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  • दुनिया का वो फल, जिसे खाने के बाद नींबू भी लगेगा मीठा,

    दुनिया का वो फल, जिसे खाने के बाद नींबू भी लगेगा मीठा,

    दुनिया का वो फल, जिसे खाने के बाद नींबू भी लगेगा मीठा,

    दुनिया में आपने कई तरह के फल खाए होंगे. कुछ मीठे होते हैं, कुछ खट्टे और कुछ स्वाद में बिल्कुल अलग. लेकिन क्या आपने कभी ऐसे फल के बारे में सुना है, जिसे खाने के बाद खट्टा नींबू भी आपको मीठा लगने लगे? सुनने में यह किसी जादू से कम नहीं लगता, लेकिन प्रकृति ने ऐसा फल सच में बनाया है. इसे खाने के बाद कुछ समय तक खट्टी चीजों का स्वाद भी मीठा महसूस हो सकता है. यही वजह है कि इसे ‘मिरेकल फ्रूट’ (Miracle Fruit) कहा जाता है. इस फल का वैज्ञानिक नाम Synsepalum dulcificum है. यह सपोटेसी फैमिली (Sapotaceae family) का पौधा है और पश्चिम अफ्रीका(West Africa) के घाना समेत कुछ अन्य इलाकों में पाया जाता है. इसके फल छोटे और लाल रंग के होते हैं और देखने में कुछ-कुछ बेरी जैसे लगते हैं. इस फल की सबसे खास बात इसका स्वाद नहीं, बल्कि इसका असर है. इसे खाने के बाद जब कोई व्यक्ति नींबू, सिरका या दूसरी खट्टी चीज भी खाता है तो उसका स्वाद कुछ समय के लिए मीठा लगता है.

    आखिर खट्टी चीज मीठी कैसे लगती है?
    इस फल में मिराकुलिन (Miraculin) नाम का एक ग्लाइकोप्रोटीन पाया जाता है. यही इस पूरे ‘चमत्कार’ के पीछे की वजह है. मिराकुलिन हमारी जीभ पर मौजूद स्वाद रिसेप्टर्स के साथ काम करता है. मिरैकल फ्रूट खाने के बाद जब हम कोई खट्टी चीज खाते हैं, तो उस खट्टी चीज की अम्लीयता(Acidity) मिराकुलिन के काम करने के तरीके को बदल देती है. इसके कारण दिमाग तक पहुंचने वाला स्वाद मीठा महसूस होने लगता है. यानी नींबू वही रहता है, लेकिन उसे खाने पर मिलने वाला स्वाद बदल जाता है.

    करीब एक घंटे तक महसूस हो सकता है असर
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिरैकल फ्रूट खाने के बाद इसका असर करीब 30 मिनट से एक घंटे या उससे कुछ ज्यादा समय तक रह सकता है. इस दौरान नींबू, सिरका जैसी खट्टी चीजें सामान्य से काफी मीठी लग सकती हैं. हालांकि इसका असर हर व्यक्ति पर एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है. यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि यह फल किसी खट्टी चीज की अम्लीयता को खत्म नहीं करता, बल्कि स्वाद महसूस होने के तरीके को बदलता है.

    फल को लंबे समय तक रखना है मुश्किल
    मिरैकल फ्रूट की एक बड़ी परेशानी यह है कि इसे लंबे समय तक ताजा रखना आसान नहीं होता. फल जल्दी खराब हो सकता है, इसलिए इसे एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण है. इसी वजह से मिराकुलिन को दूसरे रूपों में इस्तेमाल करने पर भी रिसर्च और काम किया गया है. मिरैकल फ्रूट से बने उत्पादों का इस्तेमाल कम चीनी वाले खाद्य पदार्थों में मीठा स्वाद महसूस कराने के लिए किया जा सकता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इसे किसी बीमारी का इलाज या वजन घटाने का आसान तरीका माना जाए.

    कैंसर मरीजों के लिए भी मददगार साबित हो रहा फल
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिन्सेपलम डुलसिफिकम (Synsepalum dulcificum) कैंसर के मरीजों के लिए खाने का अनुभव बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. इलाज के दौरान कई मरीजों को खाने का स्वाद अच्छा नहीं लगता. ऐसे में यह छोटा-सा लाल फल उनके लिए काफी दिलचस्प साबित हो रहा है. इसे खाने के बाद करीब 30 से 60 मिनट तक खट्टी और कुछ कड़वी चीजों का स्वाद मीठा महसूस हो सकता है. यानी मिरेकल फ्रूट खाने के बाद नींबू या दूसरे खट्टे फलों का स्वाद भी मीठा और स्वादिष्ट लगने लगता है. इससे मरीजों के लिए खाना कुछ हद तक ज्यादा स्वादिष्ट हो सकता है और खाने में उनकी रुचि बनी रह सकती है. इस तरह जरूरी पोषण लेने में भी मदद मिल सकती है.

