलू देवता मंदिर

    हिमालय की गोद में बसे इस मंदिर का नाम है चितई गोलू देवता मंदिर, जिसमें स्थानीय लोगों की जबरदस्त आस्था और विश्वास है। कुमाऊं क्षेत्र में चितई गोलू देवता को ‘न्याय का देवता और परम न्यायाधीश’ के रूप में इनकी पूजा की जाती हैं। कहते हैं, जब लोग हर जगह निराश हो जाते हैं, कोर्ट-कचहरी आदि से सब कुछ हार जाते हैं, तब लोग यहां आखिरी उम्मीद लेकर आते हैं।

    कौन थे चितई गोलू देवता?

    अल्मोड़ा के चंपावत (धूमाकोट) के इतिहासे के अनुसार, चितई गोलू देवता कत्यूरी राजवंश के राजकुमार थे, जो महादेव शिव के ‘गौर भैरव’ रूप के अवतार थे। उन्होंने न्यायप्रिय कत्यूरी राजा झाल राय की आठवीं रानी कालिंका के गर्भ से जन्म लिया था। लेकिन सात अन्य रानियों ने उसे षडयंत्र कर एक सन्दूक में बंद कर काली नदी की धारा में बहा दिया और राजा से कहा कि रानी ने पत्थर के सिलबट्टे को जन्म दिया है।

    मछुआरे ने किया पालन-पोषण

    नदी में बहता वह सन्दूक भाना नाम के मछुआरे को मिला, जिसने बालक का पालन-पोषण किया और नाम रखा गोलू। यह बालक विलक्षण था। बड़े होने पर एक दिन गोलू एक लकड़ी का घोड़ा लेकर राजा के घाट पर उसे पानी पिलाने पहुंचा। रानियों ने उपहास किया लकड़ी का घोड़ा पानी कैसे पी सकता है। तब गोलू ने पलट कर जवाब दिया, ‘जब एक रानी सिलबट्टे को जनम दे सकती है, तो लकड़ी घोड़ा पानी क्यों नहीं पी सकता है?’

    ऑन द स्पॉट निष्पक्ष न्याय

    जब यह बात राजा के पास पहुंची, तो राजा ने गहन जांच करवाई और अपनी भूल सुधारते हुए रानी कालिंका और उसके पुत्र गोलू को अपनाया। बाद में गोलू चंपावत के राजा बने और गोलू दरबार लगाकर लोगों को न्याय देते थे। कहते हैं, आज के फास्ट ट्रैक कोर्ट से अधिक फास्ट थे। वे ऑन द स्पॉट निष्पक्ष निर्णय करते थी और सही और सटीक न्याय देते थे। प्रजा-प्रेम और उनकी न्यायप्रियता से वे जन-जन के राजा बन गए और ‘न्याय के देवता’ के रूप में पूजे जानए लगे।

    क्या है स्टांप पर अर्जी लिखने का रहस्य

    कुमाऊं क्षेत्र के लोग गोलू देवता को अपना राजा और न्याय देने वाले देवता मानते हैं। कहते हैं, जब कोई आदमी अदालत का दरवाजा खट-खटा के परेशान और निराश हो जाता है, तो वह आखिरी उम्मीद लेकर इस ‘दिव्य न्यायालय’ में हाजिरी भरता है। मान्यता है कि लोगों की लिखित अर्जी सीधी के देवता का पहुंचती है। यह अर्जी स्टांप पेपर और सादे कागज पर भी लिखी जा सकती है।

    लाखों घंटियों का मंदिर

    चितई गोलू देवता का मंदिर का परिसर अर्जियों और घंटियों से भरा पड़ा है, जिसे आभार और न्याय की गूंज माना जाता है। मंदिर में प्रवेश करते ही छोटी-बड़ी लाखों घंटिया देख हृदय विस्मित हो जाता है। कहते हैं, ये घंटियां उन लोगों ने अर्पित की हैं, जिनकी अर्जियां और मनोकामनाएं पूरी हो गई थी।

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. 

  • सेहत का मतलब सिर्फ अच्छा खाना नहीं, हेल्दी रहने के लिए इन आदतों पर भी दें ध्यान..

    सेहत का मतलब सिर्फ अच्छा खाना नहीं, हेल्दी रहने के लिए इन आदतों पर भी दें ध्यान..

