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  • क्या घोंघे से मसाज कराने: पर सच में निखरती है त्वचा और कम होता है तनाव? जानिए स्किन रिपेयर, हैप्पी हार्मोन और इससे जुड़े जोखिमों की सच्चाई

    क्या घोंघे से मसाज कराने: पर सच में निखरती है त्वचा और कम होता है तनाव? जानिए स्किन रिपेयर, हैप्पी हार्मोन और इससे जुड़े जोखिमों की सच्चाई

    क्या घोंघे से मसाज कराने: पर सच में निखरती है त्वचा और कम होता है तनाव? जानिए स्किन रिपेयर, हैप्पी हार्मोन और इससे जुड़े जोखिमों की सच्चाई

    ग्लोइंग और जवां त्वचा पाने के लिए दुनियाभर में कई तरह के ब्यूटी ट्रेंड अपनाए जाते हैं। कोरियन स्किन केयर से जुड़े ट्रेंड्स के बीच इन दिनों स्नेल मसाज यानी घोंघे से त्वचा की मसाज को लेकर भी दिलचस्पी देखी जा रही है। इस प्रक्रिया में जीवित घोंघे को चेहरे पर चलने दिया जाता है, जिससे निकलने वाला म्यूकस त्वचा पर फैल जाता है। इसे त्वचा को नमी देने और मुलायम बनाने वाला माना जाता है।

    इस ट्रेंड को लेकर कुछ दावे ऐसे भी किए जाते हैं कि घोंघे का हल्का स्पर्श तनाव कम कर सकता है, शरीर में ऑक्सीटोसिन जैसे हार्मोन के स्तर को बढ़ा सकता है और त्वचा के टिश्यू की मरम्मत में मदद कर सकता है। लेकिन इन सभी दावों के लिए वैज्ञानिक प्रमाण एक जैसे मजबूत नहीं हैं। स्नेल म्यूकिन युक्त स्किन केयर प्रोडक्ट्स पर कुछ शुरुआती शोध जरूर हुए हैं, लेकिन जीवित घोंघे से मसाज कराने के फायदे और सुरक्षा को लेकर पर्याप्त उच्च गुणवत्ता वाले अध्ययन उपलब्ध नहीं हैं।

    क्या है स्नेल मसाज और यह कैसे की जाती है?

    स्नेल मसाज एक ऐसी ब्यूटी प्रक्रिया है, जिसमें प्रशिक्षित व्यक्ति त्वचा पर कुछ समय के लिए जीवित घोंघे को चलने देता है। इस दौरान घोंघे से निकलने वाला चिपचिपा पदार्थ, जिसे म्यूकस या म्यूकिन कहा जाता है, त्वचा पर लग जाता है।

    इस प्रक्रिया का उद्देश्य त्वचा को नम और मुलायम बनाना बताया जाता है। हालांकि, जीवित घोंघे से मसाज कराना और स्नेल म्यूकिन से बना कॉस्मेटिक उत्पाद इस्तेमाल करना दो अलग-अलग चीजें हैं। किसी क्रीम या सीरम में मौजूद शुद्ध और प्रोसेस किए गए स्नेल सेक्रेशन के संभावित लाभों को सीधे जीवित घोंघे से मसाज के लाभों का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

    स्नेल म्यूकिन में कौन-से तत्व पाए जाते हैं?

    स्नेल सेक्रेशन फिल्ट्रेट (Snail Secretion Filtrate) का इस्तेमाल कुछ स्किन केयर उत्पादों में किया जाता है। इसकी संरचना घोंघे की प्रजाति और उत्पाद को तैयार करने की प्रक्रिया के अनुसार अलग हो सकती है। इसमें विभिन्न प्रकार के म्यूसिन, प्रोटीन और दूसरे जैविक घटक पाए जा सकते हैं।

    कुछ उत्पादों में त्वचा की देखभाल से जुड़े ऐसे घटक होते हैं, जो नमी बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, किसी घटक की मौजूदगी अपने आप यह साबित नहीं करती कि वह त्वचा की हर समस्या को ठीक कर सकता है।

    स्नेल म्यूकिन से जुड़े संभावित फायदे इस प्रकार बताए जाते हैं:

    • त्वचा को नमी देना: कुछ स्नेल म्यूकिन उत्पाद त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
    • त्वचा को मुलायम बनाना: मॉइस्चराइजिंग प्रभाव के कारण त्वचा अस्थायी रूप से अधिक स्मूद महसूस हो सकती है।
    • त्वचा की बाहरी परत को सहारा देना: कुछ कॉस्मेटिक फॉर्मूलेशन त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
    • फाइन लाइन्स कम दिखाई देना: त्वचा में नमी बढ़ने से बारीक रेखाएं कुछ समय के लिए कम स्पष्ट दिख सकती हैं।

    लेकिन इन प्रभावों का मतलब यह नहीं है कि स्नेल म्यूकिन निश्चित रूप से कोलेजन बढ़ाता है, गहरे निशान मिटाता है या त्वचा की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को तेजी से ठीक कर देता है।

    क्या स्नेल मसाज से त्वचा के टिश्यू रिपेयर होते हैं?

    त्वचा की मरम्मत एक जटिल जैविक प्रक्रिया है, जिसमें त्वचा की बाहरी परत, कोशिकाएं और कोलेजन जैसे संरचनात्मक प्रोटीन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। स्नेल म्यूकिन में मौजूद कुछ घटकों को लेकर प्रयोगशाला और शुरुआती शोध में संभावित लाभों का अध्ययन किया गया है।

    हालांकि, प्रयोगशाला में किसी घटक का उपयोगी दिखाई देना और वास्तविक लोगों की त्वचा पर उसका सुरक्षित एवं प्रभावी साबित होना अलग-अलग बातें हैं। अभी यह कहने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं कि जीवित घोंघे से मसाज कराने से त्वचा के टिश्यू की मरम्मत तेज होती है या घाव जल्दी भरते हैं।

    अगर त्वचा पर घाव, संक्रमण, गंभीर मुंहासे या सूजन है, तो स्नेल मसाज को इलाज के विकल्प के रूप में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

    क्या घोंघे से मसाज कराने पर बढ़ते हैं हैप्पी हार्मोन?

    ऑक्सीटोसिन को अक्सर ‘हैप्पी हार्मोन’ कहा जाता है, हालांकि शरीर में इसकी भूमिका इससे कहीं अधिक जटिल है। यह सामाजिक जुड़ाव और कुछ प्रकार की भावनात्मक प्रतिक्रियाओं से जुड़ा होता है। दूसरी ओर, कोर्टिसोल शरीर की तनाव प्रतिक्रिया में भूमिका निभाने वाला हार्मोन है।

    हल्का स्पर्श, आरामदायक माहौल और कुछ प्रकार की मसाज लोगों को शांत महसूस कराने में मदद कर सकती हैं। लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि घोंघे की त्वचा पर होने वाली हलचल से ऑक्सीटोसिन निश्चित रूप से बढ़ता है या कोर्टिसोल घटता है।

    विशेष रूप से स्नेल मसाज के दौरान हार्मोन में होने वाले बदलावों और तनाव कम करने के प्रभाव को साबित करने के लिए पर्याप्त विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इसे तनाव या एंग्जायटी का प्रमाणित उपचार मानना सही नहीं होगा।

    क्या स्नेल मसाज से झुर्रियां और मुंहासों के निशान कम हो सकते हैं?

    स्नेल म्यूकिन वाले कुछ उत्पादों को एंटी-एजिंग और त्वचा की नमी से जुड़े फायदों के लिए बेचा जाता है। त्वचा में पर्याप्त नमी होने पर उसकी सतह अधिक मुलायम दिख सकती है, जिससे बारीक रेखाएं कुछ कम नजर आ सकती हैं।

    लेकिन गहरी झुर्रियों, पुराने मुंहासों के गड्ढों, गहरे दाग-धब्बों या त्वचा की गंभीर क्षति को ठीक करने के लिए स्नेल मसाज की प्रभावशीलता स्थापित नहीं हुई है। ऐसे परिणामों के लिए त्वचा की समस्या के अनुसार अलग उपचार की जरूरत हो सकती है।

    त्वचा की देखभाल के लिए नियमित मॉइस्चराइजर, रोजाना ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन और त्वचा के प्रकार के अनुसार चुने गए उत्पाद अधिक व्यावहारिक विकल्प हैं।

    स्नेल मसाज के क्या जोखिम हो सकते हैं?