    अफ्रीका से अमेरिका तक उगाया जाता है यह फल
    सिन्सेपलम डुलसिफिकम मूल रूप से पश्चिम अफ्रीका का फल है, लेकिन अब इसकी खेती अमेरिका के मियामी में भी की जाती है. इसके फल या जूस का सेवन करने के बाद नींबू जैसी खट्टी चीजों का स्वाद काफी अलग महसूस हो सकता है. यही अनोखी खासियत इसे दूसरे फलों से अलग बनाती है. रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका में कुछ कैंसर अस्पतालों में भी मिरेकल बेरीज मरीजों को उपलब्ध कराई जाती हैं. फल जल्दी खराब हो जाता है, इसलिए इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए फ्रीज करके भी बेचा जाता है. हालांकि, इसे कैंसर का इलाज नहीं माना जाता, बल्कि इसका इस्तेमाल मरीजों के खाने के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है.

     



  • पहली बार डेट पर जा रहे हैं? फर्स्ट डेट पर प्यार से पहले ये 5 चीजें नोटिस करता है सामने वाला, जरा सी गलती हुई तो रिश्ता जुड़ने से पहले ही हो जाएगा खत्म..

    पहली बार डेट पर जा रहे हैं? फर्स्ट डेट पर प्यार से पहले ये 5 चीजें नोटिस करता है सामने वाला, जरा सी गलती हुई तो रिश्ता जुड़ने से पहले ही हो जाएगा खत्म..

    पहली बार डेट पर जा रहे हैं? फर्स्ट डेट पर प्यार से पहले ये 5 चीजें नोटिस करता है सामने वाला, जरा सी गलती हुई तो रिश्ता जुड़ने से पहले ही हो जाएगा खत्म..

    किसी नए इंसान से पहली बार मिलते वक्त हम अक्सर सोचते हैं कि सामने वाला हमारे लुक्स और बातों से प्रभावित होगा या नहीं. लेकिन असल में पहली मुलाकात में कई ऐसी छोटी चीजें भी सामने वाले की नजर में आ जाती हैं, जिन पर हमारा ध्यान नहीं जाता. आपका व्यवहार, बातचीत और छोटी परेशानियों पर रिएक्शन रिश्ते की शुरुआत के बारे में काफी कुछ बता सकता है.

    1. दूसरों के साथ आपका व्यवहार कैसा है आप सिर्फ डेट पर सामने वाले के साथ अच्छा व्यवहार करें, इतना काफी नहीं. वह यह भी देख सकता है कि आप आसपास मौजूद लोगों से कैसे बात करते हैं. किसी वेटर या स्टाफ से रूखा व्यवहार आपके बारे में उतना ही बता सकता है, जितना सामने वाले से की गई मीठी बातें.

    2. क्या आप सामने वाले को बोलने देते हैं? अगर बातचीत में हर बार आप ही अपनी कहानी सुनाते रहें, तो यह आसानी से नोटिस हो जाता है. सामने वाला यह देख सकता है कि आप उसकी बात सुनते हैं या सिर्फ अपनी बारी का इंतजार करते हैं.

    3. खुद को लेकर आपका रवैया क्या है बहुत ज्यादा खुद की तारीफ करना और हर बात में खुद को साबित करना भी ध्यान खींच सकता है. वहीं अपनी कमियों को लेकर सहज रहना और बिना दिखावे के बात करना आत्मविश्वास का संकेत माना जा सकता है. असली कॉन्फिडेंस अक्सर शांत व्यवहार में नजर आता है.

    4. छोटी गड़बड़ी पर आप कैसे रिएक्ट करते हैं डेट के दौरान कोई चीज प्लान के मुताबिक न हो तो आपका असली मूड सामने आ सकता है. खाना देर से आया, रास्ते में परेशानी हुई या कोई छोटी गलती हो गई. ऐसे समय में आप गुस्सा करते हैं, चिढ़ते हैं या आराम से स्थिति संभाल लेते हैं, यह सामने वाला जरूर नोटिस कर सकता है.

    5. क्या आपकी दिलचस्पी सिर्फ डेट में है या इंसान में भी सिर्फ बातचीत चलाने के लिए सवाल पूछना और किसी को सच में जानने की कोशिश करना अलग बात है. सामने वाला यह महसूस कर सकता है कि आप उसकी बातों को याद रख रहे हैं, उसके अनुभवों में दिलचस्पी ले रहे हैं या बस अपनी पसंद-नापसंद बता रहे हैं.

  •  मेटल या लकड़ी किस प्रकार की नेमप्लेट चमकाती है किस्मत, जानें क्या कहता है वास्तु शास्त्र..

     मेटल या लकड़ी किस प्रकार की नेमप्लेट चमकाती है किस्मत, जानें क्या कहता है वास्तु शास्त्र..

     मेटल या लकड़ी किस प्रकार की नेमप्लेट चमकाती है किस्मत, जानें क्या कहता है वास्तु शास्त्र..

    Nameplate Vastu Tips: हम-आप में से बहुत लोग घर के मेन गेट और दहलीज के पास की दीवाल पर ‘नेमप्लेट’ लगाते हैं, जो भांति-भांति के होते हैं. ये लकड़ी, पत्थर, धातु, कांच, प्लास्टिक आदि में बने भिन्न-भिन्न शेप और साइज के दिखते हैं. वास्तु शास्त्र के मुताबिक, घर की नेमप्लेट केवल इंसान की पहचान की जरिया नहीं है, बल्कि यह घर का भाग्य जगाने वाली एक चाबी या युक्ति भी है. कहते हैं, यह ब्रह्मांड की सकारात्मक ऊर्जा और मां लक्ष्मी का ध्यान आपके घर की खींचती है. लेकिन इसमें दोष होने से यह घर की खुशियों में रुकावट भी बन सकती है. आइए जानते हैं, घर के नेमप्लेट से जुड़ा वास्तु नियम क्या है? मेटल, लकड़ी या पत्थर, कौन-सा नेमप्लेट भाग्य चमका सकती है.