    सेहत का मतलब सिर्फ अच्छा खाना नहीं, हेल्दी रहने के लिए इन आदतों पर भी दें ध्यान..

    आज के समय में ज्यादातर लोग स्वस्थ रहने के लिए अपने खानपान पर सबसे ज्यादा ध्यान देते हैं। फल, सब्जियां, प्रोटीन और साबुत अनाज जैसी चीजों को डाइट में शामिल करना अच्छी आदत है, लेकिन सिर्फ अच्छा खाना ही पूरी सेहत की गारंटी नहीं देता।

    एक स्वस्थ शरीर के लिए आपकी पूरी लाइफस्टाइल का संतुलित होना जरूरी है। रोजाना की शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, पानी पीने की आदत, तनाव को नियंत्रित करना और साफ-सफाई जैसी चीजें भी स्वास्थ्य पर असर डालती हैं।

    सिर्फ हेल्दी खाना काफी नहीं

    अगर कोई व्यक्ति पौष्टिक खाना खाता है, लेकिन दिनभर बैठा रहता है, नींद पूरी नहीं करता या लगातार तनाव में रहता है, तो उसकी लाइफस्टाइल को पूरी तरह हेल्दी नहीं कहा जा सकता।

    इसलिए अच्छी सेहत के लिए खानपान के साथ-साथ रोजमर्रा की आदतों में भी सुधार करना जरूरी है।

    रोजाना शरीर को एक्टिव रखें

    लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना शरीर के लिए अच्छा नहीं माना जाता। इसलिए अपनी क्षमता और दिनचर्या के अनुसार रोजाना कुछ समय शारीरिक गतिविधि के लिए जरूर निकालें।

    आप तेज चाल से पैदल चल सकते हैं, योग कर सकते हैं, साइकिल चला सकते हैं या अपनी पसंद की कोई दूसरी एक्सरसाइज कर सकते हैं। नियमित रूप से एक्टिव रहने से शरीर को फिट रखने में मदद मिलती है।

    पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी

    शरीर के सामान्य कामकाज के लिए पानी बेहद जरूरी है। इसलिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की आदत बनानी चाहिए।

    हालांकि, हर व्यक्ति की पानी की जरूरत एक जैसी नहीं होती। मौसम, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य जैसी परिस्थितियों के अनुसार इसकी जरूरत बदल सकती है। इसलिए पूरे दिन नियमित रूप से पानी लेते रहना बेहतर आदत है।

    नींद से समझौता न करें

    हेल्दी लाइफस्टाइल में नींद की भी बड़ी भूमिका होती है। देर रात तक मोबाइल या दूसरी स्क्रीन देखते रहना, रोज अलग-अलग समय पर सोना और लगातार कम नींद लेना आपकी दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है।

    कोशिश करें कि सोने और जागने का समय लगभग तय रहे। रात में सोने से पहले मोबाइल, टीवी या दूसरी स्क्रीन का इस्तेमाल कम करने से भी नींद की आदत बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

    तनाव को नियंत्रित करना सीखें

    लगातार तनाव में रहना भी अच्छी लाइफस्टाइल का हिस्सा नहीं है। इसलिए दिनभर की व्यस्तता के बीच अपने लिए थोड़ा समय निकालना जरूरी है।

    पैदल चलना, योग, ध्यान, पसंदीदा गतिविधियां करना या कुछ समय आराम करना तनाव को मैनेज करने में मदद कर सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि भी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती है।

    साफ-सफाई और फूड हाइजीन का रखें ध्यान

    पौष्टिक खाना तभी फायदेमंद हो सकता है जब उसे साफ-सफाई के साथ तैयार और सुरक्षित तरीके से रखा गया हो।

    खाना बनाने से पहले हाथ धोना, कच्चे और पके भोजन को अलग रखना, भोजन को अच्छी तरह पकाना और साफ बर्तनों का इस्तेमाल करना जरूरी है। खाने की गुणवत्ता के साथ यह भी मायने रखता है कि भोजन किस तरह तैयार और स्टोर किया गया है।

    हेल्दी रहने का मतलब सिर्फ वजन कम करना नहीं

    अच्छी सेहत का मतलब केवल वजन कम करना या पतला दिखना नहीं है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित खानपान के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, सही मात्रा में पानी, तनाव पर नियंत्रण और साफ-सफाई जैसी आदतों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

    इसलिए अगर आप अपनी सेहत बेहतर रखना चाहते हैं, तो केवल डाइट बदलने के बजाय अपनी पूरी दिनचर्या को धीरे-धीरे बेहतर बनाने की कोशिश करें।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किसी बीमारी, दवा, डाइट या व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्या के संबंध में डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।

  • रिश्तों में कड़वाहट घोल देती हैं ये 5 गलतियां, चाणक्य की इन बातों को हमेशा रखें ध्यान..