    जीवित घोंघे को सीधे चेहरे पर चलने देने में कुछ जोखिम हो सकते हैं, खासकर जब घोंघे की प्रजाति, उसकी देखभाल और स्वच्छता की स्थिति स्पष्ट न हो।

    1. एलर्जी और त्वचा में जलन: घोंघे के म्यूकस या इस्तेमाल किए जाने वाले उत्पाद के किसी घटक से कुछ लोगों को खुजली, लालिमा, जलन या एलर्जी हो सकती है।

    2. संक्रमण का जोखिम: जीवित घोंघे और उनके आसपास की सतहों पर मौजूद सूक्ष्मजीव त्वचा के संपर्क में आ सकते हैं। जोखिम का स्तर परिस्थितियों पर निर्भर करता है, लेकिन केवल किसी स्पा या क्लीनिक में प्रक्रिया कराने से संक्रमण का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता।

    3. संवेदनशील या क्षतिग्रस्त त्वचा पर परेशानी: जिन लोगों की त्वचा पर घाव, सक्रिय संक्रमण, सूजन या एक्जिमा जैसी समस्या है, उनके लिए ऐसी प्रक्रिया अधिक जोखिमपूर्ण हो सकती है।

    4. परिणामों को लेकर अनिश्चितता: हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है और जीवित घोंघे से मसाज कराने के लाभों तथा दीर्घकालिक सुरक्षा के बारे में पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।

    विशेष रूप से बगीचे या खुले वातावरण में मिलने वाले घोंघों को चेहरे पर इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। उनमें परजीवी या अन्य रोग पैदा करने वाले जीव हो सकते हैं। साफ-सफाई का ध्यान रखने पर भी जीवित घोंघे के इस्तेमाल को पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं माना जा सकता।

    क्या स्नेल म्यूकिन वाली क्रीम इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प है?

    यदि आप इस ट्रेंड के कारण स्नेल म्यूकिन आजमाना चाहते हैं, तो जीवित घोंघे से मसाज कराने के बजाय किसी विश्वसनीय निर्माता का कॉस्मेटिक उत्पाद चुनना तुलनात्मक रूप से अधिक व्यावहारिक हो सकता है। फिर भी उत्पाद की गुणवत्ता, उसके दूसरे घटकों और आपकी त्वचा की संवेदनशीलता का ध्यान रखना जरूरी है।

    उत्पाद इस्तेमाल करने से पहले उसकी सामग्री पढ़ें और सीमित हिस्से पर पैच टेस्ट करें। ध्यान रहे कि पैच टेस्ट से हर तरह की एलर्जी या प्रतिक्रिया का पता नहीं चलता। जलन, खुजली या लालिमा होने पर इस्तेमाल बंद कर दें।

    अगर आपकी त्वचा बहुत संवेदनशील है, आपको पहले से एलर्जी की समस्या है या त्वचा पर कोई

  • लखनऊ: कांग्रेस मुख्यालय में अजय राय से भिड़ने वाली दलित नेता ममता चौधरी कौन हैं? चार बार रह चुकी हैं पार्षद.

    लखनऊ: कांग्रेस मुख्यालय में अजय राय से भिड़ने वाली दलित नेता ममता चौधरी कौन हैं? चार बार रह चुकी हैं पार्षद.

    लखनऊ: कांग्रेस मुख्यालय में अजय राय से भिड़ने वाली दलित नेता ममता चौधरी कौन हैं? चार बार रह चुकी हैं पार्षद.

    उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच हुई कथित झड़प के बाद महिला कांग्रेस नेता ममता चौधरी चर्चा में हैं। यह विवाद उस समय सामने आया, जब प्रदेश कांग्रेस की नई अध्यक्ष आराधना मिश्रा और नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद के कार्यभार संभालने की तैयारियां चल रही थीं। इसी दौरान ममता चौधरी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के बीच तीखी बहस होने की बात सामने आई।

    ममता चौधरी ने आरोप लगाया कि अजय राय के साथ आए कुछ समर्थकों ने महिला कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें धक्का दिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि विवाद के दौरान जूते-चप्पल फेंके गए। हालांकि, घटना से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है और सभी पक्षों की बात सामने आना बाकी है।

    ‘अपनी औकात में बात करो’ टिप्पणी के बाद बढ़ा विवाद

    घटना के सामने आए दृश्य में ममता चौधरी और अजय राय के बीच तीखी नोकझोंक सुनाई देने की बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, ममता चौधरी ने कहा कि वह अजय राय का चेहरा नहीं देखना चाहतीं। इसके जवाब में अजय राय की ओर से कथित तौर पर कहा गया, “अपनी औकात में बात करो।”

    ममता चौधरी ने एक समाचार पत्र से बातचीत में कहा कि वह महिला कर्मचारियों को धक्का दिए जाने का विरोध कर रही थीं। उनके अनुसार, वह सीधे अजय राय से बात नहीं कर रही थीं और उन्हें समझ नहीं आया कि बहस इतनी आगे कैसे बढ़ गई।

    उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उनसे कोई गलती हुई थी, तो वरिष्ठ नेता उन्हें समझा सकते थे। उनके मुताबिक, महिला कार्यकर्ताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार और जूते-चप्पल फेंके जाने जैसी घटनाएं स्वीकार नहीं की जा सकतीं।

    ममता चौधरी ने इस पूरे मामले को महिलाओं की गरिमा और दलितों के सम्मान से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व पर भरोसा है और उम्मीद है कि मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

    कौन हैं ममता चौधरी?

    ममता चौधरी उत्तर प्रदेश कांग्रेस की महिला नेता हैं और लंबे समय से लखनऊ के शहरी संगठन में सक्रिय रही हैं। उन्होंने वर्ष 2006 में लखनऊ नगर निगम के मालवीय नगर क्षेत्र से पार्षद का चुनाव लड़कर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वह लगातार चार बार पार्षद चुनी गईं।

    वर्ष 2017 और 2023 में उन्होंने नगर निगम सदन में कांग्रेस नेता के रूप में भी भूमिका निभाई। संगठन में लंबे समय तक काम करने के कारण उनकी पहचान स्थानीय राजनीति में सक्रिय नेता के तौर पर बनी।

    ममता चौधरी वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान के तहत चुनी गई उम्मीदवारों में भी शामिल थीं। उन्होंने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित मोहनलालगंज विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। उन्हें इस चुनाव में 2,990 वोट मिले थे।

    विधानसभा चुनाव के करीब एक साल बाद उन्हें उत्तर प्रदेश महिला कांग्रेस के सेंट्रल जोन का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। वह संगठन में अपनी बेबाक राय रखने के लिए जानी जाती हैं।

    उन्नाव के कांग्रेस परिवार से जुड़ा है रिश्ता

    ममता चौधरी ने

  • इस शिव मंदिर में तप करने से ऋषि-मुनियों को मिली थीं सिद्धियां, काशी के महासिद्धिश्वर महादेव की महिमा है अद्भुत.

    इस शिव मंदिर में तप करने से ऋषि-मुनियों को मिली थीं सिद्धियां, काशी के महासिद्धिश्वर महादेव की महिमा है अद्भुत.

    इस शिव मंदिर में तप करने से ऋषि-मुनियों को मिली थीं सिद्धियां, काशी के महासिद्धिश्वर महादेव की महिमा है अद्भुत.

    वाराणसी: भगवान शिव की नगरी काशी में कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जिनका धार्मिक महत्व सदियों से श्रद्धालुओं के बीच बना हुआ है। इन्हीं में एक खास मंदिर महासिद्धिश्वर महादेव का भी है। मान्यता है कि यहां भगवान शिव के दर्शन और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से साधक को आध्यात्मिक उन्नति और सिद्धियों की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में कई ऋषि-मुनियों और राजा जनक जैसे महान व्यक्तित्वों ने इस क्षेत्र में तपस्या की थी।

    काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां भगवान शिव अलग-अलग स्वरूपों में भक्तों का कल्याण करते हैं। कोई सुख और समृद्धि की कामना लेकर महादेव के दरबार में पहुंचता है, तो कोई मानसिक शांति और आध्यात्मिक ज्ञान की तलाश में उनकी आराधना करता है। महासिद्धिश्वर महादेव का मंदिर भी इसी आस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है।

    कहां स्थित है महासिद्धिश्वर महादेव का मंदिर?

    महासिद्धिश्वर महादेव का मंदिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भेलूपुर क्षेत्र के शाकुंभरी चौराहे के पास स्थित बताया जाता है। यह स्थान काशी के प्राचीन धार्मिक क्षेत्रों में शामिल है। मंदिर का उल्लेख काशीखंड से जुड़ी धार्मिक परंपराओं में मिलता है।

    मान्यता है कि यहां भगवान शिव के दर्शन करने से साधक को अपनी आध्यात्मिक साधना में सफलता प्राप्त करने का आशीर्वाद मिलता है। इसी वजह से महासिद्धिश्वर महादेव को समस्त सिद्धियां प्रदान करने वाले शिव स्वरूप के रूप में पूजा जाता है।

    सिद्धकुंड में स्नान और शिव दर्शन का क्या है महत्व?