    लकड़ी की नेमप्लेट

    वास्तु शास्त्र में लकड़ी की नेमप्लेट को स्थिरता और तरक्की का प्रतीक माना गया है. लकड़ी जो कि एक काष्ठ तत्व है, यह विकास, स्वास्थ्य और समृद्धि की वृद्धि का प्रतिनिधि है. नेमप्लेट के लिए हमेशा मजबूत और शुभ लकड़ी का उपयोग किया जाता है, जैसे- सागवान, शीशम, महोगनी, आम। प्लाइबोर्ड, एमडीएफ मैटेरियल, प्लास्टिक आदि से बनी नकली लकड़ी की फील देने वाली नेमप्लेट लगाने से बचना चाहिए.

    मेटल की नेमप्लेट

    मेटल की नेमप्लेट को वास्तुशास्त्र में धन और नए अवसरों का द्वार कहा गया है. धातु की नेमप्लेट बनवाने के लिए पीतल, तांबा, स्टील, लोहे आदि का उपयोग किया जाता है. इनकी कलात्मक प्लेट काफी उपयोगी सिद्ध होती है.

    शुभ दिशा: वास्तु शास्त्र के अनुसार मेटल नेमप्लेट के लिए घर के मुख्यद्वार की उत्तर और पश्चिम दिशा सर्वोत्तम है। ये दिशा मेटल नेमप्लेट के लिय वरदान हैं. उत्तर दिशा कुबेर की है. इस दिशा में ब्रास यानी पीतल की नेम प्लेट पैसों की तंगी खत्म सकती है.

    पत्थर की नेमप्लेट

    वास्तु शास्त्र के अनुसार, पत्थर का संबंध पृथ्वी तत्व है, जो सुरक्षा और मजबूती का परम प्रतीक है. यह देखा गया है कि लोग संगमरमर, ग्रेनाइट और अन्य रंगीन पत्थरों के खूबसूरत नेमप्लेट बनवाते हैं, जो बेहद शुभ माने गए हैं। ये बुरी नजर की नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेती है.

    शुभ दिशा: पत्थर के नेमप्लेट के लिए दक्षिण पश्चिम और उत्तर पश्चिम दिशा शुभ होते हैं. दक्षिण पश्चिम के स्वामी पृथ्वी तत्व है. यहां नेमप्लेट लगाने से घर के मुखिया का समाज और परिवार में दबदबा रहता है.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी वास्तु शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • कम उम्र में फैटी लिवर? बिना शराब पिए भी लिवर क्यों हो रहा है डैमेज, जानिए शुरुआती संकेत.

    कम उम्र में फैटी लिवर? बिना शराब पिए भी लिवर क्यों हो रहा है डैमेज, जानिए शुरुआती संकेत.

    कम उम्र में फैटी लिवर? बिना शराब पिए भी लिवर क्यों हो रहा है डैमेज, जानिए शुरुआती संकेत.

    आज के वक्त में लोगों ने अपनी लाइफस्टाइल को इतना खराब कर लिया है कि शरीर अंगों का घर कम बीमारियों को अड्डा बनता चला जा रहा है. आप गौर करेंगे कि आज के वक्त में किसी फिट आदमी को ढूंढना रेगिस्तान में पानी मिलना जितना मुश्किल हो गया है. बड़ी संख्या में लोग ऐसे हैं, जो दिल की बीमारी, मोटापा, शुगर की समस्या से पीड़ित है. इसी में एक समस्या जो सबसे ज्यादा लोगों को परेशान करती है और अपना शिकार बना रही है, वह है फैटी लिवर की समस्या. इस समस्या को लेकर माना जाता रहा है कि फैटी लिवर उन्हीं को होता, जो शराब का सेवन करते हैं, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है, शराब को हाथ तक नहीं लगाने वाले युवा जिनकी उम्र भी कम होती है, वह भी इस समस्या का तेजी से शिकार हो रहे हैं. आइए जानते हैं क्यों.

    क्या है नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर?

    नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर Non-Alcoholic Fatty Liver Disease (NAFLD) एक ऐसी स्थिति है जिसमें शराब का सेवन न करने के बावजूद लिवर में जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा हो जाती है. इस स्थिति की सबसे खतरनाक बात ये होती है कि, इसके शुरुआती चरण में आमतौर पर कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते, साथ ही अक्सर लोगों को मालूम ही नहीं चलता है कि उनके लिवर पर फैट जमा हो रही है, जिसके बाद समस्या गंभीर होती जाती है और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है.

    युवाओं में किन-किन कारणों से हो सकता है फैटी लिवर?