    रिश्तों में कड़वाहट घोल देती हैं ये 5 गलतियां, चाणक्य की इन बातों को हमेशा रखें ध्यान..

    रिश्तों में कड़वाहट घोल देती हैं ये 5 गलतियां, चाणक्य की इन बातों को हमेशा रखें ध्यान..

    Chanakya Niti: रिश्ते जिंदगी का बेहद अहम हिस्सा होते हैं। परिवार और रिश्तेदारों के साथ अच्छे संबंध बने रहें, इसके लिए सिर्फ प्यार और सम्मान ही नहीं, बल्कि व्यवहार का भी ध्यान रखना जरूरी है। कई बार हमारी छोटी-छोटी आदतें ही सामने वाले को बुरी लग जाती हैं और धीरे-धीरे रिश्तों में दूरी बढ़ने लगती है।

    आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में व्यक्ति के व्यवहार और सामाजिक जीवन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें बताई हैं। उनके अनुसार, दूसरों के घर जाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं ऐसी 5 गलतियों के बारे में, जिनसे रिश्तों में कड़वाहट पैदा हो सकती है।

    1. बिना बताए किसी के घर न पहुंचें

    किसी रिश्तेदार या परिचित के घर जाने से पहले उन्हें इसकी जानकारी देना बेहतर माना जाता है। बिना बताए अचानक पहुंचने से सामने वाला असहज हो सकता है या उसकी दिनचर्या प्रभावित हो सकती है।

    इसलिए अगर किसी के घर जाना हो तो पहले फोन या मैसेज करके बता देना चाहिए। इससे आपके रिश्ते में सम्मान और अपनापन बना रहता है।

    2. खाली हाथ जाने से बचें

    पुराने समय से ही किसी के घर जाते समय अपनी क्षमता के अनुसार कुछ लेकर जाने की परंपरा रही है। यह जरूरी नहीं कि उपहार महंगा ही हो। आप फल, मिठाई या घर में इस्तेमाल होने वाली कोई छोटी चीज भी ले जा सकते हैं।

    ऐसा व्यवहार सामने वाले के प्रति आपके सम्मान और अपनापन को दर्शाता है।

    3. दूसरों के निजी मामलों में दखल न दें

    रिश्तेदारों के घर जाकर उनके निजी मामलों में जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए। परिवार के आपसी संबंध, घरेलू खर्च या किसी व्यक्तिगत फैसले पर बिना पूछे अपनी राय देना कई बार परेशानी खड़ी कर सकता है।

    अगर कोई व्यक्ति खुद आपसे सलाह मांगे, तभी अपनी बात रखें। हर मामले में अपनी राय देना रिश्ते में तनाव पैदा कर सकता है।

    4. किसी के घर जरूरत से ज्यादा न रुकें

    रिश्तेदारों के यहां जाना और समय बिताना अच्छी बात है, लेकिन लंबे समय तक रुकने से बचना चाहिए, खासकर तब जब सामने वाले की दिनचर्या प्रभावित हो रही हो।

    किसी के घर जाते समय उनकी सुविधा का भी ध्यान रखना जरूरी है। समय पर वापस लौटने से आपका सम्मान भी बना रहता है और सामने वाले को असुविधा भी नहीं होती।

    5. दिखावे और चुगली से दूर रहें

    रिश्तों में सबसे ज्यादा दूरी पैदा करने वाली आदतों में दिखावा और दूसरों की बुराई करना भी शामिल है। अपनी संपत्ति, कमाई या उपलब्धियों का जरूरत से ज्यादा प्रदर्शन करने से सामने वाला असहज महसूस कर सकता है।

    इसी तरह किसी तीसरे रिश्तेदार की बुराई उसके सामने करने से भी बचना चाहिए। सामने वाला यह सोच सकता है कि आप उसकी गैरमौजूदगी में उसकी बातें भी दूसरों से साझा कर सकते हैं।

    रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है समझदारी

    रिश्ते सिर्फ बातचीत से नहीं, बल्कि हमारे व्यवहार से भी मजबूत होते हैं। इसलिए दूसरों की भावनाओं, निजी जीवन और सुविधाओं का सम्मान करना चाहिए। चाणक्य की इन बातों को आज के समय में भी व्यवहार और सामाजिक संबंधों के संदर्भ में समझा जा सकता है।

    डिस्क्लेमर: चाणक्य नीति से जुड़ी ये बातें पारंपरिक मान्यताओं और उपलब्ध व्याख्याओं पर आधारित हैं। इन्हें सामान्य जानकारी के तौर पर पढ़ें।

  • टमाटर खाने से किडनी में पथरी होती है? डॉक्टर ने बताया किन चीजों से हो सकता है खतरा..

    टमाटर खाने से किडनी में पथरी होती है? डॉक्टर ने बताया किन चीजों से हो सकता है खतरा..

    टमाटर खाने से किडनी में पथरी होती है? डॉक्टर ने बताया किन चीजों से हो सकता है खतरा..

    Kidney Stones Reasons: टमाटर भारतीय खाने में इस्तेमाल किया जाने वाला इंग्रीडिएंट है. इसका इस्तेमाल कई तरह से किया जाता है और सलाद से लेकर सब्जी, दाल और चटनी में स्वाद के लिए डाला जाता है. इसलिए कुछ लोग इसकी प्यूरी बनाकर स्टोर करके रख लेते हैं, लेकिन कुछ लोग खाने से परहेज करते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि उनका मानना है कि टमाटर खाने से पथरी की शिकायत हो सकती है. अगर जरूरत से ज्यादा कच्चा खाएंगे तो परेशानी बढ़ सकती है. इसलिए किडनी में पथरी की समस्या से जूझ रहे कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या टमाटर खाने से पथरी का खतरा बढ़ सकता है? अक्सर टमाटर को ऑक्सलेट से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन हर इंसान को टमाटर छोड़ने की जरूरत नहीं होती. इसको लेकर किम्स किम्स हॉस्पिटल के डॉक्टर विश्वास एम आर क्या कहते हैं और टमाटर खाने से किडनी स्टोन बनने पर असर पड़ता है या नहीं, आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं.

    क्या टमाटर खाने से किडनी में पथरी होती है?

    ऐसा साफ तौर पर कहना जरूरी नहीं है. टमाटर को किडनी स्टोन होने का असल कारण मानना सही नहीं है. किडनी स्टोन कई कारणों से बन सकते हैं और उनके प्रकार भी अलग-अलग होता है. हालांकि, कैल्शियम ऑक्सालेट स्टोन सबसे आम प्रकार के किडनी स्टोन हैं. ऐसे मामलों में डॉक्टर जरूरत के हिसाब से डाइट में ऑक्सलेट की मात्रा, नमक, कैल्शियम और दूसरे पोषक तत्वों पर ध्यान देने की सलाह दे सकते हैं.

    किन चीजों से बढ़ सकता है पथरी का खतरा?

    शरीर में पानी की कमी होना- किडनी स्टोन से बचने के लिए पानी पीना सबसे जरूरी टिप्स में से एक है. पानी कम पीने से पेशाब ज्यादा गाढ़ा हो सकता है और उसमें मौजूद कुछ मिनरल्स आपस में मिलकर क्रिस्टल बना सकते हैं.

    ज्यादा नमक खाना- खाने में बहुत ज्यादा नमक लेने से पेशाब में कैल्शियम की मात्रा बढ़ सकती है, जिससे कुछ लोगों में कैल्शियम वाले किडनी स्टोन का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए आप चिप्स, पैकेज्ड फूड, इंस्टेंट नूडल्स, प्रोसेस्ड मीट और ज्यादा नमक वाले सॉस को खाना नुकसानदायक हो सकता है.

    बहुत ज्यादा ऑक्सालेट वाली चीजें- अगर किसी व्यक्ति को कैल्शियम ऑक्सालेट स्टोन की समस्या है तो डॉक्टर या डाइटिशियन कुछ ज्यादा ऑक्सलेट वाली चीजों से दूरी बना लें. आप पालक, चुकंदर, रूबर्ब, कुछ नट्स और चॉकलेट जैसी चीजों से परहेज करें.