    महासिद्धिश्वर महादेव की महिमा से जुड़ी कथाओं में सिद्धकुंड का विशेष उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्राचीन काल में शंकुलधारा का क्षेत्र ऋषि-मुनियों की तपस्या का प्रमुख स्थान हुआ करता था। साधक सिद्धकुंड में स्नान करने के बाद भगवान शिव की आराधना और तपस्या करते थे।

    मान्यता है कि इस साधना से ऋषियों को आध्यात्मिक सिद्धियां प्राप्त हुई थीं। इसी परंपरा के कारण सिद्धकुंड में स्नान और महासिद्धिश्वर महादेव के दर्शन को विशेष पुण्यदायी माना जाता है।

    हालांकि, इन मान्यताओं को धार्मिक ग्रंथों और स्थानीय परंपराओं के संदर्भ में समझना चाहिए। सिद्धियों की प्राप्ति से जुड़ी बातों की स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है।

    इन ऋषियों और महान व्यक्तित्वों ने की थी तपस्या

    महासिद्धिश्वर महादेव से जुड़े धार्मिक विवरणों में कई ऋषियों और महान व्यक्तित्वों का उल्लेख किया गया है। मान्यता के अनुसार, कोहल ऋषि, असित ऋषि, कात्यायन ऋषि, जांगल ऋषि और विभांड ऋषि ने इस क्षेत्र में तपस्या की थी। राजा जनक का नाम भी इस साधना परंपरा से जोड़ा जाता है।

    इसके अलावा, संत कीनाराम और गोस्वामी तुलसीदास की साधना परंपराओं का संबंध भी काशी के इस धार्मिक क्षेत्र से बताया जाता है। इन महान संतों और ऋषियों के नामों के उल्लेख से इस स्थान की धार्मिक महत्ता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    काशी लंबे समय से संतों, साधकों और विद्वानों की भूमि रही है। यहां अनेक धार्मिक परंपराओं ने जन्म लिया और विकसित हुईं। महासिद्धिश्वर महादेव का मंदिर भी इसी आध्यात्मिक विरासत का हिस्सा माना जाता है।

    काशीखंड में भी मिलता है महासिद्धिश्वर महादेव का उल्लेख

    काशीखंड में काशी के विभिन्न शिवलिंगों, तीर्थों और धार्मिक स्थलों का वर्णन मिलता है। महासिद्धिश्वर महादेव की महिमा बताते हुए एक श्लोक में सिद्धकुंड में स्नान और शिव दर्शन के महत्व का उल्लेख किया गया है।

    धार्मिक भावार्थ के अनुसार, जो व्यक्ति सिद्धकुंड में स्नान करके महासिद्धिश्वर महादेव के दर्शन करता है, वह समस्त सिद्धियों की प्राप्ति के मार्ग पर आगे बढ़ता है। इसी मान्यता के कारण इस शिवलिंग को विशेष महत्व दिया जाता है।

    काशीखंड में वर्णित धार्मिक स्थलों की पहचान और उनके वर्तमान स्थानों को लेकर स्थानीय परंपराओं में कुछ अंतर हो सकते हैं। इसलिए प्राचीन वर्णनों को समझते समय धार्मिक ग्रंथों के संदर्भ और स्थानीय इतिहास, दोनों को ध्यान में रखना उचित है।

    क्यों खास माने जाते हैं महासिद्धिश्वर महादेव?

    भगवान शिव को हिंदू धर्म में तप, वैराग्य, ज्ञान और मुक्ति का प्रतीक माना जाता है। उनके विभिन्न स्वरूप भक्तों को अलग-अलग आध्यात्मिक संदेश देते हैं। महासिद्धिश्वर महादेव का स्वरूप विशेष रूप से साधना और सिद्धि की धार्मिक अवधारणा से जुड़ा है।

    श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि काशी की प्राचीन साधना परंपरा को याद करने का माध्यम भी है। यहां की धार्मिक मान्यताएं यह संदेश देती हैं कि सच्ची साधना, अनुशासन, श्रद्धा और आत्मचिंतन जीवन को नई दिशा दे सकते हैं।

    डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध धार्मिक विवरणों, काशीखंड से जुड़ी मान्यताओं और स्थानीय परंपराओं पर आधारित है। सिद्धियों की प्राप्ति से संबंधित दावों की स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है।

  • पुलिस हिरासत में ले जाते समय युवक की मौत, परिजनों ने सिर पर चोट के लगाए आरोप; पुलिस का दावा- चलती गाड़ी से कूदा था दिलशाद.

    पुलिस हिरासत में ले जाते समय युवक की मौत, परिजनों ने सिर पर चोट के लगाए आरोप; पुलिस का दावा- चलती गाड़ी से कूदा था दिलशाद.

    पुलिस हिरासत में ले जाते समय युवक की मौत, परिजनों ने सिर पर चोट के लगाए आरोप; पुलिस का दावा- चलती गाड़ी से कूदा था दिलशाद.

    बेतिया: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया में पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर ले जाए जा रहे युवक की मौत के बाद मामला गरमा गया है। मृतक की पहचान दिलशाद अंसारी के रूप में हुई है। परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई और युवक की मौत की परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वहीं, पुलिस का कहना है कि दिलशाद चलती गाड़ी से कूदकर घायल हो गए थे और अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। फिलहाल घटना की जांच की जा रही है।

    रात में घर से ले गई थी पुलिस

    परिजनों के मुताबिक, बानूछापर और सहोदरा थाने की पुलिस रात करीब दो बजे दिलशाद को उनके घर से अपने साथ ले गई थी। सुबह लगभग पांच बजे परिवार को फोन आया कि दिलशाद की तबीयत बिगड़ गई है।

    परिवार के सदस्य जब अस्पताल पहुंचे, तो उन्हें दिलशाद की मौत की जानकारी मिली। इसके बाद घर में मातम छा गया। परिजनों ने दावा किया कि दिलशाद के सिर पर गंभीर चोट थी और माथा फटा हुआ था। उनका कहना है कि वे युवक की मौत की असली वजह जानना चाहते हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

    दिलशाद की पत्नी नगमा खातून और पिता अकबर अंसारी ने घटना को लेकर सवाल उठाए हैं। परिवार के मुताबिक, दिलशाद की महज चार महीने की बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया उठ गया है।

    पुलिस ने बताई अलग कहानी

    बेतिया पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर घटना के संबंध में अपना पक्ष रखा है। पुलिस के अनुसार, दिलशाद अंसारी सहोदरा थाना कांड संख्या 65/25 में आरोपी थे। यह मामला 2 अगस्त 2025 को एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज किया गया था।

    पुलिस का कहना है कि दिलशाद को बानूछापर से गिरफ्तार करने के बाद सहोदरा थाने ले जाया जा रहा था। इसी दौरान प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शिकारपुर थाना क्षेत्र में वह चलती पुलिस गाड़ी से कूद गए। पुलिस के मुताबिक, इस घटना में उन्हें गंभीर चोटें आईं।

    नरकटियागंज से बेतिया अस्पताल किया गया रेफर

    पुलिस के अनुसार, घायल दिलशाद को मौके पर मौजूद जवानों ने तत्काल अनुमंडलीय अस्पताल, नरकटियागंज पहुंचाया। उनकी गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए जीएमसीएच, बेतिया रेफर कर दिया।

    पुलिस का दावा है कि बेतिया अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने दिलशाद को मृत घोषित कर दिया। हालांकि, परिजनों के आरोप और पुलिस के बयान के बीच घटना की परिस्थितियों को लेकर सवाल बने हुए हैं।

    मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत जांच

    बेतिया पुलिस ने कहा है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप मामले में निष्पक्ष जांच के लिए विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है।

    फिलहाल मौत की वास्तविक वजह और घटनाक्रम की पूरी जानकारी सामने आना बाकी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चिकित्सकीय तथ्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों से यह स्पष्ट होने में मदद मिल सकती है कि युवक को चोटें किन परिस्थितियों में लगीं।

    परिजन मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही घटना से जुड़े आरोपों और पुलिस के दावे की पुष्टि हो सकेगी।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध रिपोर्ट और पुलिस के आधिकारिक पक्ष के आधार पर तैयार की गई है। परिजनों के आरोपों और पुलिस के दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। मौत की परिस्थितियों का अंतिम निष्कर्ष जांच और संबंधित साक्ष्यों के आधार पर ही निकलेगा।

  • राजकोट: मामा के 40 लाख रुपये लौटाने से बचने के लिए रची 11 लाख की लूट की कहानी, भांजे समेत 3 लोगों पर केस दर्ज.