    ILBS द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, फैटी लिवर बीमारी के आम जोखिम कारण हो सकते हैं, इनमें;

    डायबिटीज

    ज्यादा वजन/ मोटापा

    हाई ब्लड प्रेशर की समस्या

    डिस्लिपिडेमिया

    मेटाबोलिक सिंड्रोम (नीचे दी गई सूची में से कोई भी 3 स्थितियां: इंसुलिन रेजिस्टेंस/डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, पेट का मोटापा, हाई ट्राइग्लिसराइड लेवल और कम HDL-कोलेस्ट्रॉल का खतरा बढ़ा सकती है).

    जेनेटिक कारण

    अस्वस्थ खानपान

    सुस्त जीवनशैली यानी फिजिकल एक्टिविटी की कमी

    फैटी लिवर की समस्या में ऐसे दिखते हैं संकेत

    शुरुआती स्टेज में ज्यादातर लोगों में कोई लक्षण नहीं दिखते, लेकिन कुछ लोगों में नीचे दिए गए स्थितियों में दिखाई दे सकते हैं.

    पेट में दर्द का बना रहना

    बहुत ज्यादा थकान

    भूख न लगना

    जी मिचलाना

    कैसे खुद को रखें फैटी लिवर की समस्या से दूर

    फैटी लिवर की बीमारी से बचने का सबसे अच्छा तरीका है अपनी सेहत का ध्यान रखें, इसके लिए वजन सही बनाए रखें. अगर वजन ज्यादा है या मोटापा है, तो धीरे-धीरे वजन कम करने की कोशिश करें. इसके साथ ही, हेल्दी डाइट लें, नियमित रूप से एक्सरसाइज करें, शराब का सेवन बंद करें, डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लें. हालांकि, अगर को फैटी लिवर हो गया है, तो आपको क्या करना चाहिए इसके बारे में भी ILBS ने जानकारी दी है. ILBS के अनुसार, वजन कम करें, हेल्दी खाना खाएं जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, सलाद और ज्यादा फाइबर वाला खाना खाएं. इसके साथ ही, फिजिकल एक्सरसाइज करें, शराब से दूर रहें और फैटी खाना खाने से बचें.

    अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें.

  • 200 साल बाद घर जन्मी बिटिया, रथ पर सवार होकर अस्पताल से घर पहुंची; 5 पीढ़ियों से था इंतजार

    200 साल बाद घर जन्मी बिटिया, रथ पर सवार होकर अस्पताल से घर पहुंची; 5 पीढ़ियों से था इंतजार

    200 साल बाद घर जन्मी बिटिया, रथ पर सवार होकर अस्पताल से घर पहुंची; 5 पीढ़ियों से था इंतजार

    महाराष्ट्र के बीड जिले से एक दिल छू लेने वाली एक अनोखी तस्वीर सामने आई है. जिले के परली के रहने वाले दहीफले परिवार में करीब 200 साल और पांच पीढ़ियों के लंबे इंतजार के बाद एक बेटी का जन्म हुआ है. दो सदियों बाद घर में कन्या पैदा होने की इस खुशी को परिवार ने एक राजकुमारी के स्वागत की तरह मनाया. अस्पताल से छुट्टी के बाद नवजात बच्ची और उसकी मां को फूलों से सजे एक भव्य रथ पर बैठाकर पूरे गाजे-बाजे के साथ घर लाया गया.

    ढोल-ताशे और शाही अंदाज में स्वागत

    सौभाग्यवती कल्पना ऋषिकेश दहीफले ने एक बच्ची को जन्म दिया. बच्ची का नाम परिवार ने गार्गी रखा है. परिवार के मुताबिक, उनके खानदान में पिछली पांच पीढ़ियों से किसी बेटी का जन्म नहीं हुआ था. अस्पताल से जब मां और बच्ची को छुट्टी मिली, तो परिवार ने फूलों का रथ तैयार करवाया. इसके साथ ही ढोल, ताशे बजाते हुए जुलूस निकाला गया.

    क्या बोला परिवार?

    इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, गार्गी के दादा लिंबाजी दहीफले पोती के जन्म की जानकारी मिलने के बाद बेहद भावुक हो गए. उन्होंने कहा, ‘परिवार में बेटी का जन्म होना बड़े सौभाग्य की बात है. इतने वर्षों से हमारे मन में घर में बेटी न होने का जो मलाल था, वह आज दूर हो गया है.’

    वहीं, बच्ची की दादी सुरेखा दहीफले ने खुशी जताते हुए कहा कि हम बेहद खुश हैं कि आज हमारे घर साक्षात लक्ष्मी पधारी हैं.

    गार्गी के पिता ऋषिकेश ने कहा, ‘अक्सर लोग बेटे की चाहत रखते हैं, लेकिन बेटी के पिता बनने का एहसास और उसकी खुशी सबसे अलग होती है. बेटियां अपने पिता से ज्यादा जुड़ी होती हैं. हम अपनी बेटी को एक फूल की तरह नाजों से पालेंगे.’

  • कोई भी इंसान पूरी तरह से परफेक्ट नहीं होता! कामयाबी पानी है तो तुरंत छोड़ दें ये आदतें, सफलता चूमेगी आपके कदम

    कोई भी इंसान पूरी तरह से परफेक्ट नहीं होता! कामयाबी पानी है तो तुरंत छोड़ दें ये आदतें, सफलता चूमेगी आपके कदम

    Success Tips: कोई भी इंसान पूरी तरह से परफेक्ट नहीं होता! कामयाबी पानी है तो तुरंत छोड़ दें ये आदतें, सफलता चूमेगी आपके कदम

    कई भी व्यक्ति सफल यूं ही नहीं हो जाता है. वह सफलता पानी के लिए कड़ी मेहनत करता है. चूंकि कोई भी व्यक्ति पूरी तरह परफेक्ट नहीं होता है, ऐसे सफल होने के लिए व्यक्ति को अपनी बुरी आदतों को त्याग करना पड़ता है. यदि आप भी जीवन में सफल होना चाह रहे हैं तो हम आपको बता रहे हैं कि आपको तुरंत अपनी किन-किन आदतों को छोड़ देनी चाहिए. आपको मालूम हो कि कई बार हम अपनी कुछ आदतों की वजह से लक्ष्य पाने से पीछे रह जाते हैं. आपको यह मालूम होना चाहिए कि सिर्फ मेहनत ही नहीं बल्कि मानसिक तौर पर मजबूत रहने से सफलता आपके कदम चूमेगी.

    1. सही प्लान बनाएं कई बार हम अपने मन में यह सोच तो लेते हैं कि जीवन में सफल होने के लिए क्या करना है लेकिन इसके लिए कोई ठोस रणनीति नहीं बनाते हैं. इसके चलते हम कड़ी मेहनत करने पर भी सफल नहीं हो पाते हैं. यदि जीवन में सफल होना है, लक्ष्य को पाना है तो एक बेहतरीन प्लान बनाकर काम करना होगा. ऐसे में किसी भी काम को करने से पहले उसके बारे में ए टू जे जानकारी एकत्र कर लेनी चाहिए. फिर एक समय सीमा तय कर पूरी ईमानदारी से अपने लक्ष्य को पाने के लिए जुट जाना चाहिए. ऐसा करने से सफलता जरूर कदम चूमेगी.

    2. कल पर न टालें कोई भी काम यदि आप जीवन में सफल होना चाहते हैं तो किसी भी काम को कल पर न टालें. आप कोशिश करें हर दिन छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं और उन्हें पूरा करके ही दम लें. आपको मालूम हो कि कल पर काम टालने के कारण काम का बोझ इतना बढ़ जाता है कि फिर वह कभी पूरा ही नहीं होता है. आपको काम को टालने की आदत हमें लक्ष्य से बहुत दूर ले जाती है. ऐसे में किसी भी काम को टालने की बजाय उसे तुरंत करने की आदत डालें. आपको मालूम हो कि जो लोग सही समय का इंतजार किए बिना अपना काम करते हैं, ऐसे लोग जल्द ही सफलता प्राप्त कर लेते हैं.

    3. समय-समय पर काम की समीक्षा करते रहें यदि आपने जीवन में कोई लक्ष्य बना लिया है तो उसको प्राप्त करने के लिए जी जान से तुरंत जुट जाइए. इसके साथ ही अपने काम की समय-समय पर समीक्षा करते रहना चाहिए. इससे आपको पता चलेगा कि आप लक्ष्य की प्राप्ति में सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं या नहीं. कई बार ऐसा होता है कि हम अपना लक्ष्य तो बना लेते हैं लेकिन लक्ष्य के प्रति हमारी कोई दिलचस्पी नहीं रहती है. अपने काम की समीक्षा करते रहने से यह पता चलता है कि कहीं हम अपने लक्ष्य से भटक तो नहीं रहे हैं.

    4. नकारात्मक नहीं सकारात्मक सोचें कई बार जब हमें किसी काम में मनचाहा परिणाम नहीं मिल पाता है तो हम चीजों को लेकर नकारात्मक हो जाते हैं. ये हमारी सोच का हिस्सा कब बन जाता है इसका हमें अंदाजा ही नहीं रहता है. ऐसे में हमेशा नकारात्मक नहीं सकारात्मक सोचें. सफलात अवश्य कदम चूमेगी.

    5. हर चीज में परफेक्ट बनने की चाहत छोड़ दें यह ध्यान रखना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति हर चीज में परफेक्ट नहीं होता है. हर चीज में परफेक्ट बनने की चाहत हमें लाभ के बजाय हानि पहुंचाती है. ऐसे में हमें किसी दूसरे से अपनी तुलना नहीं करनी चाहिए. बस कोशिश यह रहनी चाहिए कि किस तरह से हम अपने आप को बेहतर बनाएं और अपने लक्ष्य को प्राप्त करें.

    6. असफल होने पर हार नहीं मानें यदि आप एक-दो बार असफल होने पर हार मान लेते हैं तो ये करना तुरंत छोड़ दें. आप अपने फेलियर को कभी भी अपने रास्ते की रुकावट नहीं बनने दें. अपनी गलतियों से सीख लें और सफल होने के लिए पूरी मेहनत से फिर जुट जाएं. सफलता आपके कदम जरूर चूमेगी.

  • गणेश जी ने बिना दौड़े जीत ली थी ब्रह्मांड की रेस, जानें क्या है जीवन का असली तीर्थ..

    गणेश जी ने बिना दौड़े जीत ली थी ब्रह्मांड की रेस, जानें क्या है जीवन का असली तीर्थ..

    GANESH-JI

    Ganesha Story: भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को हुआ था। वे हर मांगलिक कार्य और पूजा-पाठ में सभी देवताओं से सबसे पहले पूजे और आह्वान किए जाते हैं, क्योंकि वे देवों में ‘प्रथम पूज्य’ हैं। उनके अग्रपूज्य या प्रथम पूज्य बनने की कथा बहुत रोचक, शिक्षाप्रद और मोटिवेशनल है। इसके उन्हें सभी देवताओं के बीच ब्रह्मांड की रेस जीतनी पड़ी थी और उन्होंने बताया की जीवन का असली तीर्थ क्या है। आइए जानते हैं, यह पूरी कथा…

    देवों में प्रथम पूजा का विवाद

    एक बार देवलोक में इंद्र समेत सभी देवताओं में यह विवाद शुरू हो गया कि देवताओं में सबसे पहले पूजा किसकी होगी। अग्नि, वायु, सूर्य, चंद्रमा सहित सभी देवताओं ने अपने अपने महत्व का बखान किया कि क्यों उनकी पूजा सबसे पहले होनी चाहिए। हर देवता स्वयं को श्रेष्ठ और प्रथम पूज्य होने का दावेदार बता रहे थे। बहुत विकट स्थिति थी।

    ब्रह्मांड के 3 चक्कर

    कहते जब विवाद का कोई हल नहीं निकला, तो वे सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी के पास पहुंचे। ब्रह्मा जी ने ही ब्रह्मांड और संसार के नियम बनाए थे। उन्होंने देवताओं से कहा कि आप सभी देवता अपने वाहनों पर सवार होकर इस पूरे ब्रह्मांड का 3 चक्कर लगाएं। जो देव सबसे पहले यह काम पूरा कर लेंगे, उसे देवों में अग्रगण्य और प्रथम पूज्य का अधिकार प्राप्त होगा।

    शुरू हुई देव प्रतियोगिता

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्रथम पूज्य प्रतियोगिता की यह चुनौती प्राप्त होते ही सभी देवता आपने वाहनों और सवारियों पर ब्रह्मांड की दौड़ पर निकल पड़े। यह सृष्टि की पहली प्रतियोगिता थी। इंद्र अपने ऐरावत पर, वायुदेव अपने हिरण पर, कार्तिकेय अपने मोर और दूसरे देव अपनी-अपनी सवारियों पर भागे जा रहे थे।

    गणेश जी ने लगाई बुद्धि

    इधर गणेश जी के समक्ष भारी संकट उपस्थित हो गया। उनके पास मंदगामी छोटा मूषक वाहन था। दूसरे उनके शरीर का वजन अत्यधिक था। वे जानते थे, ब्रह्मांड की इस रेस में वे देवों पराजित नहीं कर पाएंगे। वे परमशास्त्र ज्ञानी थे। उन्होंने अपनी तीक्ष्ण बुद्धि और विवेक का सहारा लिया।

    माता-पिता की परिक्रमा

    गणेश जी ने निवेदन कर अपने माता-पिता यानी माता पार्वती और पिता महादेव गणेश को आदरपूर्वक एक आसन पर बैठाया और वे अपने वाहन मूषकराज पर बैठ गए। और इसके बाद उन्होंने श्रद्धापूर्वक 3 चक्कर लगाकर पार्वती जी और शिव जी को नमन किया।

    देवताओं ने की आपत्ति

    पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, जब सभी देवगण पूरे ब्रह्मांड का चक्कर लगाकर वापस लौटे तो थके-हारे देवताओं को गणेश जी वहां पहले से उपस्थित मिले। ब्रह्मा जी हर बात जानते थे। उन्होंने गणेश को विजेता घोषित कर दिया। इसपर देवताओं ने काफी आपत्ति जताई, विशेषकर कार्तिकेय जी ने जिन्होंने ब्रह्मांड के 3 चक्कर सबसे पहले लगाए थे।

    ब्रह्मा जी का न्याय

    देवताओं पर आपत्ति पर ब्रह्मा जी ने शास्त्रों का प्रमाण देते हुए कहा कि जो संतान अपने माता-पिता सेवा, पूजा और परिक्रमा करते हैं, उसे पूरे ब्रह्मांड और पृथ्वी की परिक्रमा का फल स्वतः मिल जाता है। माता-पिता की सेवा और पूजा ही असली तीर्थ है। इस अभिभाषण और तर्क के आगे सभी देवताओं का सिर झुक गया। तभी से गणेश जी हिन्दू संस्कृति के देव समूह में ‘प्रथम पूज्य देव’ हैं।

  • बड़ी आंत के कैंसर के क्या लक्षण होते हैं? ये 2 Symptoms दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलना है जरूरी..

    बड़ी आंत के कैंसर के क्या लक्षण होते हैं? ये 2 Symptoms दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलना है जरूरी..

    बड़ी आंत के कैंसर के क्या लक्षण होते हैं? ये 2 Symptoms दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलना है जरूरी..

    Badi Aant Ka Cancer: बाउल कैंसर बड़ी आंत से रेक्टम तक के हिस्से में होता है. बड़ी आंत पाचन तंत्र का वो हिस्सा है जो भोजन से वॉटर एब्जॉर्ब करता है और शरीर से वेस्ट पदार्थ को बाहर निकालता है. बाउल कैंसर कितना गंभीर है यह इस बात पर निर्भर करता है कि यह कैंसर कितना बड़ा है, कहां तक फैल गया है और मरीज की सेहत कैसी है. ऐसे में इस कैंसर के लक्षणों को जल्द से जल्द पहचानना और इलाज शुरू करना जरूरी होता है. नैशनल हेल्थ सर्विस (NHS) यूके ने बाउल कैंसर के ऐसे लक्षणों का जिक्र किया है जिन्हें इग्नोर नहीं करना चाहिए.

    बाउल कैंसर के क्या लक्षण होते हैं | Signs And Symptoms Of Bowel Cancer

    बाउल मूवमेंट्स में बदलाव होना, जैसे मल का अलग दिखना, लंबे समय तक डायरिया या कब्ज होना.

    अचानक से सामान्य से कम या ज्यादा बार मलत्याग करना भी आंत की किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है

    मल में खून नजर आना या मल का रंग लाल या काला दिखना

    मलद्वार से खून निकलना

    मलत्याग करने के तुरंत बाद ऐसा महसूस होना जैसे फिर से मलत्याग करने की जरूरत है

    पेट में दर्द होना

    पेट में गांठ बनना

    हमेशा पेट फूला हुआ रहना

    बिना कोशिश किए ही वजन का कम होना

    थका हुआ महसूस करना और सांस फूलना. यह बाउल कैंसर के कारण होने वाले अनीमिया का लक्षण हो सकता है.

    ये 2 लक्षण दिखें तो डॉक्टर से तुरंत मिलें

    अगर मल का रंग काला या गहरा लाल दिखे या फिर खून वाले दस्त होने लगें.

    अगर मलद्वार यानी रेक्टम से खून निकलने लगे या मल में बड़े खून के थक्के नजर आएं.

    इस बात का रखें खास ख्याल

    मल में खून या अन्य लक्षण किसी और समस्या के चलते भी हो सकते हैं. जब तक यह कंफर्म ना हो कि आपको बाउल कैंसर है पैनिक ना करें. डॉक्टर से मिलें और जांच कराकर समस्या की जड़ तक जाएं.

    बाउल कैंसर होने के क्या कारण होते हैं

    बाउल कैंसर होने के सटीक कारणों (Bowel Cancer Causes) का पता नहीं है लेकिन यह जेनेटिक चेंजेस, लाइफस्टाइल और एन्वायरमेंटल फैक्टर्स के चलते हो सकता है. इसके अलावा कुछ ऐसी कंडीशंस हैं जो आपको बाउल कैंसर का मरीज बना सकती हैं.

    जिन लोगों की उम्र 50 वर्ष से ज्यादा है, जो धूम्रपान करते हैं, जो मोटापे के शिकार हैं, जिनके करीबी रिश्तेदार को बाउल कैंसर हुआ है, जिन्हें बाउल पॉलीप्स की दिक्कत हो, जो इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज से पीड़ित हों उनमें बाउल कैंसर होने की संभावना ज्यादा होती है.

    अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें.

  • वराह जयंती कब है? भगवान विष्णु ने क्यों लिया जंगली सूअर का अवतार? जानें महत्व और पूजा विधि

    वराह जयंती कब है? भगवान विष्णु ने क्यों लिया जंगली सूअर का अवतार? जानें महत्व और पूजा विधि

    वराह जयंती कब है? भगवान विष्णु ने क्यों लिया जंगली सूअर का अवतार? जानें महत्व और पूजा विधि

    Varah Jayanti 2026: हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु ने पाप का नाश करने और धर्म की संस्थापना के लिए बहुत अनोखे-अनोखे काम किए और ऐसे-ऐसे अवतार लिए हैं, जिनके बारे में सोचकर हैरत होती है। जरा कल्पना कीजिए, पूरी सृष्टि जलमग्न हो जाती और पृथ्वी का अस्तित्व खतरे में होता है। तब भगवान विष्णु एक बेहद आक्रामक और अनूठा रूप धारण करते हैं।

    भगवान विष्णु का वराह अवतार एक ऐसा ही अवतार है, जो रहस्यमय और आश्चर्यजनक है। वराह का अर्थ होता है- ‘जंगली सूअर’। इस अवतार में भगवान विष्णु की अदम्य शक्ति और इच्छा सामने उभर कर आती है, जिसमें आक्रामकता के साथ संरक्षण का भाव है। आइए जानते हैं, वर्ष 2026 में उनके इस अवतार की जयंती कब है और पूजा विधि और अनुष्ठान क्या हैं?

    वराह जयंती 2026 कब है?

    वराह जयंती हर साल भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल यह तिथि रविवार 13 सितंबर 2026 को पड़ रही है। पंचांग के अनुसार, तृतीया तिथि की शुरुआत 13 तारीख की सुबह में 7 बजकर 8 मिनट पर हो रही है और इस तिथि का समापन 14 सितंबर को 7 बजकर 8 मिनट पर हो रही है।

    पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त: द्रिक पंचांग के अनुसार, भगवान विष्णु के वराह रूप की पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त मध्याह्न यानी दोपहर में है, जो 1 बजकर 30 मिनट से अपराह्न के 4 बजे तक है।

    भगवान ने क्यों लिया वराह अवतार?

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, हिरण्याक्ष नामक असुर ने अपनी प्रचंड शक्ति से तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया था और देवताओं को भी स्वर्ग से निकाल दिया था। केवल इतना ही नहीं, उसने पृथ्वी को भी चुरा लिया था और उसे समुद्र के गर्भ में छिपा दिया था। इससे पूरी धरती पर भी त्राहि-त्राहि मची हुई थी। सृष्टि का संतुलन बिगड़ गया था।

    तब देवताओं के आह्वान पर भगवान विष्णु ने हिरण्याक्ष के अंत के लिए वराह अवतार लिया था। कहते हैं, हिरण्याक्ष ने ब्रह्मा जी से वरदान मांगा था कि वह किसी ज्ञात जीवों और पशुओं से नहीं मारा जाएगा, लेकिन वह वराह यानी जंगली शूकर या सूअर का नाम लेना भूल गया था। इसी का लाभ लेकर विष्णु जी ने एक विशाल और भयंकर वराह का अवतार लिया और हिरण्याक्ष का अंत कर पृथ्वी की रक्षा की।

    वराह जयंती पूजा विधि

    • वराह जयंती के दिन यानी 13 सितंबर 2026 को सुबह जल्दी उठकर स्नान-आचमन कर व्रत का संकल्प लें.
    • पूजा के समय जल से भरे एक कलश पर भगवान वराह की मूर्ति या फोटो स्थापित करें.
    • फिर, पंचामृत से वराह रूप भगवान विष्णु का अभिषेक करें.
    • भगवान को पीले वस्त्र, पीले पुष्प, मिष्टान्न और नैवेद्य चढ़ाएं.
    • पूजा के दौरान,’ॐ वाराहाय नमः’ मंत्र का जाप करें.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. 

  • हर 30-60 मिनट में उठना क्यों जरूरी? लंबे समय तक बैठने पर शरीर में क्या होता है, NIH की रिसर्च से जानिए..?

    हर 30-60 मिनट में उठना क्यों जरूरी? लंबे समय तक बैठने पर शरीर में क्या होता है, NIH की रिसर्च से जानिए..?

    हर 30-60 मिनट में उठना क्यों जरूरी? लंबे समय तक बैठने पर शरीर में क्या होता है, NIH की रिसर्च से जानिए..?

    आजकल ऑफिस का काम, पढ़ाई, मोबाइल और टीवी की वजह से कई लोग दिन का बड़ा हिस्सा बैठे-बैठे गुजार देते हैं. समस्या सिर्फ यह नहीं है कि हम कितना व्यायाम करते हैं, बल्कि यह भी है कि हम लगातार कितनी देर तक बैठे रहते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन और नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर कोई लंबे वक्त तक बैठा रहता है तो उसे कई तरह की दिक्कतें होने लगती हैं. रिसर्च में बताया गया है कि दिल की बीमारी, टाइप 2 डायबिटीज और हेल्थ से जुड़ी परेशानियां होने लगती हैं. लगातार बैठे रहने से शरीर का सर्कुलेशन कम होने लगता है और फैट जमने लगता है. इसलिए डॉक्टर्स हर 30 मिनट में उठने की सलाह देते हैं.

    लंबे समय तक लगातार बैठने पर शरीर में क्या होता है?

    जब हम लंबे समय तक बिना उठे बैठे रहते हैं तो पैरों और शरीर का मेटाबॉलिज्म सुस्त पड़ जाता है. फिजिकल एक्टिविटी न होने की वजह से फैट और कोलेस्ट्रॉल जमा होने लगता है. इससे ब्लड सर्कुलेशन इफेक्ट होता है, जिससे आगे चलकर दिल की बीमारी होने का खतरा दोगुना बढ़ जाता है.

    ब्लड शुगर पर असर होना

    रिसर्च में पाया गया है कि लंबे समय तक बैठने और हर 30 मिनट में उठने का तरीका अलग अलग था. लगातार बैठने की वजह से भूख कम लगती है और वजन बढ़ने लगता है. इससे ब्लड शुगर का लेवल ऊपर नीचे होता रहता है.

    पैरों के ब्लड सर्कुलेशन में बदलाव

    लगातार बैठे रहने से पैरों का ब्लड सर्कुलेशन कम हो सकता है. रिसर्च में पाया गया है कि 4 घंटे लगातार बैठने के दौरान पैरों की सुपरफिशियल फेमोरल आर्टरी में ब्लड सर्कुलेशन कम हुआ, जबकि ब्रेक लेने वालों में कमी देखी गई.

    कितनी देर में उठना चाहिए?

    हर 60 मिनट में उठने से कई तरह के फायदे मिल सकते हैं. यह हर इंसान के ब्रेक लेने का तरीका अलग हो सकता है. इसलिए वक्त 60 से बढ़कर ज्यादा भी हो सकता है. बस आपको लगातार कुछ घंटों तक नहीं बैठना है. उठने के लिए आप चाय या पानी पीने के लिए ब्रेक ले सकते हैं. बाहर जाकर कुछ खा सकते हैं या अपने दोस्त के साथ टहलने का प्लान बना सकते हैं.

    अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें