कर्नाटक के चिक्काबल्लापुर से सामने आए लव जिहाद के इस मामले में एक युवती को अपनी जान गवानी पड़ी है. आया है.
Love Jihad:
कर्नाटक के चिक्काबल्लापुर जिले में एक होमस्टे से युवती का शव मिलने के बाद सनसनी फैल गई है. मृतका की पहचान साई सुरभि के रूप में हुई है. पुलिस का शुरुआती शक है कि सुरभि की हत्या उसके बॉयफ्रेंड मोहम्मद संजीथ अली ने की और इसके बाद उसने खुदकुशी की कोशिश की. फिलहाल आरोपी को इलाज के लिए चिक्काबल्लापुर डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है. मामले की जांच जारी है.
पुलिस के मुताबिक, साई सुरभि मूल रूप से कर्नाटक के येडियूर की रहने वाली थीं और ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखती थीं. बताया जा रहा है कि उनकी मुलाकात केरल के रहने वाले मोहम्मद संजीथ अली से कैब बुकिंग के दौरान हुई थी. धीरे-धीरे दोनों के बीच दोस्ती हुई. और जल्द ही यह दोस्ती प्यार में बदल गई. कुछ समय बाद, वे दोनों बेंगलुरु के कुमारस्वामी लेआउट इलाके में एक साथ रहने लगे.
उसने हमारी बेटी को शराब और ड्रग्स की लत लगा दी…
सुरभि के परिवार ने आरोप लगाया है कि संजीथ अली ने उनकी बेटी को शराब और ड्रग्स की लत लगाई. परिवार का दावा है कि आरोपी के खिलाफ पहले भी कुमारस्वामी लेआउट पुलिस स्टेशन में एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज हो चुका है. आरोप है कि एक पार्टी के दौरान उसके पास से ड्रग्स बरामद हुई थी. परिवार के मुताबिक, जब सुरभि की मां ने इस रिश्ते का विरोध किया और पुलिस से शिकायत की, तब सुरभि ने पुलिस के सामने कहा था कि वह बालिग हैं और अपनी मर्जी से शादी कर सकती हैं. इसके बाद भी वह संजीथ अली के साथ ही रहती रहीं.
मां का आरोप- सुरभि के साथ कई बार की गई मारपीट
सुरभि की मां का आरोप है कि उनकी बेटी के साथ कई बार मारपीट की गई. उन्होंने यह भी दावा किया कि सुरभि को गंभीर शारीरिक चोटें पहुंचाई गई थीं. बाद में उन्हें मैसूर के एक रिहैब सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां करीब छह महीने तक उनका इलाज चला. इलाज पूरा होने के बाद वह अपनी मां के साथ रहने लगी थीं. परिवार का कहना है कि बाद में सुरभि फिर किसी तरह संजीथ अली के संपर्क में आ गईं. सुरभि की मां गीता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उन्हें भी जान से मारने की धमकी दी थी, जिसकी शिकायत उन्होंने पहले ही कुमारस्वामी लेआउट पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई थी.
मां ने आरोपी को बताया शादीशुदा, कहा- हुआ लव जेहाद
गीता का दावा है कि संजीथ अली ने चिक्काबल्लापुर के होमस्टे में सुरभि की हत्या की. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी के खिलाफ केरल में भी कई क्रिमिनल केस दर्ज हैं. गीता ने संजीथ अली को ड्रग एडिक्ट और ड्रग पैडलर बताते हुए आरोप लगाया है. उनके अनुसार, उसने उनकी बेटी को ड्रग्स और जहर दिया. उसके साथ यौन उत्पीड़न किया गया. उन्होंने यह भी दावा किया कि आरोपी पहले से शादीशुदा है. सुरभि की मां ने इस पूरे मामले को ‘लव जिहाद’ से जुड़ा बताते हुए आरोपी को कड़ी सजा देने की मांग की है.
उत्तर प्रदेश के जौनपुर में एक दरिंदे ने हैवानियत की सभी हदें पार कर दीं, रविवार की रात शादी में आई एक 4 साल की बालिका से दुष्कर्म के बाद उसे मौत के घाट उतार दिया. सुबह बालिका का शव घर से कुछ दूर नदी किनारे सरपत की झाड़ियों में मिला. सुबह किसी की नज़र पड़ी तो शोर मचा, परिजन वहां भाग कर पहुंचे तो बच्ची का शव देख चीखने लगे
क्या आप भी अपनी रोजमर्रा की डाइट में कुछ फूड्स को ‘हेल्थ फ्रेंडली’ या सेहतमंद मानकर शामिल कर रहे हैं तो तुरंत अपनी आदत बदल लें। आधुनिक लाइफस्टाइल और आकर्षक पैकेजिंग के दौर में जिन चीजों को हम दिल के लिए फायदेमंद समझते हैं, उनमें से कई चीजें असल में हमारी कार्डियोवैस्कुलर सेहत यानी हार्ट हेल्थ को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा रही होती हैं। बिना डॉक्टरी सलाह और सही वैज्ञानिक समझ के इन फूड्स का लगातार सेवन नसों के ब्लॉक होने, कोलेस्ट्रॉल बढ़ने या सीधे तौर पर दिल की बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है।
मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट, एम्स के पूर्व कंसल्टेंट और साओल हार्ट सेंटर के संस्थापक एवं निदेशक Dr. Bimal Chhajer के अनुसार, दिल को स्वस्थ बनाए रखने के लिए केवल पौष्टिक चीजें खाना ही काफी नहीं है, बल्कि उन खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना भी जरूरी है जो हार्ट हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकती हैं। कई बार लोग कुछ फूड्स को हेल्दी समझकर नियमित रूप से खाते हैं, जबकि वे धीरे-धीरे हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकते हैं। ऐसे में कुछ खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट से कम या पूरी तरह बाहर करना दिल की सेहत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। आइए जानते हैं कि किन फूड्स से परहेज करके आप अपने दिल को लंबे समय तक हेल्दी रख सकते हैं।
अखरोट का सेवन सीमित करें
डॉ. बिमल झाजर के अनुसार, अखरोट में फैट की मात्रा काफी अधिक होती है। हालांकि इसे आमतौर पर पौष्टिक माना जाता है, लेकिन दिल के रोगियों को इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। किसी भी ड्राई फ्रूट का अत्यधिक सेवन कैलोरी और फैट बढ़ा सकता है, इसलिए संतुलित मात्रा में ही सेवन करना बेहतर है।
American Journal of Clinical Nutrition और Circulation की रिसर्च के अनुसार, जब कोई हार्ट का मरीज मुट्ठी भर-भर कर मेवे खाता है, तो शरीर की जरूरत से ज्यादा कैलोरी लिवर में जाकर ट्राइग्लिसराइड्स (Triglycerides) में बदल जाती है। ट्राइग्लिसराइड्स खून में मौजूद एक प्रकार का फैट है। रिसर्च साबित करती है कि खून में ट्राइग्लिसराइड्स का बढ़ा हुआ स्तर सीधे तौर पर धमनियों की दीवारों को मोटा और सख्त बनाता है, जिसे चिकित्सा विज्ञान में एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) कहते हैं। यही स्थिति आगे चलकर हार्ट अटैक की वजह बनती है।
बादाम ज्यादा न खाएं
बादाम प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स का अच्छा स्रोत है, लेकिन इसमें फैट और कैलोरी भी मौजूद होती हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि हृदय रोगियों को बादाम का सेवन जरूरत से ज्यादा नहीं करना चाहिए। संतुलित मात्रा में सेवन करने से पोषण मिलता है, जबकि अधिक मात्रा नुकसानदायक हो सकती है।
मछली और चिकन का सेवन सोच-समझकर करें
दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए मछली और चिकन का सेवन भी सीमित मात्रा में करना चाहिए। खासकर प्रोसेस्ड या ज्यादा तेल-मसाले में बने नॉनवेज फूड्स हृदय स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। हेल्दी कुकिंग और नियंत्रित मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है।
The Harvard T.H. Chan School of Public Health की एक व्यापक रिसर्च के अनुसार, जब चिकन या मछली को भारतीय तरीके से तेल, बटर या मसालों में पकाया जाता है, तो हाई टेम्परेचर पर इनमें मौजूद कोलेस्ट्रॉल ऑक्सीडाइज्ड कोलेस्ट्रॉल (Oxidized LDL) में बदल जाता है। नॉर्मल कोलेस्ट्रॉल के मुकाबले ऑक्सीडाइज्ड कोलेस्ट्रॉल बहुत ज्यादा चिपचिपा होता है। यह धमनियों की अंदरूनी परत (Endothelium) को डैमेज करता है और वहां जाकर चिपक जाता है, जिससे नसों में ब्लॉकेज (Plaque) बहुत तेजी से बढ़ने लगती है।
अलसी के बीज अधिक मात्रा में न लें
अलसी के बीज फाइबर और कई पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होता। एक्सपर्ट के मुताबिक, हृदय रोगियों को अलसी का सेवन अपनी स्वास्थ्य स्थिति और डॉक्टर की सलाह के अनुसार करना चाहिए ताकि किसी तरह की परेशानी से बचा जा सके।
घी का सेवन कंट्रोल रखें
घी भारतीय भोजन का अहम हिस्सा है, लेकिन इसमें सैचुरेटेड फैट मौजूद होता है। अगर किसी व्यक्ति को हृदय संबंधी समस्या है, तो उसे घी का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। संतुलित आहार और कम फैट वाले विकल्प अपनाकर दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखा जा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई सलाह विशेषज्ञ के विचारों पर आधारित है। किसी भी खाद्य पदार्थ को अपनी डाइट से पूरी तरह हटाने या स्वास्थ्य संबंधी निर्णय लेने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें। हर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और पोषण संबंधी जरूरतें अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए किसी भी सलाह को व्यक्तिगत चिकित्सा परामर्श का विकल्प न मानें।
चंबल का वो कुख्यात बीहड़ों का बादशाह के नाम से जाने जाना वाला डकैत जगन गुर्जर, जिसने राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश- तीनों राज्यों में अपने आतंक का साम्राज्य इस कदर फैला के रखा था कि इनके सीमावर्ती इलाको में भी उसका नाम सुनते लोग कांपने लगते थे. उसने जीजा की मौत के बाद अपराध की दुनिया में कदम रखा था और फिर धीरे- धीरे इस तरह जुर्म की अंधेरी दुनिया में खोकर हैवानियत की ऐसी हदें पार की जिसे सुनकर भी रूह कांप जाती है.
आज (सोमवार) जब अजमेर जेल में उसकी हत्या की खबर सामने आई तो एक- एक कर उसका खौफनाक और काला इतिहास एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है. उसके खिलाफ तीन राज्यों के अलग-अलग थानों में हत्या, लूट और अपहरण सहित 120 से ज्यादा संगीन मामले दर्ज थे. जिसमें साल 2019 का ही एक ऐसा मामला जिसने उसकी बर्बर को एक अलग परिभाषा दे दी. जिसने यह साबित कर दिया था कि जुर्म जब सिर चढ़कर बोलता है, तो इंसान दया-धर्म सब कुछ भूल जाता है.
धौलपुर में दो महिलाओं सरेआम निर्वस्त्र कर था घुमाया
डकैत जगन गुर्जर ने साल 2019 में धौलपुर जिले के करनपुर-सायका पुरा गांव में जगन गुर्जर और उसकी गैंग ने इंसानियत को तार-तार कर दिया था. उसपर महिलाओं से मारपीट और दुर्व्यवहार करने के भी आरोप लगे थे, जिले में अपना खौफ कायम करने के लिए जगन पर दो स्थानीय महिलाओं के साथ बेरहमी से मारपीट करने और उनके साथ घोर दुर्व्यवहार करने का आरोप लगा था. जगन ने उन महिलाओं से मारपीट कर अपनी हैवानियत भरा चेहरा दिखाते हुए उन्हें सरेआम निर्वस्त्र कर पूरे गांव में घुमाया था. इतनी ही नहीं, इसी साल में उसपर एक पुलिसकर्मी की हत्या का भी आरोप लगा था.
डकैत जगन गुर्जर के खिलाफ 123 मामले दर्ज
लगभग 20 सालों से धौलपुर जिले के डांग और चंबल के बीहड़ों में अपराध की दुनिया में सक्रिय रहे खूंखार डकैत जगन गुर्जर के खिलाफ 123 संगीन धाराओं में मामले दर्ज हैं. डकैत गुर्जर के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, रंगदारी, डकैती, लूट, पुलिस से मुठभेड़ जैसे संगीन आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं. डकैत जगन गुर्जर का छोटा भाई डकैत पप्पू गुर्जर मौजूदा वक्त में धौलपुर जिला कारागार में है.
चार भाई सभी अपराधी
डकैत जगन गुर्जर के चार भाई हैं. सभी अपराधिक मामले में जेल में बंद है. इनमें लाल सिंह गुर्जर सबसे बड़ा है, पान सिंह, गुर्जर और पप्पू गुर्जर छोटे भाई है. मौजूदा समय में पप्पू गुर्जर अजमेर जेल में बंद है. पानसिंह गुर्जर को आजीवन कारावास की सजा मिली हुई है. लेकिन वह पैरोल पर बाहर बताया जा रहा है. लाल सिंह गुर्जर के खिलाफ भी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज है, इन सब भाइयों में जगन गुर्जर और पप्पू गुर्जर सबसे खूंखार डकैत रहे हैं.
एसपी ने की हत्या की पुष्टि
वही आज यानी सोमवार को एसपी हर्षवर्धन अग्रवाल ने डकैत जगन की अजमेर जेल में हत्या की पुष्टि की. उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार सुबह 11 से दोपहर 3 बजे के बीच बैरक बंद होने के समय ड्यूटी स्टाफ राउंड पर आया था. उन्होंने जगन की बैरक में उसे जमीन पर पड़ा देखा तो बैरक खोल अंदर गए तो जमीन पर डकैत जगन मरा पड़ा था और उसका साथी अंदर था.
राजस्थान के फलोदी जिले के देचू क्षेत्र में एक ही परिवार के चार लोगों के शव मिलने से हड़कंप मच गया. पति फंदे से लटका मिला, जबकि पत्नी और दो बच्चों के शव चारपाई पर पड़े थे. पुलिस और एफएसएल टीम इस मामले की जांच में जुट गई है. पढ़ें पूरी कहानी.
राजस्थान के फलोदी जिले में मंगलवार को एक ही परिवार के चार सदस्यों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है. देचू क्षेत्र स्थित एक घर में पति-पत्नी और उनके दो बच्चों के शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई. पुलिस मामले की जांच कर रही है और मौत के कारणों का पता लगाने के लिए एफएसएल टीम को मौके पर बुलाया गया है.
राजस्थान के फलोदी जिले के देचू क्षेत्र में मंगलवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां एक दंपति और उनके दो बच्चों के शव उनके घर से बरामद किए गए. घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे घर को जांच के लिए अपने कब्जे में ले लिया. एक साथ चार लोगों की मौत से इलाके में दहशत और शोक का माहौल है. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.
फलोदी के पुलिस अधीक्षक सतनाम सिंह ने बताया कि मृतकों में पति, पत्नी और उनके दो बच्चे शामिल हैं. शुरुआती जांच में पाया गया कि पति का शव घर में फंदे से लटका हुआ था. वहीं, पत्नी और दोनों बच्चों के शव घर के अंदर एक चारपाई पर पड़े मिले. पुलिस फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि महिला और बच्चों की मौत जहर खाने से हुई या उनका गला घोंटा गया.
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम को मौके पर बुलाया है. एफएसएल विशेषज्ञ घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने और वैज्ञानिक जांच करने में जुटे हैं. पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा. फिलहाल, सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है.
पुलिस के अनुसार, मृतकों के परिजन पाली जिले से आने वाले हैं. उनके पहुंचने के बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में भेजा जाएगा. अधिकारियों ने बताया कि मामले की गहन जांच जारी है और अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी. पुलिस हर एंगल से इस सामूहिक मौत की घटना की जांच कर रही है.
अक्सर 50 या 60 की उम्र पार करते ही हमारे समाज में एक सलाह आम हो जाती है कि अब ज्यादा मत चलो, घुटने घिस जाएंगे!’ लेकिन क्या वाकई बढ़ती उम्र में रोज 2-3 किलोमीटर की सैर करना आपके घुटनों और कूल्हों को खराब कर सकती है या फिर यह आपको लंबे समय तक चुस्त-दुरुस्त रखने का सबसे बेहतरीन जरिया है? इस उलझन को दूर करने के लिए ऑर्थोपेडिक एक्सपर्ट्स से इस मिथ की सच्चाई जानने की कोशिश की।
ISIC Multispeciality हॉस्पिटल में कंसल्टेंट ऑर्थोपेडिक्स डॉ. अपूर्व दुआ के मुताबिक पैदल चलना एक लो-इम्पैक्ट एक्सरसाइज है, जो बुजुर्गों के लिए आमतौर पर सुरक्षित मानी जाती है। हेल्दी कपल्स को नियमित रूप से बॉडी को एक्टिव रखना जरूरी है। जब तक गंभीर गठिया, चोट या लगातार दर्द की समस्या न हो, रोजाना 3-4 मील चलना नुकसान की बजाय फायदा पहुंचा सकता है।
क्या पैदल चलने से जोड़ों को नुकसान होता है या फायदा?
एक्सपर्ट ने बताया कई लोगों को लगता है कि ज्यादा चलने से जोड़ों का घिसाव बढ़ जाता है, लेकिन सच्चाई इसके उलट है। नियमित वॉक जोड़ों को हेल्दी रखने में मदद करती है। डॉ. दुआ बताते हैं कि पैदल चलने से जोड़ों के आसपास की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, लचीलापन बढ़ता है, वजन कंट्रोल रहता है और शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। इसके अलावा हेल्दी वेट बनाए रखने से घुटनों और कूल्हों पर अतिरिक्त दबाव भी नहीं पड़ता। एक्सपर्ट के मुताबिक अधिकांश लोगों के लिए वॉक के फायदे इसके संभावित जोखिमों से कहीं ज्यादा होते हैं। निष्क्रिय लाइफस्टाइल की तुलना में बॉडी को एक्टिव रखना जोड़ों के लिए बेहतर माना जाता है।
क्या रोज चलने से गठिया हो सकता है?
कई लोग यह मानते हैं कि सालों तक पैदल चलने से गठिया की बीमारी हो सकती है, लेकिन एक्सपर्ट इस धारणा को गलत बताते हैं। डॉ. दुआ के अनुसार रोजाना पैदल चलना गठिया का कारण नहीं बनता, बल्कि यह जोड़ों की गतिशीलता बनाए रखने, मांसपेशियों को मजबूत रखने और हेल्दी वेट बनाए रखने में मदद करता है, जिससे जोड़ों से जुड़ी कई समस्याओं का खतरा कम हो सकता है।
कब समझें कि आप जरूरत से ज्यादा चल रहे हैं?
जरूरत से ज्यादा बॉडी से काम लेंगें तो बॉडी पर दबाव पड़ना संभव है। एक्सपर्ट ने बताया अगर आप बॉडी में होने वाले दर्द को नजरअंदाज करेंगे तो बॉडी में कई तरह की परेशानियां बढ़ सकती है। एक्सपर्ट ने बताया शरीर पर अधिक दबाव पड़ने पर कुछ परेशानियां जैसे
जोड़ों में लगातार दर्द
सूजन
कई घंटों तक रहने वाली अकड़न
लंगड़ाकर चलना
चलने-फिरने में कमी आना
आराम करने के बाद भी दर्द बने रहने जैसी दिक्क्तें हो सकती है।
यदि पैदल चलना आपकी रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित करने लगे या शरीर को रिकवर होने में अधिक समय लगने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
बुजुर्ग अपने घुटनों और कूल्हों को कैसे सुरक्षित रखें?
विशेषज्ञों के अनुसार कुछ आसान सावधानियां अपनाकर बुजुर्ग लंबे समय तक आराम से पैदल चल सकते हैं।
आरामदायक और सपोर्टिव जूते पहनें
समतल रास्तों पर चलें
हेल्दी वजन बनाए रखें
पर्याप्त पानी पिएं
स्ट्रेचिंग और मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम करें
दूरी धीरे-धीरे बढ़ाएं
जरूरत पड़ने पर आराम करें
दर्द होने पर उसे नजरअंदाज न करें
डॉ. का कहना है कि सही तरीके से की गई नियमित वॉक घुटनों और कूल्हों को घिसने की बजाय लंबे समय तक स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखने में मदद कर सकती है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ द्वारा साझा किए गए विचार उनके व्यक्तिगत अनुभव और चिकित्सकीय अध्ययन पर आधारित हैं। प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक स्थिति, मेडिकल हिस्ट्री और जोड़ों का स्वास्थ्य अलग होता है। इसलिए, बढ़ती उम्र में कोई भी नया व्यायाम या रनिंग/वॉकिंग रूटीन शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से व्यक्तिगत परामर्श ज़रूर लें।
मेरठ के परीक्षितगढ़ क्षेत्र के रामनगर गांव में 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला की धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या कर दी गई. महिला घर में अकेली थीं. सुबह उनका शव चारपाई पर पड़ा मिला. घटनास्थल से सोने के जेवर गायब मिले हैं और घर का संदूक भी खुला मिला, जिससे लूटपाट के बाद हत्या की आशंका जताई जा रही है.
Meerut Murder Case: मेरठ के रामनगर गांव में एक बुजुर्ग महिला की निर्मम हत्या ने पूरे इलाके को दहला दिया है. जिस महिला को अगले ही दिन अपनी भतीजी की शादी में शामिल होना था, वह बुधवार सुबह अपने घर में मृत मिलीं. गला रेतकर की गई हत्या, गायब जेवर और खुला पड़ा संदूक कई सवाल खड़े कर रहे हैं. पुलिस लूट, रंजिश और अन्य संभावित एंगल समेत हर पहलू से मामले की जांच कर रही है.
शादी की खुशियों से पहले घर में पसरा मातम
परीक्षितगढ़ क्षेत्र के रामनगर गांव में मंगलवार देर रात हुई इस वारदात ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया. 65 वर्षीय फूल समुद्री अपने घर में अकेली रहती थीं. परिजनों के अनुसार उन्हें मंगलवार रात गांव खटकी में अपनी भतीजी की शादी में भात देने जाना था, लेकिन उससे पहले ही उनके साथ यह दर्दनाक घटना हो गई. बुधवार सुबह करीब सात बजे गांव की कुछ महिलाएं जब उनके घर पहुंचीं तो अंदर का नजारा देखकर सन्न रह गईं. फूल समुद्री चारपाई पर मृत अवस्था में पड़ी थीं. सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और पुलिस को घटना की जानकारी दी गई.
धारदार हथियार से रेता गया गला
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि महिला की हत्या धारदार हथियार से गला रेतकर की गई. शव की स्थिति और घटनास्थल के हालात को देखते हुए माना जा रहा है कि वारदात को बेहद बेरहमी से अंजाम दिया गया. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है ताकि मौत के सही कारणों और वारदात के समय का पता लगाया जा सके.
गायब मिले जेवर, खुला पड़ा था संदूक
जांच के दौरान पुलिस को कई ऐसे सुराग मिले हैं जो लूटपाट की आशंका को मजबूत करते हैं. महिला के कानों से सोने के कुंडल और गले से सोने का लॉकेट गायब पाया गया. इसके अलावा घर में रखा संदूक भी खुला मिला. प्रारंभिक अनुमान है कि बदमाश चोरी या लूट के इरादे से घर में दाखिल हुए होंगे और पहचान उजागर होने के डर से महिला की हत्या कर फरार हो गए. हालांकि पुलिस ने अभी तक किसी एक कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.
घटना के समय घर में अकेली थीं महिला
परिजनों के अनुसार फूल समुद्री के दो बेटे हैं. बड़ा बेटा अपने परिवार के साथ परीक्षितगढ़ के मवाऊ बस स्टैंड क्षेत्र में रहता है, जबकि छोटा बेटा संभल जिले में पुलिस विभाग में तैनात है. घटना के समय महिला घर में अकेली थीं. इसी वजह से आशंका जताई जा रही है कि बदमाशों ने सुनसान स्थिति का फायदा उठाकर वारदात को अंजाम दिया.
फोरेंसिक टीम और डॉग स्क्वॉड ने जुटाए सबूत
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए. फोरेंसिक विशेषज्ञों और श्वान दस्ते ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और कई अहम साक्ष्य जुटाए. पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है. साथ ही इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों और अन्य निगरानी उपकरणों की रिकॉर्डिंग भी खंगाली जा रही है ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके.
खुलासे के लिए बनाई गई विशेष टीमें
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अपराध शाखा, सर्विलांस टीम और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम गठित की है. अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी और भौतिक दोनों तरह के साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है. पुलिस का दावा है कि जल्द ही वारदात का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा. इस सनसनीखेज हत्या के बाद रामनगर गांव में भय और आक्रोश का माहौल है. ग्रामीणों का कहना है कि बुजुर्ग महिला की हत्या ने इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन से आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग की है. वहीं पुलिस का कहना है कि सभी संभावित एंगल पर जांच जारी है और जल्द ही मामले की सच्चाई सामने लाई जाएगी.
राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है. एक 21 वर्षीय कलयुगी भाई पर अपनी ही 16 साल की सगी बहन के साथ जबरन दुष्कर्म करने का गंभीर आरोप लगा है. पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर ही आरोपी भाई को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है. पुलिस के अनुसार, शराब के नशे में आरोपी भाई ने लड़की के साथ दरिंदगी की और धमकी भी दी कि अगर किसी से बताया तो जान ले लेगा.
शराब के नशे में दरिंदा बना भाई
पुलिस ने बताया कि 16 वर्षीय पीड़िता पिछले एक महीने से अपने ननिहाल में रह रही थी. बीते 26 जून की शाम को उसका 21 वर्षीय भाई मोटरसाइकिल लेकर उसे लेने ननिहाल पहुंचा था. पीड़िता के अनुसार, उसका भाई नशे की हालत में लग रहा था और उसका व्यवहार अजीब था. अनहोनी की आशंका को देखते हुए पीड़िता ने भाई से नोहर होकर चलने और घर पर पिता को फोन करने की बात कही, लेकिन आरोपी भाई ने फोन करने से मना कर दिया.
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि नोहर पहुंचने पर उसने चप्पल-जूती खरीदने का बहाना भी बनाया, ताकि किसी तरह मदद मिल सके, लेकिन आरोपी उसे जबरन मोटरसाइकिल पर बैठाकर गांव की तरफ ले गया. रास्ते में सुनसान इलाके के पास आरोपी ने मोटरसाइकिल रोक दी और पीड़िता के साथ छेड़छाड़ व गलत हरकतें करने लगा. नाबालिग बहन द्वारा विरोध करने पर भी आरोपी नहीं माना. उसने पीड़िता को डराया-धमकाया और उसकी मर्जी के खिलाफ जबरन दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया.
अगले दिन पीड़िता ने मां को बताया दर्द
दरिंदगी के बाद आरोपी ने पीड़िता को धमकी दी कि अगर उसने यह बात घर में किसी को भी बताई, तो वह उसे जान से मार देगा. खौफजदा नाबालिग डर के मारे उस दिन चुप रही और भाई के साथ घर लौट आई. अगले दिन जब पीड़िता का हौसला बढ़ा, तो उसने अपने साथ हुई इस खौफनाक आपबीती की जानकारी अपनी माता और मौसी को दी. घटना सुनकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई. इसके बाद, 28 जून 2026 को पीड़िता अपनी माता के साथ फेफाना थाने पहुंची और आरोपी भाई के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज करवाई, जिस पर पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए आरोपी को महज 24 घंटे में दबोच लिया.
क्या आप भी आए दिन पेट फूलने, कब्ज या अपच जैसी समस्याओं से परेशान रहते हैं? अगर हां, तो पपीता इसका एक बेहतरीन और सरल समाधान हो सकता है। पपीते में मौजूद खास एंजाइम भोजन को तेजी से तोड़ने और पाचन तंत्र को मजबूत बनाने का काम करते हैं। मगर सेहत के लिहाज से इसके फायदे यहीं खत्म नहीं होते। ये फल स्किन में निखार लाने से लेकर इम्यूनिटी बढ़ाने तक शरीर के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। पानी से भरपूर पपीता में फाइबर, विटामिन A, विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर होते हैं जो पाचन को दुरुस्त करते हैं और इम्यूनिटी को बूस्ट करते हैं।
आयुर्वेदिक विशेषज्ञ आचार्य बालकृष्ण के अनुसार, पपीता औषधीय गुणों से भरपूर फल है, जो पेट से लेकर आंतों तक की सफाई करता है। जिन लोगों को खाना आसानी से पचता नहीं है वो रोजाना खाने के बाद 100 ग्राम पपीता खा लें। जिन लोगों का पाचन खराब रहता है वो पपीता का सेवन सुबह खाली पेट करें फायदा होगा। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि पपीता का सेवन सेहत को कौन कौन से फायदे पहुंचाता है।
पपीता कैसे पाचन के लिए होता है अमृत
पपीते में पेपेन (Papain) नामक एंजाइम पाया जाता है, जो भोजन को पचाने में मदद करता है। जिन लोगों को अपच, गैस या कब्ज की समस्या रहती है, उनके लिए पपीता फायदेमंद साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, नियमित रूप से पपीता खाने से पुरानी कब्ज की समस्या में भी राहत मिल सकती है।
journal of Medicinal Food और U.S. National Institutes of Health (NIH) की रिसर्च में क्रोनिक कॉन्स्टिपेशन यानी पुरानी कब्ज और इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम (IBS) से पीड़ित मरीजों पर किए गए एक क्लिनिकल ट्रायल में पाया गया, जिन मरीजों को नियमित रूप से पपीते का अर्क दिया गया उनमें नतीजे चौंकाने वाले थे। Medical News Today के मुताबिक पपीते के सेवन से मरीजों का पेट साफ होने की फ्रीक्वेंसी में सुधार हुआ। मल का कड़ापन दूर हुआ और गंभीर कब्ज व पेट फूलने (Bloating) की समस्या में 70% तक की कमी दर्ज की गई।
पपीते के सेहत के लिए फायदे
पपीता का सेवन शरीर को हाइड्रेट करता है। गर्मी में बॉडी को पानी से तर रखने वाला ये फल शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है। पपीते में लगभग 88 प्रतिशत पानी होता है, इसलिए यह गर्मियों में शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता। इसका सेवन शरीर को ठंडक पहुंचाने और डिहाइड्रेशन से बचाने में मदद कर सकता है।
विटामिन C और विटामिन A से भरपूर पपीता शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करता है। इसका सेवन करने से बीमारियों से लड़ने की क्षमता मजबूत होती है। इसका नियमित सेवन संक्रमण और मौसमी बीमारियों के खतरे को कम कर सकता है। जिन लोगों का वजन ज्यादा है और वो वेट को कंट्रोल करना चाहते हैं तो वो पपीता का सेवन करें। पपीता कम कैलोरी और अधिक फाइबर वाला फल है। यह पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और वजन कंट्रोल रखने में मदद मिल सकती है।
पपीते में मौजूद फाइबर, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं। इससे दिल की सेहत में सुधार होपता है और दिल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम कम हो सकता है। विटामिन A से भरपूर पपीता आंखों की सेहत के लिए भी लाभकारी माना जाता है। इसका सेवन आंखों की सामान्य कार्यक्षमता बनाए रखने और आंखों को हेल्दी रखने में मदद कर सकता है। पपीता खाने का सही समय क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर पपीता पाचन सुधारने के उद्देश्य से खा रहे हैं तो सुबह खाली पेट इसका सेवन करना फायदेमंद हो सकता है। वहीं कुछ लोग इसे नाश्ते में या दोपहर के भोजन के बाद भी खा सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी बीमारी या स्वास्थ्य समस्या के इलाज के लिए डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
हम सभी जानते हैं कि ड्राई फ्रूट्स का सेवन सर्दियों में शरीर को गर्म रखने और एनर्जी देने में मदद करता है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि अगर ड्राई फ्रूट्स की तासीर गर्म होती है, तो क्या गर्मियों में इसका सेवन नहीं करना चाहिए? अधूरी जानकारी और सोशल मीडिया पर किए जाने वाले कई दावों के कारण लोग या तो गर्मियों में ड्राई फ्रूट्स खाना पूरी तरह बंद कर देते हैं या फिर उनका गलत तरीके से सेवन करते हैं। इससे कुछ लोगों को पेट खराब होना, एसिडिटी, अपच या शरीर में अत्यधिक गर्मी महसूस होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आपको गर्मियों में ड्राई फ्रूट्स से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए। सही मात्रा और सही तरीके से सेवन करने पर ड्राई फ्रूट्स गर्मियों में भी शरीर को जरूरी पोषक तत्व, ऊर्जा और कई तरह के फायदे पहुंचा सकते हैं।
यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के कंसल्टेंट जनरल फिजिशियन एवं डायबिटोलॉजिस्ट डॉ. रंगा संतोष कुमार के अनुसार, ड्राई फ्रूट्स केवल सर्दियों के लिए ही फायदेमंद नहीं होते, बल्कि गर्मियों में भी सही मात्रा और सही तरीके से सेवन करने पर ये शरीर को कई फायदे पहुंचा सकते हैं। उनका कहना है कि सूखे मेवे शरीर को जरूरी पोषक तत्व देते हैं साथ ही साथ कमजोरी और थकान को दूर करते हैं। बॉडी में एनर्जी के स्तर को बनाएं रखने के लिए और ओवरऑल हेल्थ को बेहतर करने के लिए गर्मी में भी ड्राई फ्रूट्स का सेवन करना जरूरी है। आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कि ड्राई फ्रूट्स के सेवन से सेहत को क्या-क्या फायदे मिलते हैं और गर्मियों में इन्हें खाने का सही तरीका क्या है।
गर्मी में बादाम खाएं
गर्मी में भीगे हुए बादाम खाना सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। बादाम में विटामिन ई, मैग्नीशियम, फाइबर और प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यह शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है। Journal of Food Science and Technology और European Journal of Nutrition के अनुसार, बादाम के छिलके में टैनिन (Tannin) होता है, जो प्रोटीन और आयरन का अवशोषण रोकता है। जब बादाम को 8 से 12 घंटे भिगोया जाता है, तो इसका फाइटिक एसिड का स्तर कम हो जाता है और लाइपेज (Lipase) नामक एंजाइम एक्टिव होता है, जो शरीर को फैट्स और विटामिन-ई को आसानी से पचाने में मदद करता है।
पिस्ता और पिस्ता खाएं
पिस्ता प्रोटीन, हेल्दी फैट, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्रोत है। भीगा हुआ पिस्ता शरीर में सूजन को कम करने और पोषण की जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकता है। काजू में हेल्दी फैट, फाइबर और कई जरूरी मिनरल्स मौजूद होते हैं। इसमें पाए जाने वाले कॉपर और जिंक जैसे पोषक तत्व इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मददगार हो सकते हैं। गर्मियों में काजू को भिगोकर खाने से इसे पचाना आसान हो जाता है।
Food Chemistry और International Journal of Food Sciences and Nutrition काजू और पिस्ता में जिंक, कॉपर और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स का जटिल ढांचा होता है। गर्मियों में इन्हें बिना भिगोए खाने से पेट में गर्मी और भारीपन हो सकता है। रिसर्च साबित करती है कि भिगोने से इनके स्टार्च और डेंस फैट्स का ब्रेकडाउन हो जाता है, जिससे यह आंतों (Gut) के लिए हल्के हो जाते हैं और इम्यून सिस्टम को तुरंत जिंक की आपूर्ति करते हैं।
अखरोट
ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर अखरोट मस्तिष्क और हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। भीगे हुए अखरोट का सेवन शरीर में सूजन को कम करने और ब्रेन हेल्थ को सपोर्ट करने में मदद कर सकता है। The American Journal of Clinical Nutrition और Nutrients Journal की रिसर्च के मुताबिक अखरोट अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (ALA) यानी प्लांट-बेस्ड ओमेगा-3 फैटी एसिड का सबसे बड़ा स्रोत है। क्लिनिकल ट्रायल्स में पाया गया है कि भीगे हुए अखरोट का सेवन धमनियों की सूजन को कम करता है, जिससे मस्तिष्क की कार्यप्रणाली (Cognitive Function) बेहतर होती है और खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) घटता है।
किशमिश और अंजीर खाएं
भीगी हुई किशमिश फाइबर, आयरन और पोटैशियम का अच्छा स्रोत होती है। इसका सेवन पाचन को बेहतर बनाने, ऊर्जा बढ़ाने और शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ति करने में मदद कर सकता है। अंजीर को पोषक तत्वों का खजाना माना जाता है। फाइबर से भरपूर भीगी हुई अंजीर पाचन को दुरुस्त रखने, शरीर की कमजोरी दूर करने और ऊर्जा बनाए रखने में मदद कर सकती है। Journal of Agricultural and Food Chemistry और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी रिपोर्ट्स के मुताबिक किशमिश और अंजीर में अघुलनशील और घुलनशील फाइबर का बेहतरीन कॉम्बिनेशन होता है। जब इन्हें भिगोया जाता है, तो ये पानी सोखकर फूल जाते हैं और आंतों में जाकर एक नेचुरल लैक्सेटिव (Laxative) की तरह काम करते हैं। रिसर्च के अनुसार, भीगी हुई किशमिश से शरीर नॉन-हीम आयरन (Non-heme Iron) को बिना भीगी किशमिश की तुलना में 40% ज्यादा तेजी से अवशोषित करता है।
खजूर
खजूर में फाइबर, पोटैशियम, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। सीमित मात्रा में इसका सेवन शरीर को ऊर्जा देने और पाचन को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकता है। International Journal of Food Sciences and Nutrition की एक समीक्षा के मुताबिक खजूर पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसी प्राकृतिक शर्करा का पावर हाउस है। गर्मियों में पसीने के जरिए शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स निकल जाते हैं। सीमित मात्रा में भीगे खजूर का सेवन शरीर में तुरंत ग्लाइकोजन के स्तर को रीस्टोर करता है, जिससे गर्मियों में होने वाली सुस्ती और डिहाइड्रेशन से बचाव होता है।
कैसे करें सेवन?
विशेषज्ञों के अनुसार, ड्राई फ्रूट्स को रातभर पानी में भिगोकर सुबह सेवन करना बेहतर माना जाता है। गर्मियों के मौसम में ड्राई फ्रूट्स को भिगोकर (Soaking) खाना आधुनिक न्यूट्रिशन साइंस और क्लिनिकल रिसर्च के मानकों पर सबसे सही और वैज्ञानिक तरीका माना गया है। सूखे मेवों में प्राकृतिक रूप से फाइटिक एसिड (Phytic Acid) और एंजाइम इन्हिबिटर्स (Enzyme Inhibitors) होते हैं, जो शरीर को इनके पोषक तत्व पूरी तरह सोखने से रोकते हैं। भिगोने से ये तत्व निकल जाते हैं, इनकी तासीर सामान्य होती है और ये आसानी से पच जाते हैं। हालांकि, इनका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, क्योंकि अधिक मात्रा में खाने से कैलोरी का सेवन बढ़ सकता है। गर्मियों में सही तरीके से और संतुलित मात्रा में खाए गए ड्राई फ्रूट्स शरीर को पोषण, ऊर्जा और कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी और एक्सपर्ट की सलाह पूरी तरह से सामान्य जागरूकता और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। जर्नल रिसर्च और डॉक्टर के सुझावों के बावजूद, हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति, पाचन तंत्र और स्वास्थ्य स्थितियां अलग हो सकती हैं। गर्मियों में अपनी डाइट में किसी भी प्रकार का बड़ा बदलाव करने या औषधीय रूप में मेवों का सेवन शुरू करने से पहले अपने व्यक्तिगत डॉक्टर या प्रमाणित डाइटिशियन (Nutritionist) से परामर्श जरूर लें।