    राजकोट: मामा के 40 लाख रुपये लौटाने से बचने के लिए रची 11 लाख की लूट की कहानी, भांजे समेत 3 लोगों पर केस दर्ज.

    राजकोट: मामा के 40 लाख रुपये लौटाने से बचने के लिए रची 11 लाख की लूट की कहानी, भांजे समेत 3 लोगों पर केस दर्ज.

    राजकोट: गुजरात के राजकोट में 11 लाख रुपये की कथित लूट के मामले में पुलिस जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पुलिस के मुताबिक, एक युवक ने अपने मामा से लिए गए 40 लाख रुपये लौटाने से बचने के लिए दो दोस्तों के साथ मिलकर लूट की झूठी कहानी रची थी। शुरुआत में मामला सड़क पर हुई लूट का लग रहा था, लेकिन पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों ने पूरी कहानी बदल दी। पुलिस ने भांजे समेत तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    मामा से लिए थे 40 लाख रुपये

    पुलिस के अनुसार, हरदेव सिंह सजुभा झाला को अपने भांजे धीरेंद्र सिंह वाघेला से 40 लाख रुपये वापस लेने थे। बताया गया कि हरदेव सिंह ने सोने के गहने गिरवी रखकर रकम जुटाई थी और वाहन खरीदने-बेचने के कारोबार के लिए भांजे को दी थी। पिछले कुछ समय से वह धीरेंद्र सिंह से पैसे लौटाने के लिए कह रहे थे।

    पुलिस की जांच के मुताबिक, धीरेंद्र सिंह ने मामा को 11 लाख रुपये लौटाने का वादा किया और रकम लेने के लिए उन्हें अपने घर बुलाया। इसके बाद उसने कथित तौर पर ऐसी योजना बनाई, जिससे यह दिखाया जा सके कि पैसे लेकर जाते समय रास्ते में लूट हो गई।

    रास्ते में लूट होने का बनाया गया नाटक

    बताया गया कि हरदेव सिंह जब रुपये लेने पहुंचे, तो धीरेंद्र सिंह लाल रंग का एक बैग लेकर उनकी बाइक पर पीछे बैठ गया। हरदेव सिंह को यह रकम मोटामावा में अपनी साली के घर ले जानी थी।

    रास्ते में नानामवा रोड से सागर चौक की ओर जाते समय बिना नंबर प्लेट वाली बाइक पर सवार दो लोग उनके पास पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने हरदेव सिंह की बाइक को लात मारी। इसके बाद पीछे बैठे धीरेंद्र सिंह ने उनसे उन लोगों का पीछा करने को कहा।

    कुछ देर बाद ऐसा दिखाया गया, जैसे दोनों कथित हमलावर मौके से भाग गए हों। इसके बाद धीरेंद्र सिंह ने पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 पर फोन कर बैग में रखे 11 लाख रुपये लूटे जाने की सूचना दी।

    पूछताछ में सामने आई कहानी, दोस्तों की भूमिका भी जांच के घेरे में

    मामले की सूचना मिलने के बाद तालुका पुलिस स्टेशन की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान धीरेंद्र सिंह के बयानों में कुछ विसंगतियां सामने आईं। इसके बाद पुलिस ने मामले की गहराई से जांच की।

    पुलिस का दावा है कि पूछताछ में कथित लूट की साजिश का खुलासा हुआ। जांच के अनुसार, धीरेंद्र सिंह ने करीब एक सप्ताह पहले ही इस योजना को तैयार किया था, ताकि मामा को रकम लौटाने के दबाव से बच सके।

    पुलिस के मुताबिक, इस योजना में उसके परिचित ध्रुवराज सिंह गोहिल और भावेश खुवा भी शामिल थे। आरोप है कि तीनों ने मिलकर लूट की कहानी तैयार की और बैग को लेकर ऐसी परिस्थिति बनाई, जिससे घटना वास्तविक लूट जैसी लगे।

    भांजे समेत तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज

    पुलिस ने धीरेंद्र सिंह वाघेला, ध्रुवराज सिंह गोहिल और भावेश खुवा के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस कांस्टेबल को शिकायतकर्ता बनाकर कानूनी कार्रवाई शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है। आरोपों में पुलिस को गुमराह करने और आपराधिक साजिश से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है।

    पुलिस के अनुसार, शुरुआती तौर पर जिस घटना को 11 लाख रुपये की लूट बताया गया था, जांच में वह कर्ज चुकाने से बचने के लिए रची गई कथित साजिश निकली। हालांकि, मामले में आरोपियों की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।

    यह मामला बताता है कि कर्ज से जुड़े विवाद को छिपाने के लिए कथित तौर पर गढ़ी गई कहानी भी गंभीर कानूनी परेशानी का कारण बन सकती है। फिलहाल पुलिस दर्ज मामले के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।

    डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट उपलब्ध जानकारी और पुलिस जांच से जुड़े विवरणों पर आधारित है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

  • अहमदाबाद: च्युइंग गम को मिठाई मानने से हाई कोर्ट का इनकार, 4% की जगह लगेगा 12.5% VAT; जानिए 100 रुपये के उत्पाद पर कितना होगा अंतर.

    अहमदाबाद: च्युइंग गम को मिठाई मानने से हाई कोर्ट का इनकार, 4% की जगह लगेगा 12.5% VAT; जानिए 100 रुपये के उत्पाद पर कितना होगा अंतर.

    अहमदाबाद: च्युइंग गम को मिठाई मानने से हाई कोर्ट का इनकार, 4% की जगह लगेगा 12.5% VAT; जानिए 100 रुपये के उत्पाद पर कितना होगा अंतर.

    च्युइंग गम और बबल गम को लेकर गुजरात हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी उत्पाद का स्वाद मीठा होने भर से उसे कानूनी रूप से मिठाई या मीठे खाद्य पदार्थों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने च्युइंग गम पर 4 प्रतिशत वैट लगाने के पहले के फैसले को पलटते हुए 12.5 प्रतिशत वैट लागू करने के पक्ष में निर्णय दिया।

    यह मामला गुजरात में च्युइंग गम की कर-श्रेणी को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ा है। हालांकि, इस फैसले को पूरे देश में च्युइंग गम पर टैक्स बढ़ने के रूप में समझना सही नहीं होगा, क्योंकि मामला गुजरात के वैट कानून के तहत उत्पाद के वर्गीकरण से संबंधित है।

    आखिर क्या है पूरा मामला?

    यह विवाद गुजरात की कंपनी कैड मैक च्यू फूड्स से जुड़ा है, जो च्युइंग गम सहित अन्य उत्पाद बनाती है। कंपनी और कर विभाग के बीच लंबे समय से यह सवाल था कि च्युइंग गम पर किस दर से वैल्यू एडेड टैक्स यानी VAT लगाया जाना चाहिए।

    कर विभाग ने वर्ष 2011 में च्युइंग गम की बिक्री पर 12.5 प्रतिशत वैट लगाने का निर्णय लिया था। कंपनी ने इस वर्गीकरण को चुनौती दी। इसके बाद वैट ट्रिब्यूनल ने च्युइंग गम को मिठाई और मीठे खाद्य पदार्थों की श्रेणी में मानते हुए 4 प्रतिशत टैक्स लागू करने का फैसला सुनाया।

    गुजरात सरकार ने ट्रिब्यूनल के इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, 18 सितंबर 2026 को सुनाए गए फैसले में हाई कोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार के पक्ष में निर्णय देते हुए ट्रिब्यूनल का आदेश पलट दिया।

    च्युइंग गम को मिठाई क्यों नहीं माना गया?

    अदालत के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या च्युइंग गम को उसकी मिठास के आधार पर मिठाई या मीठे खाद्य पदार्थों की कर-श्रेणी में रखा जा सकता है।

    च्युइंग गम को आम तौर पर मुंह में रखकर चबाया जाता है। इससे उसका स्वाद महसूस होता है, लेकिन उसका आधारभूत हिस्सा सामान्यतः निगला नहीं जाता। चबाने के बाद उसे बाहर निकाल दिया जाता है।

    अदालत ने उत्पाद की प्रकृति और इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं पर विचार करते हुए माना कि केवल मीठा स्वाद होने से च्युइंग गम को मिठाई की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात वैट कानून के तहत इसे मिठाई वाली श्रेणी के बजाय अवशिष्ट कर प्रविष्टि के अंतर्गत रखा गया, जिस पर 12.5 प्रतिशत की दर लागू होती है।

    इस फैसले का मुख्य आधार उत्पाद का कानूनी वर्गीकरण है, न कि केवल उसका स्वाद।

    100 रुपये के उत्पाद पर कितना होगा टैक्स का अंतर?

    चार प्रतिशत और 12.5 प्रतिशत वैट के बीच अंतर को एक आसान उदाहरण से समझा जा सकता है।

    यदि किसी उत्पाद की कर योग्य कीमत 100 रुपये है, तो:

    • 4% VAT: 4 रुपये
    • 12.5% VAT: 12.50 रुपये
    • दोनों दरों के बीच अंतर: 8.50 रुपये

    यानी 100 रुपये की कर योग्य कीमत पर दोनों दरों के बीच 8.50 रुपये का अंतर बनता है। वास्तविक बिक्री मूल्य पर इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कर की गणना कैसे की जाती है और बिल में अन्य कौन-से लागू शुल्क शामिल हैं।

    इस उदाहरण का मतलब यह नहीं है कि हर च्युइंग गम पैकेट की कीमत सीधे इसी अनुपात में बढ़ जाएगी। वास्तविक कीमत उत्पाद, कर व्यवस्था और विक्रेता की मूल्य-निर्धारण नीति पर निर्भर करेगी।

    क्या पूरे भारत में च्युइंग गम महंगी हो जाएगी?

    इस फैसले को समझते समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मामला गुजरात के VAT कानून से संबंधित है। इसलिए इसे पूरे देश में च्युइंग गम पर टैक्स बढ़ने का आदेश नहीं माना जाना चाहिए।

    भारत में वस्तुओं पर कर की व्यवस्था संबंधित कानूनों और लागू कर-प्रणाली के अनुसार तय होती है। किसी राज्य के वैट कानून के तहत दिए गए फैसले का प्रभाव उसी कानूनी दायरे और संबंधित उत्पादों के वर्गीकरण के अनुसार समझा जाना चाहिए।

    इसलिए ग्राहकों को यह मानने की जरूरत नहीं है कि गुजरात हाई कोर्ट के इस फैसले के कारण देश के हर राज्य में च्युइंग गम पर तुरंत 12.5 प्रतिशत टैक्स लग जाएगा।

    कारोबारियों और ग्राहकों के लिए क्यों अहम है फैसला?

    यह फैसला बताता है कि किसी उत्पाद पर टैक्स तय करते समय केवल उसका स्वाद, नाम या आम इस्तेमाल ही निर्णायक नहीं होता। कानून में उसकी परिभाषा, प्रकृति और निर्धारित कर-श्रेणी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    कारोबारियों के लिए सही कर-श्रेणी का निर्धारण जरूरी है, क्योंकि गलत वर्गीकरण से टैक्स विवाद पैदा हो सकते हैं। वहीं ग्राहकों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि किसी उत्पाद की कीमत में बदलाव का कारण हमेशा उत्पादन लागत नहीं होता; कर संबंधी फैसले भी कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।

    महत्वपूर्ण सूचना: यह लेख उपलब्ध रिपोर्ट में दिए गए विवरण पर आधारित है। फैसले का सटीक कानूनी दायरा, संबंधित उत्पादों की श्रेणी और वर्तमान कर-व्यवस्था समझने के लिए अदालत के आधिकारिक निर्णय तथा गुजरात के लागू कर नियमों को देखना आवश्यक है।

  • HbA1c लेवल 8.1 है तो क्या करें? पिछले 3 महीनों की बढ़ी शुगर का संकेत, कंट्रोल के लिए अपनाएं ये 8 जरूरी आदतें.

    HbA1c लेवल 8.1 है तो क्या करें? पिछले 3 महीनों की बढ़ी शुगर का संकेत, कंट्रोल के लिए अपनाएं ये 8 जरूरी आदतें.

    HbA1c लेवल 8.1 है तो क्या करें? पिछले 3 महीनों की बढ़ी शुगर का संकेत, कंट्रोल के लिए अपनाएं ये 8 जरूरी आदतें.

    अगर आपकी डायबिटीज की जांच रिपोर्ट में HbA1c का स्तर 8.1% आया है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। HbA1c टेस्ट पिछले लगभग 2 से 3 महीनों में ब्लड शुगर के औसत स्तर का अंदाजा देता है। डायबिटीज से पीड़ित ज्यादातर वयस्कों के लिए HbA1c का सामान्य लक्ष्य 7% से कम रखा जाता है, हालांकि उम्र, दूसरी बीमारियों और हाइपोग्लाइसीमिया के जोखिम के अनुसार यह लक्ष्य अलग हो सकता है।

    ऐसे में HbA1c का स्तर 8.1% होना इस बात का संकेत हो सकता है कि ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने की जरूरत है। अच्छी बात यह है कि सही खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि, दवाओं का पालन और डॉक्टर की सलाह से शुगर मैनेजमेंट में सुधार किया जा सकता है।

    HbA1c लेवल 8.1 का क्या मतलब है?

    HbA1c टेस्ट में यह देखा जाता है कि खून में मौजूद हीमोग्लोबिन का कितना प्रतिशत ग्लूकोज से जुड़ा हुआ है। इसकी रिपोर्ट प्रतिशत में आती है।

    • 5.7% से कम: आमतौर पर सामान्य श्रेणी।
    • 5.7% से 6.4%: प्रीडायबिटीज की श्रेणी।
    • 6.5% या इससे अधिक: डायबिटीज की श्रेणी में आता है; आमतौर पर निदान की पुष्टि के लिए चिकित्सकीय आकलन और जरूरत के अनुसार दोबारा जांच की जाती है।
    • 8.1%: डायबिटीज की पुष्टि हो चुके व्यक्ति में यह स्तर अक्सर निर्धारित शुगर लक्ष्य से अधिक होता है।

    ध्यान रखें कि HbA1c और रोजाना की ब्लड शुगर रीडिंग एक ही चीज नहीं हैं। HbA1c लंबे समय के औसत का संकेत देता है, जबकि फास्टिंग और भोजन के बाद की जांच उस समय के शुगर स्तर को दिखाती हैं।

    कुछ स्थितियों, जैसे एनीमिया, हीमोग्लोबिन के कुछ प्रकार, हाल में खून चढ़ना या लाल रक्त कोशिकाओं से जुड़ी समस्याओं में HbA1c का परिणाम प्रभावित हो सकता है। इसलिए रिपोर्ट को अपनी पूरी स्वास्थ्य स्थिति के साथ समझना जरूरी है।

    लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ी रहने से क्या नुकसान हो सकता है?

    अगर ब्लड शुगर लंबे समय तक नियंत्रित नहीं रहती, तो शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं:

    • आंखें: डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी समस्या का खतरा बढ़ सकता है।
    • किडनी: किडनी की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है।
    • नसें: पैरों और हाथों में झनझनाहट, सुन्नपन या दर्द हो सकता है।
    • दिल और रक्त वाहिकाएं: हृदय रोग और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है।
    • पैरों की सेहत: घाव भरने में देरी और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

    इन जटिलताओं का जोखिम हर व्यक्ति में समान नहीं होता। ब्लड शुगर के साथ ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान और अन्य स्वास्थ्य कारक भी महत्वपूर्ण हैं।

    ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए अपनाएं ये 8 आदतें

    1. सफेद चावल और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट की मात्रा पर ध्यान दें

    सफेद चावल, मैदा, सफेद ब्रेड और दूसरे रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थ खाने के बाद ब्लड शुगर बढ़ा सकते हैं। इसका असर खाने की मात्रा, साथ में खाए गए खाद्य पदार्थों और व्यक्ति की शारीरिक स्थिति पर भी निर्भर करता है।

    इसका मतलब यह नहीं है कि डायबिटीज में सफेद चावल पूरी तरह छोड़ना जरूरी है। आप इसकी मात्रा नियंत्रित कर सकते हैं और इसे दाल, सब्जियों तथा प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों के साथ खा सकते हैं। साबुत अनाज और कम प्रोसेस किए गए विकल्पों को भी भोजन में जगह दें।

    2. नाश्ता और भोजन की दिनचर्या व्यवस्थित रखें

    भोजन का समय और मात्रा आपकी दवाओं, शारीरिक गतिविधि तथा भूख के अनुसार तय होना चाहिए। नाश्ता छोड़ना हर व्यक्ति के लिए नुकसानदायक हो, ऐसा जरूरी नहीं है, लेकिन कुछ लोगों में इससे बाद में ज्यादा भूख लग सकती है या दवाओं के साथ शुगर में उतार-चढ़ाव हो सकता है।

    ऐसा भोजन चुनें जिसमें फाइबर, प्रोटीन और संतुलित मात्रा में कार्बोहाइड्रेट हों। अगर आप इंसुलिन या ऐसी दवाएं लेते हैं जिनसे ब्लड शुगर बहुत कम हो सकती है, तो भोजन छोड़ने या उपवास करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

    3. फाइबर से भरपूर चीजें खाएं

    फाइबर युक्त भोजन पाचन को बेहतर रखने, पेट भरा महसूस कराने और भोजन के बाद ब्लड शुगर में तेजी से होने वाली बढ़ोतरी को कम करने में मदद कर सकता है।

    डाइट में इन चीजों को शामिल कर सकते हैं:

    • हरी सब्जियां और सलाद
    • दालें, राजमा, चना और बीन्स
    • ओट्स और साबुत अनाज
    • साबुत फल, उनकी मात्रा और कार्बोहाइड्रेट को ध्यान में रखते हुए
    • बादाम, अखरोट, चिया सीड्स और अलसी जैसे विकल्प

    फाइबर की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाएं और पर्याप्त पानी पिएं। अगर आपको किडनी की बीमारी है या डॉक्टर ने पोटैशियम अथवा अन्य पोषक तत्वों को सीमित करने के लिए कहा है, तो अपने आहार में बदलाव से पहले सलाह लें।

    4. हर 3–4 घंटे में खाना जरूरी नहीं, अपनी जरूरत के अनुसार खाएं

    कुछ लोगों को नियमित अंतराल पर छोटे भोजन करने से भूख संभालने में मदद मिलती है, जबकि दूसरे लोग तीन संतुलित भोजन के साथ बेहतर महसूस करते हैं। सभी डायबिटीज मरीजों के लिए हर 3–4 घंटे में खाना जरूरी नहीं है।

    मुख्य बात है कि भोजन की मात्रा, कार्बोहाइड्रेट और दवाओं के समय में उचित तालमेल रहे। बार-बार स्नैक्स खाने से भी अतिरिक्त कैलोरी बढ़ सकती है। अपनी दिनचर्या और इलाज के अनुसार भोजन का पैटर्न तय करें।

    5. कम प्रोसेस किए गए और संतुलित खाद्य पदार्थ चुनें

    डाइट में दालें, बीन्स, ओट्स, सब्जियां, साबुत अनाज, मेवे और उपयुक्त प्रोटीन स्रोत शामिल करें। ये खाद्य पदार्थ संतुलित आहार का हिस्सा बन सकते हैं और ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद कर सकते हैं।

    केवल किसी खाद्य पदार्थ का ग्लाइसेमिक इंडेक्स देखकर फैसला न करें। भोजन की कुल मात्रा, उसमें मौजूद फाइबर, प्रोटीन और फैट तथा आपकी दवाओं का भी असर पड़ता है।

    मीठे पेय, ज्यादा चीनी वाली चाय-कॉफी, मिठाइयां और अत्यधिक प्रोसेस्ड स्नैक्स को सीमित रखें। फल खाने पर पूरी तरह रोक लगाने की जरूरत नहीं है; साबुत फल आमतौर पर जूस की तुलना में बेहतर विकल्प होते हैं।

    6. रोजाना टहलें और शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं

    शारीरिक गतिविधि मांसपेशियों को ग्लूकोज इस्तेमाल करने में मदद करती है और इंसुलिन के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया बेहतर बना सकती है।

    यदि आपकी स्वास्थ्य स्थिति इसकी अनुमति देती है, तो सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाली गतिविधि का लक्ष्य रखा जा सकता है। तेज चलना, साइकिल चलाना या अपनी क्षमता के अनुसार दूसरी गतिविधियां इसके विकल्प हैं।

    भोजन के बाद 10–15 मिनट की हल्की सैर कुछ लोगों में भोजन के बाद ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है। शुरुआत कम समय से करें और धीरे-धीरे बढ़ाएं। यदि आपको दिल की बीमारी, पैरों में गंभीर समस्या या व्यायाम के दौरान दर्द और सांस फूलने की शिकायत है, तो पहले डॉक्टर से सलाह लें।

    7. लंबे समय तक लगातार बैठने से बचें

    अगर आप कई घंटे तक बैठकर काम करते हैं, तो बीच-बीच में उठकर कुछ मिनट चलें या हल्की स्ट्रेचिंग करें। इससे दैनिक शारीरिक गतिविधि बढ़ती है और लंबे समय तक बैठे रहने की आदत कम होती है।

    हर 30–60 मिनट में छोटा ब्रेक लेना एक व्यावहारिक तरीका हो सकता है। हालांकि, केवल छोटे ब्रेक लेना नियमित व्यायाम का विकल्प नहीं है। दोनों को दिनचर्या में शामिल करना बेहतर है।

    8. दवाएं समय पर लें और डॉक्टर से फॉलो-अप करें

    HbA1c 8.1% होने पर केवल डाइट में बदलाव करना पर्याप्त न भी हो सकता है। यदि आप डायबिटीज की दवाएं या इंसुलिन लेते हैं, तो उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार लें। खुद से दवा की खुराक बढ़ाना, घटाना या बंद करना खतरनाक हो सकता है।

    डॉक्टर आपकी ब्लड शुगर रीडिंग, मौजूदा दवाओं, खानपान, शारीरिक गतिविधि और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं को देखकर उपचार में बदलाव कर सकते हैं। HbA1c की दोबारा जांच कब करनी है, यह भी उनसे पूछें। कई लोगों में इलाज बदलने या लक्ष्य तक पहुंचने तक लगभग तीन महीने में जांच की जाती है।

    तनाव और नींद का भी रखें ध्यान

    लगातार तनाव और पर्याप्त नींद न मिलने से ब्लड शुगर को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। सोने और जागने का समय नियमित रखने की कोशिश करें। तनाव कम करने के लिए टहलना, ध्यान, हल्का योग या अपनी पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालें।

    यदि आपको तेज खर्राटे, सोते समय सांस रुकने जैसी समस्या या दिन में बहुत नींद आने की शिकायत है, तो डॉक्टर से चर्चा करें। नींद से जुड़ी समस्याओं का इलाज भी समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

    HbA1c 8.1 होने पर क्या तुरंत घबराना चाहिए?

    घबराने के बजाय रिपोर्ट को गंभीरता से लें और डॉक्टर के साथ आगे की योजना बनाएं। HbA1c 8.1% का अर्थ यह नहीं है कि आपको निश्चित रूप से कोई जटिलता हो चुकी है, लेकिन यह संकेत जरूर है कि शुगर नियंत्रण की समीक्षा करना जरूरी है।

    अगर ब्लड शुगर बहुत ज्यादा हो और साथ में उल्टी, पेट दर्द, तेजी से या गहरी सांस लेना, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम या बहुत ज्यादा प्यास और पेशाब जैसे लक्षण हों, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। ये गंभीर स्थिति के संकेत हो सकते हैं।

    निष्कर्ष: HbA1c का स्तर 8.1% होने पर संतुलित डाइट, नियमित व्यायाम, अच्छी नींद और दवाओं का सही पालन ब्लड शुगर नियंत्रण में मदद कर सकते हैं। लेकिन हर व्यक्ति का लक्ष्य अलग हो सकता है। इसलिए अपनी रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर से सलाह लें और बिना चिकित्सकीय मार्गदर्शन के दवाओं में बदलाव न करें।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है, व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं। डायबिटीज का उपचार व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, दवाओं और अन्य जोखिम कारकों के अनुसार तय किया जाता है। अपनी HbA1c रिपोर्ट और ब्लड शुगर रीडिंग के आधार पर योग्य डॉक्टर से परामर्श लें।

  • उत्तर प्रदेश: नई बाइक या स्कूटी खरीदने वालों के लिए दो हेलमेट का नियम, रजिस्ट्रेशन के समय देनी पड़ सकती है खरीद की रसीद; जानें क्या हैं नए निर्देश.

    उत्तर प्रदेश: नई बाइक या स्कूटी खरीदने वालों के लिए दो हेलमेट का नियम, रजिस्ट्रेशन के समय देनी पड़ सकती है खरीद की रसीद; जानें क्या हैं नए निर्देश.

    उत्तर प्रदेश: नई बाइक या स्कूटी खरीदने वालों के लिए दो हेलमेट का नियम, रजिस्ट्रेशन के समय देनी पड़ सकती है खरीद की रसीद; जानें क्या हैं नए निर्देश.

    उत्तर प्रदेश में नई मोटरसाइकिल या स्कूटी खरीदने वालों के लिए हेलमेट से जुड़े नियमों को लेकर सख्ती की खबर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में दोपहिया वाहन खरीदने वाले ग्राहकों को चालक और पीछे बैठने वाले व्यक्ति के लिए दो ISI मार्क वाले हेलमेट खरीदने होंगे। इन हेलमेट की कीमत भी वाहन खरीदने वाले को ही चुकानी होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य दोपहिया वाहन चालकों और पीछे बैठने वाले यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    हालांकि, वाहन खरीदने वालों के लिए यह समझना जरूरी है कि नियम लागू होने की प्रक्रिया, रजिस्ट्रेशन से जुड़ी शर्तों और जुर्माने की जानकारी को आधिकारिक परिवहन विभाग के निर्देशों से जरूर जांच लेना चाहिए।

    नई बाइक खरीदते समय दो हेलमेट लेना जरूरी?

    रिपोर्ट में बताया गया है कि उत्तर प्रदेश की परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने राज्य के वाहन डीलरों को निर्देश दिए हैं कि दोपहिया वाहन बिना हेलमेट के न बेचे जाएं। इसके तहत नई मोटरसाइकिल या स्कूटी खरीदने वाले ग्राहक को दो ISI मार्क वाले हेलमेट उपलब्ध कराने की व्यवस्था बताई गई है। एक हेलमेट चालक और दूसरा पीछे बैठने वाले व्यक्ति के लिए होगा।

    हेलमेट की कीमत ग्राहक को ही देनी होगी। यानी वाहन की खरीद के समय बाइक या स्कूटी की कीमत के अलावा हेलमेट का खर्च भी जुड़ सकता है। इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि वाहन खरीदने के साथ ही दोनों सवारों की सुरक्षा का इंतजाम हो जाए।

    रजिस्ट्रेशन के समय हेलमेट की रसीद का क्या होगा?

    रिपोर्ट के अनुसार, वाहन के पंजीकरण के दौरान हेलमेट खरीदने का प्रमाण और उसकी रसीद वाहन पोर्टल पर अपलोड करने की व्यवस्था भी बताई गई है। यदि यह निर्देश संबंधित वाहन पर लागू होता है, तो खरीदार को शोरूम से हेलमेट की रसीद संभालकर रखनी चाहिए और डीलर से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी लेनी चाहिए।

    ग्राहकों को बाइक या स्कूटी की डिलीवरी लेते समय यह भी देखना चाहिए कि हेलमेट ISI मार्क वाला हो और उसकी गुणवत्ता ठीक हो। केवल सस्ता हेलमेट खरीदना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि दुर्घटना के समय सही मानक वाला हेलमेट सिर की गंभीर चोटों से बचाव में अहम भूमिका निभाता है।

    बिना हेलमेट पकड़े जाने पर कितना जुर्माना?

    भारत में मोटर वाहन कानून के तहत हेलमेट पहनने के नियम का उल्लंघन करने पर सामान्यतः 1,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। कुछ परिस्थितियों में लाइसेंस से जुड़ी कार्रवाई भी लागू प्रावधानों के अनुसार हो सकती है। हालांकि, कार्रवाई का स्वरूप मामले और लागू नियमों पर निर्भर करता है।

    इसलिए बाइक चलाते समय केवल चालक ही नहीं, बल्कि पीछे बैठने वाले व्यक्ति को भी हेलमेट पहनना चाहिए। थोड़ी दूरी के लिए हेलमेट न पहनना भी जोखिम भरा हो सकता है।

    सड़क हादसों को कम करने पर सरकार का जोर

    दोपहिया वाहनों से जुड़े सड़क हादसों में सिर पर चोट लगना गंभीर परिणामों का कारण बन सकता है। ऐसे में हेलमेट पहनने की आदत बढ़ाना सड़क सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। पीछे बैठने वाले यात्रियों द्वारा हेलमेट न पहनने की समस्या को देखते हुए इस दिशा में सख्ती की जरूरत पर भी जोर दिया जाता रहा है।

    सड़क सुरक्षा के लिए हेलमेट के अलावा निर्धारित गति सीमा का पालन करना, ट्रैफिक सिग्नल पर रुकना, गलत दिशा में वाहन न चलाना और वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करना भी जरूरी है। नियमों का पालन करने से दुर्घटनाओं का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है।

    बाइक खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

    नई बाइक या स्कूटी खरीदने जा रहे हैं, तो शोरूम से इन बातों की जानकारी जरूर लें:

    • क्या वाहन के साथ दो ISI मार्क वाले हेलमेट दिए जा रहे हैं?
    • क्या हेलमेट की कीमत वाहन की कुल कीमत से अलग ली जाएगी?
    • क्या रजिस्ट्रेशन के लिए हेलमेट की रसीद या कोई अन्य प्रमाण जरूरी है?
    • क्या डीलर ने रजिस्ट्रेशन से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी हैं?

    इन बातों की जानकारी पहले से लेने पर बाद में होने वाली परेशानी से बचा जा सकता है।

    महत्वपूर्ण सूचना: दो हेलमेट, रसीद अपलोड करने और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी शर्तों की पुष्टि उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग या संबंधित RTO के आधिकारिक निर्देशों से करें। यह लेख उपलब्ध रिपोर्ट पर आधारित है; नियमों के लागू होने और उनकी वर्तमान स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

  • वाराणसी: मां का कर्ज चुकाने का दावा करते ही झुक गया था यह शिव मंदिर! हजारों साल पुराने श्राप की कहानी जानकर रह जाएंगे हैरान.

    वाराणसी: मां का कर्ज चुकाने का दावा करते ही झुक गया था यह शिव मंदिर! हजारों साल पुराने श्राप की कहानी जानकर रह जाएंगे हैरान.

    वाराणसी: मां का कर्ज चुकाने का दावा करते ही झुक गया था यह शिव मंदिर! हजारों साल पुराने श्राप की कहानी जानकर रह जाएंगे हैरान.

    वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी को भगवान शिव की नगरी काशी के नाम से जाना जाता है। यहां गंगा के घाटों से लेकर प्राचीन मंदिरों तक, हर जगह आस्था और इतिहास की अनोखी झलक देखने को मिलती है। इन्हीं ऐतिहासिक धरोहरों में एक ऐसा शिव मंदिर भी है, जिसे देखकर लोगों को इटली की मशहूर झुकी हुई मीनार की याद आ जाती है। खास बात यह है कि यह मंदिर सीधा खड़ा होने के बजाय एक तरफ झुका हुआ है। इसके पीछे एक दिलचस्प धार्मिक मान्यता और सदियों पुरानी कहानी प्रचलित है।

    यह मंदिर वाराणसी के मणिकर्णिका घाट के पास स्थित रत्नेश्वर महादेव मंदिर है। इसे मातृ-ऋण महादेव और काशी का झुका हुआ मंदिर भी कहा जाता है। मंदिर की बनावट, गंगा के जल में इसका डूबा रहना और इसके झुकाव को लेकर लोगों के बीच लंबे समय से चर्चा होती रही है।

    पीसा की मीनार से भी ज्यादा झुका हुआ है मंदिर?

    इटली के पीसा शहर में स्थित लीनिंग टावर अपनी झुकी हुई बनावट के कारण पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। लेकिन वाराणसी का रत्नेश्वर महादेव मंदिर भी अपनी अनोखी संरचना के लिए जाना जाता है। कुछ विवरणों में इसके झुकाव को लगभग 9 डिग्री बताया गया है, जबकि पीसा की मीनार का झुकाव इससे कम है।

    हालांकि, मंदिर की वास्तविक ऊंचाई और झुकाव को लेकर अलग-अलग आंकड़े मिलते हैं। इसके बावजूद गंगा के किनारे एक तरफ झुका हुआ यह प्राचीन मंदिर देखने वालों का ध्यान जरूर खींचता है।

    गंगा के पानी में डूबा रहता है मंदिर का गर्भगृह

    रत्नेश्वर महादेव मंदिर की सबसे खास बात इसकी गंगा नदी से जुड़ी स्थिति है। मणिकर्णिका और सिंधिया घाट के आसपास स्थित यह मंदिर वर्ष के कई महीनों में गंगा के पानी में डूबा रहता है। बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने पर मंदिर का बड़ा हिस्सा पानी के भीतर चला जाता है। कुछ परिस्थितियों में पानी मंदिर के ऊपरी हिस्से तक पहुंच जाता है।

    इसी वजह से यहां सामान्य मंदिरों की तरह पूरे वर्ष नियमित पूजा-अर्चना करना आसान नहीं होता। मंदिर की स्थिति इसे वाराणसी की दूसरी धार्मिक इमारतों से अलग बनाती है।

    ऐतिहासिक तस्वीरों में भी इस मंदिर की झुकी हुई संरचना दिखाई देती है। माना जाता है कि इसका निर्माण 19वीं शताब्दी के आसपास हुआ था, हालांकि इसके निर्माण से जुड़ी कुछ जानकारियों और समय को लेकर अलग-अलग मत मिलते हैं।

    मां का कर्ज चुकाने की बात कही तो झुक गया मंदिर!

    रत्नेश्वर महादेव मंदिर के झुकने को लेकर एक प्रचलित लोककथा सुनाई जाती है। इस कहानी के अनुसार, राजा मानसिंह के एक सेवक ने अपनी मां रत्ना बाई की स्मृति या सम्मान में इस मंदिर का निर्माण करवाया था।

    मंदिर बनने के बाद उसने गर्व से कहा कि अब उसने अपनी मां का कर्ज चुका दिया है। मान्यता के मुताबिक, मां के ऋण से मुक्त होने का दावा करते ही मंदिर पीछे की ओर झुकने लगा।

    इस घटना को इस संदेश से जोड़कर देखा जाता है कि मां का उपकार इतना बड़ा होता है कि उसे पूरी तरह कभी चुकाया नहीं जा सकता। इसी मान्यता के कारण मंदिर को मातृ-ऋण महादेव के नाम से भी जाना जाता है।

    हालांकि, यह कहानी धार्मिक लोकमान्यता का हिस्सा है। मंदिर के झुकाव के पीछे किसी श्राप को प्रमाणित करने वाला ऐतिहासिक या वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। इसकी वास्तविक स्थिति को समझने के लिए निर्माण शैली, जमीन की परिस्थितियों और संरचनात्मक बदलावों जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

    मंदिर की वास्तुकला भी है बेहद खास

    रत्नेश्वर महादेव मंदिर की बनावट पारंपरिक उत्तर भारतीय मंदिर वास्तुकला की विशेषताओं को दर्शाती है। इसकी संरचना में शिखर और मंडप जैसे वास्तु तत्व दिखाई देते हैं। गंगा के किनारे कम ऊंचाई वाले हिस्से में स्थित होने और नदी के जलस्तर से प्रभावित रहने के कारण इसकी स्थिति दूसरी ऊंची जगहों पर बने मंदिरों से अलग है।

    मंदिर का एक तरफ झुका होना इसे वास्तुकला की दृष्टि से भी दिलचस्प बनाता है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि इसे जानबूझकर पानी के भीतर रहने के लिए बनाया गया था। इस संबंध में किसी ठोस प्रमाण के बिना ऐसी धारणा को केवल अनुमान ही माना जाना चाहिए।

    क्या यहां पूजा करने से लगता है श्राप?

    रत्नेश्वर महादेव मंदिर के बारे में एक अन्य मान्यता यह भी है कि यहां नियमित पूजा-अर्चना नहीं होती और मंदिर में घंटियों की आवाज भी सामान्य मंदिरों की तरह सुनाई नहीं देती। कुछ लोग इसे श्राप से जोड़ते हैं, जबकि मंदिर की स्थिति और गंगा के जलस्तर को देखते हुए पूजा की व्यावहारिक कठिनाइयां भी इसकी एक वजह हो सकती हैं।

    खासकर मानसून के दौरान जब मंदिर का गर्भगृह पानी में डूब जाता है, तब वहां पहुंचना और धार्मिक अनुष्ठान करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए पूजा से जुड़ी मान्यताओं को ऐतिहासिक तथ्यों से अलग समझना जरूरी है।

    आज भी लोगों के लिए रहस्य बना हुआ है रत्नेश्वर मंदिर

    वाराणसी आने वाले श्रद्धालु आमतौर पर काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट और मणिकर्णिका घाट जैसे प्रमुख स्थलों के दर्शन करते हैं। लेकिन रत्नेश्वर महादेव मंदिर भी अपनी अनोखी बनावट और उससे जुड़ी लोककथाओं के कारण विशेष महत्व रखता है।

    एक तरफ झुकी हुई संरचना, दूसरी तरफ गंगा का बदलता जलस्तर और मां के ऋण से जुड़ी धार्मिक कहानी इस मंदिर को खास बनाती है। यही वजह है कि इसे काशी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों में एक अलग पहचान मिली हुई है।

    डिस्क्लेमर: इस लेख में मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं और लोककथाओं का उल्लेख उपलब्ध विवरणों के आधार पर किया गया है। श्राप से संबंधित कहानी की स्वतंत्र ऐतिहासिक पुष्टि नहीं है।

  • सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 8.30 लाख रुपये की ठगी का आरोप, पूर्व सर्वे पदाधिकारी समेत तीन लोगों पर केस दर्ज.

    सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 8.30 लाख रुपये की ठगी का आरोप, पूर्व सर्वे पदाधिकारी समेत तीन लोगों पर केस दर्ज.

    सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 8.30 लाख रुपये की ठगी का आरोप, पूर्व सर्वे पदाधिकारी समेत तीन लोगों पर केस दर्ज.

    सीतामढ़ी: बिहार में सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर एक युवक से 8 लाख 30 हजार रुपये लेने का मामला सामने आया है। पीड़ित ने पूर्व सर्वे पदाधिकारी पूजा भारती, उनकी मां गीता देवी और भाई आदित्य कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। आरोप है कि युवक को मद्य निषेध विभाग में मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS) की नौकरी दिलाने का वादा किया गया था, लेकिन पैसे लेने के बाद भी नौकरी नहीं मिली। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    नौकरी का भरोसा देकर मांगे 12 लाख रुपये

    प्राथमिकी के अनुसार, बाजपट्टी थाना क्षेत्र के बबुरबन निवासी संतोष मंडल फिलहाल बोखड़ा प्रखंड के मनरेगा विभाग में डेटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं। दिसंबर 2023 में उनका संपर्क वैशाली जिले के गाजीपुर गराही की रहने वाली पूजा भारती से हुआ था। उस समय पूजा भारती बाजपट्टी पंचायत में सर्वे पदाधिकारी के रूप में काम कर रही थीं।

    संतोष मंडल का आरोप है कि पूजा भारती ने उन्हें मद्य निषेध विभाग में MTS के पद पर नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद वह उन्हें अपने घर भी ले गईं, जहां उनकी मां गीता देवी और भाई आदित्य कुमार ने भी नौकरी लगवाने की बात कही।

    शिकायत के मुताबिक, नौकरी दिलाने के बदले कुल 12 लाख रुपये की मांग की गई। भरोसे में आकर संतोष मंडल ने मैट्रिक और इंटर के प्रमाणपत्रों के साथ आधार कार्ड, पैन कार्ड सहित अपने मूल दस्तावेज भी आरोपितों को सौंप दिए।

    चेक, PhonePe और QR कोड से भेजे 8.30 लाख रुपये

    पीड़ित ने अपनी शिकायत में बताया कि 9 दिसंबर 2023 से 16 जून 2024 के बीच उन्होंने अलग-अलग तारीखों पर कुल 8 लाख 30 हजार रुपये ट्रांसफर किए। यह रकम बैंक चेक, PhonePe और QR कोड के माध्यम से आरोपितों के खातों में भेजी गई।

    युवक को उम्मीद थी कि पैसे देने के बाद उसकी सरकारी नौकरी लग जाएगी, लेकिन काफी समय बीतने के बावजूद नियुक्ति नहीं हुई। आरोप है कि जब नौकरी को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं मिली, तो उन्हें अपने साथ धोखाधड़ी होने का संदेह हुआ।

    किराये का कमरा छोड़कर मोबाइल बंद करने का आरोप

    प्राथमिकी में संतोष मंडल ने आरोप लगाया है कि कुछ समय बाद पूजा भारती बाजपट्टी में स्थित अपना किराये का कमरा खाली कर चली गईं और उनका मोबाइल फोन भी बंद हो गया। इसके बाद पीड़ित ने वैशाली जिले में उनके गांव पहुंचकर जानकारी जुटाने की कोशिश की।

    शिकायतकर्ता के मुताबिक, वहां कुछ ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि संबंधित परिवार पर पहले भी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से पैसे लेने के आरोप लगे हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

    पुलिस ने शुरू की मामले की जांच

    इसके बाद संतोष मंडल ने बाजपट्टी थाने में पूजा भारती, गीता देवी और आदित्य कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस अब शिकायत में बताए गए लेनदेन, बैंक खातों और नौकरी दिलाने के कथित वादे से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।

    फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि मामले में आरोपितों की ओर से कोई जवाब दिया गया है या नहीं। जांच के बाद ही यह पता चल सकेगा कि रकम किस उद्देश्य से ली गई और पूरे मामले में किसकी क्या भूमिका रही।

    सरकारी नौकरी के नाम पर पैसे मांगने वालों से रहें सावधान

    यह मामला नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक जरूरी चेतावनी है। सरकारी भर्ती की प्रक्रिया में किसी व्यक्ति के निजी आश्वासन पर भरोसा करके बड़ी रकम देना जोखिम भरा हो सकता है। नौकरी से जुड़ी जानकारी हमेशा संबंधित विभाग की आधिकारिक अधिसूचना और भर्ती पोर्टल से जांचनी चाहिए। किसी को पैसे या मूल दस्तावेज सौंपने से पहले उसकी पहचान और दावों की पुष्टि करना जरूरी है।

    डिस्क्लेमर: यह खबर दर्ज प्राथमिकी और उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।