    क्या पथरी होने पर टमाटर पूरी तरह बंद कर दें?

    अगर आपको किडनी स्टोन है तो अपनी मर्जी से टमाटर या किसी दूसरी सब्जी को पूरी तरह डाइट से हटाने के बजाय डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लें. किडनी स्टोन की डाइट इस बात पर डिपेंड करती है कि स्टोन किस प्रकार का है और आपके यूरिन या ब्लड टेस्ट में क्या सामने आया है.

    अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें.

  • सोफे के पीछे दीवार पर न टांगें ये 3 तस्वीरें, बन सकती हैं कंगाली और डिप्रेशन का कारण..

    सोफे के पीछे दीवार पर न टांगें ये 3 तस्वीरें, बन सकती हैं कंगाली और डिप्रेशन का कारण..

    सोफे के पीछे दीवार पर न टांगें ये 3 तस्वीरें, बन सकती हैं कंगाली और डिप्रेशन का कारण..

    वास्तु शास्त्र में घर से जुड़ी हर चीज के लिए नियम बेहद स्पष्ट हैं, चाहे वह पूजा घर, किचन, बेडरूम, बालकनी हो या लिविंग रूम. लिविंग रूम के बारे में यह शास्त्र कहता है कि यह घर की वह जगह है, जहां ऊर्जा का सबसे अधिक आदान-प्रदान होता है. इस रूम में सोफे के पीछे की जगह को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. इसका कारण यह बताया जाता है कि यहां बैठने वाले लोगों और पूरे घर के माहौल पर इस दीवाल का डायरेक्ट असर पड़ता है. आइए वास्तु नियमों से जानते है कि लिविंग रूम में सोफे के पीछे वॉल पर कौन-सी 3 प्रकार की पेंटिंग भूल से भी नहीं टांगनी चाहिए?

    डूबता हुआ सूरज

    वास्तु शास्त्र में उगते हुए सूरज को नई शुरुआत, शुभ ऊर्जा, उत्थान और विकास का प्रतीक माना गया है. वहीं, डूबते सूरज को जीवन में पतन, ठहराव और निराश से जोड़ा गया है. डूबते सूरज वाली तस्वीरों में चीजों को अक्सर धुंधले और फीके पड़ते हुए प्रकाश और रंगों में दिखाया जाता है. ऐसी तस्वीरें सोफे के पीछे लगाने के घर मेम्बर का आपस में विश्वास कम हो सकता है. घर लोग बेवजह उदास या डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं. यह करियर और व्यापार में गिरावट का भी कारण भी बन सकता है.

    यद्ध, हिंसा या महाभारत की तस्वीर

    वास्तु शास्त्र में युद्ध और हिंसा को विनाश और क्रोध का प्रतीक माना गया है. मान्यता है कि इस प्रकार की तस्वीरें या पेंटिंग लगाने से घर के लोगों में अग्रेसिवनेस और नेगेटिविटी बढ़ सकती है. कलह और झगड़े हो सकते हैं. बेवजह तनाव रह सकता है, जो डिप्रेशन की ओर धकेल सकता है. महाभारत युद्ध की तस्वीर भी नहीं लगानी चाहिए, क्योंकि ये भी नकारात्मकता फैला सकती है.

    डूबते जहाज/नाव की तस्वीर

    किसी तूफान में फंसे नाव, पानी में डूबता जहाज, टाइटैनिक या टूटे हुए जहाज की फोटो को वास्तु शास्त्र में बेहद नेगेटिव असर वाला माना गया है. इस प्रकार को तस्वीरों और पेंटिंग को नुकसान, बर्बादी और बुरे वक्त का प्रतीक माना गया है. इसे सोफे के पीछे लगाने से मनःस्थिति और घर-परिवार की आर्थिक स्थति पर असर होता है. इससे घर में कंगाली भी आ सकती है. इस दीवाल पर मुरझाए फूल वाले चित्र, सूखे पेड़ और जंगल में आग लगने जैसे फोटो आदि भी नही लगाने चाहिए।

    ऐसी फोटो लाती है खुशहाली

    वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस प्रकार की फोटो का सही विकल्प है सकारात्मक तस्वीर और पेंटिंग, जैसे- दौड़ते हुए 7 सफेद घोड़े, हरे भरे जंगल, ऊंचे ऊंचे पर्वत, उगता हुआ सूर्य. मान्यता है कि ये सुख-समृद्धि को घर-परिवार की आकर्षित करती हैं.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • खाना खाते हुए मुंह में जलन क्यों होती है? सर्जन ने बताए सामान्य और गंभीर कारण

    खाना खाते हुए मुंह में जलन क्यों होती है? सर्जन ने बताए सामान्य और गंभीर कारण

    खाना खाते हुए मुंह में जलन क्यों होती है? सर्जन ने बताए सामान्य और गंभीर कारण

    Muh Me Jalan Hona: खाना खाते हुए कुछ बहुत तीखा या गर्म खा लिया जाए तो मुंह जलने लगता है और तकलीफ होती है. लेकिन, अगर सामान्य तामपान और कम तीखा खाना खाने पर भी मुंह में जलन महसूस हो और दर्द या असहजता होने लगे तो इसका क्या कारण हो सकता है? इस प्रश्न का जवाब दे रहे हैं फोर्टिस अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट और यूनिट हेड, हेड एंड नेक सर्जन डॉ. अंबेश सिंह. डॉक्टर बता रहे हैं कि कौन से सामान्य और गंभीर कारण हो सकते हैं जो मुंह की जलन की वजह बनते हैं. आइए डॉक्टर से ही जानते हैं खाता खाते हुए मुंह में जलन क्यों होती है.

    खाना खाते हुए मुंह में जलन क्यों होती है

    डॉक्टर बताते हैं कि ये दिक्कतें मुंह में जलन की वजह बन सकती हैं –

    मसालेदार या गर्म भोजन, तंबाकू-गुटखा खाना, मुंह के छाले या फंगल इंफेक्शन से जलन हो सकती है.लगातार जलन मुंह के सूखेपन, विटामिन या आयरन की कमी या अन्य मौखिक समस्याओं से भी जुड़ी हो सकती है.

    बर्निंग माउथ सिंड्रोम भी हो सकता है कारण

    हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग में छपी रिपोर्ट के मुताबिक खाना खाते हुए मुंह में जलन की दिक्कत बर्निंग माउथ सिंड्रोम (Burning Mouth Syndrome) के चलते भी हो सकती है. इसमें खासकर एल्कोहल के सेवन से या कुछ चटपटा खाने से मुंह की जलन बढ़ जाती है. बर्निंग माउथ सिंड्रोम होंठ, जीभ, मसूड़ों, गाल के अंदरूनी हिस्से, मुंह के ऊपरी हिस्से और गले को भी प्रभावित करता है. लेकिन, रिपोर्ट में बताया गया है कि यह केवल 2 प्रतिशत लोगों को ही प्रभावित करता है और पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को मेनोपॉज की तरफ ट्रांजिशन के दौरान हो सकता है.

    बर्निंग माउथ सिंड्रोम किसे हो सकता है

    बर्निंग माउथ सिंड्रोम न्यूरोपैथिक दर्द का एक प्रकार है जिसमें फाइबर एब्नॉर्मली एक्ट करने लगते हैं और बिना किसी स्पष्ट ट्रिगर के दर्द का कारण बनते हैं. इसकी सटीक वजह अब तक पता नहीं हो पाई है. बताया जाता है कि यह मेनोपॉज के दौरान हो सकता है, स्ट्रेस या एंजाइटी से हो सकता है या हार्मोनल चेंजेस इसकी वजह हो सकते हैं.

    अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें.

  • दंग कर देने वाले हैं 1920 से 30 के बीच नीम करोली बाबा के भेष, जानें तलैया बाबा और जटाधारी रूप की कहानी..

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    Neem-Karoli-Baba

    Neem Karoli Baba Story: नीम करोली बाबा एक ऐसा नाम हैं, जिनके दर्शन मात्र का पुण्य लाभ लेने के लिए दुनिया के अमीर से अमीर और शक्तिशाली लोग दौड़े चले आते हैं. हर कोई उनके चमत्कारों और उनकी तपस्या की ऊर्जा के आगे नतमस्तक हो जाता है. लेकिन आपको पता नहीं होगा, उनका एक समय, एक दौर ऐसा था, जब उनके भौतिक रूप कई प्रकार के थे. उस समय उनके भेष और साधन के तरीके को देख कर लोग दंग रह जाते थे.

    नीम करोली बाबा के जीवन की 1920 से 1030 तक की अवधि लगभग अज्ञातमय रही है, क्योंकि कहा जाता है कि संभवतः यह उनके जीवन का सबसे कठिन और चमत्कारी दौर भी था. आइए जानते है, इस दौरान बाबा किस भेष में थे और ‘तलैया बाबा’ से ‘जटाधारी’ रूप में कैसे और क्यों आए? आपको बता दें कि बाबा के जीवन के इस काल को बहुत लोग ‘लापता काल’ कह देते हैं, जो गलत है. यह काल उनकी तपस्या का वो समय था, जब वे जनता के बीच कम और ईश्वर के करीब अधिक थे.

    बबानिया के ‘लक्ष्मणदास’ और ‘तलैया बाबा’

    कहते हैं, नीम करोली बाबा ने 1911-12 में अपना घर-बार छोड़ दिया था. वे गृहस्थ जीवन से बाहर निकल आए थे. उन्होंने भारत के भिन्न-भिन्न हिस्सों का भ्रमण किया. उनके जीवनी लिखने वाले लेखक और साधक राम दास जी की ‘मिरैकल ऑफ लव’ और प्रेम प्रकाश जी की ‘नीम करोली बाबा: ही इज विथ अस हियर एंड नाउ’ नामक पुस्तकों में वर्णन मिलता है कि 1920 के दशक के शुरुआती समय वे गुजरात के मोरबी के पास बबानिया गांव में रहते थे. यहां वे एक वैष्णव संत के रूप में थे. लोग उनको ‘लक्ष्मण दास’ कहते थे.

    इसी गांव में एक छोटा सा तालाब था, जिसे बबानिया के लोकल लैंग्वेज में ‘तलैया’ कहा जाता था. बाबा लक्ष्मण दास इस तालाब के किनारे घंटों तक ध्यान लगाए रहते थे. उनकी इस आदत और तालाब के प्रति लगाव को देख स्थानीय लोगों ने उन्हें ‘तलैया बाबा’ कहना शुरू कर दिया.

    गुफा में रहने वाले बाबा का ‘जटाधारी रूप’

    कहते सन 1925 के आसपास बाबा उत्तर प्रदेश के फर्रूखाबाद जिले के ‘नीब करौरी’ गांव पहुंचे. ट्रेन वाली महाचमत्कार की घटना यहीं घटी थी, जहां उन्हें ट्रेन से उतार दिया गया था और इसके बाद ट्रेन एक इंच भी आगे नहीं बढ़ी थी. कहते हैं, ट्रेन की घटना के बाद सम्मानपूर्वक उन्हें नीब करौरी गांव लाया गया. यहां बाबा का पूरा भेष बदल गया.

    कहते हैं, यहां उन्होंने साधना के लिए जमीन के अंदर एक गुफा तैयार करवाई थी. दिन में में वे इसी गुफा में रहते थे और केवल कभी-कभी रात को बाहर आते थे. इस समय बाबा केवल एक लंगोट धारण करते थे. कहते हैं, उनके बाल भयंकर रूप से उलझ गए थे, जटाएं काफी लंबी हो गई थीं. उनका यह रूप एक दिव्य रूप था, लोग देखकर विस्मित और चकित हो जाते थे.

    1930 में बदला बाबा का भेष

    कहते हैं, 1930 के आसपास बाबा ने नीब करौरी गांव में हनुमान जी का एक भव्य मंदिर बनवाया था. इसके बाद उन्होंने अपनी गुप्त साधना त्याग कर दिया. अपनी लंबी जटाओं का मुंडन करवा दिया. वे लंगोट की जगह सूती धोती पहनने लगे. यही वह समय था, जब लोगों ने उन्हीं नीब करोरी बाबा या ‘नीम करोली बाबा’ कहना शुरू और जो आजतक कहा जा रहा है. आपको बता दें कि इसी कालखंड में लोग उन्हें ‘हांडी वाले बाबा’ और ‘तिकोनिया वाले बाबा’ भी कहते थे.

  • डाइट सही फिर भी नहीं घट रही पेट की चर्बी? कहीं ‘कोर्टिसोल बेली’ तो नहीं बन रही वजह..

    डाइट सही फिर भी नहीं घट रही पेट की चर्बी? कहीं ‘कोर्टिसोल बेली’ तो नहीं बन रही वजह..

    डाइट सही फिर भी नहीं घट रही पेट की चर्बी? कहीं ‘कोर्टिसोल बेली’ तो नहीं बन रही वजह..

    मोटापा एक गंभीर समस्या है, जिससे देश व दुनिया में आज बड़ी संख्या में लोग परेशान है. मोटापा के कारण इंसानी शरीर कई गंभीर बीमारियों का घर बन जाता है, जो लंबी उम्र को भी प्रभावित करता है और व्यक्ति को जिंदगीभर दवाओं पर निर्भर रहने पर मजबूर कर देता है. लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत तब पैदा होती है, जब आप हेल्दी डाइट ले रहे हो और फिर भी पेट की चर्बी कम न हो रही हो. ऐसी स्थिति में न सिर्फ दिल घबराता है, बल्कि तनाव की स्थिति भी पैदा हो जाती है. हम आपको इस स्टोरी में ‘कोर्टिसोल बेली’ के बारे में बताएंगे, जिसके बारे में अक्सर लोगों को जानकारी नहीं होती है. इतना जान लीजिए कि अगर हेल्दी डाइट के बाद भी पेट पर चर्बी बन रही है, तो इसके पीछे ‘कोर्टिसोल’ भी कारण हो सकता है.

    क्या है ‘कोर्टिसोल’?

    अपोलो 24/7 की वेबसाइट पर दर्ज जानकारी के अनुसार, अच्छी डाइट और फिजिकल एक्टिविटी के कारण भी बढ़ रहे मोटापे के पीछे तनाव भी एक बड़ा कारण हो सकता है. दरअसल, कॉर्टिसोल, जिसे आम तौर पर ‘स्ट्रेस हार्मोन’ कहा जाता है, वजन बढ़ने, खासकर पेट के आसपास चर्बी जमा होने में अहम भूमिका निभाता है. अच्छी बात यह है कि तनाव को मैनेज करके और लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करके कॉर्टिसोल के लेवल को असरदार ढंग से कम कर सकते हैं, नतीजतन पेट की चर्बी भी कम की जा सकती है.

    कोर्टिसोल का क्या है पेट की चर्बी से कनेक्शन?

    कोर्टिसोल एक तरह का हार्मोन है, जो तनाव के कारण एड्रिनल ग्रंथियों द्वारा बनने लगता है. अपोलो के मुताबिक, कई मामलों में ये आपके शरीर को शॉर्ट-टर्म चुनौतियों (जैसे खतरे से भागना) से निपटने में मदद कर सकता है, लेकिन लंबे समय तक चलने वाला स्ट्रेस कोर्टिसोल लेवल को बढ़े रहने से कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती है, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. इनमें;

    पेट पर चर्बी का बढ़ना

    बाहर का अनहेल्दी खाने की क्रेविंग

    लंबे समय तक तनाव रहने से मेटाबॉलिज्म धीमा हो सकता है और वजन कम करना मुश्किल हो सकता है.

    इतना ही नहीं, इस स्थिति को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इसके कारण दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बना रहता है और साथ ही, शुगर की समस्या आदि कई गंभीर बीमारियां आपकी सेहत बिगाड़ सकते हैं.

    कैसे दिखते हैं लक्षण और राहत पाने के उपाय?

    कोर्टिसोल के लेवल बढ़े होने पर कई लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, इसमें;

    डाइट और एक्सरसाइज के बावजूद पेट की चर्बी कम न होना

    पूरी रात सोने के बाद भी थकान महसूस होना

    सोने में या नींद बनाए रखने में परेशानी

    अक्सर सिरदर्द या मांसपेशियों में खिंचाव महसूस होना

    मूड बदलना, एंग्जायटी या चिड़चिड़ापन

    भूख बढ़ना, खासकर मीठा और कार्ब्स खाने की इच्छा होना आदि इसके लक्षणों में शामिल है.

    कोर्टिसोल को कम करने के लिए आप कुछ आसान टिप्स को अपना सकते हैं, जिसमें;

    तनाव को कम करना

    अच्छी नींद लेना

    कोर्टिसोल लेवल को बनाएं रखने वाली डाइट

    डॉक्टर से सलाह, जांच और उनके अनुसार दवाओं का सेवन.

    अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें.